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  • माता वैष्णो देवी से जुड़े रहस्यों की पूरी कथा, जानें पंडित श्रीधर, बाणगंगा और भैरवनाथ से जुड़ी मान्यताएं

    माता वैष्णो देवी से जुड़े रहस्यों की पूरी कथा, जानें पंडित श्रीधर, बाणगंगा और भैरवनाथ से जुड़ी मान्यताएं

    नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के कटरा स्थित त्रिकुटा पर्वत पर माता वैष्णो देवी का पवित्र धाम करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यहां एक पवित्र गुफा में तीन प्राकृतिक पिंडियों के रूप में देवी की पूजा की जाती है। मान्यता है कि ये तीनों पिंडियां महाकाली, महासरस्वती और महालक्ष्मी का स्वरूप हैं और इन्हीं तीन शक्तियों के संयुक्त रूप को माता वैष्णो देवी कहा जाता है। इस धाम से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं, जिनमें पंडित श्रीधर, वैष्णवी और भैरवनाथ से जुड़ी कथा प्रमुख मानी जाती है।

    मान्यता के अनुसार, पंडित श्रीधर कटरा के पास हंसली गांव में रहते थे और धार्मिक तथा सरल स्वभाव के व्यक्ति थे। उनकी कोई संतान नहीं थी, जिससे वह अक्सर दुखी रहते थे। एक बार उन्होंने गांव के लोगों के लिए भंडारे का आयोजन करने का निर्णय लिया। भंडारे से एक रात पहले उन्हें चिंता थी कि उपलब्ध सामग्री से इतने लोगों का भोजन कैसे कराया जाएगा। अगले दिन जब वह पूजा कर रहे थे और गांव के लोग पहुंचने लगे, तब एक तेजस्वी कन्या वहां आई। उसका नाम वैष्णवी बताया जाता है। उसने भंडारे की पूरी व्यवस्था संभाली और सभी लोगों को भोजन कराया। भंडारा पूरा होने के बाद वह अचानक वहां से गायब हो गई।

    कहा जाता है कि कुछ समय बाद वही कन्या पंडित श्रीधर के सपने में आई और उन्हें एक पवित्र गुफा के बारे में बताया। मान्यता है कि उसने पंडित श्रीधर को संतान प्राप्ति का आशीर्वाद भी दिया। इसके बाद श्रीधर समझ गए कि भंडारे में आई कन्या साधारण बालिका नहीं, बल्कि स्वयं माता वैष्णो देवी थीं। उन्होंने उस पवित्र गुफा की खोज की और इसी के बाद इस स्थान पर माता की भक्ति और दर्शन की परंपरा आगे बढ़ती गई। इसी कथा में भैरवनाथ का प्रसंग भी आता है। मान्यता है कि भंडारे में पहुंचे भैरवनाथ ने वैष्णवी से मांसाहारी भोजन की मांग की, जबकि वहां केवल सात्विक और शाकाहारी भोजन उपलब्ध था। इसके बाद उन्होंने वैष्णवी का पीछा करना शुरू कर दिया।

    मान्यता के अनुसार, वैष्णवी त्रिकुटा पर्वत की ओर चली गईं और भैरवनाथ भी उनके पीछे पहुंचे। यात्रा के दौरान हनुमान जी भी माता की रक्षा के लिए उनके साथ थे। जब हनुमान जी को प्यास लगी तो माता ने धनुष से धरती पर बाण चलाया, जिससे जलधारा निकली। कहा जाता है कि माता ने इसी जलधारा में अपने केश धोए थे और इसी कारण इसे बाणगंगा कहा गया। इसके बाद माता एक गुफा में चली गईं और वहां तपस्या करने लगीं। मान्यता है कि हनुमान जी गुफा के बाहर उनकी रक्षा करते रहे। भैरवनाथ वहां भी पहुंच गए। एक साधु ने उन्हें बताया कि जिस कन्या का वह पीछा कर रहे हैं, वह देवी का स्वरूप हैं, लेकिन उन्होंने बात नहीं मानी। माता गुफा से दूसरे रास्ते से बाहर निकलीं और इस स्थान को अर्धकुंवारी या अर्धकुमारी कहा जाता है।

    इसके बाद मान्यता है कि माता वैष्णो देवी ने अपना दिव्य स्वरूप धारण कर भैरवनाथ को लौट जाने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने पीछा जारी रखा। इस दौरान हनुमान जी और भैरवनाथ के बीच युद्ध हुआ। जब युद्ध लंबा खिंचने लगा तो माता ने स्वयं बाहर आकर भैरवनाथ का वध कर दिया। कहा जाता है कि भैरवनाथ का सिर जिस स्थान पर गिरा, वह आज भैरव घाटी के नाम से जाना जाता है और वहीं भैरवनाथ का मंदिर भी स्थित है। भैरवनाथ ने अपनी गलती स्वीकार कर माता से क्षमा मांगी। मान्यता है कि माता ने उन्हें वरदान दिया कि उनके दर्शन के बिना माता की यात्रा पूरी नहीं मानी जाएगी। इसी वजह से श्रद्धालु माता के भवन में दर्शन के बाद भैरवनाथ मंदिर भी जाते हैं। इस तरह बाणगंगा, अर्धकुंवारी, भवन और भैरव घाटी माता वैष्णो देवी की यात्रा से जुड़े प्रमुख पवित्र पड़ाव माने जाते हैं।

  • कटरा: मां वैष्णो देवी की नगरी, जहां श्रद्धा के साथ खानपान के नियम भी निभाए जाते हैं

    कटरा: मां वैष्णो देवी की नगरी, जहां श्रद्धा के साथ खानपान के नियम भी निभाए जाते हैं

    नई दिल्ली। भारत में खाने की बात हो और प्याज-लहसुन का जिक्र न आए, ऐसा शायद ही कभी होता हो। हर घर की रसोई से लेकर बड़े-बड़े होटलों तक इन दोनों का इस्तेमाल आम माना जाता है। लेकिन जम्मू-कश्मीर का कटरा एक ऐसा शहर है, जहां पहुंचते ही खान-पान की पूरी तस्वीर बदल जाती है। यहां न बाजारों में प्याज-लहसुन बिकता दिखाई देता है, न ढाबों और होटलों के खाने में इसका इस्तेमाल होता है और न ही लोग इसे अपने घरों में रखना पसंद करते हैं। यही वजह है कि कटरा को देश के सबसे अनोखे धार्मिक शहरों में गिना जाता है।

    कटरा माता वैष्णो देवी मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार माना जाता है। हर साल लाखों श्रद्धालु यहां से माता के दरबार के लिए यात्रा शुरू करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यात्रा शुरू करने से पहले शरीर और मन की पवित्रता बनाए रखना जरूरी माना जाता है। इसी वजह से पूरे शहर में सात्विक भोजन की परंपरा विकसित हुई। स्थानीय लोगों का मानना है कि प्याज और लहसुन तामसिक भोजन की श्रेणी में आते हैं, जो मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं। यही कारण है कि वर्षों से यहां इनका इस्तेमाल नहीं किया जाता।

    सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह परंपरा किसी सरकारी आदेश या कानूनी प्रतिबंध के कारण नहीं चल रही, बल्कि लोगों की आस्था और आपसी सम्मान से कायम है। यहां रहने वाले दूसरे धर्मों के लोग, यहां तक कि मुस्लिम परिवार भी स्थानीय परंपराओं का सम्मान करते हुए प्याज-लहसुन से दूरी बनाए रखते हैं। यही सामाजिक सौहार्द कटरा को बाकी शहरों से अलग पहचान देता है।

    अक्सर लोगों को लगता है कि बिना प्याज और लहसुन के खाना स्वादिष्ट नहीं हो सकता, लेकिन कटरा इस सोच को बदल देता है। यहां के रसोइए हींग, अदरक, हरी मिर्च और खास मसालों के इस्तेमाल से ऐसा स्वाद तैयार करते हैं कि श्रद्धालु खाने की तारीफ किए बिना नहीं रहते। दाल, कढ़ी, सब्जियां, पूरी और चटनियों का स्वाद यहां अलग ही अनुभव देता है। कई लोग तो कटरा के सात्विक भोजन को सेहत और स्वाद का बेहतरीन मेल मानते हैं।

    कटरा की यह परंपरा सिर्फ खान-पान तक सीमित नहीं, बल्कि यहां की संस्कृति और धार्मिक वातावरण का हिस्सा बन चुकी है। दुकानदार भी प्याज-लहसुन का स्टॉक नहीं रखते और यदि कोई पर्यटक इसकी मांग करता है, तो उसे विनम्रता से यहां की परंपरा के बारे में बताया जाता है। यही वजह है कि कटरा आज भी अपनी आध्यात्मिक पहचान और सात्विक जीवनशैली के कारण देश-दुनि

  • आध्यात्मिक अनुभव या चमत्कार? Akshay Kumar ने बताया वैष्णो देवी का खास किस्सा

    आध्यात्मिक अनुभव या चमत्कार? Akshay Kumar ने बताया वैष्णो देवी का खास किस्सा

     नई दिल्ली। बॉलीवुड सुपरस्टार अक्षय कुमार ने एक इंटरव्यू में अपने बचपन से जुड़ा एक ऐसा किस्सा साझा किया, जिसे वह आज भी एक आध्यात्मिक अनुभव मानते हैं। यह घटना उनके जन्म और माता-पिता की वैष्णो देवी यात्रा से जुड़ी है, जिसे वे एक तरह का “चमत्कार” बताते हैं।
    माता-पिता की मन्नत से हुआ था अक्षय का जन्म
    अक्षय कुमार के मुताबिक, उनके माता-पिता ने माता वैष्णो देवी के दरबार में संतान की मन्नत मांगी थी। उन्होंने प्रार्थना की थी कि उन्हें एक बच्चा मिले और कहा था कि वह बच्चा थोड़ा शरारती स्वभाव का हो। इस मन्नत के कुछ समय बाद ही अक्षय कुमार का जन्म हुआ।
    एक साल बाद फिर वैष्णो देवी पहुंचे थे माता-पिता
    अक्षय ने बताया कि जब वह लगभग एक साल के थे, तो उनके माता-पिता माता वैष्णो देवी का आभार व्यक्त करने के लिए दोबारा कटरा यात्रा पर गए। लेकिन इसी यात्रा के दौरान एक ऐसी घटना घटी, जिसने परिवार को गहरे संकट में डाल दिया।
    बुखार और बेहोशी की हालत में पहुंचा बच्चा
    कटरा पहुंचते ही अक्षय कुमार की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें तेज बुखार हो गया, जो 103 से बढ़कर 104 डिग्री तक पहुंच गया। उस समय क्षेत्र में चिकित्सा सुविधाएं भी सीमित थीं, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई। डॉक्टरों ने तक सलाह दी कि बच्चे को तुरंत दिल्ली ले जाया जाए।
    मां के विश्वास ने बदली कहानी
    हालात बेहद चिंताजनक होने के बावजूद अक्षय की मां ने यात्रा रोकने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि अगर माता रानी ने यह बच्चा दिया है, तो वही उसे संभालेंगी। परिवार ने यात्रा जारी रखी और मंदिर तक पहुंचा।
    मंदिर में हुआ बदलाव, जिसे बताया चमत्कार
    अक्षय के अनुसार, मंदिर में पूजा और दर्शन के दौरान ही उनकी तबीयत में अचानक सुधार होने लगा। जब एक व्यक्ति ने उनके पिता से कहा कि बच्चा मुस्कुरा रहा है, तो परिवार ने देखा कि सच में उनके चेहरे पर मुस्कान आ गई थी। बुखार भी अचानक सामान्य हो गया।

  • सूर्यकुमार यादव और गौतम गंभीर टी-20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी लेकर मंदिर पहुंचे; अभिषेक शर्मा ने वैष्णो देवी के दर्शन किए

    सूर्यकुमार यादव और गौतम गंभीर टी-20 वर्ल्ड कप ट्रॉफी लेकर मंदिर पहुंचे; अभिषेक शर्मा ने वैष्णो देवी के दर्शन किए


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम ने टी-20 वर्ल्ड कप 2026 में तीसरी बार खिताब जीतकर इतिहास रचा। जीत के जश्न में कप्तान सूर्यकुमार यादव और हेड कोच गौतम गंभीर शनिवार को टी-20 वर्ल्ड कप की ट्रॉफी लेकर मुंबई के प्रसिद्ध श्री सिद्धिविनायक मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने भगवान गणेश के दर्शन कर टीम की सफलता और देशवासियों के लिए आशीर्वाद मांगा।

    हनुमान मंदिर दर्शन और कीर्ति आजाद की प्रतिक्रिया:
    वहीं, चैंपियन बनने के बाद 8 मार्च की रात सूर्यकुमार यादव और टीम के कुछ सदस्य अहमदाबाद के हनुमान मंदिर भी गए। इस पर पूर्व क्रिकेटर और TMC सांसद कीर्ति आजाद ने सवाल उठाते हुए कहा कि टीम को शर्म आनी चाहिए, क्योंकि विजेता टीम में सभी धर्मों के खिलाड़ी शामिल थे और ट्रॉफी को मंदिर में ले जाना उचित नहीं था।

    इस पर हेड कोच गौतम गंभीर ने जवाब दिया कि यह पूरे देश के लिए गर्व का पल है और ऐसी बातों को उठाने का कोई मतलब नहीं। गंभीर ने कहा कि अगर हर बयान को गंभीरता से लिया जाएगा तो इससे टीम के 15 खिलाड़ियों की मेहनत और उपलब्धियों का सम्मान कम हो जाएगा।

    अभिषेक शर्मा ने वैष्णो देवी में मांगी आशीर्वाद:
    टीम इंडिया के ओपनर अभिषेक शर्मा ने 13 मार्च को जम्मू-कश्मीर के कटरा स्थित प्रसिद्ध वैष्णो देवी मंदिर में माता रानी के दर्शन किए। उन्होंने अपनी यात्रा की तस्वीरें इंस्टाग्राम पर साझा कीं और कैप्शन में लिखा “जय माता दी।” फोटोज में अभिषेक सफेद कुर्ता-पायजामा पहनकर माथे पर तिलक लगाए हाथ जोड़कर दर्शन करते नजर आए।

    अभिषेक की फाइनल में शानदार पारी:
    टी-20 वर्ल्ड कप फाइनल में अभिषेक ने अहम भूमिका निभाई। टूर्नामेंट के पहले मैचों में उनका प्रदर्शन कमजोर रहा और लगातार तीन बार शून्य पर आउट हुए। लेकिन फाइनल में उन्होंने अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में महज 21 गेंदों में 52 रन की पारी खेलकर भारत को जीत दिलाई।

    टीम इंडिया तीसरी बार चैंपियन बनी:
    8 मार्च को हुए फाइनल मैच में भारत ने न्यूजीलैंड को 96 रन से हराया और टी-20 वर्ल्ड कप का तीसरा खिताब अपने नाम किया।

    टीम के अन्य सदस्य भी बोले:
    ईशान किशन ने कीर्ति आजाद के बयान पर कहा, इतना अच्छा वर्ल्ड कप जीतें, तो अच्छे सवाल पूछिए। कीर्ति आजाद क्या बोले, इस पर मैं क्या कहूं? कुछ अच्छा सवाल करिए।