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  • सरदार पटेल की विरासत को अमेरिका में मिलेगी नई पहचान, अटलांटा में बनने जा रहा 'आयरन मैन यूनिटी बैंक'

    सरदार पटेल की विरासत को अमेरिका में मिलेगी नई पहचान, अटलांटा में बनने जा रहा 'आयरन मैन यूनिटी बैंक'


    नई दिल्ली ।भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की विरासत अब अमेरिका में एक नई पहचान हासिल करने की तैयारी में है। अटलांटा क्षेत्र में उनके नाम और विचारों से प्रेरित एक सामुदायिक बैंक स्थापित करने की योजना पर काम चल रहा है। प्रस्तावित संस्थान का नाम ‘आयरन मैन यूनिटी बैंक’ रखा गया है। इसके आयोजकों को उम्मीद है कि आवश्यक सरकारी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद अप्रैल 2027 तक बैंक की शुरुआत हो सकती है। हालांकि, फिलहाल इसकी स्थापना से जुड़ी प्रक्रियाएं पूरी होना बाकी हैं।

    कम्युनिटी लीडर डॉ. वासुदेव पटेल ने बताया कि बैंक की स्थापना की दिशा में काम किया जा रहा है। उनके अनुसार, संस्थान अगले छह महीनों में शुरू हो सकता है। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि शेष सरकारी प्रक्रियाएं अप्रैल 2027 तक पूरी कर ली जाएंगी। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह समयसीमा फिलहाल अनुमान पर आधारित है और बैंक की वास्तविक शुरुआत औपचारिक मंजूरियों पर निर्भर करेगी।

    प्रस्तावित बैंक की पहचान को सरदार पटेल के व्यक्तित्व और राष्ट्रीय एकता में उनके योगदान से जोड़ने की योजना बनाई गई है। इसके लिए बैंक के लोगो में गुजरात स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की झलक शामिल करने का प्रस्ताव है। यह प्रतीक बैंक के चेक और अन्य ब्रांडिंग सामग्री पर भी दिखाई देगा। आयोजकों का उद्देश्य बैंक की पहचान के माध्यम से ग्राहकों को भारत के एकीकरण में सरदार पटेल की ऐतिहासिक भूमिका से परिचित कराना है।

    डॉ. पटेल के अनुसार, बैंक के लोगो को देखकर अलग-अलग समुदायों के लोग इसके पीछे की कहानी जानने में रुचि दिखा सकते हैं। इससे उन्हें सरदार पटेल के योगदान और भारत को एकजुट करने में निभाई गई उनकी भूमिका के बारे में जानकारी देने का अवसर मिलेगा। इस तरह प्रस्तावित बैंक केवल वित्तीय संस्थान की पहचान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उसकी ब्रांडिंग में भारतीय इतिहास और राष्ट्रीय एकता से जुड़े प्रतीकों को भी प्रमुखता दी जाएगी।

    हालांकि, बैंक की योजना को लेकर अभी कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने नहीं आई हैं। डॉ. वासुदेव पटेल ने इसकी प्रस्तावित पूंजी, मालिकाना हक की व्यवस्था और पूरी की जाने वाली सरकारी औपचारिकताओं का विस्तृत विवरण साझा नहीं किया। ऐसे में बैंक की स्थापना, संचालन और वित्तीय ढांचे से जुड़ी अंतिम तस्वीर आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

    इस प्रस्ताव की जानकारी अटलांटा स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सामने आई। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर आयोजित किया गया था। इसमें भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा का अनावरण किया। इस प्रतिमा को अमेरिका के फेडरेशन ऑफ गुजराती एसोसिएशन्स की राष्ट्रीय टीम ने प्रायोजित किया था। संगठन के अध्यक्ष डॉ. वासुदेव पटेल ने इसकी जानकारी दी।

    सरदार वल्लभभाई पटेल स्वतंत्र भारत के पहले उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री थे। देश की आजादी के बाद विभिन्न रियासतों को भारतीय संघ में शामिल कराने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही। उनके प्रयासों से स्वतंत्र भारत के एकीकरण की प्रक्रिया को मजबूती मिली। इसी योगदान के कारण उन्हें भारत का लौह पुरुष कहा जाता है।

    गुजरात में स्थापित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी भी उनकी इसी ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है। सरदार पटेल की जयंती 31 अक्टूबर को देशभर में राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाई जाती है। अटलांटा में प्रस्तावित बैंक का नाम और प्रतीक इसी विरासत को अमेरिका में पहचान दिलाने की पहल के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इसके शुरू होने की अंतिम तारीख सरकारी मंजूरियों और बाकी प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगी।

  • राष्ट्रीय एकता दिवस पर पीएम मोदी ने सरदार पटेल को किया नमन, एकता नगर को दी 400 करोड़ रुपये की सौगात

    राष्ट्रीय एकता दिवस पर पीएम मोदी ने सरदार पटेल को किया नमन, एकता नगर को दी 400 करोड़ रुपये की सौगात

    नई दिल्ली । देश के पहले गृहमंत्री और लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती पर 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया गया। इस अवसर पर गुजरात के नर्मदा जिले स्थित एकता नगर (केवड़िया) में मुख्य राष्ट्रीय समारोह आयोजित किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां पहुंचकर दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर पुष्पांजलि अर्पित की और सरदार पटेल को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उन्होंने देशवासियों को राष्ट्रीय एकता की शपथ भी दिलाई। कार्यक्रम के साथ ही प्रधानमंत्री ने एकता नगर के विकास को गति देने के लिए 400 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया।

    प्रधानमंत्री मोदी ने एकता नगर में पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने से जुड़ी योजनाओं की शुरुआत की। इन परियोजनाओं का उद्देश्य क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। विकास योजनाओं में स्मार्ट परिवहन संपर्क व्यवस्था, हरित ऊर्जा से जुड़ी पहल, पर्यटकों की आवाजाही आसान बनाने के लिए नए वॉकवे और सुरक्षा व्यवस्था का आधुनिकीकरण शामिल है। इसके अलावा स्थानीय जनजातीय समुदायों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने से जुड़ी योजनाएं भी इन परियोजनाओं का हिस्सा हैं।

    प्रधानमंत्री ने एकता नगर के विकास और उसकी भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि यह स्थान अब केवल एक स्मारक तक सीमित नहीं है, बल्कि आत्मनिर्भरता और पर्यावरण के अनुकूल विकास के वैश्विक मॉडल के रूप में आगे बढ़ रहा है। इन परियोजनाओं के माध्यम से पर्यटन गतिविधियों को विस्तार देने के साथ स्थानीय लोगों की भागीदारी और सुविधाओं को भी बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है।

    विकास परियोजनाओं के कार्यक्रम के बाद प्रधानमंत्री ने एकता नगर में तैयार किए गए रेन फॉरेस्ट और वामन वृक्ष वाटिका का भी दौरा किया। इस दौरान उन्होंने वहां मौजूद जैव विविधता, दुर्लभ वनस्पतियों और विभिन्न पौधों की प्रजातियों के संरक्षण के लिए किए गए इंतजामों की जानकारी ली। अधिकारियों ने उन्हें इन हरित क्षेत्रों में पर्यावरण संतुलन बनाए रखने और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए किए गए प्रबंधों के बारे में बताया।

    नर्मदा नदी के साधु बेट द्वीप पर स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी सरदार वल्लभभाई पटेल को समर्पित स्मारक है। इसकी मुख्य प्रतिमा की ऊंचाई 182 मीटर यानी 597 फीट है। आधार सहित इसकी कुल ऊंचाई लगभग 240 मीटर बताई जाती है। यह अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी से लगभग दोगुनी ऊंची है। प्रसिद्ध मूर्तिकार राम वी. सुतार ने इस प्रतिमा को डिजाइन किया था, जबकि इसका निर्माण लार्सन एंड टुब्रो कंपनी ने किया। निर्माण कार्य 33 महीने में पूरा किया गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 अक्टूबर 2018 को सरदार पटेल की 143वीं जयंती के अवसर पर इस स्मारक को राष्ट्र को समर्पित किया था।

    राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह के दौरान भव्य परेड का भी आयोजन किया गया। प्रधानमंत्री ने परेड की सलामी ली। इसमें सीमा सुरक्षा बल (BSF), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) और गुजरात पुलिस के जवानों ने हिस्सा लिया। सुरक्षा बलों के दस्तों ने अनुशासन और शौर्य का प्रदर्शन किया। इसके अलावा विभिन्न राज्यों के सांस्कृतिक नृत्यों और डेयरडेविल्स जवानों के हैरतअंगेज करतबों ने समारोह को विशेष बनाया। कार्यक्रम के माध्यम से देश की सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया गया।

    समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से सरदार पटेल के आदर्शों पर चलने और देश की एकता एवं अखंडता बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद सरदार पटेल ने 562 से अधिक देसी रियासतों का विलय कर भारत को एकजुट करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी। प्रधानमंत्री ने इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए देश के 140 करोड़ नागरिकों से संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करने का संकल्प दोहराने की अपील की।

  • रक्षा बंधन से दिया एकता और भाईचारे का संदेश! न्यूयॉर्क में धर्मगुरु बोले- नफरत नहीं, इंसानियत जरूरी

    रक्षा बंधन से दिया एकता और भाईचारे का संदेश! न्यूयॉर्क में धर्मगुरु बोले- नफरत नहीं, इंसानियत जरूरी


    नई दिल्ली। दुनियाभर में बढ़ती नफरत पूर्वाग्रह हिंसा और सामाजिक विभाजन के बीच न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित यूनिवर्सल वननेस कार्यक्रम ने इंसानियत और आपसी एकता का मजबूत संदेश दिया। कार्यक्रम में यहूदी ईसाई और मुस्लिम धर्मगुरुओं सहित विभिन्न देशों के धार्मिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और लोगों से धार्मिक तथा सांस्कृतिक सीमाओं से ऊपर उठकर संवाद करुणा और सम्मान को बढ़ावा देने की अपील की। इस आयोजन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत और कई देशों के धार्मिक प्रतिनिधि भी शामिल हुए। कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही रहा कि अलग-अलग आस्थाओं के बावजूद मानवता सभी को जोड़ने वाली सबसे बड़ी कड़ी है।

    वर्ल्ड काउंसिल ऑफ रिलीजियस लीडर्स के संस्थापक महासचिव बाबा जैन ने 30 देशों के प्रमुख धर्मों से जुड़े 200 से अधिक प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के बाद तैयार किया गया कॉल टू एक्शन पेश किया। उन्होंने कहा कि धर्म के भीतर लोगों को जोड़ने और उपचार तथा मेल-मिलाप की ताकत मौजूद है लेकिन इतिहास में कई बार धर्म का इस्तेमाल लोगों को बांटने और हिंसा को उचित ठहराने के लिए भी किया गया है। उन्होंने धार्मिक नेताओं से अपने समुदायों के शब्दों शिक्षाओं संस्थाओं और परंपराओं की समीक्षा करने का आह्वान किया ताकि किसी भी प्रकार की नफरत या हिंसा को धार्मिक आधार न मिल सके।

    बाबा जैन ने कहा कि धार्मिक समुदायों को नफरत अपमान अमानवीय व्यवहार और हिंसा को सही ठहराने के लिए धर्म के इस्तेमाल को स्पष्ट रूप से अस्वीकार करना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि गहरी धार्मिक आस्था और दूसरे विश्वासों के प्रति सम्मान एक साथ कायम रह सकते हैं। उन्होंने धार्मिक नेताओं से संकट आने का इंतजार करने के बजाय पहले से ही अलग समुदायों के बीच मजबूत रिश्ते बनाने की अपील की। युवाओं को भी धार्मिक और सांस्कृतिक सीमाओं से बाहर एक दूसरे से जोड़ने पर जोर दिया गया। उनका मानना था कि जब लोग एक दूसरे को व्यक्तिगत रूप से जानने लगते हैं तो नफरत के लिए जगह कम होती जाती है।

    इमाम शरीफ ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम की वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि इसमें शामिल लोग यहां से लौटने के बाद अपने व्यवहार और समाज में क्या बदलाव लाते हैं। उन्होंने एकता को एकरूपता से अलग बताते हुए कहा कि लोगों को एक दूसरे से जुड़े रहने के लिए एक जैसा बनने की जरूरत नहीं है। अलग-अलग धार्मिक विश्वासों के बावजूद सम्मान और संवाद कायम रखा जा सकता है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि तकनीकी प्रगति के बावजूद इंसान के भीतर मौजूद नफरत पूर्वाग्रह अहंकार और समूहों में बंटने की प्रवृत्ति समाप्त नहीं हुई है।

    उन्होंने कहा कि आज नफरत सीमाओं के पार और हमारी स्क्रीन के माध्यम से पहले से कहीं ज्यादा तेजी से फैल रही है। ऐसे समय में तकनीक के बढ़ते प्रभाव के साथ इंसानियत के सामने मौजूद चुनौतियों को समझना जरूरी है। रेवरेंड थॉर्न ने भी लोगों से डर और नफरत के बजाय एक दूसरे को सुनने समझने और साथ आने का रास्ता चुनने की अपील की। उन्होंने कहा कि पद धर्म राजनीति और देशों की सीमाओं से पहले सभी लोग इंसान हैं।

    रब्बी ब्लुमेंथल ने यहूदी शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि हर इंसान में ईश्वरीय अंश मौजूद है और प्रत्येक व्यक्ति सम्मान तथा प्रेम का हकदार है। उन्होंने समाज में बढ़ते अकेलेपन को भी कई समस्याओं की एक बड़ी वजह बताया और लोगों से जुड़ाव प्रेम तथा सम्मान के रिश्ते मजबूत करने की अपील की।

    कार्यक्रम में रक्षा बंधन और राखी बांधने की परंपरा को विशेष रूप से देखभाल सुरक्षा और आपसी जिम्मेदारी के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया। लोगों को संदेश दिया गया कि भाई बहन के रिश्ते तक सीमित इस भावना को पड़ोसियों अजनबियों और अलग-अलग धार्मिक समुदायों तक भी बढ़ाया जा सकता है। इस तरह राखी को एक ऐसे मानवीय बंधन के रूप में पेश किया गया जो सुरक्षा और जिम्मेदारी की भावना के जरिए समाज में विश्वास और एकता को मजबूत कर सकता है।

  • CM डॉ. मोहन ने वंदे मातरम प्रोटोकॉल का किया स्वागत, कहा यह हमारी एकता का प्रतीक, MP में भी होगा लागू

    CM डॉ. मोहन ने वंदे मातरम प्रोटोकॉल का किया स्वागत, कहा यह हमारी एकता का प्रतीक, MP में भी होगा लागू


    भोपाल। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के लिए जारी नए प्रोटोकॉल का मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खुले दिल से स्वागत किया है। नए निर्देशों में वंदे मातरम के सभी छह छंदों को पूर्ण सम्मान के साथ गाने और राष्ट्रगान जन गण मन से पहले बजाने का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने इसे देशभक्ति और एकता का प्रतीक बताया है और कहा कि यह निर्णय राष्ट्रीय भावना को मजबूत करेगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा आज जब केंद्रीय गृह मंत्रालय ने हमारे राष्ट्रीय गीत वन्दे मातरम के लिए नए प्रोटोकॉल जारी किए हैं जिसमें सभी छह छंदों को पूर्ण सम्मान के साथ गाने और राष्ट्रीय गान से पहले बजाने का प्रावधान है तो मेरा हृदय गर्व से भर उठता है। यह न केवल बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की अमर रचना को सच्ची श्रद्धांजलि है बल्कि हमारी मातृभूमि के प्रति उस अनंत प्रेम और बलिदान की याद दिलाता है जिसने स्वतंत्रता संग्राम के योद्धाओं को प्रेरित किया।

    उन्होंने आगे कहा वन्दे मातरम हमारे दिल की धड़कन है हमारे रक्त की पुकार है यह वह गीत है जो हमें याद दिलाता है कि भारत माता की सेवा में हमारा जीवन समर्पित है। यह राष्ट्रगीत हमारी एकता का प्रतीक है। आइए हम सब मिलकर इस पवित्र गीत के माध्यम से राष्ट्र की सेवा का संकल्प लें जय हिंद जय भारत वन्दे मातरम!

    मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश में इस निर्णय का त्वरित और पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाएगा। नए दिशा-निर्देशों के तहत सरकारी कार्यक्रमों स्कूलों और अन्य औपचारिक आयोजनों में वंदे मातरम के पूरे छह छंद अनिवार्य होंगे और सभी को खड़े होकर सम्मान देना होगा।