Tag: UP Assembly Election 2027
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सपा के साथ गठबंधन पर इमरान मसूद का दोटूक संदेश, बोले- कांग्रेस मजबूती से लड़ेगी चुनाव, पार्टी को खड़ा करना मेरी पहली प्राथमिकता
उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन तथा सीटों के बंटवारे को लेकर सियासी चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच उत्तर प्रदेश कांग्रेस के नवनियुक्त कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद ने गठबंधन की रणनीति और पार्टी की चुनावी तैयारियों पर अपना रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सपा के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ना चाहती है लेकिन यह समझौता सम्मानजनक होना चाहिए। पार्टी ऐसा कोई समझौता नहीं करेगी जिससे यह संदेश जाए कि कांग्रेस ने आत्मसमर्पण कर दिया है। मसूद के मुताबिक कांग्रेस उत्तर प्रदेश में मजबूती के साथ चुनाव लड़ेगी और सरकार बनाने का लक्ष्य रखेगी।लखनऊ स्थित कांग्रेस कार्यालय में 11 अक्टूबर को पदभार ग्रहण समारोह के दौरान हुए हंगामे पर भी इमरान मसूद ने प्रतिक्रिया दी। कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की और जूते-चप्पल चलने की खबरें सामने आई थीं। इस विवाद पर पूछे गए सवाल के जवाब में मसूद ने कहा कि कभी-कभी कार्यकर्ताओं से गलतियां हो जाती हैं। उन्होंने पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के योगदान को भी महत्वपूर्ण बताया। मसूद ने कहा कि पिछले चुनाव में अजय राय ने मेहनत करके पार्टी को खड़ा करने का काम किया था और उनके योगदान को किसी भी स्थिति में कम करके नहीं आंका जाना चाहिए।समाजवादी पार्टी के साथ सीटों के बंटवारे को लेकर चल रही चर्चाओं पर मसूद ने कहा कि इस बारे में अंतिम फैसला पार्टी का नेतृत्व करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस की कोशिश सम्मानजनक समझौते की है ताकि गठबंधन मजबूत बना रहे। सीटों की संख्या को लेकर अलग-अलग चर्चाओं के बीच उन्होंने किसी निश्चित आंकड़े पर मुहर नहीं लगाई। मसूद के अनुसार अभी बातचीत की प्रक्रिया आगे बढ़नी है और उम्मीदवारों की सूची को लेकर भी समाजवादी पार्टी की ओर से कोई औपचारिक मांग नहीं की गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अक्टूबर के आखिर तक सूची को अंतिम रूप देने की दिशा में प्रयास किए जा सकते हैं।जब उनसे पूछा गया कि यदि गठबंधन नहीं हुआ तो क्या कांग्रेस सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी तो उन्होंने कहा कि फिलहाल इस तरह की संभावना पर विचार करने की जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक गठबंधन कायम है और पार्टी इसी आधार पर आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में चुनावी माहौल कांग्रेस के लिए अनुकूल है और पार्टी 2027 में मजबूत प्रदर्शन करने की तैयारी कर रही है।पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस केवल दो सीटों पर सिमट गई थी। इस बार पार्टी के लक्ष्य पर बोलते हुए मसूद ने कहा कि राजनीति में परिस्थितियां तेजी से बदलती हैं। उन्होंने दिल्ली की राजनीति और आम आदमी पार्टी के पिछले चुनावी प्रदर्शन का उदाहरण देते हुए कहा कि राजनीतिक नैरेटिव चुनाव के नतीजों पर असर डाल सकता है। मसूद का दावा है कि राहुल गांधी ने देशभर में जिस तरह का नैरेटिव खड़ा किया है उससे कांग्रेस की स्थिति पहले के मुकाबले मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि इंडिया गठबंधन के सहयोगी भी राहुल गांधी के साथ खड़े हैं।इमरान मसूद ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिकता किसी सरकारी पद या मुख्यमंत्री अथवा उपमुख्यमंत्री बनने की नहीं है। उन्होंने कहा कि वह किसी पद के उम्मीदवार नहीं हैं और उनका काम संगठन को मजबूत करना तथा पार्टी को चुनाव के लिए तैयार करना है। कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने पर उन्होंने इसे पार्टी का भरोसा बताया और कहा कि वह इस उम्मीद पर खरा उतरने की कोशिश करेंगे। टिकट वितरण में अपनी भूमिका को लेकर उन्होंने कहा कि इसका फैसला भी पार्टी नेतृत्व ही करेगा।मसूद ने कांग्रेस की राजनीति पर उठने वाले सवालों का जवाब देते हुए कहा कि पार्टी सभी वर्गों को साथ लेकर चलने में विश्वास करती है। उनके अनुसार अब सबसे बड़ी चुनौती संगठन को मजबूत करना और आगामी विधानसभा चुनाव में अधिक से अधिक सीटें जीतने के लिए कार्यकर्ताओं को एकजुट करना है। ऐसे में कांग्रेस और सपा के बीच सीटों के बंटवारे पर होने वाली बातचीत आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति की अहम कड़ी बन सकती है। -

यूपी में भाजपा की कमजोर सीटों पर सहयोगियों की नजर, लगातार हार वाली सीटों पर बढ़ाई सक्रियता
मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भाजपा के सहयोगी दल उन सीटों पर अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ा रहे हैं, जहां भाजपा लंबे समय से जीत के लिए संघर्ष करती रही है या उसका प्रदर्शन कमजोर रहा है। सीटों के बंटवारे की तस्वीर साफ होने से पहले राष्ट्रीय लोक दल (रालोद), रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले), अपना दल (एस), निषाद पार्टी और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) ने ऐसे क्षेत्रों में सम्मेलन और दूसरे कार्यक्रम शुरू कर दिए हैं। मुरादाबाद समेत मंडल की उन सीटों पर भी सहयोगी दलों की नजर है, जहां भाजपा को लगातार हार का सामना करना पड़ा है या जीत का अंतर बेहद कम रहा है।मुरादाबाद में भाजपा का रिकॉर्ड कमजोर
मुरादाबाद जिले की छह विधानसभा सीटों में 2022 के चुनाव में भाजपा को केवल मुरादाबाद नगर सीट पर जीत मिली थी। इससे पहले 2017 में पार्टी मुरादाबाद नगर और कांठ सीट जीतने में कामयाब रही थी। 2012 के चुनाव में भाजपा के खाते में सिर्फ ठाकुरद्वारा सीट आई थी।उपचुनावों को अलग रखकर देखें तो मुरादाबाद देहात और बिलारी ऐसी सीटें हैं, जहां भाजपा को इन तीन विधानसभा चुनावों में जीत नहीं मिली। वहीं 2014 में हुए उपचुनाव के बाद ठाकुरद्वारा सीट भी भाजपा के हाथ से निकल गई।
सहयोगी दलों ने शुरू की चुनावी तैयारियां
उत्तर प्रदेश में एनडीए गठबंधन में राष्ट्रीय लोक दल, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी, अपना दल (एस) और निषाद पार्टी प्रमुख सहयोगी दल हैं। रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) केंद्र में भाजपा की सहयोगी है। 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए ये दल सीटों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की तैयारी में सक्रिय हो गए हैं।मंडल की उन सीटों पर खास फोकस किया जा रहा है, जहां भाजपा लंबे समय से जीत हासिल नहीं कर सकी है। सहयोगी दलों ने मुरादाबाद जिले में अलग-अलग कार्यक्रमों के जरिए संगठन और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना शुरू कर दिया है। कार्यकर्ता सम्मेलन, क्षेत्रीय सम्मेलन और अति पिछड़ा सम्मेलन के जरिए ये दल अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटे हैं। कुछ सहयोगी दल इन सीटों पर अपनी दावेदारी भी जता रहे हैं।
मंडल की उन सीटों पर खास फोकस किया जा रहा है, जहां भाजपा लंबे समय से जीत हासिल नहीं कर सकी है। सहयोगी दलों ने मुरादाबाद जिले में अलग-अलग कार्यक्रमों के जरिए संगठन और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना शुरू कर दिया है। कार्यकर्ता सम्मेलन, क्षेत्रीय सम्मेलन और अति पिछड़ा सम्मेलन के जरिए ये दल अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटे हैं। कुछ सहयोगी दल इन सीटों पर अपनी दावेदारी भी जता रहे हैं।भाजपा महानगर अध्यक्ष गिरीश भंडूला ने कहा, “सहयोगी दलों की सक्रियता बढ़ी है। इसमें कुछ दल सीटों पर दावेदारी भी कर रहे हैं। सीटों का बंटवारा भाजपा और सहयोगी दलों के राष्ट्रीय स्तर के नेता मिलकर तय करेंगे। फिलहाल सभी सीटों पर पार्टी की तैयारी है।”
मुरादाबाद में सहयोगी दलों के कार्यक्रम
13 सितंबर: मुरादाबाद में रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) का सम्मेलन।
8 सितंबर: मुरादाबाद में निषाद पार्टी का मंडलीय कार्यकर्ता सम्मेलन।
2 अगस्त: मुरादाबाद में अपना दल (एस) का क्षेत्रीय सम्मेलन।
4 जून: ठाकुरद्वारा में रालोद की विजय संकल्प महारैली।
29 अप्रैल: कैलासा बाईपास पर सुभासपा का अति पिछड़ा सम्मेलन।इन विधानसभा सीटों पर लंबे समय से भाजपा को जीत का इंतजार
विधानसभा सीट – भाजपा की आखिरी जीत
मुरादाबाद देहात – 1993
बिलारी – जीत ही नहीं मिली
ठाकुरद्वारा – 2012
कुंदरकी – 1993मंडल की इन सीटों पर भी भाजपा को संघर्ष
मुरादाबाद के अलावा मंडल के दूसरे जिलों में भी भाजपा को कुछ विधानसभा सीटों पर लंबे समय से जीत का इंतजार है। इनमें अमरोहा, संभल, नगीना, नजीबाबाद और रामपुर विधानसभा सीट शामिल हैं। अमरोहा में भाजपा को आखिरी बार 1996 में जीत मिली थी, जबकि संभल में 1993, नगीना में 1991 और नजीबाबाद में 1991 में पार्टी विजयी रही थी। रामपुर विधानसभा सीट पर 2022 में हुए उपचुनाव में भाजपा ने पहली बार जीत दर्ज की थी।रामपुर में स्थापना दिवस पर अपना दल (एस) का बड़ा कार्यक्रम
अपना दल (एस) ने भी रामपुर में अपनी गतिविधियां बढ़ाने की तैयारी कर ली है। पार्टी के राष्ट्रीय सचिव संजीव यादव के मुताबिक, 4 नवंबर को पार्टी का स्थापना दिवस है। इस मौके पर रामपुर में बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसमें पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल शामिल होंगी। -

UP विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी में जुटी बसपा, मायावती ने बुलाई अहम बैठक, विपक्ष पर साधा निशाना
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को ध्यान में रखते हुए बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने संगठनात्मक स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। इसी क्रम में पार्टी अध्यक्ष मायावती की अध्यक्षता में लखनऊ में एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें 1400 से अधिक पार्टी पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक में जिला और विधानसभा स्तर के जिम्मेदार नेताओं ने हिस्सा लिया। चर्चा का मुख्य फोकस संगठन को मजबूत करना और पार्टी के जनाधार को बनाए रखना रहा।बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में मायावती ने कहा कि प्रदेश में बसपा को कमजोर करने के लिए विरोधी दल योजनाबद्ध कोशिशें कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि पार्टी इन साजिशों के प्रति अपने कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को सतर्क करेगी, ताकि संगठन किसी भी चुनौती का मजबूती से सामना कर सके।
विरोधी दलों पर मायावती का हमला
मायावती ने विरोधी दलों पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य की सरकारें जनहित से जुड़े मुद्दों को नजरअंदाज कर रही हैं। उनका आरोप था कि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही जाति और धर्म के नाम पर राजनीति में उलझे हुए हैं, जिससे समाज में वैमनस्य बढ़ रहा है और यह देशहित के लिए घातक है। उन्होंने संसद में लगातार हो रहे हंगामे पर भी नाराजगी जाहिर की और कहा कि संसद चर्चा और समाधान के लिए होती है, लेकिन वहां केवल एक-दूसरे को नीचा दिखाने की होड़ लगी है।जनमुद्दे हाशिए पर, जाति-धर्म राजनीति हावी
मायावती ने अमेरिका-भारत के प्रस्तावित ट्रेड डील का उदाहरण देते हुए कहा कि देश में किसानों, मजदूरों और अल्पसंख्यक समुदाय की स्थिति सुधारने के लिए ठोस प्रयास नहीं हो रहे। उन्होंने कहा कि टैरिफ जैसे अहम मुद्दों पर संसद में स्पष्ट स्थिति होनी चाहिए, लेकिन सत्ता पक्ष और विपक्ष गंभीर बहस के बजाय जाति-धर्म की राजनीति में उलझे हैं।बैठक में प्रदेश और मंडल स्तर के पदाधिकारी और सभी 403 विधानसभा सीटों के अध्यक्ष शामिल हुए। इस दौरान संगठन की सालाना गतिविधियों, आगामी रणनीति और एसआईआर से जुड़े मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। मायावती ने बैठक को चुनावी तैयारी के लिहाज से अहम बताया और कहा कि अब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में ज्यादा समय नहीं बचा है।