Tag: UPI payment

  • UPI से पेमेंट पर अभी नहीं कटेगा MDR…. जनवरी 2027 तक डेडलाइन बढ़ने की उम्मीद!

    UPI से पेमेंट पर अभी नहीं कटेगा MDR…. जनवरी 2027 तक डेडलाइन बढ़ने की उम्मीद!


    नई दिल्ली।
    डिजिटल पेमेंट (Digital Payment) करने वाले लोगों और कारोबारियों (Businesspeople) के लिए UPI MDR को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। 9 अक्टूबर को होने वाली UPI स्टीयरिंग कमेटी की बैठक नहीं हो पाई। इसी बैठक में UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (Merchant Discount Rate- MDR) को लेकर फैसला होना था। अब यह साफ नहीं है कि अगली बैठक कब होगी और MDR को लागू करने पर अंतिम फैसला कब लिया जाएगा। एक रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक सुबह होनी थी। इस बैठक में यूपीआई पर लगने वाले चार्ज को लेकर फैसला किया जाना था। फिलहाल यह साफ नहीं है कि बैठक अब कब होगी और MDR पर फैसला कब तक आएगा। पहले इसे 15 अक्टूबर से लागू करने की बात कही गई थी। इधर, MDR लागू होने में देरी की आशंका के बीच 9 अक्टूबर को पेटीएम, मोबिक्विक और पाइन लैब्स के शेयरों में करीब 5% तक गिरावट दर्ज की गई।


    तारीख बढ़ाकर जनवरी 2027 करने के प्रस्ताव

    यूपीआई स्टीयरिंग कमेटी यूपीआई से जुड़े अहम फैसले लेने वाली आधिकारिक समिति है। इसमें प्रमुख यूपीआई ऐप, बैंक और पेमेंट कंपनियों के अधिकारी शामिल हैं। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) देश में यूपीआई का ऑपरेट करता है। बता दें कि इससे पहले खबर आई थी कि 8 अक्टूबर को बताया था कि NPCI यूपीआई पर MDR लागू करने की तारीख बढ़ाकर जनवरी 2027 करने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है।


    क्या है UPI MDR और कितनी लगेगी फीस

    बता दें कि MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है, जो डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने वाले दुकानदारों और कारोबारियों से ट्रांजैक्शन प्रोसेस करने के बदले लिया जाता है। पिछले महीने UPI स्टीयरिंग कमेटी ने 2,000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर 0.4% यानी 40 बेसिस पॉइंट MDR तय किया था। उदाहरण के लिए, अगर कोई ग्राहक UPI से 10,000 रुपये का पेमेंट करता है, तो 0.4% के हिसाब से MDR 40 रुपये होगा। वहीं, 2,000 रुपये के पेमेंट पर यह शुल्क 8 रुपये बनता है। हालांकि, रियल चार्ज और लागू होने की शर्तें संबंधित नियमों पर निर्भर करेंगी।


    MDR लागू करने में क्यों हो रही देरी

    MDR को लेकर दुकानदारों के संगठन, फिनटेक कंपनियां और पेमेंट कंपनियां चिंताएं जता रही हैं। उनका कहना है कि त्योहारों के सीजन में इस तरह का शुल्क लागू करने से कारोबार की लागत बढ़ सकती है। इसके अलावा, अलग-अलग तरह के UPI ट्रांजैक्शन पर अलग दरें लागू होने से भी कारोबारियों के बीच भ्रम की स्थिति बन सकती है। दूसरी तरफ, सरकार को भी चिंता है कि बढ़ती महंगाई के बीच MDR से कारोबारियों का खर्च बढ़ सकता है। आशंका यह भी है कि कुछ कारोबारी इस अतिरिक्त लागत का बोझ ग्राहकों पर डाल सकते हैं। बता दें कि 8 अक्टूबर को वित्त मंत्री ने कहा था कि UPI ट्रांजैक्शन पर MDR का मामला रिलेटेड पार्टी के बीच तय किया जाएगा। ऐसे में अब सबकी नजर NPCI और पेमेंट इंडस्ट्री के अगले फैसले पर है।


    कार्ड और UPI के MDR में क्या है अंतर

    कार्ड पेमेंट आमतौर पर तय मर्चेंट कैटेगरी और रिलेटिवली यूनिफॉर्म फी स्ट्रक्चर के तहत काम करते हैं। दूसरी ओर, UPI का इस्तेमाल छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारियों तक बड़े पैमाने पर होता है। रिपोर्ट के मुताबिक, कार्ड करीब 1.1 करोड़ टर्मिनल पर स्वीकार किए जाते हैं, जबकि UPI का नेटवर्क लगभग 10 करोड़ कारोबारियों तक फैला है। UPI में बिजली-पानी के बिल, लोन की किस्त और शेयर बाजार से जुड़े पेमेंट जैसे कई अलग-अलग तरह के ट्रांजैक्शन शामिल हैं। इन सभी पर एक जैसी फी स्ट्रक्चर लागू करना आसान नहीं है।

  • अक्टूबर से पैसों से जुड़े कई नियम बदले, SBI ATM, LPG सब्सिडी, UPI, NPS और FD पर नए अपडेट लागू

    अक्टूबर से पैसों से जुड़े कई नियम बदले, SBI ATM, LPG सब्सिडी, UPI, NPS और FD पर नए अपडेट लागू


    नई दिल्ली, 1 अक्टूबर
    । अक्टूबर 2026 की शुरुआत के साथ पैसों और वित्तीय सेवाओं से जुड़े कई नियमों में बदलाव हुआ है। बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, रसोई गैस, पेंशन योजना, बड़ी रकम वाली एफडी और टैक्स से संबंधित नियमों में किए गए इन बदलावों का असर अलग-अलग श्रेणी के ग्राहकों पर पड़ सकता है। SBI के सैलरी पैकेज अकाउंट से लेकर LPG सब्सिडी, UPI भुगतान और NPS तक कुछ व्यवस्थाओं में नए प्रावधान लागू हुए हैं। वहीं, छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में अक्टूबर-दिसंबर 2026 की तिमाही के लिए कोई बदलाव नहीं किया गया है।

    SBI के सैलरी पैकेज अकाउंट वाले ग्राहकों के लिए दूसरे बैंकों के ATM से मिलने वाले मुफ्त लेनदेन की मासिक सीमा घटाई गई है। पहले हर महीने 10 मुफ्त लेनदेन की सुविधा थी, जिसे अब 5 कर दिया गया है। इस सीमा में केवल नकद निकासी ही नहीं, बल्कि बैलेंस चेक जैसी गैर-वित्तीय ATM सेवाएं भी शामिल हैं।

    हालांकि, SBI के अपने ATM पर सैलरी पैकेज ग्राहकों के लिए मुफ्त लेनदेन की सुविधा जारी रहेगी। LPG सब्सिडी लेने वाले ग्राहकों के लिए भी 1 अक्टूबर से आधार से जुड़ा बायोमेट्रिक सत्यापन महत्वपूर्ण हो गया है। सब्सिडी वाले LPG रिफिल के लिए यह प्रक्रिया पूरी करनी होगी। सत्यापन गैस एजेंसी के माध्यम से कराया जा सकता है और कुछ मामलों में डिलीवरी के समय भी बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन की सुविधा उपलब्ध हो सकती है।

    UPI को लेकर 15 अक्टूबर से कुछ खास मर्चेंट लेनदेन पर नया MDR ढांचा लागू होगा। यह व्यवस्था 2,000 रुपये से अधिक के कुछ मर्चेंट UPI लेनदेन से संबंधित है। इसका शुल्क सीधे ग्राहक से नहीं लिया जाएगा। व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P UPI लेनदेन मुफ्त रहेंगे। 2,000 रुपये तक के कई मर्चेंट भुगतान और जीरो-MDR के दायरे में आने वाले लेनदेन भी इस बदलाव से प्रभावित नहीं होंगे। वहीं, बड़ी रकम वाली FD यानी बल्क डिपॉजिट के मामले में 1 अक्टूबर से बैंकों को अधिक पारदर्शिता रखनी होगी। बैंकों को ऐसी जमा पर लागू ब्याज दरें अपनी वेबसाइट पर तय समय के अनुसार प्रकाशित करनी होंगी। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि हर सामान्य FD की ब्याज दर अक्टूबर से अपने आप बदल जाएगी।

    NPS में भी 1 अक्टूबर से शुल्क ढांचे में बदलाव हुआ है। Point of Presence यानी PoP के माध्यम से NPS या NPS Lite में पंजीकरण कराने वाले ग्राहकों के लिए प्रति PRAN 200 रुपये का एकमुश्त ऑनबोर्डिंग चार्ज लागू होगा। टैक्स से जुड़े मामलों में भी कुछ महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं। टैक्स ऑडिट वाले मामलों में रिपोर्ट जमा करने की समयसीमा 30 सितंबर से बढ़ाकर 21 अक्टूबर 2026 कर दी गई है।

    ऐसे मामलों में ITR दाखिल करने की अंतिम तारीख भी 31 अक्टूबर से बढ़ाकर 21 नवंबर 2026 कर दी गई है। इसके अलावा, भारत में रहने वाले व्यक्ति या HUF द्वारा किसी NRI से संपत्ति खरीदने पर लागू TDS प्रक्रिया में अलग TAN की जरूरत नहीं होगी और PAN का इस्तेमाल किया जा सकेगा। हालांकि, लागू TDS काटने और जमा करने की जिम्मेदारी बनी रहेगी।

    अक्टूबर-दिसंबर 2026 की तिमाही के लिए PPF, NSC, सुकन्या समृद्धि, SCSS और अन्य छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। ये दरें पिछली तिमाही के स्तर पर ही बनी रहेंगी। ऐसे में SBI सैलरी अकाउंट, LPG सब्सिडी, NPS या बड़ी FD से जुड़े ग्राहकों के लिए संबंधित बदलावों की जानकारी रखना जरूरी है। सामान्य UPI उपयोगकर्ताओं के लिए यह महत्वपूर्ण है कि नए MDR ढांचे का अर्थ हर UPI भुगतान पर ग्राहक से अलग शुल्क लिया जाना नहीं है।

  • भोपाल में स्मार्ट पार्किंग का नया दौर: नंबर प्लेट पहचानते ही कटेगा शुल्क, FASTag और UPI से मिलेगी आसान सुविधा

    भोपाल में स्मार्ट पार्किंग का नया दौर: नंबर प्लेट पहचानते ही कटेगा शुल्क, FASTag और UPI से मिलेगी आसान सुविधा


    भोपाल । भोपाल में स्मार्ट सिटी और डिजिटल सुविधाओं की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। अब शहरवासियों कोBhopal Smart Parking, FASTag Parking, Digital Parking System, UPI Payment, ANPR Technology मल्टीलेवल पार्किंग में पार्किंग शुल्क जमा करने के लिए लंबी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। भोपाल की न्यू मार्केट और एमपी नगर स्थित दो प्रमुख मल्टीलेवल पार्किंग में FASTag आधारित भुगतान सुविधा शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही वाहन चालक UPI और मोबाइल एप के माध्यम से भी पार्किंग शुल्क का भुगतान कर सकेंगे। नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य पार्किंग की पूरी प्रक्रिया को तेज आसान और आधुनिक बनाना है ताकि वाहन चालकों को प्रवेश और निकास के दौरान अनावश्यक इंतजार न करना पड़े।

    शहर में डिजिटल पार्किंग व्यवस्था को लगातार मजबूत किया जा रहा है। इसी दिशा में 9 जुलाई से भोपाल की पांच मल्टीलेवल पार्किंग में कैशलेस पार्किंग व्यवस्था लागू की गई थी। इसके तहत पार्किंग शुल्क के नकद भुगतान को पूरी तरह प्रतिबंधित कर डिजिटल भुगतान को प्राथमिकता दी गई। अब FASTag सुविधा शुरू होने के बाद पार्किंग व्यवस्था और अधिक सुविधाजनक होने की उम्मीद है।

    इस स्मार्ट पार्किंग सिस्टम की सबसे खास बात ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन तकनीक है। पार्किंग स्थल के प्रवेश द्वार पर लगाए गए ANPR कैमरे वाहन की नंबर प्लेट को स्वतः पहचानेंगे। इसके बाद FASTag रीडर वाहन की जानकारी को डिजिटल रूप से दर्ज करेगा और पार्किंग रिकॉर्ड अपने आप तैयार हो जाएगा। वाहन चालक को टिकट लेने या किसी कर्मचारी के पास भुगतान के लिए रुकने की जरूरत कम होगी।

    जब वाहन पार्किंग से बाहर निकलेगा तब भी यही आधुनिक तकनीक काम करेगी। एग्जिट प्वाइंट पर लगे ANPR कैमरे वाहन की पहचान करेंगे और FASTag आधारित सिस्टम के माध्यम से निर्धारित पार्किंग शुल्क की प्रक्रिया पूरी होगी। भुगतान होने के बाद वाहन आसानी से बाहर निकल सकेगा। इससे पार्किंग के प्रवेश और निकास दोनों स्थानों पर होने वाली भीड़ को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

    नई व्यवस्था से उन वाहन चालकों को सबसे अधिक सुविधा मिलने की उम्मीद है जो रोजाना व्यस्त बाजारों और व्यावसायिक क्षेत्रों में पार्किंग का उपयोग करते हैं। न्यू मार्केट और एमपी नगर जैसे इलाकों में वाहनों की आवाजाही अधिक रहती है। ऐसे में पार्किंग के लिए समय बचाना लोगों के लिए बड़ी सुविधा साबित हो सकता है। डिजिटल सिस्टम के जरिए प्रवेश और निकास की प्रक्रिया तेज होने से वाहनों की कतार भी कम होने की संभावना है।

    नगर निगम द्वारा FASTag भुगतान को प्राथमिकता दी जा रही है लेकिन वाहन चालकों के लिए वैकल्पिक भुगतान की सुविधा भी रखी गई है। यदि किसी वाहन का FASTag किसी तकनीकी कारण से काम नहीं करता है तो चालक QR कोड और UPI के जरिए पार्किंग शुल्क जमा कर सकेंगे। जरूरत पड़ने पर अन्य परिस्थितियों में नकद भुगतान की सुविधा भी उपलब्ध रखी गई है।

    भोपाल की यह पहल शहर में स्मार्ट और डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। FASTag आधारित पार्किंग व्यवस्था से जहां लोगों का समय बचेगा वहीं भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता भी बढ़ेगी। आने वाले समय में यदि इस तकनीक का विस्तार शहर की अन्य पार्किंगों तक किया जाता है तो भोपाल की पार्किंग व्यवस्था पहले से कहीं अधिक तेज आधुनिक और सुविधाजनक बन सकती है।

  • यूपीआई पेमेंट में UPI Now Pay Later सुविधा क्या है? जानें कैसे करता है काम और क्या हैं इसके फायदे

    यूपीआई पेमेंट में UPI Now Pay Later सुविधा क्या है? जानें कैसे करता है काम और क्या हैं इसके फायदे


    नई दिल्ली । अगर आप कभी कम बैंक बैलेंस की वजह से UPI पेमेंट फेल होने की परेशानी से जूझ चुके हैं, तो अब आपके लिए राहत की खबर है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया एनपीसीआई ने UPI यूज़र्स के लिए एक नया और बेहद उपयोगी फीचर ‘UPI Now Pay Later’ लॉन्च किया है, जिसे यूपीआई के जरिए प्री-अप्रूव्ड क्रेडिट लाइन के नाम से भी जाना जाता है। इस सुविधा के शुरू होने के बाद UPI सिर्फ आपके बैंक अकाउंट में मौजूद बैलेंस तक सीमित नहीं रहेगा। जरूरत पड़ने पर आप बैंक से पहले से स्वीकृत क्रेडिट का इस्तेमाल कर तुरंत भुगतान कर सकते हैं।
    क्या है UPI Now Pay Later
    यह एक डिजिटल क्रेडिट सुविधा है, जिसके तहत बैंक ग्राहकों को एक प्री-अप्रूव्ड क्रेडिट लिमिट प्रदान करते हैं। इस लिमिट का उपयोग कर यूज़र UPI के जरिये तुरंत पेमेंट कर सकते हैं और तय समय सीमा के भीतर बाद में उस राशि का भुगतान कर सकते हैं। यह सुविधा शॉर्ट-टर्म क्रेडिट की तरह काम करती है और खास तौर पर उस स्थिति में मददगार साबित होती है, जब खाते में पर्याप्त बैलेंस न हो।

    यह कैसे काम करता है

    herofincorp के मुताबिक, बैंक या लेंडर यूज़र की प्रोफाइल और क्रेडिट स्कोर के आधार पर एक निश्चित क्रेडिट लिमिट तय करता है। उदाहरण के लिए ₹20,000 से ₹50,000 तक। UPI से पेमेंट करते समय यूज़र अपने बैंक अकाउंट की जगह क्रेडिट लाइन को सेलेक्ट कर सकता है। ऐसा करने से भुगतान तुरंत पूरा हो जाता है और राशि क्रेडिट लिमिट से एडजस्ट हो जाती है। बिलिंग साइकिल पूरी होने पर इस्तेमाल की गई रकम का बिल जनरेट होता है, जिसे तय शर्तों के अनुसार चुकाना होता है।

    जानें इसके प्रमुख फायदे

    तुरंत क्रेडिट की सुविधाकम बैलेंस में भी बिना रुकावट भुगतानव्यापक स्वीकार्यताजहां भी UPI स्वीकार किया जाता है, वहां इस सुविधा का इस्तेमाल संभवलचीला भुगतान विकल्पतय समय बाद भुगतान करने की सहूलियतपूरी तरह डिजिटल प्रक्रियाबिना किसी कागजी झंझट के आसान और तेज़ ऑनबोर्डिंग

    क्या है पात्रता

    आपकी उम्र 18 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए और आप हर हार में भारतीय नागरिक होने चाहिए। डॉक्यूमेंट के तौर पर मोबाइल नंबर से लिंक पैन और आधार होना चाहिए। साथ ही आपका यूपीआई-सक्षम बैंक में सक्रिय खाता होना चाहिए। हां, आपका सिबिल स्कोर 750 या उससे अधिक होना चाहिए। एनपीसीआई का यह कदम डिजिटल भुगतान को और अधिक सुलभ, लचीला और उपभोक्ता-अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।