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  • हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में आयोजित हुई मोरारी बापू की ऐतिहासिक रामकथा, भारत से पहुंचे प्रमुख साधु-संतों ने भी लिया भाग

    हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में आयोजित हुई मोरारी बापू की ऐतिहासिक रामकथा, भारत से पहुंचे प्रमुख साधु-संतों ने भी लिया भाग

    नई दिल्ली ।अमेरिका के कैम्ब्रिज स्थित प्रतिष्ठित हार्वर्ड विश्वविद्यालय के सैंडर्स थिएटर में आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला, जहां प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु मोरारी बापू द्वारा नौ दिवसीय रामकथा का आयोजन किया गया। इस विशेष कथा में भारत के विभिन्न प्रमुख तीर्थ स्थलों से आए बड़ी संख्या में साधु-संतों और विद्वानों ने सहभागिता की। कथा के दौरान विश्वविद्यालय प्रांगण में गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती भी पूरे श्रद्धाभाव के साथ मनाई गई।

    नौ दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम की शुरुआत 15 अगस्त को हुई, जिसका समापन 23 अगस्त को होगा। इस आयोजन के दौरान शिक्षाविदों और आचार्यों के बीच तीन दिवसीय विशेष विद्वत चर्चा का भी आयोजन किया गया। मोरारी बापू ने कथा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सावन के पवित्र महीने में तुलसी जयंती के अवसर पर यह आयोजन ज्ञान, सत्य, प्रेम और करुणा के मूलभूत सिद्धांतों को उजागर करने के उद्देश्य से किया गया है।

    विश्वविद्यालय के लक्ष्मी मित्तल एंड फैमिली साउथ एशिया इंस्टीट्यूट की फैकल्टी डायरेक्टर प्रोफेसर डायना ने इस अवसर पर कहा कि भगवान राम की अयोध्या से शुरू होकर रामेश्वरम तक की 14 वर्षों की यात्रा ने भारतीय उपमहाद्वीप में पवित्र सांस्कृतिक स्थलों का निर्माण किया है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि रामलीला और रामचरितमानस की परंपरा भारत की सीमाओं से निकलकर थाईलैंड, इंडोनेशिया और कंबोडिया जैसे देशों तक विस्तृत हुई है।

    समारोह में पहुंचे अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने विश्वविद्यालय के आदर्श वाक्य ‘वेरिटास’ यानी सत्य की तुलना भारतीय दर्शन के सत्य, प्रेम और करुणा के मूल्यों से की। वक्ताओं ने कहा कि यह आयोजन दुनिया की सबसे प्राचीन पाठ और वाचन परंपराओं को दुनिया के शीर्ष शिक्षण संस्थानों के साथ जोड़ने का एक अनूठा प्रयास है।

    मोरारी बापू द्वारा वर्ष 2010 में तुलसी जयंती के अवसर पर शुरू की गई इस विशेष पहल का मुख्य उद्देश्य सनातन संस्कृति, ज्ञान परंपरा और रामचरितमानस के संदेशों को वैश्विक पटल पर संरक्षित और प्रसारित करना है। इससे पूर्व भी वे कैलाश मानसरोवर, वेटिकन सिटी, संयुक्त राष्ट्र संघ और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय जैसे ऐतिहासिक स्थानों पर रामकथा का आयोजन कर चुके हैं।

    हार्वर्ड में आयोजित इस कार्यक्रम में अयोध्या, वाराणसी और चित्रकूट जैसे आध्यात्मिक केंद्रों से पहुंचे साधु- संन्यासियों की उपस्थिति ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। मध्य प्रदेश सहित भारत के विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने भी इस वैश्विक आयोजन में अपनी सहभागिता दर्ज कराई। इस आयोजन को वैश्विक मंच पर भारतीय संस्कृति और दर्शन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • चित्रकूट विश्वविद्यालय में भव्य दीक्षा समारोह, 2377 विद्यार्थियों को मिली उपाधियां, रामभद्राचार्य ने दिया प्रेरक संदेश

    चित्रकूट विश्वविद्यालय में भव्य दीक्षा समारोह, 2377 विद्यार्थियों को मिली उपाधियां, रामभद्राचार्य ने दिया प्रेरक संदेश


    नई दिल्ली। चित्रकूट स्थित जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय में नवम दीक्षा समारोह का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें कुल 2377 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इस अवसर पर दिव्यांग विद्यार्थियों की उपलब्धियों की विशेष सराहना की गई और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को प्रेरणादायक बताया गया।

    समारोह में 140 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक, 6 विद्यार्थियों को कुलाधिपति पदक तथा 50 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के आजीवन कुलाधिपति जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने की।

    मुख्य अतिथि नरेंद्र कश्यप ने दिव्यांग विद्यार्थियों की मेहनत और सफलता की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह विश्वविद्यालय समाज में प्रेरणा का केंद्र बन रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय के विकास और वैश्विक पहचान दिलाने के लिए हर संभव सहयोग का आश्वासन भी दिया।

    इस अवसर पर सुहास एलवाई और अजीत कुमार को मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। समारोह में विद्यार्थियों, शिक्षकों और अतिथियों की बड़ी संख्या मौजूद रही।

    अपने संबोधन में रामभद्राचार्य ने कहा कि सच्ची दीक्षा वही है, जो व्यक्ति को केवल ज्ञान ही नहीं देती, बल्कि उसे राष्ट्र और समाज के उत्थान के लिए प्रेरित भी करती है। उन्होंने विद्यार्थियों से जीवन में अनुशासन, सेवा और समर्पण को अपनाने का आह्वान किया।

  • नेपाल में ‘सिस्टम क्लीनअप’: PM बालेंद्र शाह ने एक झटके में 1594 राजनीतिक नियुक्तियां रद्द

    नेपाल में ‘सिस्टम क्लीनअप’: PM बालेंद्र शाह ने एक झटके में 1594 राजनीतिक नियुक्तियां रद्द


    नई दिल्ली। नेपाल की राजनीति में एक बड़े फैसले ने हलचल मचा दी है। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने एक झटके में देशभर में की गई 1594 राजनीतिक नियुक्तियों को रद्द कर दिया है। कैबिनेट की मंजूरी और राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल की स्वीकृति के बाद यह फैसला लागू होते ही करीब 150 सरकारी और सार्वजनिक संस्थानों में बैठे पदाधिकारी तत्काल प्रभाव से पदमुक्त हो गए।

    सरकार ने इस कदम को “सिस्टम सुधार” और पारदर्शिता की दिशा में बड़ा बदलाव बताया है। अध्यादेश के जरिए करीब 110 कानूनों में संशोधन कर यह सुनिश्चित किया गया कि पहले की सभी राजनीतिक नियुक्तियां, चाहे उनकी अवधि या शर्त कुछ भी रही हो, स्वतः समाप्त मानी जाएं। इसका असर शिक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा, एविएशन, मीडिया और सांस्कृतिक संस्थानों समेत कई अहम क्षेत्रों पर पड़ा है।

    सबसे बड़ा झटका देश के विश्वविद्यालयों को लगा है, जहां उपकुलपति, रजिस्ट्रार और अन्य शीर्ष पदों पर बैठे अधिकारी हटाए गए हैं। इसी तरह स्वास्थ्य क्षेत्र में मेडिकल कॉलेजों, काउंसिल्स और रिसर्च संस्थानों के प्रमुख पदाधिकारी भी पदमुक्त कर दिए गए हैं। नेपाल मेडिकल काउंसिल, नेपाल पर्यटन बोर्ड और नेपाल नागरिक उड्डयन प्राधिकरण जैसे बड़े संस्थान भी इस फैसले की जद में आए हैं।

    यह कार्रवाई केवल प्रशासनिक ढांचे तक सीमित नहीं रही, बल्कि शांति प्रक्रिया से जुड़े आयोगों तक पहुंच गई। माओवादी संघर्ष के बाद गठित सत्य निरूपण और बेपत्ता व्यक्तियों की जांच से जुड़े निकायों के पदाधिकारी भी हटा दिए गए हैं, जिससे इस फैसले की व्यापकता और भी साफ हो जाती है।

    सरकार का दावा है कि इससे राजनीतिक दखल कम होगा और संस्थानों की कार्यप्रणाली अधिक पेशेवर बनेगी। हालांकि विपक्ष इसे सत्ता का केंद्रीकरण और संस्थानों पर नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश बता रहा है। ऐसे में यह फैसला नेपाल की राजनीति में आने वाले दिनों में बड़ा मुद्दा बनने की पूरी संभावना है।