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  • UPI पर MDR शुल्क को लेकर नया मॉडल तैयार, छोटे कारोबारियों को राहत देकर बड़े मर्चेंट्स से शुल्क लेने की तैयारी

    UPI पर MDR शुल्क को लेकर नया मॉडल तैयार, छोटे कारोबारियों को राहत देकर बड़े मर्चेंट्स से शुल्क लेने की तैयारी

    नई दिल्ली ।भारत में डिजिटल भुगतान के सबसे प्रमुख माध्यमों में शामिल UPI पर लंबे समय से शुल्क व्यवस्था को लेकर चर्चा होती रही है। मौजूदा व्यवस्था में आम तौर पर UPI लेनदेन पर सीधे मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR का बोझ नहीं पड़ता। इससे ग्राहकों के लिए भुगतान आसान और बिना अतिरिक्त शुल्क के बना हुआ है, लेकिन डिजिटल भुगतान से जुड़ी कंपनियों और बुनियादी ढांचे की लागत को लेकर वित्तीय दबाव की चर्चा लगातार सामने आती रही है।

    इसी चुनौती के बीच डेबिट कार्ड से जुड़े पुराने नियामकीय मॉडल को UPI के लिए संभावित आधार के तौर पर देखा जा रहा है। इस विचार के तहत शुल्क व्यवस्था ऐसी बनाई जा सकती है, जिसमें छोटे कारोबारियों को अतिरिक्त लागत से बचाया जाए और बड़े तथा संगठित कारोबारियों से सीमित शुल्क लिया जाए।

    डेबिट कार्ड से जुड़े नियमों में छोटे कारोबारियों के लिए MDR की ऊपरी सीमा कम रखी गई है। सालाना 20 लाख रुपये से कम कारोबार करने वाले छोटे मर्चेंट्स के लिए अधिकतम MDR 0.40 प्रतिशत तक सीमित रखने का प्रावधान बताया गया है। इसी तरह के सिद्धांत को UPI में अपनाने पर छोटे किराना दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे कारोबारियों को शुल्क से पूरी तरह राहत देने का विकल्प बन सकता है।

    दूसरी ओर बड़े शोरूम, मॉल, ई-कॉमर्स कंपनियों और संगठित रिटेल कारोबार को अलग श्रेणी में रखा जा सकता है। ऐसे कारोबारियों से उनकी भुगतान क्षमता और कारोबार के आकार के अनुसार मामूली MDR लेने का प्रस्ताव चर्चा में है। इसका उद्देश्य UPI के संचालन और भुगतान व्यवस्था की लागत को साझा करना हो सकता है, बिना छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ डाले।

    इस संभावित मॉडल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू आम उपभोक्ताओं को सीधे शुल्क से बचाना है। बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में UPI के जरिए पैसे भेजने वाले ग्राहकों के लिए भुगतान मुफ्त रखने की कोशिश की जा सकती है। यानी शुल्क व्यवस्था लागू होने की स्थिति में भी इसका सीधा असर सामान्य व्यक्ति के प्रत्येक UPI भुगतान पर डालने से बचने का विकल्प रखा जा सकता है।

    UPI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ लेनदेन की संख्या और डिजिटल भुगतान प्रणाली को संचालित करने के लिए आवश्यक तकनीकी ढांचे की लागत भी बढ़ रही है। भुगतान कंपनियों को सर्वर, सुरक्षा, तकनीकी रखरखाव और अन्य व्यवस्थाओं पर लगातार खर्च करना पड़ता है। ऐसे में लंबे समय तक शून्य MDR व्यवस्था बनाए रखने के लिए सरकार की ओर से प्रोत्साहन राशि की जरूरत पड़ती है।

    प्रस्तावित मॉडल का एक उद्देश्य इस वित्तीय दबाव को कम करना भी हो सकता है। यदि बड़े मर्चेंट्स से सीमित शुल्क लिया जाता है, तो भुगतान व्यवस्था से जुड़े पक्षों के लिए अतिरिक्त राजस्व का स्रोत बन सकता है। इससे तकनीकी ढांचे और साइबर सुरक्षा को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि डेबिट कार्ड से जुड़े नियमों को UPI पर उसी रूप में लागू करना तय नहीं है। UPI की मौजूदा संरचना, भुगतान प्रक्रिया और इसमें शामिल संस्थाओं को देखते हुए किसी भी शुल्क मॉडल के लिए अलग नियम और शर्तें तय करनी पड़ सकती हैं।

    फिलहाल चर्चा का केंद्र यही है कि डिजिटल भुगतान की लोकप्रियता और मुफ्त लेनदेन की सुविधा बरकरार रखते हुए व्यवस्था को आर्थिक रूप से टिकाऊ कैसे बनाया जाए। यदि छोटे कारोबारियों और आम ग्राहकों को सुरक्षित रखते हुए बड़े मर्चेंट्स से सीमित शुल्क लेने का मॉडल तैयार होता है, तो UPI के विस्तार और वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

  • साइबर अपराध जांच में बैंक खाते फ्रीज होने से पेट्रोल पंप डीलरों की चिंता बढ़ी, डिजिटल भुगतान रोकने की चेतावनी

    साइबर अपराध जांच में बैंक खाते फ्रीज होने से पेट्रोल पंप डीलरों की चिंता बढ़ी, डिजिटल भुगतान रोकने की चेतावनी

    नई दिल्ली । तमिलनाडु में पेट्रोल पंप संचालकों ने डिजिटल भुगतान से जुड़ी एक गंभीर समस्या को लेकर राज्य सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। डीलरों का आरोप है कि साइबर अपराध से जुड़े मामलों की जांच के दौरान उनके बैंक खाते फ्रीज कर दिए जाते हैं, जबकि संबंधित संदिग्ध लेनदेन में उनकी प्रत्यक्ष भूमिका नहीं होती। समस्या का समाधान नहीं होने पर उन्होंने यूपीआई और अन्य कैशलेस भुगतान स्वीकार करना बंद करने की चेतावनी दी है।

    तमिलनाडु पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन राज्य के करीब 5 हजार पेट्रोल पंपों का प्रतिनिधित्व करती है। एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि पेट्रोल पंप संचालक ग्राहकों से ईंधन बिक्री के बदले सामान्य कारोबारी प्रक्रिया के तहत डिजिटल भुगतान स्वीकार करते हैं।

    डीलरों के अनुसार किसी ग्राहक के यूपीआई भुगतान की पूरी पृष्ठभूमि की जांच करना उनके लिए संभव नहीं है। पेट्रोल पंप पर भुगतान प्राप्त करते समय कारोबारी के पास ऐसी कोई व्यवस्था नहीं होती जिससे यह पता लगाया जा सके कि ग्राहक के बैंक खाते या उससे पहले हुए किसी लेनदेन का संबंध किसी साइबर अपराध की जांच से है या नहीं।

    डीलरों ने बताया कि डिजिटल भुगतान अब उनके कारोबार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। एक औसत पेट्रोल पंप पर प्रतिदिन करीब 200 से 500 डिजिटल लेनदेन होने का दावा किया गया है। कई पेट्रोल पंपों पर कुल कारोबार का आधे से अधिक हिस्सा यूपीआई और दूसरे कैशलेस माध्यमों से आने की बात कही गई है।

    समस्या तब गंभीर हो जाती है जब किसी ग्राहक का भुगतान बाद में साइबर अपराध की जांच में शामिल पाया जाता है। डीलरों का कहना है कि ऐसी स्थिति में जांच एजेंसियों के निर्देश पर बैंक संबंधित राशि पर रोक लगा सकते हैं या कई मामलों में पूरे बैंक खाते को फ्रीज कर देते हैं।

    पेट्रोल पंप संचालकों का तर्क है कि एक विवादित लेनदेन के कारण पूरे कारोबारी खाते को रोक देना उनके लिए गंभीर वित्तीय परेशानी पैदा करता है। पेट्रोल पंप का दैनिक संचालन लगातार बैंकिंग सुविधाओं पर निर्भर रहता है। ईंधन की खरीद, कर्मचारियों का वेतन, बिजली और अन्य कारोबारी खर्चों के लिए बैंक खाते का सुचारू रूप से काम करना आवश्यक होता है।

    एसोसिएशन ने पुलिस कार्रवाई के तरीके को लेकर भी चिंता जताई है। संगठन का आरोप है कि कुछ मामलों में पेट्रोल पंप संचालकों को पूछताछ के लिए सुबह के समय ले जाया गया, जबकि शुरुआत में उन्हें कथित तौर पर यह स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई कि किस लेनदेन को जांच के दायरे में रखा गया है।

    डीलरों का कहना है कि अधिकृत डिजिटल भुगतान प्रणाली के जरिए ग्राहक से पैसा स्वीकार करने वाले व्यापारी को केवल इसलिए संदिग्ध नहीं माना जाना चाहिए क्योंकि बाद में उस भुगतान को किसी साइबर अपराध की जांच से जोड़ दिया गया है। उनका कहना है कि कारोबारी और संदिग्ध अपराधी के बीच अंतर स्पष्ट करने के लिए अलग व्यवस्था होनी चाहिए।

    एसोसिएशन ने राज्य सरकार से ऐसी व्यवस्था बनाने की मांग की है, जिसमें वैध कारोबारियों के बैंक खातों को पर्याप्त आधार और स्पष्ट प्रक्रिया के बिना फ्रीज न किया जाए। संगठन चाहता है कि जांच एजेंसियां विवादित राशि और पूरे कारोबारी खाते के बीच अंतर करें, ताकि जांच भी जारी रहे और सामान्य कारोबार भी प्रभावित न हो।

    डीलरों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का व्यावहारिक समाधान नहीं निकला तो राज्य के पेट्रोल पंप यूपीआई और अन्य डिजिटल भुगतान स्वीकार करना बंद कर सकते हैं। ऐसा होने पर ग्राहक फिर से नकद भुगतान पर निर्भर हो सकते हैं। इससे तमिलनाडु में तेजी से बढ़े डिजिटल भुगतान के इस्तेमाल पर भी असर पड़ने की आशंका है।

  • UPI Payment पर MDR की चर्चा के बीच सरकार ने साफ किया पूरा गणित, जानिए किसे देना पड़ सकता है शुल्क

    UPI Payment पर MDR की चर्चा के बीच सरकार ने साफ किया पूरा गणित, जानिए किसे देना पड़ सकता है शुल्क

    नई दिल्ली ।यूपीआई से भुगतान करने वाले करोड़ों लोगों के बीच पिछले कुछ दिनों से मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR को लेकर सवाल उठ रहे थे। खासतौर पर 2000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाए जाने की चर्चाओं के कारण यह आशंका बनी हुई थी कि आने वाले समय में डिजिटल भुगतान महंगा हो सकता है। अब सरकार ने इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि आम लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।

    लोकसभा में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 से संबंधित विधेयक पारित होने के बाद सरकार ने यूपीआई भुगतान व्यवस्था और संभावित MDR को लेकर अपना रुख सामने रखा है। सरकार के मुताबिक, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के बीच होने वाले यूपीआई भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा। ऐसे में रोजमर्रा के व्यक्तिगत लेनदेन करने वाले ग्राहकों पर प्रस्तावित व्यवस्था का सीधा असर नहीं पड़ेगा।

    MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट उस शुल्क को कहा जाता है, जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारी या दुकानदार की ओर से बैंक अथवा भुगतान सेवा उपलब्ध कराने वाली संस्था को दिया जाता है। यह डिजिटल भुगतान की सुविधा से जुड़ी लागत का हिस्सा होता है। इसलिए इसे सीधे ग्राहक पर लगाया जाने वाला शुल्क नहीं माना जाता है।

    सरकार ने कहा है कि यदि भविष्य में यूपीआई लेनदेन पर MDR लागू किया जाता है तो उसका दायरा सीमित रखा जाएगा। सभी तरह के यूपीआई भुगतान पर एक समान शुल्क लगाने की कोई योजना नहीं बताई गई है। व्यक्ति से व्यक्ति होने वाले लेनदेन इससे बाहर रहेंगे और अधिकांश छोटे दुकानदारों तथा कारोबारियों पर भी इसका बड़ा असर नहीं पड़ने की बात कही गई है।

    संभावित व्यवस्था के तहत तय सीमा से अधिक मूल्य वाले कुछ चुनिंदा मर्चेंट भुगतान पर MDR लगाया जा सकता है। सरकार के अनुसार, ऐसी स्थिति में शुल्क की राशि काफी कम रखी जा सकती है। यह शुल्क कार्ड के जरिए होने वाले डिजिटल भुगतान पर लगने वाले शुल्क की तुलना में भी कम हो सकता है।

    सरकार ने संभावित MDR की जरूरत के पीछे यूपीआई के लगातार बढ़ते इस्तेमाल को प्रमुख कारण बताया है। डिजिटल भुगतान का दायरा बढ़ने के साथ साइबर सुरक्षा को मजबूत करने, ऑनलाइन धोखाधड़ी रोकने और भुगतान प्रणाली को सुरक्षित बनाए रखने के लिए लगातार खर्च की आवश्यकता होती है। इसी वजह से डिजिटल भुगतान व्यवस्था की लागत और उसके प्रबंधन को लेकर चर्चा चल रही है।

    हालांकि, अभी यूपीआई पर MDR लागू करने को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। वित्त मंत्री ने भी स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में MDR लागू किया जाता है तो उसका भुगतान व्यापारी करेंगे, ग्राहकों से सीधे शुल्क लेने की व्यवस्था नहीं होगी। इससे व्यक्तिगत यूपीआई भुगतान करने वाले लोगों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ने की आशंका फिलहाल नहीं है।

    भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा भी इस विषय में जल्दबाजी में कोई निष्कर्ष निकालने से बचने की बात कह चुके हैं। भुगतान व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अभी बातचीत जारी है। अंतिम नीति तय होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किन श्रेणियों के मर्चेंट भुगतान को संभावित शुल्क के दायरे में रखा जा सकता है।

    इस बीच वित्त मंत्रालय ने उन दावों को भी गलत बताया है, जिनमें कहा गया था कि किसी बाहरी दबाव के कारण यूपीआई से जुड़ी नीति में बदलाव किया जा रहा है। सरकार का मौजूदा रुख स्पष्ट है कि व्यक्ति से व्यक्ति होने वाले यूपीआई भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा और यदि भविष्य में MDR की व्यवस्था लागू होती है तो उसका दायरा सीमित रखा जाएगा।

    इसलिए फिलहाल सामान्य यूपीआई उपयोगकर्ताओं के लिए राहत की स्थिति है। छोटे व्यक्तिगत भुगतान करने वालों को किसी नए शुल्क की चिंता करने की जरूरत नहीं है। दूसरी ओर, व्यापारिक लेनदेन को लेकर अंतिम नियम आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि संभावित MDR किन भुगतान श्रेणियों पर लागू होगा और उसकी वास्तविक दर कितनी होगी।

  • UPI, डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड, जानिए कौन-सा पेमेंट विकल्प सबसे सस्ता, सुरक्षित और सबसे ज्यादा फायदेमंद

    UPI, डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड, जानिए कौन-सा पेमेंट विकल्प सबसे सस्ता, सुरक्षित और सबसे ज्यादा फायदेमंद

    नई दिल्ली । भारत में डिजिटल भुगतान तेजी से आम लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। बाजार, ऑनलाइन शॉपिंग, बिल भुगतान या यात्रा टिकट बुकिंग जैसे अधिकांश काम अब UPI, डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड के माध्यम से आसानी से किए जा रहे हैं। ऐसे में कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर भुगतान का सबसे सस्ता और फायदेमंद तरीका कौन-सा है। इसका जवाब उपयोग के उद्देश्य, खर्च की आदत और मिलने वाले लाभों पर निर्भर करता है।

    सामान्य तौर पर बैंक खाते से किए जाने वाले UPI भुगतान पर ग्राहकों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाता। अधिकांश लेनदेन बिना किसी अतिरिक्त लागत के पूरे हो जाते हैं और भुगतान की पूरी राशि सीधे सामने वाले के खाते में पहुंचती है। यही कारण है कि रोजमर्रा की खरीदारी, छोटे भुगतान और तत्काल लेनदेन के लिए UPI को सबसे सुविधाजनक और किफायती विकल्प माना जाता है। इसकी तेज प्रक्रिया और व्यापक स्वीकार्यता ने इसे देश का सबसे लोकप्रिय डिजिटल भुगतान माध्यम बना दिया है।

    वहीं डेबिट और क्रेडिट कार्ड के माध्यम से किए जाने वाले भुगतान में कुछ परिस्थितियों में अतिरिक्त शुल्क जुड़ सकता है। कई मामलों में बैंक और पेमेंट नेटवर्क व्यापारियों से मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR वसूलते हैं। हालांकि यह शुल्क आमतौर पर ग्राहक से सीधे नहीं लिया जाता, लेकिन कुछ व्यापारी या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म सुविधा शुल्क के रूप में इसकी भरपाई ग्राहकों से कर सकते हैं। विशेष रूप से ऑनलाइन टिकट बुकिंग या कुछ सेवाओं में अतिरिक्त शुल्क देखने को मिल सकता है।

    क्रेडिट कार्ड का सबसे बड़ा लाभ इसके साथ मिलने वाले रिवॉर्ड पॉइंट्स, कैशबैक, विशेष छूट और अन्य प्रीमियम सुविधाएं हैं। कई कार्डधारकों को एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस, यात्रा बीमा, शॉपिंग ऑफर और ब्याज-मुक्त क्रेडिट अवधि जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं। यदि उपभोक्ता समय पर पूरा बिल चुका देता है तो इन सुविधाओं का लाभ बिना अतिरिक्त ब्याज के उठाया जा सकता है। लेकिन निर्धारित समय तक भुगतान नहीं करने पर ब्याज और लेट फीस का बोझ काफी बढ़ सकता है।

    डेबिट कार्ड उन लोगों के लिए बेहतर माना जाता है जो सीधे अपने बैंक खाते से भुगतान करना चाहते हैं और कर्ज से बचना चाहते हैं। इसमें खर्च उसी राशि तक सीमित रहता है जो खाते में उपलब्ध होती है। दूसरी ओर क्रेडिट कार्ड जिम्मेदारी के साथ उपयोग करने पर अधिक लाभ दे सकता है, लेकिन लापरवाही की स्थिति में यह अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी बन सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे और नियमित भुगतान के लिए UPI सबसे सस्ता और आसान विकल्प है, जबकि बड़े खर्च, ऑनलाइन खरीदारी और रिवॉर्ड्स का लाभ लेने के इच्छुक उपभोक्ताओं के लिए क्रेडिट कार्ड अधिक उपयोगी हो सकता है। वहीं डेबिट कार्ड उन लोगों के लिए संतुलित विकल्प है जो सीधे बैंक खाते से सुरक्षित भुगतान करना पसंद करते हैं। इसलिए किसी एक माध्यम को सभी परिस्थितियों में सर्वोत्तम नहीं कहा जा सकता, बल्कि आवश्यकता और भुगतान की प्रकृति के अनुसार सही विकल्प चुनना अधिक लाभदायक होता है।

  • UPI पेमेंट सिस्टम में हो सकता है बड़ा बदलाव, सरकार डिजिटल भुगतान व्यवस्था को टिकाऊ बनाने की तैयारी में

    UPI पेमेंट सिस्टम में हो सकता है बड़ा बदलाव, सरकार डिजिटल भुगतान व्यवस्था को टिकाऊ बनाने की तैयारी में

    नई दिल्ली । देश में डिजिटल भुगतान का सबसे बड़ा माध्यम बन चुके यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को लेकर बड़े बदलाव की चर्चा तेज हो गई है। सरकार डिजिटल भुगतान प्रणाली को अधिक टिकाऊ और मजबूत बनाने के लिए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) से जुड़े नियमों में बदलाव की संभावनाओं पर विचार कर रही है। हालांकि अभी इस संबंध में कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है और मौजूदा व्यवस्था पहले की तरह जारी है।

    चर्चा के अनुसार बड़े कारोबारियों द्वारा किए जाने वाले उच्च मूल्य के UPI लेनदेन पर सीमित MDR लागू किया जा सकता है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य छोटे व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डाले बिना डिजिटल भुगतान प्रणाली के संचालन, तकनीकी विकास और सुरक्षा से जुड़ी लागत के लिए स्थायी व्यवस्था तैयार करना है।

    वर्तमान में बैंक-टू-बैंक UPI भुगतान पर किसी प्रकार का MDR लागू नहीं है। यही वजह है कि पिछले कुछ वर्षों में देशभर में UPI का उपयोग तेजी से बढ़ा है। लाखों व्यापारी और करोड़ों उपभोक्ता रोजाना बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के डिजिटल भुगतान का उपयोग कर रहे हैं। इस व्यवस्था ने नकदरहित लेनदेन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    डिजिटल भुगतान से जुड़े संस्थानों का मानना है कि भुगतान नेटवर्क का विस्तार, साइबर सुरक्षा, सर्वर क्षमता और नई तकनीकों के विकास पर लगातार निवेश करना पड़ता है। ऐसे में लंबे समय तक इस व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए एक संतुलित राजस्व मॉडल की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इसी कारण MDR व्यवस्था में सीमित बदलाव की संभावना पर विचार किया जा रहा है।

    यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो यह मुख्य रूप से बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों और अधिक मूल्य वाले लेनदेन तक सीमित रह सकता है। आम उपभोक्ताओं से सीधे अतिरिक्त शुल्क वसूले जाने का कोई अंतिम निर्णय फिलहाल नहीं हुआ है। सरकार का उद्देश्य डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना और साथ ही भुगतान प्रणाली को आर्थिक रूप से मजबूत बनाए रखना बताया जा रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि MDR केवल बड़े व्यापारियों तक सीमित रहता है तो सामान्य ग्राहकों पर इसका सीधा असर नहीं पड़ेगा। हालांकि कुछ मामलों में व्यापारियों की लागत बढ़ने पर उसका प्रभाव वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर दिखाई दे सकता है। इसलिए किसी भी निर्णय से पहले सभी पक्षों के हितों को ध्यान में रखा जाएगा।

    डिजिटल भुगतान ने देश में वित्तीय लेनदेन की तस्वीर बदल दी है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों तक UPI का व्यापक उपयोग हो रहा है। इसी वजह से सरकार और संबंधित संस्थाएं ऐसी व्यवस्था विकसित करना चाहती हैं, जिससे डिजिटल भुगतान की गति भी बनी रहे और इसका संचालन भी लंबे समय तक प्रभावी ढंग से किया जा सके।

    फिलहाल UPI उपयोगकर्ताओं के लिए कोई नया शुल्क लागू नहीं हुआ है और न ही नए नियम प्रभावी हुए हैं। यदि भविष्य में इस संबंध में कोई निर्णय लिया जाता है तो उसके बाद ही नई व्यवस्था लागू होगी। तब तक आम लोग पहले की तरह बिना किसी बदलाव के UPI के माध्यम से भुगतान कर सकेंगे।

  • UPI का दबदबा कायम, जुलाई में रिकॉर्ड 23.66 अरब ट्रांजैक्शन से डिजिटल पेमेंट ने पकड़ी नई रफ्तार

    UPI का दबदबा कायम, जुलाई में रिकॉर्ड 23.66 अरब ट्रांजैक्शन से डिजिटल पेमेंट ने पकड़ी नई रफ्तार


    नई दिल्ली। देश में डिजिटल भुगतान व्यवस्था लगातार मजबूत होती जा रही है और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूपीआई ने एक बार फिर शानदार प्रदर्शन दर्ज किया है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 में यूपीआई के माध्यम से किए गए लेनदेन की संख्या में सालाना आधार पर 22 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इस दौरान कुल 23.66 अरब यानी 2366 करोड़ से ज्यादा यूपीआई ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए। वहीं, इन डिजिटल लेनदेन का कुल मूल्य 19 प्रतिशत बढ़कर 29.88 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया।

    आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई महीने में हर दिन औसतन 76.3 करोड़ यूपीआई ट्रांजैक्शन किए गए। वहीं, प्रतिदिन औसतन 96,383 करोड़ रुपए का डिजिटल भुगतान यूपीआई प्लेटफॉर्म के जरिए हुआ। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि देश में लोग तेजी से नकदी आधारित भुगतान से डिजिटल भुगतान की ओर बढ़ रहे हैं।

    इससे पहले जून 2026 में भी यूपीआई ने शानदार प्रदर्शन किया था। जून में यूपीआई के जरिए 22.72 अरब ट्रांजैक्शन हुए थे, जो पिछले साल की तुलना में 23 प्रतिशत अधिक थे। इस दौरान कुल लेनदेन राशि 28.92 लाख करोड़ रुपए रही थी। जून में रोजाना औसतन 75.7 करोड़ यूपीआई ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए थे।

    सरकार के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में यूपीआई भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था का सबसे मजबूत आधार बनकर उभरा है। वित्त वर्ष 2021-22 में यूपीआई के जरिए 4,595.61 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए थे, जिनका कुल मूल्य 84.16 लाख करोड़ रुपए था। इसके बाद वित्त वर्ष 2022-23 में लेनदेन की संख्या बढ़कर 8,371.44 करोड़ और कुल मूल्य 139.15 लाख करोड़ रुपए पहुंच गया।

    वित्त वर्ष 2023-24 में यूपीआई ट्रांजैक्शन की संख्या 13,112.95 करोड़ रही, जबकि कुल लेनदेन मूल्य 199.95 लाख करोड़ रुपए दर्ज किया गया। वहीं, वित्त वर्ष 2024-25 में यूपीआई के जरिए 18,586.60 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए और इनका कुल मूल्य बढ़कर 260.56 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया।

    डिजिटल भुगतान के इस विस्तार को भारत की वित्तीय समावेशन नीति की बड़ी सफलता माना जा रहा है। यूपीआई ने छोटे व्यापारियों, दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों से लेकर बड़े कारोबारियों तक भुगतान प्रक्रिया को आसान बनाया है। मोबाइल फोन के जरिए कुछ सेकंड में होने वाले भुगतान ने देश में डिजिटल लेनदेन की संस्कृति को तेजी से बढ़ावा दिया है।

    वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने हाल ही में लोकसभा में बताया था कि एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (एनआईपीएल) भारत की डिजिटल भुगतान तकनीक को दुनिया के अन्य देशों तक पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है। एनआईपीएल कई देशों के साथ साझेदारी कर भारतीय भुगतान प्रणाली के वैश्विक विस्तार को बढ़ावा दे रही है।

    इन अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के चलते भारतीय नागरिक विदेशों में भी यूपीआई आधारित भुगतान कर पा रहे हैं। साथ ही, अन्य देशों को भी रियल टाइम डिजिटल भुगतान प्रणाली विकसित करने में मदद मिल रही है। वर्तमान में यूपीआई संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, फ्रांस, मॉरीशस और श्रीलंका समेत आठ से अधिक देशों में उपलब्ध है।

    तेजी से बढ़ते यूपीआई उपयोग से साफ है कि भारत डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में अपनी मजबूत स्थिति बना रहा है। आने वाले समय में यूपीआई के और अधिक देशों तक विस्तार की संभावना है, जिससे भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है।

  • डिजिटल भुगतान में आने वाली बड़ी क्रांति, बिना इंटरनेट के UPI पेमेंट की तैयारी, खराब नेटवर्क वाले क्षेत्रों में भी मिलेगा निर्बाध भुगतान

    डिजिटल भुगतान में आने वाली बड़ी क्रांति, बिना इंटरनेट के UPI पेमेंट की तैयारी, खराब नेटवर्क वाले क्षेत्रों में भी मिलेगा निर्बाध भुगतान

    नई दिल्ली । भारत की डिजिटल भुगतान व्यवस्था को और अधिक सुलभ एवं विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ऐसी नई तकनीक विकसित कर रहा है, जिसकी मदद से इंटरनेट उपलब्ध न होने पर भी UPI के माध्यम से भुगतान किया जा सकेगा। यह सुविधा विशेष रूप से उन परिस्थितियों में उपयोगी होगी, जहां नेटवर्क की समस्या के कारण डिजिटल लेनदेन प्रभावित होता है। प्रस्तावित तकनीक के लागू होने के बाद फ्लाइट, अंडरग्राउंड मेट्रो, दूरदराज के क्षेत्रों और कमजोर नेटवर्क वाले स्थानों पर भी UPI भुगतान करना पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हो जाएगा।

    नई व्यवस्था नियर फील्ड कम्युनिकेशन (NFC) तकनीक पर आधारित होगी। इस प्रणाली में उपयोगकर्ता को QR कोड स्कैन करने की आवश्यकता नहीं होगी। यदि स्मार्टफोन में NFC की सुविधा उपलब्ध है, तो केवल उसे भुगतान मशीन के पास टैप करने से लेनदेन पूरा किया जा सकेगा। इस प्रक्रिया के दौरान न तो ग्राहक के मोबाइल में सक्रिय इंटरनेट कनेक्शन आवश्यक होगा और न ही व्यापारी के भुगतान टर्मिनल को इंटरनेट से जुड़े रहने की जरूरत होगी। इससे भुगतान प्रक्रिया अधिक तेज, सरल और सुविधाजनक बनने की उम्मीद है।

    इस सुविधा के शुरुआती चरण में एक बार में अधिकतम 2,000 रुपये तक का भुगतान किया जा सकेगा। इसके लिए उपयोगकर्ताओं को इंटरनेट उपलब्ध होने के दौरान पहले अपने UPI Lite वॉलेट में राशि जोड़नी होगी। बाद में उसी बैलेंस का उपयोग ऑफलाइन भुगतान के लिए किया जा सकेगा। सीमित राशि वाले इन लेनदेन में बार-बार UPI पिन दर्ज करने की आवश्यकता भी कम हो सकती है, जिससे छोटी खरीदारी पहले से अधिक तेज गति से पूरी की जा सकेगी।

    इस नई तकनीक का सबसे बड़ा लाभ उन स्थानों पर मिलेगा, जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी अस्थायी रूप से उपलब्ध नहीं होती। हवाई यात्रा के दौरान विमान में इंटरनेट की सीमित उपलब्धता या अंडरग्राउंड मेट्रो में नेटवर्क बाधित होने जैसी परिस्थितियों में भी यात्री आसानी से डिजिटल भुगतान कर सकेंगे। इसी तरह ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में, जहां मोबाइल नेटवर्क अक्सर कमजोर रहता है, वहां भी यह सुविधा डिजिटल भुगतान को अधिक भरोसेमंद बना सकती है।

    हालांकि इस तकनीक का लाभ उठाने के लिए केवल ग्राहकों के स्मार्टफोन में NFC सुविधा होना पर्याप्त नहीं होगा। व्यापारियों के पॉइंट ऑफ सेल (POS) टर्मिनलों को भी नए मानकों के अनुसार प्रमाणित किया जाएगा। इसके बाद बैंक और विभिन्न UPI एप्लीकेशन अपने प्लेटफॉर्म पर इस सुविधा को चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध कराएंगे। इससे पूरे डिजिटल भुगतान नेटवर्क को नए तकनीकी मानकों के अनुरूप तैयार किया जाएगा।

    फिलहाल यह सुविधा विकास और परीक्षण के चरण में है तथा आम उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध नहीं कराई गई है। इसकी आधिकारिक लॉन्च तिथि की भी अभी घोषणा नहीं हुई है। हालांकि तकनीक पर तेजी से काम जारी है और इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुविधा शुरू होने के बाद भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली और अधिक मजबूत होगी तथा नेटवर्क संबंधी समस्याओं के कारण होने वाले भुगतान विफल होने की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आ सकती है। इससे डिजिटल लेनदेन का दायरा और बढ़ेगा तथा उपयोगकर्ताओं को हर परिस्थिति में सुरक्षित और सहज भुगतान का नया विकल्प मिलेगा।

  • भारत की आर्थिक प्रगति का नया आधार बनी डिजिटल अर्थव्यवस्था, विशेषज्ञों ने सुरक्षित और समावेशी डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम पर दिया जोर

    भारत की आर्थिक प्रगति का नया आधार बनी डिजिटल अर्थव्यवस्था, विशेषज्ञों ने सुरक्षित और समावेशी डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम पर दिया जोर

    नई दिल्ली । भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था तेजी से देश की आर्थिक और सामाजिक प्रगति की प्रमुख ताकत बनकर उभर रही है। डिजिटल भुगतान, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और नई तकनीकों के विस्तार ने न केवल वित्तीय सेवाओं की पहुंच को व्यापक बनाया है, बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी अधिक पारदर्शी, तेज और प्रभावी बनाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत की विकास यात्रा में डिजिटल इकोसिस्टम की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होने वाली है।

    राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित डिजिटल भुगतान विषयक एक विचार-विमर्श कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने डिजिटल परिवर्तन के कई पहलुओं पर अपने विचार साझा किए। उनका कहना था कि डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना ने वित्तीय समावेशन को नई दिशा दी है और देश के करोड़ों नागरिकों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसके माध्यम से सरकारी सेवाओं, वित्तीय लेनदेन और डिजिटल सुविधाओं तक लोगों की पहुंच पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हुई है।

    विशेषज्ञों ने इस बात पर भी जोर दिया कि डिजिटल अर्थव्यवस्था केवल तकनीक के विस्तार से मजबूत नहीं होगी। इसके लिए गुणवत्तापूर्ण मानव संसाधन, मजबूत संस्थागत ढांचा, अनुसंधान, नवाचार और लगातार निवेश की आवश्यकता है। उनका मानना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी उभरती तकनीकों का प्रभावी उपयोग करने वाले देश भविष्य की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अधिक मजबूत स्थिति हासिल कर सकेंगे। इसलिए नई तकनीकों को अपनाने के साथ-साथ कौशल विकास पर भी समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है।

    डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना को लेकर विशेषज्ञों ने कहा कि इसकी सफलता का सबसे बड़ा आधार नागरिकों का भरोसा है। यदि डिजिटल सेवाओं में डेटा सुरक्षा, गोपनीयता, उपयोगकर्ता की सहमति और सभी के लिए समान पहुंच सुनिश्चित की जाती है, तभी डिजिटल परिवर्तन का वास्तविक लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंच सकेगा। उन्होंने तकनीकी विकास के साथ सामाजिक जिम्मेदारी और पारदर्शिता बनाए रखने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

    डिजिटल भुगतान प्रणाली के भविष्य को लेकर भी कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए। विशेषज्ञों का मानना है कि अब तक डिजिटल भुगतान व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य व्यापक पहुंच और इंटरऑपरेबिलिटी रहा है, लेकिन आने वाले समय में इसकी मजबूती, बैकअप सिस्टम और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित धोखाधड़ी पहचान प्रणाली को प्राथमिकता देनी होगी। इससे लेनदेन अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बन सकेंगे।

    कार्यक्रम में सीमा पार डिजिटल भुगतान को आसान बनाने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि इसके लिए एकीकृत डिजिटल अवसंरचना, समान तकनीकी मानक और स्पष्ट कानूनी व्यवस्था विकसित करना जरूरी होगा। इससे भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकेगी तथा अंतरराष्ट्रीय लेनदेन भी सरल और सुरक्षित बनेंगे।

    साइबर सुरक्षा को डिजिटल अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया। विशेषज्ञों ने बढ़ते साइबर अपराध और डिजिटल धोखाधड़ी को देखते हुए मजबूत संस्थागत समन्वय, आधुनिक सुरक्षा तकनीकों और आम नागरिकों में जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया। उनका मानना है कि डिजिटल वित्तीय प्रणाली में लोगों का भरोसा बनाए रखने के लिए सुरक्षा उपायों को लगातार मजबूत करना आवश्यक है।

    विशेषज्ञों के अनुसार भारत का डिजिटल इकोसिस्टम अब केवल भुगतान प्रणाली तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आर्थिक विकास, नवाचार, रोजगार, उद्यमिता और सामाजिक समावेशन का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। यदि तकनीकी प्रगति के साथ सुरक्षा, भरोसा और समावेशिता को समान प्राथमिकता दी जाती है, तो भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था में और अधिक मजबूत स्थान हासिल कर सकता है।

  • ग्रीस तक पहुंचा भारत का यूपीआई नेटवर्क, पीयूष गोयल बोले- डिजिटल भुगतान के साथ निवेश, व्यापार और साझेदारी को मिलेगी नई रफ्तार

    ग्रीस तक पहुंचा भारत का यूपीआई नेटवर्क, पीयूष गोयल बोले- डिजिटल भुगतान के साथ निवेश, व्यापार और साझेदारी को मिलेगी नई रफ्तार

    नई दिल्ली । भारत के डिजिटल भुगतान तंत्र को वैश्विक स्तर पर लगातार मिल रही स्वीकार्यता के बीच यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) की सेवाएं अब ग्रीस में भी शुरू हो गई हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इसे भारत की डिजिटल नवाचार क्षमता और तकनीक आधारित वित्तीय समाधानों की अंतरराष्ट्रीय पहचान का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि इस पहल से योग्य उपभोक्ताओं को तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक डिजिटल भुगतान का विकल्प मिलेगा, वहीं सीमा पार लेनदेन की लागत भी पारंपरिक भुगतान प्रणालियों की तुलना में कम होगी।

    पीयूष गोयल ने कहा कि दुनिया के विभिन्न देशों में यूपीआई को मिल रही बढ़ती स्वीकृति इस बात का प्रमाण है कि भारत द्वारा विकसित डिजिटल भुगतान प्रणाली पर वैश्विक भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है। उनके अनुसार तकनीक आधारित समाधान केवल भुगतान को सरल बनाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग, व्यापारिक संपर्क और साझा विकास के नए अवसर भी तैयार कर रहे हैं।

    ग्रीस यात्रा के दौरान केंद्रीय मंत्री ने यूरोबैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी फोकियन करावियास से मुलाकात कर दोनों देशों के बीच आर्थिक और निवेश संबंधों को मजबूत बनाने पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में ग्रीस की कंपनियों को भारत में निवेश के लिए प्रोत्साहित करने के साथ-साथ विनिर्माण, बुनियादी ढांचा और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर विचार किया गया। दोनों पक्षों ने भविष्य में आर्थिक भागीदारी को और व्यापक बनाने की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की।

    एथेंस स्थित यूरोबैंक मुख्यालय में मंत्री ने यूरोबैंक और एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड की साझेदारी के तहत शुरू हुई यूपीआई सेवा का लाइव प्रदर्शन भी देखा। इस अवसर पर बैंकिंग और डिजिटल भुगतान क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों ने नई व्यवस्था की कार्यप्रणाली और इसके संभावित लाभों की जानकारी दी। इसे भारत के डिजिटल भुगतान नेटवर्क के वैश्विक विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

    अपने दौरे के दौरान पीयूष गोयल ने भारत-ग्रीस बिजनेस फोरम को भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि, स्थिर व्यापक आर्थिक स्थिति और तेजी से विकसित होता औद्योगिक वातावरण विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षक अवसर प्रदान करता है। उन्होंने ग्रीस के उद्योग जगत से भारत में दीर्घकालिक निवेश और औद्योगिक सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता व्यापार, निवेश और आर्थिक साझेदारी को नई दिशा दे सकता है। उनका मानना है कि यदि इस दिशा में प्रगति होती है तो भारतीय और यूरोपीय उद्योगों के बीच सहयोग का दायरा और अधिक व्यापक होगा तथा दोनों क्षेत्रों की कंपनियों को नए बाजार और निवेश के अवसर प्राप्त होंगे।

    उन्होंने ग्रीस के उद्योगपतियों और निवेशकों से सह-निर्माण, सह-निवेश और संयुक्त औद्योगिक परियोजनाओं में भागीदारी बढ़ाने का आग्रह किया। उनके अनुसार दोनों देशों के बीच तकनीक, विनिर्माण, बुनियादी ढांचा, वित्तीय सेवाओं और डिजिटल नवाचार जैसे क्षेत्रों में व्यापक सहयोग की संभावनाएं मौजूद हैं। इससे रोजगार, निवेश और औद्योगिक विकास को भी गति मिलेगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रीस में यूपीआई सेवा की शुरुआत भारत की डिजिटल वित्तीय प्रणाली के बढ़ते वैश्विक प्रभाव का संकेत है। इससे अंतरराष्ट्रीय भुगतान व्यवस्था अधिक सरल और किफायती बनने के साथ-साथ भारत और ग्रीस के बीच व्यापारिक संपर्क, निवेश सहयोग तथा आर्थिक संबंधों को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। आने वाले समय में अन्य देशों में भी यूपीआई के विस्तार से भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की वैश्विक पहुंच और मजबूत हो सकती है।

  • भारत की डिजिटल ताकत का फ्रांस में प्रदर्शन, गैलरीज लाफायेट में यूपीआई सेवा शुरू; पीयूष गोयल बोले- वैश्विक पहुंच का बड़ा पड़ाव

    भारत की डिजिटल ताकत का फ्रांस में प्रदर्शन, गैलरीज लाफायेट में यूपीआई सेवा शुरू; पीयूष गोयल बोले- वैश्विक पहुंच का बड़ा पड़ाव


    नई दिल्ली ।
    भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) ने वैश्विक स्तर पर अपनी उपस्थिति को और मजबूत करते हुए फ्रांस के प्रमुख रिटेल केंद्रों में प्रवेश कर लिया है। फ्रांस के नीस मैसेना स्थित प्रतिष्ठित गैलरीज लाफायेट में यूपीआई सेवा की शुरुआत के साथ भारतीय डिजिटल भुगतान नेटवर्क को अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक नई पहचान मिली है। इस अवसर पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal ने इसे भारत की डिजिटल क्षमताओं और तकनीकी नवाचार की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

    यूपीआई सेवा शुरू होने के बाद अब भारतीय पर्यटक और ग्राहक फ्रांस के इस प्रसिद्ध रिटेल स्टोर में सीधे यूपीआई के माध्यम से भुगतान कर सकेंगे। इससे न केवल भुगतान प्रक्रिया अधिक आसान और सुरक्षित होगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय डिजिटल इकोसिस्टम की स्वीकार्यता भी बढ़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल सीमापार डिजिटल लेनदेन को सरल बनाने और वैश्विक भुगतान प्रणाली में भारत की भूमिका को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    पीयूष गोयल ने इस अवसर पर कहा कि फ्रांस के प्रमुख रिटेल गंतव्यों में से एक गैलरीज लाफायेट में यूपीआई का लॉन्च होना भारत की तकनीकी प्रगति और विश्वस्तरीय डिजिटल भुगतान समाधान की क्षमता का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि यूपीआई के वैश्विक विस्तार की यात्रा में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होगी और इससे भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी।

    इस पहल को सफल बनाने में डिजिटल भुगतान क्षेत्र की कंपनियों और तकनीकी साझेदारों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। सरकार का मानना है कि इस प्रकार की साझेदारियां वैश्विक स्तर पर सहज, सुरक्षित और इंटरऑपरेबल भुगतान व्यवस्था विकसित करने में मदद करेंगी। साथ ही इससे विदेशी बाजारों में भारतीय फिनटेक समाधानों के लिए नए अवसर भी पैदा होंगे।

    भारत और फ्रांस के बीच बढ़ते आर्थिक एवं तकनीकी सहयोग के संदर्भ में भी इस पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच पिछले कुछ वर्षों में रणनीतिक, औद्योगिक, तकनीकी और नवाचार आधारित सहयोग में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। यूपीआई का विस्तार इसी मजबूत होते संबंध का एक नया उदाहरण माना जा रहा है।

    फ्रांस दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री ने विभिन्न उद्योग प्रतिनिधियों, निवेशकों, शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों के साथ भी संवाद किया। इस दौरान उन्होंने भारत में उपलब्ध निवेश अवसरों, डिजिटल परिवर्तन और नवाचार आधारित विकास मॉडल पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने फ्रांसीसी उद्योग जगत से भारत की विकास यात्रा में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान भी किया।

    यात्रा के दौरान मंत्री ने यूरोप के प्रमुख विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी केंद्र Sophia Antipolis का भी दौरा किया। यह केंद्र शोध, तकनीक और उद्योग के समन्वय का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है, जहां हजारों तकनीकी कंपनियां अत्याधुनिक क्षेत्रों में कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे नवाचार केंद्र भविष्य की अर्थव्यवस्था को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यूपीआई का अंतरराष्ट्रीय विस्तार भारतीय डिजिटल भुगतान प्रणाली को वैश्विक मान्यता दिलाने के साथ-साथ पर्यटन, व्यापार और सीमा-पार वित्तीय लेनदेन को भी नई गति देगा। आने वाले वर्षों में अन्य देशों और प्रमुख वैश्विक बाजारों में भी यूपीआई की पहुंच बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।