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  • UP में गर्मी का कहर जारी, मानसून लेट होने से 25 जून तक राहत के आसार नहीं

    UP में गर्मी का कहर जारी, मानसून लेट होने से 25 जून तक राहत के आसार नहीं

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में मौसम का मिजाज फिलहाल पूरी तरह बदला हुआ है और लोगों को भीषण गर्मी व उमस का सामना करना पड़ रहा है। मानसून की एंट्री में देरी के कारण प्रदेश के अधिकांश जिलों में तापमान लगातार परेशान कर रहा है। मौसम विभाग ने आज भी कई इलाकों में हीटवेव का अलर्ट जारी किया है, जिससे स्थिति और अधिक कठिन बनी हुई है।

    भारतीय मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक प्रदेश में मौसम के तेवर इसी तरह बने रह सकते हैं। अनुमान है कि 24 जून तक अधिकतर जिलों में तेज गर्मी और उमस का असर जारी रहेगा। हालांकि कुछ क्षेत्रों में आंधी और हल्की बारिश की संभावना जरूर जताई गई है, लेकिन यह राहत सीमित ही रहेगी।

    पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 21 से 25 जून तक मौसम शुष्क रहने की संभावना है, जिससे वहां गर्मी और अधिक परेशान कर सकती है। वहीं 26 जून के आसपास कुछ इलाकों में हल्की बारिश होने के संकेत हैं, लेकिन यह व्यापक राहत देने में सक्षम नहीं होगी। दूसरी ओर पूर्वी यूपी में भी 24 जून तक मौसम गर्म और उमसभरा बना रह सकता है।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस वर्ष मानसून की रफ्तार सामान्य से धीमी है, जिसके कारण इसकी एंट्री एक से दो सप्ताह तक लेट हो सकती है। उत्तर पश्चिम भारत में शुष्क हवाओं का प्रभाव बना हुआ है, जो बारिश के सिस्टम को कमजोर कर रहा है। हालांकि पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से स्थिति में कुछ बदलाव की उम्मीद है।

    25 जून के बाद पूर्वी उत्तर प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियां शुरू हो सकती हैं, लेकिन पूरे प्रदेश में अच्छी बारिश के लिए अभी लगभग दो सप्ताह का और इंतजार करना पड़ सकता है। राजधानी लखनऊ समेत अन्य जिलों में भी गर्मी से राहत मिलने में समय लगने की संभावना है।

    फिलहाल लोगों को सलाह दी जा रही है कि तेज धूप और हीटवेव से बचाव के उपाय अपनाएं और पर्याप्त पानी पीकर खुद को हाइड्रेट रखें, क्योंकि आने वाले दिनों में गर्मी का असर और बढ़ सकता है।

  • खनन माफिया पर कार्रवाई या सिस्टम की चूक, कुशीनगर में अफसर सस्पेंशन से गरमाई राजनीति और प्रशासनिक बहस

    खनन माफिया पर कार्रवाई या सिस्टम की चूक, कुशीनगर में अफसर सस्पेंशन से गरमाई राजनीति और प्रशासनिक बहस


    कुशीनगर । कुशीनगर जिले में अवैध खनन के खिलाफ चलाए जा रहे सख्त अभियान के बीच एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र और कानून व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस अभियान को सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का मजबूत उदाहरण माना जा रहा था उसी अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने वाले अधिकारी अभिषेक सिंह के निलंबन ने पूरे मामले को अचानक सुर्खियों में ला दिया है

    और इस कार्रवाई को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार पिछले कई दिनों से जिले में अवैध खनन के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान चलाया जा रहा था जिसमें नदी घाटों से लेकर खनन के संभावित और संदिग्ध क्षेत्रों तक लगातार छापेमारी की जा रही थी।

    इस दौरान बिना वैध परमिट चल रहे वाहनों और ओवरलोड ट्रकों पर भी सख्त कार्रवाई की गई थी जिससे अवैध खनन से जुड़े नेटवर्क में हड़कंप की स्थिति बन गई थी। खासकर बिहार सीमा से आने वाले ट्रकों पर निगरानी बढ़ाए जाने के बाद इस अवैध कारोबार पर प्रशासन का दबाव काफी बढ़ गया था और कई स्थानों पर जुर्माना जब्ती और कानूनी कार्रवाई भी की गई थी।

    इन कार्रवाइयों के चलते यह संकेत मिल रहा था कि प्रशासन इस बार अवैध खनन के खिलाफ पूरी सख्ती के मूड में है। लेकिन इसी बीच अचानक अधिकारी अभिषेक सिंह के निलंबन की कार्रवाई ने पूरे अभियान की दिशा और उसकी मंशा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि जब अवैध खनन पर कार्रवाई का असर साफ तौर पर दिखाई देने लगा था

    और माफिया नेटवर्क पर दबाव बढ़ रहा था तो ऐसे समय में कार्रवाई करने वाले अधिकारी को ही क्यों हटाया गया। जनपद में यह भी माना जा रहा है कि अवैध खनन का यह पूरा कारोबार केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है बल्कि इसके पीछे एक मजबूत आर्थिक तंत्र और प्रभावशाली संरक्षण का नेटवर्क सक्रिय रहता है जो लंबे समय से इस अवैध गतिविधि को संचालित और सुरक्षित करता आया है।

    ऐसे में जब किसी अधिकारी की सख्ती से करोड़ों के इस अवैध कारोबार पर सीधा असर पड़ता है तो कई बड़े हित प्रभावित होना स्वाभाविक माना जाता है। फिलहाल स्थिति यह है कि जहां एक ओर अवैध खनन से जुड़े तत्वों में राहत की भावना देखी जा रही है वहीं दूसरी ओर अभियान का नेतृत्व करने वाला अधिकारी खुद प्रशासनिक कार्रवाई के घेरे में आ गया है।

    इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस प्रशासन और खनन विभाग की कार्यशैली पर भी गंभीर बहस छेड़ दी है और यह सवाल उठने लगा है कि क्या अवैध कारोबार पर सख्ती दिखाने की कोई कीमत भी चुकानी पड़ती है।

    अब पूरे मामले में शासन स्तर पर अगली कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं क्योंकि यह मामला केवल एक अधिकारी के निलंबन का नहीं बल्कि अवैध खनन के खिलाफ चल रही पूरी मुहिम की विश्वसनीयता और उसके भविष्य से जुड़ा हुआ माना जा रहा है।

  • महोबा थाने में शिकायत लेकर पहुंचे युवक पर दरोगा का कहर, 1 मिनट में 5 थप्पड़ और पैर से हमला; वीडियो वायरल के बाद लाइन हाजिर

    महोबा थाने में शिकायत लेकर पहुंचे युवक पर दरोगा का कहर, 1 मिनट में 5 थप्पड़ और पैर से हमला; वीडियो वायरल के बाद लाइन हाजिर



    नई दिल्ली। महोबा जिले के महोबकंठ थाने में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां मारपीट और लूट की शिकायत लेकर पहुंचे युवक को दरोगा द्वारा ही कथित तौर पर पीट दिया गया। पीड़ित युवक का आरोप है कि उसे न्याय दिलाने के बजाय दरोगा ने गांव ले जाकर दूसरे पक्ष के सामने ही 1 मिनट से ज्यादा समय तक थप्पड़ मारे और पैर से भी मारा, साथ ही गाली-गलौज की गई।

    यह पूरा मामला वीडियो में कैद होकर सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। मामले का संज्ञान लेते हुए एसपी शशांक सिंह ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित दरोगा को लाइन हाजिर कर दिया है।

    हालांकि पुलिस जांच में युवक की मूल शिकायत को झूठा बताया गया है, लेकिन अधिकारी ने यह भी माना कि दरोगा का व्यवहार अनुशासन के खिलाफ था और इस तरह की कार्रवाई किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है।

    पीड़ित युवक संदीप ने बताया कि वह 10 मई की शाम हरपालपुर (मध्य प्रदेश) से घर लौट रहा था, तभी रास्ते में गांव के ही कुछ लोगों ने उसे रोककर मारपीट और लूटपाट की थी। न्याय की उम्मीद में वह थाने पहुंचा था, लेकिन वहां उसे उल्टा मार का सामना करना पड़ा।