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  • UCC की दिशा में महाराष्ट्र सरकार का बड़ा कदम, हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अगुवाई में बनेगी समिति

    UCC की दिशा में महाराष्ट्र सरकार का बड़ा कदम, हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अगुवाई में बनेगी समिति


    नई दिल्ली ।
    महाराष्ट्र में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल शुरू कर दी है। सरकार कानून का प्रारूप तैयार करने के लिए दो सप्ताह के भीतर एक विशेषज्ञ समिति गठित करने की तैयारी में है। प्रस्तावित समिति की अध्यक्षता हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे और उसका मुख्य दायित्व यूसीसी से संबंधित कानूनी मसौदा तैयार करना होगा। हालांकि समिति के गठन, सदस्यों और कार्यक्षेत्र को अंतिम रूप दिया जाना अभी बाकी है।

    सरकारी स्तर पर चल रही तैयारियों के अनुसार समिति विभिन्न कानूनी, सामाजिक और प्रशासनिक पहलुओं का अध्ययन करेगी। इसके बाद राज्य में लागू किए जाने वाले संभावित कानून का विस्तृत प्रारूप तैयार किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य ऐसा मसौदा तैयार करना है, जो संवैधानिक प्रावधानों और मौजूदा कानूनी व्यवस्था के अनुरूप हो तथा सभी आवश्यक पहलुओं को समाहित कर सके।

    राज्य सरकार की ओर से पहले ही संकेत दिए जा चुके हैं कि महाराष्ट्र में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने का निर्णय नीति स्तर पर लिया जा चुका है। इसी क्रम में विधानसभा में भी सरकार ने स्पष्ट किया था कि इस दिशा में आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। प्रस्तावित समिति का गठन उसी प्रक्रिया का पहला औपचारिक चरण माना जा रहा है।

    यूनिफॉर्म सिविल कोड का उद्देश्य विवाह, तलाक, गोद लेने, उत्तराधिकार और संपत्ति के बंटवारे जैसे व्यक्तिगत नागरिक मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है। वर्तमान में इन विषयों पर विभिन्न समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं। यूसीसी का विचार इन सभी मामलों में एक समान नागरिक कानून लागू करने की अवधारणा पर आधारित है।

    सरकार का मानना है कि समान नागरिक संहिता से कानूनी व्यवस्था में एकरूपता आएगी और नागरिक अधिकारों के क्रियान्वयन में समानता सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी। साथ ही लैंगिक समानता, न्यायसंगत अधिकारों और समान अवसरों को भी इससे मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि इस विषय पर लंबे समय से विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और कानूनी स्तरों पर अलग-अलग मत भी सामने आते रहे हैं।

    विशेषज्ञ समिति के गठन के बाद उसके सुझावों और सिफारिशों के आधार पर कानून का प्रारूप तैयार किया जाएगा। इसके पश्चात सरकार आगे की विधायी प्रक्रिया अपनाएगी। यदि मसौदे को मंजूरी मिलती है तो इसे राज्य की विधानमंडलीय प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया जाएगा।

    महाराष्ट्र सरकार की इस पहल को राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम माना जा रहा है। अब सभी की नजर प्रस्तावित समिति के गठन, उसके कार्यक्षेत्र और भविष्य में तैयार होने वाले विधेयक के स्वरूप पर रहेगी, क्योंकि यही दस्तावेज राज्य में यूसीसी लागू करने की प्रक्रिया की आधारशिला साबित होगा।