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  • माइग्रेशन मुद्दे पर तनाव: अमेरिकी फैसले के असर का आकलन करेगा मैक्सिको

    माइग्रेशन मुद्दे पर तनाव: अमेरिकी फैसले के असर का आकलन करेगा मैक्सिको


    नई दिल्ली । अमेरिका में अवैध प्रवासियों के खिलाफ सख्त होते कदमों ने अब मैक्सिको की चिंता बढ़ा दी है। Donald Trump प्रशासन द्वारा जारी नए एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के बाद मैक्सिको सरकार सतर्क हो गई है। इस आदेश के तहत बिना कानूनी दस्तावेजों के अमेरिका में रह रहे प्रवासियों की बैंकिंग और वित्तीय गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जा सकती है। इसी को देखते हुए Claudia Sheinbaum ने अपने अधिकारियों को इस फैसले के संभावित प्रभाव का विस्तृत आकलन करने के निर्देश दिए हैं।

    राष्ट्रपति शीनबॉम ने अपनी नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उनकी सरकार इस आदेश के आर्थिक और सामाजिक प्रभावों का अध्ययन कर रही है। खासतौर पर इस बात पर ध्यान दिया जा रहा है कि इसका असर अमेरिका में काम कर रहे लाखों मैक्सिकन नागरिकों द्वारा अपने परिवारों को भेजे जाने वाले पैसों यानी रेमिटेंस पर कितना पड़ेगा। मैक्सिको की अर्थव्यवस्था में रेमिटेंस विदेशी मुद्रा का एक बड़ा स्रोत मानी जाती है और हर साल अरबों डॉलर देश में आते हैं।

    मैक्सिको सरकार के अनुसार, वित्त मंत्रालय और अमेरिका में नए मैक्सिकन राजदूत Roberto Lajous इस मामले का संयुक्त रूप से अध्ययन कर रहे हैं। शुरुआती समीक्षा में फिलहाल किसी बड़े खतरे के संकेत नहीं मिले हैं, लेकिन सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। अधिकारियों का मानना है कि अगर बैंकिंग सेवाओं और पैसों के लेन-देन पर ज्यादा निगरानी बढ़ी, तो इसका असर प्रवासी समुदाय पर पड़ सकता है।

    अमेरिका के इस नए आदेश में बैंकों और वित्तीय संस्थानों को ग्राहकों की नागरिकता और इमिग्रेशन स्थिति से जुड़े संदिग्ध संकेतों की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत सीमा-पार धन भेजने, बैंक खाते खोलने और वित्तीय सेवाओं के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले पहचान पत्रों की जांच और सख्त की जाएगी। माना जा रहा है कि इससे बड़ी संख्या में प्रवासियों की वित्तीय गतिविधियां जांच के दायरे में आ सकती हैं।

    व्हाइट हाउस के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप ने 19 मई को इस आदेश पर हस्ताक्षर किए थे। प्रशासन का तर्क है कि अवैध रूप से रह रहे लोगों को बैंकिंग सुविधाएं और ऋण देना वित्तीय व्यवस्था के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। ट्रंप ने कहा कि कई प्रवासियों के पास स्थायी रोजगार नहीं होता और उन पर निर्वासन का खतरा बना रहता है। ऐसे में उन्हें ऋण देना बैंकिंग प्रणाली की स्थिरता के लिए खतरा बन सकता है।

    इसी बीच अमेरिकी कांग्रेस में विदेश भेजे जाने वाले पैसों यानी रेमिटेंस पर 5 प्रतिशत टैक्स लगाने के प्रस्ताव पर भी चर्चा तेज हो गई है। फिलहाल केवल नकद लेन-देन पर 1 प्रतिशत टैक्स लागू है। मैक्सिको सरकार ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा है कि यह प्रवासियों पर “दोहरी टैक्स वसूली” जैसा होगा, क्योंकि वे पहले ही अमेरिका में टैक्स का भुगतान करते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका ने प्रवासियों के वित्तीय लेन-देन पर और सख्ती की, तो इसका असर सिर्फ मैक्सिको ही नहीं बल्कि कई लैटिन अमेरिकी देशों की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा अमेरिका और मैक्सिको के बीच बड़ा राजनीतिक और आर्थिक विषय बन सकता है।

  • अमेरिका ने स्वेच्छा से देश छोड़ने वाले अवैध प्रवासियों को 3,000 डॉलर और मुफ्त हवाई टिकट देने की घोषणा की।

    अमेरिका ने स्वेच्छा से देश छोड़ने वाले अवैध प्रवासियों को 3,000 डॉलर और मुफ्त हवाई टिकट देने की घोषणा की।


    नई दिल्ली।अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग DHS ने अवैध रूप से अमेरिका में रह रहे प्रवासियों के लिए बड़ा ऐलान किया है। इसमें भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। विभाग ने सेल्फ-डिपोर्टेशन यानी स्वेच्छा से अपने देश लौटने पर मिलने वाली प्रोत्साहन राशि 1,000 डॉलर से बढ़ाकर 3,000 डॉलर कर दी है। इसके साथ ही सरकार की ओर से मुफ्त हवाई टिकट भी दिया जाएगा, ताकि प्रवासी बिना किसी खर्च के अपने देश लौट सकें।

    31 दिसंबर तक रजिस्ट्रेशन करने पर मिलेगा लाभ

    DHS के अनुसार, जो प्रवासी 31 दिसंबर तक CBP One ऐप के जरिए सेल्फ-डिपोर्टेशन के लिए रजिस्ट्रेशन कराएंगे, वे इस योजना का पूरा लाभ उठा सकेंगे। ऐसे लोगों को 3,000 डॉलर नकद, सरकार द्वारा प्रायोजित यात्रा और वीजा अवधि से अधिक रुकने पर लगने वाले नागरिक जुर्माने या दंडों से छूट मिलेगी।

    तेज, मुफ्त और आसान प्रक्रिया

    गृह सुरक्षा विभाग ने इस प्रक्रिया को तेज, मुफ्त और आसान बताया है। इसके लिए केवल CBP One ऐप डाउनलोड कर अपनी जानकारी दर्ज करनी होगी। यात्रा की पूरी व्यवस्था अमेरिकी सरकार करेगी, जिससे प्रवासियों को किसी तरह की भागदौड़ न करनी पड़े।

    विकल्प नहीं चुना तो सख्त कार्रवाई

    DHS ने साफ चेतावनी दी है कि जो अवैध प्रवासी इस योजना का लाभ नहीं लेंगे, उन्हें गिरफ्तार कर निर्वासित किया जाएगा। इसके साथ ही भविष्य में अमेरिका में प्रवेश पर स्थायी प्रतिबंध भी लगाया जा सकता है। यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में चल रहे सख्त आव्रजन अभियान का हिस्सा है।

    निर्वासन खर्च में 70% तक कटौती का दावा

    विभाग का दावा है कि सेल्फ-डिपोर्टेशन से निर्वासन की लागत में करीब 70 प्रतिशत तक कमी आएगी। मई 2025 तक एक अवैध प्रवासी को गिरफ्तार करने, हिरासत में रखने और निर्वासित करने की औसत लागत 17,121 डॉलर आ रही थी।

    सीमित समय का मौका

    गृह सुरक्षा सचिव क्रिस्टी नोएम ने इसे सीमित समय का अवसर बताते हुए कहा कि अमेरिकी करदाताओं के पैसे बचाने के लिए यह प्रोत्साहन बढ़ाया गया है। उन्होंने अवैध प्रवासियों से अपील की कि वे इस मौके का लाभ उठाएं।

    2026 में और सख्ती की तैयारी

    DHS के मुताबिक जनवरी 2025 से अब तक करीब 19 लाख अवैध प्रवासी स्वेच्छा से अमेरिका छोड़ चुके हैं। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि 2026 में और सख्त आव्रजन अभियान चलाया जाएगा, जिसके तहत नई फंडिंग, अधिकारियों की भर्ती और हिरासत क्षमता बढ़ाने की योजना है।