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उत्तर प्रदेश में मौसम की दोहरी मार, लखनऊ की कॉलोनियों में भरा पानी, उफान पर नदियां, 15 जिलों में बारिश और ओले गिरने की चेतावनी
उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश में बाढ़ और बारिश से लोगों की परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं। राजधानी लखनऊ में हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं। शहर के कई इलाकों में लगातार 15वें दिन बाढ़ का असर देखने को मिल रहा है। कॉलोनियों में गर्दन तक पानी भरने की स्थिति बताई जा रही है। हजारों घर अब भी जलमग्न हैं और तीन लाख से अधिक लोगों की जिंदगी प्रभावित हुई है। कई जगह लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। चंद्रिका देवी मंदिर परिसर में भी घुटनों तक पानी भर गया है। शहर के प्रभावित इलाकों में जलभराव के कारण आवागमन और सामान्य जनजीवन बाधित है।लखनऊ के अलावा प्रदेश के दूसरे जिलों में भी नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का खतरा बना हुआ है। उन्नाव में गंगा नदी उफान पर है। कई गली-मोहल्लों में पानी भरने के कारण लोगों को नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। गोंडा में घाघरा नदी का जलस्तर फिर बढ़ने लगा है। सोमवार सुबह एल्गिन ब्रिज पर नदी खतरे के निशान पर बह रही थी। तरबगंज तहसील के ब्योन्दा और माझा गांव अब भी बाढ़ से प्रभावित हैं। राहत अभियान के तहत एक हजार से अधिक लोगों तक राहत सामग्री और भोजन के पैकेट पहुंचाए जा रहे हैं।पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी बाढ़ का खतरा बढ़ने की आशंका है। नेपाल के गोरखा जिले में भूस्खलन के बाद बूढ़ी गंडकी नदी में बाढ़ आने की खबर है। पानी नारायणी नदी की ओर बढ़ रहा है। इसके मद्देनजर कुशीनगर क्षेत्र के करीब 50 गांवों में अलर्ट जारी किया गया है। तरया सुजान इलाके में एपी तटबंध पहले से टूटा होने के कारण चिंता बढ़ गई है। प्रशासन के सामने प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को सतर्क रखने और संभावित नुकसान से बचाने की चुनौती है।इसी बीच सोमवार सुबह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई शहरों में मौसम ने करवट ली। नोएडा और गाजियाबाद के साथ बरेली और मथुरा तथा अलीगढ़ में गरज-चमक के साथ बारिश हुई। मौसम विभाग ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 15 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। कुछ इलाकों में ओले गिरने की आशंका भी जताई गई है। इससे पहले रविवार को मेरठ और शामली में ओलावृष्टि हुई थी। बिजनौर में तेज आंधी के कारण कई जगह पेड़ उखड़ गए थे। मौसम में अचानक बदलाव से जहां गर्मी और उमस से राहत मिली है वहीं किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका भी बढ़ गई है।आगरा में सोमवार सुबह बादल छाए रहे और तेज हवाओं के कारण मौसम अपेक्षाकृत ठंडा महसूस हुआ। दिन में बूंदाबांदी की संभावना जताई गई। बरेली में नवरात्रि के दौरान गुलाबी ठंड का एहसास होने लगा है। सुबह आसमान में बादल छाए रहे और कुछ इलाकों में हल्की बारिश हुई। अलीगढ़ में भी रात से बादल छाए रहने के बाद सुबह बिजली की कड़कड़ाहट के साथ बूंदाबांदी शुरू हुई। नोएडा में रविवार देर रात से बारिश का दौर जारी रहने की जानकारी सामने आई।गोंडा के राजगढ़ अमीनपुर गांव में एक अलग घटना ने लोगों का ध्यान खींचा। शनिवार शाम सर्प मित्र अरुण कुमार बाबा अजगर को पकड़ने पहुंचे थे। इसी दौरान अजगर उनके दाहिने पैर से लिपट गया। करीब आधे घंटे तक चले प्रयास के बाद उन्होंने साथियों की मदद से खुद को छुड़ाया। इसके बाद अजगर को सुरक्षित पकड़कर जंगल में छोड़ दिया गया। घटना का वीडियो रविवार शाम सामने आया।लगातार बाढ़ और बारिश के बीच प्रभावित लोगों की सुरक्षा और राहत व्यवस्था सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाढ़ और खराब मौसम से फसलों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए नौ लाख से अधिक किसानों के खातों में 493 करोड़ रुपये की सहायता राशि भेजने की घोषणा की है। ऐसे हालात में प्रशासन की निगरानी और समय पर राहत पहुंचाना जरूरी है ताकि जलभराव और प्राकृतिक आपदा से प्रभावित परिवारों को जल्द मदद मिल सके। -

यूपी के 5 शहर बाढ़ की चपेट में, लखनऊ में 40 हजार मकान जलमग्न, सड़कों पर नाव और कॉलोनी में मगरमच्छ
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में बाढ़ का संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। प्रदेश के पांच जिले इस समय भीषण बाढ़ की चपेट में हैं और छह प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर लगातार नौवें दिन बढ़ रहा है जिसके चलते शहर के कई निचले इलाकों में हालात बिगड़ गए हैं। नीम करोली तपोस्थली में भी बाढ़ का पानी पहुंच गया है जबकि खाटू श्याम और चंद्रिका देवी मंदिर भी जलमग्न हो गए हैं। फैजुल्लागंज इलाके में करीब 40 हजार मकानों में पानी भरने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कई सरकारी और निजी स्कूल भी पानी में डूब गए हैं और गलियों से लेकर मुख्य सड़कों तक जलभराव की स्थिति बनी हुई है।फैजुल्लागंज में बाढ़ का पानी लगातार बढ़ने के कारण स्थानीय लोगों के सामने खाने पीने के पानी और सुरक्षित स्थान पर पहुंचने की चुनौती खड़ी हो गई है। कई परिवार अपने घरों को छोड़कर दूसरी जगह जाने को मजबूर हैं। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि पानी घरों के अंदर तक पहुंच चुका है। कई जगह सामान्य आवाजाही पूरी तरह प्रभावित है और लोगों को आने जाने के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है।
शाहजहांपुर में बाढ़ के पानी के साथ एक विशाल मगरमच्छ आबादी वाले इलाके में पहुंच गया। मंगलवार सुबह करीब 10 बजे करीब छह से सात फीट लंबा मगरमच्छ एक मकान के मुख्य दरवाजे तक पहुंच गया। दरवाजे पर ताला लगा होने के कारण वह घर के अंदर नहीं जा सका। मगरमच्छ को देखकर आसपास के लोगों में अफरा तफरी मच गई। सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद उसे पकड़ने की कोशिश शुरू की गई। आबादी के बीच मगरमच्छ पहुंचने की घटना ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।
सीतापुर में भी बाढ़ का असर कम नहीं हुआ है। सरायन और कठना नदियों का पानी अब भी रिहायशी इलाकों में बह रहा है। कई क्षेत्रों में लोगों के घरों और रास्तों तक पानी पहुंच गया है। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
गोंडा में घाघरा नदी का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। तरबगंज और कर्नलगंज तहसील के करीब 10 गांव अब भी बाढ़ से प्रभावित हैं। ब्योन्दा माझा दत्तनगर और नकहरा समेत कई गांवों के चारों तरफ पानी भरा हुआ है। प्रशासन ने लोगों की आवाजाही के लिए 50 से अधिक नावें लगाई हैं। घाघरा और सरयू नदियों के कटान के कारण नवाबगंज क्षेत्र में बीते 24 घंटे के दौरान 20 बीघा से अधिक जमीन और फसल नदी में समा गई है।
उन्नाव में गंगा का जलस्तर अब धीरे धीरे घटने लगा है लेकिन खतरा पूरी तरह टला नहीं है। नदी का पानी अभी भी चेतावनी बिंदु से ऊपर है। गोताखोर कर्बला हुसैन नगर तेजीपुरवा और सैय्यद कंपाउंड जैसे इलाकों में जलभराव बना हुआ है। सड़कों पर पानी होने के कारण मोहल्लों में नावों से आवागमन किया जा रहा है।
यूपी में बाढ़ की यह स्थिति लगातार प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई है। नदियों के बढ़ते जलस्तर के साथ कई इलाकों में कटान और जलभराव से लोगों की परेशानी बढ़ रही है। प्रशासन राहत और बचाव व्यवस्था पर नजर बनाए हुए है लेकिन प्रभावित परिवारों के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चिंता सुरक्षित रहने के साथ भोजन पीने का पानी और सामान्य आवागमन की व्यवस्था है।
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यूपी में आसमान से आफत और नदियों का रौद्र रूप: बांध ओवरफ्लो, गांवों में घुसा पानी, आज 71 जिलों में बारिश का अलर्ट
उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। प्रदेश की कई प्रमुख नदियां उफान पर हैं और बाढ़ का पानी तेजी से निचले इलाकों में फैल रहा है। हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राज्य के 19 जिले बाढ़ की चपेट में हैं जबकि 92 गांवों में फसलें पानी में डूब गई हैं। 26 गांव ऐसे हैं जो चारों तरफ से पानी से घिरकर टापू में तब्दील हो चुके हैं। इन गांवों को आसपास के इलाकों से जोड़ने वाली सड़कें डूब जाने के कारण लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में नाव और मोटर बोट के जरिए राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है।बाढ़ और बारिश के बीच उन्नाव से सामने आया एक मामला बेहद चिंता बढ़ाने वाला है। गंगाघाट में गंगा स्नान के दौरान दो बच्चियां अचानक नदी में डूबने लगीं। उन्हें बचाने के लिए उनके पिता भी नदी में कूद गए लेकिन तेज बहाव के कारण वह भी मुश्किल में फंस गए। इसी दौरान वहां मौजूद एक पंडा ने अपनी जान की परवाह किए बिना नदी में छलांग लगा दी और काफी मशक्कत के बाद पिता और दोनों बच्चियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस घटना ने एक बार फिर उफनती नदियों में स्नान के दौरान सावधानी बरतने की जरूरत को सामने ला दिया है।
प्रयागराज में गंगा और यमुना का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। दारागंज घाट की सीढ़ियां पानी में डूब चुकी हैं। इसके चलते अंतिम संस्कार के लिए लोगों को सड़कों और ऊंचे स्थानों का सहारा लेना पड़ रहा है। वाराणसी में भी गंगा का जलस्तर बढ़ने से घाटों की स्थिति गंभीर हो गई है। अस्सी घाट पर होने वाला सुबह-ए-बनारस कार्यक्रम का मंच पानी में डूब गया है। दशाश्वमेध घाट पर जल पुलिस चौकी तक पानी पहुंच चुका है और घाट की कई सीढ़ियां पूरी तरह जलमग्न हो गई हैं। घाट किनारे मौजूद कई मंदिर भी पानी में डूब गए हैं।
झांसी में बेतवा नदी पर बना बांध इस सीजन में पहली बार ओवरफ्लो हो गया है। करीब 140 साल पुराने पारीछा बांध के गेट भी खोल दिए गए हैं। बाराबंकी में सरयू नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है जबकि संतकबीर नगर में 20 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। यहां नौ सरकारी स्कूलों के परिसरों में भी पानी पहुंच गया है। कानपुर के निचले इलाकों में पांडू नदी का पानी घुसने से करीब दो हजार लोग प्रभावित हुए हैं। आजमगढ़ में भी कई प्रमुख इलाकों की गलियां जलभराव से परेशान हैं।
रविवार को प्रयागराज गोरखपुर मेरठ बहराइच समेत करीब 20 शहरों में तेज बारिश हुई। शाहजहांपुर में सुबह घना कोहरा छाया रहा और दृश्यता 50 मीटर से भी कम हो गई। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक लगातार बारिश के कारण हवा में नमी बढ़ने और रात के तापमान में गिरावट से कोहरे की स्थिति बनी।
मौसम विभाग के अनुसार आज प्रदेश के 71 जिलों में गरज चमक के साथ बारिश होने का अलर्ट है जबकि 12 जिलों में बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के मुताबिक मानसूनी सिस्टम के उत्तर की ओर सक्रिय होने और बंगाल की खाड़ी से नमी भरी हवाओं के लगातार आने के कारण अगले एक दो दिन बारिश में तेजी बनी रह सकती है। 25 अगस्त से पश्चिमी हवाओं के प्रभाव में बदलाव आने की संभावना है जिससे पश्चिमी और मध्य यूपी में भारी बारिश की गतिविधियां कम हो सकती हैं जबकि पूर्वी उत्तर प्रदेश में बारिश का सिलसिला जारी रहने का अनुमान है।
ऐसे में बाढ़ प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों को प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने और उफनती नदियों तथा जलभराव वाले रास्तों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।
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यूपी में मानसून बना मुसीबत कहीं सड़क पर नाव तो कहीं छत पर अंतिम संस्कार, 25 अगस्त तक बारिश का अनुमान
उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही मानसूनी बारिश ने कई जिलों में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। गंगा और घाघरा समेत कई प्रमुख नदियां खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं और प्रदेश के 13 जिलों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं और कई गांवों का संपर्क आसपास के इलाकों से टूटने लगा है। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का पानी बाजार तक पहुंच गया है जिससे सड़कें जलमग्न हो गई हैं और लोगों को आवागमन के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए गुप्त गोदावरी की दोनों गुफाओं को पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया है।बहराइच में भी कई गांवों में पानी भर गया है। हालात का जायजा लेने पहुंचे मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने ट्रैक्टर के जरिए बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और ग्रामीणों से मुलाकात कर उन्हें प्रशासन की ओर से हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया। दूसरी ओर प्रयागराज में गंगा और यमुना का जलस्तर लगातार चिंता बढ़ा रहा है। नदी का पानी रिवर फ्रंट रोड तक पहुंच गया है और कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। गंगा का पानी लेटे हुए हनुमान मंदिर कॉरिडोर के आसपास भी पहुंच गया है।
वाराणसी में भी गंगा का बढ़ता जलस्तर जनजीवन और धार्मिक गतिविधियों पर असर डाल रहा है। विश्वनाथ मंदिर का गंगा द्वार बंद करना पड़ा है। मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट के नियमित शवदाह स्थल पानी में डूब गए हैं। इसके चलते अंतिम संस्कार के लिए वैकल्पिक स्थानों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। हरिश्चंद्र घाट पर गलियों और सीढ़ियों के आसपास अंतिम संस्कार किया गया जबकि मणिकर्णिका घाट पर छत के हिस्से में यह प्रक्रिया करनी पड़ी। दशाश्वमेध घाट की प्रसिद्ध गंगा आरती भी छत से कराई गई। नमो घाट का बड़ा हिस्सा भी जलमग्न हो चुका है।
प्रयागराज में पिछले कई दिनों से रुक-रुककर बारिश हो रही है। दारागंज करेली और सलोरी जैसे इलाकों में कई घरों में कई फीट तक पानी भरने की सूचना है। जलभराव और बिगड़ते हालात के कारण बड़ी संख्या में छात्रों को हॉस्टल खाली करना पड़ा है। कौशांबी और आसपास के जिलों में भी बारिश का असर देखने को मिला है। फर्रुखाबाद में करीब 30 गांव बाढ़ की चपेट में बताए जा रहे हैं और कई संपर्क मार्गों पर पानी बह रहा है। कुछ गांवों के टापू में बदल जाने के कारण प्रशासन ने राहत और बचाव के लिए नावों तथा मोटर बोट की व्यवस्था की है।
राज्य के अलग-अलग हिस्सों में नदियों का जलस्तर लगातार निगरानी में है। घाघरा सरयू गंगा शारदा टोंस सोन और मंदाकिनी जैसी नदियां कई स्थानों पर खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं। पिछले 72 घंटों में बारिश से जुड़े हादसों में मकान गिरने के कारण छह लोगों की मौत की भी सूचना है। इनमें मिर्जापुर जौनपुर और अमेठी के मामले शामिल हैं।
मौसम विभाग ने प्रदेश के बड़े हिस्से में बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया है। हालांकि लखनऊ कानपुर और वाराणसी जैसे कई शहरों में फिलहाल मौसम अपेक्षाकृत साफ है लेकिन बादलों की आवाजाही बनी हुई है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम हवाओं के प्रभाव से उत्तर प्रदेश में बारिश का दौर जारी है और 25 अगस्त तक कई इलाकों में रुक-रुककर बारिश होने की संभावना बनी हुई है। ऐसे में नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए आने वाले दिन भी चुनौतीपूर्ण रह सकते हैं और प्रशासन को राहत एवं बचाव कार्यों को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है।