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  • होर्मुज पर टकराव तेज! अमेरिका की एंट्री पर ईरान का सीधा वार्निंग, ‘घुसे तो हमला होगा’

    होर्मुज पर टकराव तेज! अमेरिका की एंट्री पर ईरान का सीधा वार्निंग, ‘घुसे तो हमला होगा’


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में तनाव खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका की सेना स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में घुसने की कोशिश करती है, तो उस पर सीधा हमला किया जाएगा।

    ईरान की संयुक्त सैन्य कमान खातम अल-अंबिया मुख्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि यह जलमार्ग उसकी निगरानी में है और किसी भी विदेशी सैन्य दखल को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। खासतौर पर अमेरिकी सेना को “आक्रामक ताकत” बताते हुए कड़ा संदेश दिया गया है।

    यह बयान ऐसे समय आया है जब डोनाल्ड ट्रंप ने ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ नाम के मिशन का ऐलान किया है। इसके तहत अमेरिका होर्मुज में फंसे अंतरराष्ट्रीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए सैन्य अभियान शुरू करने जा रहा है।

    अमेरिका का दावा है कि कई देशों ने मदद मांगी है, क्योंकि उनके जहाज इस अहम समुद्री रास्ते में फंसे हुए हैं। ट्रंप के मुताबिक, इन जहाजों का मौजूदा संघर्ष से कोई लेना-देना नहीं है और वे “निर्दोष” हैं, जिन्हें सुरक्षित निकालना जरूरी है।

    CENTCOM के अनुसार 4 मई से शुरू होने वाले इस ऑपरेशन में गाइडेड मिसाइल विध्वंसक जहाज, 100 से ज्यादा विमान, ड्रोन और करीब 15,000 सैनिक शामिल होंगे। इसका मकसद व्यापारिक जहाजों के लिए सुरक्षित समुद्री रास्ता सुनिश्चित करना है।

    हालांकि, ईरान ने साफ कर दिया है कि इस तरह की किसी भी सैन्य गतिविधि को वह अपनी संप्रभुता के खिलाफ मानेगा। ऐसे में दोनों देशों के बीच सीधा टकराव बढ़ने की आशंका और गहरा गई है।

    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यहां बढ़ता तनाव न सिर्फ क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी बड़े संकट का संकेत दे रहा है।

  • होर्मुज में बड़ा खेल? अमेरिका ने ईरानी जहाज छोड़कर पाकिस्तान को क्यों सौंपा, ट्रम्प के ‘रेस्क्यू मिशन’ से बढ़ा समुद्री तनाव

    होर्मुज में बड़ा खेल? अमेरिका ने ईरानी जहाज छोड़कर पाकिस्तान को क्यों सौंपा, ट्रम्प के ‘रेस्क्यू मिशन’ से बढ़ा समुद्री तनाव


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में तनाव के बीच एक बड़ा और चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी सेना ने जब्त किए गए ईरानी जहाज ‘टूस्का’ को अब पाकिस्तान को सौंप दिया है। यह जहाज पहले चीन से लौटते समय अमेरिकी कार्रवाई में पकड़ा गया था।

    यह जानकारी अमेरिकी सेंट्रल कमांड United States Central Command (CENTCOM) के प्रवक्ता ने दी है। बताया जा रहा है कि जहाज को उसके क्रू के साथ आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत ईरान वापस भेजने की तैयारी की जा रही है।

    क्यों पकड़ा गया था जहाज?
    अमेरिकी अधिकारियों का दावा था कि यह जहाज ऐसे सामान लेकर जा रहा था जो हथियार निर्माण से जुड़े हो सकते हैं। इसी आधार पर 21 अप्रैल को इसे जब्त किया गया था। हालांकि ईरान ने इस कार्रवाई को “समुद्री डकैती” बताते हुए कड़ी आलोचना की थी।

    होर्मुज स्ट्रेट में नया अभियान
    इसी बीच अमेरिका ने Donald Trump के नेतृत्व में होर्मुज स्ट्रेट में फंसे जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए एक नया रेस्क्यू अभियान शुरू करने का ऐलान किया है। यह इलाका वैश्विक तेल व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है।

    ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि कई देशों के जहाज वहां फंस गए हैं और अमेरिका उन्हें सुरक्षित रास्ता देगा ताकि वे बिना खतरे के अपना संचालन जारी रख सकें।

    ईरान को चेतावनी
    अमेरिकी प्रशासन ने साफ किया है कि यह रेस्क्यू ऑपरेशन सोमवार सुबह से शुरू होगा। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि ईरान ने इस अभियान में कोई बाधा डाली तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

    बढ़ता तनाव
    जहाज को पाकिस्तान को सौंपे जाने और रेस्क्यू मिशन की घोषणा के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान संबंधों पर बड़ा असर डाल सकता है।

  • होर्मुज जलडमरूमध्य पर ट्रंप की ईरान को सख्त चेतावनी: तेल आपूर्ति रोकने की कोशिश पर 20 गुना जवाबी कार्रवाई की धमकी

    होर्मुज जलडमरूमध्य पर ट्रंप की ईरान को सख्त चेतावनी: तेल आपूर्ति रोकने की कोशिश पर 20 गुना जवाबी कार्रवाई की धमकी


    वाशिंगटन । अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य  में तेल आपूर्ति को रोकने या बाधित करने की कोई भी कोशिश की गई तो अमेरिका इसका बेहद सख्त जवाब देगा। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में अमेरिका अब तक हुए हमलों से बीस गुना ज्यादा जोरदार कार्रवाई कर सकता है।

    ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सत्य सामाजिक पर पोस्ट किए गए संदेश में कहा कि यदि ईरान इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को बंद करने की कोशिश करता है तो अमेरिका उसके बुनियादी ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका आसानी से निशाना बनाए जा सकने वाले ठिकानों को नष्ट कर सकता है जिससे ईरान के लिए दोबारा व्यवस्थित होना मुश्किल हो जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि हालात इस स्तर तक नहीं पहुंचेंगे।

    इससे पहले ट्रंप ने ट्रम्प नेशनल डोरल में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि अमेरिका दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक को खतरे में डालने की अनुमति किसी भी देश को नहीं देगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए लगातार कदम उठा रहा है और किसी भी आतंकी सरकार को दुनिया की तेल आपूर्ति को बंधक बनाने की इजाजत नहीं देगा।

    ट्रंप ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की मजबूत मौजूदगी है और जरूरत पड़ने पर समुद्री मार्ग की सुरक्षा के लिए माइन-क्लियरिंग ऑपरेशन और सैन्य एस्कॉर्ट जैसी व्यवस्थाएं भी लागू की जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी नौसेना के पास दुनिया की सबसे आधुनिक तकनीक और उपकरण हैं जिनकी मदद से समुद्री मार्ग को सुरक्षित रखा जा सकता है।

    उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका खाड़ी क्षेत्र में काम कर रहे तेल टैंकरों को राजनीतिक जोखिम बीमा देने पर भी विचार कर रहा है ताकि समुद्री व्यापार बाधित न हो। ट्रंप के अनुसार यदि खतरा बढ़ता है तो अमेरिका और उसके सहयोगी देश जहाजों को इस संकरे समुद्री मार्ग से सुरक्षित एस्कॉर्ट भी कर सकते हैं।

    ट्रंप ने यह भी कहा कि इस मार्ग का खुला रहना अमेरिका से ज्यादा एशिया और अन्य ऊर्जा आयात करने वाले देशों के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने खास तौर पर चीन का जिक्र करते हुए कहा कि यह रास्ता कई देशों के लिए बेहद जरूरी है क्योंकि उनकी बड़ी ऊर्जा जरूरतें इसी मार्ग से पूरी होती हैं।

    दरअसल होर्मुज जलडमरूमध्य  फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला एक संकरा लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। दुनिया के कुल समुद्री तेल परिवहन का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी तरह का तनाव या सैन्य गतिविधि वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल कीमतों को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ट्रंप का यह बयान वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री व्यापार को लेकर नई चिंता पैदा कर रहा है।