Tag: uranium

  • ईरान की अमेरिका को दो टूक: 'यूरेनियम का एक ग्राम भी बाहर नहीं भेजेंगे', आसिम मुनीर कर रहे मध्यस्थता

    ईरान की अमेरिका को दो टूक: 'यूरेनियम का एक ग्राम भी बाहर नहीं भेजेंगे', आसिम मुनीर कर रहे मध्यस्थता


    नई दिल्ली। अमेरिका के साथ परमाणु समझौते को लेकर ईरान ने अपना रुख सख्त कर दिया है। तेहरान ने साफ कहा है कि वह अपने यूरेनियम का एक ग्राम भी देश से बाहर नहीं भेजेगा। ईरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ बातचीत तभी आगे बढ़ेगी, जब वॉशिंगटन भरोसा बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाएगा और उसकी सभी शर्तें पूरी करने की दिशा में कार्रवाई करेगा। पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की ईरान यात्रा के बीच आया यह बयान दोनों देशों के बीच जारी कूटनीतिक प्रयासों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

    ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रेजाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि ईरान से यूरेनियम का एक ग्राम भी बाहर नहीं भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका को पहले विश्वास बहाली के लिए कदम उठाने होंगे। बातचीत की प्रक्रिया ईरान की सभी शर्तों को पूरी तरह पूरा करने से शुरू होनी चाहिए।

    रेजाई ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर के साथ बैठक में भी तेहरान का यही रुख दोहराया। मुनीर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने तथा बातचीत का रास्ता निकालने के प्रयासों के तहत ईरान पहुंचे हैं।

    राष्ट्रपति पेजेश्कियन और संसद स्पीकर से मिले मुनीर
    ईरानी मीडिया के मुताबिक, मंगलवार को राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने तेहरान में आसिम मुनीर के साथ बैठक की। इस दौरान क्षेत्रीय घटनाक्रम और अमेरिका-ईरान के बीच मध्यस्थता की कोशिशों पर चर्चा हुई।

    नूरन्यूज के अनुसार, मुनीर ने ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर कलीबाफ से भी मुलाकात की। इन बैठकों में क्षेत्रीय तनाव कम करने और दोनों पक्षों के बीच बातचीत की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

    अमेरिका से बातचीत के लिए ईरान ने रखीं सात शर्तें
    ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर कलीबाफ ने कहा कि अमेरिका ईरान का भरोसा तब तक नहीं जीत सकता, जब तक वह पिछले महीने तेहरान की ओर से रखी गई सात शर्तों को पूरा नहीं करता।

    इन शर्तों का संबंध स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने से भी है। प्रमुख मांगों में ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकाबंदी खत्म करना, ईरान के तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंध हटाना और क्षेत्र के सभी मोर्चों पर शत्रुता रोकना शामिल है।

    रेजाई ने यह भी कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई के रुख के मुताबिक, हथियार बनाने के स्तर के करीब पहुंच चुके यूरेनियम को देश से बाहर नहीं भेजा जाएगा।

    परमाणु कार्यक्रम पर अटका समझौता
    ईरान का परमाणु कार्यक्रम अमेरिका के साथ किसी संभावित समझौते की राह में प्रमुख बाधा बना हुआ है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि युद्ध समाप्त करने और समझौते की दिशा में आगे बढ़ने के लिए ईरान को अपनी यूरेनियम संवर्धन क्षमता में महत्वपूर्ण कमी करनी होगी।

    अमेरिका, इजरायल और कई अन्य पश्चिमी देश लंबे समय से ईरान पर परमाणु हथियार बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाते रहे हैं। इसकी प्रमुख वजह ईरान की ओर से यूरेनियम का 60 प्रतिशत तक संवर्धन करना है। यह स्तर आम नागरिक परमाणु उपयोग के लिए जरूरी संवर्धन स्तर से काफी अधिक है और लगभग 90 प्रतिशत संवर्धन वाले हथियार-ग्रेड यूरेनियम के स्तर के करीब है।

    हालांकि, ईरान लगातार परमाणु हथियार बनाने की कोशिश करने के आरोपों से इनकार करता रहा है। यूरेनियम संवर्धन की सीमा और संवर्धित यूरेनियम के भंडार का भविष्य दोनों देशों के बीच बातचीत के अहम मुद्दे बने हुए हैं।

    पाकिस्तान फिर करा रहा बातचीत की कोशिश
    अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम कराने के लिए पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। इससे पहले पाकिस्तान की मध्यस्थता के प्रयासों के बाद जून में अंतरिम शांति समझौता हुआ था। हालांकि, कुछ ही हफ्तों बाद दोनों देशों के बीच लड़ाई दोबारा शुरू होने से यह समझौता टूट गया।

    आसिम मुनीर की मौजूदा ईरान यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब दोनों देशों के बीच मतभेद दूर करने और बातचीत दोबारा शुरू कराने के प्रयास जारी हैं। ईरान ने यूरेनियम को देश से बाहर नहीं भेजने और बातचीत से पहले अपनी शर्तें पूरी करने की मांग दोहराकर स्पष्ट कर दिया है कि परमाणु कार्यक्रम पर किसी समझौते तक पहुंचना आसान नहीं होगा।

  • रूपपुर परमाणु संयंत्र के लिए यूरेनियम की खेप अटकी, पाकिस्तानी एयरस्पेस मंजूरी नहीं मिलने से विमान बांग्लादेश नहीं पहुंच सका

    रूपपुर परमाणु संयंत्र के लिए यूरेनियम की खेप अटकी, पाकिस्तानी एयरस्पेस मंजूरी नहीं मिलने से विमान बांग्लादेश नहीं पहुंच सका

    नई दिल्ली ।बांग्लादेश के रूपपुर न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए रूस से भेजी जा रही यूरेनियम की खेप तय समय पर नहीं पहुंच सकी है। यूनिट-2 के लिए न्यूक्लियर फ्यूल लेकर आने वाले कार्गो विमान को पाकिस्तानी एयरस्पेस इस्तेमाल करने की मंजूरी नहीं मिलने के कारण उसकी उड़ान प्रभावित हुई। अब यूरेनियम की नई खेप अक्टूबर के पहले सप्ताह में बांग्लादेश पहुंचने की उम्मीद जताई गई है।

    बांग्लादेश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री फकीर महबूब अनाम के मुताबिक, यूरेनियम लेकर आने वाले कार्गो विमान के 24 सितंबर को बांग्लादेश पहुंचने की उम्मीद थी। हालांकि, पाकिस्तानी एयरस्पेस के इस्तेमाल की अनुमति नहीं मिलने के कारण विमान तय कार्यक्रम के अनुसार नहीं पहुंच सका।

    एयरस्पेस क्लियरेंस नहीं मिलने की वजह फिलहाल स्पष्ट नहीं है। मंत्री ने बताया कि यूरेनियम की डिलीवरी के लिए नई तारीख प्रस्तावित की गई है और रूस की ओर से इसके अक्टूबर के पहले सप्ताह में बांग्लादेश पहुंचने की बात कही गई है।

    इस मामले में बांग्लादेश के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के संयुक्त सचिव शेख मोहम्मद तौहिदुल इस्लाम ने भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विमान के आने से पहले एयरपोर्ट पर आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई थीं और अधिकारी उसके पहुंचने का इंतजार कर रहे थे।

    उनके अनुसार, रोसाटॉम के संपर्क अधिकारी ने जानकारी दी कि एयरस्पेस क्लियर नहीं है। इसके चलते यूरेनियम को भेजना संभव नहीं हो सका। अब खेप की उड़ान को दोबारा निर्धारित किया जाना पड़ सकता है। हालांकि, इस दौरान यह स्पष्ट नहीं हो सका कि किस देश की ओर से एयरस्पेस को ब्लॉक किया गया था।

    रूपपुर न्यूक्लियर पावर प्लांट बांग्लादेश का पहला परमाणु ऊर्जा संयंत्र है। इसका निर्माण रूस की स्टेट एटॉमिक एनर्जी कॉरपोरेशन रोसाटॉम की तकनीकी सहायता से किया जा रहा है। परियोजना की निगरानी बांग्लादेश एटॉमिक एनर्जी कमीशन कर रहा है।

    यह संयंत्र बांग्लादेश के पाबना जिले के ईश्वरडी उपजिला के पाकशी यूनियन में पद्मा नदी के किनारे रूपपुर गांव में बनाया जा रहा है। परियोजना में तीसरी पीढ़ी के दो VVER-1200 रिएक्टर लगाए जा रहे हैं। दोनों रिएक्टरों की संयुक्त क्षमता 2,400 मेगावाट बेसलोड बिजली उत्पादन की होगी।

    रूपपुर परियोजना की यूनिट-1 के लिए लो-एनरिच्ड यूरेनियम फ्यूल की पहली खेप पहले ही रूस से बांग्लादेश पहुंच चुकी है। इस खेप में 164 नए फ्यूल असेंबली शामिल थे। इन्हें रूस के नोवोसिबिर्स्क केमिकल कंसंट्रेट्स प्लांट में तैयार किया गया था और भारी क्षमता वाले रूसी कार्गो विमान के जरिए ढाका के हजरत शाहजलाल इंटरनेशनल एयरपोर्ट लाया गया था।

    ढाका पहुंचने के बाद रेडिएशन-शील्डेड कंटेनरों को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पाबना के ईश्वरडी स्थित रूपपुर प्लांट तक पहुंचाया गया था। इसके लिए बांग्लादेश सेना और कानून-प्रवर्तन एजेंसियों की निगरानी में विशेष ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया था।

    अक्टूबर 2023 में प्लांट साइट पर यूरेनियम फ्यूल के आधिकारिक हैंडओवर का समारोह भी आयोजित किया गया था। अब यूनिट-2 के लिए आने वाली नई खेप की डिलीवरी एयरस्पेस क्लियरेंस से जुड़ी समस्या के कारण निर्धारित समय से आगे खिसक गई है। रूस की ओर से इसे अक्टूबर के पहले सप्ताह में बांग्लादेश पहुंचाने की नई समयसीमा बताई गई है।

  • मदीना की धरती में छिपा खजाना! सऊदी का दावा- 11 करोड़ टन अयस्क में यूरेनियम और हेवी रेयर अर्थ की मौजूदगी

    मदीना की धरती में छिपा खजाना! सऊदी का दावा- 11 करोड़ टन अयस्क में यूरेनियम और हेवी रेयर अर्थ की मौजूदगी


    नई दिल्ली। सऊदी अरब ने मदीना के पास खनिज संसाधनों की बड़ी खोज का दावा किया है। ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान के मुताबिक, जबल सैयद प्रोजेक्ट में किए गए भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और खोज के दौरान करीब 11 करोड़ टन यानी 110 मिलियन टन अयस्क संसाधन का अनुमान सामने आया है। इस अयस्क में हेवी रेयर अर्थ एलिमेंट्स की उच्च सांद्रता के साथ यूरेनियम की भी उत्साहजनक संभावनाएं मिली हैं।

    हालांकि, इस दावे को लेकर सबसे अहम बात यह है कि 11 करोड़ टन शुद्ध यूरेनियम मिलने की बात नहीं कही गई है। 110 मिलियन टन अनुमानित कुल अयस्क संसाधन है, जिसमें यूरेनियम और रेयर अर्थ तत्वों की सांद्रता मौजूद होने का दावा किया गया है।

    जबल सैयद में सर्वे से सामने आया अनुमान

    ‘अरब न्यूज’ के मुताबिक, सऊदी ऊर्जा मंत्री ने जबल सैयद परियोजना में हुई खोज और भूवैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर करीब 110 मिलियन टन अयस्क संसाधन का अनुमान बताया है। इसमें खास तौर पर हेवी रेयर अर्थ एलिमेंट्स की अधिक सांद्रता मिलने की बात कही गई है।

    इसके साथ ही सर्वेक्षण में यूरेनियम की भी उत्साहजनक सांद्रता का संकेत मिला है। अब इन संसाधनों की वास्तविक मात्रा, गुणवत्ता और व्यावसायिक उपयोगिता को निर्धारित करने के लिए आगे की जांच और मूल्यांकन महत्वपूर्ण होगा।

    मदीना की वजह से भी खास है यह खोज

    मदीना इस्लाम के सबसे पवित्र शहरों में शामिल है। 622 ईस्वी में पैगंबर मोहम्मद ने मक्का से मदीना की ओर हिजरत की थी, जिसके बाद यह शुरुआती इस्लामी समुदाय का प्रमुख केंद्र बना। ऐसे में इस ऐतिहासिक और धार्मिक क्षेत्र के आसपास रणनीतिक महत्व वाले खनिज संसाधनों की खोज ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान खींचा है।

    यह घोषणा ऐसे समय हुई है, जब मध्य पूर्व में सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रमों को लेकर तनाव लगातार अंतरराष्ट्रीय राजनीति का अहम मुद्दा बना हुआ है। क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में सऊदी अरब की महत्वपूर्ण भूमिका है, जबकि ईरान का परमाणु कार्यक्रम लंबे समय से अमेरिका और इजरायल की चिंता का विषय रहा है। ईरान लगातार अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण और नागरिक उद्देश्यों के लिए बताता रहा है।

    तेल से आगे अर्थव्यवस्था ले जाने की कोशिश

    खनिज संसाधनों की यह खोज सऊदी अरब की Vision 2030 रणनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों में शामिल सऊदी अरब अर्थव्यवस्था को तेल पर निर्भरता से आगे ले जाने की कोशिश कर रहा है।

    इसी रणनीति के तहत देश में खनन, अक्षय ऊर्जा और नागरिक परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाया जा रहा है। सऊदी अरब घरेलू स्तर पर यूरेनियम संसाधनों की खोज और भविष्य में इनके इस्तेमाल की संभावनाओं पर भी काम कर रहा है।

    यूरेनियम मिला तो सीधे परमाणु ईंधन नहीं बनेगा

    मदीना क्षेत्र में यूरेनियम की संभावनाओं का दावा इसलिए भी अहम है क्योंकि सऊदी अरब नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। अमेरिका और सऊदी अरब के बीच भी इस क्षेत्र में सहयोग को लेकर बातचीत और समझौते हुए हैं।

    यूरेनियम परमाणु ऊर्जा उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण कच्चा माल है, लेकिन प्राकृतिक अयस्क मिलने का अर्थ यह नहीं है कि उससे सीधे परमाणु ईंधन तैयार किया जा सकता है। इसके लिए पहले खनन, प्रोसेसिंग और कन्वर्जन जैसी कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। जरूरत के मुताबिक इसके बाद संवर्धन यानी enrichment की प्रक्रिया भी होती है।

    इसलिए फिलहाल मदीना में सामने आया दावा एक बड़े अयस्क संसाधन और उसमें मौजूद यूरेनियम की संभावित सांद्रता से जुड़ा है, न कि 11 करोड़ टन शुद्ध यूरेनियम भंडार से।

    रेयर अर्थ की मौजूदगी भी बढ़ाती है रणनीतिक महत्व

    इस खोज का दूसरा बड़ा पहलू रेयर अर्थ एलिमेंट्स हैं। आधुनिक तकनीक आधारित अर्थव्यवस्था में इन खनिजों की अहम भूमिका है। इनका इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहन, पवन ऊर्जा, रक्षा उपकरण और दूसरी हाई-टेक इंडस्ट्री में किया जाता है।

    यदि आगे की जांच में जबल सैयद क्षेत्र के संसाधन व्यावसायिक रूप से निकालने योग्य साबित होते हैं, तो इसका असर केवल सऊदी अरब की ऊर्जा रणनीति तक सीमित नहीं रहेगा। इससे देश की खनन क्षमता, औद्योगिक आधार और रणनीतिक खनिज आपूर्ति को भी मजबूती मिल सकती है।

    फिलहाल इन संसाधनों की वास्तविक क्षमता और आर्थिक उपयोगिता का आकलन आगे की भूवैज्ञानिक जांच पर निर्भर करेगा। लेकिन यूरेनियम की संभावनाओं और हेवी रेयर अर्थ एलिमेंट्स की उच्च सांद्रता के दावे ने सऊदी अरब की बदलती ऊर्जा और खनिज रणनीति को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

  • भारत-उज्बेकिस्तान के बीच यूरेनियम को लेकर बड़ी डील, UPI- वीजा फ्री एंट्री समेत हुए 16 अहम समझौते

    भारत-उज्बेकिस्तान के बीच यूरेनियम को लेकर बड़ी डील, UPI- वीजा फ्री एंट्री समेत हुए 16 अहम समझौते


    ताशकंद।
    भारत (India) और उज्बेकिस्तान (Uzbekistan) ने रविवार को असैन्य परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाते हुए लंबे समय के लिए यूरेनियम आपूर्ति (Uranium supply) की व्यवस्था बनाने पर सहमति जताई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) और उज्बेकिस्तान (Uzbekistan) के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव (President Shavkat Mirziyoyev) के बीच रविवार को हुई वार्ता में यह अहम फैसला हुआ। दोनों देशों ने अपने संबंधों को ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक ले जाने की घोषणा भी की। साथ ही, वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को पांच अरब डॉलर सालाना तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया।


    2030 तक 5 अरब डॉलर करना है व्यापार

    मोदी और मिर्जियोयेव की वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान में यूरेनियम आपूर्ति की प्रस्तावित मात्रा और समयसीमा का खुलासा नहीं किया गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच मौजूदा व्यापार एक अरब डॉलर से अधिक हो चुका है। अब इसे 2030 तक पांच अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि रणनीतिक साझेदारी की 15वीं वर्षगांठ के अवसर पर संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के नए स्तर पर ले जाना महत्वपूर्ण उपलब्धि है।


    विदेश मंत्रियों की समन्वय परिषद बनेगी

    मोदी ने कहा कि द्विपक्षीय सहयोग के सभी पहलुओं को दिशा देने के लिए विदेश मंत्रियों के स्तर पर समन्वय परिषद स्थापित की जाएगी। संयुक्त आयोग का स्तर भी सचिवों से बढ़ाकर मंत्रिस्तरीय किया जाएगा। दोनों देश कारोबारी नेताओं की भागीदारी वाला संयुक्त व्यापार सम्मेलन आयोजित करेंगे। दोनों देशों ने आतंकवाद, उग्रवाद और अलगाववाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर प्रतिबद्धता जताई। मोदी ने कहा कि ये चुनौतियां पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं।


    बौद्ध स्थलों के संरक्षण पर सहमति

    भारत और उज्बेकिस्तान ने प्राचीन बौद्ध स्थलों फयाज तेपा और कारा तेपा के संरक्षण एवं पुनरुद्धार के लिए आशय पत्र पर सहमति जताई। दोनों स्थल सिल्क रोड के जरिए मध्य एशिया में बौद्ध धर्म के प्रसार के महत्वपूर्ण प्रमाण माने जाते हैं।


    52 योग साधकों का विशेष सत्र

    मोदी ने ताशकंद में 52 योग साधकों की भागीदारी वाला विशेष योग सत्र भी देखा। उन्होंने कहा, ‘उज्बेकिस्तान योग से प्यार करता है।’ दोनों देशों ने व्यापार, निवेश, बुनियादी ढांचा, महत्वपूर्ण खनिज, खनन, रक्षा एवं सुरक्षा, कृषि, फार्मास्यूटिकल्स, स्वास्थ्य, सूचना प्रौद्योगिकी, यूपीआई और शिक्षा समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। रक्षा उद्योगों को सैन्य उपकरणों के सह-विकास और सह-उत्पादन की दिशा में काम करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा। व्यापार विस्तार पर जोर दिया जाएगा।


    भारतीयों के लिए 30 दिन तक वीजा फ्री एंट्री

    प्रधानमंत्री मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा के दौरान दोनों देशों के लोगों के बीच आवाजाही आसान करने की दिशा में बड़ा फैसला हुआ। उज्बेकिस्तान ने भारतीय नागरिकों के लिए 30 दिन की वीजा-मुक्त यात्रा व्यवस्था लागू करने की घोषणा की है। राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव ने कहा कि इससे दोनों देशों के बीच जन-जन के संपर्क, पर्यटन और कारोबारी आदान-प्रदान को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।


    उज्बेकिस्तान में चलेगा यूपीआई

    डिजिटल सहयोग के तहत एनपीसीआई और उज्बेकिस्तान के नेशनल इंटरबैंक प्रोसेसिंग सेंटर के बीच वाणिज्यिक समझौता हुआ। इसके लागू होने के बाद भारतीय यात्री यूपीआई ऐप के जरिए उज्बेकिस्तान में कोड स्कैन कर दुकानों पर भुगतान कर सकेंगे।

    प्रधानमंत्री मोदी उज्बेकिस्तान की यात्रा के बाद रविवार को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए किर्गिस्तान पहुंचे। किर्गिस्तान के मंत्रिपरिषद के अध्यक्ष अदेलबेक कासिमालियेव ने हवाई अड्डे पर उनका स्वागत किया। इस दौरान पारंपरिक किर्गिज नृत्य की प्रस्तुति भी दी गई। होटल पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत ‘वंदे मातरम्’ के जयघोष से हुआ। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जैसवाल ने ‘एक्स’ पर कहा कि सम्मेलन में 10 सदस्य देश, 15 साझेदार देश और दो पर्यवेक्षक देश क्षेत्रीय एवं सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए एकत्र होंगे।

  • ट्रंप को बड़ा झटका… ईरान के सुप्रीम लीडर बोले- विदेश नहीं भेजेंगे देश का यूरेनियम भंडार

    ट्रंप को बड़ा झटका… ईरान के सुप्रीम लीडर बोले- विदेश नहीं भेजेंगे देश का यूरेनियम भंडार


    तेहरान।
    अमेरिका (America) के साथ यूरेनियम (Uranium) को लेकर चल रही तीखी तकरार के बीच ईरान (Iran) ने बड़ा फैसला लिया है। दो वरिष्ठ ईरानी सूत्रों के मुताबिक, देश के सर्वोच्च नेता आयातुल्लाखा मोजतबा मेनेई (Supreme Leader Ayatollah Mojtaba Menei) ने निर्देश जारी कर दिया है कि ईरान का लगभग हथियार-योग्य समृद्ध यूरेनियम भंडार विदेश नहीं भेजा जाएगा। इससे अमेरिका की प्रमुख मांग पर तेहरान का रुख और सख्त हो गया है। यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। इजरायल के साथ मिलकर चल रही शांति वार्ता अब और जटिल हो सकती है।

    रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायली अधिकारियों ने बताया कि ट्रंप ने इजरायल को आश्वासन दिया था कि ईरान का अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम भंडार देश से बाहर भेज दिया जाएगा और किसी भी शांति समझौते में इसे अनिवार्य शर्त बनाया जाएगा। नाम न छापने की शर्त पर बात करने वाले ईरानी सूत्रों ने बताया कि सर्वोच्च नेता का यह निर्देश और सत्ता के अंदरूनी हलकों में आम सहमति है कि समृद्ध यूरेनियम को देश से बाहर नहीं जाना चाहिए। अधिकारियों का मानना है कि ऐसा करने से ईरान भविष्य में अमेरिका-इजरायल हमलों के प्रति और अधिक कमजोर हो जाएगा।


    नेतन्याहू की सख्ती

    दूसरी ओर इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कहा है कि जब तक ईरान से समृद्ध यूरेनियम हटाया नहीं जाता, उसके प्रॉक्सी मिलिशिया समर्थन बंद नहीं होते और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता समाप्त नहीं की जाती, तब तक युद्ध समाप्त नहीं माना जाएगा।


    ईरान को विश्वास नहीं

    28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के हमलों से शुरू हुए युद्ध के बाद अस्थिर युद्धविराम लागू है। इस दौरान ईरान ने खाड़ी राज्यों में अमेरिकी ठिकानों पर गोलीबारी की और लेबनान में हिजबुल्लाह के साथ लड़ाई तेज हुई। हालांकि शांति प्रयास अभी तक नाकाम रहे हैं। ईरानी सूत्रों ने कहा कि तेहरान को आशंका है कि युद्धविराम वाशिंगटन का सिर्फ रणनीतिक धोखा है, ताकि नए हमलों की तैयारी की जा सके। ईरान के शीर्ष शांति वार्ताकार मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने बुधवार को कहा कि दुश्मन की गतिविधियां नए हमलों की तैयारी का संकेत दे रही हैं।


    अमेरिकी राष्ट्रपति ने क्या कहा?

    ट्रंप ने बुधवार को कहा कि यदि ईरान शांति समझौते के लिए तैयार नहीं हुआ तो अमेरिका नए हमलों के लिए तैयार है, हालांकि उन्होंने कुछ दिनों का इंतजार करने का भी संकेत दिया। दोनों पक्षों ने कुछ मुद्दों पर समझौता शुरू कर दिया है, लेकिन परमाणु कार्यक्रम को लेकर गहरे मतभेद बरकरार हैं, खासकर समृद्ध यूरेनियम के भविष्य और संवर्धन अधिकार पर।


    ईरान का रुख सख्त

    ईरानी अधिकारियों ने बार-बार कहा है कि उनकी प्राथमिकता युद्ध का स्थायी समाधान और अमेरिका-इजरायल से कोई हमला न होने की विश्वसनीय गारंटी है। इसके बाद ही वे परमाणु कार्यक्रम पर विस्तृत बातचीत के लिए तैयार होंगे। ईरान लंबे समय से परमाणु बम बनाने से इनकार करता रहा है। युद्ध से पहले ईरान ने अपने 60% समृद्ध यूरेनियम भंडार का आधा हिस्सा बाहर भेजने पर सहमति जताई थी, लेकिन ट्रंप की लगातार धमकियों के बाद यह रुख बदल गया, जिसका परिणाम अब सबके सामने है।


    क्या कह रहे आईएईए के आंकड़े?

    अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के अनुसार, जून 2025 के हमलों के समय ईरान के पास 440.9 किलोग्राम 60% समृद्ध यूरेनियम था। हमलों के बाद बचा हुआ भंडार मुख्य रूप से इस्फहान और नतांज के परमाणु केंद्रों में सुरक्षित है। दूसरी ओर ईरान का कहना है कि उसे चिकित्सा और अनुसंधान रिएक्टर के लिए सीमित मात्रा में अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम की जरूरत है।

  • ट्रम्प का ईरान को बड़ा झटका, शांति प्रस्ताव खारिज; परमाणु शर्तों पर बढ़ा टकराव, होर्मुज में तनाव गहराया

    ट्रम्प का ईरान को बड़ा झटका, शांति प्रस्ताव खारिज; परमाणु शर्तों पर बढ़ा टकराव, होर्मुज में तनाव गहराया



    नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर तेज हो गया है, जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के शांति प्रस्ताव को खारिज करते हुए कड़े रुख का संकेत दिया है। ट्रम्प ने साफ कहा कि ईरान की ओर से भेजा गया प्रस्ताव उन्हें स्वीकार नहीं है, जिससे क्षेत्र में कूटनीतिक हलचल और बढ़ गई है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान ने पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका को नया प्रस्ताव भेजा था, जिसमें युद्धविराम, प्रतिबंधों में राहत और परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत की बात शामिल थी। इसके जवाब में अमेरिका ने शर्त रखी कि ईरान को उच्च संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) अमेरिका को सौंपना होगा और लंबे समय तक परमाणु संवर्धन रोकना होगा।

    इस पूरे विवाद की जड़ ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी है, जहां अमेरिका और पश्चिमी देश इसे सुरक्षा के लिए खतरा मानते हैं, जबकि ईरान इसे शांतिपूर्ण ऊर्जा जरूरतों से जोड़कर देखता है। इसी टकराव के कारण दोनों देशों के बीच बातचीत बार-बार रुकती और शुरू होती रही है।

    तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में हालात भी संवेदनशील बने हुए हैं, जहां वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। किसी भी टकराव का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक इस कूटनीतिक गतिरोध के साथ-साथ क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां और बयानबाजी भी तेज हो गई हैं, जिससे पश्चिम एशिया में अस्थिरता और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

    कुल मिलाकर यह स्थिति दिखाती है कि ईरान-अमेरिका संबंध एक बार फिर टकराव की दिशा में बढ़ रहे हैं, जहां बातचीत और दबाव की राजनीति दोनों साथ-साथ चल रही हैं और किसी भी फैसले का असर वैश्विक स्तर पर महसूस किया जा सकता है।

  • भूजल में यूरेनियम की खतरनाक मौजूदगी ने बढ़ाई चिंता, 18 राज्यों के 151 जिले प्रभावित

    भूजल में यूरेनियम की खतरनाक मौजूदगी ने बढ़ाई चिंता, 18 राज्यों के 151 जिले प्रभावित


    नई दिल्ली।
    देश के कई राज्यों के भूजल (Groundwater) में यूरेनियम (Uranium) की खतरनाक मौजूदगी (Dangerous presence) सामने आई है। कई क्षेत्रों में पीने के पानी में भी यूरेनियम (Uranium) की मात्रा विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) के तय सुरक्षित मानकों से कई गुना अधिक है। कुल 14,377 नमूनों की जांच में यूरेनियम की सांद्रता 0 से 2,876 माइक्रोग्राम प्रति लीटर तक दर्ज की गई, जो डब्ल्यूएचओ की 30 माइक्रोग्राम प्रति लीटर सीमा से 96 गुना तक अधिक है।

    18 राज्यों के 151 जिले आंशिक रूप से इस समस्या से प्रभावित पाए गए हैं, जबकि पंजाब सबसे अधिक प्रभावित राज्य के रूप में सामने आया है। यह जानकारी सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड की पहली राष्ट्रीय स्तर की निगरानी में सामने आई है। सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड के अनुसार देश में पहली बार वर्ष 2019-20 में भूजल में यूरेनियम की राष्ट्रीय स्तर पर निगरानी की गई। इसके तहत 14,377 भूजल नमूनों की जांच की गई, जिन्हें नियमित रूप से मॉनिटर किया जा रहा है।

    रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि कई क्षेत्रों में भूजल में यूरेनियम की सांद्रता सामान्य स्तर से काफी अधिक है, जिससे पेयजल सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पीने के पानी में यूरेनियम की अधिकतम स्वीकार्य सीमा 30 माइक्रोग्राम प्रति लीटर निर्धारित की है। इसे पार्ट्स प्रति बिलियन यानी पीपीबी भी कहा जाता है। इसके विपरीत भारतीय मानक ब्यूरो ने अभी तक यूरेनियम के लिए कोई अलग मानक तय नहीं किया है।


    एईआरबी की 60 पीपीबी सीमा पर भी पंजाब शीर्ष पर

    परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड की 60 माइक्रोग्राम प्रति लीटर सीमा के आधार पर भी पंजाब सबसे अधिक प्रभावित राज्य रहा, जहां 6 फीसदी कुओं में यूरेनियम की मात्रा 60 पीपीबी से अधिक पाई गई। दिल्ली में यह आंकड़ा 5 और हरियाणा में 4.4 फीसदी दर्ज किया गया।

    तेलंगाना में 2.6, आंध्र प्रदेश में 2, राजस्थान में 1.2 , छत्तीसगढ़ में 1.1, तमिलनाडु में 0.9, कर्नाटक में 0.7 , मध्य प्रदेश में 0.6 उत्तर प्रदेश में 0.4 तथा झारखंड में 0.25 फीसदी कुओं में यूरेनियम की सांद्रता एईआरबी द्वारा तय मानकों से अधिक मिली।


    स्वास्थ्य पर बढ़ी चिंता

    विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक यूरेनियम युक्त पानी के सेवन से सबसे अधिक असर किडनी पर पड़ता है, क्योंकि यूरेनियम एक रासायनिक रूप से विषैला तत्व भी है। इससे गुर्दों की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है, हड्डियों पर असर पड़ सकता है और लंबे समय में कैंसर जैसी आशंकाएं भी बढ़ सकती हैं, हालांकि वैज्ञानिकों के अनुसार सामान्यतः इसका रासायनिक विषाक्त प्रभाव विकिरण प्रभाव से अधिक गंभीर माना जाता है।

    बच्चों, गर्भवती महिलाओं और भूजल पर निर्भर ग्रामीण आबादी के लिए यह खतरा और अधिक संवेदनशील माना जाता है। खासतौर पर ग्रामीण और भूजल पर निर्भर आबादी के लिए यह स्थिति अधिक चिंता का विषय है।