Tag: US military

  • सऊदी के प्रिंस ने ट्रंप को लगाया फोन…. ईरान पर अमेरिकी सेना के हमले के प्लान पर जताई चिंता

    सऊदी के प्रिंस ने ट्रंप को लगाया फोन…. ईरान पर अमेरिकी सेना के हमले के प्लान पर जताई चिंता


    नई दिल्ली।
    सऊदी अरब (Saudi Arabia) के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (Crown Prince Mohammed bin Salman) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) से फोन पर बात की है. इस दौरान उन्होंने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सेना की बड़े पैमाने पर नए हमले करने के प्लान पर चिंता जताई है।

    दो अमेरिकी अधिकारियों और इस फोन कॉल की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने इस बातचीत की पुष्टि की है. सूत्र ने ‘एक्सियोस’ को बताया, ‘सऊदी अरब ने अमेरिका की इस प्लानिंग पर गंभीर चिंता जताई है और पूरे प्लान पर सफाई मांगी है।

    दरअसल, जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर हुए ईरानी मिसाइल हमले और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही में हो रही रुकावटों के जवाब में ट्रंप बेहद सख्त रुख अपना रहे हैं. वो आने वाले दिनों में ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर जोरदार हमले करने के बारे में सोच रहे हैं।

    बातचीत की जानकारी रखने वाले दूसरे सूत्र ने बताया कि क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ट्रंप से हमलों को रोकने की अपील की है. हालांकि व्हाइट हाउस और वॉशिंगटन स्थित सऊदी दूतावास ने इस मामले में टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।


    सऊदी रक्षा मंत्री ने भी दिया शांति का संदेश

    इससे पहले, बुधवार को ट्रंप ने सऊदी अरब के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान से मुलाकात की थी. सूत्रों के मुताबिक, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ हुई बैठक में सऊदी रक्षा मंत्री ने बताया था कि उनका देश ईरान के साथ मामले को सुलझाने और तनाव घटाने के पक्ष में है।


    ईरान ने दी धमकी

    दूसरी तरफ, ईरान ने धमकी दी है कि अगर अमेरिका हमला करता है, तो वो इजरायल और खाड़ी देशों के ऊर्जा और बुनियादी ठिकानों पर पलटवार करेगा. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शनिवार को सऊदी अरब और तुर्की के विदेश मंत्रियों से बात की।

    अपने टेलीग्राम चैनल पर जारी बयान के मुताबिक अराघची ने सऊदी विदेश मंत्री से कहा, ‘अमेरिका या इजरायल की किसी भी कार्रवाई या उसमें क्षेत्रीय देशों की भागीदारी का ईरान के सशस्त्र बल करारा और बराबर का जवाब देंगे।


    कतर कर रहा मध्यस्थता की कोशिश

    बता दें कि मिडिल-ईस्ट की जंग रोकने के लिए सऊदी अरब के साथ-साथ कतर, UAE, तुर्की और पाकिस्तान जैसे देश भी अमेरिका और ईरान पर दबाव बना रहे हैं. शनिवार को कतर ने ईरानी विदेश मंत्री, व्हाइट हाउस के दूत स्टीव विटकॉफ और ओमान के अधिकारियों से अलग-अलग बातचीत की, ताकि होर्मुज को फिर से खोलने पर सहमति बन सके।

  • कैलिफोर्निया में क्रैश हुआ अमेरिका का एफ-35बी स्टील्थ फाइटर जेट, पायलट सुरक्षित; हादसे की जांच शुरू

    कैलिफोर्निया में क्रैश हुआ अमेरिका का एफ-35बी स्टील्थ फाइटर जेट, पायलट सुरक्षित; हादसे की जांच शुरू


    नई दिल्ली। अमेरिका के अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों में शामिल एफ-35बी स्टील्थ फाइटर जेट कैलिफोर्निया में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। अमेरिकी नौसेना और मरीन कॉर्प्स अधिकारियों ने हादसे की पुष्टि करते हुए बताया कि यह दुर्घटना सैन डिएगो स्थित मरीन कॉर्प्स एयर स्टेशन मिरामार के पास हुई। राहत और बचाव दल तुरंत मौके पर पहुंचा और पायलट को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

    अधिकारियों के अनुसार, यह हादसा शुक्रवार को स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 10 बजे हुआ। विमान में मौजूद पायलट ने खतरा भांपते हुए समय रहते इजेक्ट कर लिया, जिसके कारण उसकी जान बच गई। प्राथमिक उपचार के बाद उसे चिकित्सकीय जांच के लिए मेडिकल सुविधा में भेजा गया है। अधिकारियों ने बताया कि पायलट की स्थिति सुरक्षित है।

    मरीन कॉर्प्स एयर स्टेशन मिरामार के प्रवक्ता ने कहा कि एफ-35बी लड़ाकू विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने की पुष्टि की गई है। उन्होंने बताया कि पायलट ने सफलतापूर्वक इजेक्शन किया और बचाव दल ने उसे सुरक्षित निकाल लिया। फिलहाल दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुर्घटनाग्रस्त विमान थर्ड मरीन एयरक्राफ्ट विंग के मरीन एयरक्राफ्ट ग्रुप-11 को आवंटित था। यह विमान नियमित सैन्य गतिविधियों के तहत उड़ान पर था। शुरुआती जानकारी में किसी तकनीकी खराबी या अन्य कारण की पुष्टि नहीं की गई है।

    एफ-35बी दुनिया के सबसे आधुनिक स्टील्थ लड़ाकू विमानों में गिना जाता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत शॉर्ट टेकऑफ और वर्टिकल लैंडिंग क्षमता है। यही कारण है कि अमेरिकी मरीन कॉर्प्स इसका इस्तेमाल उन इलाकों में भी कर सकती है, जहां सामान्य लड़ाकू विमान आसानी से संचालन नहीं कर सकते। स्टील्थ तकनीक से लैस यह विमान दुश्मन के रडार से बचने, आधुनिक सेंसर और अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों के कारण अमेरिका की सैन्य ताकत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

    मरीन कॉर्प्स एयर स्टेशन मिरामार अमेरिका के प्रमुख सैन्य एयरबेस में से एक है। यहां अमेरिकी सेना की विभिन्न शाखाओं के लगभग 15 हजार सैन्यकर्मी तैनात रहते हैं और यह बेस कई महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों तथा प्रशिक्षण गतिविधियों का केंद्र है।

    हाल के महीनों में अमेरिका में सैन्य विमानों से जुड़े कई हादसे सामने आए हैं। जून की शुरुआत में वाशिंगटन राज्य में एक सैन्य लड़ाकू विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिससे जंगल में आग लग गई थी। उस हादसे में भी पायलट समय रहते विमान से बाहर निकलने में सफल रहा था और उसे केवल मामूली चोटें आई थीं।

    इसी तरह मई में पश्चिमी अलबामा के फेयेट काउंटी में अमेरिकी वायुसेना का टी-38 टैलोन-2 प्रशिक्षण विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। उस घटना में भी दोनों पायलट सुरक्षित बच गए थे। हादसे के बाद एयर फोर्स सेफ्टी इन्वेस्टिगेशन बोर्ड ने जांच शुरू की थी।

    एफ-35बी के ताजा हादसे ने एक बार फिर अमेरिका के उन्नत सैन्य विमानों की सुरक्षा और रखरखाव को लेकर चर्चा तेज कर दी है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता विस्तृत तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा।

  • अमेरिकी सेना ने रूसी तेल टैंकर को किया जब्त, हो सकता है महासंग्राम

    अमेरिकी सेना ने रूसी तेल टैंकर को किया जब्त, हो सकता है महासंग्राम

    वाशिंगटन। अमेरिका ने उत्तरी अटलांटिक और कैरिबियन में एक के बाद एक की गई कार्रवाइयों में वेनेजुएला से जुड़े दो प्रतिबंधित तेल टैंकरों को जब्त कर लिया है।
    अमेरिकी यूरोपीय कमान ने “अमेरिकी प्रतिबंधों के उल्लंघन” के आरोप में व्यापारिक पोत बेला 1 को जब्त करने की घोषणा की। तटरक्षक बल के एक कटर ने टैंकर का पीछा करते हुए उसे स्कॉटलैंड और आइसलैंड के बीच के जलक्षेत्र में धकेल दिया, जब उसने वेनेजुएला के आसपास प्रतिबंधित तेल जहाजों पर अमेरिकी नाकाबंदी से बचने की कोशिश की।

    इसके बाद, गृह सुरक्षा सचिव क्रिस्टी नोएम ने खुलासा किया कि अमेरिकी सेना ने कैरिबियन में टैंकर सोफिया पर भी नियंत्रण कर लिया है। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि दोनों जहाज “या तो आखिरी बार वेनेजुएला में रुके थे या उसकी ओर जा रहे थे।”

    जानें अमेरिकी अधिकारी ने क्या कहा

    यूरोप की ओर मुड़ने के बाद बेला 1 को रूसी ध्वज के तहत पंजीकृत किया गया और उसका नाम बदलकर मरीनरा कर दिया गया।

    एक अमेरिकी अधिकारी ने, जिन्होंने संवेदनशील सैन्य अभियानों पर चर्चा करने के लिए नाम न छापने की शर्त पर बुधवार को एसोसिएटेड प्रेस से बात की, बताया कि अमेरिकी सेना ने इसे जब्त करने के बाद कानून प्रवर्तन अधिकारियों को इसका नियंत्रण सौंप दिया। ईरान समर्थित लेबनानी आतंकवादी समूह हिज़्बुल्लाह से जुड़ी एक कंपनी के लिए माल की तस्करी करने के आरोप में इस जहाज पर 2024 में अमेरिका द्वारा प्रतिबंध लगाया गया था।

    एसोसिएटेड प्रेस ने अमेरिकी सेना के हवाले से बताया कि बुधवार को संयुक्त राज्य अमेरिका ने अटलांटिक महासागर में दो सप्ताह से अधिक समय तक चले पीछा करने के बाद वेनेजुएला से जुड़े एक रूसी ध्वज वाले तेल टैंकर को जब्त कर लिया, जबकि एक रूसी पनडुब्बी और युद्धपोत भी पास ही थे।

    रूसी विदेश मंत्रालय ने क्या कहा

    रूसी विदेश मंत्रालय ने जहाज़ ज़ब्त किए जाने से पहले कहा था कि वह रूसी तेल टैंकर मेरिनेरा के आसपास पैदा हुई असामान्य स्थिति पर नज़र रख रहा है। आधिकारिक समाचार एजेंसी तास द्वारा प्रकाशित मंत्रालय के बयान में आगे कहा गया कि “पिछले कई दिनों से अमेरिकी तटरक्षक बल का एक जहाज़ मेरिनेरा का पीछा कर रहा है, जबकि हमारा जहाज़ अमेरिकी तट से लगभग 4,000 किलोमीटर दूर है।” बुधवार को सार्वजनिक समुद्री ट्रैकिंग साइटों ने जहाज़ की स्थिति स्कॉटलैंड और आइसलैंड के बीच उत्तर की ओर बढ़ते हुए दिखाई। अमेरिकी अधिकारी ने भी पुष्टि की कि जहाज़ उत्तरी अटलांटिक में था।

    रूस के परिवहन मंत्रालय ने बुधवार को एक बयान में कहा कि अमेरिकी नौसेना बलों ने “किसी भी देश के क्षेत्रीय जलक्षेत्र के बाहर” मरीनरा टैंकर पर कब्जा कर लिया और “जहाज से संपर्क टूट गया।” मंत्रालय ने कहा कि 24 दिसंबर, 2025 को जहाज को “रूसी कानून और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार जारी रूसी संघ का ध्वज फहराने का अस्थायी परमिट प्राप्त हुआ था।”

    जब्ती की खबर के तुरंत बाद, परिवहन मंत्रालय के बयान में कहा गया कि “किसी भी देश को अन्य देशों के अधिकार क्षेत्र में विधिवत पंजीकृत जहाजों के खिलाफ बल प्रयोग करने का अधिकार नहीं है,” और इसके लिए 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन का हवाला दिया गया।

  • अमेरिकी सेना ने समुद्र में गिरे सैन्य उपकरणों को सफलतापूर्वक निकाला, चीन की नजरों से बची तकनीक

    अमेरिकी सेना ने समुद्र में गिरे सैन्य उपकरणों को सफलतापूर्वक निकाला, चीन की नजरों से बची तकनीक


    नई दिल्‍ली । अमेरिका ने एशिया के दो बेहद संवेदनशील इलाकों में समुद्र में गिरे अपने अत्याधुनिक सैन्य उपकरणों को सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया है। दक्षिण कोरिया के पश्चिमी समुद्र तट के पास क्रैश हुआ MQ-9 रीपर ड्रोन और साउथ चाइना सागर से एफ-18 फाइटर जेट और एमएच-60 हेलीकॉप्टर को रिकवर किया गया। ये ऑपरेशन अमेरिका की सुरक्षा और तकनीकी श्रेष्ठता के लिहाज से बेहद अहम माने जा रहे हैं।

    1. MQ-9 रीपर ड्रोन – सियोल के पास क्रैश
    कब हुआ था: 24 नवंबर

    कहां गिरा: सियोल से करीब 180 किलोमीटर दक्षिण में, माल्डो-री द्वीप के पास पीले सागर में

    ऑपरेशन: अमेरिकी वायुसेना और दक्षिण कोरियाई नौसेना ने करीब 20 दिनों में ड्रोन का पूरा मलबा निकाल लिया

    उद्देश्य: निगरानी और हमले के लिए तैनात, उत्तर कोरिया की गतिविधियों और पीले सागर में चीन की मौजूदगी पर नजर रखने के लिए

    महत्व: ड्रोन की तकनीक सुरक्षित रखना और इसे दुश्मन के हाथों न पड़ने देना

    2. फाइटर जेट और हेलीकॉप्टर – साउथ चाइना सागर
    कब गिरे: अक्टूबर में USS निमिट्ज एयरक्राफ्ट कैरियर से उड़ान भरते वक्त

    कौन से उपकरण: एफ-18 फाइटर जेट और एमएच-60 हेलीकॉप्टर

    गहराई: करीब 400 फीट

    रिकवरी की तारीख: 5 दिसंबर

    महत्व: चीन जैसे देशों के हाथ लगने पर सैन्य तकनीक का नुकसान होने से बचाना

    सुरक्षा: उपकरण अब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के सुरक्षित सैन्य ठिकाने पर भेजे गए हैं

    रणनीतिक महत्व
    साउथ चाइना सागर को लेकर चीन और कई दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के बीच विवाद लंबा है। चीन लगभग पूरे समुद्री क्षेत्र पर दावा करता है, जबकि अमेरिका इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग मानता है और अपनी सैन्य मौजूदगी बनाए रखता है। समुद्र में गिरे अमेरिकी सैन्य उपकरणों की रिकवरी को रणनीतिक सुरक्षा कदम के रूप में देखा जा रहा है।

    अमेरिका ने समय रहते समुद्र में गिरे अपने महत्वपूर्ण सैन्य उपकरणों को सुरक्षित निकालकर अपनी तकनीक और सुरक्षा सुनिश्चित की। इस ऑपरेशन से यह भी जाहिर होता है कि आधुनिक युद्ध में तकनीक और सुरक्षा का महत्व कितनी तेजी से बढ़ता जा रहा है।