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  • ट्रंप ने जताई नाराजगी, बोले- अमेरिका को पैसों से ज्यादा वफादारी की जरूरत

    ट्रंप ने जताई नाराजगी, बोले- अमेरिका को पैसों से ज्यादा वफादारी की जरूरत


    वॉशिंगटन। नाटो शिखर सम्मेलन से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सहयोगी देशों को लेकर बड़ा बयान दिया है। व्हाइट हाउस में नाटो महासचिव मार्क रूटे के साथ हुई मुलाकात के दौरान ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बढ़े तनाव और संघर्ष के दौरान कई नाटो सहयोगी देशों ने अमेरिका को निराश किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिका को किसी सैन्य सहायता की जरूरत नहीं थी लेकिन सहयोगी देशों से जिस तरह के समर्थन और एकजुटता की उम्मीद थी वह देखने को नहीं मिली।

    ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपनी रणनीति और ताकत के दम पर हालात को नियंत्रित किया और किसी बाहरी मदद की आवश्यकता नहीं पड़ी। इसके बावजूद उन्होंने माना कि अगर सहयोगी देश खुलकर समर्थन जताते तो यह अमेरिका के लिए सकारात्मक संदेश होता। उन्होंने इटली ब्रिटेन जर्मनी और फ्रांस जैसे प्रमुख सहयोगी देशों का नाम लेते हुए कहा कि उनके रवैये से वे खासे निराश हुए हैं।

    नाटो महासचिव मार्क रूटे ने हालांकि यूरोपीय देशों का बचाव करते हुए कहा कि कई देशों ने अमेरिका को महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक और रणनीतिक सहयोग प्रदान किया। रूटे ने बताया कि संघर्ष के दौरान यूरोप स्थित सैन्य अड्डों से हजारों अमेरिकी विमानों ने उड़ान भरी और अमेरिका को आवश्यक सैन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। उन्होंने कहा कि यूरोपीय सहयोग के बिना ऐसे बड़े अभियान को अंजाम देना आसान नहीं होता।

    बैठक के दौरान ट्रंप ने एक बार फिर नाटो सदस्य देशों पर रक्षा बजट बढ़ाने का दबाव बनाया। उन्होंने कहा कि कई देशों ने अपनी जीडीपी का पांच प्रतिशत रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र पर खर्च करने का वादा किया था लेकिन अधिकांश देश अब तक इस लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाए हैं। ट्रंप का कहना था कि अमेरिका लंबे समय से नाटो का सबसे बड़ा वित्तीय और सैन्य योगदानकर्ता रहा है जबकि अन्य देशों को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

    हालांकि ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका की पहली अपेक्षा आर्थिक सहयोग नहीं है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना है और उसे किसी के पैसों की जरूरत नहीं है। अमेरिका को अपने सहयोगियों से केवल वफादारी और भरोसेमंद साझेदारी चाहिए।

    ईरान को लेकर ट्रंप ने कहा कि तेहरान के साथ बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रगति देखने को मिल रही है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान कुछ बड़ी रियायतें देने को तैयार है। हालांकि ट्रंप ने साफ कर दिया कि किसी भी स्थिति में ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

    तुर्किए के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन को लेकर भी ट्रंप ने सकारात्मक टिप्पणी की और उन्हें अपना मित्र बताया। वहीं एफ-35 लड़ाकू विमान कार्यक्रम में तुर्किए की संभावित वापसी को लेकर अमेरिकी प्रशासन कानूनी प्रक्रियाओं की समीक्षा कर रहा है।

    यूक्रेन संकट पर पूछे गए सवाल के जवाब में ट्रंप ने राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की सराहना की और उन्हें साहसी नेता बताया। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद जेलेंस्की मजबूती से डटे हुए हैं।

    अब 7 और 8 जुलाई को होने वाले नाटो शिखर सम्मेलन पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं जहां रक्षा खर्च बढ़ाने यूक्रेन को समर्थन जारी रखने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

  • Pakistan US Relations: ‘पाकिस्तान पर भरोसा नहीं किया जा सकता’, पूर्व पेंटागन अधिकारी माइकल रुबिन का बड़ा बयान

    Pakistan US Relations: ‘पाकिस्तान पर भरोसा नहीं किया जा सकता’, पूर्व पेंटागन अधिकारी माइकल रुबिन का बड़ा बयान


    नई दिल्ली। अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्तों में हाल के महीनों में भले ही नरमी और नजदीकी देखने को मिली हो, लेकिन भरोसे को लेकर सवाल अब भी कायम हैं। इसी बीच पेंटागन के पूर्व अधिकारी और मिडिल ईस्ट मामलों के विशेषज्ञ Michael Rubin ने पाकिस्तान को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को पाकिस्तान पर भरोसा नहीं करना चाहिए और भविष्य में इस्लामाबाद से किए गए किसी भी वादे को निभाने के लिए वॉशिंगटन बाध्य नहीं होगा।

    माइकल रुबिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि अमेरिकी विदेश नीति में पाकिस्तान को कभी स्थायी सहयोगी के रूप में नहीं देखा गया। उनके मुताबिक, वॉशिंगटन ने हमेशा पाकिस्तान को केवल रणनीतिक जरूरतों के लिए इस्तेमाल किया और मौजूदा नेतृत्व भी उसी नीति का हिस्सा है।

    रुबिन ने कहा कि Donald Trump प्रशासन का कार्यकाल खत्म होने के बाद चाहे रिपब्लिकन सरकार आए या डेमोक्रेट, दोनों इस बात पर सहमत होंगे कि पाकिस्तान पूरी तरह भरोसेमंद साझेदार नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका पाक सेना प्रमुख Asim Munir से किए गए किसी भी वादे को निभाने के लिए खुद को मजबूर महसूस नहीं करेगा।

    दरअसल, ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्तों में बदलाव देखने को मिला है। ट्रंप कई मौकों पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif और आर्मी चीफ असीम मुनीर की तारीफ कर चुके हैं। इतना ही नहीं, ईरान से जुड़े क्षेत्रीय तनाव और वार्ता में भी अमेरिका ने पाकिस्तान की भूमिका को अहम बताया है।

    हालांकि, पाकिस्तान और अमेरिका के संबंधों का इतिहास उतार-चढ़ाव भरा रहा है। साल 2001 में अमेरिका में हुए 9/11 आतंकी हमले के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ गया था। अमेरिका को शक था कि आतंकी संगठन अल-कायदा सरगना Osama bin Laden को पाकिस्तान में पनाह मिली हुई है। इसके बाद साल 2011 में अमेरिकी सेना ने पाकिस्तान के एबटाबाद में ऑपरेशन चलाकर ओसामा बिन लादेन को मार गिराया था। इस घटना के बाद दोनों देशों के रिश्ते लंबे समय तक तनावपूर्ण बने रहे।

    स्थिति यह रही कि साल 2006 के बाद से किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति ने पाकिस्तान का दौरा नहीं किया। वहीं 2011 के बाद लंबे समय तक अमेरिका के बड़े अधिकारी भी इस्लामाबाद जाने से बचते रहे। हालांकि हाल ही में अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने ईरान वार्ता के सिलसिले में पाकिस्तान का दौरा किया, जिसे दोनों देशों के बीच नए समीकरण के तौर पर देखा जा रहा है।

  • ट्रंप पर दबाव बढ़ा, सीनेट में डेमोक्रेट नेताओं ने ईरान संघर्ष की आलोचना की

    ट्रंप पर दबाव बढ़ा, सीनेट में डेमोक्रेट नेताओं ने ईरान संघर्ष की आलोचना की


    वाशिंगटन । वाशिंगटन अमेरिका में ईरान के साथ जारी संघर्ष को लेकर सियासी माहौल गर्म हो गया है। शीर्ष डेमोक्रेट नेताओं ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर दबाव बनाते हुए युद्ध की बढ़ती लागत, स्पष्ट रणनीति की कमी और लंबे संघर्ष के खतरे को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।

    सीनेट में डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर ने कहा कि इस युद्ध का कोई स्पष्ट लक्ष्य या रणनीति नहीं है। उन्होंने कहा, “ट्रंप का ईरान के साथ युद्ध चौथे हफ्ते में है और इसका कोई अंत नजर नहीं आ रहा।” शूमर ने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति आगे की योजना को लेकर साफ जवाब देने में विफल हैं। उन्होंने व्हाइट हाउस के बयान भी विरोधाभासी बताया और कहा, “यह क्या हो रहा है? कमांडर-इन-चीफ की लीडरशिप नहीं दिख रही। या तो भ्रमित हैं, या सच नहीं बोल रहे, या दोनों एक साथ हैं।”

    शूमर ने युद्ध को अमेरिका में बढ़ती पेट्रोल कीमतों से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि एक महीने पहले गैस की औसत कीमत लगभग 2.93 डॉलर प्रति गैलन थी, जो अब बढ़कर 3.94 डॉलर हो गई है। यह वृद्धि यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के बाद देखी गई सबसे बड़ी मासिक उछालों में से एक है।

    सीनेटर ग्रेग लैंड्समैन ने कहा कि अब समय आ गया है कि ईरान में अभियान समाप्त किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि और गहराई से शामिल होने पर अमेरिका बिना रणनीति वाले लंबे युद्ध में फंस सकता है। उनके अनुसार अमेरिकी बलों ने ईरान की मिसाइल और ड्रोन लॉन्च क्षमता लगभग पूरी तरह नष्ट कर दी है और हथियारों के ढांचे को निशाना बनाने का उद्देश्य पूरा हो चुका है।

    सीनेटर पीटर वेल्च ने सरकार के रुख की आलोचना करते हुए 200 अरब डॉलर के युद्ध फंड का विरोध किया। उन्होंने आर्थिक असर पर चिंता जताई और बताया कि पेट्रोल की कीमतें कम से कम 1 डॉलर बढ़ गई हैं, जिससे आम अमेरिकी परिवार को सालाना लगभग 2,000 डॉलर अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा। इसके अलावा, उर्वरक और हीटिंग ऑयल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे परिवारों पर लगभग 1,000 डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।

    सीनेटर सारा जैकब्स ने इसे अमेरिकी विदेश नीति की बड़ी गलती बताया। उन्होंने कहा सरकार के पास आगे की कोई स्पष्ट योजना नहीं है और आम लोगों को यह तक नहीं बताया जा रहा कि यह युद्ध है क्या, इसका लक्ष्य क्या है और इसकी लागत कितनी होगी। इस तरह, डेमोक्रेट नेताओं ने ट्रंप पर दबाव बढ़ाया है कि वह युद्ध की स्पष्ट रणनीति पेश करें, पारदर्शिता सुनिश्चित करें और अमेरिका के आर्थिक और सामाजिक नुकसान को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई करें।

  • कनाडा को एक साल में ही निगल जाएगा चीन बोर्ड ऑफ पीस से हटाने के बाद ट्रंप की कड़ी चेतावनी

    कनाडा को एक साल में ही निगल जाएगा चीन बोर्ड ऑफ पीस से हटाने के बाद ट्रंप की कड़ी चेतावनी


    नई दिल्ली।अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने बयान को लेकर वैश्विक सुर्खियों में आ गए हैं ताजा बयान में उन्होंने कनाडा को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर उसने अमेरिका के बजाय चीन के साथ नजदीकी बढ़ाई तो वह एक साल के भीतर ही उसे निगल जाएगा

    ट्रंप ने यह बयान उस समय दिया जब कनाडा ने अमेरिका के प्रस्तावित गोल्डन डोम मिसाइल डिफेंस सिस्टम का विरोध किया यह सिस्टम इजरायल के आयरन डोम से प्रेरित बताया जा रहा है और ग्रीनलैंड के ऊपर तैनात किए जाने की योजना है अमेरिकी राष्ट्रपति का कहना है कि यह सिस्टम न केवल अमेरिका बल्कि कनाडा की सुरक्षा के लिए भी जरूरी हैडोनाल्ड ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर लिखा कि कनाडा ग्रीनलैंड के ऊपर बनने वाले गोल्डन डोम के खिलाफ है जबकि यह सिस्टम कनाडा को भी सुरक्षा प्रदान करेगा इसके बजाय कनाडा ने चीन के साथ व्यापार बढ़ाने के समर्थन में रुख अपनाया है जो आने वाले एक साल में ही उसे खत्म कर देगा

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि वह चाहते हैं कि गोल्डन डोम ग्रीनलैंड को पूरी तरह कवर करे उनका तर्क है कि आर्कटिक क्षेत्र पर नियंत्रण से अमेरिका को रूस और चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने में मदद मिलेगीइससे पहले दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच की बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा था कि कनाडा को अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका का आभारी होना चाहिए उन्होंने यह भी कहा था कि कनाडा अमेरिका की वजह से ही जीवित है

    हालांकि कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने ट्रंप के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया कार्नी ने कहा कि कनाडा और अमेरिका के बीच मजबूत साझेदारी जरूर है लेकिन कनाडा की प्रगति का श्रेय अमेरिका को नहीं दिया जा सकता उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी दबदबे पर आधारित वैश्विक व्यवस्था टूटने की कगार पर हैकार्नी के इस बयान के बाद ट्रंप ने कड़ा कदम उठाते हुए उन्हें अपने बोर्ड ऑफ पीस से बाहर कर दिया यह बोर्ड दुनिया में शांति स्थापित करने के उद्देश्य से ट्रंप द्वारा शुरू किया गया था

    बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के लिए ट्रंप ने दुनिया के लगभग साठ देशों को आमंत्रण भेजा था इजरायली मीडिया के अनुसार इनमें से पच्चीस देशों ने इस न्योते को स्वीकार कर लिया है बोर्ड में शामिल देशों में इजरायल सऊदी अरब संयुक्त अरब अमीरात पाकिस्तान कतर तुर्किए मिस्र इंडोनेशिया अर्जेंटीना और मंगोलिया समेत कई देश शामिल हैंट्रंप का यह बयान और कदम एक बार फिर अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के बीच बढ़ते मतभेदों को उजागर करता है