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  • फ्री नहीं रहने वाला डिजिटल पेमेंट…. UPI से लेनदेन पर लगेगा शुल्क! संसद में आया बिल

    फ्री नहीं रहने वाला डिजिटल पेमेंट…. UPI से लेनदेन पर लगेगा शुल्क! संसद में आया बिल


    नई दिल्ली।
    मोदी सरकार (Modi Government) ने अपनी लोकप्रिय यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (Unified Payments Interface-UPI) सिस्टम पर व्यापारियों से शुल्क वसूलने की दिशा में एक और कदम बढ़ा दिया है। मंगलवार को संसद (Parliament) में भुगतान कानूनों में प्रस्तावित बदलाव पेश किए गए, जिससे यह संभावना और बढ़ गई है। हालांकि यह शुल्क व्यापारियों पर लगेगा, ग्राहकों पर नहीं, फिर भी यह बदलाव डिजिटल पेमेंट (Digital Payment) को प्रभावित कर सकता है।

    जानकारी के मुताबिक नीति निर्माता दो बड़े विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। पहला विकल्प है कि एक निश्चित राशि से अधिक के लेनदेन पर MDR लगाया जाए। दूसरा विकल्प है कि व्यापारी के वार्षिक कारोबार के आधार पर शुल्क तय किया जाए। सूत्रों के अनुसार, एक प्रस्ताव के तहत केवल बड़े व्यापारियों से शुल्क लिया जाएगा, जबकि उपभोक्ताओं और छोटे कारोबारियों के लिए UPI भुगतान मुफ्त रहेगा।


    कितना लग सकता है चार्ज

    सरकारी सूत्र के अनुसार, एक प्रस्ताव में 1.5 करोड़ रुपये से अधिक सालाना कारोबार वाले व्यापारियों के लिए 2,000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन पर 0.3% से 0.5% MDR लगाने की बात कही गई है। जेफरीज की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन व्यापारियों की कुल लेनदेन संख्या का केवल 4% हैं, लेकिन कुल लेनदेन मूल्य का लगभग 67% इन्हीं से आता है।


    संशोधन विधेयक पेश

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम में संशोधन विधेयक पेश किया। उद्योग और नियामक सूत्रों के अनुसार, इस संशोधन से डिजिटल पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का कानूनी आधार बनेगा।

    हालांकि, अभी यह तय नहीं हुआ है कि शुल्क कितना होगा और यह किन लेनदेन पर लागू होगा। सरकारी सूत्रों ने नाम न छापने की शर्त पर यह जानकारी दी। वित्त मंत्रालय, रिजर्व बैंक और राष्ट्रीय भुगतान निगम ने तुरंत कोई जवाब नहीं दिया।


    UPI का बाजार में दबदबा

    UPI दुनिया के सबसे बड़े रियल-टाइम पेमेंट नेटवर्कों में से एक है। जुलाई में इसके जरिए 23.6 अरब लेनदेन हुए, जिनका कुल मूल्य 29.9 लाख करोड़ रुपये वॉलमार्ट की फोनपे और गूगल की गूगल पे इस सिस्टम पर हावी हैं।


    फ्री UPI पर क्यों लगने जा रहा लगाम

    रॉयटर्स के मुताबिक उद्योग के अधिकारियों का लंबे समय से कहना है कि डिजिटल पेमेंट में ग्रोथ को बनाए रखना मुश्किल होता जा रहा है, क्योंकि UPI ट्रांजैक्शन पर पेमेंट कंपनियों को कोई शुल्क नहीं मिलता। इससे उनकी निवेश करने की क्षमता सीमित हो जाती है।


    MDR क्या होता है?

    MDR वह शुल्क है, जो व्यापारी बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को डिजिटल ट्रांजैक्शन प्रोसेस करने के लिए देते हैं। भारत में क्रेडिट कार्ड पर आमतौर पर लगभग 1.5% MDR लगता है, जबकि डेबिट कार्ड पर 0.9% तक का शुल्क होता है, लेकिन UPI लेनदेन पर अभी व्यापारियों से कोई शुल्क नहीं लिया जाता।

  • यूपीआई लेन-देन जनवरी महीने में 28.33 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर

    यूपीआई लेन-देन जनवरी महीने में 28.33 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर


    नई दिल्‍ली।
    देश में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) (Unified Payments Interface – UPI) के जरिए होने वाला लेन-देन (Translations) जनवरी में 28.33 लाख करोड़ रुपये के मूल्य और 21.70 अरब की संख्या के साथ रिकॉर्ड स्तर (Record level.) पर पहुंच गया है।

    भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) की ओर से रविवार को जारी की गई आंकड़ों में यह जानकारी सामने आई है। एनपीसीआई के मुताबिक दिसंबर 2025 में यूपीआई के जरिए लेन-देन का मूल्य 27.97 लाख करोड़ रुपये रहा था। मासिक आधार पर लेन-देन के मूल्य में 21 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। आंकड़ों के अनुसार जनवरी में औसत दैनिक लेनदेन 70 करोड़ रहा जिसका औसत मूल्य 91,403 करोड़ रुपये था।

    वर्ल्डलाइन के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) रमेश नरसिम्हन ने में कहा कि यूपीआई की वृद्धि की गति लगातार मजबूत हो रही है। केवल जनवरी में भारतीयों ने 28.33 लाख करोड़ रुपये के 21.7 अरब यूपीआई लेनदेन किए, जो दिसंबर की तुलना में ज्‍यादा है, जो सालाना आधार पर 28 फीसदी की मजबूत वृद्धि दर्शाता है।

  • देश में UPI से लेन-देन में 29% की वृद्धि, दिसंबर में हुए रिकॉर्ड ₹27.97 लाख करोड़ के ट्रांजैक्शन

    देश में UPI से लेन-देन में 29% की वृद्धि, दिसंबर में हुए रिकॉर्ड ₹27.97 लाख करोड़ के ट्रांजैक्शन


    नई दिल्ली।
    बीते दिसंबर में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (Unified Payments Interface-UPI) से होने वाले लेन-देन में तेज बढ़ोतरी (Rapid Increase UPI Transactions) देखने को मिली। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (National Payments Corporation of India-NPCI) द्वारा गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर में यूपीआई के जरिए 21.63 अरब सौदे हुए, जो पिछले साल की तुलना में 29 प्रतिशत ज्यादा हैं। वहीं, इन सौदों की कुल राशि भी 20 प्रतिशत बढ़कर 27.97 लाख करोड़ रुपए हो गई।

    महीने के हिसाब से भी यूपीआई लेन-देन की संख्या और रकम में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई। दिसंबर में रोजाना औसतन 90,217 करोड़ रुपए का लेन-देन हुआ, जबकि नवंबर में यह आंकड़ा 87,721 करोड़ रुपए था।

    दिसंबर में रोजाना औसतन 698 मिलियन (करीब 69.8 करोड़) यूपीआई लेन-देन हुए, जो नवंबर के 682 मिलियन से ज्यादा हैं। नवंबर महीने में यूपीआई ट्रांजैक्शन की संख्या 20.47 अरब रही थी, जो सालाना आधार पर 32 प्रतिशत की बढ़त थी। उस महीने लेन-देन की कुल राशि 26.32 लाख करोड़ रुपए रही थी, जिसमें 22 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी।

    इसी दौरान, इंस्टेंट मनी ट्रांसफर सिस्टम (आईएमपीएस) के जरिए दिसंबर में कुल 6.62 लाख करोड़ रुपए का लेन-देन हुआ। यह पिछले साल की तुलना में 10 प्रतिशत ज्यादा है और नवंबर के 6.15 लाख करोड़ रुपए से भी अधिक है।


    अब 70.9 करोड़ सक्रिय यूपीआई क्यूआर कोड

    एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अब 70.9 करोड़ सक्रिय यूपीआई क्यूआर कोड हैं। जुलाई 2024 के बाद इनकी संख्या में 21 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। किराना दुकानों, मेडिकल स्टोर, बस-अड्डों, रेलवे स्टेशनों और गांवों तक क्यूआर कोड की सुविधा पहुंच जाने से अब स्कैन करके भुगतान करना पूरे देश में आम हो गया है।रिपोर्ट में बताया गया कि व्यक्ति से दुकानदार (पी2एम) वाले लेन-देन, व्यक्ति से व्यक्ति (पी2पी) लेन-देन से ज्यादा रहे। इसका मतलब है कि लोग रोजमर्रा की खरीदारी में यूपीआई का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं।

    पी2एम ट्रांजैक्शन 35 प्रतिशत बढ़कर अब 37.46 अरब हो गए, जबकि पी2पी ट्रांजैक्शन 29 प्रतिशत बढ़कर 21.65 अरब हो गए। औसतन हर लेन-देन की राशि 1,262 रुपए हो गई, जो पहले 1,363 थी। इससे पता चलता है कि लोग अब छोटे-छोटे भुगतानों जैसे यात्रा, खाना, दवा और स्थानीय खरीदारी के लिए यूपीआई का ज्यादा उपयोग कर रहे हैं।