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  • कौशांबी में लूटकांड का खुलासा: पुलिस मुठभेड़ में दो बदमाश घायल, जवाबी फायरिंग में एक के पैर में लगी गोली

    कौशांबी में लूटकांड का खुलासा: पुलिस मुठभेड़ में दो बदमाश घायल, जवाबी फायरिंग में एक के पैर में लगी गोली



    नई दिल्ली(New Delhi)।
    कौशांबी जिले के कड़ाधाम थाना क्षेत्र में पुलिस ने पिछले महीने हुई मां-बेटे से लूट की घटना का खुलासा करते हुए बड़ी कार्रवाई की है। शनिवार देर रात पुलिस और बदमाशों के बीच हुई मुठभेड़ में दो शातिर लुटेरे गिरफ्तार किए गए, जिनमें से एक बदमाश पुलिस की जवाबी फायरिंग में पैर में गोली लगने से घायल हो गया। पुलिस ने दोनों को घेराबंदी कर पकड़ लिया और इलाज के लिए अस्पताल भेज दिया है।

    पुलिस के अनुसार, 27 अप्रैल 2026 की रात फतेहपुर जिले के सुल्तानपुर घोष थाना क्षेत्र निवासी संजय कुमार अपनी मां के साथ बाइक से गांव लौट रहे थे। इसी दौरान कड़ाधाम थाना क्षेत्र के नौढ़िया गांव के पास नहर पुलिया के नजदीक बाइक सवार दो अज्ञात बदमाशों ने उन्हें रोक लिया और तमंचे के बल पर मां-बेटे से लूटपाट की। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए थे।

    घटना के बाद पीड़ित की तहरीर पर मामला दर्ज कर पुलिस लगातार आरोपियों की तलाश में जुटी थी। शनिवार देर रात थाना प्रभारी विनीत सिंह अपनी टीम के साथ क्षेत्र में संदिग्ध वाहनों की चेकिंग कर रहे थे, तभी दो संदिग्ध युवक बाइक से आते दिखाई दिए। पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया तो दोनों ने भागने के साथ ही पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी।

    पुलिस ने भी आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग की, जिसमें एक बदमाश के पैर में गोली लग गई। इसके बाद पुलिस ने घेराबंदी कर दोनों आरोपियों को पकड़ लिया। गिरफ्तार बदमाशों की पहचान श्यामजीत पुत्र इंद्रमन निवासी हैबतपुर थाना सुल्तानपुर घोष और अमित पुत्र रमेश निवासी सौरई बुजुर्ग थाना कड़ाधाम के रूप में हुई है।

    पूछताछ में दोनों ने 27 अप्रैल की लूट की घटना में शामिल होने की बात स्वीकार की है। उनकी निशानदेही पर लूटे गए आधार कार्ड, पैन कार्ड, एटीएम कार्ड, मोबाइल फोन और घटना में इस्तेमाल की गई बाइक भी बरामद कर ली गई है। पुलिस ने घायल बदमाश को अस्पताल में भर्ती कराते हुए आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

    क्षेत्राधिकारी सिराथू सत्येंद्र प्रसाद तिवारी ने बताया कि दोनों आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

  • दरोगा भर्ती परीक्षा विवाद: ‘पंडित’ विकल्प पर राजनीति, सीएम योगी ने जताई नाराजगी

    दरोगा भर्ती परीक्षा विवाद: ‘पंडित’ विकल्प पर राजनीति, सीएम योगी ने जताई नाराजगी


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में दरोगा भर्ती परीक्षा के सामान्य हिंदी के प्रश्नपत्र में विकल्प में ‘पंडित’ दिए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। शनिवार को पूछे गए सवाल में पूछा गया था कि “अवसर के हिसाब से बदल जाने वाले को क्या कहेंगे?” इसके विकल्पों में ‘पंडित’, ‘अवसरवादी’, ‘निष्कपट’ और ‘सदाचारी’ थे। सवाल सामने आते ही विरोध शुरू हो गया, विशेषकर ब्राह्मण समुदाय में।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया कि जाति, धर्म या किसी समाज के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी भर्ती बोर्डों को निर्देश दिए कि ऐसे मामलों में नियमों का पालन किया जाए और बार-बार गलती करने वालों पर प्रतिबंध लगाया जाए। वहीं, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि मामले की जांच की जाएगी और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई होगी।

    विवाद के बाद पुलिस भर्ती बोर्ड ने रविवार सुबह निर्देश जारी किया। इसमें कहा गया कि एग्जाम सेंटर में प्रवेश से पहले अभ्यर्थियों से कलावा, मंगलसूत्र आदि न उतारवाए जाएं, ताकि किसी की धार्मिक भावनाएं आहत न हों। इसके बाद दूसरे दिन परीक्षा केंद्रों पर नरमी बरती गई; महिला अभ्यर्थियों से मंगलसूत्र नहीं उतरवाए गए और पुरुषों के कलावा नहीं काटे गए, जबकि सामान्य सुरक्षा उपाय जैसे जूते, बेल्ट और हाथ के कड़े उतारवाए गए।

    इस भर्ती परीक्षा में प्रदेश के सभी 75 जिलों में 1,090 सेंटर बनाए गए हैं। परीक्षा दो दिन में पूरी की जा रही है और इसमें कुल 4,543 पदों पर नियुक्ति की जाएगी। भर्ती के लिए 15,75,760 अभ्यर्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया है, जिनमें 11,66,386 पुरुष और 4,09,374 महिला अभ्यर्थी शामिल हैं।

    पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह ने बताया कि पुलिस परीक्षाओं के प्रश्नपत्र गोपनीय तरीके से तैयार किए जाते हैं। हजारों प्रश्नों में से कुछ ही चुनकर प्रश्नपत्र में शामिल किए जाते हैं। उन्होंने सवाल के विवाद को गैरजिम्मेदाराना बताया और कहा कि ‘पंडित’ का अर्थ विद्वान होता है, जाति विशेष के लिए नहीं। उनका मानना है कि यह मुद्दा केवल ध्यान भटकाने के लिए उठाया गया।

    भाजपा के तीन ब्राह्मण विधायक शलभ मणि त्रिपाठी, प्रकाश द्विवेदी और रमेश मिश्र ने भी इस पर सीएम को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की। साथ ही, सहारनपुर के पूर्व सांसद राघव लखनपाल शर्मा ने भी लिखा कि परीक्षा में विकल्प के इस प्रयोग से ब्राह्मण समाज की भावनाएं आहत हुई हैं।

    ब्राह्मण समाज उत्तर प्रदेश में 9–11 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करता है और कई जिलों में राजनीतिक रूप से प्रभावी भूमिका निभाता है। पूर्वांचल, बुंदेलखंड और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में ब्राह्मण मतदाता चुनाव परिणामों पर बड़ा असर डालते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ब्राह्मण मतदाता भाजपा के लिए महत्वपूर्ण स्विंग वोटबैंक रहे हैं।

    इस विवाद ने भर्ती परीक्षा में निष्पक्षता, प्रशासनिक सतर्कता और सामाजिक संवेदनशीलता की जरूरत को उजागर किया है। अधिकारियों ने सभी पक्षों से संयम बनाए रखने और किसी भी जाति विशेष के प्रति अनुचित टिप्पणी से बचने की अपील की है।

  • न्यायालय ने कहा केवल अदालत को है सजा देने का अधिकार पुलिस नहीं कर सकती एनकाउंटर

    न्यायालय ने कहा केवल अदालत को है सजा देने का अधिकार पुलिस नहीं कर सकती एनकाउंटर

    नई दिल्ली। प्रयागराज में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस की हाफ एनकाउंटर प्रथा पर गहरी चिंता और तीखी नाराजगी व्यक्त की है। न्यायालय ने इस मामले में प्रदेश के डीजीपी और गृह सचिव को तलब किया है और स्पष्ट जवाब देने को कहा है। हाईकोर्ट ने पूछा कि क्या पुलिस अधिकारियों को आरोपियों के पैरों या शरीर के किसी अन्य हिस्से में गोली मारने के संबंध में कोई मौखिक या लिखित निर्देश दिए गए हैं।

    जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ ने यह आदेश मिर्जापुर के राजू उर्फ राजकुमार समेत अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि ऐसी मुठभेड़ अब नियमित होती जा रही हैं और कथित तौर पर इसका उद्देश्य वरिष्ठ अधिकारियों को खुश करना या आरोपियों को सबक सिखाना हो सकता है।

    हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पुलिस आरोपी के पैरों में गोली मारकर इसे मुठभेड़ बताती है और यह पूरी तरह अस्वीकार्य है। न्यायालय ने कहा कि संविधान के अनुसार किसी भी व्यक्ति को सजा देने का अधिकार केवल अदालत के पास है पुलिस के पास नहीं है। कोर्ट ने चिंता जताई कि छोटे मोटे अपराधों जैसे चोरी के मामलों में भी पुलिस एनकाउंटर का सहारा ले रही है।

    कोर्ट ने चेतावनी दी है कि यदि ऐसे निर्देश जारी किए गए और उनका पालन किया गया तो संबंधित जिले के पुलिस प्रमुख यानी SP SSP या कमिश्नर व्यक्तिगत रूप से कोर्ट की अवमानना के लिए जिम्मेदार होंगे। इस स्थिति में उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे निर्देश और प्रथाएं कानून व्यवस्था के नाम पर अनुचित और असंवैधानिक हैं।अदालत ने यह भी कहा कि हाफ एनकाउंटर प्रथा से न केवल आरोपी का जीवन खतरे में पड़ता है बल्कि यह पुलिस के प्रति आम जनता के विश्वास को भी प्रभावित करती है। न्यायालय ने डीजीपी और गृह सचिव से पूछा कि इस तरह के निर्देश किसी प्रकार से नीति या प्रशिक्षण का हिस्सा तो नहीं बन गए।

    हाईकोर्ट के आदेश के बाद यूपी पुलिस में हलचल मची है और सभी वरिष्ठ अधिकारी इस मामले में लिखित रूप से स्पष्ट जवाब देने की तैयारी में हैं। पुलिस विभाग का कहना है कि कानून का पालन किया जाएगा और भविष्य में किसी भी प्रकार की असंवैधानिक कार्रवाई नहीं होने दी जाएगी।इस आदेश को पुलिस प्रशासन और न्यायपालिका के बीच जवाबदेही और संवैधानिक अधिकारों की सीमा तय करने वाला एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • MBBS की सीट के लिए 'खूनी साजिश': खुद का डॉक्टर बनने का जुनून या पागलपन?

    MBBS की सीट के लिए 'खूनी साजिश': खुद का डॉक्टर बनने का जुनून या पागलपन?


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के जौनपुर में एक ऐसी वारदात सामने आई है जिसने इंसानी सोच और सिस्टम की खामियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जौनपुर की यह घटना किसी डार्क थ्रिलर फिल्म की पटकथा जैसी लगती है, लेकिन हकीकत उससे कहीं ज्यादा खौफनाक है। एक छात्र का डॉक्टर बनने का जुनून इस कदर पागलपन में बदला कि उसने मेडिकल की सीट पाने के लिए खुद के ही शरीर को दांव पर लगा दिया। लाइन बाजार थाना क्षेत्र के खलीलपुर गांव में 25 वर्षीय सूरज भास्कर ने सरकारी अस्पताल में डॉक्टर बनने के लिए जो रास्ता चुना, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है।
    सूरज ने दिव्यांग कोटा (PH Quota) हासिल करने के लिए ग्राइंडर मशीन से अपना ही बायां पैर काटकर शरीर से अलग कर दिया।

    वारदात की क्रोनोलॉजी: साजिश से खुलासे तक
    शुक्रवार रात करीब 12 बजे सूरज ने इस आत्मघाती कदम को अंजाम दिया।
    दवाओं का खेल खुद को दर्द से बचाने के लिए सूरज ने पहले एनेस्थीसिया (सुन्न करने वाला) इंजेक्शन लगाया। जब पैर सुन्न हो गया, तो बिजली से चलने वाली ग्राइंडर मशीन से अपने पंजे को काट डाला।

    गुमराह करने की कोशिश शनिवार सुबह सूचना फैली कि अज्ञात बदमाशों ने सूरज पर जानलेवा हमला कर उसका पैर काट दिया है। पुलिस ने तत्काल ‘हत्या के प्रयास’ का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।

    कैसे खुला राज?
    सीओ सिटी गोल्डी गुप्ता को घटनास्थल पर मिले साक्ष्यों ने चौंका दिया। खेत में इंजेक्शन के रैपर और दवाइयां मिलीं, जो किसी राह चलते अपराधी के पास होना मुमकिन नहीं था। जब पुलिस ने सूरज की डायरी और कॉल डिटेल्स खंगाली, तो साजिश की परतें खुल गईंडायरी का टारगेट, सूरज ने अपनी डायरी में लिखा था 2026 में किसी भी हाल में MBBS में दाखिला लेना है।

    BHU से ली ‘ट्रेनिंग’
    जांच में पता चला कि सूरज अक्टूबर में वाराणसी (BHU) गया था, जहाँ उसने दिव्यांग सर्टिफिकेट के फायदे और प्रक्रिया की पूरी रेकी की थी।नीट (NEET) में कड़े कॉम्पिटिशन से बचने के लिए उसने खुद को स्थायी रूप से दिव्यांग बनाने का फैसला किया।

    सिस्टम और मानसिक दबाव का आईना
    यह घटना सिर्फ एक क्राइम रिपोर्ट नहीं है, बल्कि उस मानसिक दबाव की चरम सीमा है जो छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान महसूस करते हैं। फिलहाल सूरज अस्पताल में भर्ती है, लेकिन उसका यह कदम उसे कॉलेज की सीट दिलाएगा या जेल की कोठरी, यह पुलिसिया कार्रवाई तय करेगी।पुलिस अब इस बात की तहकीकात कर रही है कि सूरज को मेडिकल ग्रेड के इंजेक्शन और ग्राइंडर मशीन किसने मुहैया कराई।

  • पुंडरीक गोस्वामी यूपी पुलिस ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर उठाया विवाद कौन हैं ये युवा कथावाचक

    पुंडरीक गोस्वामी यूपी पुलिस ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर उठाया विवाद कौन हैं ये युवा कथावाचक


    बहराइच । उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में हाल ही में एक घटना ने विवाद को जन्म दिया जब पुलिस ने एक निजी कार्यक्रम के दौरान युवा कथावाचक पुंडरीक गोस्वामी को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और कई लोग इसे लेकर सवाल उठाने लगे कि क्या एक निजी आयोजन में पुलिस का इस प्रकार का सम्मान देना उचित था। पुलिस की इस अति भक्ति पर राज्य के डीजीपी ने बहराइच के एसपी से स्पष्टीकरण मांगा है और विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

    कौन हैं पुंडरीक गोस्वामी

    पुंडरीक गोस्वामी एक प्रसिद्ध युवा कथावाचक हैं जो वृंदावन से ताल्लुक रखते हैं। उनका जन्म 20 जुलाई 1988 को हुआ था और उन्होंने मात्र सात साल की उम्र से कथा सुनानी शुरू कर दी थी। वे उच्च शिक्षा के लिए ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी गए थे और वहां से अपनी शिक्षा पूरी की। पुंडरीक गोस्वामी श्रीभूति कृष्ण गोस्वामी जी महाराज के पुत्र और प्रसिद्ध संत अतुल कृष्ण गोस्वामी जी महाराज के पौत्र हैं। पुंडरीक गोस्वामी विश्व भर में गौड़ीय वैष्णव परंपरा का प्रचार कर रहे हैं। वे श्री कृष्ण श्रीमद्भागवतम भगवद गीता चैतन्य चरितामृत और राम कथा पर प्रवचन देते हैं। इसके अलावा वे समाज सेवा में भी सक्रिय हैं और वंचितों के लिए निशुल्क चिकित्सा शिविरों का आयोजन करते हैं। साथ ही वे गरीब बच्चों को शिक्षा भी प्रदान करते हैं।

    युवाओं के प्रेरणास्त्रोत

    पुंडरीक गोस्वामी ने गोपाल क्लब और निमाई पाठशाला जैसे कार्यक्रमों की शुरुआत की है जिनके माध्यम से वे युवाओं को भारतीय संस्कृति और भक्ति परंपरा से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। उनके परिवार में 38 पीढ़ियों से भागवत कथा की परंपरा चली आ रही है जो उनके आध्यात्मिक मार्ग पर चलने का कारण बनती है। ऑक्सफोर्ड से शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने अपनी आध्यात्मिक यात्रा जारी रखी और अब वे श्रीमद माधव-गौडेश्वर पीठम के 38वें आचार्य के रूप में कार्यरत हैं।

    विवाद का केंद्र: गार्ड ऑफ ऑनर

    यह घटना उस समय सामने आई जब पुलिस ने पुंडरीक गोस्वामी को बहराइच में एक निजी कार्यक्रम के दौरान गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इस कार्यक्रम का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं जिससे यह मामला विवाद का विषय बन गया। पुलिस की इस कार्रवाई ने कई सवाल उठाए जिनमें यह प्रमुख था कि क्या एक निजी व्यक्ति को पुलिस द्वारा इस तरह का सम्मान देना उचित था।

    यह घटना राज्य की पुलिस और स्थानीय प्रशासन के बीच कुछ असहमति का कारण बन गई और डीजीपी ने बहराइच के एसपी से स्पष्टीकरण मांगा। सोशल मीडिया पर लोग इसे पुलिस की अति भक्ति और अनुशासनहीनता का उदाहरण मान रहे हैं। कई लोगों ने इस सवाल को उठाया कि क्या धार्मिक या सामाजिक व्यक्तित्वों को इस प्रकार का सरकारी सम्मान देना सही है।

    समाज में पुंडरीक गोस्वामी का योगदान

    पुंडरीक गोस्वामी का समाज में योगदान और धार्मिक क्षेत्र में उनकी सक्रियता सराहनीय है। उन्होंने हमेशा भारतीय संस्कृति भक्ति परंपरा और समाज सेवा में अपनी भूमिका निभाई है। उनका प्रयास युवाओं को धार्मिक और सांस्कृतिक ज्ञान से जोड़ने का है जो समाज की भलाई के लिए महत्वपूर्ण है।  हालांकि पुलिस द्वारा उन्हें सम्मानित करने का तरीका विवादास्पद हो सकता है लेकिन पुंडरीक गोस्वामी की व्यक्तिगत भूमिका और उनके योगदान को नकारा नहीं जा सकता। वे आज की युवा पीढ़ी के लिए एक प्रेरणास्त्रोत बने हुए हैं जो धार्मिक कार्यों में गहरी रुचि रखते हैं।

    इस विवाद के बावजूद पुंडरीक गोस्वामी का योगदान समाज और धर्म के क्षेत्र में अत्यधिक महत्वपूर्ण है। हालांकि पुलिस द्वारा उन्हें सम्मानित करने के तरीके पर सवाल उठाए गए हैं यह स्पष्ट है कि उन्होंने अपनी आध्यात्मिक यात्रा और समाज सेवा के माध्यम से बहुत से लोगों की मदद की है। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस मामले में प्रशासन क्या कदम उठाता है और पुलिस की इस कार्रवाई को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है।