Tag: US ambassador

  • असम के शपथ ग्रहण में दिखी अंतरराष्ट्रीय मौजूदगी: अमेरिकी राजदूत की उपस्थिति ने बढ़ाया राजनीतिक महत्व

    असम के शपथ ग्रहण में दिखी अंतरराष्ट्रीय मौजूदगी: अमेरिकी राजदूत की उपस्थिति ने बढ़ाया राजनीतिक महत्व

    नई दिल्ली । असम की राजनीति में एक महत्वपूर्ण क्षण उस समय देखने को मिला जब मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने लगातार दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस भव्य समारोह में न केवल देश के प्रमुख राजनीतिक नेता शामिल हुए, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस आयोजन ने विशेष ध्यान आकर्षित किया।

    समारोह के दौरान भारत में अमेरिका के राजदूत की उपस्थिति सबसे अधिक चर्चा का विषय रही। उन्होंने इस कार्यक्रम में शामिल होने को अपने लिए सम्मान की बात बताया और कहा कि असम और अमेरिका के बीच व्यापारिक और आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। उनके अनुसार, दोनों देशों के बीच सहयोग के कई नए अवसर सामने आ रहे हैं, जो भविष्य में और अधिक विकसित हो सकते हैं।

    इस मौके पर अन्य देशों के राजनयिकों की उपस्थिति ने भी कार्यक्रम को एक अलग स्तर पर पहुंचा दिया। सिंगापुर के उच्चायोग की ओर से मुख्यमंत्री को बधाई दी गई और असम को एक भरोसेमंद साझेदार बताया गया। संदेश में यह भी कहा गया कि आने वाले समय में असम और सिंगापुर के बीच सहयोग के नए रास्ते खुल सकते हैं, खासकर आर्थिक और विकासात्मक क्षेत्रों में।

    शपथ ग्रहण समारोह में देश के शीर्ष नेतृत्व की भी उपस्थिति रही, जिससे यह आयोजन राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बन गया। विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्रीय स्तर के वरिष्ठ नेताओं ने भी इस अवसर पर भाग लिया, जिससे कार्यक्रम की गरिमा और बढ़ गई।

    हिमंता बिस्वा सरमा का राजनीतिक सफर भी इस मौके पर चर्चा का विषय रहा। उन्होंने कुछ वर्ष पहले अपनी राजनीतिक दिशा बदलते हुए एक नए राजनीतिक दल के साथ अपनी यात्रा शुरू की थी, जिसके बाद पूर्वोत्तर भारत की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। उनकी रणनीति और प्रशासनिक दृष्टिकोण को क्षेत्र में राजनीतिक मजबूती का प्रमुख कारण माना जाता है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनके नेतृत्व में असम ने विकास और निवेश के क्षेत्र में नई पहचान बनाई है। राज्य में बुनियादी ढांचे, उद्योग और कनेक्टिविटी को लेकर कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं, जिनका असर अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।

    इस शपथ ग्रहण समारोह ने न केवल राजनीतिक स्थिरता का संदेश दिया, बल्कि यह भी संकेत दिया कि असम अब केवल क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग और निवेश के नए केंद्र के रूप में उभर रहा है।

  • US राजदूत बोले- जल्द होगी मोदी और ट्रंप की मीटिंग.. नहीं बताई निश्चित समय-सीमा

    US राजदूत बोले- जल्द होगी मोदी और ट्रंप की मीटिंग.. नहीं बताई निश्चित समय-सीमा


    नई दिल्ली।
    भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Indian Prime Minister Narendra Modi) और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) की मुलाकात कब होगी? इस सवाल पर अमेरिकी राजदूत (US Ambassador) ने जवाब दिया है। उन्होंने कहाकि यह मुलाकात जल्द होगी, हालांकि उन्होंने कोई निश्चित समय-सीमा नहीं बताई है। इंडिया एआई इंपैक्ट समिट 2026 (India AI Impact Summit 2026) में बोलते हुए सर्जियो गोर ने यह बात कही। उन्होंने कहाकि नजर बनाए रखिए। मुझे पूरी उम्मीद है कि सही वक्त आने पर दोनों की मीटिंग होगी। गौरतलब है कि दोनों राष्ट्रप्रमुखों की मुलाकात को एक साल हो चुका है। दोनों अंतिम बार अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में मिले थे।

    पिछले कुछ वक्त से भारत और अमेरिका के बीच थोड़ा तनाव भी था। इसकी वजह, अमेरिका द्वारा भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाना था। हालांकि दोनों देशों के बीच ट्रेड डील के बाद यह टैरिफ 18 फीसदी हो गया है। इस बीच भारत अमेरिका के नेतृत्व वाले रणनीतिक गठजोड़ ‘पैक्स सिलिका’ में शामिल हो गया है। इसका उद्देश्य महत्वपूर्ण खनिजों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए एक लचीली आपूर्ति श्रृंखला का निर्माण करना है। इस दौरान वहां उपस्थित लोगों में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव, आर्थिक मामलों के लिए अमेरिकी उप विदेश मंत्री जैकब हेलबर्ग और भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर शामिल थे।

    इसको लेकर सर्जियो गोर ने अपनी टिप्पणी में कहाकि व्यापार समझौते से लेकर पैक्स सिलिका और रक्षा सहयोग तक, दोनों देशों की साथ काम करने की संभावनाएं वास्तव में असीमित हैं। अमेरिकी राजदूत ने कहा कि पैक्स सिलिका में भारत का प्रवेश केवल एक प्रतीकात्मक कदम नहीं है, बल्कि एक रणनीतिक कदम है जो द्विपक्षीय संबंधों की समग्र दिशा को और मजबूत करेगा। उन्होंने कहाकि भारत ऐसा देश है जहां प्रतिभा का भंडार है, जो प्रतिद्वंद्वियों को चुनौती देने के लिए काफी है। भारत की इंजीनियरिंग क्षमता इस महत्वपूर्ण गठबंधन के लिए आवश्यक योग्यताएं प्रदान करती है। प्रतिभा के अलावा, भारत ने महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण क्षमता की दिशा में भी उल्लेखनीय प्रगति की है और हम इसमें भी पूरी तरह से सहभागिता कर रहे हैं।

    गोर ने सुझाव दिया कि अमेरिका पैक्स सिलिका ढांचे के तहत भारत के साथ विश्वसनीय एआई प्रौद्योगिकियां साझा कर सकता है। अमेरिकी उप विदेश मंत्री हेलबर्ग ने गठबंधन में शामिल होने के भारत के फैसले की सराहना की और पैक्स सिलिका को आपूर्ति श्रृंखलाओं में दबाव की रणनीति और ब्लैकमेल के खिलाफ एक पहल बताया, जिसे चीन की ओर एक स्पष्ट इशारा माना जा रहा है। उन्होंने कहाकि हम देखते हैं कि हमारे मित्र और सहयोगी प्रतिदिन आर्थिक दबाव और ब्लैकमेल के खतरों का सामना कर रहे हैं। उन्हें अपनी संप्रभुता और अपनी समृद्धि के बीच चुनाव करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। हम खुद को एक ऐसी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जूझते हुए पाते हैं जो अत्यधिक केंद्रित है।

  • अमेरिकी राजदूत ने की भारत-US के बीच बढ़ती साझेदारी की जमकर तारीफ, ट्रेड डील को लेकर कही ये बात

    अमेरिकी राजदूत ने की भारत-US के बीच बढ़ती साझेदारी की जमकर तारीफ, ट्रेड डील को लेकर कही ये बात


    नई दिल्ली।
    भारत और अमेरिका (India and America) के बीच ट्रेड डील (Trade Deal) को लेकर अंतरिम समझौते पर सहमति बनने के बाद अमेरिका (America) की ओर से बड़ा बयान आया है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर (US Ambassador Sergio Gor) ने सोमवार को भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती साझेदारी की जमकर तारीफ की। इस दौरान गोर की तरफ से इस ट्रेड डील का क्रेडिट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ((American President Donald Trump) ) के अच्छे संबंधों को दिया गया। अमेरिकी राजदूत ने कहा है कि पिछले हफ्ते घोषित भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते के फ्रेमवर्क के पूरा होने का श्रेय प्रधानमंत्री मोदी और ट्रंप की दोस्ती को जाता है।

    अमेरिकी राजदूत नेवयहां नई दिल्ली में उनके आवास पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान यह बातें कही हैं। कार्यक्रम में विदेश मंत्री एस जयशंकर भी शामिल हुए। रिसेप्शन के दौरान गोर ने कहा कि वाइट हाउस में ट्रंप प्रशासन भारत को ध्यान में रख रहा है। गोर ने कहा, “मुझे यहां आए हुए अभी एक महीने से थोड़ा ज्यादा हुआ है, और हमने आते ही काम शुरू कर दिया। वाइट हाउस भारत को ध्यान में रख रहा है।” ट्रंप के दूत ने आगे कहा, “हमारे राष्ट्रपति भारत को तवज्जो दे रहे हैं। और राष्ट्रपति ट्रंप की प्रधानमंत्री मोदी के साथ दोस्ती की वजह से, हम आखिरकार एक व्यापार समझौता कर पाए।” बता दें कि गोर ने बीते 14 जनवरी को अपना पदभार संभाला था, जिसके बाद वह भारत में अमेरिका के 27वें राजदूत बन गए।


    अंतरिम व्यापार समझौते में क्या-क्या?

    इससे पहले भारत और अमेरिका ने बीते शनिवार को अंतरिम व्यापार समझौते के लिए एक रूपरेखा पर पहुंचने की घोषणा की थी जिसके तहत दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए कई वस्तुओं पर आयात शुल्क कम करेंगे। अमेरिका, भारतीय वस्तुओं पर शुल्क को मौजूदा 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करेगा। वहीं भारत सभी अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं और अमेरिकी खाद्य एवं कृषि उत्पादों की एक विस्तृत शृंखला पर आयात शुल्क समाप्त या कम करेगा। इनमें सूखे अनाज, पशु आहार के लिए लाल ज्वार, मेवे, ताजे और प्रसंस्कृत फल, सोयाबीन तेल, शराब और स्पिरिट शामिल हैं।


    अमेरिका ने हटाया अतिरिक्त आयात शुल्क

    दोनों देशों के एक संयुक्त बयान के मुताबिक, भारत ने अगले पांच साल में 500 अरब डॉलर के अमेरिकी ऊर्जा उत्पाद, विमान और विमान कलपुर्जे, कीमती धातु, प्रौद्योगिकी उत्पाद और कोकिंग कोयला खरीदने का इरादा जताया है। बयान के मुताबिक, ”अमेरिका और भारत को पारस्परिक और द्विपक्षीय रूप से लाभकारी व्यापार से संबंधित एक अंतरिम समझौते के लिए रूपरेखा तैयार करने की घोषणा करते हुए खुशी हो रही है।” इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश के माध्यम से रूसी तेल की खरीद पर पिछले वर्ष अगस्त में भारत पर लगाए गए 25 प्रतिशत अतिरिक्त आयात शुल्क को हटा दिया है।

    निर्यात को मिलेगा बढ़ावा
    वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि अंतरिम समझौते से भारतीय निर्यातकों, विशेषकर सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई), किसानों और मछुआरों के लिए 30,000 अरब अमेरिकी डॉलर का बाजार खुलेगा। शुल्क में कमी से वस्त्र और परिधान, चमड़ा और जूते, प्लास्टिक और रबर, जैविक रसायन, गृह सज्जा, हस्तशिल्प उत्पाद जैसे भारत के श्रम-प्रधान क्षेत्रों और कुछ मशीनरी के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। इसके अतिरिक्त, जेनेरिक दवाइयों, रत्नों और हीरों, तथा विमान के कल-पुर्जों सहित कई प्रकार की वस्तुओं पर शुल्क शून्य हो जाएगा, जिससे भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धी क्षमता और ‘मेक इन इंडिया’ को और बढ़ावा मिलेगा।

  • क्रिकेट के तेज विस्तार पर चर्चा: वानखेड़े में आईसीसी चेयरमैन जय शाह से मिले अमेरिका के राजदूत

    क्रिकेट के तेज विस्तार पर चर्चा: वानखेड़े में आईसीसी चेयरमैन जय शाह से मिले अमेरिका के राजदूत


    मुंबई।
    टी20 विश्व कप 2026 (T20 World Cup 2026) के दौरान मुंबई के ऐतिहासिक वानखेड़े स्टेडियम में भारत बनाम अमेरिका (India vs America) मुकाबले के बीच अमेरिका के भारत में राजदूत सर्जियो गोर (Ambassador Sergio Gore) ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के चेयरमैन जय शाह से मुलाकात की। इस दौरान दोनों के बीच अमेरिका में क्रिकेट के तेजी से बढ़ते दायरे और संभावनाओं पर चर्चा हुई।

    राजदूत गोर ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए बताया कि मुलाकात सकारात्मक रही और अमेरिका में क्रिकेट के “एक्सपोनेंशियल ग्रोथ” पर बातचीत हुई। उन्होंने अमेरिका में विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर, उभरती प्रतिभाओं और बढ़ते फैन बेस का भी जिक्र किया।

    इसी मैच के दौरान गोर ने उद्योगपति मुकेश अंबानी और नीता अंबानी से भी मुलाकात की और इसे सुखद बताया। मैदान पर खेले गए मुकाबले में भारत ने अमेरिका को 29 रन से हराया। कप्तान सूर्यकुमार यादव ने नाबाद 84 रन की अहम पारी खेलकर टीम को 161/9 तक पहुंचाया। जवाब में अमेरिकी टीम 20 ओवर में 132/9 रन ही बना सकी।

    गेंदबाजी में मोहम्मद सिराज ने 3 विकेट लेकर भारत की जीत में बड़ी भूमिका निभाई। अर्शदीप सिंह और अक्षर पटेल ने दो-दो विकेट हासिल किए। सिराज को अंतिम समय पर टीम में शामिल किया गया था, क्योंकि ऑलराउंडर हर्षित राणा चोट के कारण बाहर हो गए थे। वहीं तेज़ गेंदबाज जसप्रीत बुमराह बीमारी के चलते यह मैच नहीं खेल सके।

    डिफेंडिंग चैंपियन के रूप में उतरी भारतीय टीम पर इस बार भी खिताब बचाने का दबाव है। हालांकि पहले मैच में जीत से टीम ने सकारात्मक शुरुआत की है। अमेरिका में क्रिकेट की बढ़ती लोकप्रियता और आईसीसी नेतृत्व के साथ उच्चस्तरीय संवाद यह संकेत देते हैं कि खेल का वैश्विक विस्तार नई दिशा पकड़ रहा है।

  • कनाड़ा के साथ राजनयिक-व्यापारिक तनाव के बीच US की चेतावनी… जानें क्या बोले अमेरिकी राजदूत?

    कनाड़ा के साथ राजनयिक-व्यापारिक तनाव के बीच US की चेतावनी… जानें क्या बोले अमेरिकी राजदूत?


    ओटावा।
    अमेरिका और कनाडा (America and Canada) के बीच चल रहे राजनयिक और व्यापारिक तनाव (Diplomatic and trade tensions) ने अब रक्षा संबंधों को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है। कनाडा (Canada) में अमेरिकी राजदूत पीट होकस्ट्रा (US Ambassador Pete Hoekstra) ने चेतावनी दी है कि अगर कनाडा 88 F-35 लड़ाकू विमान खरीदने के अपने वादे से पीछे हटता है, तो नॉर्थ अमेरिकन एयरोस्पेस डिफेंस कमांड (NORAD) की संरचना में बड़ा बदलाव करना पड़ सकता है।


    मुख्य विवाद क्या है?

    होकस्ट्रा का यह बयान तब आया है जब पिछले महीने कनाडा ने अमेरिका से 19 बिलियन डॉलर की F-35 स्टील्थ फाइटर जेट्स की डील की ‘समीक्षा’ करने का फैसला किया। कनाडा सरकार ने यह निर्णय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कनाडा पर टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने की धमकी के बाद लिया है। 2023 में, कनाडा ने लॉकहीड मार्टिन से 88 F-35 जेट खरीदने का सौदा किया था। इसमें से 16 विमानों का भुगतान किया जा चुका है और उनकी डिलीवरी 2026 में होनी है।


    NORAD पर क्या असर पड़ेगा?

    1957 में स्थापित NORAD अमेरिका और कनाडा का एक संयुक्त सैन्य संगठन है। इसका मुख्य काम उत्तरी अमेरिका की हवाई और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करना है, जिसमें मिसाइलों और दुश्मन के विमानों का पता लगाना शामिल है। यह समझौता दोनों देशों को यह अनुमति देता है कि खतरा दिखने पर किसी भी देश का निकटतम विमान कार्रवाई कर सकता है, चाहे वह किसी भी हवाई क्षेत्र में हो।

    अमेरिकी राजदूत ने CBC News को बताया- अगर कनाडा यह क्षमता (F-35) प्रदान नहीं करने जा रहा है, तो हमें उन कमियों को खुद भरना होगा। उनका कहना है कि अगर कनाडा इन आधुनिक विमानों की खरीद से पीछे हटता है, तो उत्तरी अमेरिका की सुरक्षा व्यवस्था को नए सिरे से डिजाइन करना पड़ेगा।


    कनाडा का ‘प्लान बी’ और अमेरिका की आपत्ति

    अपनी F-35 डील की समीक्षा के साथ-साथ, कनाडा अब स्वीडन की डिफेंस कंपनी Saab से बात कर रहा है। कनाडा कई विकल्पों पर विचार कर रहा है। जैसे-72 ग्रिपेन ई जेट्स और 6 ग्लोबलआई सर्विलांस एयरक्राफ्ट। अमेरिकी राजदूत होकस्ट्रा ने स्पष्ट किया कि यदि कनाडा सरकार ‘ग्रिपेन’ जेट्स का विकल्प चुनती है, तो भी NORAD व्यवस्था पर पुनर्विचार करना होगा। उन्होंने स्वीडिश विमानों को अमेरिकी F-35 की तुलना में कमजोर बताया।

    होकस्ट्रा ने कहा- अगर वे फैसला करते हैं कि वे एक ऐसे ‘कमतर उत्पाद’ के साथ जा रहे हैं जो F-35 की तरह ‘इंटरऑपरेबल’ (एक-दूसरे के सिस्टम के साथ काम करने योग्य) नहीं है, तो इससे हमारी रक्षा क्षमता बदल जाती है। और ऐसे में, हमें यह पता लगाना होगा कि हम उस कमी को कैसे पूरा करेंगे।

    इस बयान से स्पष्ट है कि अमेरिका चाहता है कि कनाडा अपनी रक्षा जरूरतों के लिए अमेरिकी तकनीक पर ही निर्भर रहे, ताकि दोनों देशों की सेनाएं आसानी से मिलकर काम कर सकें। वहीं, कनाडा व्यापारिक दबावों (टैरिफ) के जवाब में अपनी संप्रभुता और अन्य विकल्पों को तलाशने का संकेत दे रहा है।