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  • अखिलेश यादव का बीजेपी पर हमला, बोले- संवेदनहीनता का चेहरा सामने आया, जनता सब समझ चुकी है

    अखिलेश यादव का बीजेपी पर हमला, बोले- संवेदनहीनता का चेहरा सामने आया, जनता सब समझ चुकी है


    लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि प्रदेश और देश की जनता अब भाजपा नेताओं के भाषण सुनने के मूड में नहीं है, बल्कि जवाब चाहती है। अपने बयान में उन्होंने एक कथित वायरल वीडियो का जिक्र करते हुए कहा कि उससे भाजपा नेताओं की वास्तविक कार्यशैली और व्यवहार लोगों के सामने आ गया है।

    अखिलेश यादव ने कहा कि अहंकार इंसान का विवेक छीन लेता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने किसी नेता को ईमानदारी, सादगी और जनसेवा का प्रतीक मान रखा था, उनका भ्रम अब टूट चुका है। उनके अनुसार हाल ही में सामने आए एक कथित वीडियो ने उस बनाई गई छवि को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है।

    सपा प्रमुख ने कहा कि किसी परिवार पर दुख का पहाड़ टूटने के समय संवेदना और सहानुभूति दिखाने के बजाय यदि कोई सार्वजनिक रूप से कठोर भाषा और व्यवहार अपनाता है, तो यह उसकी संवेदनहीनता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद लोगों के सामने उस नेता का वास्तविक चेहरा उजागर हो गया है और कथित नायकत्व का मायाजाल बिखर गया है।

    अखिलेश यादव ने दावा किया कि इस घटना से सबसे अधिक निराश वे समर्थक हुए हैं, जो अब तक संबंधित नेता की छवि का प्रचार करते रहे थे। उन्होंने कहा कि लोग अब यह सोचने को मजबूर हैं कि यदि ऐसी घटना उनके अपने परिवार के साथ होती, तो उनकी प्रतिक्रिया क्या होती। उनके अनुसार इस घटना ने समाज में व्यापक चर्चा को जन्म दिया है।

    उन्होंने यह भी कहा कि यह पहली बार नहीं है जब इस तरह के व्यवहार पर सवाल उठे हैं। अखिलेश ने आरोप लगाया कि इससे पहले भी पत्रकारों और अधिकारियों के साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार के मामले सामने आ चुके हैं। उनका कहना था कि जिसके सार्वजनिक व्यवहार में संयम नहीं होता, उसके नेतृत्व पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।

    सपा अध्यक्ष ने व्यंग्य करते हुए कहा कि अब यह भी कहा जा सकता है कि वायरल वीडियो कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई से बनाया गया है, लेकिन जनता सब समझती है। उन्होंने दावा किया कि लोग वास्तविकता और दिखावे के बीच का अंतर पहचान चुके हैं।

    अपने बयान के अंत में अखिलेश यादव ने कहा कि महिलाओं के सम्मान से जुड़ी किसी भी घटना को समाज गंभीरता से लेता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकरण से भाजपा की छवि को नुकसान पहुंचा है और महिलाओं के बीच इसका व्यापक असर देखने को मिलेगा।

  • यूपी में मौतों के आंकड़ों पर बवाल, अफसर के विदेश दौरे से उठे सवाल

    यूपी में मौतों के आंकड़ों पर बवाल, अफसर के विदेश दौरे से उठे सवाल


    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश में आंधी-तूफान से हुई भीषण जनहानि के बीच राज्य प्रशासन में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। 13 मई को प्रदेश के कई जिलों में आए तूफान और आंधी के कारण 117 लोगों की मौत हुई, जबकि कई जिलों में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया था। इसी गंभीर स्थिति के बीच राज्य के राहत आयुक्त डॉ. ऋषिकेश भास्कर यशोद के विदेश दौरे पर जाने की जानकारी सामने आने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है।

    सूत्रों के अनुसार, राहत कार्यों की समीक्षा और प्रभावित परिवारों को मुआवजा वितरण से जुड़ी रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राहत आयुक्त से तलब की थी। लेकिन जब अपेक्षित रिपोर्ट समय पर नहीं मिली, तो जांच में यह सामने आया कि राहत आयुक्त डॉ. यशोद 15 मई से 23 मई तक लगभग 9 दिनों के लिए विदेश यात्रा पर थे। इससे आपदा प्रबंधन की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

    13 मई को प्रदेश में आए आंधी-तूफान ने कई जिलों में भारी तबाही मचाई थी। पेड़ गिरने, तेज हवाओं और बिजली गिरने की घटनाओं में सैकड़ों परिवार प्रभावित हुए और 117 लोगों की जान चली गई थी। ऐसे संवेदनशील समय में शीर्ष राहत अधिकारी के अनुपस्थित रहने को लेकर प्रशासनिक स्तर पर असंतोष गहराता जा रहा है।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्य सचिव एसपी गोयल से सीधे जवाब तलब किया है। यह माना जा रहा है कि यह पहली बार है जब किसी वरिष्ठ अधिकारी की छुट्टी मंजूरी को लेकर सीएम ने सीधे मुख्य सचिव से स्पष्टीकरण मांगा है। सीएम ने इस बात पर नाराजगी जताई कि जब प्रदेश आपदा जैसी स्थिति से गुजर रहा था, तब इतने महत्वपूर्ण पद पर तैनात अधिकारी की विदेश यात्रा को कैसे मंजूरी दी गई।

    सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पहले ही बिना आवश्यक कारण के विदेश यात्राओं से बचने की अपील की गई थी, ऐसे में राज्य में गंभीर आपदा के दौरान इस तरह की अनुमति देना उचित नहीं था।

    वहीं, मुख्य सचिव एसपी गोयल ने अपनी ओर से सफाई देते हुए कहा है कि राहत आयुक्त की विदेश यात्रा की अनुमति प्रधानमंत्री की अपील से पहले ही स्वीकृत कर दी गई थी, इसलिए उस समय नियमों के तहत उन्हें रोका नहीं जा सकता था।

    इस पूरे मामले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और आपदा प्रबंधन व्यवस्था की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्य में पहले ही प्राकृतिक आपदा से भारी नुकसान हो चुका है और अब इस विवाद ने सरकार के भीतर जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

  • ढाई करोड़ की कार से 45 रुपये का गमला चोरी! सीएम योगी ने सुनाया लखनऊ का दिलचस्प किस्सा

    ढाई करोड़ की कार से 45 रुपये का गमला चोरी! सीएम योगी ने सुनाया लखनऊ का दिलचस्प किस्सा



    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने मंगलवार को लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों पर तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने एक मजेदार लेकिन गंभीर उदाहरण देते हुए बताया कि लोग महंगी कारों में घूमते हैं, लेकिन नगर निगम द्वारा लगाए गए 45 रुपये के गमले तक चोरी कर ले जाते हैं। सीएम योगी की यह टिप्पणी सुनकर कार्यक्रम में मौजूद लोग भी मुस्कुरा उठे।

    दरअसल, मुख्यमंत्री लखनऊ नगर निगम के “स्वच्छ-सुंदर-समर्थ लखनऊ” अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने 413 करोड़ रुपये की विभिन्न जनकल्याणकारी परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया। अपने संबोधन में उन्होंने साफ-सफाई और शहर की सुंदरता बनाए रखने में नागरिकों की जिम्मेदारी पर विशेष जोर दिया।

    सीएम योगी ने कहा कि शहर को साफ और सुंदर बनाए रखना सिर्फ नगर निगम, महापौर, पार्षद या सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें आम नागरिकों की भागीदारी भी जरूरी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि घर का कूड़ा कूड़ेदान में डालें, प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करें, नालियों में कचरा न फेंकें और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान न पहुंचाएं।

    इसी दौरान मुख्यमंत्री ने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि नगर निगम द्वारा लगाए गए गमलों को लोग चोरी कर ले जाते हैं। उन्होंने बताया, “हमने देखा कि एक बहुत महंगी कार आई और उसमें बैठे लोग 45 रुपये का गमला उठाकर ले गए। सीसीटीवी कैमरों में सब रिकॉर्ड हो गया। जितना पैसा उस कार में तेल भराने में लग रहा होगा, उतने में कई नए गमले आ जाते।”

    मुख्यमंत्री ने हंसते हुए कहा कि एक समय उनके मन में आया कि गमला चोरी करने वालों की तस्वीर चौराहे पर लगवा दी जाए, ताकि लोगों को समझ में आए कि छोटी लालच की वजह से शहर की सुंदरता को नुकसान पहुंचाना ठीक नहीं है।

    उन्होंने यह भी कहा कि सरकार जो पैसा विकास कार्यों पर खर्च करती है, वह किसी व्यक्ति विशेष का नहीं बल्कि जनता का पैसा होता है। इसलिए उसकी रक्षा करना और सही उपयोग सुनिश्चित करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के विजन के अनुसार जनता का पैसा जनता के हित में खर्च किया जा रहा है और इसी वजह से प्रदेश में विकास साफ दिखाई दे रहा है।

    सीएम योगी का यह बयान सोशल मीडिया पर भी तेजी से चर्चा में आ गया, जहां लोग इसे मजेदार अंदाज में साझा कर रहे हैं, लेकिन साथ ही सरकारी संपत्ति की सुरक्षा और नागरिक जिम्मेदारी पर गंभीर संदेश भी बता रहे हैं।

  • मुजफ्फरनगर में फेरीवालों की पिटाई, भीड़ ने चाचा-भतीजे को पीटा; पुलिस ने बचाई जान

    मुजफ्फरनगर में फेरीवालों की पिटाई, भीड़ ने चाचा-भतीजे को पीटा; पुलिस ने बचाई जान




    नई दिल्ली। मुजफ्फरनगर (नई मंडी कोतवाली क्षेत्र) की वसुंधरा कॉलोनी में रविवार देर शाम उस समय हड़कंप मच गया जब कपड़े की फेरी लगाने पहुंचे आमिर मलिक और जावेद को स्थानीय लोगों ने संदिग्ध समझकर पीट दिया। दोनों रिश्ते में चाचा-भतीजे हैं और फेरी लगाकर कपड़े बेचने का काम करते हैं।

    जानकारी के अनुसार, दोनों पहले भी कॉलोनी में सामान बेचने आ चुके थे और कुछ लोगों के बुलाने पर ही दोबारा वहां पहुंचे थे। लेकिन देर शाम और रात होने के कारण कुछ लोगों को उन पर शक हुआ, जिसके बाद भीड़ इकट्ठा हो गई और दोनों के साथ मारपीट शुरू कर दी गई।

    मारपीट में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें घायल अवस्था में दोनों दिखाई दे रहे हैं।सूचना मिलने पर नई मंडी पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों को भीड़ से बचाकर अपनी हिरासत में लिया। इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।

    पुलिस जांच में क्या आया सामने
    सीओ नई मंडी राजू कुमार साव के अनुसार, शुरुआती जांच में दोनों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं मिला है। वे फेरी लगाकर कपड़े बेचने का काम करते हैं और पहले भी इलाके में आ चुके हैं। पुलिस अब स्थानीय लोगों से पूछताछ कर रही है और पूरे मामले की जांच जारी है।

  • गोरखपुर में सरयू नदी बनी काल, नहाने गए भाई-बहन की डूबकर मौत; मौसी को गोताखोरों ने बचाया

    गोरखपुर में सरयू नदी बनी काल, नहाने गए भाई-बहन की डूबकर मौत; मौसी को गोताखोरों ने बचाया

    नई दिल्ली। गोरखपुर के गोला थाना क्षेत्र में रविवार को सरयू नदी में नहाने गए भाई-बहन की डूबने से दर्दनाक मौत हो गई, जबकि उनकी मौसी को गोताखोरों और ग्रामीणों की मदद से बचा लिया गया। हादसे के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है।

    जानकारी के मुताबिक सिकरीगंज थाना क्षेत्र के उसरी गांव निवासी ओमकार के बच्चे प्रिंस (11) और शिवानी (13) गर्मी की छुट्टियों में अपनी मां के साथ ननिहाल मेहड़ा गांव आए थे। रविवार सुबह दोनों बच्चे अपनी मौसी माया (16) के साथ गांव के बाहर स्थित हनुमान मंदिर घूमने गए थे। दर्शन करने के बाद तीनों सरयू नदी में नहाने उतर गए।

    नहाने के दौरान अचानक प्रिंस का पैर फिसल गया और वह गहरे पानी में चला गया। भाई को डूबता देख शिवानी उसे बचाने के लिए आगे बढ़ी, लेकिन वह भी पानी के तेज बहाव और गहराई में फंस गई। दोनों को बचाने के प्रयास में मौसी माया भी नदी में डूबने लगी। बताया जा रहा है कि तीनों करीब 40 फीट गहरे पानी में चले गए थे।

    घटना के दौरान घाट पर मौजूद एक बच्ची ने शोर मचाया, जिसके बाद आसपास मौजूद ग्रामीण मौके पर दौड़े। गांव के चंद्रमाल यादव ने बिना देर किए नदी में छलांग लगा दी। सबसे पहले उन्होंने माया को बाहर निकाला और फिर दोबारा नदी में कूदकर प्रिंस को बाहर लाए। दोनों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने प्रिंस को मृत घोषित कर दिया, जबकि माया का इलाज जारी है और उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।

    उधर शिवानी का काफी देर तक कोई सुराग नहीं मिला। स्थानीय गोताखोरों और ग्रामीणों ने करीब दो घंटे तक तलाश अभियान चलाया, जिसके बाद उसका शव नदी से बाहर निकाला गया। उसे भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मासूम भाई-बहन की मौत के बाद परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।

  • झांसी सड़क हादसा: सगाई से 3 दिन पहले दुल्हन और भाई की दर्दनाक मौत, ट्रक से टकराई बाइक

    झांसी सड़क हादसा: सगाई से 3 दिन पहले दुल्हन और भाई की दर्दनाक मौत, ट्रक से टकराई बाइक



    नई दिल्ली। झांसी में एक दिल दहला देने वाला सड़क हादसा सामने आया है, जिसमें सगाई से सिर्फ 3 दिन पहले होने वाली दुल्हन और उसके सगे भाई की दर्दनाक मौत हो गई। दोनों बाइक से अपनी बड़ी बहन के घर जा रहे थे, तभी पूंछ थाना क्षेत्र के झांसी–कानपुर हाईवे पर मबूसा ओवरब्रिज के पास सड़क किनारे खड़े एक ट्रक से उनकी बाइक टकरा गई।

    टक्कर इतनी तेज थी कि बाइक सवार दोनों भाई-बहन करीब 10 मीटर दूर जा गिरे और गंभीर रूप से घायल हो गए। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद दोनों को मोंठ सीएचसी ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। बताया जा रहा है कि बाइक की स्पीड लगभग 80 किमी प्रति घंटा थी और ट्रक सड़क पर बिना किसी चेतावनी के खड़ा था, जिससे यह हादसा हुआ।

    मृतका शिवानी (22) जालौन के कैलाशी देवी महाविद्यालय से बीए की छात्रा थी और उसकी शादी तय हो चुकी थी। 20 मई को उसकी सगाई होनी थी और घर में तैयारियां चल रही थीं। वहीं उसका भाई ईशू (19) 12वीं का छात्र था। दोनों अपने साथ कुछ कैश और गहने लेकर बहन के घर जा रहे थे, ताकि आगे शादी की तैयारियों में शामिल हो सकें।

    हादसे के बाद ट्रक चालक वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गया। पुलिस ने ट्रक की तलाश शुरू कर दी है और परिजनों की शिकायत पर मामला दर्ज किया जा रहा है। इस दर्दनाक हादसे ने पूरे परिवार की खुशियों को पलभर में मातम में बदल दिया।

  • गोरखपुर में इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम का शिलान्यास, CM योगी बोले– यूपी अब विकास का मॉडल बन चुका है

    गोरखपुर में इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम का शिलान्यास, CM योगी बोले– यूपी अब विकास का मॉडल बन चुका है



    गोरखपुर। गोरखपुर में शनिवार को इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम का भव्य शिलान्यास किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी मौजूद रहे। करीब 393 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह स्टेडियम CM योगी का ड्रीम प्रोजेक्ट माना जा रहा है, जिसे 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है।

    “उत्तर प्रदेश अब सिर्फ संभावनाओं का नहीं, परिणामों का राज्य है” – हरदीप पुरी
    केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में जिस तरह विकास कार्यों ने रफ्तार पकड़ी है, वह देश के लिए उदाहरण बन गया है। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था में सुधार से निवेश बढ़ा है और गोरखपुर का यह स्टेडियम युवाओं के सपनों को नई उड़ान देगा।

    18 महीने में पूरा करने का लक्ष्य, अंतरराष्ट्रीय मैच की उम्मीद
    मंत्री पुरी ने दावा किया कि स्टेडियम का निर्माण तेजी से पूरा होगा और 18 महीने के भीतर इसे तैयार करने की कोशिश होगी। उन्होंने कहा कि भविष्य में यहां IPL और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच आयोजित किए जा सकेंगे, जिससे पूर्वी उत्तर प्रदेश को नई पहचान मिलेगी।

    VIP कारपूल से पहुंचे रवि किशन, नेताओं ने दिखाई एकजुटता
    शिलान्यास समारोह में सांसद रवि किशन केंद्रीय मंत्री कमलेश पासवान और अन्य नेताओं के साथ कारपूल करके पहुंचे। इस दौरान गोरखपुर में खेल सुविधाओं के विस्तार और ग्रामीण स्तर पर स्टेडियम विकसित करने की योजनाओं पर भी चर्चा हुई।

    स्टेडियम से बदल जाएगी गोरखपुर की पहचान
    केंद्रीय राज्य मंत्री गिरीश चंद्र यादव ने कहा कि प्रदेश के हर जिले में खेल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि गोरखपुर का यह स्टेडियम भविष्य में कई बड़े क्रिकेट सितारे तैयार करेगा और क्षेत्र की आर्थिक स्थिति को भी मजबूती देगा।

  • यूपी में योगी सरकार का बड़ा संदेश: बिना सिफारिश मिल रही नौकरी, 9 लाख से ज्यादा नियुक्तियों का दावा

    यूपी में योगी सरकार का बड़ा संदेश: बिना सिफारिश मिल रही नौकरी, 9 लाख से ज्यादा नियुक्तियों का दावा



    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर राज्य की भर्ती प्रक्रिया और युवाओं को मिलने वाले रोजगार को लेकर सरकार की उपलब्धियों को रेखांकित किया। लखनऊ स्थित लोकभवन में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए, जिनमें 202 प्रोफेसर, रीडर, चिकित्सा अधिकारी, स्टाफ नर्स (आयुष विभाग), 272 अनुदेशक (व्यावसायिक शिक्षा विभाग) और दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के 7 कर्मचारी शामिल रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में चयनित अभ्यर्थियों की मौजूदगी रही।

    मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अब उत्तर प्रदेश में नौकरी पाने के लिए किसी सिफारिश या अनैतिक दबाव की जरूरत नहीं पड़ती है और पूरी भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से डिजिटल प्रणाली के माध्यम से की जा रही है। उन्होंने कहा कि पहले की सरकारों में भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और पक्षपात के आरोप लगते थे, लेकिन वर्तमान सरकार ने चयन आयोगों को जवाबदेही के साथ काम करने की व्यवस्था दी है, जिससे निष्पक्ष भर्ती सुनिश्चित हो रही है।

    सीएम योगी ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में राज्य में 9 लाख से अधिक युवाओं को पारदर्शी तरीके से सरकारी नौकरी दी गई है। उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में लगातार नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं और यह चौथा बड़ा कार्यक्रम है, जिसमें हजारों युवाओं को अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि योग्य और प्रतिभाशाली युवाओं को बिना किसी भेदभाव के अवसर मिले, जिससे प्रदेश की विकास गति और तेज हो।

    अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश अब पिछड़े राज्य की छवि से बाहर निकलकर एक मजबूत अर्थव्यवस्था और निवेश का केंद्र बन चुका है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर निवेश आ रहा है, उद्योगों की संख्या बढ़ी है और प्रति व्यक्ति आय में भी वृद्धि हुई है। सीएम योगी ने कहा कि अब यूपी को कोई बीमारू राज्य नहीं कहता, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था का इंजन बन रहा है।

    कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने भी इस मौके पर सरकार की नीतियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि पहले की सरकारों में भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठते थे, लेकिन अब पूरी व्यवस्था पारदर्शी हो चुकी है। उन्होंने बताया कि पिछले नौ वर्षों में 14 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया और 7.5 लाख से अधिक को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने स्किल डेवलपमेंट योजनाओं और नए तकनीकी ट्रेड्स के विस्तार का भी उल्लेख किया।

    कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चयनित अभ्यर्थियों से ईमानदारी और समर्पण के साथ कार्य करने की अपील की और कहा कि उनकी मेहनत ही प्रदेश के विकास की असली ताकत बनेगी।

  • योगी सरकार ने शुरू की जनगणना-2027 की ऐतिहासिक शुरुआत, डिजिटल और जातीय गणना से बदलेगा विकास का चेहरा

    योगी सरकार ने शुरू की जनगणना-2027 की ऐतिहासिक शुरुआत, डिजिटल और जातीय गणना से बदलेगा विकास का चेहरा



    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनगणना-2027 के प्रथम चरण की शुरुआत करते हुए इसे देश के समग्र और सुनियोजित विकास की मजबूत आधारशिला बताया। मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने “हमारी जनगणना, हमारा विकास” के संकल्प के साथ मकान सूचीकरण और गणना कार्य का शुभारंभ किया।

    जनगणना को बताया विकास का आधार
    सीएम योगी ने कहा कि जनगणना केवल जनसंख्या का आंकलन नहीं, बल्कि यह शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना और सामाजिक योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का आधार है। उन्होंने कहा कि सटीक डेटा से ही अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाया जा सकता है।

    पहली बार डिजिटल और पारदर्शी प्रक्रिया
    मुख्यमंत्री ने बताया कि इस बार देश में पहली बार पूरी तरह डिजिटल जनगणना की जा रही है। इसके तहत 7 से 21 मई 2026 तक नागरिकों को स्वगणना (self-enumeration) की सुविधा दी गई है, जिसमें लोग ऑनलाइन अपने विवरण दर्ज कर सकेंगे।इसके बाद जनगणना कर्मी घर-घर जाकर सत्यापन और सूचीकरण करेंगे, जबकि दूसरे चरण में व्यक्तिगत जनगणना की जाएगी।

    जातीय गणना और वन ग्राम भी शामिल
    सीएम योगी ने कहा कि इस बार जनगणना में पहली बार जातीय गणना को भी शामिल किया गया है। साथ ही वन ग्रामों को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया गया है, जिससे व्यापक और समावेशी डेटा तैयार किया जा सके।

    विशाल स्तर पर होगा कार्य
    उन्होंने बताया कि यह कार्य उत्तर प्रदेश के 75 जिलों, 18 मंडलों, 350 तहसीलों और हजारों ग्राम व नगर निकायों में किया जाएगा। इस प्रक्रिया में करीब 5.25 लाख कर्मियों की तैनाती की गई है, जिनमें प्रगणक, सुपरवाइजर और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं।

    मुख्यमंत्री की अपील
    योगी आदित्यनाथ ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे जनगणना को राष्ट्रीय दायित्व समझकर इसमें पूरी भागीदारी करें और सही जानकारी उपलब्ध कराएं, ताकि योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंच सके।जनगणना-2027 का यह डिजिटल और विस्तृत मॉडल भारत में डेटा आधारित प्रशासन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे विकास योजनाओं को और अधिक सटीक और प्रभावी बनाया जा सकेगा।

  • PCS ज्योति मौर्य विवाद में नया मोड़: पति आलोक मौर्य बोले- अब राजनीति में उतरूंगा, अफसर पत्नी ने सुलह से किया साफ इनकार

    PCS ज्योति मौर्य विवाद में नया मोड़: पति आलोक मौर्य बोले- अब राजनीति में उतरूंगा, अफसर पत्नी ने सुलह से किया साफ इनकार



    नई दिल्ली। यूपी की चर्चित PCS अफसर ज्योति मौर्य और उनके सफाईकर्मी पति आलोक मौर्य का विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार मामला सिर्फ पारिवारिक नहीं बल्कि राजनीतिक रंग भी लेता दिख रहा है। प्रयागराज में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य से मुलाकात के बाद आलोक मौर्य ने साफ संकेत दे दिए हैं कि वे जल्द ही राजनीति में कदम रख सकते हैं। उन्होंने कहा कि जनता चाहती है कि वे आगे आएं और समाज की सेवा करें, खासकर युवाओं के मुद्दों को लेकर।

    5 मई को जब डिप्टी सीएम का हेलिकॉप्टर पुलिस लाइन में उतरा, तो आलोक मौर्य अपने समर्थकों के साथ स्वागत के लिए पहले से मौजूद थे। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी युवाओं को राजनीति में आने के लिए प्रेरित करते हैं और वे भी उसी राह पर आगे बढ़ने की सोच रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि अंतिम फैसला पार्टी और जनता की इच्छा पर निर्भर करेगा।

    इस बीच, ज्योति और आलोक के बीच चल रहा वैवाहिक विवाद भी एक बार फिर चर्चा में आ गया है। मामला फिलहाल मीडिएशन सेंटर में है, जहां सुलह की कोशिशें जारी हैं। आलोक मौर्य का कहना है कि वे परिवार को टूटने से बचाना चाहते हैं और उम्मीद है कि जल्द कोई सकारात्मक नतीजा सामने आएगा। लेकिन दूसरी तरफ PCS अफसर ज्योति मौर्य ने साफ कर दिया है कि अब समझौते की कोई गुंजाइश नहीं बची है। उन्होंने कहा कि वे इस मुद्दे पर अब कुछ नहीं कहना चाहतीं और पहले ही अपना पक्ष स्पष्ट कर चुकी हैं।

    गाजियाबाद में एडीएम प्रशासन के पद पर तैनात ज्योति मौर्य पहले भी कह चुकी हैं कि तलाक की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और अब यह रिश्ता बच पाना मुश्किल है। दोनों के बीच विवाद इतना बढ़ चुका है कि मामला जिला कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। जहां एक ओर आलोक ने गुजारा भत्ता की मांग को लेकर याचिका दाखिल की है, वहीं ज्योति ने तलाक के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

    आलोक मौर्य ने इस पूरे विवाद को एक बड़े सामाजिक मुद्दे से भी जोड़ने की कोशिश की है। उन्होंने पुरुषों के अधिकारों की बात करते हुए प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर ‘पुरुष आयोग’ बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि पुरुषों को अपनी बात रखने का मंच नहीं मिल रहा, जिसकी वजह से कई लोग मानसिक दबाव में आकर आत्महत्या तक कर रहे हैं।

    गौरतलब है कि इस विवाद ने पहले भी देशभर में बहस छेड़ दी थी, जब आलोक ने ज्योति पर अफेयर और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। हालांकि बाद में वे इन आरोपों को साबित नहीं कर पाए और वापस लेना पड़ा। दूसरी ओर, ज्योति मौर्य ने आलोक के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का केस दर्ज कराया है, जो फिलहाल कोर्ट में विचाराधीन है।

    एक साधारण परिवार से निकलकर PCS अफसर बनने तक का ज्योति मौर्य का सफर जितना प्रेरणादायक रहा, उतना ही उनका निजी जीवन विवादों में घिर गया। अब इस पूरे मामले में राजनीति की एंट्री ने इसे और ज्यादा चर्चित बना दिया है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि आलोक मौर्य सच में राजनीति में कदम रखते हैं या नहीं, और कोर्ट में चल रहा यह हाई-प्रोफाइल विवाद किस दिशा में जाता है।