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  • नगरासू गुरुद्वारा विवाद थमा, लेकिन बढ़ा नया बवाल: निहंगों के रवाना होने के बाद कार्रवाई की मांग तेज

    नगरासू गुरुद्वारा विवाद थमा, लेकिन बढ़ा नया बवाल: निहंगों के रवाना होने के बाद कार्रवाई की मांग तेज


    नई दिल्ली ।उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले स्थित नगरासू गुरुद्वारे में पिछले चार दिनों से चला आ रहा तनावपूर्ण विवाद मंगलवार को भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन इसके बाद एक नए विवाद और जनआक्रोश की आशंका पैदा हो गई है। गुरुद्वारे में डटे निहंग सिखों को पंजाब से पहुंचे आठ सदस्यीय शिष्टमंडल की मध्यस्थता के बाद वापस भेज दिया गया, लेकिन स्थानीय लोग इस पूरे घटनाक्रम से संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं। उनका आरोप है कि कई दिनों तक क्षेत्र में भय और असुरक्षा का माहौल बना रहा, पत्थरबाजी और तनाव की घटनाएं हुईं, इसके बावजूद किसी के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई।

    मंगलवार सुबह से ही गुरुद्वारे में गतिविधियां तेज हो गई थीं। सुरक्षा कारणों से किसी भी बाहरी व्यक्ति को अंदर प्रवेश नहीं करने दिया गया। पूर्वाह्न करीब साढ़े ग्यारह बजे पंजाब से आए धार्मिक प्रतिनिधियों और गुरुद्वारा प्रबंधन के बीच बातचीत शुरू हुई। लगभग तीन घंटे तक चली चर्चा के बाद सहमति बनी और शाम करीब चार बजे पांचों निहंगों को सुरक्षा घेरे में पंजाब के लिए रवाना कर दिया गया। इस दौरान निहंग जयकारे लगाते और उत्साह जताते दिखाई दिए। कुछ निहंग मोटरसाइकिलों पर जबकि एक अन्य वाहन से रवाना हुआ।

    आनंदपुर साहिब से पहुंचे जत्थेदार बाबा अजीत सिंह ने कहा कि सभी पक्ष शांति चाहते हैं और उत्तराखंड के लोग उनके भाई हैं। उन्होंने गुरुद्वारे पर कब्जे के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि निहंग अपने धार्मिक स्थल पर ही रुके हुए थे। उनके अनुसार पुलिस कार्रवाई के भय से वे छत पर चले गए थे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कानून से बड़ा कोई नहीं है और प्रशासन जो भी उचित कार्रवाई करेगा, वह स्वीकार होगी।

    हालांकि स्थानीय लोगों का नजरिया इससे अलग है। उनका कहना है कि चार दिनों तक गुरुद्वारे की ऊपरी मंजिल पर कब्जे जैसी स्थिति बनी रही, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव फैल गया। गढ़वाल विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह रावत ने सवाल उठाया कि जब पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात थे तो विवाद का समाधान पहले क्यों नहीं किया गया। वहीं युवा नेता मोहित डिमरी ने इसे प्रशासनिक विफलता बताते हुए कहा कि शांत माहौल को खराब करने की कोशिश हुई और आम लोगों को अनावश्यक परेशानी झेलनी पड़ी।

    स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इस दौरान पुलिस पर पत्थरबाजी की गई और धारदार हथियारों का प्रदर्शन भी हुआ। सोमवार रात को हाईवे पर पत्थरबाजी की घटना ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी थी। हालांकि कुछ लोगों का कहना है कि निहंगों को उकसाने की कोशिश की गई थी, जिसके बाद उन्होंने प्रतिक्रिया दी। इसके बावजूद लोगों का मानना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

    नगर पालिका अध्यक्ष संतोष रावत और जिला पंचायत सदस्य संपन्न नेगी समेत कई जनप्रतिनिधियों ने भी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि यदि गुरुद्वारा प्रबंधन ने तोड़फोड़ और अव्यवस्था के आरोप लगाए थे तो उनकी जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए थी।

    अब स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को तहरीर देने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि यदि चार दिनों तक चले घटनाक्रम में कानून व्यवस्था प्रभावित हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कानूनी कदम उठाए जाने चाहिए। फिलहाल प्रशासन राहत की सांस ले रहा है कि विवाद शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त हो गया, लेकिन क्षेत्र में लोगों की नाराजगी यह संकेत दे रही है कि मामला अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।

  • सीएम धामी ने बाबा नीब करौरी महाराज पर आधारित फिल्म का प्रोमो और पोस्टर किया लॉन्च

    सीएम धामी ने बाबा नीब करौरी महाराज पर आधारित फिल्म का प्रोमो और पोस्टर किया लॉन्च

    नई दिल्ली/देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में श्री बाबा नीब करौरी महाराज के जीवन पर आधारित फिल्म का प्रोमो और पोस्टर जारी किया। इस अवसर पर योगगुरु स्वामी रामदेव, स्वामी चिदानंद सरस्वती, फिल्म के निर्देशक शरद सिंह ठाकुर सहित कई प्रमुख गणमान्य व्यक्ति और कलाकार उपस्थित रहे। कार्यक्रम का माहौल आध्यात्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं से ओतप्रोत नजर आया।

    मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि यह फिल्म केवल एक मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि श्रद्धा, भक्ति और मानवता के मूल्यों को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने का एक सार्थक प्रयास है। उन्होंने कहा कि ऐसे विषयों पर आधारित फिल्में समाज में सकारात्मक सोच को बढ़ावा देती हैं और लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का कार्य करती हैं।

    सीएम धामी ने बाबा नीब करौरी महाराज के जीवन और उनके विचारों को याद करते हुए कहा कि उनका दिव्य व्यक्तित्व आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि बाबा की शिक्षाएं सरलता, करुणा, सेवा और भक्ति के मार्ग पर चलने का संदेश देती हैं, जो वर्तमान समय में अत्यंत प्रासंगिक हैं और समाज को दिशा देने का कार्य करती हैं।

    उन्होंने आगे कहा कि भारतीय संत परंपरा और सनातन संस्कृति के मूल्यों को सहेजना और उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है। इस प्रकार की आध्यात्मिक फिल्मों के माध्यम से युवा पीढ़ी को अपने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के प्रति जागरूक किया जा सकता है।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने फिल्म से जुड़े सभी कलाकारों, निर्देशक और निर्माण टीम की सराहना करते हुए उन्हें इस प्रयास के लिए बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह फिल्म समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करेगी और लोगों को आध्यात्मिकता की ओर प्रेरित करेगी।

    इस आयोजन को उत्तराखंड की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जो संत परंपरा के महान व्यक्तित्वों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में सहायक सिद्ध हो सकता है।

  • कुंभ 2027 का शंखनाद: हरिद्वार में बनेगा भव्य आयोजन का नया रिकॉर्ड, अखाड़ों ने कसी कमर

    कुंभ 2027 का शंखनाद: हरिद्वार में बनेगा भव्य आयोजन का नया रिकॉर्ड, अखाड़ों ने कसी कमर


    नई दिल्ली । धर्मनगरी हरिद्वार में होने वाले कुंभ 2027 को लेकर आध्यात्मिक जगत में हलचल तेज हो गई है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी ने स्पष्ट कर दिया है कि आगामी कुंभ न केवल दिव्य और भव्य होगा, बल्कि यह प्रयागराज के आयोजनों के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ने की तैयारी में है। सनातन समाज और संतों के बीच कुंभ को लेकर भारी उत्साह है और अभी से महीनों की गिनती शुरू हो चुकी है।

    सभी 13 अखाड़ों का एक सुर में समर्थन आयोजन की सफलता के लिए सबसे महत्वपूर्ण कड़ी अखाड़ों के बीच का आपसी समन्वय है। महंत रविंद्र पुरी ने बताया कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ हुई बैठक में सभी 13 अखाड़ों ने एक स्वर में कुंभ के मेगा प्लान का समर्थन किया है। किसी भी स्तर पर कोई विरोध नहीं है। निरंजनी अखाड़े में बैठकों का दौर शुरू हो चुका है, जहाँ आयोजन की बारीकियों पर चर्चा की जा रही है। इस बार का विशेष आकर्षण निरंजनी अखाड़े द्वारा बनाए गए जापानी महामंडलेश्वर होंगे, जो वैश्विक स्तर पर सनातन धर्म के विस्तार का प्रतीक बनकर उभरेंगे।

    प्रयागराज के फैसलों और सुरक्षा पर रुख प्रयागराज कुंभ के दौरान लिए गए कड़े फैसलों और वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों पर बात करते हुए महंत रविंद्र पुरी ने धर्म की शुद्धता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हाल के समय में ‘जूस जिहाद’ और ‘थूक जिहाद’ जैसी घटनाओं ने संतों के मन को विचलित किया है। सनातन धर्म में आहार की शुद्धता सर्वोपरि है, ताकि किसी का धर्म भ्रष्ट न हो।

    हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत में हम सबको एक समान दृष्टि से देखते हैं, लेकिन कुंभ की मर्यादा बनाए रखना हमारी प्राथमिकता है। 2027 के कुंभ के लिए कौन से नियम और कड़े फैसले लागू होंगे, इसका अंतिम निर्णय सभी 13 अखाड़े सामूहिक बैठक में चर्चा के बाद लेंगे। उचित और अनुचित का विचार कर ही अंतिम गाइडलाइन तैयार की जाएगी।

    भव्यता और प्रबंधन की नई मिसाल कुंभ 2027 को लेकर शासन और प्रशासन के साथ मिलकर एक ऐसी रूपरेखा तैयार की जा रही है जिससे श्रद्धालुओं को सुगम और सुरक्षित अनुभव मिल सके। हरिद्वार कुंभ को एक उत्सव के रूप में पेश करने की तैयारी है, जहाँ आस्था के साथ-साथ आधुनिक प्रबंधन का भी संगम देखने को मिलेगा।

  • बद्रीनाथ की बर्फीली घाटी में आध्यात्मिक अग्नि: -15°C तापमान और 3 फीट बर्फ के बीच 15 साधकों का अखंड तप

    बद्रीनाथ की बर्फीली घाटी में आध्यात्मिक अग्नि: -15°C तापमान और 3 फीट बर्फ के बीच 15 साधकों का अखंड तप


    नई दिल्ली । उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित बद्रीनाथ धाम इस समय सफेद बर्फ की मोटी चादर में लिपटा हुआ है। जहाँ कड़ाके की ठंड और बर्फीली हवाएं आम इंसान के हौसले पस्त कर देती हैं, वहीं भगवान बद्री विशाल की इस पावन भूमि पर आस्था का एक अद्भुत दृश्य देखने को मिल रहा है। समुद्र तल से करीब 11 हजार फीट की ऊंचाई पर, जहाँ तापमान शून्य से 15 डिग्री नीचे गिर चुका है और चारों ओर दो से तीन फीट बर्फ जमी है, वहां 15 साधु-संत लोक कल्याण और मोक्ष की प्राप्ति के लिए कठोर योग साधना में लीन हैं। शीतकाल के इस दौर में जब धाम के कपाट बंद होते हैं और आम जनजीवन पूरी तरह ठप हो जाता है, तब भी इन साधकों का संकल्प हिमालय की तरह अडिग बना हुआ है।

    इन तपस्वियों में स्वामी अरसानंद जी महाराज का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है, जो पिछले चार वर्षों से बिना रुके, बारहों महीने बद्रीनाथ धाम में ही निवास कर रहे हैं। भयंकर बर्फबारी और एकांत के बीच उनकी यह निरंतर साधना भक्ति की पराकाष्ठा को दर्शाती है। हालांकि, यह तपस्या केवल आध्यात्मिक इच्छाशक्ति पर ही निर्भर नहीं है, बल्कि इसके पीछे प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का एक व्यवस्थित तंत्र भी काम कर रहा है। ज्योतिर्मठ के उप जिलाधिकारी चन्द्रशेखर वशिष्ठ के अनुसार, शीतकाल में यहाँ रुकने की अनुमति केवल कड़े नियमों और गहन जांच के बाद ही दी जाती है। प्रशासन सुनिश्चित करता है कि इन साधकों के पास पर्याप्त राशन, ईंधन और जरूरी दवाइयां मौजूद हों। साथ ही, सुरक्षा के लिहाज से धाम में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती भी रहती है।

    कठोर प्राकृतिक परिस्थितियों को देखते हुए इन साधुओं का विशेष मेडिकल परीक्षण भी किया जाता है। डॉ. गौतम भारद्वाज बताते हैं कि हाई एल्टीट्यूड पर रहने के लिए हृदय, फेफड़ों और हड्डियों का मजबूत होना अनिवार्य है। डॉक्टरों की टीम साधकों के ऑक्सीजन लेवल और ब्लड प्रेशर की नियमित जांच करती है। मेडिकल सर्टिफिकेट मिलने के बाद ही उन्हें तहसील प्रशासन से शीतकालीन प्रवास की अनुमति प्राप्त होती है। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि साधक का शरीर इस जानलेवा ठंड को सहने के लिए सक्षम है या नहीं।

    धार्मिक दृष्टिकोण से बद्रीनाथ की इस भूमि का महत्व अनंत है। पूर्व धर्माधिकारी आचार्य भुवन उनियाल बताते हैं कि यह तपोभूमि चारों युगों से अस्तित्व में है। सतयुग में ‘मुक्ति प्रदा’ और त्रेता में ‘योग सिद्धिदा’ कहलाने वाला यह क्षेत्र आज भी योग और ध्यान की प्राचीन परंपराओं को संजोए हुए है। पंडित राकेश डिमरी राकुड़ी का मानना है कि कलियुग में हरि नाम और ध्यान ही ईश्वर प्राप्ति का मार्ग है, और ये साधु इसी मार्ग पर चलते हुए शून्य से नीचे के तापमान में भी मोक्ष के द्वार पर अडिग खड़े हैं। इन बर्फीली वादियों में गूंजता मौन और साधुओं का यह अखंड ध्यान न केवल श्रद्धा का विषय है, बल्कि यह मनुष्य की असीमित मानसिक शक्ति का प्रमाण भी है।

  • कोटद्वार में विवाद: मुस्लिम दुकानदार के पक्ष में खड़े दीपक पर दर्ज हुई FIR

    कोटद्वार में विवाद: मुस्लिम दुकानदार के पक्ष में खड़े दीपक पर दर्ज हुई FIR


    कोटद्वार । उत्तराखंड के कोटद्वार में मुस्लिम दुकानदार वकील अहमद के समर्थन में सामने आए जिम संचालक दीपक कुमार के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया है। दीपक के साथ उनके सहयोगी विजय रावत को भी इस FIR में शामिल किया गया है। यह कार्रवाई बजरंग दल के कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन के बाद की गई। दीपक कुमार का कहना है कि वे किसी भी हाल में नफरत के दबाव में नहीं आएंगे।

    पूरा मामला 26 जनवरी का है, जब बजरंग दल से जुड़े कुछ युवकों ने वकील अहमद की बाबा स्कूल ड्रेस नाम की दुकान पर आपत्ति जताई थी और नाम बदलने को लेकर दबाव बनाया गया। इस दौरान दीपक कुमार और कुछ स्थानीय लोगों ने दुकानदार का समर्थन किया। बाद में 31 जनवरी को देहरादून से आए कुछ लोगों ने इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन किया, जिसके बाद पुलिस ने FIR दर्ज की।

    सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में दीपक कुमार यह कहते दिखाई दिए कि दुकान पिछले 30 वर्षों से इसी नाम से चल रही है और इसे बदला नहीं जाएगा। इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी प्रतिक्रिया दी और दीपक को संविधान व इंसानियत के लिए खड़ा होने वाला व्यक्ति बताया।

    दीपक कुमार ने प्रशासन पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि विरोध के चलते उनका जिम बंद पड़ा है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है और अब भी उन्हें धमकियां मिल रही हैं। वहीं, कई स्थानीय लोग दीपक के समर्थन में सामने आए हैं। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने इलाके में शांति बनाए रखने के लिए फ्लैग मार्च भी किया है। हाल के महीनों में उत्तराखंड में इस तरह की सांप्रदायिक घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है।

  • अंकिता भंडारी मर्डर केस: VIP एंगल की CBI जांच शुरू, अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ दर्ज हुआ केस

    अंकिता भंडारी मर्डर केस: VIP एंगल की CBI जांच शुरू, अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ दर्ज हुआ केस


    नई दिल्ली । उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. मामले में पारदर्शी और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की संस्तुति पर सीबीआई ने जांच शुरू कर दी है. सीबीआई की स्पेशल क्राइम ब्रांच की शाखा दो ने अज्ञात वीआईपी के खिलाफ दिल्ली में मुकदमा दर्ज कर लिया है और सोमवार को जांच टीम उत्तराखंड पहुंच गई है. इसे राज्य सरकार की उस प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें वह न्याय के हर पहलू को सामने लाने के पक्ष में है.

    दरअसल, यह मामला एक बार फिर उस समय चर्चा में आया जब भाजपा से निष्कासित पूर्व विधायक सुरेश राठौर और उनकी कथित पत्नी उर्मिला सनावर के बीच वायरल ऑडियो और सोशल मीडिया पर जारी वीडियो सामने आए. उर्मिला सनावर ने फेसबुक लाइव के जरिए अंकिता हत्याकांड में एक वीआईपी की भूमिका का जिक्र किया था. इसके बाद प्रदेश में राजनीतिक माहौल गरमा गया और विपक्षी दलों व विभिन्न संगठनों की ओर से सीबीआई जांच की मांग तेज हो गई.

    सरकार खुलासे को लेकर गंभीर

    सरकार ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए किसी भी तरह की शंका या संदेह को दूर करने के लिए तुरंत कदम उठाया. नौ जनवरी को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले की सीबीआई जांच की संस्तुति कर दी थी. सरकार का स्पष्ट कहना है कि वह किसी को बचाने के बजाय सच्चाई सामने लाने में विश्वास रखती है और यदि मामले में कोई भी दोषी है, चाहे वह कितना ही प्रभावशाली क्यों न हो, उसे कानून के दायरे में लाया जाएगा.

    तीन आरोपियों को हो चुकी जेल

    गौरतलब है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में पहले ही न्यायिक प्रक्रिया के तहत बड़ी कार्रवाई हो चुकी है. वनंत्रा रिजॉर्ट की रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी की 18 सितंबर 2022 को हत्या कर दी गई थी और उसका शव चीला शक्ति नहर में फेंक दिया गया था. एक सप्ताह बाद शव बरामद हुआ और एसआईटी की विस्तृत जांच के बाद करीब 500 पेज की चार्जशीट दाखिल की गई. इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से 97 गवाह बनाए गए, जिनमें से 47 गवाहों की अदालत में गवाही कराई गई.

    मुख्य आरोपी पुलकित आर्य, जो वनंत्रा रिजॉर्ट का मालिक था, समेत तीनों आरोपियों को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई. पुलकित आर्य पर हत्या, साक्ष्य छुपाने, छेड़खानी और अनैतिक देह व्यापार अधिनियम के तहत गंभीर धाराओं में दोष सिद्ध हुआ. उसके साथ ही सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को भी उम्रकैद की सजा दी गई. यह फैसला अपने आप में इस बात का प्रमाण है कि राज्य सरकार और जांच एजेंसियों ने इस मामले में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती.

    वीआईपी को लेकर उठे थे सवाल

    हालांकि, घटना की रात रिजॉर्ट में पहुंचे कथित वीआईपी को लेकर सवाल लंबे समय से उठते रहे हैं. अंकिता ने घटना से पहले अपने मित्र पुष्पदीप को फोन कर बताया था कि पुलकित आर्य उस पर एक बड़े वीआईपी को अतिरिक्त सेवा देने का दबाव बना रहा है. यही वह बिंदु है, जिस पर अब सीबीआई की जांच केंद्रित होगी.सरकार का कहना है कि पहले चरण में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय से सजा दिलाई गई और अब जो नए तथ्य या आरोप सामने आए हैं, उन्हें भी नजरअंदाज नहीं किया जा रहा. सीबीआई जांच की संस्तुति इसी सोच को दर्शाती है कि सरकार मामले की तह तक जाना चाहती है.

    राज्य सरकार सीबीआई को देगी पूरा सहयोग

    राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि सीबीआई को हर तरह का सहयोग दिया जाएगा. जांच एजेंसी स्वतंत्र रूप से काम करेगी और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी. सरकार का मानना है कि सीबीआई जांच से न केवल वीआईपी को लेकर फैले संदेह दूर होंगे, बल्कि पीड़ित परिवार और प्रदेश की जनता का न्याय व्यवस्था पर भरोसा भी और मजबूत होगा. कुल मिलाकर, अंकिता भंडारी हत्याकांड में सीबीआई जांच का शुरू होना राज्य सरकार की पारदर्शिता और जवाबदेही की नीति को दर्शाता है, जहां न्याय सर्वोपरि है और किसी भी स्तर पर सच्चाई को दबने नहीं दिया जाएगा.

  • उत्तराखंड में सख्ती बढ़ी: गंगोत्री धाम में गैर-हिंदुओं की एंट्री बैन, बदरीनाथ-केदारनाथ पर भी प्रस्ताव की तैयारी

    उत्तराखंड में सख्ती बढ़ी: गंगोत्री धाम में गैर-हिंदुओं की एंट्री बैन, बदरीनाथ-केदारनाथ पर भी प्रस्ताव की तैयारी


    देहरादून। हरिद्वार के गंगा घाटों पर प्रतिबंध के बाद अब उत्तराखंड में धार्मिक स्थलों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक का कदम बढ़ता जा रहा है। गंगोत्री धाम में यह फैसला लागू कर दिया गया है और अब बदरीनाथ-केदारनाथ में भी इसी तरह का प्रस्ताव बोर्ड में लाया जाएगा।

    गंगोत्री धाम में गैर-हिंदुओं की एंट्री बैन
    श्री गंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल ने बताया कि सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया है।
    गंगोत्री धाम के साथ-साथ शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा में भी गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित रहेगा।

    बदरीनाथ-केदारनाथ में भी प्रस्ताव लाया जाएगा
    श्री बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि बोर्ड की अगली बैठक में बदरीनाथ और केदारनाथ में भी गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक का प्रस्ताव लाया जाएगा।
    इसके बाद इसे शासन और सरकार के समक्ष रखा जाएगा।

    हरिद्वार के बाद अब अन्य स्थलों पर मांग बढ़ी
    हरिद्वार में सरकार ने पहले ही गंगा घाटों, हर की पैड़ी और अन्य प्रमुख स्थलों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाई है।
    धार्मिक संस्थाओं की मांग है कि पूरे कुंभ क्षेत्र में भी इसी तरह का प्रतिबंध लागू किया जाए।

    बीकेटीसी अध्यक्ष का बयान
    हेमंत द्विवेदी ने इसे “ऐतिहासिक फैसला” बताया और कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा लिया गया यह कदम बदरी-केदार धाम में भी लागू होगा।
    उन्होंने कहा कि बोर्ड में प्रस्ताव पास होने के बाद सरकार को इसे लागू कराने की प्रक्रिया शुरू होगी।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का रुख
    मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि पवित्र धाम हमारी आस्था के धाम हैं और यहाँ पौराणिक मान्यता व संस्कृति के अनुसार ही निर्णय होंगे।
    उन्होंने कहा कि मंदिर समिति और तीर्थ पुरोहितों की मांग पर सरकार काम करेगी।
    हरिद्वार के गंगा घाटों के पुराने एक्ट का अध्ययन करके आगे निर्णय लिया जाएगा।


    सरकार का संकेत
    धामी ने कहा कि अगर बीकेटीसी से प्रस्ताव आता है, तो सरकार सभी पहलुओं को देखते हुए आगे निर्णय करेगी।
    सरकार सनातन धर्म के आस्था केंद्रों की पवित्रता बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाने को तैयार है।