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  • चित्रकूट विश्वविद्यालय में भव्य दीक्षा समारोह, 2377 विद्यार्थियों को मिली उपाधियां, रामभद्राचार्य ने दिया प्रेरक संदेश

    चित्रकूट विश्वविद्यालय में भव्य दीक्षा समारोह, 2377 विद्यार्थियों को मिली उपाधियां, रामभद्राचार्य ने दिया प्रेरक संदेश


    नई दिल्ली। चित्रकूट स्थित जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय में नवम दीक्षा समारोह का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें कुल 2377 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इस अवसर पर दिव्यांग विद्यार्थियों की उपलब्धियों की विशेष सराहना की गई और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को प्रेरणादायक बताया गया।

    समारोह में 140 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक, 6 विद्यार्थियों को कुलाधिपति पदक तथा 50 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के आजीवन कुलाधिपति जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने की।

    मुख्य अतिथि नरेंद्र कश्यप ने दिव्यांग विद्यार्थियों की मेहनत और सफलता की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह विश्वविद्यालय समाज में प्रेरणा का केंद्र बन रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय के विकास और वैश्विक पहचान दिलाने के लिए हर संभव सहयोग का आश्वासन भी दिया।

    इस अवसर पर सुहास एलवाई और अजीत कुमार को मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। समारोह में विद्यार्थियों, शिक्षकों और अतिथियों की बड़ी संख्या मौजूद रही।

    अपने संबोधन में रामभद्राचार्य ने कहा कि सच्ची दीक्षा वही है, जो व्यक्ति को केवल ज्ञान ही नहीं देती, बल्कि उसे राष्ट्र और समाज के उत्थान के लिए प्रेरित भी करती है। उन्होंने विद्यार्थियों से जीवन में अनुशासन, सेवा और समर्पण को अपनाने का आह्वान किया।

  • नेपाल में ‘सिस्टम क्लीनअप’: PM बालेंद्र शाह ने एक झटके में 1594 राजनीतिक नियुक्तियां रद्द

    नेपाल में ‘सिस्टम क्लीनअप’: PM बालेंद्र शाह ने एक झटके में 1594 राजनीतिक नियुक्तियां रद्द


    नई दिल्ली। नेपाल की राजनीति में एक बड़े फैसले ने हलचल मचा दी है। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने एक झटके में देशभर में की गई 1594 राजनीतिक नियुक्तियों को रद्द कर दिया है। कैबिनेट की मंजूरी और राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल की स्वीकृति के बाद यह फैसला लागू होते ही करीब 150 सरकारी और सार्वजनिक संस्थानों में बैठे पदाधिकारी तत्काल प्रभाव से पदमुक्त हो गए।

    सरकार ने इस कदम को “सिस्टम सुधार” और पारदर्शिता की दिशा में बड़ा बदलाव बताया है। अध्यादेश के जरिए करीब 110 कानूनों में संशोधन कर यह सुनिश्चित किया गया कि पहले की सभी राजनीतिक नियुक्तियां, चाहे उनकी अवधि या शर्त कुछ भी रही हो, स्वतः समाप्त मानी जाएं। इसका असर शिक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा, एविएशन, मीडिया और सांस्कृतिक संस्थानों समेत कई अहम क्षेत्रों पर पड़ा है।

    सबसे बड़ा झटका देश के विश्वविद्यालयों को लगा है, जहां उपकुलपति, रजिस्ट्रार और अन्य शीर्ष पदों पर बैठे अधिकारी हटाए गए हैं। इसी तरह स्वास्थ्य क्षेत्र में मेडिकल कॉलेजों, काउंसिल्स और रिसर्च संस्थानों के प्रमुख पदाधिकारी भी पदमुक्त कर दिए गए हैं। नेपाल मेडिकल काउंसिल, नेपाल पर्यटन बोर्ड और नेपाल नागरिक उड्डयन प्राधिकरण जैसे बड़े संस्थान भी इस फैसले की जद में आए हैं।

    यह कार्रवाई केवल प्रशासनिक ढांचे तक सीमित नहीं रही, बल्कि शांति प्रक्रिया से जुड़े आयोगों तक पहुंच गई। माओवादी संघर्ष के बाद गठित सत्य निरूपण और बेपत्ता व्यक्तियों की जांच से जुड़े निकायों के पदाधिकारी भी हटा दिए गए हैं, जिससे इस फैसले की व्यापकता और भी साफ हो जाती है।

    सरकार का दावा है कि इससे राजनीतिक दखल कम होगा और संस्थानों की कार्यप्रणाली अधिक पेशेवर बनेगी। हालांकि विपक्ष इसे सत्ता का केंद्रीकरण और संस्थानों पर नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश बता रहा है। ऐसे में यह फैसला नेपाल की राजनीति में आने वाले दिनों में बड़ा मुद्दा बनने की पूरी संभावना है।