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  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से युद्ध की तस्वीर बदलेगी, पर जीवन-मृत्यु के फैसले मशीनों को नहीं सौंपे जा सकते: जेडी वेंस

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से युद्ध की तस्वीर बदलेगी, पर जीवन-मृत्यु के फैसले मशीनों को नहीं सौंपे जा सकते: जेडी वेंस

    नई दिल्ली । अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भविष्य के युद्ध में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि तकनीक सैन्य रणनीतियों को पूरी तरह बदल सकती है, लेकिन अंतिम नैतिक निर्णयों की जिम्मेदारी हमेशा इंसानों के पास ही रहनी चाहिए। कोलोराडो स्प्रिंग्स स्थित अमेरिकी वायुसेना अकादमी में स्नातक कैडेटों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से उस दौर में प्रवेश कर रही है, जहां साइबर ऑपरेशन, स्वायत्त सिस्टम और एआई आधारित तकनीकें युद्ध के स्वरूप को नए स्तर पर ले जा रही हैं। ऐसे समय में सैन्य नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना होगा कि तकनीक नियंत्रण से बाहर न जाए और मानवीय मूल्यों को पीछे न छोड़ दे।

    वेंस ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि एआई के बढ़ते उपयोग को लेकर उनकी सबसे बड़ी चिंता यह है कि कहीं यह जीवन और मृत्यु जैसे संवेदनशील निर्णयों को मशीनों के हवाले न कर दे। उन्होंने कहा कि युद्ध केवल रणनीति या तकनीक का खेल नहीं है, बल्कि यह गहरे नैतिक निर्णयों से जुड़ा क्षेत्र है, जहां इंसानी संवेदना और विवेक की भूमिका सबसे अहम होती है। उन्होंने हाल ही में धार्मिक और नैतिक चर्चाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक के युग में भी यह सवाल उतना ही प्रासंगिक है कि महत्वपूर्ण निर्णयों का अधिकार मशीनों को दिया जाना चाहिए या इंसानों को।

    उन्होंने भविष्य के सैन्य अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में सेना में एआई और स्वायत्त प्रणालियों का उपयोग और बढ़ेगा, जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज और जटिल दोनों होगी। ऐसे में अधिकारियों को यह समझना होगा कि तकनीक का उद्देश्य मानव क्षमता को बढ़ाना होना चाहिए, न कि उसे प्रतिस्थापित करना। उन्होंने कहा कि अगर भविष्य के युद्ध को मानव सभ्यता के नैतिक मूल्यों के अनुरूप बनाए रखना है, तो अंतिम निर्णय लेने का अधिकार मशीनों को नहीं दिया जा सकता।

    जेडी वेंस ने यह भी कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है और विभिन्न देश एक-दूसरे की सैन्य क्षमताओं पर लगातार नजर रख रहे हैं। ऐसे माहौल में अमेरिका के सैन्य अधिकारियों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध केवल हथियारों का संघर्ष नहीं रह गया है, बल्कि यह डेटा, तकनीक और रणनीतिक समझ का भी बड़ा क्षेत्र बन चुका है, जहां एआई तेजी से प्रभाव बढ़ा रहा है।

    अपने संबोधन में उन्होंने अमेरिकी सेना के आधुनिकीकरण और नई तकनीकी परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार लगातार रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। इसके साथ ही सैनिकों के जीवन स्तर में सुधार और आधुनिक युद्ध आवश्यकताओं के अनुरूप ढांचे को विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाला समय उन अधिकारियों का होगा जो तकनीक और नैतिकता दोनों के बीच संतुलन बनाकर निर्णय लेने में सक्षम होंगे।

    अंत में उन्होंने कैडेटों को सलाह दी कि वे तकनीक को अपने विकास और क्षमता विस्तार का साधन बनाएं, लेकिन कभी भी उसके पूरी तरह अधीन न हो जाएं। उनके अनुसार, युद्ध का संचालन हमेशा इंसानी बुद्धि, विवेक और नैतिक जिम्मेदारी के आधार पर होना चाहिए, क्योंकि मशीनें केवल निर्देशों का पालन कर सकती हैं, निर्णय नहीं ले सकतीं।