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    स्पेस रेस में चीन की बढ़त से अमेरिका अलर्ट, अधिकारियों की सख्त चेतावनी


    नई दिल्ली। अंतरिक्ष की दौड़ एक बार फिर तेज हो गई है और इस बार मुकाबला सीधे तौर पर अमेरिका और चीन के बीच नजर आ रहा है। अमेरिकी सांसदों और अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) यानी पृथ्वी की निचली कक्षा में चीन तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है, जिससे अमेरिका की स्पेस लीडरशिप को चुनौती मिल सकती है।

    आईएसएस के बाद का दौर बना चुनौती

    इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पिछले 25 सालों से मानव अंतरिक्ष मिशनों और रिसर्च का केंद्र रहा है। लेकिन अब यह स्टेशन पुराना हो रहा है और इसके अगले चरण को लेकर अमेरिका में चिंता बढ़ गई है। हाउस साइंस कमेटी के चेयरमैन ब्रायन बैबिन ने कहा कि ISS अमेरिकी स्पेस प्रोग्राम की बड़ी उपलब्धि है, लेकिन अब इसके बाद की योजना बेहद सावधानी से बनानी होगी।

    चीन की बढ़ती मौजूदगी से बढ़ी टेंशन

    चीन ने तियांगोंग स्पेस स्टेशन के जरिए लो अर्थ ऑर्बिट में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कर ली है। 2022 में लॉन्च हुए इस स्टेशन पर लगातार अंतरिक्ष यात्री काम कर रहे हैं। अमेरिकी सांसद माइक हरिडोपोलोस ने कहा कि अमेरिका को इस क्षेत्र में अपनी लीड बनाए रखने के लिए तेजी से कदम उठाने होंगे।

    सुरक्षा और तकनीकी जोखिम भी बड़ी चिंता

    एयरोस्पेस सेफ्टी एक्सपर्ट चार्ल्स जे. प्रीकोर्ट ने चेतावनी दी कि ISS अब अपने सबसे जोखिम भरे दौर में है। पुराने होते सिस्टम और तकनीकी घिसावट के कारण खतरे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि लगातार सुरक्षित ऑपरेशन के लिए कड़ी इंजीनियरिंग और रिस्क मैनेजमेंट जरूरी है।

    ‘स्पेस गैप’ का खतरा

    विशेषज्ञों ने इस बात पर भी चिंता जताई कि ISS से कमर्शियल स्पेस प्लेटफॉर्म पर ट्रांजिशन के दौरान अमेरिका की मानव अंतरिक्ष क्षमता में गैप आ सकता है। अगर ऐसा हुआ, तो इसका असर रिसर्च और भविष्य के मिशनों पर पड़ेगा।

    तेजी से बढ़ रहा स्पेस बिजनेस

    कमर्शियल स्पेस सेक्टर भी तेजी से विस्तार कर रहा है। कमर्शियल स्पेस फेडरेशन के अध्यक्ष डेविड कैवोसा के मुताबिक, वैश्विक स्पेस मार्केट पहले ही 57,000 करोड़ डॉलर का हो चुका है और 2035 तक इसके 1.8 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। ऐसे में इस क्षेत्र में देरी या नीति की अस्पष्टता निवेश को प्रभावित कर सकती है।

    नासा की नई रणनीति

    नासा अब ISS के बाद के दौर के लिए कमर्शियल स्पेस स्टेशनों पर फोकस कर रहा है। स्पेस ऑपरेशंस के अधिकारी जोएल आर. मोंटालबानो ने कहा कि एजेंसी 2030 तक एक मजबूत कमर्शियल स्पेस इकोसिस्टम तैयार करना चाहती है, जहां वह खुद भी एक ग्राहक के रूप में शामिल होगी।

    निर्णायक होंगे आने वाले साल

    अमेरिकी सांसदों का मानना है कि अगले कुछ साल यह तय करेंगे कि लो अर्थ ऑर्बिट में किसकी बादशाहत होगी। दशकों तक लगातार अंतरिक्ष में मौजूदगी के बाद अगर अमेरिका के मिशनों में कोई गैप आता है, तो इसका सीधा फायदा चीन को मिल सकता है।