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  • भारत-यूके व्यापक व्यापार समझौते के नियम जारी, 15 जुलाई से शुरू होगा नया कारोबारी दौर, कंपनियों और निर्यातकों को मिलेंगी नई सुविधाएं

    भारत-यूके व्यापक व्यापार समझौते के नियम जारी, 15 जुलाई से शुरू होगा नया कारोबारी दौर, कंपनियों और निर्यातकों को मिलेंगी नई सुविधाएं


    नई दिल्ली। भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच हुए व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) को लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने इससे जुड़े नियमों को अधिसूचित कर दिया है। यह नया ढांचा 15 जुलाई 2026 से प्रभावी होगा और इसके साथ ही दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों के लिए नई व्यवस्था लागू हो जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे द्विपक्षीय व्यापार, निवेश, आपूर्ति श्रृंखला और औद्योगिक सहयोग को नई गति मिलेगी।

    वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, समझौते के तहत यह स्पष्ट किया गया है कि किसी उत्पाद को भारत या यूनाइटेड किंगडम में निर्मित तभी माना जाएगा, जब वह पूरी तरह संबंधित देश में तैयार किया गया हो, स्थानीय सामग्री से निर्मित हो या फिर निर्धारित उत्पाद-विशिष्ट मूल नियमों का पालन करते हुए तैयार किया गया हो। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि व्यापारिक रियायतों का लाभ केवल पात्र उत्पादों को ही प्राप्त हो।

    केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) द्वारा जारी नियमों में उन शर्तों का भी विस्तृत उल्लेख किया गया है, जिनके आधार पर किसी उत्पाद को टैरिफ रियायतों के लिए योग्य माना जाएगा। साथ ही आयातकों और निर्यातकों के लिए आवश्यक अनुपालन प्रक्रियाएं भी निर्धारित की गई हैं। इन नियमों के लागू होने से सीमा शुल्क प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और पारदर्शी बनने की उम्मीद है।

    नए प्रावधानों के तहत दोनों देशों के बीच निर्मित उत्पादों के लिए ‘क्यूमुलेशन’ यानी मिला-जुला उत्पादन व्यवस्था को भी मान्यता दी गई है। इसका अर्थ यह है कि यदि किसी उत्पाद के निर्माण में दोनों साझेदार देशों की सामग्री या उत्पादन प्रक्रिया का उपयोग किया गया है, तो निर्धारित शर्तों के तहत उसे मूल उत्पाद का दर्जा दिया जा सकेगा। इससे दोनों देशों की कंपनियों के बीच औद्योगिक सहयोग और संयुक्त विनिर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल साधारण रीपैकेजिंग, रीलेबलिंग, धुलाई, छंटाई, पॉलिशिंग, साधारण असेंबली अथवा अन्य सामान्य प्रक्रियाओं के आधार पर किसी उत्पाद को मूल उत्पाद का दर्जा नहीं मिलेगा। सीमा शुल्क अधिकारियों को ऐसे मामलों की जांच करने तथा नियमों का पालन नहीं करने वाले उत्पादों को व्यापारिक रियायतों से वंचित रखने का अधिकार भी दिया गया है। इससे समझौते के दुरुपयोग की संभावना को कम करने का प्रयास किया गया है।

    इन नियमों में उन आयातकों को भी राहत प्रदान की गई है जो आयात के समय किसी कारणवश टैरिफ लाभ का दावा नहीं कर पाए थे। निर्धारित प्रक्रिया के तहत ऐसे मामलों में बाद में भी पात्रता के आधार पर रियायत प्राप्त करने का अवसर उपलब्ध रहेगा। इससे व्यापारिक समुदाय को अधिक लचीलापन और सुविधा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-यूके सीईटीए केवल व्यापारिक शुल्कों में राहत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह निवेश, प्रौद्योगिकी सहयोग, नवाचार, विनिर्माण और पेशेवर सेवाओं के क्षेत्र में भी नए अवसर पैदा करेगा। दोनों देशों के उद्योगों के बीच साझेदारी बढ़ने से निर्यात क्षमता मजबूत होगी और भारतीय कंपनियों को विकसित अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक बेहतर पहुंच मिलेगी। 15 जुलाई से नियम लागू होने के साथ ही भारत और यूनाइटेड किंगडम के आर्थिक संबंधों में एक नए चरण की शुरुआत होने की उम्मीद है।

  • ब्रिटेन की अदालत से नीरव मोदी को बड़ा झटका, बैंक फ्रॉड मामले में 100 करोड़ रुपये से अधिक चुकाने का आदेश

    ब्रिटेन की अदालत से नीरव मोदी को बड़ा झटका, बैंक फ्रॉड मामले में 100 करोड़ रुपये से अधिक चुकाने का आदेश

    नई दिल्ली। भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को ब्रिटेन की हाईकोर्ट से बड़ा कानूनी झटका लगा है। अदालत ने बैंक धोखाधड़ी से जुड़े एक मामले में उन्हें व्यक्तिगत गारंटी के आधार पर देनदार मानते हुए बकाया राशि और ब्याज का भुगतान करने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद नीरव मोदी पर 100 करोड़ रुपये से अधिक की देनदारी आ सकती है।

    हाईकोर्ट के न्यायाधीश साइमन टिंकलर ने अपने आदेश में कहा कि नीरव मोदी द्वारा दी गई व्यक्तिगत गारंटी वैध और लागू करने योग्य है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन पर 4.1 मिलियन डॉलर (करीब 38.9 करोड़ रुपये) की मूल राशि बकाया है, जिस पर ब्याज भी जोड़ा जाएगा।

    अदालत में नहीं दे सके ठोस जवाब

    सुनवाई के दौरान नीरव मोदी या उनकी कानूनी टीम की ओर से कोई ठोस स्पष्टीकरण पेश नहीं किया गया। अपने बचाव में नीरव ने यह तर्क दिया था कि संबंधित गारंटी लागू नहीं की जा सकती और उन्हें बैंक की ओर से भेजी गई वैध मांगें प्राप्त नहीं हुई थीं।

    मामला वर्ष 2012 का है, जब बैंक ऑफ इंडिया ने नीरव मोदी की दुबई स्थित कंपनी फायरस्टार डायमंड एफजेडई को ऋण उपलब्ध कराया था। बाद में 3 अगस्त 2013 को नीरव मोदी ने इस ऋण के लिए व्यक्तिगत गारंटी दी थी।

    पीएनबी घोटाले के बाद शुरू हुई वसूली प्रक्रिया

    वर्ष 2018 में पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) से जुड़े कथित धोखाधड़ी मामले के सामने आने के बाद बैंक ऑफ इंडिया ने बकाया ऋण की वसूली की प्रक्रिया शुरू की। मार्च और अप्रैल 2018 में कंपनी और नीरव मोदी को नोटिस भेजे गए, लेकिन उनका कोई जवाब नहीं मिला।

    इसके बाद 8 मार्च 2024 को बैंक को 4.1 मिलियन डॉलर की मूल राशि और उस पर लागू ब्याज की वसूली के लिए सारांश निर्णय प्राप्त हुआ। बैंक ने अक्टूबर 2025 में नीरव मोदी को एक और मांग नोटिस भी भेजा था।

    कोर्ट ने गारंटी को माना वैध
    फैसले में न्यायाधीश टिंकलर ने उल्लेख किया कि 17 फरवरी 2018 को नीरव मोदी ने बैंक को भेजे गए एक ईमेल में मीडिया में चल रही खबरों के कारण कारोबारी गतिविधियां प्रभावित होने की बात स्वीकार की थी। उन्होंने यह भी कहा था कि समूह की कंपनियां बैंकों का बकाया चुकाने में असमर्थ हैं।

    हालांकि नीरव मोदी ने अदालत में दावा किया कि उन्हें अप्रैल 2018 और अक्टूबर 2025 के नोटिस नहीं मिले, लेकिन न्यायाधीश ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर माना कि दोनों मांग पत्र उन्हें प्राप्त हुए थे। इसी आधार पर अदालत ने व्यक्तिगत गारंटी को पूरी तरह वैध और लागू करने योग्य माना।