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  • हर समारोह में वंदे मातरम् के सभी अंतरे बजाने को अनिवार्य करना तर्कसंगत नहीं : शशि थरूर

    हर समारोह में वंदे मातरम् के सभी अंतरे बजाने को अनिवार्य करना तर्कसंगत नहीं : शशि थरूर


    नई दिल्ली।
    कांग्रेस सांसद शशि थरूर (Congress MP Shashi Tharoor) ने वंदे मातरम् (VANDAM MATARAM) के गायन को लेकर चल रही बहस के बीच बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी आधिकारिक कार्यक्रम की शुरुआत और समापन पर राष्ट्रीय गीत के सभी पांच पदों का गायन करवाना उचित नहीं लगता। संवाददाताओं से बात करते हुए थरूर ने कहा कि वंदे मातरम का सभी सम्मान करते हैं, लेकिन हर समारोह में इसके सभी अंतरे बजाने को अनिवार्य करना तर्कसंगत नहीं है।

    कांग्रेस सांसद ने कहा, “वंदे मातरम राष्ट्रगीत है और जब इसे गाया जाता है तो हम सम्मानपूर्वक खड़े हो जाते हैं। इसका पहला अंतरा या शुरुआती दो अंतरे, ज्यादातर लोगों को मुंह जुबानी याद होते हैं।” थरूर ने बताया कि परंपरागत रूप से यह गीत किसी कार्यक्रम की शुरुआत में एक बार गाया जाता है, जबकि राष्ट्रगान अलग से, अक्सर अंत में बजाया जाता है।

    उन्होंने कहा, “अब वे चाहते हैं कि हर कार्यक्रम की शुरुआत में और अंत में पांचों अंतरे गाए जाएं। मुझे लगता है कि यह एक अनावश्यक थोपा हुआ नियम है।” थारूर ने इस बात पर जोर दिया कि उन्हें राष्ट्रगीत से कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा, “हम सभी वंदे मातरम का सम्मान करते हैं। मैं खुशी-खुशी इसे आपके लिए गा सकता हूं।”

    राज्य सरकार और राज्यपाल के रुख में अंतर का संकेत
    कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य थरूर ने कहा कि केरल सरकार का रुख यह रहा है कि वंदे मातरम् का पूरा संस्करण गाना वैकल्पिक है। वहीं, उन्होंने संकेत दिया कि राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर की राय इससे अलग दिखाई देती है। थरूर के मुताबिक, इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय की आवश्यकता पड़ सकती है क्योंकि संसद द्वारा ऐसा कोई कानून पारित नहीं किया गया है जो हर कार्यक्रम में पूरे गीत के गायन को अनिवार्य बनाता हो। उन्होंने इसे मुख्य रूप से परंपरा और प्रचलन से जुड़ा विषय बताया।

    ‘राष्ट्रीय गीत से कोई आपत्ति नहीं’
    थरूर ने स्पष्ट किया कि उन्हें वंदे मातरम् से कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी भारतीय इस राष्ट्रीय गीत का सम्मान करते हैं और वह स्वयं भी इसे खुशी से गा सकते हैं। उन्होंने एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम का उदाहरण देते हुए बताया कि नई दिल्ली में आयोजित उस कार्यक्रम में, जिसमें उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन मौजूद थे, वंदे मातरम् का पूरा संस्करण कार्यक्रम की शुरुआत और अंत दोनों समय बजाया गया था।

    ‘दर्शकों के लिए यह व्यावहारिक चुनौती बन जाती है’
    थरूर का कहना था कि अपेक्षाकृत लंबा और कम परिचित गीत जब एक ही कार्यक्रम में दो बार सुनाया जाता है तो दर्शकों के लिए लंबे समय तक खड़े रहना एक मुद्दा बन सकता है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक आयोजनों में परंपरागत रूप से वंदे मातरम् का वही हिस्सा गाया जाता रहा है जिसकी अवधि लगभग राष्ट्रीय गान के बराबर होती है। यह स्वरूप लंबे समय से व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता रहा है और लोगों द्वारा सम्मानित भी है।

    विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान निकलने की उम्मीद
    इस पूरे विवाद को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए थरूर ने उम्मीद जताई कि इसका समाधान आपसी समझ और सौहार्द के साथ निकलेगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति या प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पदाधिकारियों की मौजूदगी वाले विशेष औपचारिक कार्यक्रमों में एक बार पूरा गीत गाए जाने को समझा जा सकता है। हालांकि, किसी छोटे कार्यक्रम में पूरे वंदे मातरम् का दो बार गायन करवाने के पीछे उन्हें कोई स्पष्ट तर्क नजर नहीं आता। उनके अनुसार यह व्यवस्था न तो विशेष रूप से व्यावहारिक है और न ही बहुत प्रभावी।

  • यूपी के मदरसों में ‘वंदे मातरम’ लागू करने की तैयारी, ओपी राजभर के बयान से सियासत गरमाई

    यूपी के मदरसों में ‘वंदे मातरम’ लागू करने की तैयारी, ओपी राजभर के बयान से सियासत गरमाई



    लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मदरसा शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक विवाद खड़ा हो गया है। राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने संकेत दिए हैं कि यूपी के मदरसों में भी ‘वंदे मातरम’ को अनिवार्य करने की दिशा में तैयारी की जा रही है। उनके इस बयान के बाद प्रदेश की सियासत में नई बहस शुरू हो गई है।

    राजभर ने एक मीडिया इंटरव्यू में कहा कि जिस तरह अन्य शैक्षणिक संस्थानों में राष्ट्रगीत और राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान कराया जाता है, उसी तरह मदरसों में भी ऐसी व्यवस्था लागू करने पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने साफ कहा कि विभाग उनके पास है और इस तरह की व्यवस्था लागू करने में कोई बुराई नहीं है।

    शिक्षा और राष्ट्रभक्ति से जोड़ने की बात
    मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि सरकार का उद्देश्य मदरसा संस्थानों के छात्रों को बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर देना है। उन्होंने कहा कि बच्चों को अमन, चैन और भाईचारे के साथ आगे बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है।उनके अनुसार, “राष्ट्रगीत का सम्मान किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह देश के प्रति सम्मान का प्रतीक है।”

    विपक्ष पर तीखा हमला
    ओपी राजभर ने अपने बयान में विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा। उन्होंने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि वे केवल राजनीति के लिए समाज में नफरत फैलाने की बात करते हैं।

    उन्होंने कहा कि मुसलमानों को केवल वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया गया है और उन्हें शिक्षा एवं विकास से दूर रखा गया है। राजभर ने दावा किया कि उनकी सरकार सभी वर्गों के विकास के लिए काम कर रही है।

    विवाद की पृष्ठभूमि
    यह मुद्दा ऐसे समय पर सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में भी कुछ मदरसों में ‘वंदे मातरम’ को लेकर बहस चल रही है। वहां कई मुस्लिम संगठनों ने इसका विरोध किया है, जबकि कुछ राजनीतिक दलों ने इसे समर्थन दिया है।अब उत्तर प्रदेश में भी इस तरह का प्रस्ताव सामने आने के बाद राजनीतिक तापमान बढ़ गया है। विपक्षी दलों के साथ-साथ धार्मिक संगठनों की प्रतिक्रिया आने की संभावना है।

    सियासी माहौल गर्म
    उत्तर प्रदेश में पहले से ही 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हैं। ऐसे में ओपी राजभर का यह बयान राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। इसे सरकार की शिक्षा नीति और सामाजिक संतुलन की दिशा में एक बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

    मदरसा शिक्षा प्रणाली में ‘वंदे मातरम’ लागू करने की चर्चा ने राज्य में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। जहां सरकार इसे राष्ट्रभक्ति और एकता से जोड़कर देख रही है, वहीं विरोधी इसे संवेदनशील मुद्दा मान रहे हैं। आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं और तेज होने की संभावना है।

  • स्कूलों के बाद अब मदरसों पर भी लागू हुआ राष्ट्रगीत नियम, बंगाल सरकार के फैसले से राजनीतिक हलचल

    स्कूलों के बाद अब मदरसों पर भी लागू हुआ राष्ट्रगीत नियम, बंगाल सरकार के फैसले से राजनीतिक हलचल


    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल में शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा और संवेदनशील नीतिगत फैसला सामने आया है, जिसने राज्य के राजनीतिक और सामाजिक माहौल में नई बहस को जन्म दे दिया है। राज्य सरकार ने आदेश जारी करते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि अब सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और मान्यता प्राप्त मदरसों में कक्षाएं शुरू होने से पहले प्रार्थना सभा के दौरान राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ का गायन अनिवार्य रूप से किया जाएगा। इस निर्णय को शिक्षा और राष्ट्रीय एकता से जुड़ा एक अहम कदम बताया जा रहा है, जबकि दूसरी ओर इसे लेकर अलग-अलग स्तर पर चर्चा और प्रतिक्रिया भी देखने को मिल रही है।

    सरकारी आदेश के अनुसार यह नियम केवल सामान्य सरकारी स्कूलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मदरसा शिक्षा व्यवस्था के सभी स्तरों पर लागू होगा। इसमें सरकारी मॉडल मदरसे, सहायता प्राप्त संस्थान, स्वीकृत मदरसा शिक्षा केंद्र, शिशु शिक्षा केंद्र और मान्यता प्राप्त गैर-सहायता प्राप्त मदरसे सभी शामिल किए गए हैं। इस आदेश के बाद पुराने सभी संबंधित नियम और पूर्व प्रथाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त मानी जाएंगी। प्रशासन का मानना है कि शिक्षा संस्थानों में एक समान सांस्कृतिक और राष्ट्रीय अभ्यास को लागू करने से एकरूपता और राष्ट्रीय एकता को मजबूती मिलेगी।

    इस फैसले के पीछे सरकार की ओर से यह तर्क दिया जा रहा है कि जब राज्य के अन्य सभी सरकारी स्कूलों और विशेष भाषा आधारित विद्यालयों में प्रार्थना सभा के दौरान ‘वंदे मातरम्’ का गायन पहले से ही लागू है, तो फिर मदरसों को इससे अलग रखना उचित नहीं है। सरकार के अनुसार शिक्षा का उद्देश्य केवल अकादमिक ज्ञान देना नहीं है, बल्कि छात्रों में राष्ट्र के प्रतीकों के प्रति सम्मान और एकता की भावना विकसित करना भी है। इसी सोच के तहत इस निर्णय को लागू किया गया है।

    शिक्षा विभाग की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि यह निर्णय किसी एक वर्ग या संस्था को लक्षित नहीं करता, बल्कि इसका उद्देश्य राज्य के सभी शैक्षणिक संस्थानों में समान नियम लागू करना है। प्रशासन का मानना है कि इससे छात्रों के बीच सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय भावना को और अधिक मजबूती मिलेगी। वहीं इस फैसले के बाद शिक्षा जगत में इस बात पर भी चर्चा शुरू हो गई है कि क्या इस तरह के निर्देश विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों की विविध परंपराओं और व्यवस्थाओं के साथ संतुलन बना पाएंगे या नहीं।

    इससे पहले राज्य सरकार ने कुछ दिन पूर्व ही सामान्य सरकारी स्कूलों में भी यही नियम लागू किया था, जिसके बाद अब इसे मदरसों तक विस्तारित कर दिया गया है। इस विस्तार को सरकार की एक व्यापक नीति के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य सभी शिक्षा संस्थानों में एक समान सांस्कृतिक अभ्यास सुनिश्चित करना बताया जा रहा है।

    राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर इस निर्णय को लेकर बहस तेज हो गई है। एक पक्ष इसे राष्ट्रीय एकता और शिक्षा में समानता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे शैक्षणिक स्वतंत्रता और परंपराओं से जुड़ा मुद्दा बता रहा है। हालांकि सरकार अपने रुख पर कायम है और इस नीति को राज्य के सभी संबंधित संस्थानों में लागू करने के लिए प्रतिबद्ध नजर आ रही है। कुल मिलाकर यह निर्णय पश्चिम बंगाल की शिक्षा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जिसका प्रभाव आने वाले समय में राज्य के शैक्षणिक और सामाजिक ढांचे पर भी पड़ सकता है।

  • कांग्रेस में वंदे मातरम विवाद ने पकड़ा राजनीतिक तूफ़ान, केके मिश्रा ने दी खुली चेतावनी

    कांग्रेस में वंदे मातरम विवाद ने पकड़ा राजनीतिक तूफ़ान, केके मिश्रा ने दी खुली चेतावनी


    इंदौर । इंदौर में वंदे मातरम को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कांग्रेस के अंदर ही बड़ा राजनीतिक तूफ़ान बन गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केके मिश्रा ने इस मामले पर अपनी पार्टी के भीतर खुले तौर पर विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने अपने ट्वीट्स में न सिर्फ भाजपा पर हमला बोला बल्कि कांग्रेस की पार्षद रूबीना खान को भी आड़े हाथों लिया। मिश्रा ने बेहद सख्त शब्दों में कहा कि जो लोग राष्ट्रधर्म नहीं निभा सकते और वंदे मातरम नहीं बोल सकते वे भाड़ में जाएं और पाकिस्तान जाकर बसें। उनके इस बयान ने राजनीतिक माहौल को और गर्मा दिया है।

    रूबीना खान के बयान को मिश्रा ने राजनीतिक ब्लैकमेलिंग करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरा मामला भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर खेला गया है। मिश्रा ने यह भी कहा कि रूबीना खान के बयान से उन मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों और सैनिकों का अपमान हुआ है जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देश के लिए दी। उनके अनुसार यह केवल एक व्यक्तिगत विवाद नहीं बल्कि राष्ट्रभक्ति के मूल्यों को चुनौती देने वाला मामला है।

    केके मिश्रा ने भाजपा पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा को इस मुद्दे पर राजनीति करने का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि उसने अपने ही मंत्री विजय शाह के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। मिश्रा ने भाजपा पर राष्ट्रधर्म के मुद्दे पर दोहरा चरित्र अपनाने का आरोप लगाया। उनके अनुसार केवल राजनीतिक लाभ के लिए मुद्दों को उछालना और अपने ही लोगों की अनदेखी करना लोकतंत्र और राष्ट्रीय भावना के लिए खतरनाक है।

    मिश्रा ने कांग्रेस नेतृत्व को भी खुली चुनौती दी। इंदौर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सिर्फ नोटिस देने से काम नहीं चलेगा। उनके अनुसार रूबीना खान को पार्टी से बर्खास्त किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा जहां जाना चाहती हैं चली जाएं। मिश्रा ने पार्टी को चेतावनी दी कि ऐसे संदिग्ध निष्ठा वाले लोगों को शामिल करने से पहले गंभीरता से विचार करना चाहिए। उनके अनुसार यह केवल पार्टी का मामला नहीं बल्कि देश के प्रति प्रतिबद्धता का भी सवाल है।

    इस पूरे विवाद ने कांग्रेस के अंदरूनी मतभेद को खुलकर सामने ला दिया है। एक तरफ भाजपा इस मुद्दे को राजनीतिक लाभ उठाने के लिए भुनाने की कोशिश कर रही है तो वहीं कांग्रेस के भीतर नेताओं के बीच टकराव और तेज होता दिख रहा है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस मामले में कांग्रेस की छवि और संगठनात्मक क्षमता दोनों चुनौतीपूर्ण स्थिति में हैं।

    इंदौर के यह विवाद केवल स्थानीय स्तर पर सीमित नहीं है बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर भी असर डाल सकता है। केके मिश्रा का यह कड़ा रुख और पार्टी नेतृत्व को खुली चुनौती देना इस बात का संकेत है कि कांग्रेस को अपने भीतर अनुशासन और संगठनात्मक मजबूती बनाए रखने की आवश्यकता है। इस विवाद का राजनीतिक भविष्य और असर आने वाले दिनों में साफ होगा लेकिन फिलहाल यह वंदे मातरम विवाद कांग्रेस के लिए सबसे बड़े अंदरूनी तूफानों में से एक बन चुका है।

  • मंत्रालय में गूंजा वंदे मातरम और जन गण मन सामूहिक गायन से देशभक्ति का माहौल

    मंत्रालय में गूंजा वंदे मातरम और जन गण मन सामूहिक गायन से देशभक्ति का माहौल


    भोपाल । भोपाल स्थित मंत्रालय में अप्रैल माह के प्रथम शासकीय कार्य दिवस की शुरुआत राष्ट्रभक्ति के भाव से ओतप्रोत वातावरण में हुई सरदार वल्लभभाई पटेल पार्क में आयोजित कार्यक्रम में अधिकारियों कर्मचारियों और पुलिस कर्मियों ने एक साथ राष्ट्रगीत वंदे मातरम और राष्ट्रगान जन गण मन का सामूहिक गायन किया इस दौरान पूरे परिसर में देशभक्ति का उल्लासपूर्ण माहौल दिखाई दिया

    कार्यक्रम में पुलिस बैंड द्वारा प्रस्तुत की गई मधुर धुनों ने वातावरण को और भी भावपूर्ण बना दिया बैंड की स्वर लहरियों के साथ जब उपस्थित सभी लोगों ने एक स्वर में राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान गाया तो पूरा परिसर देशभक्ति की भावना से गूंज उठा

    इस अवसर पर मुख्य सचिव अनुराग जैन अपर मुख्य सचिव डॉ राजेश राजौरा श्री अशोक बर्णवाल और श्री संजय कुमार शुक्ला सहित मंत्रालय वल्लभ भवन सतपुड़ा और विंध्याचल भवन के अनेक अधिकारी कर्मचारी मौजूद रहे सभी ने पूरे उत्साह और गरिमा के साथ इस आयोजन में भाग लिया

    हर माह के पहले कार्य दिवस पर आयोजित होने वाला यह सामूहिक गायन कार्यक्रम न केवल देशभक्ति की भावना को सुदृढ़ करता है बल्कि शासकीय कार्यों के प्रति समर्पण और जिम्मेदारी का भी संदेश देता है इस तरह के आयोजन कर्मचारियों में एकता अनुशासन और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैंकार्यक्रम ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि राष्ट्र सर्वोपरि है और उसकी सेवा ही प्रत्येक नागरिक का सर्वोच्च कर्तव्य है

  • आकाशवाणी में बड़ा बदलाव अब बजेगा ‘वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण All India Radio

    आकाशवाणी में बड़ा बदलाव अब बजेगा ‘वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण All India Radio


    नई दिल्ली: भारत के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत संचालित All India Radio यानी आकाशवाणी ने अपने सुबह के प्रसारण में एक महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा की है अब तक जहां सुबह की शुरुआत प्रतिष्ठित धुन और उसके बाद ‘वंदे मातरम’ के दो छंदों वाले संस्करण से होती थी वहीं अब इसकी जगह राष्ट्रीय गीत का पूरा संस्करण प्रसारित किया जाएगा यह बदलाव 26 मार्च 2026 से लागू हो रहा है

    आजादी के बाद से आकाशवाणी की यह परंपरा रही है कि वह अपने सुबह के कार्यक्रम की शुरुआत एक खास धुन से करता है और उसके बाद ‘वंदे मातरम’ का छोटा संस्करण बजाया जाता था जिसकी अवधि लगभग 65 सेकंड होती थी लेकिन गृह मंत्रालय द्वारा 28 जनवरी 2026 को जारी नए दिशानिर्देशों के बाद अब इस परंपरा में बदलाव किया गया है नए नियम के अनुसार अब राष्ट्रीय गीत के छह छंदों वाला पूर्ण संस्करण हर दिन प्रसारित किया जाएगा

    इस नए संस्करण की अवधि लगभग 3 मिनट 10 सेकंड है और इसकी प्रस्तुति प्रसिद्ध हिंदी शास्त्रीय गायक Pandit Chandrashekhar Vaze द्वारा राग देश में की गई है उनकी आवाज में गाया गया यह संस्करण देशभक्ति की भावना और संगीत की गहराई को और अधिक प्रभावी बनाता है अब श्रोता पूरे गीत के माध्यम से ‘वंदे मातरम’ की मूल भावना और उसकी भावनात्मक शक्ति को बेहतर तरीके से अनुभव कर सकेंगे

    इस पहल का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अब देशभर के अलग अलग राज्यों के लिए ‘वंदे मातरम’ के क्षेत्रीय संस्करण भी तैयार किए जाएंगे इन संस्करणों में स्थानीय संगीत वाद्ययंत्रों और शास्त्रीय धुनों का उपयोग किया जाएगा जिससे हर क्षेत्र के लोग अपनी भाषा और संगीत के अंदाज में इस गीत को सुन और महसूस कर सकेंगे यह कदम भारत की सांस्कृतिक विविधता को सम्मान देने और उसे और अधिक समृद्ध बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है

    आकाशवाणी का यह नया कदम न केवल राष्ट्रीय गीत को एक नए स्वरूप में प्रस्तुत करेगा बल्कि नई पीढ़ी को भी इसकी पूरी गहराई से परिचित कराएगा इससे श्रोताओं को एक समग्र और समृद्ध देशभक्ति का अनुभव मिलेगा और सुबह की शुरुआत पहले से कहीं अधिक प्रेरणादायक और ऊर्जावान बन जाएगी

  • वंदे मातरम मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी कोई दंड नहीं केवल सलाह…

    वंदे मातरम मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी कोई दंड नहीं केवल सलाह…

    नई दिल्ली: देश के सर्वोच्च न्यायालय ने वंदे मातरम के गायन को अनिवार्य किए जाने से जुड़े एक सर्कुलर के खिलाफ दायर याचिका को खारिज करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने साफ किया कि इस मामले में अभी हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं बनता क्योंकि याचिका समय से पहले यानी प्री मेच्योर है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार के सर्कुलर में वंदे मातरम के गायन को लेकर केवल एक सुझाव या एडवाइजरी दी गई है न कि कोई बाध्यकारी आदेश या दंड का प्रावधान।

    सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने याचिकाकर्ता से सवाल किया कि क्या 28 जनवरी को जारी सरकारी अधिसूचना में कहीं यह उल्लेख है कि यदि कोई व्यक्ति वंदे मातरम नहीं गाता है तो उसे किसी तरह की सजा दी जाएगी या उसके खिलाफ कोई कार्रवाई होगी। इस पर अदालत ने यह समझने की कोशिश की कि याचिकाकर्ता की आशंका किस आधार पर है।

    याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने दलील दी कि भले ही सरकार ने सीधे तौर पर दंड का प्रावधान न किया हो, लेकिन इस तरह की एडवाइजरी के कारण सामाजिक दबाव उत्पन्न हो सकता है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को गाने या सम्मान करने के लिए मजबूर किया जाना उसके अधिकारों के खिलाफ हो सकता है और इस तरह की स्थिति में अप्रत्यक्ष रूप से दबाव बन सकता है।

    इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या राष्ट्रगीत के सम्मान के लिए किसी एडवाइजरी की आवश्यकता होती है। वहीं अदालत ने इस मामले में स्पष्ट किया कि सर्कुलर में “may” यानी “सकते हैं” जैसे शब्द का उपयोग किया गया है, जो किसी भी प्रकार के अनिवार्य आदेश या दंड को इंगित नहीं करता।

    मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की टिप्पणी में यह भी सामने आया कि इस सर्कुलर में न तो किसी प्रकार की सजा का प्रावधान है और न ही किसी व्यक्ति को इसे गाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। अदालत ने कहा कि अगर भविष्य में इस एडवाइजरी के आधार पर किसी व्यक्ति के साथ भेदभाव किया जाता है या उसके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई होती है, तो उस स्थिति में वह व्यक्ति न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है।

    सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को यह भी सलाह दी कि अभी उनके द्वारा उठाई गई आशंकाएं अस्पष्ट हैं और किसी ठोस आधार पर नहीं हैं। अदालत ने कहा कि यदि वास्तव में किसी के साथ अन्याय या भेदभाव होता है तभी वह कोर्ट में आए। यह कोई धमकी नहीं बल्कि एक स्पष्ट सलाह है।

    इस प्रकार सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फिलहाल हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि वंदे मातरम को लेकर जारी सर्कुलर में किसी प्रकार का दंडात्मक प्रावधान नहीं है और यह केवल एक सलाह के रूप में देखा जाना चाहिए।

  • मंत्रालय में मार्च माह के प्रथम कार्य दिवस पर हुआ सामूहिक राष्ट्र-गीत एवं राष्ट्र-गान गायन

    मंत्रालय में मार्च माह के प्रथम कार्य दिवस पर हुआ सामूहिक राष्ट्र-गीत एवं राष्ट्र-गान गायन


    भोपाल। मार्च माह के प्रथम शासकीय कार्य दिवस पर मंत्रालय में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें अधिकारियों और कर्मचारियों ने राष्ट्र गीत वंदे मातरम और राष्ट्र गान जन गण मन का सामूहिक गायन किया। यह कार्यक्रम मंत्रालय के सरदार वल्लभ भाई पटेल पार्क में आयोजित किया गया।

    सामूहिक गान के दौरान पुलिस बैंड ने मधुर धुनों के माध्यम से कार्यक्रम को और आकर्षक बनाया। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव सचिव एम. रघुराज मंत्रालय वल्लभ भवन सतपुड़ा विंध्याचल भवन के अधिकारी कर्मचारी और पुलिस अधिकारी उपस्थित थे।

    इस आयोजन का उद्देश्य कर्मचारियों में राष्ट्रीय भावना को जागृत करना और शासकीय कार्यों के प्रति प्रतिबद्धता को बढ़ावा देना बताया गया। अधिकारियों ने सामूहिक रूप से राष्ट्र गीत और राष्ट्र गान गाकर देशभक्ति की अनुभूति साझा की।

  • वंदे मातरम् के स्वर से गूंजा सदन, MP विधानसभा बजट सत्र 2026 की औपचारिक शुरुआत

    वंदे मातरम् के स्वर से गूंजा सदन, MP विधानसभा बजट सत्र 2026 की औपचारिक शुरुआत


    भोपाल । राजधानी भोपाल में सोमवार 16 फरवरी 2026 से मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र औपचारिक रूप से शुरू हो गया। सत्र की शुरुआत राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के सामूहिक गायन से हुई, जिससे सदन में देशभक्ति और गरिमा का वातावरण बना। यह बजट सत्र 6 मार्च 2026 तक चलेगा और इस दौरान कुल 12 बैठकें प्रस्तावित हैं।

    सत्र के पहले दिन मंगू भाई पटेल ने सदन को संबोधित किया। अपने अभिभाषण में उन्होंने मोहन यादव सरकार की उपलब्धियों, विकास योजनाओं और राज्य की प्रगति का विस्तृत उल्लेख किया। राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश निरंतर विकास की दिशा में अग्रसर है और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से समाज के हर वर्ग तक लाभ पहुंचाया जा रहा है। अभिभाषण के बाद कृतज्ञता प्रस्ताव पेश किया गया, जिस पर आगामी दिनों में चर्चा होगी।

    इस बजट सत्र को कई मायनों में अहम माना जा रहा है। विधानसभा सचिवालय के अनुसार, विधायकों की ओर से कुल 3478 प्रश्न प्राप्त हुए हैं। इसके अलावा 236 ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, 10 स्थगन प्रस्ताव और 41 अशासकीय संकल्प सदन में प्रस्तुत किए जाने की संभावना है। इन आंकड़ों से साफ है कि सत्र के दौरान सरकार को विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से जवाब देना होगा।

    सत्र का सबसे महत्वपूर्ण दिन 18 फरवरी होगा, जब उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेंगे। अनुमान है कि इस बार का बजट 4.63 से 4.70 लाख करोड़ रुपये के बीच हो सकता है। खास बात यह है कि बजट पूरी तरह पेपरलेस डिजिटल प्रारूप में प्रस्तुत किया जाएगा, जो पारदर्शिता और तकनीकी दक्षता की दिशा में एक और कदम माना जा रहा है।

    राजनीतिक दृष्टि से भी यह सत्र काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है। विपक्ष, विशेष रूप से कांग्रेस, बेरोजगारी, महंगाई, अवैध खनन, बढ़ते कर्ज और हालिया विवादित मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। वहीं सत्तापक्ष रोजगार सृजन, नारी सशक्तीकरण, किसान कल्याण, बुनियादी ढांचे के विकास और निवेश आकर्षित करने जैसे मुद्दों को प्रमुखता से रखने की रणनीति पर काम कर रहा है।

    वंदे मातरम् के साथ कार्यवाही की शुरुआत को राज्य और केंद्र स्तर पर राष्ट्रगीत को बढ़ावा देने की पहल से जोड़कर देखा जा रहा है। इससे सदन में एक ऊर्जावान और सकारात्मक माहौल देखने को मिला। हालांकि राजनीतिक गर्माहट के संकेत भी साफ हैं, जिससे आगामी दिनों में तीखी बहस और हंगामे की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। कुल मिलाकर, बजट सत्र 2026 प्रदेश की आर्थिक दिशा, विकास प्राथमिकताओं और राजनीतिक रणनीतियों को तय करने वाला महत्वपूर्ण मंच साबित होगा, जहां सत्ता और विपक्ष के बीच व्यापक चर्चा और टकराव दोनों देखने को मिल सकते हैं।

  • फरवरी माह के प्रथम शासकीय कार्य दिवस पर मंत्रालय में वंदे मातरम और जन-गण-मन का सामूहिक गायन

    फरवरी माह के प्रथम शासकीय कार्य दिवस पर मंत्रालय में वंदे मातरम और जन-गण-मन का सामूहिक गायन


    भोपाल : मंत्रालय स्थित सरदार वल्लभ भाई पटेल पार्क में फरवरी माह के प्रथम शासकीय कार्य दिवस पर सोमवार को राष्ट्र-गीत  वंदे मातरम और राष्ट्र-गान  जन-गण-मन का सामूहिक गायन किया गया। इस अवसर पर पुलिस बैंड ने मधुर धुनों से कार्यक्रम को भव्य बनाया और उपस्थित सभी अधिकारियों-कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाया।

    इस सामूहिक गायन कार्यक्रम में पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण तथा विमुक्त, घुमन्तु, अर्द्धघुमन्तु कल्याण राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार श्रीमती कृष्णा गौर भी उपस्थित रही। उन्होंने कार्यक्रम में भाग लेकर राष्ट्र-गीत और राष्ट्र-गान की महत्ता पर बल दिया।

    अपर मुख्य सचिव श्री अशोक बर्णवाल, श्री मनु श्रीवास्तव, श्री संजय कुमार शुक्ला, सचिव श्री एम. रघुराज के साथ-साथ मंत्रालय वल्लभ भवन और सतपुड़ा-विंध्याचल भवन के अधिकारी-कर्मचारी एवं पुलिस अधिकारी भी उपस्थित थे। सभी ने सामूहिक रूप से राष्ट्र-गीत और राष्ट्र-गान का गायन कर देशभक्ति की भावना का परिचय दिया।इस कार्यक्रम से मंत्रालय में कार्यदिवस की शुरुआत देशभक्ति के स्फूर्तिदायक वातावरण में हुई। अधिकारियों और कर्मचारियों ने एकजुट होकर राष्ट्र की गरिमा और सम्मान को महसूस किया और कार्यक्रम की सफलता सुनिश्चित की।