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  • निरीक्षण के दौरान अचानक लड़खड़ाकर गिरे CM धामी, सड़क पर फिसलने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल

    निरीक्षण के दौरान अचानक लड़खड़ाकर गिरे CM धामी, सड़क पर फिसलने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल


    नई दिल्ली। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हल्द्वानी में निर्माणाधीन अमृतपुर बाईपास का निरीक्षण करने पहुंचे थे। इस दौरान उनके साथ अचानक ऐसा वाकया हुआ जिसने वहां मौजूद लोगों का ध्यान खींच लिया। सड़क का जायजा लेते समय मुख्यमंत्री धामी का संतुलन बिगड़ गया और वह लड़खड़ाकर नीचे गिर पड़े। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में मुख्यमंत्री को कच्ची और पथरीली सड़क पर चलते हुए देखा जा सकता है। इसी दौरान उनका पैर फिसला और वह जमीन पर गिर गए। यह घटना 25 अक्टूबर को निरीक्षण के दौरान हुई बताई जा रही है। हालांकि वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

    जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री धामी अमृतपुर बाईपास परियोजना के निर्माण कार्य की प्रगति देखने पहुंचे थे। सड़क का कुछ हिस्सा अभी निर्माणाधीन है और वहां जमीन ऊबड़-खाबड़ होने के साथ पत्थर भी बिखरे हुए थे। इसी रास्ते पर चलते समय मुख्यमंत्री अचानक लड़खड़ा गए। घटना कैमरे में कैद हो गई और अब इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री धामी ने निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को बाईपास निर्माण कार्य को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पर्यटन सीजन और सप्ताहांत के दौरान इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में सड़कों पर वाहनों का दबाव बढ़ जाता है और लोगों को जाम की समस्या से जूझना पड़ता है। अमृतपुर बाईपास तैयार होने से आम नागरिकों और पर्यटकों को इस परेशानी से राहत मिलने की उम्मीद है।

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि परियोजना के लिए धनराशि की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। निर्माण कार्य के लिए आवश्यक धनराशि स्वीकृत की जा चुकी है। इसलिए काम में किसी तरह की बाधा नहीं आनी चाहिए और इसे निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा किया जाना चाहिए। उन्होंने निर्माण की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने और नियमित निगरानी करने को भी कहा।

    धामी ने सड़क निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रोड कटिंग और निर्माण से जुड़े कार्यों में आम लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए। किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों को गुणवत्ता और सुरक्षा दोनों पहलुओं पर गंभीरता से काम करने के लिए कहा गया है।

    अमृतपुर बाईपास परियोजना कुमाऊं क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य कैंची धाम की ओर जाने वाले मार्ग पर यातायात का दबाव कम करना है। पिछले कुछ वर्षों में बाबा नीम करौली के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही नैनीताल और रानीखेत के अलावा कौसानी पिथौरागढ़ अल्मोड़ा और बागेश्वर जैसे पर्यटन स्थलों पर भी बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में पर्यटन का बढ़ना अच्छी बात है और इससे राज्य को लाभ मिलता है। लेकिन पर्यटकों की बढ़ती संख्या के साथ यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाना भी जरूरी है। सरकार का प्रयास है कि स्थानीय नागरिकों को सुगम आवागमन मिले और बाहर से आने वाले पर्यटकों को भी जाम की समस्या का सामना न करना पड़े।

    फिलहाल मुख्यमंत्री के निरीक्षण के दौरान गिरने का वीडियो चर्चा में है। वहीं अमृतपुर बाईपास परियोजना को समय पर पूरा करने और निर्माण की गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देशों के बाद अब लोगों की नजर इस बात पर है कि यह काम कब तक पूरा होता है और इससे क्षेत्र की यातायात व्यवस्था को कितनी राहत मिलती है।

  • कभी मौसम तो कभी तकनीकी खराबी बनी हादसों की वजह, चारधाम रूट पर 17 साल में 46 लोगों की गई जान

    कभी मौसम तो कभी तकनीकी खराबी बनी हादसों की वजह, चारधाम रूट पर 17 साल में 46 लोगों की गई जान


    नई दिल्ली। उत्तराखंड के चारधाम यात्रा मार्ग पर हेलीकॉप्टर हादसों का सिलसिला एक बार फिर चिंता का विषय बन गया है। जोशीमठ के पास हाल ही में हुए हेलीकॉप्टर हादसे ने पहाड़ी इलाकों में हवाई यात्रा की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दुर्घटना के बाद हेलीकॉप्टर का मलबा टुकड़ों में बरामद किया गया और इसमें सवार सभी छह लोगों की मौत हो गई। इस हादसे के बाद सामने आए आंकड़े बताते हैं कि पिछले 17 वर्षों में चारधाम यात्रा और आसपास के क्षेत्रों में 15 हेलीकॉप्टर दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। इन हादसों में कुल 46 लोगों की जान जा चुकी है। लगातार सामने आ रही दुर्घटनाओं ने यात्रियों की सुरक्षा और उड़ान संचालन की व्यवस्था पर ध्यान देने की जरूरत बढ़ा दी है।

    चारधाम यात्रा के दौरान हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल खासतौर पर केदारनाथ जैसे दुर्गम धार्मिक स्थलों तक पहुंचने के लिए किया जाता है। बुजुर्गों और कम समय में यात्रा पूरी करने की इच्छा रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह सुविधा काफी उपयोगी मानी जाती है। लेकिन हिमालयी क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियां हेलीकॉप्टर उड़ानों को चुनौतीपूर्ण बना देती हैं। यहां मौसम तेजी से बदलता है और कुछ ही मिनटों में साफ आसमान कोहरा तथा बादलों से घिर सकता है। बारिश और कम दृश्यता के कारण पायलटों को उड़ान के दौरान मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

    तेज हवाओं का अचानक रुख बदलना भी हेलीकॉप्टर के संतुलन को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा माइक्रोबर्स्ट यानी हवा का अचानक तेज गति से नीचे की ओर बहना उड़ान के लिए खतरनाक स्थिति पैदा कर सकता है। कुछ दुर्घटनाओं में इंजन रोटर ब्लेड और टेल रोटर से जुड़ी तकनीकी खराबियां भी सामने आई हैं। ऐसे में मौसम की स्थिति और हेलीकॉप्टर की तकनीकी जांच दोनों ही सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं।

    बीते वर्षों में हुए हादसों पर नजर डालें तो 12 जून 2009 को केदारनाथ हेलीपैड पर हेलीकॉप्टर के पंखे की चपेट में आने से एक व्यक्ति की मौत हुई थी। वर्ष 2013 में चारधाम क्षेत्र में कई बड़े हादसे हुए। 21 जून को जंगलचट्टी में हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त होने से पायलट की जान गई। 25 जून को गौरीकुंड के पास एमआई-17 हेलीकॉप्टर हादसे में 20 जवानों की मौत हुई थी। इसके तीन दिन बाद गरुड़चट्टी में एक अन्य दुर्घटना में तीन लोगों की जान चली गई।

    इसके बाद भी हादसों का सिलसिला थमा नहीं। 2016 में गुप्तकाशी के पास हवा में हेलीकॉप्टर को नुकसान पहुंचा लेकिन सभी यात्री सुरक्षित बच गए। 2018 में केदारनाथ में एमआई-17 दुर्घटनाग्रस्त हुआ जिसमें कोई जनहानि नहीं हुई। 2019 में तकनीकी खराबी के कारण आपात लैंडिंग करनी पड़ी। अक्टूबर 2022 में गरुड़चट्टी के पास पहाड़ी से टकराने के कारण सात लोगों की मौत हुई। अप्रैल 2023 में हेलीपैड पर टेल रोटर की चपेट में आने से एक अधिकारी की जान चली गई।

    वर्ष 2024 और 2025 में भी कई घटनाएं हुईं। इनमें कुछ मामलों में आपात लैंडिंग और दुर्घटना के बावजूद यात्रियों की जान बच गई जबकि 15 जून 2025 को गौरी माई खर्क के पास हुए हादसे में सात लोगों की मौत हो गई। अक्टूबर 2026 में नई टिहरी के बौराड़ी स्टेडियम में तकनीकी खराबी के कारण निजी हेलीकॉप्टर की आपात लैंडिंग हुई। इसके बाद 30 अक्टूबर को बदरीनाथ से देहरादून जा रहा हेलीकॉप्टर हाथी पर्वत के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया और छह लोगों की मौत हो गई।

    लगातार हो रही इन घटनाओं के बीच हेलीकॉप्टर संचालन में मौसम की सख्त निगरानी तकनीकी जांच और सुरक्षा नियमों के पालन को प्राथमिकता देना जरूरी है। चारधाम यात्रा श्रद्धालुओं के लिए आस्था का बड़ा अवसर है लेकिन इस यात्रा में उनकी सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण होनी चाहिए।

  • अंकिता भंडारी केस में बड़े खुलासे की उम्मीद, उर्मिला सनावर के नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट पर नजर, CBI ने अदालत का दरवाजा खटखटाया

    अंकिता भंडारी केस में बड़े खुलासे की उम्मीद, उर्मिला सनावर के नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट पर नजर, CBI ने अदालत का दरवाजा खटखटाया


    नई दिल्ली। उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी एंगल को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मामले की जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई अभिनेत्री उर्मिला सनावर का पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट कराना चाहती है। इसके लिए अदालत में आवेदन दिया गया है और अब उनकी सहमति की पुष्टि के लिए उन्हें 23 अक्टूबर को देहरादून की अदालत में पेश होने का नोटिस जारी किया गया है। इस घटनाक्रम के बाद एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं कि क्या इस मामले में कथित वीआईपी से जुड़े आरोपों की जांच में कोई नई जानकारी सामने आएगी। हालांकि अभी किसी नए खुलासे की पुष्टि नहीं हुई है और जांच के नतीजों का इंतजार किया जा रहा है।

    जानकारी के मुताबिक विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट सीबीआई संदीप सिंह भंडारी ने 21 अक्टूबर 2026 को नोटिस जारी किया था। मंगलवार देर शाम सीबीआई की टीम सहारनपुर स्थित उर्मिला सनावर के घर पहुंची और उन्हें अदालत में पेश होने का नोटिस सौंपा। उन्हें 23 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर अदालत में उपस्थित होना है। इस दौरान यह स्पष्ट किया जाएगा कि वह पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट कराने के लिए अपनी इच्छा से सहमति दे रही हैं या नहीं।

    सीबीआई की ओर से इन परीक्षणों की मांग ऐसे समय की गई है जब अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी की पहचान को लेकर विवाद लगातार चर्चा में बना हुआ है। उर्मिला सनावर से जुड़े कथित ऑडियो सामने आने के बाद मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया था। इन ऑडियो के माध्यम से कुछ दावे किए गए थे जिनकी सत्यता और मामले से संबंधित पहलुओं की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि किसी व्यक्ति का नाम कथित आरोपों में सामने आना अपने आप में अपराध साबित नहीं करता। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए जांच और उपलब्ध साक्ष्यों का मूल्यांकन जरूरी है।

    सीबीआई इस मामले में पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट कराने के लिए अदालत से अनुमति चाहती है। पॉलीग्राफ परीक्षण के दौरान व्यक्ति की शारीरिक प्रतिक्रियाओं को दर्ज किया जाता है जबकि नार्को परीक्षण में विशेष दवाओं के प्रभाव में पूछताछ की जाती है। इन दोनों प्रक्रियाओं की अपनी सीमाएं हैं और इनके नतीजों को अपने आप में निर्णायक सबूत नहीं माना जा सकता। इसलिए जांच एजेंसी को अन्य साक्ष्यों और तथ्यों के साथ इनका मूल्यांकन करना होगा।

    इस मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि किसी भी परीक्षण के लिए सहमति स्वतंत्र और स्वैच्छिक होनी चाहिए। अदालत यह सुनिश्चित करेगी कि उर्मिला सनावर की सहमति किसी दबाव धमकी लालच या अनुचित प्रभाव के कारण न हो। रिपोर्ट के अनुसार वह पहले ही परीक्षण कराने के लिए सहमति देने की बात कह चुकी हैं। अब अदालत में उनकी इच्छा की औपचारिक पुष्टि की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

    अंकिता भंडारी हत्याकांड लंबे समय से उत्तराखंड में संवेदनशील और चर्चित मामला रहा है। कथित वीआईपी एंगल को लेकर उठते सवालों के कारण इस प्रकरण पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी बहस होती रही है। सीबीआई की जांच और उर्मिला सनावर के प्रस्तावित परीक्षण को इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि इन परीक्षणों से किसी कथित वीआईपी का नाम सामने आएगा या मामले में कोई नया मोड़ आएगा। अब सभी की नजर अदालत की कार्यवाही और जांच एजेंसी की आगे की कार्रवाई पर टिकी है।

  • मोहम्मद दीपक की गिरफ्तारी से बढ़ी हलचल, साड़ी दुकान पर विवाद के बाद कोतवाली में पुलिस का पहरा

    मोहम्मद दीपक की गिरफ्तारी से बढ़ी हलचल, साड़ी दुकान पर विवाद के बाद कोतवाली में पुलिस का पहरा


    नई दिल्ली। उत्तराखंड के कोटद्वार में मोहम्मद दीपक नाम से चर्चित दीपक कुमार एक बार फिर विवाद को लेकर चर्चा में हैं। फेसबुक पर किए गए कमेंट से शुरू हुआ विवाद गंगा दत्त जोशी मार्ग स्थित एक साड़ी की दुकान तक पहुंच गया। व्यापारी की शिकायत के बाद पुलिस ने दीपक कुमार को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक मामले में शिकायत के आधार पर कार्रवाई की गई है। घटना के बाद मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कोटद्वार कोतवाली में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।

    रिपोर्टों के मुताबिक पूरा विवाद मध्य प्रदेश के उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण से जुड़े घटनाक्रम पर सोशल मीडिया पर की गई एक पोस्ट और उस पर आए कमेंट से शुरू हुआ। दीपक कुमार ने इस मामले से संबंधित एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया था। इसके बाद गंगादत्त जोशी मार्ग स्थित राधिका गारमेंट्स के संचालक संजीव टांक की ओर से उस पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी गई। व्यापारी का आरोप है कि इसी कमेंट को लेकर दीपक कुमार नाराज हुए और गुरुवार सुबह उनकी दुकान पर पहुंचे।

    व्यापारी ने पुलिस को दी शिकायत में दीपक कुमार पर अभद्रता और गाली गलौज करने के साथ धमकी देने के आरोप लगाए। अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक व्यापारी ने हाथापाई का भी आरोप लगाया है। दूसरी ओर पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर दीपक कुमार को हिरासत में लिया। उपलब्ध रिपोर्टों में पुलिस कार्रवाई और आगे की कानूनी प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है।

    दीपक की गिरफ्तारी की खबर फैलने के बाद बड़ी संख्या में व्यापारी और भाजपा संगठन से जुड़े लोग कोटद्वार कोतवाली पहुंचे। वहां नारेबाजी की स्थिति बनने के बाद पुलिस ने अतिरिक्त बल तैनात किया। माहौल को नियंत्रित रखने के लिए कोटद्वार में पुलिस की ओर से फ्लैग मार्च भी किया गया। पुलिस का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और पूरे मामले की जांच की जा रही है।

    दीपक कुमार इससे पहले जनवरी 2026 में एक वायरल वीडियो के बाद चर्चा में आए थे। रिपोर्टों के अनुसार 26 जनवरी को कोटद्वार में एक बुजुर्ग मुस्लिम दुकानदार से जुड़े विवाद के दौरान दीपक उनके समर्थन में सामने आए थे। इसी दौरान नाम पूछे जाने पर उन्होंने खुद को मोहम्मद दीपक बताया था। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद वह इसी नाम से चर्चा में आ गए। बाद में इस मामले को लेकर विरोध प्रदर्शन भी हुआ था। उपलब्ध रिपोर्टों में दीपक की पहचान दीपक कुमार कश्यप के रूप में बताई गई है और उन्हें कोटद्वार में जिम संचालक बताया गया था।

    जनवरी की घटना के बाद विवाद कानूनी और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा में रहा। अब अक्टूबर में सामने आए नए मामले ने दीपक कुमार को फिर सुर्खियों में ला दिया है। फिलहाल पुलिस व्यापारी की शिकायत और घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है। गिरफ्तारी के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए जाने की बात पुलिस रिपोर्ट में कही गई है। मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम स्थिति जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।

  • बदरीनाथ में आस्था के बीच बड़ा हादसा तप्तकुंड में ज्यादा देर स्नान बना जानलेवा डॉक्टरों ने दी खास सलाह

    बदरीनाथ में आस्था के बीच बड़ा हादसा तप्तकुंड में ज्यादा देर स्नान बना जानलेवा डॉक्टरों ने दी खास सलाह


    नई दिल्ली। बदरीनाथ धाम में आस्था के साथ तप्तकुंड में स्नान करने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक गंभीर चेतावनी सामने आई है। चमोली जिले में स्थित प्रसिद्ध तप्तकुंड में अधिक संख्या में डुबकी लगाने और लंबे समय तक गर्म पानी में रहने को चिकित्सकों ने स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बताया है। शुक्रवार को कुंड में 108 डुबकी लगाने के दौरान दो सगी बहनों की मौत के बाद श्रद्धालुओं से विशेष सावधानी बरतने की अपील की गई है। चिकित्सकों के अनुसार प्राकृतिक रूप से गर्म और सल्फरयुक्त पानी में अधिक समय तक रहने से शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और कुछ परिस्थितियों में यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।

    बदरीनाथ के सरकारी अस्पताल के प्रभारी चिकित्सक डॉ. सचिन राणा के अनुसार तप्तकुंड का पानी प्राकृतिक रूप से गर्म और सल्फरयुक्त है। इसके अलावा कुंड के आसपास गर्म हवाओं का प्रभाव भी रहता है। ऐसे वातावरण में लंबे समय तक रहने से शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। उन्होंने श्रद्धालुओं को सलाह दी है कि कुंड में अधिकतम दो से तीन डुबकी लगाने के बाद बाहर निकल जाना चाहिए। खासकर बुजुर्गों और हृदय संबंधी समस्या वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।

    शुक्रवार को हुआ हादसा इस चेतावनी की गंभीरता को सामने लाता है। 71 वर्षीय रामू देवी और 63 वर्षीय प्रेमा देवी सगी बहनें थीं। बताया गया कि दोनों करीब एक सप्ताह से प्रतिदिन तप्तकुंड में 108 डुबकी लगा रही थीं। शुक्रवार को भी उन्होंने इसी तरह स्नान किया लेकिन इसके बाद दोनों की तबीयत बिगड़ गई। दोनों की हृदय गति रुकने से मौत हो गई। घटना के बाद तीर्थयात्रियों के बीच भी चिंता बढ़ गई और प्रशासन तथा चिकित्सकों की ओर से सावधानी बरतने की जरूरत पर जोर दिया गया।

    तप्तकुंड बदरीनाथ धाम आने वाले श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है। मान्यता के चलते बड़ी संख्या में लोग यहां स्नान करते हैं। कई श्रद्धालु धार्मिक संकल्प के तहत बार बार डुबकी लगाते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि धार्मिक आस्था के साथ शरीर की क्षमता और स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है। गर्म पानी में लंबे समय तक रहने या बार बार डुबकी लगाने से चक्कर आना कमजोरी महसूस होना मूर्छा आना और हृदय संबंधी परेशानी जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

    ऊंचाई वाले क्षेत्र में होने के कारण बदरीनाथ में मौसम और वातावरण मैदानी इलाकों से अलग होता है। ऐसे में श्रद्धालुओं को अपनी शारीरिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए ही स्नान करना चाहिए। यदि स्नान के दौरान चक्कर घबराहट सांस लेने में परेशानी अत्यधिक कमजोरी या बेचैनी महसूस हो तो तुरंत कुंड से बाहर निकलकर चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।

    चिकित्सकों की सलाह का उद्देश्य श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था को रोकना नहीं बल्कि उसे सुरक्षित बनाना है। तप्तकुंड में स्नान करते समय सीमित समय तक रहना और अधिक डुबकी लगाने से बचना जरूरी है। दो महिलाओं की मौत की घटना ने यह साफ कर दिया है कि आस्था के साथ सावधानी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। श्रद्धालुओं को अपनी सेहत को प्राथमिकता देते हुए चिकित्सकों की सलाह का पालन करना चाहिए ताकि बदरीनाथ की यात्रा श्रद्धा के साथ सुरक्षित भी रहे।

  • देर रात ऋषभ पंत ने CM पुष्कर धामी को किया मैसेज, बोले- ‘भटक रहा हूं…’ रखी बड़ी डिमांड

    देर रात ऋषभ पंत ने CM पुष्कर धामी को किया मैसेज, बोले- ‘भटक रहा हूं…’ रखी बड़ी डिमांड


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत इन दिनों श्रीलंका दौरे पर हैं लेकिन इसी बीच उनका एक सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा का विषय बन गया है। पंत ने देर रात उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को टैग करते हुए अपने लिए जमीन खरीदने में मदद की अपील की। क्रिकेटर ने बताया कि वह लंबे समय से उत्तराखंड में अपना घर बनाने और दिल्ली से अपना बेस अपने गृह राज्य में शिफ्ट करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि जमीन की तलाश में उन्हें लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पंत के मुताबिक वह करीब तीन साल से जमीन का इंतजार कर रहे हैं और अब उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले में मदद करने का अनुरोध किया है।

    ऋषभ पंत ने शुक्रवार और शनिवार की दरम्यानी रात करीब 12 बजकर 46 मिनट पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को टैग करते हुए पोस्ट किया। उन्होंने अपने संदेश में उत्तराखंड के प्रति अपने लगाव का जिक्र किया और कहा कि वह अपने राज्य में वापस लौटना चाहते हैं। पंत ने बताया कि वह उत्तराखंड में ऐसी जगह तलाश रहे हैं जहां सुविधाओं के साथ अपना घर बनाया जा सके और अपना बेस दिल्ली से उत्तराखंड शिफ्ट किया जा सके। लेकिन जमीन खरीदने की प्रक्रिया उनके लिए आसान नहीं रही है।

    पंत ने मुख्यमंत्री से जमीन खरीदने की प्रक्रिया को स्पष्ट कराने और इसमें मदद करने की अपील की। उन्होंने कहा कि वह उत्तराखंड से जुड़े हुए हैं और अपने पहाड़ी लोगों के बीच वापस लौटना चाहते हैं। क्रिकेटर ने यह भी इच्छा जताई कि वह अपने राज्य के विकास और निर्माण में योगदान देना चाहते हैं। इसी वजह से वह उत्तराखंड में स्थायी रूप से अपना घर बनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं।

    ऋषभ पंत ने अपनी अपील में जमीन को लेकर एक विकल्प भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि अगर सरकार उन्हें जमीन उपलब्ध कराने की अनुमति देती है तो वह उसे निर्धारित सरकारी दर पर खरीदने के लिए तैयार हैं। पंत के लिए यह केवल जमीन खरीदने का मामला नहीं है बल्कि उत्तराखंड में अपना पहला घर बनाने से जुड़ा सपना है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस पूरे मामले पर गंभीरता से ध्यान देने और उन्हें सही प्रक्रिया बताने की अपील की।

    पंत का उत्तराखंड से पुराना और गहरा जुड़ाव रहा है। उनका परिवार राज्य से जुड़ा हुआ है और वह कई मौकों पर उत्तराखंड के प्रति अपना लगाव जाहिर कर चुके हैं। अब उन्होंने सार्वजनिक रूप से मुख्यमंत्री से मदद मांगकर यह साफ कर दिया है कि वह अपने गृह राज्य में वापस लौटकर यहां अपना स्थायी ठिकाना बनाना चाहते हैं।

    पंत की अपील पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने क्रिकेटर को उत्तराखंड का गौरव बताते हुए कहा कि पंत ने अपने शानदार खेल और उपलब्धियों से देश और दुनिया में देवभूमि का नाम रोशन किया है। मुख्यमंत्री ने उनकी मातृभूमि के प्रति प्रेम और उत्तराखंड लौटकर योगदान देने की भावना की सराहना की और जरूरी सहयोग का भरोसा दिया।

    ऋषभ पंत इस समय भारतीय टेस्ट टीम के साथ श्रीलंका दौरे पर हैं और टेस्ट क्रिकेट में टीम इंडिया के अहम खिलाड़ियों में शामिल हैं। अब उनकी जमीन से जुड़ी अपील के बाद निगाहें उत्तराखंड सरकार की अगली कार्रवाई पर हैं। अगर सरकारी स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो पंत का अपने पहाड़ में पहला घर बनाने का सपना जल्द पूरा हो सकता है।

  • बदरीनाथ मंदिर चढ़ावा विवाद पर तेज हुई जांच, कांग्रेस का सत्याग्रह ऐलान, CCTV फुटेज पर टिकी नजर

    बदरीनाथ मंदिर चढ़ावा विवाद पर तेज हुई जांच, कांग्रेस का सत्याग्रह ऐलान, CCTV फुटेज पर टिकी नजर


    नई दिल्ली । अयोध्या राम मंदिर के बाद अब उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में चढ़ावे की कथित हेराफेरी का मामला चर्चा का विषय बन गया है। मंदिर प्रशासन ने पूरे प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए जांच प्रक्रिया तेज कर दी है। बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति ने चार सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है जिसे एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। इस मामले में सबसे अहम पहलू यह सामने आया है कि मंदिर परिसर में एक जून से नए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे जबकि कथित घटना दो जुलाई की बताई जा रही है। ऐसे में जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि फुटेज से पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ सकेगी।

    मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने बताया कि जांच समिति सभी साक्ष्यों वैज्ञानिक तथ्यों और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रही है। उन्होंने चढ़ावा गणना में लगे कर्मचारियों और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी तरह के दस्तावेज सीसीटीवी फुटेज या अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखे गए हैं ताकि जांच निष्पक्ष तरीके से पूरी हो सके।

    मंदिर प्रशासन के अनुसार सीसीटीवी प्रणाली में लगभग 45 दिनों का रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है। चूंकि नए कैमरे एक जून से सक्रिय हैं इसलिए दो जुलाई की कथित घटना से जुड़ा पूरा वीडियो रिकॉर्ड उपलब्ध होने की संभावना है। जांच टीम इन्हीं फुटेज और अन्य दस्तावेजों के आधार पर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ रही है।

    मामले की जांच के लिए गठित समिति में वित्त नियंत्रक हेम कांडपाल विधि अधिकारी एसएस वर्त्वाल मुख्य प्रशासनिक अधिकारी राजन नैथानी और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी डीएस भुजवाण को शामिल किया गया है। समिति सभी संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ करने के साथ चढ़ावा गणना की पूरी प्रक्रिया की भी समीक्षा कर रही है।

    इस बीच मामला राजनीतिक रंग भी लेने लगा है। उत्तराखंड कांग्रेस ने आठ जुलाई को पूरे प्रदेश में उपवास और सत्याग्रह करने की घोषणा की है। कांग्रेस का आरोप है कि मंदिरों से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। पार्टी ने यह भी मांग की है कि पूरे मामले की जांच स्वतंत्र एजेंसी या न्यायिक स्तर पर कराई जाए ताकि किसी तरह का संदेह न रहे।

    उधर श्री बदरीश पंडा पंचायत ने भी मंदिर की गरिमा से जुड़े इस मामले पर चिंता जताई है। पंचायत का कहना है कि यदि किसी स्तर पर वित्तीय अनियमितता हुई है तो दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच में किसी उच्च अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए। तीर्थपुरोहितों और पुजारियों ने भी इस पूरे घटनाक्रम को धाम की प्रतिष्ठा से जुड़ा गंभीर विषय बताया है।

    अब पूरे मामले में सभी की नजर जांच समिति की रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज पर टिकी हुई है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि धार्मिक संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर भी बड़ा संदेश देगा।

  • नगरासू गुरुद्वारा विवाद थमा, लेकिन बढ़ा नया बवाल: निहंगों के रवाना होने के बाद कार्रवाई की मांग तेज

    नगरासू गुरुद्वारा विवाद थमा, लेकिन बढ़ा नया बवाल: निहंगों के रवाना होने के बाद कार्रवाई की मांग तेज


    नई दिल्ली ।उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले स्थित नगरासू गुरुद्वारे में पिछले चार दिनों से चला आ रहा तनावपूर्ण विवाद मंगलवार को भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन इसके बाद एक नए विवाद और जनआक्रोश की आशंका पैदा हो गई है। गुरुद्वारे में डटे निहंग सिखों को पंजाब से पहुंचे आठ सदस्यीय शिष्टमंडल की मध्यस्थता के बाद वापस भेज दिया गया, लेकिन स्थानीय लोग इस पूरे घटनाक्रम से संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं। उनका आरोप है कि कई दिनों तक क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल बना रहा, पत्थरबाजी और तनाव की घटनाएं हुईं, इसके बावजूद किसी के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई।

    मंगलवार सुबह से ही गुरुद्वारे में गतिविधियां तेज हो गई थीं। सुरक्षा कारणों से किसी भी बाहरी व्यक्ति को अंदर प्रवेश नहीं करने दिया गया। पूर्वाह्न करीब साढ़े ग्यारह बजे पंजाब से आए धार्मिक प्रतिनिधियों और गुरुद्वारा प्रबंधन के बीच बातचीत शुरू हुई। लगभग तीन घंटे तक चली चर्चा के बाद सहमति बनी और शाम करीब चार बजे पांचों निहंगों को सुरक्षा घेरे में पंजाब के लिए रवाना कर दिया गया। इस दौरान निहंग जयकारे लगाते और उत्साह जताते दिखाई दिए। कुछ निहंग मोटरसाइकिलों पर जबकि एक अन्य वाहन से रवाना हुआ।

    आनंदपुर साहिब से पहुंचे जत्थेदार बाबा अजीत सिंह ने कहा कि सभी पक्ष शांति चाहते हैं और उत्तराखंड के लोग उनके भाई हैं। उन्होंने गुरुद्वारे पर कब्जे के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि निहंग अपने धार्मिक स्थल पर ही रुके हुए थे। उनके अनुसार पुलिस कार्रवाई के भय से वे छत पर चले गए थे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कानून से बड़ा कोई नहीं है और प्रशासन जो भी उचित कार्रवाई करेगा, वह स्वीकार होगी।

    हालांकि स्थानीय लोगों का नजरिया इससे अलग है। उनका कहना है कि चार दिनों तक गुरुद्वारे की ऊपरी मंजिल पर कब्जे जैसी स्थिति बनी रही, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव फैल गया। गढ़वाल विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह रावत ने सवाल उठाया कि जब पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात थे तो विवाद का समाधान पहले क्यों नहीं किया गया। वहीं युवा नेता मोहित डिमरी ने इसे प्रशासनिक विफलता बताते हुए कहा कि शांत माहौल को खराब करने की कोशिश हुई और आम लोगों को अनावश्यक परेशानी झेलनी पड़ी।

    स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इस दौरान पुलिस पर पत्थरबाजी की गई और धारदार हथियारों का प्रदर्शन भी हुआ। सोमवार रात को हाईवे पर पत्थरबाजी की घटना ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी थी। हालांकि कुछ लोगों का कहना है कि निहंगों को उकसाने की कोशिश की गई थी, जिसके बाद उन्होंने प्रतिक्रिया दी। इसके बावजूद लोगों का मानना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

    नगर पालिका अध्यक्ष संतोष रावत और जिला पंचायत सदस्य संपन्न नेगी समेत कई जनप्रतिनिधियों ने भी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि यदि गुरुद्वारा प्रबंधन ने तोड़फोड़ और अव्यवस्था के आरोप लगाए थे तो उनकी जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए थी।

    अब स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को तहरीर देने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि यदि चार दिनों तक चले घटनाक्रम में कानून व्यवस्था प्रभावित हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कानूनी कदम उठाए जाने चाहिए। फिलहाल प्रशासन राहत की सांस ले रहा है कि विवाद शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त हो गया, लेकिन क्षेत्र में लोगों की नाराजगी यह संकेत दे रही है कि मामला अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

  • सीएम धामी ने बाबा नीब करौरी महाराज पर आधारित फिल्म का प्रोमो और पोस्टर किया लॉन्च

    सीएम धामी ने बाबा नीब करौरी महाराज पर आधारित फिल्म का प्रोमो और पोस्टर किया लॉन्च

    नई दिल्ली/देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में श्री बाबा नीब करौरी महाराज के जीवन पर आधारित फिल्म का प्रोमो और पोस्टर जारी किया। इस अवसर पर योगगुरु स्वामी रामदेव, स्वामी चिदानंद सरस्वती, फिल्म के निर्देशक शरद सिंह ठाकुर सहित कई प्रमुख गणमान्य व्यक्ति और कलाकार उपस्थित रहे। कार्यक्रम का माहौल आध्यात्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं से ओतप्रोत नजर आया।

    मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि यह फिल्म केवल एक मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि श्रद्धा, भक्ति और मानवता के मूल्यों को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने का एक सार्थक प्रयास है। उन्होंने कहा कि ऐसे विषयों पर आधारित फिल्में समाज में सकारात्मक सोच को बढ़ावा देती हैं और लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का कार्य करती हैं।

    सीएम धामी ने बाबा नीब करौरी महाराज के जीवन और उनके विचारों को याद करते हुए कहा कि उनका दिव्य व्यक्तित्व आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि बाबा की शिक्षाएं सरलता, करुणा, सेवा और भक्ति के मार्ग पर चलने का संदेश देती हैं, जो वर्तमान समय में अत्यंत प्रासंगिक हैं और समाज को दिशा देने का कार्य करती हैं।

    उन्होंने आगे कहा कि भारतीय संत परंपरा और सनातन संस्कृति के मूल्यों को सहेजना और उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है। इस प्रकार की आध्यात्मिक फिल्मों के माध्यम से युवा पीढ़ी को अपने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के प्रति जागरूक किया जा सकता है।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने फिल्म से जुड़े सभी कलाकारों, निर्देशक और निर्माण टीम की सराहना करते हुए उन्हें इस प्रयास के लिए बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह फिल्म समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करेगी और लोगों को आध्यात्मिकता की ओर प्रेरित करेगी।

    इस आयोजन को उत्तराखंड की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जो संत परंपरा के महान व्यक्तित्वों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में सहायक सिद्ध हो सकता है।

  • कुंभ 2027 का शंखनाद: हरिद्वार में बनेगा भव्य आयोजन का नया रिकॉर्ड, अखाड़ों ने कसी कमर

    कुंभ 2027 का शंखनाद: हरिद्वार में बनेगा भव्य आयोजन का नया रिकॉर्ड, अखाड़ों ने कसी कमर


    नई दिल्ली । धर्मनगरी हरिद्वार में होने वाले कुंभ 2027 को लेकर आध्यात्मिक जगत में हलचल तेज हो गई है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी ने स्पष्ट कर दिया है कि आगामी कुंभ न केवल दिव्य और भव्य होगा, बल्कि यह प्रयागराज के आयोजनों के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ने की तैयारी में है। सनातन समाज और संतों के बीच कुंभ को लेकर भारी उत्साह है और अभी से महीनों की गिनती शुरू हो चुकी है।

    सभी 13 अखाड़ों का एक सुर में समर्थन आयोजन की सफलता के लिए सबसे महत्वपूर्ण कड़ी अखाड़ों के बीच का आपसी समन्वय है। महंत रविंद्र पुरी ने बताया कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ हुई बैठक में सभी 13 अखाड़ों ने एक स्वर में कुंभ के मेगा प्लान का समर्थन किया है। किसी भी स्तर पर कोई विरोध नहीं है। निरंजनी अखाड़े में बैठकों का दौर शुरू हो चुका है, जहाँ आयोजन की बारीकियों पर चर्चा की जा रही है। इस बार का विशेष आकर्षण निरंजनी अखाड़े द्वारा बनाए गए जापानी महामंडलेश्वर होंगे, जो वैश्विक स्तर पर सनातन धर्म के विस्तार का प्रतीक बनकर उभरेंगे।

    प्रयागराज के फैसलों और सुरक्षा पर रुख प्रयागराज कुंभ के दौरान लिए गए कड़े फैसलों और वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों पर बात करते हुए महंत रविंद्र पुरी ने धर्म की शुद्धता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हाल के समय में ‘जूस जिहाद’ और ‘थूक जिहाद’ जैसी घटनाओं ने संतों के मन को विचलित किया है। सनातन धर्म में आहार की शुद्धता सर्वोपरि है, ताकि किसी का धर्म भ्रष्ट न हो।

    हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत में हम सबको एक समान दृष्टि से देखते हैं, लेकिन कुंभ की मर्यादा बनाए रखना हमारी प्राथमिकता है। 2027 के कुंभ के लिए कौन से नियम और कड़े फैसले लागू होंगे, इसका अंतिम निर्णय सभी 13 अखाड़े सामूहिक बैठक में चर्चा के बाद लेंगे। उचित और अनुचित का विचार कर ही अंतिम गाइडलाइन तैयार की जाएगी।

    भव्यता और प्रबंधन की नई मिसाल कुंभ 2027 को लेकर शासन और प्रशासन के साथ मिलकर एक ऐसी रूपरेखा तैयार की जा रही है जिससे श्रद्धालुओं को सुगम और सुरक्षित अनुभव मिल सके। हरिद्वार कुंभ को एक उत्सव के रूप में पेश करने की तैयारी है, जहाँ आस्था के साथ-साथ आधुनिक प्रबंधन का भी संगम देखने को मिलेगा।