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  • कार्नी की US से निवेश खींचने की तैयारी….. कनाड़ा इन्वेस्टमेंट समिट में जुटेंगे 300 दिग्गज सीईओ

    कार्नी की US से निवेश खींचने की तैयारी….. कनाड़ा इन्वेस्टमेंट समिट में जुटेंगे 300 दिग्गज सीईओ


    टोरंटो।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) चाहते हैं कि कारखाने और निवेश दक्षिण की ओर यानी अमेरिका (America) आएं। वहीं, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी (Canadian Prime Minister Mark Carney) को उम्मीद है कि वे अरबों डॉलर का निवेश उत्तर की ओर यानी कनाडा ((Canada) की तरफ ला सकते हैं।

    इस हफ्ते कार्नी के ‘कनाडा इन्वेस्टमेंट समिट’ के लिए दुनिया की कुछ सबसे बड़ी इन्वेस्टमेंट कंपनियों के लगभग 300 सीईओ और सीनियर एग्जीक्यूटिव टोरंटो के यॉर्कविले इलाके में मौजूद ‘फोर सीजन्स’ होटल में इकट्ठा हो रहे हैं। ये निवेशक मिलकर 120 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से ज्यादा की संपत्ति का प्रबंधन करते हैं। इससे उस पूंजी के बड़े पैमाने का पता चलता है जिसे कार्नी हासिल करना चाहते हैं, क्योंकि कनाडा अरबों डॉलर का नया निवेश आकर्षित करने और अमेरिका पर अपनी आर्थिक निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है।


    पीएम कार्नी ने क्या कहा था?

    पिछले हफ्ते अल्बर्टा के बैनफ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कार्नी ने कहा, ‘कनाडा की पहचान सिर्फ अमेरिका के पड़ोस में होने तक सीमित नहीं है। हमारे पास वह सब कुछ है जिसकी दुनिया को जरूरत है।’ कार्नी ने कनाडा के विशाल ऊर्जा और जरूरी खनिजों के संसाधनों, वहां के पढ़े-लिखे वर्कफोर्स और उन ट्रेड एग्रीमेंट्स की ओर इशारा किया, जिनकी वजह से कनाडा में मौजूद कंपनियों को दुनिया भर में लगभग 1.5 अरब ग्राहकों तक पहुंच मिलती है।

    कनाडा को भरोसा है कि वह ट्रंप का सामना कर सकता है और अपने निवेश के स्रोतों में विविधता ला सकता है। लेकिन यह शिखर सम्मेलन कनाडा के लिए एक नाजुक समय पर हो रहा है। व्यापार वार्ता 21 अगस्त को विफल हो गई, जिसके बाद ट्रंप ने लगभग 20 अरब अमेरिकी डॉलर के कनाडाई सामानों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया। कनाडा ने जवाबी कार्रवाई की। इसके बाद वाशिंगटन ने फिर से दबाव बढ़ाते हुए कुछ कनाडाई आयात पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की और बड़े, दीर्घकालिक अमेरिकी सरकारी अनुबंधों से कनाडाई उत्पादों को बाहर करने की दिशा में कदम उठाए।

    ट्रंप के टैरिफ और मैन्युफैक्चरिंग को बॉर्डर के दक्षिण में ले जाने की कोशिशें उस चीज को कमजोर कर रही हैं, जो लंबे समय से विदेशी निवेशकों के लिए देश के सबसे बड़े आकर्षणों में से एक थी। कॉन्टिनेंटल फ्री ट्रेड के तहत विशाल अमेरिकी बाजार तक भरोसेमंद पहुंच।


    वित्त मंत्री फ्रांस्वा-फिलिप शैम्पेन ने क्या कहा?

    जब पूछा गया कि क्या कनाडा ट्रंप के साथ ट्रेड डील के बिना लंबे समय तक टिक सकता है, तो वित्त मंत्री फ्रांस्वा-फिलिप शैम्पेन ने कहा कि ओटावा प्रभावित व्यवसायों और कर्मचारियों की मदद करने के लिए तैयार है। शैम्पेन ने ‘द एसोसिएटेड प्रेस’ को बताया, ‘हमारे पास अपने उद्योगों और कर्मचारियों की मदद करने के लिए जरूरी संसाधन हैं – चाहे कितना भी समय लगे या जो कुछ भी करना पड़े।’

    सरकार ने सोमवार को यह भी कहा कि वह 1 अरब अमेरिकी डॉलर या उससे अधिक के निवेश के लिए कर संबंधी निर्णयों को प्राथमिकता देगी, जिससे बड़े निवेशकों को पूंजी लगाने से पहले अधिक निश्चितता मिलेगी।


    कनाडा पर दांव लगाने पर कार्नी ने क्या कहा?

    कार्नी वैश्विक निवेशकों से व्यापार युद्ध को नजरअंदाज करते हुए कनाडा पर दांव लगाने का आग्रह कर रहे हैं। साथ ही ट्रंप के नेतृत्व में तेजी से अप्रत्याशित होते जा रहे संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ कनाडा के कानून के शासन और विश्वसनीयता की तुलना स्पष्ट रूप से कर रहे हैं। कार्नी ने कहा, ‘निवेशकों को एक ऐसा देश मिलेगा जो कानून के शासन का सम्मान करता है और एक ऐसा देश जो भरोसेमंद है। दुनिया में ऐसा संयोजन बहुत कम देखने को मिलता है। यह एक आकर्षक संयोजन है।’

    इस शिखर सम्मेलन का उद्देश्य वैश्विक पूंजी को महत्वपूर्ण खनिजों, प्रौद्योगिकी, रक्षा, उन्नत विनिर्माण और ऊर्जा के क्षेत्र में प्रमुख परियोजनाओं के साथ जोड़ना है। सोमवार को एक बड़े निवेश की घोषणा की गई। बेल कनाडा ने कहा कि वह सस्केचेवान में पहले से निर्माणाधीन एआई डेटा-सेंटर परियोजना को चार गुना बढ़ाएगी, जिससे 1.2 गीगावाट की सुविधा का मार्ग प्रशस्त होगा और कुल अनुमानित पूंजी निवेश 50 अरब कनाडाई डॉलर (36 अरब अमेरिकी डॉलर) से अधिक हो जाएगा।

  • 10 अरब डॉलर के निवेश से अमेरिका में नई आर्थिक हलचल, अदाणी ग्रुप को मिली बड़ी कानूनी राहत के बाद बढ़ा भरोसा

    10 अरब डॉलर के निवेश से अमेरिका में नई आर्थिक हलचल, अदाणी ग्रुप को मिली बड़ी कानूनी राहत के बाद बढ़ा भरोसा

     नई दिल्ली । Adani Group के अमेरिका में प्रस्तावित 10 अरब डॉलर के निवेश को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। भारतीय-अमेरिकी समुदाय के कई प्रमुख नेताओं और व्यापारिक विशेषज्ञों ने इसे भारत और अमेरिका के आर्थिक संबंधों के लिए एक बड़ा मोड़ बताया है। उनका मानना है कि यह निवेश केवल व्यापारिक विस्तार नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की आर्थिक ताकत और कॉर्पोरेट प्रभाव का बड़ा संकेत है।

    भारतीय-अमेरिकी समुदाय के वरिष्ठ नेता और पूर्व सलाहकार Ajay Bhutoria ने इस निवेश को अमेरिका के इन्फ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी सेक्टर के लिए गेम चेंजर बताया है। उनके अनुसार यह कदम अमेरिका में रोजगार बढ़ाने, ऊर्जा ढांचे को मजबूत करने और नई तकनीकों के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस निवेश से दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को नई दिशा मिलेगी।

    हाल के घटनाक्रमों में अदाणी समूह को कानूनी मोर्चे पर भी राहत मिलने की खबरों ने निवेशकों और उद्योग जगत के बीच सकारात्मक माहौल बनाया है। इसे कंपनी के लिए बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है, जिससे वैश्विक स्तर पर उसकी विश्वसनीयता और मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े अंतरराष्ट्रीय निवेशों के लिए कानूनी स्पष्टता बेहद महत्वपूर्ण होती है और इस घटनाक्रम से निवेश माहौल को मजबूती मिल सकती है।

    अमेरिका में यह प्रस्तावित निवेश कई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर असर डाल सकता है। माना जा रहा है कि इससे हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। निर्माण, ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में नई परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है। विशेष रूप से स्वच्छ ऊर्जा और आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े क्षेत्रों में इस निवेश को भविष्य की जरूरतों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा सेंटर के तेजी से विस्तार के कारण अमेरिका में ऊर्जा की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में बड़े पैमाने पर ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश की जरूरत महसूस की जा रही है। इस संदर्भ में अदाणी समूह की विशेषज्ञता को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि कंपनी पहले से ही ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में बड़े प्रोजेक्ट्स संचालित कर चुकी है।

    यह निवेश भारत-अमेरिका संबंधों के राजनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोण को भी प्रभावित कर सकता है। लंबे समय से विदेशी निवेश और रोजगार को लेकर चल रही बहस के बीच इस पहल को सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। भारतीय कंपनियों की बढ़ती वैश्विक भागीदारी यह दर्शाती है कि भारत अब केवल बाजार नहीं बल्कि दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में निवेश करने वाली ताकत के रूप में भी उभर रहा है।

    विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह निवेश योजना पूरी तरह लागू होती है तो आने वाले वर्षों में यह दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग का एक ऐतिहासिक उदाहरण बन सकती है। इससे न केवल व्यापारिक संबंध मजबूत होंगे बल्कि तकनीकी और रणनीतिक साझेदारी को भी नया विस्तार मिलेगा। कुल मिलाकर यह घटनाक्रम वैश्विक निवेश जगत में भारत की बढ़ती भूमिका को और अधिक मजबूत करने वाला माना जा रहा है।