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  • भारत-यूके सीईटीए लागू होने के साथ आर्थिक रिश्तों को नई मजबूती, पीएम मोदी बोले- किसानों, एमएसएमई और पेशेवरों के लिए खुलेंगे व्यापक अवसर

    भारत-यूके सीईटीए लागू होने के साथ आर्थिक रिश्तों को नई मजबूती, पीएम मोदी बोले- किसानों, एमएसएमई और पेशेवरों के लिए खुलेंगे व्यापक अवसर

    नई दिल्ली । भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) के लागू होने के साथ दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को भारत-यूके साझेदारी का महत्वपूर्ण और भविष्य उन्मुख कदम बताते हुए कहा कि इससे दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, तकनीकी सहयोग और नवाचार को नई गति मिलेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि यह समझौता केवल आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दोनों देशों के नागरिकों, उद्योगों और पेशेवरों के लिए भी दीर्घकालिक अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगा।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि सीईटीए और सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट मिलकर भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच भरोसे पर आधारित संबंधों को और मजबूत बनाएंगे। उनके अनुसार इन समझौतों का उद्देश्य साझा विकास की सोच को वास्तविक परिणामों में बदलना है। इससे व्यापारिक सहयोग के साथ-साथ निवेश, अनुसंधान, तकनीक और नवाचार जैसे क्षेत्रों में भी व्यापक विस्तार देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा कि दोनों लोकतांत्रिक देशों की यह साझेदारी भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है और इससे आर्थिक सहयोग का दायरा लगातार बढ़ेगा।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विशेष रूप से किसानों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों, स्टार्टअप और उद्यमियों के लिए इस समझौते को लाभकारी बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय उत्पादों को यूनाइटेड किंगडम के बाजार में बेहतर पहुंच मिलने से निर्यात में वृद्धि होगी और घरेलू उद्योगों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती मिलेगी। इससे देश के विभिन्न क्षेत्रों में उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, नए निवेश आकर्षित होंगे और रोजगार के अवसरों का विस्तार होगा। उनका मानना है कि यह समझौता भारत के निर्यात आधारित विकास मॉडल को भी नई दिशा देगा।

    प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि तकनीकी सहयोग और पेशेवर सेवाओं के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच साझेदारी पहले की तुलना में अधिक मजबूत होगी। भारतीय आईटी, इंजीनियरिंग, वित्तीय सेवाओं और अन्य पेशेवर क्षेत्रों से जुड़े विशेषज्ञों के लिए नए अवसर उपलब्ध होंगे। सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट के लागू होने से सीमित अवधि के लिए यूनाइटेड किंगडम में कार्यरत भारतीय पेशेवरों को विशेष लाभ मिलेगा। इससे भारतीय कंपनियों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी मजबूत होगी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी भागीदारी बढ़ेगी।

    केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी इस समझौते को भारत-यूके संबंधों का मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि सीईटीए के तहत भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यात को यूनाइटेड किंगडम में जीरो-ड्यूटी एक्सेस मिलेगा, जिससे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति और मजबूत होगी। उनके अनुसार कपड़ा, चमड़ा, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग उत्पाद, समुद्री उत्पाद, रसायन, प्रोसेस्ड फूड सहित अनेक क्षेत्रों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। इसके साथ ही एमएसएमई, किसानों और विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े उद्यमों के लिए भी नए निर्यात अवसर तैयार होंगे।

    सरकार का मानना है कि यह समझौता केवल व्यापारिक आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग को नई दिशा देगा। निवेश, तकनीकी आदान-प्रदान, नवाचार, कौशल विकास और पेशेवर सेवाओं में बढ़ता सहयोग दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगा। आने वाले वर्षों में यह साझेदारी साझा समृद्धि, सतत विकास और वैश्विक आर्थिक सहयोग के नए मानक स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • भारत-यूके एफटीए लागू होते ही खुलेंगे व्यापार और निवेश के नए द्वार, शून्य शुल्क के साथ भारतीय निर्यात को मिलेगा बड़ा वैश्विक बाजार, 'विकसित भारत' अभियान को मिलेगी नई रफ्तार

    भारत-यूके एफटीए लागू होते ही खुलेंगे व्यापार और निवेश के नए द्वार, शून्य शुल्क के साथ भारतीय निर्यात को मिलेगा बड़ा वैश्विक बाजार, 'विकसित भारत' अभियान को मिलेगी नई रफ्तार

    नई दिल्ली । भारत और ब्रिटेन के बीच लागू हुआ व्यापक आर्थिक एवं मुक्त व्यापार समझौता देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। उद्योग जगत का मानना है कि यह समझौता भारत के निर्यात, निवेश, प्रौद्योगिकी सहयोग और वैश्विक व्यापारिक संबंधों को नई दिशा देगा। इसके साथ ही ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में भी यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। समझौते के प्रभाव से भारतीय उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अधिक प्रतिस्पर्धी बनने का अवसर मिलेगा, जबकि दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग का दायरा भी पहले की तुलना में अधिक व्यापक होगा।

    भारत की सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग से जुड़े संगठनों ने इस समझौते का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे डिजिटल व्यापार, नवाचार, अनुसंधान और तकनीकी सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे। विशेष रूप से आईटी और डिजिटल सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच साझेदारी मजबूत होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, क्लाउड सेवाओं और डिजिटल समाधान जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने से भारतीय कंपनियों को वैश्विक स्तर पर अपनी मौजूदगी मजबूत करने का अवसर मिलेगा।

    इस समझौते का एक महत्वपूर्ण पक्ष सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा है। नई व्यवस्था के तहत ब्रिटेन में सीमित अवधि के लिए कार्य करने वाले भारतीय पेशेवरों को वहां सामाजिक सुरक्षा अंशदान जमा नहीं करना होगा। वे निर्धारित अवधि तक भारत में ही अपना योगदान जारी रख सकेंगे। इससे भारतीय कंपनियों और उनके कर्मचारियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ कम होगा तथा अंतरराष्ट्रीय नियुक्तियों को अधिक सरल और व्यावहारिक बनाया जा सकेगा। उद्योग जगत का मानना है कि यह व्यवस्था भारतीय प्रतिभाओं की वैश्विक भागीदारी को बढ़ावा देगी।

    दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग को मजबूत बनाने के उद्देश्य से स्थापित संस्थागत मंच भी आने वाले समय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इन मंचों के माध्यम से सरकार, उद्योग और नवाचार से जुड़े संगठनों के बीच समन्वय बढ़ेगा। साथ ही डिजिटल व्यापार, प्रौद्योगिकी सुरक्षा, अनुसंधान और दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग को गति मिलेगी। इससे नई तकनीकों के विकास और उनके व्यावसायिक उपयोग के लिए बेहतर वातावरण तैयार होने की संभावना है।

    उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि भारतीय प्रौद्योगिकी कंपनियां पहले से ही ब्रिटेन में बड़े स्तर पर निवेश कर रही हैं और हजारों लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रही हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे कर्मचारियों की है जो राजधानी से बाहर विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत हैं। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था, कौशल विकास और नई तकनीकों के विस्तार को भी प्रोत्साहन मिला है। आने वाले वर्षों में यह सहयोग और अधिक व्यापक होने की संभावना जताई जा रही है।

    सरकार का कहना है कि इस समझौते के लागू होने के बाद भारत के अधिकांश निर्यात को ब्रिटेन के बाजार में शून्य शुल्क के साथ प्रवेश मिलेगा। इससे वस्तुओं और सेवाओं की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी तथा निर्यातकों को नए अवसर प्राप्त होंगे। उद्योग संगठनों का मानना है कि यह समझौता विनिर्माण, सेवाओं, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, टेक्नोलॉजी और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देगा। साथ ही भारत की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भूमिका और मजबूत होगी।

    आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौता केवल व्यापार बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को भी नई मजबूती प्रदान करेगा। बेहतर बाजार पहुंच, निवेश में वृद्धि, तकनीकी सहयोग, प्रतिभा के आदान-प्रदान और उद्योगों के विस्तार से भारत की आर्थिक विकास यात्रा को नई गति मिलने की उम्मीद है। यही कारण है कि उद्योग जगत इस समझौते को भारत की वैश्विक आर्थिक महत्वाकांक्षाओं और विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मान रहा है।

  • भारत-यूके सीईटीए लागू, भारतीय उद्योग के लिए खुले नए अवसर; फिक्की ने बताया व्यापार और निवेश को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

    भारत-यूके सीईटीए लागू, भारतीय उद्योग के लिए खुले नए अवसर; फिक्की ने बताया व्यापार और निवेश को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

    नई दिल्ली । भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) लागू होने के बाद भारतीय उद्योग जगत ने इसे देश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। उद्योग संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) का मानना है कि यह समझौता भारतीय वस्तुओं और सेवाओं के लिए नए बाजारों के द्वार खोलेगा तथा निर्यात, निवेश और औद्योगिक विकास को नई गति देगा। संगठन ने इसे भारत की वैश्विक आर्थिक भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।

    फिक्की के महासचिव अनंत स्वरूप ने समझौते के लागू होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई देते हुए कहा कि भारत-यूके सीईटीए से वस्तुओं और सेवाओं दोनों क्षेत्रों में कारोबार के नए अवसर पैदा होंगे। उनके अनुसार, नवाचार, प्रौद्योगिकी सहयोग और प्रतिभा के आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में बढ़ती साझेदारी भारतीय उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को मजबूत करेगी। उन्होंने कहा कि यह समझौता भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाने का अवसर देगा और वैश्विक मूल्य श्रृंखला में भारत की भूमिका को और सशक्त बनाएगा।

    फिक्की का कहना है कि यह समझौता भारत की मुक्त व्यापार समझौता नीति का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। संगठन के अनुसार, इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध और मजबूत होंगे तथा उद्योगों को नई तकनीकों, निवेश और वैश्विक सहयोग का लाभ मिलेगा। इसके साथ ही भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच नवाचार आधारित विकास को भी प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है, जिससे दीर्घकालिक आर्थिक विकास को गति मिल सकती है।

    फिक्की के अध्यक्ष अनंत गोयनका ने कहा कि उच्च गुणवत्ता वाली आर्थिक साझेदारियां भारत के ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उनके अनुसार, यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि औद्योगिक क्षमता बढ़ाने, वैश्विक निवेश आकर्षित करने और भारतीय उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के लिए अधिक सक्षम बनाने में भी सहायक होगा। उन्होंने कहा कि भारत तेजी से विकसित अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और ऐसे समझौते इस यात्रा को और मजबूत करेंगे।

    उद्योग संगठन का मानना है कि सीईटीए आर्थिक सहयोग के प्रति दीर्घकालिक और दूरदर्शी सोच को दर्शाता है। इससे व्यापार, निवेश, नवाचार और रोजगार के नए अवसर विकसित होने की संभावना है। साथ ही भारतीय कंपनियों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बनने और विदेशी बाजारों में अपनी पहुंच बढ़ाने का बेहतर अवसर मिलेगा। इससे घरेलू उद्योगों की उत्पादन क्षमता और प्रतिस्पर्धात्मक दक्षता में भी सुधार आने की उम्मीद जताई गई है।

    भारत-यूके व्यापार समझौता बुधवार से प्रभावी हो गया है। इसके तहत भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यात को शुल्क-मुक्त बाजार पहुंच उपलब्ध होगी, जिससे द्विपक्षीय व्यापार के लगभग पूरे मूल्य को लाभ मिलने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से वस्त्र, इंजीनियरिंग, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि उत्पाद, सूचना प्रौद्योगिकी और पेशेवर सेवाओं सहित कई क्षेत्रों को प्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर उत्पादन, सेवाओं और रोजगार की मांग बढ़ने की भी संभावना जताई जा रही है, जिससे भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच आर्थिक संबंधों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

  • भारत-यूके व्यापक व्यापार समझौते के नियम जारी, 15 जुलाई से शुरू होगा नया कारोबारी दौर, कंपनियों और निर्यातकों को मिलेंगी नई सुविधाएं

    भारत-यूके व्यापक व्यापार समझौते के नियम जारी, 15 जुलाई से शुरू होगा नया कारोबारी दौर, कंपनियों और निर्यातकों को मिलेंगी नई सुविधाएं


    नई दिल्ली। भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच हुए व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) को लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने इससे जुड़े नियमों को अधिसूचित कर दिया है। यह नया ढांचा 15 जुलाई 2026 से प्रभावी होगा और इसके साथ ही दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों के लिए नई व्यवस्था लागू हो जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे द्विपक्षीय व्यापार, निवेश, आपूर्ति श्रृंखला और औद्योगिक सहयोग को नई गति मिलेगी।

    वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, समझौते के तहत यह स्पष्ट किया गया है कि किसी उत्पाद को भारत या यूनाइटेड किंगडम में निर्मित तभी माना जाएगा, जब वह पूरी तरह संबंधित देश में तैयार किया गया हो, स्थानीय सामग्री से निर्मित हो या फिर निर्धारित उत्पाद-विशिष्ट मूल नियमों का पालन करते हुए तैयार किया गया हो। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि व्यापारिक रियायतों का लाभ केवल पात्र उत्पादों को ही प्राप्त हो।

    केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) द्वारा जारी नियमों में उन शर्तों का भी विस्तृत उल्लेख किया गया है, जिनके आधार पर किसी उत्पाद को टैरिफ रियायतों के लिए योग्य माना जाएगा। साथ ही आयातकों और निर्यातकों के लिए आवश्यक अनुपालन प्रक्रियाएं भी निर्धारित की गई हैं। इन नियमों के लागू होने से सीमा शुल्क प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और पारदर्शी बनने की उम्मीद है।

    नए प्रावधानों के तहत दोनों देशों के बीच निर्मित उत्पादों के लिए ‘क्यूमुलेशन’ यानी मिला-जुला उत्पादन व्यवस्था को भी मान्यता दी गई है। इसका अर्थ यह है कि यदि किसी उत्पाद के निर्माण में दोनों साझेदार देशों की सामग्री या उत्पादन प्रक्रिया का उपयोग किया गया है, तो निर्धारित शर्तों के तहत उसे मूल उत्पाद का दर्जा दिया जा सकेगा। इससे दोनों देशों की कंपनियों के बीच औद्योगिक सहयोग और संयुक्त विनिर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल साधारण रीपैकेजिंग, रीलेबलिंग, धुलाई, छंटाई, पॉलिशिंग, साधारण असेंबली अथवा अन्य सामान्य प्रक्रियाओं के आधार पर किसी उत्पाद को मूल उत्पाद का दर्जा नहीं मिलेगा। सीमा शुल्क अधिकारियों को ऐसे मामलों की जांच करने तथा नियमों का पालन नहीं करने वाले उत्पादों को व्यापारिक रियायतों से वंचित रखने का अधिकार भी दिया गया है। इससे समझौते के दुरुपयोग की संभावना को कम करने का प्रयास किया गया है।

    इन नियमों में उन आयातकों को भी राहत प्रदान की गई है जो आयात के समय किसी कारणवश टैरिफ लाभ का दावा नहीं कर पाए थे। निर्धारित प्रक्रिया के तहत ऐसे मामलों में बाद में भी पात्रता के आधार पर रियायत प्राप्त करने का अवसर उपलब्ध रहेगा। इससे व्यापारिक समुदाय को अधिक लचीलापन और सुविधा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-यूके सीईटीए केवल व्यापारिक शुल्कों में राहत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह निवेश, प्रौद्योगिकी सहयोग, नवाचार, विनिर्माण और पेशेवर सेवाओं के क्षेत्र में भी नए अवसर पैदा करेगा। दोनों देशों के उद्योगों के बीच साझेदारी बढ़ने से निर्यात क्षमता मजबूत होगी और भारतीय कंपनियों को विकसित अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक बेहतर पहुंच मिलेगी। 15 जुलाई से नियम लागू होने के साथ ही भारत और यूनाइटेड किंगडम के आर्थिक संबंधों में एक नए चरण की शुरुआत होने की उम्मीद है।

  • ब्रिटेन की अदालत से नीरव मोदी को बड़ा झटका, बैंक फ्रॉड मामले में 100 करोड़ रुपये से अधिक चुकाने का आदेश

    ब्रिटेन की अदालत से नीरव मोदी को बड़ा झटका, बैंक फ्रॉड मामले में 100 करोड़ रुपये से अधिक चुकाने का आदेश

    नई दिल्ली। भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को ब्रिटेन की हाईकोर्ट से बड़ा कानूनी झटका लगा है। अदालत ने बैंक धोखाधड़ी से जुड़े एक मामले में उन्हें व्यक्तिगत गारंटी के आधार पर देनदार मानते हुए बकाया राशि और ब्याज का भुगतान करने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद नीरव मोदी पर 100 करोड़ रुपये से अधिक की देनदारी आ सकती है।

    हाईकोर्ट के न्यायाधीश साइमन टिंकलर ने अपने आदेश में कहा कि नीरव मोदी द्वारा दी गई व्यक्तिगत गारंटी वैध और लागू करने योग्य है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन पर 4.1 मिलियन डॉलर (करीब 38.9 करोड़ रुपये) की मूल राशि बकाया है, जिस पर ब्याज भी जोड़ा जाएगा।

    अदालत में नहीं दे सके ठोस जवाब

    सुनवाई के दौरान नीरव मोदी या उनकी कानूनी टीम की ओर से कोई ठोस स्पष्टीकरण पेश नहीं किया गया। अपने बचाव में नीरव ने यह तर्क दिया था कि संबंधित गारंटी लागू नहीं की जा सकती और उन्हें बैंक की ओर से भेजी गई वैध मांगें प्राप्त नहीं हुई थीं।

    मामला वर्ष 2012 का है, जब बैंक ऑफ इंडिया ने नीरव मोदी की दुबई स्थित कंपनी फायरस्टार डायमंड एफजेडई को ऋण उपलब्ध कराया था। बाद में 3 अगस्त 2013 को नीरव मोदी ने इस ऋण के लिए व्यक्तिगत गारंटी दी थी।

    पीएनबी घोटाले के बाद शुरू हुई वसूली प्रक्रिया

    वर्ष 2018 में पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) से जुड़े कथित धोखाधड़ी मामले के सामने आने के बाद बैंक ऑफ इंडिया ने बकाया ऋण की वसूली की प्रक्रिया शुरू की। मार्च और अप्रैल 2018 में कंपनी और नीरव मोदी को नोटिस भेजे गए, लेकिन उनका कोई जवाब नहीं मिला।

    इसके बाद 8 मार्च 2024 को बैंक को 4.1 मिलियन डॉलर की मूल राशि और उस पर लागू ब्याज की वसूली के लिए सारांश निर्णय प्राप्त हुआ। बैंक ने अक्टूबर 2025 में नीरव मोदी को एक और मांग नोटिस भी भेजा था।

    कोर्ट ने गारंटी को माना वैध
    फैसले में न्यायाधीश टिंकलर ने उल्लेख किया कि 17 फरवरी 2018 को नीरव मोदी ने बैंक को भेजे गए एक ईमेल में मीडिया में चल रही खबरों के कारण कारोबारी गतिविधियां प्रभावित होने की बात स्वीकार की थी। उन्होंने यह भी कहा था कि समूह की कंपनियां बैंकों का बकाया चुकाने में असमर्थ हैं।

    हालांकि नीरव मोदी ने अदालत में दावा किया कि उन्हें अप्रैल 2018 और अक्टूबर 2025 के नोटिस नहीं मिले, लेकिन न्यायाधीश ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर माना कि दोनों मांग पत्र उन्हें प्राप्त हुए थे। इसी आधार पर अदालत ने व्यक्तिगत गारंटी को पूरी तरह वैध और लागू करने योग्य माना।