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  • ईरान-US वार्ता में नया तनाव, शांति प्रस्ताव के जवाब में अमेरिका ने रखी ये 5 कड़ी शर्तें

    ईरान-US वार्ता में नया तनाव, शांति प्रस्ताव के जवाब में अमेरिका ने रखी ये 5 कड़ी शर्तें



    नई दिल्ली । ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव और शांति वार्ता के प्रयासों के बीच एक नया मोड़ सामने आया है। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फार्स के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के हालिया शांति प्रस्ताव के जवाब में पांच कड़ी शर्तें रखी हैं। इन शर्तों के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक हलचल एक बार फिर तेज हो गई है।

    हालांकि, अब तक न तो वॉशिंगटन और न ही तेहरान की ओर से इन शर्तों पर कोई आधिकारिक बयान आया है, लेकिन माना जा रहा है कि इससे दोनों देशों के बीच सुलह की संभावनाओं को झटका लगा है।

    अमेरिका की 5 शर्तें

    ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान के प्रस्ताव के जवाब में ये प्रमुख शर्तें रखी हैं:-

    मुआवजे से इनकार: अमेरिका ने किसी भी प्रकार के युद्ध हर्जाने या मुआवजे देने से साफ इनकार कर दिया है।
    यूरेनियम ट्रांसफर की शर्त: ईरान को अपने पास मौजूद 400 किलोग्राम समृद्ध यूरेनियम अमेरिका को सौंपना होगा।
    परमाणु गतिविधियों पर सीमा: ईरान में केवल एक परमाणु संयंत्र को संचालन की अनुमति दी जाएगी।
    फ्रीज संपत्तियों पर रोक: विदेशों में जब्त ईरानी संपत्तियों और फंड्स को जारी करने से अमेरिका ने इनकार किया है।
    सीजफायर की शर्त: युद्धविराम तभी आगे बढ़ेगा जब दोनों पक्षों के बीच औपचारिक वार्ता शुरू होगी।

    ईरान की प्रतिक्रिया
    ईरानी विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका का यह रुख समाधान की बजाय राजनीतिक दबाव बनाने का प्रयास है। उनका आरोप है कि वॉशिंगटन बातचीत की आड़ में ऐसे लक्ष्य हासिल करना चाहता है जो वह सैन्य रूप से हासिल नहीं कर सका।

    ईरान की ओर से भी प्रस्ताव
    इससे पहले ईरान ने भी अमेरिका के सामने पांच शर्तें रखी थीं, जिनमें सभी मोर्चों पर दुश्मनी खत्म करना, प्रतिबंध हटाना, फ्रीज संपत्तियों को जारी करना, युद्ध हर्जाना देना और होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की संप्रभुता स्वीकार करना शामिल था।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, 28 फरवरी को हुए हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ा था और करीब 40 दिनों तक संघर्ष की स्थिति रही। इसके बाद 8 अप्रैल को दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम पर सहमति बनी। 11 और 12 अप्रैल को इस्लामाबाद में हुई शुरुआती वार्ता भी बिना नतीजे के खत्म हो गई थी। इसके बाद से पाकिस्तान के माध्यम से दोनों देशों के बीच ड्राफ्ट प्रस्तावों का आदान-प्रदान जारी है, लेकिन नई अमेरिकी शर्तों के बाद बातचीत और अधिक जटिल हो गई है।