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  • UP के 3.5 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों को बड़ी सौगात, सैलरी में 7 हजार रुपए तक बढ़ोतरी, बीमा कवर भी

    UP के 3.5 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों को बड़ी सौगात, सैलरी में 7 हजार रुपए तक बढ़ोतरी, बीमा कवर भी

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने प्रदेश के करीब साढ़े तीन लाख आउटसोर्स कर्मचारियों को बड़ी सौगात दी है। सरकार ने उनकी सैलरी में 7 हजार रुपए तक की बढ़ोतरी की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (यूपीकोस) की वेबसाइट और लोगो लॉन्च किया। इस दौरान आउटसोर्स कर्मचारियों को चेक भी वितरित किए गए। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक भी मौजूद रहे।

    सरकार के मुताबिक, आउटसोर्स कर्मचारियों को 50 लाख रुपए तक का बीमा कवर दिया जाएगा। इसके अलावा आकस्मिक दवा के लिए 5 लाख रुपए और एयर एंबुलेंस के लिए 10 लाख रुपए तक की सहायता का प्रावधान किया गया है।

    एक ही पोर्टल पर होगा सभी आउटसोर्स कर्मचारियों का रिकॉर्ड
    यूपीकोस के माध्यम से प्रदेश के अलग-अलग सरकारी विभागों में काम कर रहे आउटसोर्स कर्मचारियों का एकीकृत डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। अभी कर्मचारियों से संबंधित जानकारी अलग-अलग विभागों और आउटसोर्स एजेंसियों के स्तर पर रखी जाती है। नई व्यवस्था में इन सभी रिकॉर्ड को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। इससे कर्मचारियों से जुड़ी जानकारी एक ही जगह उपलब्ध हो सकेगी।

    भर्ती से लेकर भुगतान तक की जानकारी पोर्टल पर दर्ज होगी
    यूपीकोस के पोर्टल पर कर्मचारी की भर्ती, तैनाती, उपस्थिति और भुगतान से संबंधित जानकारी दर्ज की जाएगी। इससे यह पता लगाना आसान होगा कि किस विभाग में कितने आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं और उन्हें कितना भुगतान किया जा रहा है। कर्मचारियों की सेवा से संबंधित रिकॉर्ड भी डिजिटल रूप में उपलब्ध रहेगा। जरूरत पड़ने पर किसी कर्मचारी की तैनाती, भुगतान या सेवा रिकॉर्ड की जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म से देखी जा सकेगी।

    एजेंसियों की प्रक्रिया पर भी होगी निगरानी
    नई व्यवस्था लागू होने के बाद आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती, तैनाती और भुगतान की प्रक्रिया पर निगरानी आसान होने की उम्मीद है। अलग-अलग एजेंसियों के माध्यम से होने वाली प्रक्रिया में रिकॉर्ड और भुगतान से जुड़ी गड़बड़ियों की गुंजाइश कम करने में भी मदद मिलेगी। प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में बड़ी संख्या में कर्मचारी आउटसोर्स के माध्यम से काम कर रहे हैं। नई व्यवस्था का सीधा असर इन कर्मचारियों की भर्ती, सेवा शर्तों और भुगतान व्यवस्था से जुड़े प्रबंधन पर पड़ेगा।

  • यूपी: शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने मंत्री आवास घेरा, आयोग की संस्तुति लागू करने की मांग

    यूपी: शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने मंत्री आवास घेरा, आयोग की संस्तुति लागू करने की मांग

    लखनऊ। 68500 सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा-2018 में आरक्षण से जुड़ी विसंगतियों के मामले में अभ्यर्थियों ने मंगलवार को बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के आवास का घेराव कर प्रदर्शन किया। अभ्यर्थी राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग, उत्तर प्रदेश की ओर से जारी आदेश/संस्तुति को तत्काल लागू करने की मांग कर रहे थे। प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने अभ्यर्थियों को हिरासत में लेकर ईको गार्डन भेज दिया।

    आयोग की संस्तुति लागू करने की मांग
    अभ्यर्थियों का कहना है कि 68500 शिक्षक भर्ती में आरक्षण संबंधी विसंगतियों को लेकर वे लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। उनके मुताबिक, राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने अभ्यर्थियों के हित में स्पष्ट आदेश/संस्तुति जारी की है, लेकिन काफी समय बीतने के बावजूद शासन और संबंधित विभाग की ओर से इसका अनुपालन नहीं किया गया।

    अभ्यर्थियों के अनुसार आयोग की संस्तुति में 150 में 60 अंक यानी 40% या उससे अधिक अंक पाने वाले ओबीसी अभ्यर्थियों को उत्तीर्ण मानकर नियमानुसार नियुक्ति देने की बात कही गई है। उनका दावा है कि इससे ओबीसी के साथ दिव्यांग, भूतपूर्व सैनिक और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित वर्ग के पात्र अभ्यर्थियों को भी लाभ मिलेगा।

    बोले- संवैधानिक अधिकार मांग रहे हैं
    धरने का नेतृत्व कर रहे तूफान सिंह ने कहा कि अभ्यर्थी किसी पर अहसान नहीं मांग रहे, बल्कि अपने संवैधानिक अधिकार और न्याय की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भर्ती के अभ्यर्थियों ने वर्षों तक संघर्ष किया है और आयोग के आदेश के बाद उन्हें न्याय की उम्मीद जगी है। शासन को आदेश को लंबित रखने के बजाय तत्काल अमल की दिशा में कदम उठाना चाहिए।

    दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
    अभ्यर्थियों ने आरक्षण संबंधी विसंगतियों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच कर जवाबदेही तय करने की भी मांग की। उनका कहना है कि केवल नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि आयोग की संस्तुति के मुताबिक जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।

    सरकार के सामने रखीं ये मांगें
    – राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के आदेश/संस्तुति का तत्काल अनुपालन किया जाए।
    – 150 में 60 अंक यानी 40% अंक पाने वाले पात्र ओबीसी, दिव्यांग, भूतपूर्व सैनिक और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित अभ्यर्थियों को नियमानुसार उत्तीर्ण कर नियुक्ति दी जाए।
    – आरक्षण संबंधी विसंगतियों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय कर कार्रवाई की जाए।
    – आयोग की संस्तुति पर शासन की ओर से की गई कार्रवाई की स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक की जाए।
    – पात्र अभ्यर्थियों के भविष्य को देखते हुए मामले का जल्द और न्यायपूर्ण निस्तारण किया जाए।

    अभ्यर्थियों ने कहा कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता और राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के आदेश का प्रभावी अनुपालन नहीं होता, तब तक उनका लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण संघर्ष जारी रहेगा। प्रदर्शन में तूफान सिंह, आशुतोष वर्मा, नवीन चौधरी, अखिल यादव, योगेश लोधी, ललिता चौधरी, कुसुम चौधरी, अनुराग पाल, विनोद प्रजापति, राम भवन साहू, शेरा, उमेश गुप्ता, रणबहादुर वर्मा, नसीम और राकेश साहनी समेत अन्य अभ्यर्थी शामिल रहे।

  • यूपी कैबिनेट में 21 बड़े फैसलों पर मुहर: जेवर लिंक एक्सप्रेसवे को मंजूरी, किसानों के लिए गए कई अहम निर्णय

    यूपी कैबिनेट में 21 बड़े फैसलों पर मुहर: जेवर लिंक एक्सप्रेसवे को मंजूरी, किसानों के लिए गए कई अहम निर्णय

    लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई उत्तर प्रदेश मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की बैठक में राज्य के विकास, बुनियादी ढांचे, किसानों, श्रमिकों और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े 21 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने कनेक्टिविटी बढ़ाने, कृषि सुरक्षा, सामाजिक कल्याण और प्रशासनिक सुधारों पर विशेष जोर देते हुए कई बड़े फैसले लिए।

    74 किमी के जेवर लिंक एक्सप्रेसवे को हरी झंडी
    कैबिनेट ने जेवर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाले 74.467 किलोमीटर लंबे छह लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण को मंजूरी दी। बुलंदशहर होते हुए बनने वाला यह एक्सप्रेसवे भविष्य में आठ लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा। इसके अलावा प्रयागराज-चित्रकूट क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण के गठन को भी स्वीकृति दी गई। प्रदेश के सात प्रमुख स्थानों पर बहुउद्देशीय हब विकसित करने के लिए लोक निर्माण विभाग की भूमि आवास एवं शहरी नियोजन विभाग को हस्तांतरित करने का निर्णय लिया गया। लखनऊ और नोएडा में अत्याधुनिक ‘यू-हब’ स्थापित किए जाएंगे।

    किसानों के लिए फसल बीमा योजना लागू
    किसानों को प्राकृतिक आपदाओं और मौसम संबंधी नुकसान से राहत देने के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में पूरे प्रदेश में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।

    घुमंतू विकास बोर्ड और विश्वकर्मा योजना को बढ़ावा
    विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदायों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास के लिए उत्तर प्रदेश घुमंतू विकास बोर्ड के गठन को स्वीकृति दी गई। वहीं विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना 2.0 के दिशा-निर्देशों में संशोधन और नए बजटीय प्रावधान को भी मंजूरी मिली। इसके साथ ही ग्राम्य विकास विभाग और एचसीएल फाउंडेशन के बीच समुदाय परियोजना से जुड़े समझौते को अगले पांच वर्षों के लिए बढ़ाने का फैसला किया गया।

    शिक्षा, श्रम और प्रशासनिक सुधारों पर भी फैसले
    कैबिनेट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुरूप उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद अधिनियम, 2004 में संशोधन को मंजूरी दी। इसके अलावा उत्तर प्रदेश मजदूरी संहिता नियमावली-2026, राज्य संपत्ति विभाग सेवा नियमावली और भूतत्त्व एवं खनिकर्म सेवा नियमावली में संशोधन को भी स्वीकृति दी गई।

    साथ ही उत्तर प्रदेश शीरा नियंत्रण (संशोधन) विधेयक-2026 को विधानसभा में पेश करने तथा इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण नीति-2017 के तहत एक निजी कंपनी को व्यावसायिक परिचालन तिथि में छूट देने का निर्णय लिया गया।

    अनुपूरक बजट और सीएजी रिपोर्ट को भी मंजूरी
    कैबिनेट ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के अनुपूरक अनुदान और विनियोग विधेयक को मंजूरी दी। साथ ही भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की राज्य वित्त, मनरेगा, जल जीवन मिशन, सिविल और राजस्व ऑडिट से संबंधित रिपोर्टों को विधानमंडल में पेश करने से पहले राज्यपाल की अनुमति लेने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति प्रदान की।

  • राम मंदिर चढ़ावा मामले में नई SIT की तैयारी, सुप्रीम कोर्ट में 3 IPS अधिकारियों का पैनल पेश करेगी यूपी सरकार

    राम मंदिर चढ़ावा मामले में नई SIT की तैयारी, सुप्रीम कोर्ट में 3 IPS अधिकारियों का पैनल पेश करेगी यूपी सरकार


    लखनऊ। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और गबन मामले की सुनवाई सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में होगी। इस दौरान उत्तर प्रदेश सरकार नई विशेष जांच टीम (SIT) के गठन के लिए तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नाम अदालत के समक्ष प्रस्तुत कर सकती है।

    सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित एसआईटी में लखनऊ रेंज की आईजी किरण एस, अयोध्या के डीआईजी सोमेन वर्मा और अयोध्या के एसएसपी गौरव ग्रोवर को शामिल करने का प्रस्ताव है। इन नामों पर अंतिम निर्णय सुप्रीम कोर्ट करेगा।

    इससे पहले गठित एसआईटी में लखनऊ मंडल के तत्कालीन कमिश्नर विजय विश्वास पंत और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन कुमार शामिल थे। अब उनकी जगह दो आईपीएस अधिकारियों को शामिल करने की तैयारी की गई है।

    पहले भी हुई थी कार्रवाई
    राम मंदिर में चढ़ावे के आभूषणों के कथित गबन की शिकायत के बाद यूपी सरकार ने एसआईटी से जांच कराई थी। जांच के आधार पर एफआईआर दर्ज हुई और मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया। इसी विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट के एक अन्य पदाधिकारी अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था।

    पुराने पहचान पत्रों से फिर मिलेगी एंट्री
    इस बीच मंदिर प्रशासन ने निर्माण कार्य प्रभावित न हो, इसके लिए एक अंतरिम फैसला लिया है। हाल ही में अमान्य किए गए चंपत राय के हस्ताक्षर वाले पुराने पहचान पत्र और प्रवेश पास फिलहाल दोबारा मान्य कर दिए गए हैं। नई पास व्यवस्था लागू होने तक अधिकृत कर्मचारी, इंजीनियर और तकनीकी अधिकारी इन्हीं पहचान पत्रों के आधार पर मंदिर परिसर में प्रवेश कर सकेंगे।

    निर्माण कार्य प्रभावित होने के बाद लिया गया फैसला
    ट्रस्ट के नेतृत्व में बदलाव के बाद पुराने पहचान पत्रों पर रोक लगा दी गई थी, जिससे मंदिर निर्माण से जुड़ी एजेंसियों के कर्मचारियों को परिसर में प्रवेश में दिक्कतें आने लगी थीं। एलएंडटी, टाटा, इंडिया इंजीनियर्स लिमिटेड और उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम जैसी संस्थाओं के इंजीनियरों और कर्मचारियों के काम पर भी इसका असर पड़ा। मंदिर परिसर में चारदीवारी, संग्रहालय, ट्रस्ट कार्यालय और विश्राम गृह सहित कई परियोजनाओं का कार्य बाधित होने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने फिलहाल पुराने पासों को अस्थायी रूप से फिर से वैध करने का निर्णय लिया है।

  • जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता, गोरखपुर में CM योगी ने जनता दर्शन में सुनीं 200 फरियादियों की शिकायतें

    जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता, गोरखपुर में CM योगी ने जनता दर्शन में सुनीं 200 फरियादियों की शिकायतें

    गोरखपुर । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने तीन दिवसीय गोरखपुर प्रवास के दौरान शुक्रवार को गोरखनाथ मंदिर परिसर में आयोजित जनता दर्शन कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे करीब 200 फरियादियों की समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को उनका प्रभावी तथा समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

    जनता दर्शन में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि प्रत्येक शिकायत को पूरी संवेदनशीलता के साथ सुना जाए और उसका ऐसा समाधान किया जाए जिससे शिकायतकर्ता पूरी तरह संतुष्ट हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनसमस्याओं के निस्तारण में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और सभी मामलों पर गंभीरता से कार्रवाई की जाए।

    मुख्यमंत्री ने जनता दर्शन में पहुंचे लोगों को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार प्रत्येक नागरिक की समस्या के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि जनसेवा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और लोगों को न्याय तथा राहत दिलाने में किसी प्रकार की कोताही नहीं बरती जाएगी।

    जनता दर्शन कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग अपनी व्यक्तिगत, सामाजिक, राजस्व, पुलिस, स्वास्थ्य और अन्य प्रशासनिक समस्याएं लेकर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को कई मामलों में तत्काल कार्रवाई के निर्देश भी दिए।

    जनता दर्शन में शामिल होने के लिए किसी विशेष पंजीकरण की आवश्यकता नहीं होती। कोई भी नागरिक सीधे कार्यक्रम में पहुंचकर अपनी शिकायत मुख्यमंत्री और संबंधित अधिकारियों के सामने रख सकता है। हालांकि प्रशासन नागरिकों को सलाह देता है कि वे अपनी शिकायत पहले से ही जनसुनवाई पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज करा दें, ताकि उसका रिकॉर्ड उपलब्ध रहे और सुनवाई के दौरान प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जा सके।

    सरकार की ओर से यह भी बताया गया है कि जनता दर्शन के समय और स्थान में प्रशासनिक आवश्यकता के अनुसार बदलाव संभव है। इसलिए नागरिकों को किसी भी आधिकारिक सूचना के लिए राज्य सरकार के अधिकृत पोर्टल या जनसुनवाई पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी पर नजर रखने की सलाह दी गई है।

  • LPG संकट के बीच UP सरकार का बड़ा फैसला… गौशालाओं में लगेंगे गोबर गैस प्लांट..

    LPG संकट के बीच UP सरकार का बड़ा फैसला… गौशालाओं में लगेंगे गोबर गैस प्लांट..


    लखनऊ।
    खाड़ी युद्ध के कारण पेट्रोलियम उत्पादों (Petroleum Products) की आपूर्ति पर मंडराते संकट के मद्देनजर यूपी सरकार (UP Government) बड़े पैमाने पर इसकी वैकल्पिक व्यवस्था करने जा रही है। इसके लिए उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में गोबर गैस प्लांट (Gobar Gas Plant) स्थापित करने की योजना है। शुरुआत में प्रदेश में संचालित 7527 गौशालाओं (Cowsheds) से इसकी शुरुआत करने की योजना है। बाद में पशुपालकों को भी इस योजना की परिधि में लाया जाएगा।

    वर्तमान में प्रदेश के 80 बड़े गौशालाओं में गोबर गैस प्लांट की स्थापना की गई है जो पूरी तरह से क्रियाशील है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य एलपीजी रसोई गैस का विकल्प तैयार करना है ताकि अधिक से अधिक लोगों को राहत मिल सके। साथ ही पर्यावरण का भी संरक्षण किया जा सके। यूपी में छोटी-बड़ी कुल 7527 गौशालाएं अथवा गो आश्रय स्थल है, जिनमें 12.39 लाख गोवंशीय पशुओं को पाला-पोसा जा रहा है। इन गोशालाओं से प्राप्त होने वाले दूध की उपयोगिता तो है ही अब इनके अपशिष्ट विशेष कर एक-एक ग्राम गोबर के सदुपयोग की तैयारी की जा रही है।

    इन गोबर का उपयोग सिर्फ कम्पोस्ट या खाद के लिए ही न करके वर्तमान में ईरान-अमेरिका एवं इजरायल युद्ध के कारण रसोई गैस के सम्भावित संकट से निपटने के लिए भी करने की तैयारी है। इसके लिए रणनीति तैयार की गई है जो कम से कम ग्रामीण क्षेत्रों में राहत जरूर पहुंचाएगी। उत्तर प्रदेश गो-सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता की माने तो संकट की इस घड़ी में सस्ते गोबर गैस की व्यवस्था लोगों को भारी राहत देने वाला होगा। बकौल श्री गुप्ता, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस कार्य को मिशन मोड पर शुरू करने के आदेश दिए हैं ताकि अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ मिल सके।


    यूपी में गोवंशों एवं गोशालाओं की स्थिति

    प्रदेश में इस समय 7,527 गो-आश्रय स्थल है जो सरकार द्वारा संचालित एवं संरक्षित हैं। इनमें 12.39 लाख से अधिक गोवंश हैं। इनमें 6,433 अस्थायी स्थलों में 9.89 लाख गोवंश और 518 वृहद गो-संरक्षण केंद्रों में 1.58 लाख गोवंश पले हुए हैं। इसके अलावा 323 कान्हा गो-आश्रयों में 77,925 और 253 कांजी हाउस में 13,576 गोवंश पाले-पोसे जा रहे हैं। दूसरी तरफ मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत 1.14 लाख गौ पालकों को 1.83 लाख गोवंश सुपुर्द किए गए हैं।


    गोरक्ष पीठ में भी लगा हुआ गोबर गैस संयंत्र

    आयोग के अध्यक्ष कहते हैं कि सीएम योगी के गोरक्ष पीठ में स्थित गोबर का उपयोग वहां लगे गोबर गैस प्लांट में किया जाता है, जिसके गैस से लोगों के भोजन की व्यवस्था होती है। साथ ही पीठ के खेतों में गोबर की खाद यूरिया व अन्य पोषक तत्त्वों की जरूरतों को पूरी कर रही है। गुप्ता की मानें तो इस योजना के क्रियान्वयन से प्रदेश में बड़ी संख्या में गोबर गैस प्लांट स्थापित किए जाएंगे जो पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करेंगे।