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  • UN महासभा के बाद भी न्यूयॉर्क में रुके दो ईरानी राजनयिकों को अमेरिका ने देश छोड़ने के आदेश की अनदेखी पर निकाला

    UN महासभा के बाद भी न्यूयॉर्क में रुके दो ईरानी राजनयिकों को अमेरिका ने देश छोड़ने के आदेश की अनदेखी पर निकाला


    नई दिल्ली ।
    अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में शामिल होने के लिए न्यूयॉर्क पहुंचे ईरान के दो राजनयिकों को देश से बाहर कर दिया है। दोनों राजनयिक महासभा का सत्र समाप्त होने के बाद भी न्यूयॉर्क में रुके हुए थे। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, उन्हें पहले ही अमेरिका छोड़ने के लिए कहा गया था, लेकिन दोनों ने इन निर्देशों का पालन नहीं किया। इसके बाद उनके खिलाफ देश से निष्कासन की कार्रवाई की गई।

    बताया गया कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल के दोनों सदस्य संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाग लेने के लिए अमेरिका आए थे। अमेरिकी विदेश विभाग ने सोमवार को न्यूयॉर्क स्थित ईरानी मिशन को निर्देश दिया था कि महासभा में शामिल होने आए प्रतिनिधिमंडल के सभी सदस्य अमेरिका से रवाना हो जाएं। इसके बावजूद प्रतिनिधिमंडल के दो सदस्य महासभा समाप्त होने के काफी समय बाद तक न्यूयॉर्क में मौजूद रहे। इसी वजह से उन्हें अमेरिका से बाहर भेजने की कार्रवाई की गई।

    अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, दोनों राजनयिकों में से एक शुक्रवार रात न्यूयॉर्क से रवाना हुआ, जबकि दूसरा शनिवार सुबह वहां से गया। अधिकारियों ने बताया कि अमेरिका की ओर से दिए गए रवाना होने के आदेश की अनदेखी के कारण दोनों के खिलाफ कार्रवाई हुई। इस मामले में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के निर्देशों का भी उल्लेख किया गया है। अधिकारी ने कहा कि विदेश मंत्री अपने फैसले पर कायम हैं और ईरानी प्रतिनिधिमंडल के दोनों सदस्यों को अब अमेरिका से निकाल दिया गया है।

    यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बना हुआ है और पश्चिम एशिया में सैन्य टकराव का खतरा बढ़ने की बात सामने आ रही है। दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका की ओर से ईरानी राजनयिकों को देश से बाहर करना एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कार्रवाई का तत्काल कारण महासभा समाप्त होने के बाद भी दोनों राजनयिकों का न्यूयॉर्क में मौजूद रहना और अमेरिका छोड़ने के निर्देश का पालन नहीं करना था।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस घटनाक्रम के बीच ईरान को लेकर कड़ा रुख जाहिर किया है। उन्होंने ईरान की सैन्य और आर्थिक स्थिति को बेहद कमजोर बताया और संघर्ष जल्द खत्म होने का दावा किया। इसके साथ ही उन्होंने ईरान के लिए सख्त चेतावनी भी दी। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरानी प्रतिनिधिमंडल के दोनों सदस्यों को पहले ही देश छोड़ने का निर्देश दिया गया था, लेकिन उनके न्यूयॉर्क में बने रहने के कारण उन्हें अब अमेरिका से बाहर कर दिया गया है।

    अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा ईरानी मिशन को दिए गए निर्देश और उसके बाद हुई निष्कासन की कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि मामला केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा। महासभा में भाग लेने के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों की अमेरिका में मौजूदगी को लेकर दिए गए निर्देशों के पालन पर कार्रवाई की गई। दोनों राजनयिकों के अमेरिका से रवाना होने के साथ यह घटनाक्रम समाप्त हुआ, जबकि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है।

  • ईरान ने UN पर कसा शोले के ठाकुर वाला तंज, मीम में बताया निहत्था और बेबस, सोशल मीडिया पर चर्चा तेज

    ईरान ने UN पर कसा शोले के ठाकुर वाला तंज, मीम में बताया निहत्था और बेबस, सोशल मीडिया पर चर्चा तेज

    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनातनी के बीच ईरान ने अब संयुक्त राष्ट्र पर भी तंज कसा है। भारत में स्थित ईरानी दूतावास की ओर से सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक मीम में बॉलीवुड की चर्चित फिल्म शोले के किरदार ठाकुर बलदेव सिंह की तस्वीर का इस्तेमाल किया गया। इस मीम के जरिए संयुक्त राष्ट्र की वास्तविक प्रभावशीलता पर सवाल उठाने की कोशिश की गई है।

    ईरान पहले भी मीम के जरिए अमेरिका और उसके सहयोगियों पर निशाना साधता रहा है। अलग-अलग देशों में मौजूद ईरानी दूतावासों की ओर से सोशल मीडिया पर कई बार ऐसे पोस्ट साझा किए गए हैं, जिनमें राजनीतिक घटनाक्रम को हास्य और लोकप्रिय संस्कृति से जोड़कर संदेश देने की कोशिश की गई। इस बार संयुक्त राष्ट्र को निशाना बनाने के लिए भारतीय सिनेमा के बेहद चर्चित किरदार ठाकुर को चुना गया।

    मंगलवार को साझा किए गए इस मीम में दो अलग-अलग तस्वीरें दिखाई गई हैं। पहली तस्वीर में मार्वल के सुपरहीरो डॉक्टर स्ट्रेंज को दिखाया गया है, जिसके कई हाथ नजर आते हैं। इस तस्वीर के साथ लिखा गया है, “स्कूल की किताबों के मुताबिक यूएन।” इसके जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि आम तौर पर संयुक्त राष्ट्र को एक ऐसी शक्तिशाली वैश्विक संस्था के रूप में देखा जाता है, जो अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय मामलों में हस्तक्षेप करने और कार्रवाई करने की क्षमता रखती है।

    दूसरी तस्वीर में 1975 में रिलीज हुई चर्चित फिल्म शोले के किरदार ठाकुर बलदेव सिंह को दिखाया गया है। फिल्म की कहानी में ठाकुर के दोनों हाथ कटे हुए होते हैं। इसी तस्वीर का इस्तेमाल करते हुए मीम में लिखा गया है, “वास्तविकता में UN।” इसके माध्यम से संयुक्त राष्ट्र की वास्तविक स्थिति को एक ऐसे किरदार से जोड़ने की कोशिश की गई है, जिसके पास अपने हाथ नहीं हैं और जो परिस्थितियों के सामने असहाय नजर आता है।

    ईरान ने यह मीम ऐसे समय में साझा किया है, जब न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा का 81वां सत्र चल रहा है। इसी दौरान वैश्विक स्तर पर कई गंभीर संघर्ष और कूटनीतिक तनाव चर्चा में हैं। ईरान और अमेरिका के बीच जारी टकराव के दौरान संयुक्त राष्ट्र की ओर से तनाव कम करने और बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की अपील की जाती रही है।

    मीम के जरिए ईरानी पक्ष का संकेत यह है कि जब बड़े और शक्तिशाली देश सीधे संघर्ष में शामिल होते हैं, तब संयुक्त राष्ट्र के पास उन्हें रोकने की सीमित क्षमता रह जाती है। इसी विचार को समझाने के लिए फिल्म शोले के ठाकुर के किरदार का इस्तेमाल किया गया है। एक तस्वीर में कई हाथों वाले डॉक्टर स्ट्रेंज के जरिए संगठन की कागजी ताकत दिखाई गई है, जबकि दूसरी तस्वीर में हाथ कटे ठाकुर के जरिए उसकी कथित वास्तविक बेबसी को दर्शाने का प्रयास किया गया है।

    ईरान की इस तरह की सोशल मीडिया गतिविधियों को मीम डिप्लोमेसी के तौर पर भी देखा जाता है। इसका उद्देश्य पारंपरिक कूटनीतिक बयानों के बजाय लोकप्रिय तस्वीरों, हास्य और इंटरनेट संस्कृति के माध्यम से राजनीतिक संदेश को लोगों तक पहुंचाना होता है। इस बार भारतीय फिल्म के चर्चित किरदार को शामिल किए जाने के कारण यह मीम खास तौर पर चर्चा में आया है।

  • UNGA में जयशंकर का PAK को कड़ा संदेश, बोले- दोस्ती और सद्भावना आतंकवाद के साथ नहीं चल सकते

    UNGA में जयशंकर का PAK को कड़ा संदेश, बोले- दोस्ती और सद्भावना आतंकवाद के साथ नहीं चल सकते


    नई दिल्ली। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में आतंकवाद को लेकर भारत का रुख दोहराते हुए कहा कि आतंकवाद के खिलाफ किसी तरह की ढील नहीं दी जा सकती। उन्होंने बिना पाकिस्तान का नाम लिए कहा कि एक देश लगातार आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है और हाल ही में उसने तथ्यों को भी गलत तरीके से पेश किया।

    जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद फैलाने वालों को अपना रवैया बदलना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के साथ दोस्ती और सद्भावना की बात साथ-साथ नहीं चल सकती। भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस की नीति पर कायम है और इस मुद्दे पर लगातार अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने अपना पक्ष रखता रहा है।

    शांति और सुरक्षा के लिए बना था संयुक्त राष्ट्र
    न्यूयॉर्क में UNGA को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की स्थापना दुनिया में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के उद्देश्य से हुई थी। इसके बावजूद आज भी संघर्ष और टकराव दुनिया के सामने बड़ी चुनौतियों के रूप में मौजूद हैं।

    उन्होंने कहा कि शांति बनाए रखने में नाकामी का असर केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि विकास और प्रगति भी प्रभावित होती है। वैश्वीकृत दुनिया में किसी एक हिस्से में होने वाले युद्ध और संघर्ष का असर दूसरे हिस्सों पर भी पड़ता है। ऐसे में तनाव कम करना और संवाद के जरिए समाधान तलाशना जरूरी है।

    समुद्री कर्मचारियों और कमर्शियल शिपिंग की सुरक्षा पर जोर
    जयशंकर ने कमर्शियल शिपिंग और समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों और समुद्री कर्मचारियों को निशाना बनाना स्वीकार नहीं किया जा सकता।

    उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव कम करने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की। इससे पहले भारत और लाइबेरिया की ओर से समुद्री सुरक्षा और सीफेयरर्स की सुरक्षा को लेकर ‘ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स’ पहल पर भी जोर दिया गया है। जयशंकर ने कहा था कि दुनिया में जारी संघर्षों का असर भोजन, ईंधन, उर्वरक और वित्त जैसी बुनियादी जरूरतों पर भी पड़ रहा है।

    यूक्रेन युद्ध पर बोले- अंतहीन युद्ध खत्म होना चाहिए
    यूक्रेन में जारी संघर्ष का जिक्र करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि यह युद्ध पांचवें साल में पहुंच गया है और यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शब्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि अब अंतहीन युद्ध की समाप्ति होनी चाहिए।

    जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि संघर्षों का समाधान केवल सैन्य रास्ते से नहीं, बल्कि संवाद और कूटनीति के जरिए तलाशा जाना चाहिए। उनका संबोधन ऐसे समय हुआ है, जब संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी यूक्रेन में तत्काल युद्धविराम और लंबे समय तक कायम रहने वाली शांति की जरूरत पर जोर दे चुके हैं।

    फिलिस्तीनियों के लिए भारत की मानवीय मदद जारी
    पश्चिम एशिया की स्थिति पर जयशंकर ने कहा कि भारत फिलिस्तीनी लोगों के लिए मानवीय सहायता और राहत कार्यों में मदद कर रहा है। भारत लंबे समय से फिलिस्तीन के मुद्दे पर मानवीय सहायता और दो-राष्ट्र समाधान के समर्थन की बात करता रहा है। संयुक्त राष्ट्र में भी भारत ने स्वतंत्र, संप्रभु और व्यवहार्य फिलिस्तीनी राष्ट्र की स्थापना के साथ इजराइल के साथ शांति और सुरक्षा में रहने वाले दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन दोहराया है।

    जयशंकर ने कहा कि शांति का मतलब केवल युद्ध का खत्म होना नहीं है। यदि दुनिया लगातार खतरों और दबावों से घिरी रहेगी तो स्थिरता और सुरक्षा कमजोर होगी। स्थायी शांति के लिए स्थिरता, सुरक्षा और भरोसे का माहौल बनाना जरूरी है। इनमें से किसी भी आधार को कमजोर करने से शांति की स्थिति भी प्रभावित होगी।

    हथियार की तरह इस्तेमाल हो रही अर्थव्यवस्था और तकनीक
    विदेश मंत्री ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के दशकों बाद भी दुनिया में हर चीज को हथियार की तरह इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। प्रतिस्पर्धा की सोच हावी हो रही है और संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है।

    उन्होंने वित्त और बाजारों तक पहुंच सीमित करने, सप्लाई चेन में रुकावट डालने और तकनीक को रोकने जैसे कदमों का जिक्र किया। उनका कहना था कि ऐसे उपायों का असर सिर्फ संबंधित देशों तक नहीं रहता, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और विकास पर भी पड़ता है।

    ग्लोबल साउथ के सामने 4F का संकट
    जयशंकर ने ग्लोबल साउथ की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि विकासशील देशों के सामने चुनौतियां और गंभीर हैं। उन्होंने ‘4F’ संकट की बात कही। इसमें Food यानी भोजन, Fuel यानी ईंधन, Fertilizer यानी उर्वरक और Finance यानी वित्त शामिल हैं।

    उनके मुताबिक दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जारी संघर्षों और तनाव का सीधा असर इन चारों क्षेत्रों पर पड़ रहा है। ऐसे में वैश्विक संस्थाओं और देशों के सामने चुनौती यह है कि वे स्थिरता और भरोसे का ऐसा वातावरण तैयार करें, जिससे विकासशील देशों की बुनियादी जरूरतों और विकास पर संकट का असर कम हो।

    पश्चिम एशिया में टू-स्टेट सॉल्यूशन पर भारत का रुख
    पश्चिम एशिया में स्थायी शांति के सवाल पर जयशंकर ने कहा कि भारत का दृढ़ विश्वास है कि टू-स्टेट सॉल्यूशन यानी दो-राष्ट्र समाधान जरूरी है। इसके तहत इजराइल और फिलिस्तीन को शांति और सुरक्षा के साथ रहने का रास्ता तलाशने की बात कही जाती है।

    संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी 81वें महासभा सत्र के दौरान दो-राष्ट्र समाधान को पश्चिम एशिया में स्थायी शांति का महत्वपूर्ण आधार बता चुके हैं।

    जयशंकर के संबोधन में आतंकवाद, समुद्री सुरक्षा, यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया संकट, फिलिस्तीन को मानवीय सहायता और ग्लोबल साउथ की आर्थिक चुनौतियों जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। भारत ने इस दौरान आतंकवाद के खिलाफ अपने रुख को दोहराने के साथ वैश्विक स्तर पर शांति, स्थिरता और संवाद की जरूरत पर जोर दिया।

  • G4 देशों ने UNSC की 80 साल पुरानी संरचना में सुधार को जरूरी बताया, दिल्ली में होगी अगली समीक्षा बैठक

    G4 देशों ने UNSC की 80 साल पुरानी संरचना में सुधार को जरूरी बताया, दिल्ली में होगी अगली समीक्षा बैठक

    नई दिल्ली ।संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC में सुधार को लेकर भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान ने एक बार फिर अपनी साझा मांग दोहराई है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र से इतर 22 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में हुई G4 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में सुरक्षा परिषद की मौजूदा संरचना में जल्द सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

    बैठक में चारों देशों ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए सुरक्षा परिषद में सुधार पहले की तुलना में अधिक जरूरी हो गया है। G4 का मानना है कि परिषद की मौजूदा संरचना करीब 80 साल पुरानी है और आज की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं करती। इसी वजह से परिषद की प्रतिनिधित्व क्षमता, वैधता, विश्वसनीयता और प्रभावशीलता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

    बैठक में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा, जर्मनी के विदेश मंत्री डॉ. योहान डेविड वाडेफुल और जापान के विदेश मंत्री मोतेगी तोशिमित्सु शामिल हुए। मंत्रियों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार से जुड़ी अंतर-सरकारी वार्ताओं में हुई प्रगति और चर्चाओं की समीक्षा की।

    G4 देशों ने सुरक्षा परिषद की सदस्यता में स्थायी और गैर-स्थायी, दोनों श्रेणियों में विस्तार को सुधार प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। चारों देशों ने यह भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों के बीच दोनों श्रेणियों में सदस्यता बढ़ाने के समर्थन की व्यापक मौजूदगी है।

    अफ्रीका के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की जरूरत पर भी बैठक में जोर दिया गया। G4 देशों ने सुरक्षा परिषद को अधिक प्रतिनिधित्वकारी और प्रभावी बनाने के लिए ऐसी व्यवस्था की आवश्यकता बताई, जो वर्तमान वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियों को बेहतर तरीके से दर्शा सके।

    G4 की ओर से सुधार प्रक्रिया को जल्द आगे बढ़ाने और ठोस परिणाम हासिल करने की मांग की गई। देशों ने सुरक्षा परिषद की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव को अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में व्यापक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए अंतर-सरकारी वार्ता प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है और G4 इस प्रक्रिया में लगातार सक्रिय भूमिका निभाता रहा है।

    न्यूयॉर्क में हुई चर्चा के बाद अब G4 देशों की अगली समीक्षा बैठक दिल्ली में प्रस्तावित है। इसमें सुधार प्रक्रिया में हुई प्रगति और आगे की दिशा पर चर्चा की जाएगी। इस बैठक के जरिए चारों देश सुरक्षा परिषद में प्रतिनिधित्व बढ़ाने, स्थायी और गैर-स्थायी सदस्यता के विस्तार तथा सुधार प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से जुड़े मुद्दों पर अपने समन्वय की समीक्षा करेंगे।

    G4 देशों की बैठक ऐसे समय हुई है जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की संरचना को वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप बनाने की मांग लगातार उठ रही है। सुधार समर्थक देशों का जोर परिषद को अधिक प्रतिनिधित्वकारी, विश्वसनीय और प्रभावी बनाने पर है। G4 ने भी इसी दिशा में प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और लंबे समय से लंबित सुधार को ठोस रूप देने की आवश्यकता पर अपना रुख दोहराया है।

  • UNGA से पहले अमेरिका में एयर ट्रैफिक सिस्टम फेल, सैकड़ों उड़ानें रद्द, न्यूयॉर्क पहुंच रहे वर्ल्ड लीडर्स

    UNGA से पहले अमेरिका में एयर ट्रैफिक सिस्टम फेल, सैकड़ों उड़ानें रद्द, न्यूयॉर्क पहुंच रहे वर्ल्ड लीडर्स


    नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के लिए दुनिया भर से नेता न्यूयॉर्क पहुंच रहे हैं और इसी दौरान अमेरिका के नॉर्थईस्ट इलाके में एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम में बड़ी तकनीकी खराबी सामने आई। सोमवार को सैकड़ों उड़ानें रद्द करनी पड़ीं, जबकि हजारों फ्लाइट्स देरी से चलीं। न्यूयॉर्क के जॉन एफ. कैनेडी, लागार्डिया और नेवार्क एयरपोर्ट के साथ फिलाडेल्फिया की उड़ानें भी प्रभावित हुईं।

    तकनीकी समस्या के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वॉशिंगटन डीसी से न्यूयॉर्क की उड़ान तय समय पर रवाना हुई। अमेरिकी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) के मुताबिक, समस्या की शुरुआत सोमवार सुबह फिलाडेल्फिया के एयर ट्रैफिक कंट्रोल सेंटर में एक जरूरी सर्किट फेल होने से हुई।

    बैकअप लाइन भी निर्माण कार्य में कटी

    FAA की जांच में सामने आया कि मुख्य सर्किट के फेल होने के बाद इस्तेमाल की जाने वाली बैकअप फाइबर ऑप्टिक लाइन भी काम नहीं कर रही थी। यह लाइन न्यू जर्सी में निर्माण कार्य के दौरान कट गई थी। बैकअप लाइन न्यू ब्रंसविक और नेवार्क के बीच बिछी हुई थी।

    FAA के एडमिनिस्ट्रेटर ब्रायन बेडफोर्ड ने बताया कि मुख्य लाइन में नया सर्किट लगाने और बैकअप फाइबर लाइन की मरम्मत का काम जारी है। उनके अनुसार फाइबर लाइन की मरम्मत पूरी करने में करीब 13 घंटे लग सकते हैं।

    दोपहर तक लागार्डिया और फिलाडेल्फिया एयरपोर्ट से कुछ उड़ानों का संचालन फिर शुरू कर दिया गया था। हालांकि, अधिकारियों ने पूरे दिन बड़े पैमाने पर उड़ानों में देरी की आशंका जताई।

    2025 में भी नेवार्क पर पड़ा था असर

    जिस फिलाडेल्फिया FAA सेंटर में यह तकनीकी समस्या सामने आई है, वहां इससे पहले भी दिक्कतें सामने आ चुकी हैं। 2025 में इसी सेंटर से जुड़ी तकनीकी समस्याओं के कारण नेवार्क एयरपोर्ट पर कई बार उड़ान संचालन प्रभावित हुआ था।

    मौजूदा संकट के बीच कुछ एयरलाइंस ने यात्रियों को बिना अतिरिक्त शुल्क के अपनी उड़ान बदलने की सुविधा भी उपलब्ध कराई।

    AI से उड़ानों की निगरानी का नया सिस्टम

    FAA इस बीच एयर ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए एक नए कंप्यूटर सिस्टम की टेस्टिंग भी कर रहा है। यह सिस्टम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से उड़ानों के शेड्यूल में संभावित टकराव और मौसम से जुड़ी समस्याओं का अनुमान लगाने में मदद करेगा।

    फिलहाल इस सिस्टम का परीक्षण केवल वॉशिंगटन डीसी इलाके में किया जा रहा है। FAA के मुताबिक, इसका मौजूदा एयर ट्रैफिक तकनीकी संकट से कोई संबंध नहीं है।

    UNGA के लिए दुनिया के कई देशों के नेता न्यूयॉर्क पहुंच रहे हैं, ऐसे समय में एयर ट्रैफिक कंट्रोल में आई इस तकनीकी समस्या ने नॉर्थईस्ट अमेरिका के प्रमुख एयरपोर्ट्स पर उड़ान संचालन को प्रभावित किया है। अधिकारियों की नजर अब सिस्टम की मरम्मत और उड़ान सेवाओं को सामान्य करने पर है।

  • ईरान-हूती तनाव के बीच ट्रंप की अरब नेताओं से होगी बैठक, युद्ध की आगे की रणनीति पर होगी चर्चा

    ईरान-हूती तनाव के बीच ट्रंप की अरब नेताओं से होगी बैठक, युद्ध की आगे की रणनीति पर होगी चर्चा


    नई दिल्ली। सऊदी अरब पर हूती हमलों और ईरान के साथ जारी युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले सप्ताह खाड़ी देशों के नेताओं से मुलाकात कर सकते हैं। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान मंगलवार को प्रस्तावित इस बैठक में खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के सदस्य देशों के नेता या विदेश मंत्री शामिल हो सकते हैं। बातचीत के केंद्र में ईरान के साथ युद्ध की आगे की रणनीति के साथ खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा और युद्ध के बाद की अमेरिकी योजना रह सकती है।

    Axios ने तीन सूत्रों के हवाले से बैठक की जानकारी दी है। संभावित बैठक में सऊदी अरब, यूएई, कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान के नेता या विदेश मंत्री शामिल हो सकते हैं। हालांकि, बैठक का अंतिम एजेंडा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।

    ईरानी हमलों से खाड़ी देश भी प्रभावित

    ट्रंप की प्रस्तावित बैठक ऐसे समय हो रही है जब ईरान के साथ युद्ध के दौरान खाड़ी के उन देशों को भी ईरानी हमलों का सामना करना पड़ा है, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। इसके अलावा तेल और प्राकृतिक गैस के निर्यात में आई रुकावटों का असर इन देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ा है।

    ऐसे में अरब नेताओं के साथ बातचीत में क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक गतिविधियों से जुड़े मुद्दे भी उठ सकते हैं।

    मक्का के एयरस्पेस तक पहुंचा ड्रोन, सऊदी ने बताया ‘रेड लाइन’

    सऊदी अरब और हूतियों के बीच भी तनाव लगातार बना हुआ है। हाल में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने दावा किया था कि हूतियों की ओर से लॉन्च किए गए ड्रोन को मक्का के प्रतिबंधित एयरस्पेस में पहुंचने से पहले ही रोक दिया गया।

    सऊदी गठबंधन ने कहा था कि दो पवित्र मस्जिदों की सुरक्षा उसके लिए “रेड लाइन” है। हालांकि, हूतियों ने मक्का को निशाना बनाने के दावे को खारिज करते हुए इसे झूठ बताया था।

    इस घटनाक्रम के बाद ट्रंप और अरब नेताओं की संभावित बैठक में ईरान युद्ध के साथ हूती गतिविधियों और खाड़ी देशों की सुरक्षा पर चर्चा की संभावना भी जताई जा रही है।

    युद्ध खत्म होने के बाद की योजना पर भी नजर

    Axios के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन ईरान के साथ युद्ध के बाद की रणनीति पर भी काम कर रहा है। ट्रंप और उनकी वरिष्ठ टीम इस योजना को तैयार कर रही है और इसे अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है।

    ट्रंप ने बुधवार को कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि युद्ध अब खत्म होने के करीब है। उन्होंने यह भी दावा किया था कि ईरान समझौता करना चाहता है और अमेरिका को ईरानी पक्ष की ओर से सीधे इस संबंध में संदेश मिला है।

    हालांकि, इन बयानों के बीच युद्ध को लेकर अमेरिकी प्रशासन की अंतिम रणनीति अभी स्पष्ट नहीं है।

    विदेश विभाग ने भेजे शुरुआती निमंत्रण

    अमेरिकी विदेश विभाग ने बुधवार को संभावित बैठक के लिए शुरुआती निमंत्रण भेजे हैं। व्हाइट हाउस ने इस रिपोर्ट पर टिप्पणी करने से इनकार किया है। एक सूत्र के मुताबिक, बैठक में अन्य अरब और मुस्लिम देशों के नेताओं को भी शामिल किया जा सकता है।

    इससे बैठक का दायरा केवल GCC देशों तक सीमित रहने के बजाय व्यापक क्षेत्रीय बातचीत का रूप ले सकता है। हालांकि, अंतिम भागीदारी और एजेंडा की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।

    नेतन्याहू भी ट्रंप से मिलने की कोशिश में

    इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान न्यूयॉर्क में ट्रंप से मुलाकात करना चाहते हैं। हालांकि, एक इजरायली सूत्र के अनुसार दोनों नेताओं की बैठक अभी तय नहीं हुई है।

    पिछले साल संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ट्रंप ने आठ अरब और मुस्लिम देशों के नेताओं से मुलाकात की थी। उस दौरान उन्होंने गाजा में शांति को लेकर अपनी योजना का ड्राफ्ट उनके सामने रखा था। करीब एक सप्ताह बाद योजना सार्वजनिक की गई थी और उसके कुछ समय बाद युद्ध खत्म करने को लेकर एक समझौता हुआ था।

    अब सबकी नजर न्यूयॉर्क बैठक पर

    इस बार फिर संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ट्रंप और खाड़ी देशों के नेताओं की प्रस्तावित बैठक ऐसे वक्त हो रही है, जब ईरान युद्ध और हूती हमलों ने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित किया है।

    बैठक का अंतिम एजेंडा सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि अमेरिका ईरान के साथ जारी संघर्ष, हूती खतरे और खाड़ी देशों की सुरक्षा को लेकर कौन से मुद्दे प्राथमिकता से उठाता है। फिलहाल बातचीत में युद्ध के अगले कदम के साथ संघर्ष खत्म होने की स्थिति में अमेरिकी रणनीति पर भी चर्चा होने की संभावना है।

  • यूक्रेनी बच्चों को तुरंत बिना शर्त वापस लौटाए रूस… UNGA में प्रस्ताव पारित, वोटिंग से दूर रहा भारत

    यूक्रेनी बच्चों को तुरंत बिना शर्त वापस लौटाए रूस… UNGA में प्रस्ताव पारित, वोटिंग से दूर रहा भारत


    न्यूयॉर्क।
    संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) (United Nations General Assembly (UNGA) ने रूस पर दबाव बढ़ाते हुए एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया है। इसमें रूस से यूक्रेनी बच्चों को तुरंत और बिना शर्त वापस लौटाने की मांग की गई है। यह प्रस्ताव रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच मानवीय संकट पर केंद्रित है, जहां कथित तौर पर हजारों बच्चों को जबरन रूसी क्षेत्र में निर्वासित किया गया है। इस महत्वपूर्ण मसौदा प्रस्ताव पर बुधवार को मतदान हुआ, जिसमें भारत ने मतदान से परहेज किया।

    193 सदस्यीय महासभा में ‘यूक्रेनी बच्चों की वापसी’ शीर्षक वाले प्रस्ताव को 91 देशों ने समर्थन दिया, 12 देशों ने इसका विरोध किया और 57 देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। भारत के साथ-साथ बहरीन, बांग्लादेश, ब्राजील, चीन, मिस्र, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका ने भी वोटिंग से परहेज किया। बता दें कि यह प्रस्ताव रूसी राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा से ठीक पहले पेश किया गया था। भारत ने फिलहाल वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया।


    प्रस्ताव में क्या कहा गया?

    प्रस्ताव में युद्ध के बच्चों पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर गहरी चिंता जताई गई, विशेषकर उन यूक्रेनी बच्चों की स्थिति पर जिन्हें 2014 के बाद अपने परिवारों से अलग कर रूस-नियंत्रित इलाकों में ले जाया गया या रूस भेजा गया।


    महासभा ने रूस से मांग की कि वह-

    – जबरन ले जाए गए सभी यूक्रेनी बच्चों को तुरंत, सुरक्षित और बिना शर्त वापस भेजे।
    – बच्चों के जबरन निर्वासन, परिवारों से अलगाव, नागरिकता बदलने, दत्तक ग्रहण या फॉस्टर केयर में रखने जैसी सभी कार्रवाइयों को तुरंत रोके।
    – इस तरह के मामलों में जिम्मेदार लोगों की जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करे।

    प्रस्ताव ने रूस द्वारा 2022 के बाद किए गए उन कानूनी बदलावों पर भी आपत्ति जताई, जिनसे यूक्रेनी अनाथ बच्चों या अभिभावक-विहीन बच्चों को रूसी नागरिकता प्राप्त करने की प्रक्रिया आसान हुई है।

    यूक्रेन का दावा: 20000 से अधिक बच्चों के मामले की जांच
    यूक्रेन की उप विदेश मंत्री मारियाना बेट्सा ने महासभा में मसौदा प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि अक्टूबर 2025 तक 6395 बच्चों की जबरन ट्रांसफर/डेपोर्टेशन की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 20,000 से अधिक मामलों की जांच जारी है।


    रूस का जवाब: झूठे आरोपों से भरा प्रस्ताव

    रूस की उप स्थायी प्रतिनिधि मारिया जाबोलोत्स्काया ने मसौदा प्रस्ताव को झूठे आरोपों से भरा बताया। उन्होंने कहा कि कई बच्चे युद्ध क्षेत्रों से सुरक्षित निकाले गए हैं या अपने परिवारों से बिछड़ गए थे, जिसे उल्लंघन नहीं माना जा सकता। यूक्रेनी शरणार्थियों के लिए रूसी नागरिकता प्राप्त करने की प्रक्रिया को आसान बनाना स्वेच्छिक और बिना किसी दबाव के है। उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव के पक्ष में हर वोट झूठ, युद्ध और टकराव के समर्थन में है, जबकि विरोध में दिया गया हर वोट शांति के पक्ष में है।


    यूएन महासभा अध्यक्ष की टिप्पणी

    यूएन महासभा की अध्यक्ष अन्नालेना बैरबॉक ने कहा कि फरवरी 2022 में रूस के यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर हमले के बाद से महासभा ने लगातार अपनी आठ अलग-अलग प्रस्तावों में रूस से तत्काल और बिना शर्त वापसी की मांग की है। उन्होंने कहा- यूक्रेनी बच्चों का मामला खाली संदर्भ में नहीं देखा जा सकता। यह पूरी स्थिति रूस के आक्रमण का परिणाम है। उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध से न सिर्फ यूक्रेन बल्कि अन्य क्षेत्रों और वैश्विक स्थिरता पर भी गंभीर प्रभाव पड़ा है।