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  • खड़गे की रैली से शुरू हुआ विवाद फिर भड़का! शुद्धिकरण यज्ञ पर धामी ने साफ की तस्वीर बोले जाति नहीं धार्मिक नारों का हुआ शुद्धिकरण

    खड़गे की रैली से शुरू हुआ विवाद फिर भड़का! शुद्धिकरण यज्ञ पर धामी ने साफ की तस्वीर बोले जाति नहीं धार्मिक नारों का हुआ शुद्धिकरण


    नई दिल्ली। उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद शुरू हुआ शुद्धिकरण यज्ञ का विवाद एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के हमले के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पलटवार करते हुए इस पूरे मामले को अलग नजरिए से सामने रखा है। धामी ने कांग्रेस के उस आरोप को खारिज किया है जिसमें शुद्धिकरण यज्ञ को जातीय भेदभाव से जोड़कर सवाल उठाए गए थे। मुख्यमंत्री का कहना है कि हल्द्वानी के रामलीला मैदान में किसी व्यक्ति या जाति के शुद्धिकरण के लिए यज्ञ नहीं कराया गया बल्कि रैली के दौरान लगाए गए कथित धार्मिक नारों से आहत भावनाओं के बाद हिंदू सामाजिक संगठनों की ओर से यह आयोजन किया गया था।

    मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि खड़गे के नाम पर जातीय शुद्धिकरण की बात करना ही गलत है। उनका तर्क है कि उत्तराखंड में बहुत कम लोग मल्लिकार्जुन खड़गे की जाति के बारे में जानते हैं। ऐसे में इस आयोजन को जातीय नजरिए से देखना उचित नहीं है। धामी ने स्पष्ट किया कि शुद्धिकरण किसी व्यक्ति का नहीं बल्कि उस स्थान का किया गया था जहां कांग्रेस की रैली आयोजित हुई थी। उनके मुताबिक रैली के दौरान एक धर्म विशेष से जुड़े कथित नारे लगाए गए थे जिनसे हिंदू समाज की भावनाएं आहत हुईं और इसी के बाद धार्मिक संगठनों ने यज्ञ का आयोजन किया।

    धामी ने यह भी स्पष्ट किया कि इस आयोजन में बीजेपी के पदाधिकारी या कार्यकर्ता शामिल नहीं थे। उनके अनुसार हिंदू सामाजिक संगठनों ने अपने स्तर पर रामलीला मैदान में यज्ञ कराया। मुख्यमंत्री की इस सफाई के बाद विवाद खत्म होने के बजाय राजनीतिक रूप से और तेज होता दिखाई दे रहा है। कांग्रेस इस घटना को सामाजिक समानता और जातीय भेदभाव के सवाल से जोड़ रही है जबकि बीजेपी इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मामला बताते हुए कांग्रेस पर राजनीति करने का आरोप लगा रही है।

    राहुल गांधी के हमले के बाद मुख्यमंत्री धामी ने कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस लगातार तुष्टिकरण की राजनीति करती रही है और उनकी सरकार के सख्त फैसलों से पार्टी असहज है। धामी ने समान नागरिक संहिता धर्मांतरण विरोधी कानून दंगा विरोधी कानून और जिहाद के खिलाफ सख्त कानून जैसे फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार उत्तराखंड में कानून व्यवस्था और सामाजिक हितों को प्राथमिकता दे रही है।

    हल्द्वानी का यह विवाद अब केवल एक यज्ञ या राजनीतिक रैली तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि इसके जरिए कांग्रेस और बीजेपी अपने अपने राजनीतिक मुद्दों को धार दे रहे हैं। कांग्रेस जहां इसे सामाजिक भेदभाव का प्रतीक बता रही है वहीं बीजेपी कथित धार्मिक नारों और आहत भावनाओं का मुद्दा उठा रही है। उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही ऐसे विवादों का राजनीतिक असर बढ़ना तय माना जा रहा है। आने वाले दिनों में दोनों दल इस मुद्दे को लेकर एक दूसरे पर और तीखे हमले कर सकते हैं।

  • पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी को राष्ट्र ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि, नेताओं ने बताया जनसेवा का प्रतीक

    पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी को राष्ट्र ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि, नेताओं ने बताया जनसेवा का प्रतीक

    नई दिल्ली । उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ राजनेता मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी के निधन से देशभर में शोक की लहर फैल गई है। राजनीतिक और सामाजिक जीवन में अपनी सादगी, अनुशासन और ईमानदार छवि के लिए पहचाने जाने वाले खंडूरी के जाने को सार्वजनिक जीवन की बड़ी क्षति माना जा रहा है। उनके निधन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु सहित देश के कई वरिष्ठ नेताओं ने गहरी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए उन्हें राष्ट्रसेवा और सुशासन का प्रतीक बताया।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि भुवन चंद्र खंडूरी ने अपने पूरे सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी, पारदर्शिता और विकास की राजनीति का आदर्श प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि सेना में उत्कृष्ट सेवाएं देने के बाद उन्होंने राजनीति में भी जनहित और सुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। राष्ट्रपति ने उनके योगदान को देश और विशेष रूप से उत्तराखंड के विकास के लिए अविस्मरणीय बताया।

    देश के कई वरिष्ठ नेताओं ने भी खंडूरी के निधन को अपूरणीय क्षति करार दिया। नेताओं ने कहा कि उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक और सामाजिक जीवन में अनुशासन और राष्ट्रहित को हमेशा सर्वोपरि रखा। उनकी साफ-सुथरी छवि और जनसेवा के प्रति समर्पण उन्हें अन्य नेताओं से अलग पहचान दिलाता था। उत्तराखंड में उनके कार्यकाल को सुशासन और विकास के लिए आज भी याद किया जाता है।

    भुवन चंद्र खंडूरी केवल एक राजनेता ही नहीं, बल्कि एक पूर्व सैनिक भी थे जिन्होंने तीन दशकों से अधिक समय तक भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दीं। सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और सार्वजनिक जीवन में भी उसी अनुशासन और ईमानदारी को बनाए रखा। उनके नेतृत्व में कई विकास कार्यों को गति मिली और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए गए।

    राजनीतिक जीवन में उनकी छवि एक सादगीपूर्ण और कर्मठ नेता की रही। उन्होंने हमेशा साफ राजनीति और जनहित को प्राथमिकता दी। यही वजह रही कि अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े लोग भी उनके व्यक्तित्व और कार्यशैली का सम्मान करते थे। उनके निधन के बाद देशभर से श्रद्धांजलियों का सिलसिला लगातार जारी है।

    उत्तराखंड की राजनीति में भुवन चंद्र खंडूरी का नाम एक ऐसे नेता के रूप में याद किया जाएगा जिन्होंने विकास, पारदर्शिता और जनकल्याण को अपनी राजनीति का आधार बनाया। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा और सार्वजनिक जीवन में उनकी सादगी तथा ईमानदारी हमेशा उदाहरण के रूप में याद की जाएगी।

  • दिल्ली में पुष्कर सिंह धामी और नितिन नवीन की अहम मुलाकात, संगठन और समसामयिक मुद्दों पर हुआ मंथन

    दिल्ली में पुष्कर सिंह धामी और नितिन नवीन की अहम मुलाकात, संगठन और समसामयिक मुद्दों पर हुआ मंथन


    नई दिल्ली
    में रविवार को हुई एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मुलाकात ने संगठन और नेतृत्व के बीच बेहतर तालमेल के संकेत दिए। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष Nitin Naveen से मुलाकात कर विभिन्न संगठनात्मक और समसामयिक विषयों पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान भाजपा उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य महेंद्र भट्ट भी मौजूद रहे।

    यह मुलाकात केवल औपचारिक शिष्टाचार तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें संगठन की मजबूती, राजनीतिक परिस्थितियों और विभिन्न समकालीन मुद्दों को लेकर विचार-विमर्श किया गया। राजनीतिक हलकों में इस बैठक को आगामी रणनीतियों और संगठनात्मक दिशा तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष को उत्तराखंड का शहद भेंट किया। यह उपहार राज्य की प्राकृतिक पहचान और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक माना गया। इस छोटे लेकिन विशेष भाव ने बैठक के माहौल को और आत्मीय बना दिया। राजनीतिक कार्यक्रमों के बीच इस तरह के सांस्कृतिक प्रतीक अक्सर राज्यों की पहचान और परंपराओं को सामने लाने का माध्यम बनते हैं।

    मुख्यमंत्री धामी ने मुलाकात के बाद कहा कि राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ हुई चर्चा बेहद सकारात्मक रही और उन्हें संगठन तथा शासन से जुड़े विषयों पर मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि राज्य के विकास और संगठन की मजबूती के लिए केंद्र और राज्य नेतृत्व के बीच बेहतर समन्वय लगातार जारी रहेगा।

    हाल के वर्षों में भाजपा लगातार अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने पर जोर देती रही है। ऐसे में राष्ट्रीय नेतृत्व और राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच होने वाली बैठकें राजनीतिक रूप से अहम मानी जाती हैं। उत्तराखंड जैसे रणनीतिक और संवेदनशील राज्य में विकास, पर्यटन, रोजगार और बुनियादी ढांचे को लेकर कई बड़े लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं, जिन पर सरकार आगे बढ़ रही है।

    इससे पहले मुख्यमंत्री धामी ने असम के राजनीतिक नेतृत्व को भी नई जिम्मेदारी मिलने पर शुभकामनाएं दी थीं। उन्होंने अपने संदेश में विकास, आत्मनिर्भरता और मजबूत प्रशासन की दिशा में आगे बढ़ने की उम्मीद जताई थी। उनके संदेश में राज्यों के बीच राजनीतिक सहयोग और राष्ट्रीय नेतृत्व के प्रति विश्वास की झलक दिखाई दी।

    इसके अलावा मातृ दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए मां के महत्व को भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी शक्ति बताया। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि मां जीवन का पहला संस्कार, पहली सीख और सबसे बड़ा प्रेरणा स्रोत होती हैं। उनके अनुसार समाज और परिवार की मजबूती में मातृत्व की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है।

    नई दिल्ली में हुई यह मुलाकात राजनीतिक दृष्टि से इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि आने वाले समय में विभिन्न राज्यों में संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय की भूमिका और अधिक बढ़ने वाली है। इस तरह की बैठकों को केवल राजनीतिक संवाद नहीं बल्कि रणनीतिक सहयोग के रूप में भी देखा जा रहा है, जो भविष्य की राजनीतिक दिशा तय करने में मददगार साबित हो सकती हैं।