Tag: Urban Naxal

  • 'सवाल पूछो तो नक्सली…': पीएम मोदी के 'दिमागी नक्सल' बयान पर प्रकाश राज का तीखा पलटवार

    'सवाल पूछो तो नक्सली…': पीएम मोदी के 'दिमागी नक्सल' बयान पर प्रकाश राज का तीखा पलटवार


    नई दिल्ली। अभिनेता प्रकाश राज एक बार फिर अपने बेबाक बयान को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘दिमागी नक्सल’ टिप्पणी पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार से सवाल पूछने और असहमति जताने वालों को नक्सली बताया जा रहा है। प्रकाश राज ने 16 अगस्त की शाम X पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी के भाषण और सरकार की नीतियों पर तीखी प्रतिक्रिया दी।

    ‘सवाल करने वालों को नया नाम दे दिया’
    प्रकाश राज ने वीडियो में कहा कि लंबे समय से सरकार से सवाल करने वालों को ‘अर्बन नक्सल’, ‘देशविरोधी’ और दूसरे नामों से संबोधित किया जाता रहा है। अब उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ का नाम दिया गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री की टिप्पणी की आलोचना करते हुए कहा कि सवाल पूछना और असहमति जताना किसी को नक्सली नहीं बना देता।

    सरकारी स्कूलों की बदहाली का मुद्दा उठाया
    अभिनेता ने अपने वीडियो में सरकारी स्कूलों की स्थिति का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि कुछ लोग गांवों के सरकारी स्कूलों में जाकर वहां के टॉयलेट, क्लासरूम, शिक्षकों की कमी और सड़क जैसी बुनियादी समस्याओं को सामने ला रहे हैं। उनके मुताबिक, ऐसे मुद्दे उठाने वालों को ‘दिमागी नक्सल’ कहना सवालों से बचने का तरीका है।

    ‘दिमागी बनो, बेवकूफ नहीं’
    प्रकाश राज ने लोगों से सवाल पूछने और अपनी आवाज उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि जनता को यह तय करना होगा कि वह किस पक्ष का समर्थन करती है। उन्होंने अपने वीडियो के अंत में कहा कि ‘दिमागी बनो, बेवकूफ नहीं, अंधभक्त नहीं। सवाल करो, गुलामी नहीं।’

    प्रकाश राज इससे पहले भी सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाते रहे हैं। उनके इस नए बयान के बाद सोशल मीडिया पर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

  • PM मोदी के दिमागी नक्सल वाले बयान पर सियासी घमासान… विपक्षी दलों ने दी कड़ी प्रतिक्रिया

    PM मोदी के दिमागी नक्सल वाले बयान पर सियासी घमासान… विपक्षी दलों ने दी कड़ी प्रतिक्रिया


    नई दिल्ली।
    80वें स्वतंत्रता दिवस (80th Independence Day) (15 अगस्त 2026) पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के लाल किले से दिए गए भाषण में “दिमागी नक्सल” (“Intellectual Naxal”) शब्द के इस्तेमाल ने देश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।

    प्रधानमंत्री ने कहा था कि देश में जहां एक तरफ हथियारबंद नक्सलवाद खात्मे की कगार पर है, वहीं दूसरी तरफ ‘दिमागी नक्सल’ समाज में अराजकता फैलाने और युवाओं को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। इस बयान पर कांग्रेस, सीपीआई, तृणमूल कांग्रेस और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) समेत तमाम विपक्षी दलों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

    लाल किले से PM मोदी का क्या था बयान?
    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में वैचारिक विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा, “सुरक्षा बलों ने जंगलों में जारी बंदूकधारी माओवादी उग्रवाद को लगभग ध्वस्त कर दिया है।” उन्होंने आगे कहा, “लेकिन नक्सली विचारधारा वाले लोग अब ‘दिमागी नक्सल’ के रूप में देश को गलत रास्ते पर ले जाने और युवाओं को गुमराह करने के मौकों की तलाश में हैं।”

    पीएम ने कहा कि माओवादी विचारधारा ने दशकों तक सत्ता के गलियारों और सलाहकार समितियों में पैठ बनाकर सरकारी नीतियों को प्रभावित किया था। हमें इन ‘दिमागी नक्सलियों’ को अलग-थलग करना होगा।

    विपक्षी नेताओं का तीखा पलटवार
    प्रधानमंत्री के इस बयान के सामने आते ही विपक्षी दलों ने उन पर स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों और आलोचकों को निशाना बनाने के लिए करने का आरोप लगाया।

    कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया X पर पोस्ट करते हुए लिखा, “पहले उन्होंने अपने विरोधियों को ‘अर्बन नक्सल’ कहा, अब वे उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ कह रहे हैं। यह उनकी हताशा का स्पष्ट संकेत है। पीएम अक्सर उन्हीं नीतियों को अपनाते हैं जिनकी सलाह उनकी तरफ से निशाना बनाए गए लोग देते हैं।”

    वहीं CJP के मुख्य प्रवक्ता और स्वतंत्र पत्रकार सौरभ दास ने पीएम की शब्दावली पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा, “दिमागी नक्सल या ऐसा कोई भी ठप्पा काम नहीं आने वाला, प्रधानमंत्री जी! आप देश के शिक्षित युवाओं को सिर्फ इसलिए ‘नक्सली’ कैसे कह सकते हैं क्योंकि वे आपकी सरकार से सवाल पूछते हैं? यह सरासर अहंकार और युवाओं की समस्याओं को हल करने में नाकामी है।”

    भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के महासचिव डी. राजा ने कहा कि राइट-विंग ट्रॉप्स में ‘एंटी-नेशनल’ और ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ के बाद अब पीएम ने ‘दिमागी नक्सल’ का एक नया निरर्थक लेबल जोड़ दिया है। यह असहमति की आवाजों को दबाने और रोजगार-शिक्षा मांगने वाले युवाओं के मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास है।

    टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने पीएम के बयान पर तंज कसते हुए सोशल मीडिया पर लिखा, “हां, मैं एक दिमागी नक्सल हूं। परिभाषा के मुताबिक सभी कॉकरोच होते हैं।” 2027 और 2028 के आगामी राज्य विधानसभा चुनावों से पहले लाल किले से आया यह बयान आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजनीति और सुरक्षा बहस का एक मुख्य केंद्र बनने वाला है।