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  • ग्रीस तक पहुंचा भारत का यूपीआई नेटवर्क, पीयूष गोयल बोले- डिजिटल भुगतान के साथ निवेश, व्यापार और साझेदारी को मिलेगी नई रफ्तार

    ग्रीस तक पहुंचा भारत का यूपीआई नेटवर्क, पीयूष गोयल बोले- डिजिटल भुगतान के साथ निवेश, व्यापार और साझेदारी को मिलेगी नई रफ्तार

    नई दिल्ली । भारत के डिजिटल भुगतान तंत्र को वैश्विक स्तर पर लगातार मिल रही स्वीकार्यता के बीच यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) की सेवाएं अब ग्रीस में भी शुरू हो गई हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इसे भारत की डिजिटल नवाचार क्षमता और तकनीक आधारित वित्तीय समाधानों की अंतरराष्ट्रीय पहचान का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि इस पहल से योग्य उपभोक्ताओं को तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक डिजिटल भुगतान का विकल्प मिलेगा, वहीं सीमा पार लेनदेन की लागत भी पारंपरिक भुगतान प्रणालियों की तुलना में कम होगी।

    पीयूष गोयल ने कहा कि दुनिया के विभिन्न देशों में यूपीआई को मिल रही बढ़ती स्वीकृति इस बात का प्रमाण है कि भारत द्वारा विकसित डिजिटल भुगतान प्रणाली पर वैश्विक भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है। उनके अनुसार तकनीक आधारित समाधान केवल भुगतान को सरल बनाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग, व्यापारिक संपर्क और साझा विकास के नए अवसर भी तैयार कर रहे हैं।

    ग्रीस यात्रा के दौरान केंद्रीय मंत्री ने यूरोबैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी फोकियन करावियास से मुलाकात कर दोनों देशों के बीच आर्थिक और निवेश संबंधों को मजबूत बनाने पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में ग्रीस की कंपनियों को भारत में निवेश के लिए प्रोत्साहित करने के साथ-साथ विनिर्माण, बुनियादी ढांचा और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर विचार किया गया। दोनों पक्षों ने भविष्य में आर्थिक भागीदारी को और व्यापक बनाने की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की।

    एथेंस स्थित यूरोबैंक मुख्यालय में मंत्री ने यूरोबैंक और एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड की साझेदारी के तहत शुरू हुई यूपीआई सेवा का लाइव प्रदर्शन भी देखा। इस अवसर पर बैंकिंग और डिजिटल भुगतान क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों ने नई व्यवस्था की कार्यप्रणाली और इसके संभावित लाभों की जानकारी दी। इसे भारत के डिजिटल भुगतान नेटवर्क के वैश्विक विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

    अपने दौरे के दौरान पीयूष गोयल ने भारत-ग्रीस बिजनेस फोरम को भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि, स्थिर व्यापक आर्थिक स्थिति और तेजी से विकसित होता औद्योगिक वातावरण विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षक अवसर प्रदान करता है। उन्होंने ग्रीस के उद्योग जगत से भारत में दीर्घकालिक निवेश और औद्योगिक सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता व्यापार, निवेश और आर्थिक साझेदारी को नई दिशा दे सकता है। उनका मानना है कि यदि इस दिशा में प्रगति होती है तो भारतीय और यूरोपीय उद्योगों के बीच सहयोग का दायरा और अधिक व्यापक होगा तथा दोनों क्षेत्रों की कंपनियों को नए बाजार और निवेश के अवसर प्राप्त होंगे।

    उन्होंने ग्रीस के उद्योगपतियों और निवेशकों से सह-निर्माण, सह-निवेश और संयुक्त औद्योगिक परियोजनाओं में भागीदारी बढ़ाने का आग्रह किया। उनके अनुसार दोनों देशों के बीच तकनीक, विनिर्माण, बुनियादी ढांचा, वित्तीय सेवाओं और डिजिटल नवाचार जैसे क्षेत्रों में व्यापक सहयोग की संभावनाएं मौजूद हैं। इससे रोजगार, निवेश और औद्योगिक विकास को भी गति मिलेगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रीस में यूपीआई सेवा की शुरुआत भारत की डिजिटल वित्तीय प्रणाली के बढ़ते वैश्विक प्रभाव का संकेत है। इससे अंतरराष्ट्रीय भुगतान व्यवस्था अधिक सरल और किफायती बनने के साथ-साथ भारत और ग्रीस के बीच व्यापारिक संपर्क, निवेश सहयोग तथा आर्थिक संबंधों को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। आने वाले समय में अन्य देशों में भी यूपीआई के विस्तार से भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की वैश्विक पहुंच और मजबूत हो सकती है।

  • भारत की डिजिटल ताकत का फ्रांस में प्रदर्शन, गैलरीज लाफायेट में यूपीआई सेवा शुरू; पीयूष गोयल बोले- वैश्विक पहुंच का बड़ा पड़ाव

    भारत की डिजिटल ताकत का फ्रांस में प्रदर्शन, गैलरीज लाफायेट में यूपीआई सेवा शुरू; पीयूष गोयल बोले- वैश्विक पहुंच का बड़ा पड़ाव


    नई दिल्ली ।
    भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) ने वैश्विक स्तर पर अपनी उपस्थिति को और मजबूत करते हुए फ्रांस के प्रमुख रिटेल केंद्रों में प्रवेश कर लिया है। फ्रांस के नीस मैसेना स्थित प्रतिष्ठित गैलरीज लाफायेट में यूपीआई सेवा की शुरुआत के साथ भारतीय डिजिटल भुगतान नेटवर्क को अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक नई पहचान मिली है। इस अवसर पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal ने इसे भारत की डिजिटल क्षमताओं और तकनीकी नवाचार की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

    यूपीआई सेवा शुरू होने के बाद अब भारतीय पर्यटक और ग्राहक फ्रांस के इस प्रसिद्ध रिटेल स्टोर में सीधे यूपीआई के माध्यम से भुगतान कर सकेंगे। इससे न केवल भुगतान प्रक्रिया अधिक आसान और सुरक्षित होगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय डिजिटल इकोसिस्टम की स्वीकार्यता भी बढ़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल सीमापार डिजिटल लेनदेन को सरल बनाने और वैश्विक भुगतान प्रणाली में भारत की भूमिका को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    पीयूष गोयल ने इस अवसर पर कहा कि फ्रांस के प्रमुख रिटेल गंतव्यों में से एक गैलरीज लाफायेट में यूपीआई का लॉन्च होना भारत की तकनीकी प्रगति और विश्वस्तरीय डिजिटल भुगतान समाधान की क्षमता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि यूपीआई के वैश्विक विस्तार की यात्रा में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होगी और इससे भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी।

    इस पहल को सफल बनाने में डिजिटल भुगतान क्षेत्र की कंपनियों और तकनीकी साझेदारों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। सरकार का मानना है कि इस प्रकार की साझेदारियां वैश्विक स्तर पर सहज, सुरक्षित और इंटरऑपरेबल भुगतान व्यवस्था विकसित करने में मदद करेंगी। साथ ही इससे विदेशी बाजारों में भारतीय फिनटेक समाधानों के लिए नए अवसर भी पैदा होंगे।

    भारत और फ्रांस के बीच बढ़ते आर्थिक एवं तकनीकी सहयोग के संदर्भ में भी इस पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच पिछले कुछ वर्षों में रणनीतिक, औद्योगिक, तकनीकी और नवाचार आधारित सहयोग में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। यूपीआई का विस्तार इसी मजबूत होते संबंध का एक नया उदाहरण माना जा रहा है।

    फ्रांस दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री ने विभिन्न उद्योग प्रतिनिधियों, निवेशकों, शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों के साथ भी संवाद किया। इस दौरान उन्होंने भारत में उपलब्ध निवेश अवसरों, डिजिटल परिवर्तन और नवाचार आधारित विकास मॉडल पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने फ्रांसीसी उद्योग जगत से भारत की विकास यात्रा में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान भी किया।

    यात्रा के दौरान मंत्री ने यूरोप के प्रमुख विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी केंद्र Sophia Antipolis का भी दौरा किया। यह केंद्र शोध, तकनीक और उद्योग के समन्वय का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है, जहां हजारों तकनीकी कंपनियां अत्याधुनिक क्षेत्रों में कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे नवाचार केंद्र भविष्य की अर्थव्यवस्था को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यूपीआई का अंतरराष्ट्रीय विस्तार भारतीय डिजिटल भुगतान प्रणाली को वैश्विक मान्यता दिलाने के साथ-साथ पर्यटन, व्यापार और सीमा-पार वित्तीय लेनदेन को भी नई गति देगा। आने वाले वर्षों में अन्य देशों और प्रमुख वैश्विक बाजारों में भी यूपीआई की पहुंच बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

  • यूपीआई बना वैश्विक मिसाल, दक्षिण अफ्रीका ने भारत के डिजिटल भुगतान मॉडल को बताया भविष्य की अर्थव्यवस्था का आधार

    यूपीआई बना वैश्विक मिसाल, दक्षिण अफ्रीका ने भारत के डिजिटल भुगतान मॉडल को बताया भविष्य की अर्थव्यवस्था का आधार


    नई दिल्ली । भारत की यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) प्रणाली एक बार फिर वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है। दक्षिण अफ्रीका में डिजिटल भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में चल रही तैयारियों के बीच भारतीय यूपीआई मॉडल को एक प्रभावी और सफल उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। दक्षिण अफ्रीकी रिजर्व बैंक के गवर्नर लेसेत्जा कन्यागो ने भी सार्वजनिक रूप से भारत की इस प्रणाली की सराहना करते हुए इसे आधुनिक डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण मॉडल बताया है।

    दक्षिण अफ्रीका वर्तमान समय में नकदी आधारित लेनदेन को कम करने और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की रणनीति पर काम कर रहा है। इस दिशा में वहां की सरकार और वित्तीय संस्थान एक ऐसे राष्ट्रीय भुगतान नेटवर्क के विकास की योजना बना रहे हैं जो लोगों को तेज, सुरक्षित और कम लागत वाली डिजिटल सेवाएं उपलब्ध करा सके। इसी संदर्भ में भारत के यूपीआई मॉडल को विशेष महत्व दिया जा रहा है, जिसने कुछ ही वर्षों में करोड़ों लोगों को डिजिटल भुगतान व्यवस्था से जोड़ दिया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यूपीआई की सबसे बड़ी ताकत इसकी सरलता और पहुंच है। मोबाइल नंबर, क्यूआर कोड और बैंक खातों के एकीकरण के माध्यम से यह प्रणाली भुगतान प्रक्रिया को बेहद आसान बना देती है। इसके लिए महंगे उपकरणों या जटिल तकनीकी ढांचे की आवश्यकता नहीं होती, जिससे छोटे व्यापारियों और आम नागरिकों के लिए भी इसका उपयोग सुविधाजनक हो जाता है।

    दक्षिण अफ्रीका की सरकार भी ऐसी प्रणाली विकसित करने की कोशिश कर रही है, जो नागरिकों को बिना अतिरिक्त शुल्क के रियल-टाइम भुगतान की सुविधा प्रदान कर सके। इसका उद्देश्य नकदी पर निर्भरता को कम करना, वित्तीय समावेशन को बढ़ाना और आर्थिक गतिविधियों को अधिक पारदर्शी बनाना है। सरकार का मानना है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था के विस्तार से आर्थिक लेनदेन की गति बढ़ेगी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं भी अधिक प्रभावी होंगी।

    हालांकि, इस दिशा में दक्षिण अफ्रीका के सामने कई चुनौतियां भी मौजूद हैं। देश की बड़ी आबादी अब भी औपचारिक बैंकिंग सेवाओं से पूरी तरह नहीं जुड़ी है। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी सीमित है और मोबाइल डेटा की लागत भी अपेक्षाकृत अधिक मानी जाती है। इसके अलावा, बिजली आपूर्ति से जुड़ी समस्याएं डिजिटल बुनियादी ढांचे की स्थिरता को प्रभावित कर सकती हैं। इन कारणों से कैशलेस अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ना आसान नहीं माना जा रहा है।

    इसके बावजूद डिजिटल भुगतान क्षेत्र में तेजी से विस्तार की संभावनाएं दिखाई दे रही हैं। वित्तीय तकनीक, डिजिटल वॉलेट और प्रीपेड भुगतान साधनों का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आवश्यक बुनियादी ढांचे को मजबूत किया गया तो दक्षिण अफ्रीका आने वाले वर्षों में डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति कर सकता है।

    भारत का यूपीआई पहले ही कई देशों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुका है और इसे दुनिया के सबसे सफल रियल-टाइम भुगतान प्लेटफॉर्म में गिना जाता है। इसकी सफलता ने विकासशील देशों को यह दिखाया है कि सीमित लागत में भी व्यापक डिजिटल भुगतान नेटवर्क तैयार किया जा सकता है। दक्षिण अफ्रीका द्वारा इस मॉडल में दिखाई जा रही रुचि भारत की डिजिटल क्षमता और वित्तीय नवाचार की वैश्विक स्वीकार्यता का एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

  • पीएम स्वनिधि योजना की बड़ी उपलब्धि, 55 लाख से अधिक लाभार्थी डिजिटल सिस्टम से जुड़े, 9 लाख करोड़ के लेनदेन दर्ज

    पीएम स्वनिधि योजना की बड़ी उपलब्धि, 55 लाख से अधिक लाभार्थी डिजिटल सिस्टम से जुड़े, 9 लाख करोड़ के लेनदेन दर्ज

    नई दिल्ली । देश में असंगठित क्षेत्र के आर्थिक सशक्तिकरण और शहरी गरीब तबके के लिए चलाई जा रही पीएम स्वनिधि योजना लगातार महत्वपूर्ण उपलब्धियां दर्ज कर रही है। इस योजना के तहत अब तक 55 लाख से अधिक लाभार्थियों को डिजिटल भुगतान प्रणाली से जोड़ा जा चुका है, जिससे रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के कारोबार में पारदर्शिता और स्थिरता बढ़ी है। योजना के तहत किए गए प्रयासों का व्यापक असर यह रहा है कि लाभार्थियों द्वारा अब तक 841 करोड़ से अधिक डिजिटल लेनदेन किए गए हैं, जिनका कुल मूल्य लगभग 8.96 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

    इस योजना की शुरुआत वर्ष 2020 में की गई थी, जिसका उद्देश्य छोटे और असंगठित व्यापारियों को बिना गारंटी के कार्यशील पूंजी ऋण उपलब्ध कराना था। समय के साथ यह योजना केवल ऋण सुविधा तक सीमित नहीं रही, बल्कि डिजिटल समावेशन और वित्तीय साक्षरता का एक मजबूत माध्यम बन गई है। इसके तहत लाभार्थियों को तीन चरणों में ऋण उपलब्ध कराया जाता है, जिससे वे धीरे-धीरे अपने व्यवसाय को विस्तार दे सकें। योजना की खास बात यह है कि इसमें सरकारी गारंटी के साथ ऋण उपलब्ध कराया जाता है, जिससे बैंकों और लाभार्थियों दोनों का जोखिम कम होता है।

    आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस योजना के लगभग 95 प्रतिशत लाभार्थी पहली बार औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जुड़े हैं, जो देश में वित्तीय समावेशन की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इसके साथ ही लाभार्थियों की औसत आय में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार देखा गया है। कई लाभार्थियों ने बेहतर आवास, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा तक अपनी पहुंच को भी मजबूत किया है।

    डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए इस योजना में कैशबैक प्रोत्साहन जैसी सुविधाएं भी शामिल की गई हैं, जिसके तहत लाभार्थियों को डिजिटल लेनदेन पर वित्तीय लाभ दिया जाता है। इससे छोटे व्यापारी भी डिजिटल ट्रांजैक्शन अपनाने के लिए प्रेरित हुए हैं और देश में डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है। लगभग 46 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएं हैं, जो इस योजना की सामाजिक समावेशिता को दर्शाता है, जबकि बड़ी संख्या में लाभार्थी वंचित और कमजोर वर्गों से आते हैं।

    सरकार ने इस योजना की उपलब्धियों को देखते हुए इसके विस्तार की घोषणा की है, जिसके तहत इसे अब मार्च 2030 तक जारी रखा जाएगा। इससे अधिक से अधिक स्ट्रीट वेंडर्स को योजना का लाभ मिल सकेगा और उन्हें आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी। साथ ही, यूपीआई आधारित क्रेडिट कार्ड सुविधा भी योजना के अगले चरण में शामिल की गई है, जिससे छोटे व्यापारियों को अतिरिक्त वित्तीय सहायता मिल सकेगी।

    कुल मिलाकर पीएम स्वनिधि योजना देश में सूक्ष्म ऋण प्रणाली और डिजिटल भुगतान के विस्तार में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यह न केवल आर्थिक मजबूती का माध्यम बन रही है, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ने में भी प्रभावी साबित हो रही है।

  • भीम ऐप में नया बायोमेट्रिक फीचर 5,000 तक के UPI पेमेंट अब फिंगरप्रिंट से

    भीम ऐप में नया बायोमेट्रिक फीचर 5,000 तक के UPI पेमेंट अब फिंगरप्रिंट से


    नई दिल्ली: 
    भीम ऐप में एक नया और अहम फीचर जोड़ा गया है, जिससे डिजिटल पेमेंट और भी आसान और तेज हो जाएगा। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) की सहायक कंपनी एनबीएसएल ने यह बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन फीचर लॉन्च किया है

    इस फीचर के जरिए अब यूजर्स 5,000 रुपए तक के ट्रांजैक्शन को अपने फिंगरप्रिंट या फेस रिकग्निशन से कन्फर्म कर सकेंगे। इसका मतलब है कि छोटे पेमेंट के लिए हर बार UPI PIN डालने की जरूरत नहीं पड़ेगी

    इस बदलाव से पेमेंट प्रक्रिया न सिर्फ तेज होगी बल्कि यूजर एक्सपीरियंस भी बेहतर होगा। अक्सर लोग पिन भूल जाते हैं या गलत पिन डाल देते हैं, जिससे ट्रांजैक्शन फेल हो जाता है। नया फीचर इस समस्या को काफी हद तक कम कर देगा

    बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल करके यूजर्स अपने दोस्तों और परिवार को पैसे भेज सकते हैं, दुकानों पर क्यूआर कोड स्कैन कर सकते हैं और ऑनलाइन पेमेंट भी आसानी से कर सकते हैं

    कंपनी के अनुसार, यह फीचर सुरक्षा के लिहाज से भी बेहतर है क्योंकि फिंगरप्रिंट और फेस डेटा सीधे यूजर के डिवाइस में सुरक्षित रहता है। इससे पिन शेयर होने या उसके गलत इस्तेमाल का खतरा कम हो जाता है

    हालांकि, 5,000 रुपए से ज्यादा के ट्रांजैक्शन के लिए अभी भी UPI PIN की जरूरत होगी, जिससे बड़े पेमेंट के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बनी रहेगी

    फिलहाल यह सुविधा उन स्मार्टफोन्स पर उपलब्ध है जिनमें बायोमेट्रिक सपोर्ट यानी फिंगरप्रिंट या फेस रिकग्निशन की सुविधा मौजूद है, चाहे वह एंड्रॉइड हो या iOS डिवाइस

  • Toll Tax: इस तारीख से नेशनल हाईवे पर नकद टोल बंद करने की तैयारी, फास्टैग-यूपीआई होंगे अनिवार्य

    Toll Tax: इस तारीख से नेशनल हाईवे पर नकद टोल बंद करने की तैयारी, फास्टैग-यूपीआई होंगे अनिवार्य

    नई दिल्ली । देशभर के राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वालों के लिए बड़ा बदलाव आने वाला है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) 1 अप्रैल 2026 से सभी टोल प्लाजा पर नकद भुगतान बंद करने पर विचार कर रहा है। अगर यह फैसला लागू होता है, तो टोल शुल्क केवल डिजिटल माध्यमों जैसे FASTag और UPI के जरिए ही लिया जाएगा।

    फास्टैग का बढ़ता प्रयोग
    एनएचएआई के आधिकारिक बयान के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में फास्टैग का उपयोग 98 प्रतिशत से अधिक हो चुका है।

    इससे टोल वसूली के तरीके में व्यापक बदलाव आया है और अधिकांश टोल लेनदेन अब RFID-सक्षम फास्टैग के जरिए इलेक्ट्रॉनिक रूप से हो रहे हैं। इससे संपर्क रहित और तेज आवागमन संभव हो गया है। इसके अलावा, देशभर के टोल प्लाजा पर UPI भुगतान सुविधा भी शुरू हो चुकी है, जो त्वरित और सुलभ विकल्प प्रदान करती है।

    नकद भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क
    राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियमों के मुताबिक, वैध और सक्रिय फास्टैग के बिना टोल प्लाजा में प्रवेश करने वाले वाहनों से नकद भुगतान करने पर दोगुना शुल्क लिया जाता है। वहीं UPI के माध्यम से भुगतान करने पर निर्धारित उपयोगकर्ता शुल्क का 1.25 गुना शुल्क देना होता है।

    एनएचएआई ने बताया कि नकद भुगतान के कारण व्यस्त समय में लंबी कतारें लगती हैं, प्रतीक्षा अवधि बढ़ती है और लेनदेन विवाद भी उत्पन्न होते हैं।

    डिजिटल टोलिंग से बेहतर संचालन
    देशभर के 1150 से अधिक टोल केंद्रों पर पूर्ण डिजिटल भुगतान प्रणाली लागू होने से परिचालन दक्षता, यातायात प्रबंधन और समय की बचत में सुधार की उम्मीद है। यह पहल एनएचएआई के व्यापक लक्ष्य का हिस्सा है, जिसके तहत प्रौद्योगिकी आधारित, उच्च दक्षता वाला और उपयोगकर्ता-अनुकूल राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क विकसित किया जा रहा है, ताकि देशभर में आवागमन और अधिक सुगम और निर्बाध बनाया जा सके।

  • UPI से जुड़ा नया नियम लागू… गलती पर यूजर्स को उठाना पड़ सकता है भारी नुकसान

    UPI से जुड़ा नया नियम लागू… गलती पर यूजर्स को उठाना पड़ सकता है भारी नुकसान


    नई दिल्ली।
    भारत (India) में डिजिटल पेमेंट (Digital payments.) का सबसे भरोसेमंद और लोकप्रिय माध्यम बन चुका UPI आज करोड़ों लोगों की रोजमर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा है। सब्ज़ी खरीदने से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग (Online shopping), बिजली बिल (Electricity bills), स्कूल फीस (School Fees) और ट्रैवल बुकिंग (Travel Bookings) तक हर जगह UPI का इस्तेमाल हो रहा है। लेकिन अब इसी UPI को लेकर एक नया और सख्त नियम लागू किया गया है, जिसकी जानकारी न होने पर यूजर्स को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।


    इस वजह से होता है UPI ब्लॉक

    इस नए नियम का सीधा असर UPI अकाउंट की सुरक्षा और वैधता से जुड़ा है। अगर कोई यूजर लापरवाही करता है, गलत या पुरानी जानकारी का इस्तेमाल करता है, या जरूरी अपडेट्स को नजरअंदाज करता है, तो उसका UPI अकाउंट अस्थायी या स्थायी रूप से ब्लॉक किया जा सकता है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि कई लोगों को तब तक इसका पता नहीं चलता, जब तक उनका पेमेंट अचानक फेल न होने लगे।


    UPI का नया नियम क्या है?

    UPI से जुड़े नए नियम के तहत यह जरूरी किया गया है कि हर UPI अकाउंट एक सक्रिय, वैध और सही मोबाइल नंबर से जुड़ा होना चाहिए। अगर किसी यूज़र का मोबाइल नंबर इनएक्टिव है, बंद हो चुका है, या लंबे समय से इस्तेमाल में नहीं है, तो उस नंबर से जुड़ी UPI ID को जोखिम भरा माना जाएगा। इसके अलावा, अगर बैंक या UPI सिस्टम को यह लगता है कि किसी अकाउंट से जुड़ी जानकारी अपडेट नहीं है, पहचान वेरिफिकेशन अधूरा है या यूजर लंबे समय से इनएक्टिव है, तो उस अकाउंट पर पाबंदी लगाई जा सकती है।


    यह नियम क्यों लाया गया?

    इस नियम के पीछे सबसे बड़ा कारण है डिजिटल फ्रॉड और गलत लेन-देन को रोकना। कई मामलों में देखा गया है कि: – बंद मोबाइल नंबर किसी और को दोबारा मिल जाता है – उसी नंबर से जुड़ा UPI अकाउंट पुराना रहता है – नया यूजर अनजाने में पुराने बैंक अकाउंट से लिंक हो जाता है ऐसी स्थिति में धोखाधड़ी, गलत ट्रांजैक्शन और डेटा मिसयूज़ की संभावना बहुत बढ़ जाती है। इसीलिए UPI सिस्टम को साफ और सुरक्षित रखने के लिए यह नियम लाया गया है।


    आम यूजर पर इसका क्या असर पड़ेगा?

    इस नए नियम का असर सीधे तौर पर हर UPI यूजर पर पड़ता है। UPI पेमेंट अचानक बंद हो सकता है अगर आपका अकाउंट नियमों के अनुरूप नहीं है, तो पेमेंट करते समय ट्रांजैक्शन फेल हो सकता है।


    UPI अकाउंट ब्लॉक या सस्पेंड हो सकता है

    लगातार नियमों की अनदेखी करने पर UPI ID को अस्थायी या स्थायी रूप से ब्लॉक किया जा सकता है। Google Pay, PhonePe, Paytm सब पर असर यह नियम किसी एक ऐप तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी UPI प्लेटफॉर्म पर लागू होता है। रोजमर्रा के काम रुक सकते हैं बिल पेमेंट, पैसे ट्रांसफर, ऑनलाइन खरीदारी सब कुछ प्रभावित हो सकता है।


    UPI अकाउंट ब्लॉक होने से कैसे बचें?

    अगर आप चाहते हैं कि आपका UPI अकाउंट सुरक्षित रहे, तो इन बातों का खास ध्यान रखें:
    – बैंक अकाउंट से जुड़ा मोबाइल नंबर हमेशा एक्टिव रखें
    – मोबाइल नंबर बदला है तो तुरंत अपडेट करें
    – समय-समय पर UPI का इस्तेमाल करते रहें
    – UPI ऐप में प्रोफाइल और KYC पूरी रखें
    – किसी अनजान लिंक या कॉल से UPI जानकारी शेयर न करें


    कैसे पता करें कि आपका नंबर ब्लॉक हुआ है या नहीं?

    इस वक्त कोई सार्वजनिक लिस्ट नहीं है जिससे आप सीधे जान सकें कि आपका नंबर ब्लॉक हुआ है या नहीं। लेकिन अगर आप नीचे दिए गए लक्षण देख रहे हैं, तो सतर्क हो जाइए: लगातार UPI फेल हो रहा है, “Transaction under review” या “Could not process” जैसे मैसेज आ रहे हैं, QR कोड स्कैन करने पर भी पेमेंट नहीं हो पा रहा तो ऐसी स्थिति में अपने बैंक या UPI ऐप की हेल्पलाइन से संपर्क करें।