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  • मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बूस्ट, वित्त मंत्री ने 40,000 करोड़ की स्कीम और ISM 2.0 का किया ऐलान

    मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बूस्ट, वित्त मंत्री ने 40,000 करोड़ की स्कीम और ISM 2.0 का किया ऐलान

    नई दिल्ली। केंद्रीय बजट 2026 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 का ऐलान किया है। इसके जरिए सरकार की कोशिश सेमीकंडक्टर क्षेत्र में उभरते अवसरों का फायदा उठाना है। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम का परिव्यय बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपए कर दिया है।

    वित्त मंत्री ने बताया कि सरकार ने इसके लिए 40,000 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं। इसके जरिए कोशिश इंडस्ट्री के नेतृत्व में सेमीकंडक्टर क्षेत्र में रिसर्च और ट्रेनिंग सेक्टर को आने बढ़ाना है।

    बजट भाषण में वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा, “भारत के सेमीकंडक्टर मिशन 1.0 ने देश की सेमीकंडक्टर क्षमताओं का विस्तार किया है। इसी आधार पर सरकार उपकरण और सामग्री उत्पादन, पूर्ण-स्टैक भारतीय बौद्धिक संपदा (आईपी) विकास और आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने के लिए आईएसएम 2.0 की शुरुआत करेगी। भारत के सेमीकंडक्टर विकास की गति का लाभ उठाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम काे परिव्यय को बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपए किया है।”

    वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा, “हम प्रौद्योगिकी और कुशल कार्यबल के विकास के लिए उद्योग-नेतृत्व वाले अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्रों पर भी ध्यान केंद्रित करेंगे। अप्रैल 2025 में 22,999 करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ शुरू की गई इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (आईएसएम) को पहले ही लक्ष्य से दोगुने निवेश की प्रतिबद्धताएं मिल चुकी हैं।”

    इसके अलावा, केंद्रीय बजट 2026-27 में लघु एवं मध्यम उद्यम (एसएमई) विकास के लिए 10,000 करोड़ रुपए के एक समर्पित कोष की शुरुआत का भी प्रस्ताव रखा गया है, जिसका उद्देश्य भविष्य में रोजगार सृजित करना और चुनिंदा मानदंडों के आधार पर उद्यमों को प्रोत्साहन देना है।

    श्रम प्रधान वस्त्र क्षेत्र के लिए वित्त मंत्री ने पांच प्रमुख घटकों वाले एक एकीकृत कार्यक्रम का प्रस्तावित किया गया है। पहला घटक – नेशनल फाइबर स्कीम है, जिसका लक्ष्य रेशम, ऊन और जूट जैसे प्राकृतिक फाइबर्स के साथ-साथ मानव निर्मित और नए औद्योगिक युग के फाइबर्स में आत्मनिर्भरता प्राप्त करना है।

    दूसरा घटक- वस्त्र विस्तार एवं रोजगार योजना, जिसका उद्देश्य मशीनरी, प्रौद्योगिकी उन्नयन और साझा परीक्षण एवं प्रमाणन केंद्रों के लिए पूंजीगत सहायता प्रदान करके पारंपरिक क्लस्टरों का आधुनिकीकरण करना है।

    तीसरा घटक राष्ट्रीय हथकरघा और हस्तशिल्प कार्यक्रम (एनएचएचपी) है, जिसे बुनकरों और कारीगरों के लिए लक्षित समर्थन सुनिश्चित करते हुए मौजूदा योजनाओं को एकीकृत और मजबूत करने के लिए डिजाइन किया गया है।

  • केंद्रीय बजट 2026: इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं, प्रक्रिया होगी और आसान

    केंद्रीय बजट 2026: इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं, प्रक्रिया होगी और आसान

    नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का तीसरा और अपने कार्यकाल का लगातार नौवां केंद्रीय बजट पेश किया। बजट 2026-27 में आम करदाताओं को लेकर सबसे बड़ा ऐलान यही रहा कि इनकम टैक्स की दरों और स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि पिछले वर्ष किए गए बड़े टैक्स सुधारों के बाद फिलहाल टैक्स स्ट्रक्चर को स्थिर रखना सरकार की प्राथमिकता है। इसका मतलब यह है कि करदाता जिस टैक्स सिस्टम के तहत अभी टैक्स चुका रहे हैं, वही व्यवस्था आगे भी लागू रहेगी।

    टैक्स सिस्टम स्थिर, लेकिन राहत पर जोर

    हालांकि टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन बजट में टैक्स भरने की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और करदाताओं के अनुकूल बनाने के लिए कई अहम कदम उठाए गए हैं। सरकार का फोकस टैक्स कंप्लायंस को आसान बनाना और अनावश्यक परेशानियों को कम करना रहा।

    रिटर्न संशोधन की समयसीमा बढ़ी

    वित्त मंत्री ने इनकम टैक्स रिटर्न में संशोधन (रिवाइज्ड रिटर्न) करने की अंतिम तारीख को 31 दिसंबर से बढ़ाकर 31 मार्च करने का प्रस्ताव रखा है। इसके लिए केवल मामूली शुल्क देना होगा। इससे उन करदाताओं को राहत मिलेगी, जिनसे रिटर्न दाखिल करते समय अनजाने में कोई गलती हो जाती है।

    अलग-अलग श्रेणियों के लिए अलग समयसीमा

    बजट में रिटर्न फाइलिंग की तारीखों को भी वर्गों के अनुसार स्पष्ट किया गया है। आईटीआर-1 और आईटीआर-2 भरने वाले करदाता पहले की तरह 31 जुलाई तक रिटर्न दाखिल कर सकेंगे। वहीं जिन कारोबारों का ऑडिट नहीं होता और ट्रस्ट्स को 31 अगस्त तक का समय दिया गया है।

    ब्याज और एनआरआई को बड़ी राहत

    टैक्सपेयर्स को राहत देते हुए वित्त मंत्री ने घोषणा की कि मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण से मिलने वाला ब्याज अब इनकम टैक्स के दायरे से बाहर रहेगा और इस पर टीडीएस भी नहीं काटा जाएगा। इसके अलावा भारत की कंपनियों को पूंजीगत सामान देने वाले एनआरआई को पांच साल तक इनकम टैक्स में छूट देने का प्रस्ताव रखा गया है।

    टीसीएस दरों में कटौती

    बजट में स्रोत पर टैक्स वसूली (TCS) को लेकर भी बड़े बदलाव किए गए हैं। विदेश यात्रा पैकेज पर लगने वाला टीसीएस 5 और 20 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया है और अब इसमें न्यूनतम राशि की कोई शर्त नहीं होगी। वहीं लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत विदेश में पढ़ाई और इलाज पर लगने वाला टीसीएस भी 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया है।

    छोटे करदाताओं के लिए ऑटोमैटिक सिस्टम

    छोटे टैक्सपेयर्स के लिए सरकार एक नया ऑटोमैटिक सिस्टम लाने जा रही है। इसके तहत कम या शून्य टैक्स कटौती का सर्टिफिकेट लेने के लिए अब टैक्स अधिकारी के पास आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी। साथ ही शेयरधारक अब फॉर्म 15G और 15H सीधे डिपॉजिटरी में जमा कर सकेंगे।

    शेयर बाजार लेनदेन महंगे

    हालांकि बजट में शेयर बाजार से जुड़े लेनदेन पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है। फ्यूचर्स पर एसटीटी 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत और ऑप्शंस पर 0.01 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत कर दिया गया है।

    कुल मिलाकर बजट 2026 में टैक्स स्लैब को स्थिर रखते हुए प्रक्रिया को सरल बनाने और लक्षित राहत देने पर सरकार का खास फोकस देखने को मिला।

  • Union Budget 2026: किस योजना में कितना पैसा खर्च होगा, बजट बनाते समय कैसे होता है तय; क्या होती है पूरी कैलकुलेशन?

    Union Budget 2026: किस योजना में कितना पैसा खर्च होगा, बजट बनाते समय कैसे होता है तय; क्या होती है पूरी कैलकुलेशन?

    नई दिल्ली। Union Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश करने वाली हैं. यह उनका लगातार नौंवा बजट होगा. यह ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितता का सामना कर रही है. इसी बीच आइए जानते हैं कि आखिर सरकार यह कैसे तय करती है कि किस योजना में कितना पैसा जाएगा.

    बजट की तैयारी 6 महीने पहले शुरू होती है

    बजट बनाने की पूरी प्रक्रिया जनवरी में शुरू नहीं होती बल्कि यह सितंबर अक्टूबर के आसपास शुरू हो जाती है. इस पूरी प्रक्रिया में वित्त मंत्रालय के तहत आर्थिक मामलों का विभाग सभी मंत्रालयों और विभागों को एक बजट सर्कुलर जारी करता है. हर मंत्रालय चल रही योजनाओं, प्रतिबद्ध देनदारियों और प्रस्तावित नई पहलों को कवर करते हुए विस्तृत व्यय अनुमान प्रस्तुत करता है. यह सभी अनुमान आगे की गणनाओं के लिए आधार डेटा बनाते हैं.

    चार मुख्य स्तंभ आवंटन तय करते हैं

    बजट आवंटन सिर्फ इस वजह से नहीं दिए जाते क्योंकि कोई मंत्रालय ज्यादा पैसे मांगता है. वित्त मंत्रालय चार प्रमुख तकनीकी मानदंडों का इस्तेमाल करके प्रस्तावों का मूल्यांकन करता है.

    पहला है पूंजी और राजस्व व्यय के बीच संतुलन. सरकार पूंजीगत व्यय को प्राथमिकता देती है. ऐसे इसलिए क्योंकि यह केवल वेतन या रखरखाव के लिए धन देने के बजाय लंबे समय की संपत्ति बनता है और विकास को बढ़ावा देता है. दूसरा है आने वाले वित्तीय वर्ष के लिए नॉमिनल जीडीपी अनुमान. सभी बजट संख्याएं जीडीपी के प्रतिशत के रूप में गणना की जाती है. इसमें वास्तविक विकास और इन्फ्लेशन दोनों शामिल है.

    तीसरा आता है राजकोषीय घाटे का लक्ष्य. सरकार कोई यह तय करना होता है कि वह अपनी आय से कितना अतिरिक्त खर्च कर सकती है. यह घाटा आमतौर पर जीडीपी के एक तय प्रतिशत पर सीमित होता है. चौथा कारक पिछला प्रदर्शन है. जिन योजनाओं ने अपने पिछले आवंटन का अच्छी तरह से इस्तेमाल कर लिया है और मापने योग्य परिणाम दिखाएं हैं उन्हें ज्यादा धन मिलने की संभावना ज्यादा होती है.

    असली बजट गणित

    एक बार जब कुल अपेक्षित राजस्व की गणना हो जाती है तो सरकार इसे 100 पैसे की तरह मानती है जिसे वितरित किया जाना चाहिए. एक बड़ा हिस्सा अनिवार्य एक्सपेंडिचर के रूप में लॉक कर दिया जाता है. अकेले ब्याज भुगतान कुल खर्च का लगभग 20% इस्तेमाल करता है. सेंट्रल टैक्स में राज्यों का हिस्सा लगभग 22% है और डिफेंस एक्सपेंडिचर लगभग 8%. सैलरी और पेंशन भी ज्यादातर नॉन नेगोशिएबल होते हैं. इन तय खर्चों का हिसाब लगाने के बाद ही सरकार तय करती है कि डेवलपमेंट स्कीम के लिए कितना पैसा बचा है.

    स्कीम की फंडिंग कैसे बांटी जाती है

    बचे हुए फंड को सेंट्रल सेक्टर स्कीम और केंद्रीय प्रायोजित स्कीम में बांटा जाता है. यहां खर्च अक्सर 60:40 या 50:50 के अनुपात में राज्यों के साथ शेयर किया जाता है. इंफ्रास्ट्रक्चर, वेलफेयर, एग्रीकल्चर, एजुकेशन और हेल्थ जैसे प्रायरिटी सेक्टर इस सीमित फाइनेंशियल दायरे में मुकाबला करते हैं.

    बजट को फाइनल करने से पहले वित्त मंत्रालय हर मंत्रालय के साथ मीटिंग करता है. यह अक्सर फाइनेंशियल लिमिट में रहने के लिए मांगों में कटौती करता है. फाइनल वर्जन को प्रधानमंत्री और केंद्रीय कैबिनेट मंजूरी देते हैं. इसके बाद बजट को संसद में अनुदान मांगों के रूप में पेश किया जाता है. यह पैसा तभी खर्च किया जा सकता है जब सांसद वोटिंग के जरिए से मंजूरी दे.

  • Budget 2026: निर्मला सीतारमण के एक के बाद एक बड़े ऐलान, जानिए किस सेक्टर को मिला क्या?

    Budget 2026: निर्मला सीतारमण के एक के बाद एक बड़े ऐलान, जानिए किस सेक्टर को मिला क्या?


    नई दिल्ली । संसद के भीतर जैसे ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण शुरू किया, देश की अर्थव्यवस्था की दिशा पर सबकी नजरें टिक गईं। बजट 2026 में उन्होंने एक के बाद एक ऐसे ऐलान किए, जिनका असर सीधे आम आदमी से लेकर उद्योग, स्टार्टअप, MSME और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर तक दिखने वाला है। कहीं मैन्युफैक्चरिंग को नई रफ्तार देने की बात हुई, तो कहीं शहरों को आर्थिक हब बनाने का रोडमैप सामने आया। आइए, बजट 2026 के बड़े ऐलानों पर नजर डालते हैं।
    बायोफॉर्मा शक्ति मिशन की शुरुआत: सरकार ने अगले पांच वर्षों के लिए 10,000 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ बायोफॉर्मा शक्ति पहल शुरू करने का ऐलान किया है, जिसका मकसद देश की बायोफार्मा क्षमताओं को नई मजबूती देना है।
    हाईटेक टूल रूम और माइनिंग कॉरिडोर: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि दो अत्याधुनिक टूल रूम स्थापित किए जाएंगे। इसके साथ ही केरल और तमिलनाडु में नए माइनिंग कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे, जिससे औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
    इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0: सरकार ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 लॉन्च करने की घोषणा की है। इसके तहत तकनीकी क्षमता बढ़ाने और कुशल मानव संसाधन तैयार करने के लिए उद्योग के नेतृत्व वाले रिसर्च और ट्रेनिंग सेंटर्स पर खास फोकस रहेगा।
    चार राज्यों में रेयर अर्थ कॉरिडोर ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे खनिज संपन्न राज्यों में समर्पित रेयर-अर्थ कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि दुर्लभ मृदा खनिजों और स्थायी चुम्बकों के उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सके।
    SME ग्रोथ फंड का ऐलान: छोटे और मझोले उद्यमों को सशक्त बनाने के लिए बजट 2026 में 10,000 करोड़ रुपये का विशेष SME ग्रोथ फंड प्रस्तावित किया गया है, जिससे रोजगार सृजन होगा और चयनित मानदंडों पर खरे उतरने वाले MSME को प्रोत्साहन मिलेगा।

  • केंद्रीय बजट 2026 से उद्योगों की बड़ी उम्मीदें; मैन्युफैक्चरिंग, पीएलआई, निर्यात और निवेश पर हो फोकस

    केंद्रीय बजट 2026 से उद्योगों की बड़ी उम्मीदें; मैन्युफैक्चरिंग, पीएलआई, निर्यात और निवेश पर हो फोकस

    नई दिल्ली। केंद्रीय बजट 2026 के पेश होने में अब कुछ ही दिन शेष हैं और इससे पहले उद्योग जगत की निगाहें सरकार की नीतियों और प्राथमिकताओं पर टिकी हुई हैं। मैन्युफैक्चरिंग से लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्यात तक, हर सेक्टर को इस बजट से बड़ी उम्मीदें हैं। इसी क्रम में जेटवर्क के को-फाउंडर और सीईओ अमृत आचार्य ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में बजट 2026 को लेकर अपनी अपेक्षाएं साझा की हैं।

    सार्वजनिक पूंजीगत खर्च बढ़ाने की जरूरत

    अमृत आचार्य का कहना है कि केंद्र सरकार को यूनियन बजट 2026 में सार्वजनिक पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) को लगातार बढ़ाते रहना चाहिए। रेलवे, सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर और सोलर एनर्जी जैसी परियोजनाओं पर सरकार का बढ़ता खर्च मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में मांग को मजबूत करता है। सरकार खुद एक बड़े खरीदार के रूप में काम करती है, जिससे घरेलू उद्योगों को सीधे ऑर्डर मिलते हैं और उत्पादन को गति मिलती है।

    इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश से रोजगार और ग्रोथ

    उन्होंने कहा कि बीते कुछ वर्षों में बजट के जरिए सार्वजनिक निवेश में लगातार बढ़ोतरी हुई है और यही रफ्तार आगे भी जारी रहनी चाहिए। इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च न सिर्फ उद्योगों को काम देता है, बल्कि रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती प्रदान करता है।

    पीएलआई ने बदली मैन्युफैक्चरिंग की तस्वीर

    अमृत आचार्य ने बताया कि सरकार का फोकस प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) जैसी नीतियों पर रहा है, जिसका मकसद भारत में घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर और ऑटो कंपोनेंट्स जैसे सेक्टरों में पीएलआई के सकारात्मक नतीजे अब साफ दिखने लगे हैं।

    अब ग्लोबल मार्केट पर हो फोकस

    उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि भारत ‘मेक इन इंडिया फॉर इंडिया’ से आगे बढ़कर ‘मेक इन इंडिया फॉर ग्लोबल मार्केट’ की दिशा में काम करे। इसके लिए निर्यातकों के लिए विशेष प्रोत्साहन योजनाएं जरूरी हैं, ताकि भारतीय कंपनियां वैश्विक बाजार में मजबूती से प्रतिस्पर्धा कर सकें।

    निर्यातकों को मिले जोखिम से सुरक्षा

    चीन का उदाहरण देते हुए आचार्य ने कहा कि वहां सरकार समर्थित बीमा और क्रेडिट स्कीम्स निर्यातकों को जोखिम से सुरक्षा देती हैं। भारत में भी ऐसी व्यवस्था की जरूरत है, जिससे अमेरिकी और अन्य वैश्विक बाजारों में निर्यात करना आसान हो।

    पूंजी की लागत घटाने पर जोर

    उन्होंने यह भी कहा कि भारत में पूंजी की लागत अभी कई देशों के मुकाबले अधिक है। यदि सरकार इसे कम करने के लिए योजनाबद्ध कदम उठाती है, तो निवेश और उद्यमिता को नई रफ्तार मिलेगी।

    डेढ़ लाइन का सार:

    बजट 2026 से उद्योग जगत को उम्मीद है कि सरकार कैपेक्स बढ़ाएगी और निर्यातकों के लिए विशेष प्रोत्साहन योजनाएं लाकर भारत की मैन्युफैक्चरिंग को वैश्विक स्तर पर मजबूत करेगी।