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  • MP में फिर OBC आरक्षण की गूंज… राहुल गांधी ने CM मोहन यादव को पत्र लिखकर की ये मांग

    MP में फिर OBC आरक्षण की गूंज… राहुल गांधी ने CM मोहन यादव को पत्र लिखकर की ये मांग


    नई दिल्ली।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में एक बार फिर ओबीसी आरक्षण (OBC Reservation) का मुद्दा गर्मा गया है. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) को चिट्ठी लिखकर राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने और इसके तहत रुकी हुई नियुक्तियों का रास्ता साफ करने की मांग की है।

    22 सितंबर को लिखी चिट्ठी राहुल गांधी ने कहा कि शनिवार को इंदौर में हुए ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान मध्य प्रदेश के कई छात्रों ने शिक्षा, रोजगार और अपने भविष्य से जुड़े गंभीर मुद्दे उनके सामने रखे थे. इनमें OBC आरक्षण से जुड़ी नियुक्तियों के रुके होने का मुद्दा प्रमुख था।

    राहुल गांधी ने चिट्ठी में कहा कि छात्रों ने बताया कि नियुक्तियों में लंबे समय से हो रही देरी के कारण वे अपने भविष्य को लेकर परेशान हैं. इन युवाओं ने परीक्षाएं पास कर ली हैं और चयन प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है, लेकिन ’87:13′ फॉर्मूले के कारण OBC आरक्षण से जुड़े 13 प्रतिशत पदों को होल्ड पर रखा गया है. इसके चलते चयनित अभ्यर्थी 2022 से अपनी नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं।

    राहुल गांधी ने कहा कि सभी राजनीतिक दलों ने 27 प्रतिशत OBC आरक्षण का सर्वसम्मति से समर्थन किया था, इसके बावजूद यह मामला अब तक नहीं सुलझ पाया है. उन्होंने कहा कि नियुक्तियों में हो रही देरी के कारण अभ्यर्थियों को OBC आरक्षण लागू कराने और नियुक्ति पत्र जारी करने की मांग को लेकर बार-बार सड़कों पर उतरना पड़ रहा है।

    राहुल गांधी ने अपना पत्र सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी साझा किया. उन्होंने लिखा कि इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान OBC वर्ग के छात्रों ने बताया कि चयन प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद 27 प्रतिशत OBC आरक्षण के तहत 13 प्रतिशत पदों पर नियुक्तियां वर्षों से रुकी हुई हैं. राहुल ने कहा कि छात्र बेहद परेशान हैं और चार साल से अधिक समय से इंतजार कर रहे इन युवाओं का कीमती समय अब और बर्बाद नहीं होना चाहिए।

    उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से छात्रों की मांग सुनने की अपील करते हुए कहा कि सभी दलों की सर्वसम्मति से पारित 27 प्रतिशत OBC आरक्षण को लागू किया जाए और सभी चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्तियां दी जाएं।

  • चीन के स्कूल के अजीब नियम पर बवाल, तीसरी बार टॉयलेट जाने पर कार्रवाई !

    चीन के स्कूल के अजीब नियम पर बवाल, तीसरी बार टॉयलेट जाने पर कार्रवाई !

    नई दिल्ली। चीन के गुआंगडोंग प्रांत के एक स्कूल का कथित फरमान इन दिनों चर्चा में है। रूयुआन काउंटी हाई स्कूल में छात्रों के लिए ऐसा नियम बनाए जाने की बात सामने आई है, जिसके तहत छह महीने के सेमेस्टर में क्लास के दौरान छात्र सिर्फ एक बार टॉयलेट जा सकते हैं। दूसरी बार टॉयलेट जाने पर अभिभावकों को स्कूल बुलाने और तीसरी बार ऐसा करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान बताया गया है।

    मामला सामने आने के बाद चीन के सोशल मीडिया पर स्कूल प्रशासन की आलोचना शुरू हो गई। स्थानीय शिक्षा विभाग ने भी अभिभावकों और आम लोगों से मिली शिकायतों के बाद मामले की जांच शुरू कर दी है।

    शिक्षक ने लीक की PPT की तस्वीर

    इस नियम का खुलासा स्कूल की एक स्टाफ मीटिंग में इस्तेमाल की गई पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन की तस्वीर इंटरनेट पर सामने आने के बाद हुआ। बताया गया कि स्कूल के एक शिक्षक ने यह तस्वीर ऑनलाइन साझा की थी।

    PPT में क्लासरूम मैनेजमेंट से जुड़े कई सख्त नियम बताए गए थे। इनमें टॉयलेट जाने से संबंधित नियम सबसे ज्यादा चर्चा में आया।

    बताया गया कि पहली बार भी छात्र को तभी क्लास से बाहर जाकर टॉयलेट जाने की अनुमति मिलेगी, जब स्थिति गंभीर या आपातकालीन हो। दूसरी बार ऐसा करने पर उसके माता-पिता को स्कूल बुलाया जाएगा और छात्र के आचरण तथा अनुशासन को लेकर बातचीत होगी। तीसरी बार टॉयलेट जाने पर छात्र के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की बात कही गई है।

    शिक्षकों की नौकरी पर भी नियमों का असर

    रिपोर्ट के मुताबिक, PPT में शिक्षकों के मूल्यांकन को भी छात्रों के अनुशासन से जोड़ने की बात कही गई थी। बताया गया कि शिक्षक की कक्षा के छात्र नियमों का कितना पालन करते हैं, इसे उनके प्रदर्शन के आकलन का आधार बनाया जाएगा।

    इसी आधार पर शिक्षकों के प्रमोशन, वार्षिक वेतन वृद्धि और पुरस्कारों पर भी असर पड़ने की बात सामने आई है। इससे इस कथित नियम को लेकर विवाद और बढ़ गया।

    सोशल मीडिया पर लोगों ने जताई नाराजगी

    मामला सार्वजनिक होने के बाद चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लोगों ने स्कूल के नियमों पर सवाल उठाए। कुछ यूजर्स ने इसे छात्रों की बुनियादी शारीरिक जरूरतों को अनुशासन से जोड़ने वाला कदम बताया।

    एक यूजर ने सवाल किया कि आखिर यह स्कूल है या जेल। वहीं, कुछ लोगों ने शिक्षा विभाग से नियम को तत्काल रद्द कराने और स्कूल प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

    एक अन्य यूजर ने अपने स्कूल के अनुभव को साझा करते हुए बताया कि वहां क्लास के दौरान टॉयलेट जाने के लिए शिक्षक से हस्ताक्षर वाला पास लेना पड़ता था।

    पहले स्कूल ने बताया गलतफहमी, अब जांच शुरू

    विवाद बढ़ने के बाद स्थानीय मीडिया ने स्कूल प्रशासन से इस संबंध में जवाब मांगा। शुरुआत में एक स्टाफ सदस्य ने इसे महज गलतफहमी बताया। बाद में स्कूल की ओर से इसे विरोधी तत्वों की ओर से फैलाई गई अफवाह करार दिया गया।

    हालांकि, स्थानीय शिक्षा ब्यूरो ने कहा कि उसे अभिभावकों और आम लोगों से इस मामले में बड़ी संख्या में शिकायतें मिली हैं। इसके बाद शिक्षा विभाग ने स्कूल में औपचारिक जांच शुरू कर दी है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वायरल PPT में बताए गए नियम वास्तव में स्कूल की आधिकारिक नीति का हिस्सा थे या नहीं।

  • MP: भोपाल में CJP की बैठक में हंगामा….छात्रों ने लगाए नारे, माइक छीनने की कोशिश

    MP: भोपाल में CJP की बैठक में हंगामा….छात्रों ने लगाए नारे, माइक छीनने की कोशिश


    भोपाल।
    भोपाल (Bhopal) में सीजेपी (CJP) की बैठक के दौरान उस वक्त हंगामा हो गया, जब छात्रों और युवाओं का एक समूह बैठक में पहुंच गया. युवकों ने CJP के प्रतिनिधियों (Representatives) से स्कूलों के ऑडिट (School audits) और संगठन की गतिविधियों को लेकर सवाल किए. सवाल-जवाब के दौरान विवाद बढ़ गया और कुछ युवकों ने नारेबाजी शुरू कर दी. इस दौरान माइक छीनने की कोशिश भी की गई. हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस गांधी भवन पहुंची और छात्रों को समझाइश देकर मामला शांत कराया।

    दरअसल, शहर के गांधी भवन का यह मामला है. यहां CJP की बैठक के दौरान अचानक हंगामे की स्थिति बन गई. दरअसल, छात्रों और युवाओं का एक समूह बैठक के दौरान अंदर पहुंचा था. इनमें कुछ युवक काली टी-शर्ट पहने हुए थे। युवकों ने CJP के प्रतिनिधियों से स्कूलों के ऑडिट को लेकर सवाल पूछना शुरू किया।

    सवाल-जवाब के दौरान दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया. युवकों ने दिल्ली में हुए पिछले प्रदर्शनों और संगठन की गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठाए। इसी दौरान कुछ युवकों ने नारेबाजी शुरू कर दी. ‘यह दिल्ली नहीं, भोपाल है’, ‘कॉकरोच पार्टी मुर्दाबाद’ और ‘तानाशाही नहीं चलेगी’ जैसे नारे लगाए गए. मामला बढ़ने पर माइक छीनने की कोशिश भी हुई।

    हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस बल गांधी भवन पहुंचा. पुलिस ने मौके पर मौजूद छात्रों और युवाओं को समझाइश दी. पुलिस की समझाइश के बाद मामला शांत हुआ. घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें बैठक के दौरान युवकों की नारेबाजी और हंगामे का दृश्य दिखाई दे रहा है।

  • आदित्य ठाकरे ने तो हीरोइन को ही मार दिया, निशिकांत दुबे के विवादित बोल, LS में हंगामा

    आदित्य ठाकरे ने तो हीरोइन को ही मार दिया, निशिकांत दुबे के विवादित बोल, LS में हंगामा

    नई दिल्‍ली। लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान आज (गुरुवार, 16 अप्रैल को) विपक्ष और सत्तापक्ष के सदस्यों के बीच उस समय तीखी नोंकझोक देखने को मिली, जब भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे ने एक अभिनेत्री की कथित आत्महत्या से जुड़े चर्चित मामले का परोक्ष रूप से हवाला देते हुए शिवेसना (UBT) के एक प्रमुख युवा नेता के नाम का उल्लेख किया। इसके बाद शिवसेना (UBT) के सांसद सदन में हंगामा करने लगे।
    शिवसेना सांसदों ने कहा कि दुबे को अपनी टिप्पणी के लिए माफी मांगनी चाहिए।

    दरअसल, शिवसेना (UBT) के सांसद अरविंद सावंत ने महिला आरक्षण अधिनियम से संबंधित ‘संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’, ‘परिसीमन विधेयक, 2026’ और ‘संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026’ पर चर्चा में भाग लेते हुए बलात्कार के मामलों का उल्लेख करते हुए भाजपा से जुड़े दो नेताओं के नामों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भाजपा महिला आरक्षण के बहाने विपक्ष को बदनाम कर रही है, जबकि खुद उसके नेता महिलाओं के यौन शोषण के आरोपी रहे हैं।
    ढोल बजाने के लिए आरक्षण बिल लाया गया

    सावंत ने कहा कि ढोल बजाने के लिए आरक्षण बिल लाया गया है। उन्होंने कहा कि आपने परिसीमन उससे जोड़ा है, इसलिए विरोध हो रहा है। सावंत ने कहा, आज भी मणिपुर में हमले शुरू हैं। आपकी कथनी और करनी में फर्क है, कहा कुछ, और किया कुछ।

    आपको नहीं भूलना चाहिए कि कुलदीप सिंह सेंगर कौन है, बृज भूषण शरण सिंह किसकी पार्टी का है? जिन लोगों ने महिलाओं का यौन शोषण किया है। इस पर जब सत्ता पक्ष ने रोटा-टोकी की तो सावंत ने कहा, “क्यों बलात्कारी बहुत प्यारे हैं क्या आपको?”
    तो आदित्य ठाकरे की भी बात होगी

    इस पर पीठासीन जगदंबिका पाल ने कहा कि कार्रवाई से इसे निकलवा देंगे इस पर भी सावंत भड़क गए। उन्होंने पूछा क्यों क्या बलात्कारी आदर्श है किसी का? इसी बीच , भाजपा सांसद दुबे ने एक अभिनेत्री की कथित आत्महत्या से जुड़े मामले का हवाला देते हुए शिवसेना (UBT) के एक प्रमुख नेता के नाम का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, “अगर ये कुलदीप सेंगर और बृजभूषण शरण की बात करेंगे तो आदित्य ठाकरे की भी बात होगी, उसने हिरोइन को मार दिया।”
    दुबे को माफी मांगनी चाहिए

    इसे लेकर सावंत, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार)की नेता सुप्रिया सुले और कांग्रेस के सदस्यों ने विरोध दर्ज कराया। अरविंद सावंत ने कहा कि भाजपा सांसद दुबे को माफी मांगनी चाहिए। हंगामा होता देख पीठासीन सभापति जगदंबिका पाल ने दुबे और सावंत की टिप्पणियों को सदन की कार्यवाही से हटाने का निर्देश दिया। इसके बाद भी सावंत ने अपना भाषण जारी रखा। सावंत ने कहा कि विपक्ष महिला आरक्षण का विरोध नहीं कर रहा है बल्कि केंद्र सरकार ने स्वार्थ के लिए विशेष सत्र बुलाया है। उन्होंने सरकार से ही पूछा कि बताइए हमने महिलाओं का कब विरोध किया? सावंत ने कहा कि 2023 में सभी ने महिला आरक्षण का समर्थन किया था, क्या प्रधानमंत्री जी आप ये भी भूल गए।
    दिशा सालियान की आत्महत्या का मामला

    बता दें कि भाजपा सांसद का इशारा दिशा सालियान की आत्महत्या केस की तरफ था। 2020 में भी अभिनेत्री दिशा सालियान की मौत से जुड़े मामले में बीजेपी नेताओं ने आदित्य ठाकरे पर सवाल उठाए थे और उनके नाम का इस्तेमाल किया था। मार्च 2025 में, दिशा के पिता ने बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया और मामले में उनकी भूमिका की जांच की मांग की थी।

  • ‘जय श्री राम’ बोलने पर 500 रुपये की छूट: कोलकाता के डॉक्टर के ऑफर पर सियासी बवाल

    ‘जय श्री राम’ बोलने पर 500 रुपये की छूट: कोलकाता के डॉक्टर के ऑफर पर सियासी बवाल

    कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक हृदय रोग विशेषज्ञ (Cardiologist) के अनोखे ऑफर ने राजनीतिक गलियारों में विवाद खड़ा कर दिया है। डॉक्टर ने घोषणा की है कि जो भी मरीज उनके क्लिनिक में आकर ‘जय श्री राम’ कहेगा, उसे कंसल्टेशन फीस में 500 रुपये की भारी छूट दी जाएगी। डॉक्टर ने अपने इस कदम को राज्य में ‘राजनीतिक बदलाव’ की उम्मीद से जोड़ा है।
    इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. पी.के. हाजरा ने यह छूट केवल दक्षिण कोलकाता स्थित अपने निजी चेंबर पर लागू की है। वे एक प्राइवेट अस्पताल में इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी विभाग के निदेशक भी हैं, लेकिन वहां यह छूट लागू नहीं होगी।

    डॉ. हाजरा ने अपने क्लिनिक पर एक पोस्टर लगाया है, जिसमें वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दुपट्टा पहने नजर आ रहे हैं। उन्होंने यह जानकारी सोशल मीडिया पर भी शेयर की है। डॉक्टर के मुताबिक, यह पोस्टर उनके ही एक मरीज ने तैयार किया था।
    डॉ. हाजरा ने कहा कि यह पूरी तरह से उनके दिमाग की उपज है। उन्होंने अपनी मंशा स्पष्ट करते हुए कहा: पिछले कई वर्षों में एक डॉक्टर के तौर पर मैंने मरीजों के सवाल झेले हैं कि आखिर उन्हें इलाज के लिए दूसरे राज्यों में क्यों जाना पड़ता है। जब भी मैं बंगाल के मरीजों को इलाज के लिए असम, ओडिशा या दक्षिण भारत जाते देखता हूं, तो मुझे बहुत बुरा लगता है। इसके विपरीत दूसरे राज्यों से लोग यहां नहीं आते। मुझे लगता है कि इस चलन को बदलने की जरूरत है। डॉक्टर ने आगे कहा कि वह सीधे तौर पर भाजपा से नहीं जुड़े हैं, लेकिन वह भाजपा शासित अन्य राज्यों की प्रगति के प्रशंसक हैं।
    डॉ. हाजरा ने स्वीकार किया कि उन्हें अपने गृह जिले पश्चिम मेदिनीपुर के पिंगला से भाजपा का टिकट मिलने की उम्मीद थी। जब ऐसा नहीं हुआ, तो उन्होंने लोगों को राज्य में बदलाव के लिए वोट करने हेतु प्रेरित करने का यह अनोखा तरीका निकाला। उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के काम की तारीफ भी की, लेकिन कहा कि अन्य राज्यों की विकास गति को देखते हुए बंगाल पिछड़ रहा है। उनके अनुसार, केंद्र और टीएमसी सरकार के बीच चल रही “खींचतान” का सीधा असर राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली पर पड़ा है।
    तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पेशे से चिकित्सक डॉ. निर्मल माझी ने इस कदम की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया: डॉ. हाजरा अपनी जुटाई गई अपार संपत्ति की रक्षा करने के लिए भाजपा का पक्ष लेने की कोशिश कर रहे हैं। वह खुद को बचाने के लिए भाजपा की ‘वाशिंग मशीन’ में घुसकर अपनी छवि साफ करना चाहते हैं। माझी ने यह भी दावा किया कि ऐसे कदमों से भाजपा को चुनाव जीतने में कोई मदद नहीं मिलेगी क्योंकि जनता का समर्थन टीएमसी के साथ है।
    भाजपा के राज्यसभा सांसद और बंगाल के पूर्व भाजपा अध्यक्ष राहुल सिन्हा ने डॉ. हाजरा के इस कदम की सराहना की। उन्होंने कहा: मुझे लगता है कि यह पहल अन्य डॉक्टरों को भी आगे आने और ऐसे फैसले लेने के लिए प्रेरित करेगी, ताकि राज्य के स्वास्थ्य ढांचे की बेहतरी के लिए बदलाव लाया जा सके। बता दें कि पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 और 29 अप्रैल को मतदान होना है, और मतों की गिनती 4 मई को की जाएगी।

  • इंदौर नगर निगम का 8,455 करोड़ रुपये का बजट पारित, ‘वंदे मातरम’ नहीं गाने पर मचा बवाल

    इंदौर नगर निगम का 8,455 करोड़ रुपये का बजट पारित, ‘वंदे मातरम’ नहीं गाने पर मचा बवाल


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश के इंदौर नगर निगम में बुधवार को 8,455 करोड़ रुपए का बजट शोर-शराबे के बीच बहुमत से पारित किया गया। बजट चर्चा के दौरान पार्षद फौजिया शेख अलीम ने ‘वंदे मातरम’ गाने से इनकार किया। इससे भाजपा पार्षद भड़क गए और सभापति के आसन के पास नारेबाजी करते हुए जमकर हंगामा किया।

    सदन में कुछ देर तक शोर-शराबा चलता रहा, जिससे कार्यवाही बाधित हुई। स्थिति संभालने के लिए सभापति मुन्नालाल यादव को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने फौजिया शेख अलीम को सदन से बाहर जाने के निर्देश दिए।

    दरअसल, इंदौर शहर के विकास को लेकर मंगलवार को आठ हजार करोड़ के बजट पेश किया गया था, जिस पर बुधवार को चर्चा हुई। इस दौरान भाजपा और कांग्रेस की दो पार्षद वंदे मातरम बोलने के मुद्दे पर आमने-सामने हो गए। वंदे मातरम गीत में कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम के शामिल नहीं होने पर भाजपा पार्षदों ने उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उनके समर्थन में एक अन्य कांग्रेस पार्षद रुबीना इकबाल खान भी बोलने लगीं और उन्होंने तैश में कहा कि अगर एक बाप की औलाद हो तो हमसे वंदे मातरम बुलवा कर दिखाएं। उन्होंने यह भी कहा कि तुम्हारे बाप में दम हो तो हमसे बुलवा कर दिखाएं।

    हालांकि, शोर-गुल में उनकी बातों पर भाजपा पार्षद ज्यादा ध्यान नहीं दे पाए। कुछ देर बाद सभापति ने पार्षद फौजिया शेख को सदन से बाहर जाने के लिए कहा। वे कुछ देर बैठी रहीं, तो भाजपा पार्षद नारेबाजी करते हुए उनका विरोध करने लगे। इसके बाद फौजिया शेख सदन से बाहर चली गईं। रुबीना ने कहा कि कुरान में वंदे मातरम की मनाही है। पार्षद रुबीना इकबाल ने कहा कि हम राष्ट्रगान गाते हैं। अब हमें कहा जाता है कि भारत में रहना है तो वंदे मातरम कहना होगा। क्या यह कोई दादागिरी है?

    उन्होंने कहा कि गलत बात हम अपने पिता की भी नहीं सुनते, तो इन भाजपा वालों की क्यों सुनें। कुरान में वंदे मातरम की मनाही है, क्योंकि इबादत के लिए अल्लाह ही योग्य है। वंदे मातरम का मतलब माता की इबादत करना है। हम अपनी मां की इबादत नहीं करते, तो फिर वंदे मातरम क्यों बोलें?

    मामले पर नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस पार्षद चिंटू चौकसे ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ गाना व्यक्तिगत इच्छा हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के सम्मान के लिए संकल्पित है। उन्होंने बताया कि घटनाक्रम की जानकारी प्रदेश अध्यक्ष को दे दी गई है।

    कांग्रेस पार्षद राजू भदौरिया ने आरोप लगाया कि अधिकारियों को कई मामलों की जानकारी नहीं होती और सवाल पर वे जिम्मेदारी दूसरे विभागों पर डाल देते हैं। महापौर ने कहा कि सभी सवालों के जवाब सात दिन में दे दिए जाएंगे। इसी दौरान विवाद बढ़ गया जब राजू भदौरिया ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को ‘गद्दार’ कहा। इस पर भाजपा पार्षदों ने विरोध जताया और फिर सदन में हंगामा हुआ। विरोध के बाद भदौरिया ने माफी मांगी, जिसके बाद कार्यवाही दोबारा शुरू हुई।


    माफी की मांग पर अड़े भाजपा पार्षद, सदन में गूंजे नारे

    भागीरथपुरा के लोगों को भी इस मुद्दे को लेकर सदन में लाया गया था। बताया गया कि कल दर्शक दीर्घा में मृतकों के फोटो वाले पोस्टर भी दिखाए गए थे। इस पर भाजपा पार्षदों ने आरोप लगाया कि नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे के इशारे पर हंगामा किया गया। घटना को लेकर भाजपा पार्षद चिंटू चौकसे से माफी की मांग पर अड़ गए। सदन में लगातार ‘माफी मांगो’ के नारे गूंजते रहे, जिससे माहौल और अधिक गरमा गया।


    हंगामे के बीच बहुमत से बजट पारित

    सभापति मुन्नालाल यादव ने कहा कि सदन में कई बार अमर्यादित बातें हो जाती हैं, लेकिन हंगामे की वजह से बजट पर ठीक से चर्चा नहीं हो पाई। उन्होंने बताया कि लगातार शोर-शराबे के बीच बहुमत के आधार पर बजट पारित किया गया। साथ ही उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम’ के संबंध में अमर्यादित शब्दों का प्रयोग करना गलत है, इसी कारण कांग्रेस पार्षद को सदन से बाहर किया गया।

  • छात्राओं के गर्भवती होने के मुद्दे पर विधानसभा में हंगामा, विपक्ष का वॉकआउट; सरकार पर आरोपों की बौछार

    छात्राओं के गर्भवती होने के मुद्दे पर विधानसभा में हंगामा, विपक्ष का वॉकआउट; सरकार पर आरोपों की बौछार


    रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में सोमवार को बीजापुर जिले के एक पोर्टा केबिन स्कूल हॉस्टल से जुड़ा मामला सियासी तूफान बन गया। तीन छात्राओं के गर्भवती होने के आरोपों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई, जो अंततः हंगामे और वॉकआउट में बदल गई।

    विपक्ष ने उठाए गंभीर सवाल
    कांग्रेस विधायकों ने सदन में आरोप लगाया कि बीजापुर के हॉस्टल में रहने वाली तीन छात्राएं गर्भवती पाई गई हैं। इस मुद्दे पर जवाब की मांग करते हुए विक्रम मंडावी, चरण दास महंत और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार को घेरा।

    शिक्षा मंत्री का जवाब, लेकिन विवाद बरकरार
    राज्य के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जिन तीन छात्राओं की बात की जा रही है, उनमें से दो हॉस्टल में रहती ही नहीं हैं, जबकि एक छात्रा दिवाली की छुट्टियों के बाद से वापस नहीं लौटी है।

    हालांकि मंत्री के इस जवाब से विपक्ष संतुष्ट नहीं हुआ और कांग्रेस विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।

    ‘मामला दबाने की कोशिश’ का आरोप
    ‘शून्य काल’ के दौरान विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार इस गंभीर मामले को दबाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस का कहना है कि जैसे ही छात्राओं के गर्भवती होने की बात सामने आई, उन्हें घर भेज दिया गया और अब प्रशासन यह कहकर मामले को कमजोर करने में जुटा है कि वे हॉस्टल में रह ही नहीं रही थीं।

    विपक्ष ने यह भी कहा कि मामला आदिवासी क्षेत्र से जुड़ा है, इसलिए इसकी गंभीरता और बढ़ जाती है।

    आरोपियों को बचाने का आरोप
    विपक्षी विधायकों का आरोप है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें बचाया जा रहा है। इसी कारण सदन में इस विषय पर विस्तृत चर्चा की अनुमति भी नहीं दी जा रही।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने जताई चिंता
    पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि आवासीय स्कूल से जुड़ी ऐसी खबर बेहद चिंताजनक है। उन्होंने बताया कि तीन में से दो छात्राएं नाबालिग हैं और मामले की पूरी जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

    इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है और सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • एलपीजी संकट पर लोकसभा में हंगामा: राहुल गांधी ने उठाया मुद्दा, पेट्रोलियम मंत्री पुरी ने दी पूरी स्थिति की जानकारी

    एलपीजी संकट पर लोकसभा में हंगामा: राहुल गांधी ने उठाया मुद्दा, पेट्रोलियम मंत्री पुरी ने दी पूरी स्थिति की जानकारी



    नई दिल्ली। गुरुवार को लोकसभा में एलपीजी संकट और देश की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भारी हंगामा देखने को मिला। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने संसद में ऊर्जा संकट को लेकर चर्चा शुरू की और कहा कि अभी तो केवल “दर्द की शुरुआत” हुई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार समय रहते उपाय नहीं करेगी, तो छोटे व्यापारी, रेस्टोरेंट और आम नागरिक गंभीर रूप से प्रभावित होंगे। राहुल ने कहा कि किसी भी देश की बुनियाद उसकी ऊर्जा सुरक्षा होती है और वर्तमान वैश्विक हालात में अमेरिका और अन्य देशों के निर्णय से भारत की ऊर्जा नीति प्रभावित हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि पेट्रोलियम मंत्री ने एक निजी बातचीत में एपस्टीन को अपना दोस्त बताया था, जिससे सदन में विवाद पैदा हो गया।

    राहुल गांधी के बयान के तुरंत बाद विपक्षी सांसदों ने संसद वेल में नारेबाजी शुरू कर दी। स्पीकर ओम बिरला ने राहुल को टोका और कहा कि केवल नोटिस दिए गए विषय पर ही चर्चा करें। इस दौरान विपक्ष के सांसदों ने ‘देखो-देखो कौन आया, एपस्टीन का दोस्त आया’ जैसे नारे लगाए। भारी हंगामा बढ़ते देख स्पीकर ने कार्यवाही को शाम 5 बजे तक स्थगित कर दिया।

    केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सदन में स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि देश में एलपीजी और पेट्रोलियम उत्पादों की कोई कमी नहीं है। उन्होंने बताया कि रिफाइनरियां उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं और एलपीजी उत्पादन में 28% की वृद्धि की गई है। पुरी ने कहा कि मोदी सरकार की प्राथमिकता है कि 33 करोड़ परिवारों की रसोई में किसी तरह की कमी न हो। उन्होंने सभी को आश्वस्त किया कि घरेलू गैस सिलेंडर की सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित है और डिलीवरी चेन में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

    पुरी ने बताया कि होर्मुज स्ट्रेट से भारत को मिलने वाला क्रूड ऑयल सुरक्षित स्तर पर उपलब्ध है। संघर्ष के कारण होर्मुज से 20% आवाजाही प्रभावित हुई थी, लेकिन सरकार ने इसके लिए रणनीति तैयार की है। वर्तमान में भारत 40 देशों से कच्चा तेल आयात करता है, जबकि 2006-07 में यह संख्या केवल 27 थी। उन्होंने कहा कि लंबे समय से अपनाई गई विविधीकरण नीति ने भारत को विकल्प दिए हैं, जो कई अन्य देशों के पास नहीं हैं।

    पेट्रोलियम मंत्री ने सदन में स्पष्ट किया कि यह समय अफवाह फैलाने या फेक नैरेटिव बनाने का नहीं है। उन्होंने कहा कि वैश्विक ऊर्जा संकट के बावजूद देश में पेट्रोल, डीजल, केरोसीन, एटीएफ और फ्यूल ऑयल की सप्लाई सामान्य रूप से जारी है। उन्होंने जनता और उद्योग को भरोसा दिलाया कि भारत संकट का प्रबंधन कर रहा है और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है।

    लोकसभा में पुरी के बोलने के दौरान विपक्ष ने लगातार नारेबाजी की, जिससे कार्यवाही बाधित हुई। स्पीकर ने दोबारा हिदायत दी कि संसद के नियमों का पालन किया जाए और केवल नोटिस किए गए मुद्दे पर ही चर्चा हो। इस हंगामे के बीच संसद की कार्यवाही स्थगित कर दी गई और विपक्षी सांसदों से वेल खाली करने का आदेश दिया गया।

    कुल मिलाकर संसद में एलपीजी और ऊर्जा सुरक्षा पर हुई यह बहस दर्शाती है कि देश में ऊर्जा आपूर्ति पर सभी की निगाहें हैं। विपक्ष ने सरकार की तैयारी पर सवाल उठाए, जबकि केंद्रीय मंत्री ने भरोसा दिलाया कि देश की ऊर्जा जरूरतों की पूर्ति पूरी तरह सुनिश्चित है। एलपीजी संकट को लेकर लगातार अफवाहें फैल रही हैं, लेकिन सरकार की रणनीति और उत्पादन वृद्धि ने स्थिति नियंत्रण में रखने का काम किया है।

  • जबलपुर में चर्च में हंगामा: महिला दिवस कार्यक्रम में निलंबित प्राचार्य ने किया उत्पात, ईसाई समुदाय ने FIR की मांग की

    जबलपुर में चर्च में हंगामा: महिला दिवस कार्यक्रम में निलंबित प्राचार्य ने किया उत्पात, ईसाई समुदाय ने FIR की मांग की


    जबलपुर । जबलपुर के क्राइस्टचर्च गर्ल्स स्कूल परिसर में स्थित चर्च में रविवार सुबह आराधना के दौरान हंगामा हो गया। महिला दिवस के अवसर पर आयोजित महिला सम्मान कार्यक्रम में अचानक व्यवधान उत्पन्न होने से ईसाई समुदाय में नाराजगी फैल गई। समाज और चर्च के पदाधिकारियों ने तुरंत ओमती थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई और हंगामा करने वाले के खिलाफ FIR दर्ज कर कार्रवाई की मांग की।

    ओमती पुलिस के अनुसार, शिकायत में बताया गया कि क्राइस्टचर्च बॉयज स्कूल से निलंबित प्राचार्य लेडली मैथ्यूज सुबह आराधना के दौरान चर्च में घुस आए। उन्होंने पवित्र स्थान में पहुंचकर माइक छीन लिया और बेवजह की बातें करने लगे, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया।

    चर्च पदाधिकारियों के विरोध करने पर मैथ्यूज ने वहां मौजूद लोगों को धमकाया और पदाधिकारियों के साथ धक्का-मुक्की की। इस घटना से उपस्थित लोग आहत हुए और महिलाओं के सम्मान के लिए आयोजित कार्यक्रम में व्यवधान उत्पन्न हुआ। कार्यक्रम में शामिल महिलाओं के साथ भी अभद्रता की शिकायत की गई है।

    पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है और बताया कि जल्द ही दोषियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। चर्च और समाज के पदाधिकारी पूरे मामले में सतर्क हैं और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा उपाय बढ़ाने की योजना बना रहे हैं।

    इस घटना ने न केवल चर्च परिसर में सुरक्षा की चिंता बढ़ाई है, बल्कि समुदाय के बीच तनाव भी पैदा किया है। अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने और कानूनी प्रक्रिया का सम्मान करने की अपील की है।

  • इंदौर मुक्तिधाम हड़कंप: 13 नंबर के तीन टोकन की चूक से अस्थियां गड़बड़, दो परिवारों में हंगामा, तीन घंटे बाद सुलझा मामला

    इंदौर मुक्तिधाम हड़कंप: 13 नंबर के तीन टोकन की चूक से अस्थियां गड़बड़, दो परिवारों में हंगामा, तीन घंटे बाद सुलझा मामला


    इंदौर। इंदौर में पचकुइया मुक्तिधाम पर शनिवार को अस्थियों की अदला-बदली से हंगामा मच गया। मामला तब सामने आया जब एक ही नंबर (13) के तीन टोकन अलग-अलग परिवारों को दे दिए गए। इसी कारण गलती से एक अन्य परिवार स्व. मदनलाल विश्वकर्मा की अस्थियों को अपने स्वजन समझकर ले गया। जब परिवार अस्थियां लेने पहुंचा, तब उन्हें यह पता चला कि अस्थियां उनके स्वजन की नहीं हैं।

    विश्वकर्मा परिवार के अनुसार, 55 वर्षीय मदनलाल विश्वकर्मा का निधन कुछ दिनों पहले हुआ था। उनके अंतिम संस्कार के लिए पंडित ने अस्थि संचय की तिथि रविवार तय की थी, लेकिन शनिवार को परिवार जब संग्रह के लिए मुक्तिधाम पहुंचे तो अस्थियां वहां नहीं मिलीं। इसके बाद परिवार ने ड्यूटी पर मौजूद निगमकर्मी से जानकारी ली, लेकिन कर्मचारी नशे में होने के कारण मदद नहीं कर सके।

    घटना की तहकीकात में पता चला कि 13 नंबर के तीन टोकन अलग-अलग परिवारों को दे दिए गए थे। इसी कारण चौबे परिवार, जिनके 65 वर्षीय स्व. सुनील चौबे का निधन 5 मार्च को हुआ था, ने गलती से विश्वकर्मा परिवार की अस्थियां ले ली। सुबह लगभग 8.30 बजे चौबे परिवार अस्थियों को संग्रह कर खेड़ी घाट के लिए रवाना हुआ, तभी उन्हें मुक्तिधाम से फोन आया कि उन्होंने गलत अस्थियां ले ली हैं। इसके बाद दोनों परिवारों की अस्थियां तीन घंटे बाद सही ढंग से लौटाई गईं।

    विश्वकर्मा परिवार के नजदीकी मुकेश शर्मा ने आरोप लगाया कि मुक्तिधाम में तैनात पंचकुइया मोक्ष विकास समिति के कर्मचारी की लापरवाही से यह स्थिति बनी। उन्होंने बताया कि कर्मचारी से गलती हुई और उसने टोकन संख्या में गड़बड़ी कर दी।

    मुक्तिधाम समिति के अध्यक्ष वैभव बाहेती ने खेद जताते हुए बताया कि गलती करने वाला कर्मचारी 35 सालों से मुक्तिधाम में सेवाएं दे रहा है और कोरोना महामारी के दौरान भी उसने अहम योगदान दिया। उन्होंने कहा कि यह मानवीय भूल थी और संबंधित कर्मचारी को चेतावनी दी गई है।

    इंदौर पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मौके पर डायल 100 भेजा और एडी. डीसीपी क्राइम राजेश दंडोतिया ने कहा कि यदि किसी पक्ष ने शिकायत दर्ज कराई, तो वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर मुक्तिधाम संचालन में कर्मचारियों की सतर्कता और टोकन प्रणाली में सुधार की आवश्यकता उजागर कर दी है।