Tag: Vaccination

  • जनगणना 2027 में जाति और कोविड टीकाकरण की जानकारी भी होगी दर्ज, डिजिटल प्रक्रिया के तहत जुटाए जाएंगे 40 सवालों के जवाब

    जनगणना 2027 में जाति और कोविड टीकाकरण की जानकारी भी होगी दर्ज, डिजिटल प्रक्रिया के तहत जुटाए जाएंगे 40 सवालों के जवाब

    नई दिल्ली । देश में जनगणना 2027 की प्रक्रिया का दूसरा चरण 17 अगस्त से शुरू होने जा रहा है। इस चरण में पहली बार आजादी के बाद देशव्यापी स्तर पर जातिगत आंकड़े जुटाए जाएंगे। केंद्र सरकार ने जनगणना के लिए पूछे जाने वाले 40 सवालों की सूची अधिसूचित कर दी है। नागरिकों से उनकी सामाजिक, जनसांख्यिकीय और आर्थिक स्थिति से जुड़ी विभिन्न जानकारियां दर्ज की जाएंगी।

    जनगणना 2027 देश की 16वीं जनगणना होगी, जबकि स्वतंत्रता के बाद यह आठवीं जनगणना के रूप में आयोजित की जा रही है। इस बार की जनगणना कई मायनों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इसमें जाति से संबंधित जानकारी भी आधिकारिक तौर पर दर्ज की जाएगी। इससे देश में विभिन्न सामाजिक समूहों की जनसंख्या से जुड़े आंकड़े सामने आने की संभावना है।

    निर्धारित 40 सवालों में नागरिकों से जाति, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से संबंधित जानकारी मांगी जाएगी। इसके अलावा कोविड-19 टीकाकरण से जुड़ी जानकारी भी दर्ज की जाएगी। जनगणना के दौरान प्रत्येक परिवार और व्यक्ति से निर्धारित प्रश्नों के आधार पर जानकारी एकत्र की जाएगी।

    जनगणना दो चरणों में पूरी की जा रही है। पहले चरण में मकानों और आवास से संबंधित विवरण जुटाने की प्रक्रिया रखी गई है। दूसरे चरण में प्रत्येक नागरिक की जनसांख्यिकीय और सामाजिक-आर्थिक जानकारी दर्ज की जाएगी। इसी दूसरे चरण में जातिगत आंकड़ों को भी शामिल किया गया है।

    इस बार जनगणना को डिजिटल तरीके से संचालित किया जा रहा है। मोबाइल उपकरणों के माध्यम से आंकड़े दर्ज करने के साथ नागरिकों को स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध कराने की सुविधा भी दी गई है। इससे कागजी प्रक्रिया पर निर्भरता कम करने और आंकड़ों को डिजिटल रूप में संग्रहित करने में मदद मिलेगी।

    पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों के लिए जनगणना का कार्यक्रम अलग रखा गया है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख तथा हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फीले एवं असमान क्षेत्रों में जनगणना का दूसरा चरण 1 सितंबर से 30 सितंबर तक चलेगा। इन क्षेत्रों में मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए समयसीमा अलग निर्धारित की गई है।

    इन क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को 17 अगस्त से 31 अगस्त तक स्वयं ऑनलाइन जानकारी दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध रहेगी। वहीं देश के अन्य हिस्सों में जनसंख्या की गणना फरवरी 2027 में की जाएगी। इस तरह अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप जनगणना का कार्यक्रम निर्धारित किया गया है।

    जनगणना 2027 की प्रक्रिया में जातिगत जानकारी शामिल किए जाने को सामाजिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे सरकार के पास विभिन्न सामाजिक वर्गों की जनसंख्या से संबंधित अधिक विस्तृत आधिकारिक आंकड़े उपलब्ध हो सकेंगे। इन आंकड़ों का उपयोग भविष्य में नीतियों और योजनाओं के निर्माण में किया जा सकता है।

    यह जनगणना मूल रूप से वर्ष 2021 में प्रस्तावित थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसकी प्रक्रिया निर्धारित समय पर शुरू नहीं हो सकी। अब कई वर्षों की देरी के बाद जनगणना की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। डिजिटल व्यवस्था, ऑनलाइन स्व-पंजीकरण और पहली बार जातिगत आंकड़ों का समावेश इस जनगणना को पिछली जनगणनाओं से अलग बनाता है।

  • डेंगू से बचाव की दिशा में भारत की बड़ी उपलब्धि, DCGI ने QDENGA वैक्सीन को दी स्वीकृति, दो डोज से मिलेगी सुरक्षा

    डेंगू से बचाव की दिशा में भारत की बड़ी उपलब्धि, DCGI ने QDENGA वैक्सीन को दी स्वीकृति, दो डोज से मिलेगी सुरक्षा


    नई दिल्ली । 
    भारत में डेंगू की रोकथाम की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। भारतीय औषधि महानियंत्रक (DCGI) ने जापानी दवा कंपनी टाकेडा द्वारा विकसित डेंगू वैक्सीन QDENGA को देश में उपयोग की मंजूरी दे दी है। यह भारत की पहली स्वीकृत डेंगू वैक्सीन है, जिसे 4 से 60 वर्ष की आयु के लोगों के लिए अनुमोदित किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम देश में डेंगू संक्रमण की रोकथाम और गंभीर मामलों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    हर वर्ष मानसून के दौरान देश के विभिन्न राज्यों में डेंगू के मामलों में तेज वृद्धि देखने को मिलती है। हजारों लोग इस मच्छरजनित बीमारी से प्रभावित होते हैं, जबकि गंभीर संक्रमण के कारण कई मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ता है। ऐसे में प्रभावी वैक्सीन की उपलब्धता को सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

    QDENGA की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे लगवाने से पहले यह जांच कराने की आवश्यकता नहीं होगी कि संबंधित व्यक्ति को पहले कभी डेंगू हुआ है या नहीं। यह वैक्सीन उन लोगों को भी दी जा सकती है जिन्हें पहले डेंगू हो चुका है और उन्हें भी जो कभी इस संक्रमण से प्रभावित नहीं हुए। यही विशेषता इसे डेंगू नियंत्रण के लिए अधिक उपयोगी बनाती है।

    स्वीकृत दिशा-निर्देशों के अनुसार यह वैक्सीन 4 से 60 वर्ष तक की आयु के लोगों को दी जाएगी। टीकाकरण के लिए कुल दो डोज निर्धारित की गई हैं, जिनके बीच लगभग तीन महीने का अंतर रखा जाएगा। यह टीका त्वचा के नीचे लगाया जाएगा और दोनों डोज समय पर लेने पर बेहतर प्रतिरक्षा विकसित होने की संभावना बताई गई है।

    भारत उन देशों में शामिल है जहां डेंगू का संक्रमण लंबे समय से सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। पिछले दो दशकों में डेंगू के मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2025 में देशभर में एक लाख से अधिक मामलों की पुष्टि हुई थी, हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है क्योंकि सभी मामलों का आधिकारिक पंजीकरण नहीं हो पाता।

    डेंगू वायरस के चार अलग-अलग सीरोटाइप होते हैं और एक प्रकार से संक्रमित होने के बाद भी व्यक्ति दूसरे प्रकार के वायरस की चपेट में आ सकता है। QDENGA को इस तरह विकसित किया गया है कि यह डेंगू वायरस के सभी प्रमुख प्रकारों के विरुद्ध प्रतिरक्षा विकसित करने में सहायता करे। इसी कारण इसे व्यापक सुरक्षा प्रदान करने वाली वैक्सीन माना जा रहा है।

    कंपनी के अनुसार इस वैक्सीन पर बड़े स्तर पर वैज्ञानिक अध्ययन और क्लीनिकल परीक्षण किए गए हैं। हजारों स्वयंसेवकों पर किए गए परीक्षणों में दूसरी डोज के लगभग एक वर्ष बाद डेंगू संक्रमण से बचाव में इसकी प्रभावशीलता 80 प्रतिशत से अधिक दर्ज की गई। वहीं गंभीर संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती होने के जोखिम को भी उल्लेखनीय रूप से कम करने के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। लंबे समय तक किए गए अध्ययन में भी इसकी प्रभावशीलता बरकरार रहने के संकेत मिले हैं।

    विश्व स्वास्थ्य संगठन पहले ही डेंगू प्रभावित देशों के लिए इस वैक्सीन की उपयोगिता को स्वीकार कर चुका है। इसके अलावा दुनिया के कई देशों में इसका उपयोग शुरू हो चुका है और कुछ देशों ने इसे अपने सार्वजनिक टीकाकरण कार्यक्रम का हिस्सा भी बनाया है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि वैक्सीन डेंगू से बचाव का प्रभावी माध्यम है, लेकिन इसके साथ मच्छरों की रोकथाम और व्यक्तिगत सावधानी भी जरूरी है। घरों और आसपास पानी जमा न होने देना, मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाना तथा डेंगू के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना संक्रमण के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

  • सुप्रीम कोर्ट ने कोविड वैक्सीन साइड इफेक्ट्स के लिए मुआवजा देने का दिया आदेश: नो-फॉल्ट पॉलिसी लागू, एक्सपर्ट पैनल की जरूरत नहीं

    सुप्रीम कोर्ट ने कोविड वैक्सीन साइड इफेक्ट्स के लिए मुआवजा देने का दिया आदेश: नो-फॉल्ट पॉलिसी लागू, एक्सपर्ट पैनल की जरूरत नहीं

    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कोविड वैक्सीनेशन से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई के बाद सरकार को निर्देश दिया कि वैक्सीनेशन से किसी भी व्यक्ति को हुए नुकसान के लिए मुआवजा दिया जाए। इसके लिए सरकार नो-फॉल्ट कम्पनसेशन पॉलिसी बनाए।

    नो-फॉल्ट कम्पनसेशन पॉलिसी का मतलब
    इस नीति के तहत अगर किसी व्यक्ति को वैक्सीन या दवा से नुकसान होता है, तो उसे मुआवजा मिल सकता है, चाहे इसमें किसी की गलती साबित हो या न हो। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि साइड इफेक्ट्स की मॉनिटरिंग के लिए मौजूदा सिस्टम ही जारी रहेगा, अलग से एक्सपर्ट पैनल बनाने की जरूरत नहीं है।

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश की मुख्य बातें
    साइड इफेक्ट्स के आंकड़े सार्वजनिक होंगे – वैक्सीन से जुड़े मामलों का डेटा समय-समय पर पब्लिक डोमेन में उपलब्ध कराया जाएगा।

    सरकार की गलती साबित नहीं होती – मुआवजा नीति लागू होने का मतलब यह नहीं कि सरकार या कोई अन्य अथॉरिटी अपनी गलती मान रही है।

    याचिकाएं और पृष्ठभूमि
    यह आदेश रचना गंगू और वेणुगोपालन गोविंदन द्वारा 2021 में दायर याचिकाओं पर आया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उनकी बेटियों की मौत कोविड वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स के कारण हुई थी।

    करुण्या गोविंदन मामला: जुलाई 2021 में कोवीशील्ड वैक्सीन लगने के महीने भर बाद करुण्या की मौत हुई। राष्ट्रीय समिति ने मामले की जांच की, लेकिन पर्याप्त सबूत न मिलने के कारण वैक्सीन को सीधे मौत का कारण नहीं माना गया।

    8 साल की रितिका मामला: मई 2021 में पहली डोज के 7 दिन बाद तेज बुखार और ब्रेन ब्लड क्लोटिंग के कारण मौत। परिवार ने RTI के जरिए पता लगाया कि मौत का कारण थ्रोम्बोसिस विथ थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम था।

    ICMR और NCDC की स्टडी
    जुलाई 2025 में ICMR और NCDC ने स्टडी जारी की, जिसमें बताया गया कि 18-45 साल के लोगों में अचानक मौतों का कोविड वैक्सीन से कोई सीधा संबंध नहीं है। स्टडी में यह भी कहा गया कि गंभीर साइड इफेक्ट के मामले बहुत दुर्लभ (rare) हैं।

    अन्य संभावित कारणों में जेनेटिक्स, लाइफस्टाइल, पहले से मौजूद बीमारियां और कोविड के बाद के कॉम्प्लिकेशन शामिल हैं।

    भारत में विकसित कोविड वैक्सीन
    कोवैक्सिन – भारत बायोटेक ने ICMR के सहयोग से विकसित की।

    कोवीशील्ड – सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने ब्रिटिश कंपनी एस्ट्राजेनेका के फॉर्मूले से बनाई।

    सुप्रीम कोर्ट का संदेश
    सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि वैक्सीनेशन सुरक्षित और जरूरी है, और सरकार की जिम्मेदारी है कि साइड इफेक्ट्स के लिए उचित मुआवजा नीति लागू करे। जनता को इससे घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन नो-फॉल्ट नीति से प्रभावित लोगों को राहत मिलेगी।

  • क्या सेक्सुअली एक्टिव लोगों के लिए HPV Vaccine सुरक्षित है? जानें हर महिला के लिए जरूरी बातें

    क्या सेक्सुअली एक्टिव लोगों के लिए HPV Vaccine सुरक्षित है? जानें हर महिला के लिए जरूरी बातें


    नई दिल्ली । HPV ह्यूमन पैपिलोमावायरस एक वायरस है, जो बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर में छुपकर रहता है और बाद में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। यह वायरस दुनियाभर में आम है, और लगभग सभी सेक्शुअली एक्टिव लोग जीवन में कभी न कभी इस वायरस के संपर्क में आते हैं। हालांकि, सही जानकारी और समय पर HPV वैक्सीनेशन से इस वायरस से बचाव किया जा सकता है।

    HPV क्या है और यह कितना आम है

    HPV 200 से अधिक वायरसों का समूह है, जिसमें कुछ वायरस सामान्य होते हैं, जबकि कुछ हाई रिस्क खतरनाक होते हैं। डॉक्टरों के अनुसार, लगभग हर सेक्शुअली एक्टिव व्यक्ति जीवन में कभी न कभी HPV से संक्रमित हो सकता है।

    HPV कैसे फैलता है और यह क्यों खतरनाक है

    HPV मुख्य रूप से स्किन-टू-स्किन सेक्शुअल कॉन्टैक्ट से फैलता है। इसमें वेजाइनल, एनल और ओरल सेक्स शामिल होते हैं। यह वायरस अक्सर बिना लक्षण के शरीर में रहता है और कैंसर जैसे गंभीर रोगों का कारण बन सकता है। विशेष रूप से हाई-रिस्क HPV सर्वाइकल, एनल, गले ओरोफैरिंजियल और पेनाइल कैंसर जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है। HPV से कौन-कौन सी बीमारियां होती हैं HPV का संबंध कई प्रकार के कैंसर से है, जैसे:

    सर्वाइकल गर्भाशय के गले का कैंसरएनल कैंसर

    गले का कैंसर ओरोफैरिंजियल कैंसर, पेनाइल लिंग का कैंसर, वल्वर महिलाओं के प्रजनन अंग का कैंसर, वेजाइनल कैंस इसके अलावा, HPV जेनिटल वॉर्ट्स यौनांगों पर मस्से और कुछ दुर्लभ श्वसन संबंधी बीमारियों का कारण भी बन सकता है।

    HPV वैक्सीन लगवाने की सही उम्र क्या है

    विशेषज्ञों के अनुसार, HPV वैक्सीनेशन की सही उम्र 9 से 12 साल के बीच है, क्योंकि इस उम्र में टीका वायरस के संपर्क में आने से पहले लगाया जाता है और सबसे प्रभावी होता है। HPV वैक्सीनेशन के लिए कितनी डोज जरूरी हैं 9 से 14 साल की उम्र में दो डोज काफी होती हैं। 15 साल या उससे अधिक उम्र के लोगों को तीन डोज की सलाह दी जाती है।

    क्या सेक्शुअली एक्टिव वयस्कों को भी वैक्सीनेशन से फायदा होता है

    हां, सेक्शुअली एक्टिव वयस्कों को भी HPV वैक्सीन से फायदा हो सकता है। हालांकि, यह वैक्सीन पहले से मौजूद संक्रमण का इलाज नहीं करती, लेकिन यह भविष्य में होने वाले संक्रमणों से सुरक्षा प्रदान करती है। ऐसे वयस्क जिन्हें HPV के सभी खतरनाक प्रकारों से संपर्क नहीं हुआ, उनके लिए यह वैक्सीनेशन बेहद फायदेमंद हो सकती है।

    क्या HPV वैक्सीन सुरक्षित है

    विशेषज्ञों के अनुसार, HPV वैक्सीनेशन पूरी तरह सुरक्षित है। इसके साइड इफेक्ट्स आमतौर पर हल्के होते हैं, जैसे कि इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द या हल्का बुखार। गंभीर एलर्जी प्रतिक्रियाएं बहुत कम होती हैं, लेकिन यदि आप गर्भवती हैं या किसी अन्य गंभीर स्वास्थ्य स्थिति से गुजर रहे हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

    क्या सिर्फ अच्छी हाइजीन से HPV से बचा जा सकता है

    नहीं, HPV मुख्य रूप से स्किन-टू-स्किन सेक्शुअल कॉन्टैक्ट से फैलता है, और इसे केवल अच्छी हाइजीन से नहीं रोका जा सकता। हालांकि, कंडोम के इस्तेमाल से जोखिम कम हो सकता है, लेकिन यह 100% सुरक्षा नहीं प्रदान करता।

    अगर बचपन में वैक्सीन नहीं लगवाई हो तो क्या करें

    अगर किसी ने बचपन में HPV वैक्सीन नहीं लगवाई है, तो 26 साल तक कैच-अप वैक्सीनेशन की सलाह दी जाती है। कुछ मामलों में डॉक्टर के परामर्श से 45 साल तक भी वैक्सीनेशन कराया जा सकता है। क्या HPV वैक्सीन से फर्टिलिटी पर असर पड़ता है HPV वैक्सीन का फर्टिलिटी या हार्मोनल स्तर पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। इसके विपरीत, यह वैक्सीनेशन कैंसर और प्रजनन स्वास्थ्य को सुरक्षित रखती है, जिससे भविष्य में प्रजनन क्षमता पर सकारात्मक असर पड़ता है। HPV वैक्सीन HPV वायरस से सुरक्षा का सबसे प्रभावी तरीका है। समय पर टीकाकरण और जागरूकता, कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव की सबसे मजबूत कड़ी है। यदि आपने पहले वैक्सीनेशन नहीं कराया है, तो डॉक्टर से संपर्क कर इसे प्राप्त करें, क्योंकि यह भविष्य में आपकी सेहत और जीवन को सुरक्षित रखने में मदद करेगा।