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  • फर्जी आदेश के बाद अब असली नियुक्ति: वीरेंद्र गोयल को मिली सिंगरौली विकास प्राधिकरण की कमान

    फर्जी आदेश के बाद अब असली नियुक्ति: वीरेंद्र गोयल को मिली सिंगरौली विकास प्राधिकरण की कमान


    सिंगरौली सिंगरौली विकास प्राधिकरण (SDA) के नए अध्यक्ष को लेकर पिछले कई दिनों से चल रहा असमंजस आखिरकार खत्म हो गया। नगरीय विकास एवं आवास विभाग, भोपाल ने भाजपा के वरिष्ठ नेता वीरेंद्र गोयल को सिंगरौली विकास प्राधिकरण का नया अध्यक्ष नियुक्त करने का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। वे अब निवर्तमान अध्यक्ष दिलीप शाह का स्थान लेंगे।
    इस नियुक्ति को लेकर 9 और 10 मई को सोशल मीडिया पर एक कथित आदेश वायरल हुआ था, जिसे बाद में विभाग ने फर्जी घोषित कर दिया था। उस फर्जी पत्र के सामने आने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में भ्रम की स्थिति बन गई थी। हालांकि अब विभाग की ओर से जारी आधिकारिक आदेश के बाद सभी अटकलों पर विराम लग गया है।
    नगरीय विकास एवं आवास विभाग के उपसचिव सी.के. सद्भाव द्वारा जारी आदेश में वीरेंद्र गोयल की नियुक्ति की औपचारिक पुष्टि की गई है। आदेश जारी होते ही सिंगरौली विकास प्राधिकरण में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी हो गई।
    नवनियुक्त अध्यक्ष वीरेंद्र गोयल ने नियुक्ति के बाद कहा कि पार्टी और शासन ने उन पर जो भरोसा जताया है, वे उस विश्वास पर पूरी तरह खरा उतरने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि पहले नियुक्ति को लेकर जो देरी हुई, वह तकनीकी कारणों और गलतफहमी के चलते हुई थी। अब उनकी प्राथमिकता सिंगरौली शहर के विकास कार्यों को तेजी देना और प्राधिकरण की योजनाओं को प्रभावी तरीके से जमीन पर उतारना होगी।
    वहीं, निवर्तमान अध्यक्ष दिलीप शाह ने भी सोशल मीडिया के जरिए वीरेंद्र गोयल को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने उम्मीद जताई कि नए नेतृत्व में सिंगरौली विकास प्राधिकरण विकास के नए आयाम स्थापित करेगा।
    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि वीरेंद्र गोयल की नियुक्ति से क्षेत्रीय राजनीति और विकास कार्यों में नई सक्रियता देखने को मिल सकती है। फिलहाल शहर में इस नियुक्ति को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है।

  • राजपत्र के बाद शिंदे गुट ने खेला नया कार्ड, नगरसेवक होटल से निकले, गुट गठन रद्द!

    राजपत्र के बाद शिंदे गुट ने खेला नया कार्ड, नगरसेवक होटल से निकले, गुट गठन रद्द!


    मुंबई। नगर विकास विभाग की राजपत्र अधिसूचना के बाद शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) की राजनीतिक रणनीति में अचानक बदलाव देखने को मिला है। अधिसूचना जारी होते ही शिंदे गुट के नगरसेवकों की एंट्री और रिकॉर्डिंग प्रक्रिया टल गई।
    सूत्रों के अनुसार, सोमवार को नवनिर्वाचित नगरसेवकों को कोंकण भवन जाकर अपने गुट के पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी करनी थी, लेकिन राजपत्र अधिसूचना के बाद यह कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया। इसके बाद शिंदे गुट ने फिलहाल इस प्रक्रिया से दूरी बनाना उचित समझा है।

    दस्तावेज पार्टी के पासक्या है संकेत?
    इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ा संकेत माना जा रहा है कि शिंदे गुट ने अपने सभी नवनिर्वाचित नगरसेवकों के मूल दस्तावेज अपने पास रख लिए हैं।

     शिंदे गुट किसी बड़े राजनीतिक मोड़ या नई चाल की तैयारी कर रहा है।

    ताज लैंड्स एंड होटल से चेकआउट
    इसी बीच, बांद्रा स्थित ताज लैंड्स एंड होटल में ठहरे सभी शिवसेना नगरसेवकों को चेकआउट करने के निर्देश दिए गए। चौथे दिन आखिरकार सभी 29 नगरसेवकों को होटल से छुट्टी मिल गई। ये सभी पार्षद 17 जनवरी से होटल में ठहरे हुए थे, लेकिन अब अचानक उन्हें वापस बुला लिया गया। राजनीतिक गलियारों में इसे रणनीतिक वापसी के रूप में देखा जा रहा है।

    बेलापुर में गुट गठन कार्यक्रम भी रद्द
    नवी मुंबई के बेलापुर में गुट गठन (ग्रुप फॉर्मेशन) के लिए जो कार्यक्रम तय था, वह भी फिलहाल रद्द कर दिया गया।

    इस फैसले से स्पष्ट है कि शिंदे गुट अंदरखाने अपनी रणनीति पर फिर से विचार-विमर्श कर रहा है और किसी भी घोषणा से पहले सभी विकल्पों को परख रहा है।

    अब सबकी नजरें दिल्ली बैठक पर
    अब सभी की निगाहें दिल्ली में होने वाली अहम बैठक पर टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि इस बैठक के बाद शिवसेना की आगे की राजनीतिक दिशा और रणनीति साफ हो सकती है। पार्टी फिलहाल चुप्पी साधे हुए है, लेकिन आने वाले घंटों में कोई बड़ा फैसला सामने आने की संभावना को पूरी तरह से नकारा नहीं जा सकता।
    राजनीतिक हलकों में इस बदलाव को बड़ी चाल माना जा रहा है। अब देखना होगा कि क्या शिंदे गुट किसी नए मोड़ पर जाएगा या यह सिर्फ रणनीतिक इंतजार हैयह सवाल अब दिल्ली बैठक के बाद ही साफ हो पाएगा।