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  • टैरिफ को लेकर ट्रंप का पलटवार, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बदली चाल, 19.2 ट्रिलियन डॉलर निवेश का दावा

    टैरिफ को लेकर ट्रंप का पलटवार, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बदली चाल, 19.2 ट्रिलियन डॉलर निवेश का दावा


    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपनी टैरिफ नीति का जोरदार बचाव करते हुए दावा किया है कि उनकी सरकार की व्यापारिक रणनीति के कारण अमेरिका में 19.2 ट्रिलियन डॉलर का रिकॉर्ड निवेश आया है। व्हाइट हाउस में आयोजित एक कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि हालिया कानूनी चुनौतियों के बावजूद उनकी सरकार टैरिफ नीति को जारी रखेगी और इसके लिए आवश्यक कानूनी बदलाव भी कर चुकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद प्रशासन ने अपनी रणनीति बदली है लेकिन आर्थिक एजेंडा पहले की तरह ही मजबूत बना हुआ है।

    ट्रंप ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उनकी सरकार ने टैरिफ लागू करने के लिए दूसरी कानूनी व्यवस्थाओं का सहारा लिया है जिनका इस्तेमाल पहले भी विभिन्न अमेरिकी प्रशासन कर चुके हैं। उनके मुताबिक अदालत ने केवल प्रक्रिया बदलने की बात कही थी और सरकार ने उसी दिशा में कदम उठाया। उन्होंने विश्वास जताया कि नई कानूनी व्यवस्था के तहत लागू किए गए टैरिफ न्यायिक जांच में भी टिकेंगे।

    राष्ट्रपति ने दावा किया कि टैरिफ नीति का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ है कि दुनिया भर की कंपनियां अब अमेरिका में निवेश और उत्पादन बढ़ाने के लिए आगे आ रही हैं। उनके अनुसार देश में 19.2 ट्रिलियन डॉलर का निवेश प्रस्तावित या शुरू हो चुका है जो अमेरिकी इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा निवेश है। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल पर निशाना साधते हुए कहा कि चार वर्षों में निवेश एक ट्रिलियन डॉलर से भी कम रहा जबकि उनकी सरकार ने केवल एक वर्ष में रिकॉर्ड निवेश आकर्षित किया है।

    ट्रंप ने कहा कि यदि टैरिफ लागू नहीं किए गए होते तो अमेरिकी उद्योगों को भारी नुकसान उठाना पड़ता। उनका मानना है कि आयात शुल्क ने विदेशी कंपनियों को अमेरिका में फैक्ट्री लगाने और स्थानीय स्तर पर उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रेरित किया है। इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़े हैं बल्कि संघीय राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

    मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप से हाल में शुरू की गई एक व्यापारिक जांच में बाल मजदूरी को आधार बनाए जाने पर भी सवाल पूछा गया। इस पर उन्होंने कहा कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधियों ने दुनिया के कई देशों की समीक्षा की और बाल मजदूरी भी उन कारणों में शामिल थी जिनके आधार पर कुछ व्यापारिक फैसले लिए गए। हालांकि उन्होंने इस विषय पर अधिक विस्तार से टिप्पणी नहीं की।

    राष्ट्रपति ने अपनी आर्थिक नीति को ऊर्जा उत्पादन घरेलू विनिर्माण और औद्योगिक विकास से जोड़ते हुए कहा कि टैरिफ केवल व्यापारिक हथियार नहीं बल्कि अमेरिका को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का माध्यम हैं। उन्होंने दोहराया कि उनकी सरकार का लक्ष्य उत्पादन को अमेरिका वापस लाना और देश की औद्योगिक क्षमता को मजबूत करना है।

    इस बीच ट्रंप की टैरिफ नीति पर दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की नजर बनी हुई है। यूरोपीय संघ चीन और कई एशियाई व्यापारिक साझेदार अमेरिकी व्यापारिक कदमों और उनसे जुड़े कानूनी विवादों पर लगातार नजर रख रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में इन टैरिफ नीतियों का असर वैश्विक व्यापार सप्लाई चेन और महंगाई पर भी दिखाई दे सकता है। ऐसे में ट्रंप की बदली हुई कानूनी रणनीति और उनके बड़े आर्थिक दावों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है।

  • टैरिफ पर US सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सोने-चांदी के दामों में जबरदस्त उछाल….

    टैरिफ पर US सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सोने-चांदी के दामों में जबरदस्त उछाल….


    नई दिल्ली।
    सोने और चांदी के भाव (Gold-Silver Rate) में आज सोमवार को जबरदस्त उछाल (Tremendous Surge) देखने को मिला। सोने की कीमतों में 1.61% और चांदी की कीमतों में 5% तक की तेजी दर्ज की गई। यह तेजी अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट (US Supreme Court) के एक फैसले के बाद आई है, जिसमें अदालत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) द्वारा लगाए गए व्यापक ग्लोबल टैरिफ को खारिज कर दिया। निवेशक अब इसके बाद अमेरिका की ओर से संभावित नए कदमों का आकलन कर रहे हैं। एशियाई बाजारों में आज स्पॉट गोल्ड की कीमत 1.61% बढ़कर 5,160 डॉलर प्रति औंस और चांदी की कीमत 5% उछलकर 86 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।


    क्यों बढ़ रहे हैं सोना-चांदी के दाम?

    अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया भर पर “पारस्परिक” टैरिफ लगाने के लिए आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल करके अपने अधिकार का उल्लंघन किया था। इस फैसले के साथ ही ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में लगाए गए कई महत्वपूर्ण टैरिफ अब समाप्त हो गए हैं।

    इस फैसले के जवाब में ट्रंप ने कहा है कि रद्द किए गए टैरिफ को बदलने के लिए वैकल्पिक तंत्र लागू किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि वह मौजूदा शुल्कों के अलावा, कानून की धारा 122 के तहत 10% का वैश्विक टैरिफ लागू करेंगे। साथ ही, राष्ट्रीय सुरक्षा और अन्य मामलों से जुड़े मौजूदा टैरिफ पूरी तरह से लागू रहेंगे।

    वहीं, जियो-पॉलिटिकल मोर्चे पर भी तनाव बना हुआ है। अमेरिकी सेना ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य तैनाती बढ़ा दी है। ट्रंप ने ईरान को उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर चेतावनी दी है, जिससे क्षेत्र में टकराव की आशंका और बढ़ गई है। ईरान पर संभावित अमेरिकी हमले से वहां पहले से मौजूद आंतरिक अस्थिरता और गहरी हो सकती है और यह अमेरिका के लिए एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष का रूप ले सकता है।


    क्या सोना-चांडी के भाव में और तेजी आ सकती है?

    जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के कमोडिटी रिसर्च हेड हरीश वी के अनुसार, हालांकि मजबूत डॉलर और बदलती ब्याज दर की उम्मीदें कीमतों में तेज उछाल को फिलहाल रोक सकती हैं, लेकिन लगातार बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव निवेशकों को सुरक्षित निवेश की ओर ले जा रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में सोने-चांदी की कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

    हरीश ने कहा, “निवेशक आमतौर पर भू-राजनीतिक संकटों के दौरान सोने और चांदी की ओर रुख करते हैं, क्योंकि ये धातुएं मूल्य संरक्षण करती हैं, बाजार में उतार-चढ़ाव के जोखिम को कम करती हैं और मुद्राओं व वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता के समय एक भरोसेमंद विकल्प के रूप में काम करती हैं।”


    नई ऊंचाई छूने की संभावना

    एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने सोने की कीमतों के तकनीकी परिदृश्य पर कहा कि कीमतों में हालिया गिरावट मुनाफावसूली का हिस्सा है और व्यापक रुझान तेजी वाला ही बना हुआ है। उन्होंने कहा कि 4,500-4,700 डॉलर के बीच मजबूत खरीदारी देखी जा रही है और अगर कीमतें 5,100-5,200 डॉलर के स्तर को पार कर जाती हैं, तो नई ऊंचाई छूने की संभावना बन सकती है।

    वहीं, चांदी के भाव पर पोनमुडी ने कहा कि हालिया गिरावट के बावजूद, बड़े समय के फ्रेम में तेजी वाली संरचना बरकरार है। 65-70 डॉलर के बीच मजबूत खरीदारी का समर्थन स्तर है। अगर यह आधार बना रहता है और कीमतें 85-92 डॉलर के स्तर को पार करके वापसी करती हैं, तो तेजी का रुख फिर से मजबूत हो सकता है। मिड टू लॉन्ग टर्म नजरिए से चांदी के लिए संभावनाएं सकारात्मक बनी हुई हैं।