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  • 25 हजार स्थानों पर एक साथ वंदे मातरम्, मालवा में 1.52 लाख लोगों ने मिलकर रचा नया इतिहास

    25 हजार स्थानों पर एक साथ वंदे मातरम्, मालवा में 1.52 लाख लोगों ने मिलकर रचा नया इतिहास

    उज्जैन । देशभर में शुक्रवार को वंदे मातरम् के 150वें वर्ष के उपलक्ष्य में एक साथ सामूहिक गायन का अनोखा आयोजन किया गया। नमामि भारतम् कार्यक्रम के तहत देश के 25 हजार से अधिक स्थानों पर एक करोड़ से ज्यादा विद्यार्थियों शिक्षकों अभिभावकों और समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने एक ही समय पर एक स्वर और एक लय में संपूर्ण वंदे मातरम् का गायन किया। इस दौरान मालवा क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया और कई स्थानों पर देशभक्ति का माहौल देखने को मिला।

    विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान नई दिल्ली के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में मालवा प्रांत के 522 सरस्वती शिशु मंदिरों को जोड़ा गया। आयोजकों के अनुसार इन स्कूलों में करीब 1 लाख 52 हजार 850 लोग सामूहिक गायन में शामिल हुए। उज्जैन शहर में मारुति गंज और ऋषिनगर स्थित सरस्वती स्कूलों में भी विशेष आयोजन किया गया। यहां विद्यार्थी शिक्षक अभिभावक और समाज के प्रबुद्धजन बड़ी संख्या में मौजूद रहे और निर्धारित समय पर सामूहिक रूप से वंदे मातरम् का गायन किया।

    कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 10:30 बजे प्रतिभागियों के एकत्रीकरण के साथ हुई। इसके बाद ठीक 11 बजे देशभर के निर्धारित स्थानों पर एक साथ संपूर्ण वंदे मातरम् का गायन किया गया। इस दौरान स्कूल परिसरों में देशभक्ति का वातावरण नजर आया। मालवा प्रांत के नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित सरस्वती शिशु मंदिरों को इस आयोजन के माध्यम से एक सूत्र में जोड़ने की तैयारी पहले से की गई थी।

    विद्या भारती मालवा प्रांत के प्रांत प्रचार प्रमुख सुदर्शन शिशुलकर के अनुसार कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी रही। वहीं सरस्वती स्कूल के प्राचार्य भगवान सिंह ठाकुर ने बताया कि मध्य प्रदेश में ही 5 लाख से अधिक लोगों ने सामूहिक रूप से वंदे मातरम् का गायन किया। आयोजकों का कहना है कि कार्यक्रम का उद्देश्य केवल सामूहिक गायन तक सीमित नहीं था बल्कि राष्ट्रभाव मातृभूमि के प्रति श्रद्धा सांस्कृतिक एकात्मता और राष्ट्रीय चेतना की भावना को मजबूत करना भी था।

    इस आयोजन को लेकर रिकॉर्ड बनाने की दिशा में भी तैयारी की गई है। आयोजकों ने एक साथ सर्वाधिक विद्यार्थियों और जनसमुदाय द्वारा वंदे मातरम् के सामूहिक गायन का रिकॉर्ड दर्ज कराने के लिए प्रमाणीकरण की प्रक्रिया शुरू की है। एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स की ओर से प्रतिभागियों की संख्या का सत्यापन किया जाएगा।

    दोपहर तक अलग अलग स्थानों से प्रतिभागियों की संख्या जुटाने का काम किया जाना है। इसके बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सामूहिक गायन ने रिकॉर्ड के निर्धारित मानकों को पूरा किया है या नहीं। फिलहाल मालवा के 522 सरस्वती स्कूलों में एक साथ हजारों लोगों की भागीदारी ने कार्यक्रम को खास बना दिया। एक ही समय पर अलग अलग शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में गूंजे वंदे मातरम् के स्वर ने पूरे आयोजन को देशभक्ति और सांस्कृतिक एकता से जोड़ दिया।

  • वंदे मातरम के छह अंतरे अनिवार्य करने के कानून को चुनौती, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

    वंदे मातरम के छह अंतरे अनिवार्य करने के कानून को चुनौती, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

    नई दिल्ली ।वंदे मातरम के छह अंतरे गाने को अनिवार्य करने वाले प्रावधान को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। मंगलवार को हुई सुनवाई में अदालत ने केंद्र से दो सप्ताह के भीतर अपना पक्ष रखने को कहा। मामला कर्नाटक के संगीतकार टीएम कृष्णा की ओर से दायर रिट याचिका से जुड़ा है।

    याचिका में केंद्र सरकार के उस सर्कुलर को चुनौती दी गई है, जिसमें वंदे मातरम के छह पदों के गायन को अनिवार्य किए जाने का प्रावधान किया गया है। याचिकाकर्ता ने इस व्यवस्था को लेकर संवैधानिक और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े सवाल उठाए हैं।

    टीएम कृष्णा की ओर से अदालत में कहा गया कि वंदे मातरम के चार पदों में हिंदू देवी-देवताओं का उल्लेख है। याचिका में तर्क दिया गया है कि लोगों को इन पदों का गायन करने के लिए बाध्य करना धार्मिक और वैचारिक समर्थन के लिए मजबूर करने के समान हो सकता है।

    याचिका में वंदे मातरम को राष्ट्रगान के समान दर्जा देने से जुड़े हालिया संशोधन को भी चुनौती दी गई है। इसमें यह सवाल उठाया गया है कि क्या इस तरह का प्रावधान कानून के स्तर पर लागू किया जा सकता है और इसके तहत किसी व्यक्ति पर गायन के लिए दबाव बनाया जा सकता है।

    सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस पहलू की जांच करने पर सहमति जताई कि वंदे मातरम नहीं गाने को दंडनीय अपराध बनाया जा सकता है या नहीं। अदालत ने हालांकि इस चरण पर यह तय करने से इनकार किया कि राष्ट्रगीत को केवल दो अंतरों तक सीमित रखा जाना चाहिए या छह अंतरों तक इसका गायन किया जाना चाहिए।

    मामले की सुनवाई के दौरान धार्मिक कारणों से वंदे मातरम नहीं गाने वाले व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई किए जाने का मुद्दा भी सामने आया। अदालत ने इस विषय को याचिका में उठाए गए संवैधानिक सवालों के संदर्भ में देखा।

    केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ने सुनवाई के दौरान कानून बनाए जाने से जुड़े तर्क रखे। वहीं याचिका में उस संशोधन को भी चुनौती दी गई है, जिसके तहत वंदे मातरम को राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम से जुड़े कानून के दायरे में लाने की बात कही गई है।

    याचिकाकर्ता ने इस संशोधन को मनमाना बताते हुए अदालत से इसकी संवैधानिक वैधता की जांच करने की मांग की है। याचिका का मुख्य सवाल यह है कि राष्ट्रीय गीत के गायन को किस सीमा तक अनिवार्य किया जा सकता है और ऐसा नहीं करने पर किसी व्यक्ति के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है या नहीं।

    सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मामले में कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है। अदालत ने केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने का समय दिया है, जिसके बाद मामले में आगे की सुनवाई होगी।

    मामले में धार्मिक स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय गीत से जुड़े कानूनी प्रावधानों के बीच संतुलन का प्रश्न महत्वपूर्ण रहेगा। अदालत अब केंद्र के जवाब के बाद इन मुद्दों पर आगे विचार करेगी।

  • शर्मिला टैगोर की टिप्पणी पर मुकेश खन्ना की प्रतिक्रिया, वंदे मातरम को लेकर धार्मिक स्वीकार्यता के तर्क पर जताई असहमति

    शर्मिला टैगोर की टिप्पणी पर मुकेश खन्ना की प्रतिक्रिया, वंदे मातरम को लेकर धार्मिक स्वीकार्यता के तर्क पर जताई असहमति

    नई दिल्ली ।वंदे मातरम को लेकर जारी बहस के बीच अभिनेता मुकेश खन्ना ने अभिनेत्री शर्मिला टैगोर के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कई सवाल उठाए हैं। खन्ना ने कहा कि दूसरे धर्मों से जुड़ी चिंताओं के आधार पर वंदे मातरम को देखने का नजरिया प्रभावित नहीं होना चाहिए। उन्होंने इस मुद्दे को धर्म, आस्था और राष्ट्र सम्मान से जोड़ते हुए अपनी स्पष्ट राय रखी।

    शर्मिला टैगोर ने वंदे मातरम को लेकर अपनी बात रखते हुए कहा था कि कुछ अन्य धर्मों के लोगों के लिए इसके धार्मिक संदर्भों को स्वीकार करना कठिन हो सकता है। इसी टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए मुकेश खन्ना ने कहा कि वह उनकी व्यक्तिगत समझ या दृष्टिकोण हो सकता है, लेकिन उन्हें यह समझ नहीं आता कि दूसरे धर्मों की चिंताओं को इस गीत के संदर्भ में प्रमुखता क्यों दी जानी चाहिए।

    खन्ना ने शर्मिला टैगोर की पारिवारिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि का भी उल्लेख किया। उन्होंने उनके पटौदी परिवार में विवाह और इस्लामी पहचान से जुड़े संदर्भों को सामने रखते हुए सवाल किया कि लंबे समय तक भारतीय और बंगाली सांस्कृतिक परिवेश में रहने के बाद अब वंदे मातरम को लेकर दूसरे धर्मों की स्वीकार्यता का मुद्दा क्यों उठाया जा रहा है।

    उन्होंने शर्मिला टैगोर के बंगाली परिवेश का भी जिक्र किया। खन्ना के अनुसार वह बंगाल में पली-बढ़ी हैं, जहां धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है। उन्होंने उनके बंगाली सिनेमा से जुड़े करियर का उल्लेख करते हुए पूछा कि वंदे मातरम के संदर्भ में धार्मिक स्वीकार्यता को लेकर यह चिंता अब क्यों सामने आ रही है।

    मुकेश खन्ना ने अपनी धार्मिक समझ बताते हुए कहा कि हिंदू परंपरा में ईश्वर को निराकार माना जाता है और अलग-अलग देवी-देवताओं के माध्यम से उसी परम सत्ता की आराधना की जाती है। उन्होंने हनुमान, शिव, राम और कृष्ण जैसे आराध्य रूपों का उदाहरण देते हुए अपनी बात रखी।

    उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोगों की धार्मिक मान्यता उन्हें केवल अपने ईश्वर के सामने झुकने की अनुमति देती है। खन्ना ने इस दृष्टिकोण को वंदे मातरम को लेकर उठने वाली आपत्तियों से जोड़कर अपनी असहमति जाहिर की।

    हालांकि, मुकेश खन्ना ने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति को शारीरिक रूप से सिर झुकाने या किसी विशेष तरीके से सम्मान व्यक्त करने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार भारत माता के सामने सिर झुकाना उनकी अपनी आस्था और राष्ट्र के प्रति सम्मान का तरीका है, लेकिन किसी दूसरे व्यक्ति पर ऐसा करने के लिए दबाव नहीं होना चाहिए।

    खन्ना ने वंदे मातरम के गायन को लेकर भी सवाल उठाया। उनका कहना था कि किसी व्यक्ति का इसे नहीं गाना अलग बात है, लेकिन पूरे गीत के गायन पर ही आपत्ति जताना उनकी समझ से बाहर है। उन्होंने इस बहस को राजनीतिक दृष्टिकोण से भी जोड़ते हुए शर्मिला टैगोर की मंशा पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि कुछ लोग मुस्लिम समुदाय के समर्थन को ध्यान में रखकर अपनी स्थिति रखते हैं।

    वंदे मातरम भारत के स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रीय चेतना से लंबे समय से जुड़ा रहा है। इसी कारण इसके धार्मिक और सांस्कृतिक संदर्भों को लेकर समय-समय पर बहस होती रही है। मुकेश खन्ना की टिप्पणी ने इस पुराने मुद्दे को एक बार फिर मनोरंजन जगत के चर्चित चेहरों के बीच सार्वजनिक बहस का विषय बना दिया है।

  • वंदे मातरम् विवाद पर कंगना रनौत का कांग्रेस पर हमला, कहा बीजेपी विरोध करते करते देश विरोधी सोच तक पहुंची पार्टी

    वंदे मातरम् विवाद पर कंगना रनौत का कांग्रेस पर हमला, कहा बीजेपी विरोध करते करते देश विरोधी सोच तक पहुंची पार्टी

    नई दिल्ली । स्वतंत्रता दिवस के मौके पर वंदे मातरम् को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक बयानबाजी के बीच और तेज हो गया है। हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट से बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने इस मुद्दे पर कांग्रेस नेतृत्व को निशाने पर लेते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने वंदे मातरम् को भारत की चेतना से जुड़ा बताया और कांग्रेस नेताओं के रुख पर सवाल खड़े किए।

    कंगना रनौत ने कहा कि वंदे मातरम् देश की भावनाओं और चेतना को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि एक कलाकार होने के नाते वह इस बात को समझती हैं कि किसी कविता या रचना का समाज और देश पर कितना गहरा प्रभाव पड़ सकता है। इसी संदर्भ में उन्होंने सवाल उठाया कि वंदे मातरम् को लेकर इतनी नाराजगी या विरोध की जरूरत क्यों महसूस की जा रही है।

    बीजेपी सांसद ने कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रिया पर भी टिप्पणी की। उन्होंने आरोप लगाया कि विवाद के दौरान कैमरे के सामने असहजता दिखाई गई और कैमरा बंद कराने की कोशिश की गई। इसी दौरान उन्होंने कांग्रेस नेताओं की तुलना पाकिस्तान से करते हुए कहा कि उनके अनुसार पड़ोसी देश के लोग भी वंदे मातरम् को लेकर उतनी तीखी प्रतिक्रिया नहीं देते, जितनी कांग्रेस के कुछ नेताओं की ओर से देखने को मिल रही है।

    कंगना ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि पार्टी के नेता इस पूरे विवाद के कारण देशभर में चर्चा का विषय बन गए हैं। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस पहले बीजेपी का विरोध करती थी, लेकिन अब उसकी राजनीति ऐसी दिशा में पहुंच गई है जिसे वह देश विरोधी मानती हैं। हालांकि कांग्रेस की ओर से इस बयान पर प्रतिक्रिया सामने आने पर ही राजनीतिक विवाद का अगला पक्ष स्पष्ट होगा।

    कंगना रनौत ने यह बयान मुंबई में सिद्धिविनायक मंदिर में दर्शन करने के बाद दिया। 18 अगस्त की सुबह मुंबई पहुंचने के बाद उन्होंने मंदिर में पूजा की और कहा कि सिद्धिविनायक पूरे मुंबई के रक्षक माने जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जब भी उन्हें अवसर मिलता है, वह मंदिर में दर्शन करने आती हैं।

    इसी दौरान कंगना ने बीजेपी के सामने सोशल मीडिया से जुड़ी एक नई चुनौती का भी उल्लेख किया। उन्होंने इसे दिमागी नक्सलवाद की चुनौती बताया और कहा कि गलत सूचनाओं के प्रसार से निपटना जरूरी है। उनके मुताबिक सोशल मीडिया और रील कल्चर के कारण युवाओं और महिलाओं तक कई बार ऐसी जानकारियां पहुंच रही हैं जो उन्हें भ्रमित कर सकती हैं।

    कंगना ने कहा कि पहले लोगों के विचारों और जानकारी के निर्माण में समाचार पत्रों, किताबों और माता-पिता की भूमिका महत्वपूर्ण होती थी, लेकिन अब सोशल मीडिया लोगों के लिए जानकारी का बड़ा माध्यम बन गया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर फैलने वाली गलत सूचनाओं को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि इससे निपटने के लिए जागरूकता और तैयारी जरूरी है।

    वंदे मातरम् को लेकर उठे विवाद ने एक बार फिर राष्ट्रीय प्रतीकों, देशभक्ति और राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। कंगना के बयान के बाद यह विवाद राजनीतिक स्तर पर और तीखा होने की संभावना है। बीजेपी और कांग्रेस के बीच पहले से जारी वैचारिक टकराव के बीच वंदे मातरम् का मुद्दा भी अब राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है।

  • वंदे मातरम विवाद पर मल्लिकार्जुन खरगे का पलटवार, बोले गांधी नेहरू और पटेल की परंपरा के अनुसार ही गीत गाया

    वंदे मातरम विवाद पर मल्लिकार्जुन खरगे का पलटवार, बोले गांधी नेहरू और पटेल की परंपरा के अनुसार ही गीत गाया

    नई दिल्ली । वंदे मातरम को लेकर देश में जारी राजनीतिक बहस के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भारतीय जनता पार्टी के आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। खरगे ने कहा कि उन्होंने वही वंदे मातरम गाया है, जिसे महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे नेता भी गाते रहे हैं। उनके बयान के बाद इस मुद्दे पर दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी और तेज हो गई है।

    खरगे ने कहा कि कांग्रेस ने वंदे मातरम को लेकर किसी नई परंपरा की शुरुआत नहीं की है। उनके मुताबिक पार्टी लंबे समय से चली आ रही परंपरा का ही पालन कर रही है। उन्होंने इस बात पर भी सवाल उठाया कि क्या किसी विशेष तरीके से राष्ट्रगीत गाने को अपराध माना जा सकता है।

    कांग्रेस अध्यक्ष ने राजनीतिक विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर वंदे मातरम गाना अपराध है तो फिर उन ऐतिहासिक नेताओं के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए जिन्होंने इसी रूप में इसे गाया था। उन्होंने महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल का उल्लेख करते हुए अपने तर्क को सामने रखा।

    खरगे ने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी को यह समझना चाहिए कि राष्ट्रीय गीतों और उनसे जुड़ी परंपराएं उसके राजनीतिक अस्तित्व से काफी पहले की हैं। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस ने करीब नौ दशक से चली आ रही परंपरा को ही आगे बढ़ाया है। उनके बयान में यह संदेश देने की कोशिश दिखाई दी कि वंदे मातरम को लेकर वर्तमान विवाद को राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।

    उन्होंने सरकार और राजनीतिक दलों की भूमिका पर भी सवाल उठाया। खरगे ने कहा कि यदि किसी एक सरकार के निर्णय को ही राष्ट्रीय नियम मान लिया जाए तो भविष्य में सत्ता बदलने पर अलग नियम बनाए जा सकते हैं। उनके अनुसार राष्ट्रीय प्रतीकों और उनसे जुड़ी परंपराओं को राजनीतिक परिस्थितियों के आधार पर बदलने के बजाय व्यापक सहमति के साथ देखा जाना चाहिए।

    वंदे मातरम को लेकर मौजूदा विवाद स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम से जुड़ा है। भारतीय जनता पार्टी की ओर से आरोप लगाया गया है कि दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर वंदे मातरम का गायन बीच में रोक दिया गया था। आरोप के अनुसार सोनिया गांधी ने इशारे के माध्यम से गीत को रोकने के लिए कहा था। इसके बाद इस घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आईं।

    कांग्रेस की ओर से इस विवाद के बीच अपने रुख को स्पष्ट करने की कोशिश की गई है। खरगे का बयान इसी राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। उन्होंने वंदे मातरम के गायन को ऐतिहासिक संदर्भ से जोड़ते हुए कहा कि पार्टी ने किसी नई व्यवस्था का पालन नहीं किया।

    वंदे मातरम भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा महत्वपूर्ण गीत रहा है और इसे देश के राष्ट्रगीत का दर्जा प्राप्त है। राष्ट्रगान जन गण मन से अलग इसकी अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक भूमिका है। इसी वजह से इससे जुड़ी किसी भी राजनीतिक टिप्पणी पर व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिलती है।

    मौजूदा विवाद में एक तरफ बीजेपी कांग्रेस पर राष्ट्रगीत के अपमान का आरोप लगा रही है, जबकि कांग्रेस इसे पुरानी परंपरा और राजनीतिक विवाद का विषय बता रही है। खरगे के बयान के बाद यह बहस और व्यापक हो गई है। आने वाले दिनों में दोनों दलों के बीच इस मुद्दे पर राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप जारी रहने की संभावना है।

  • वंदे मातरम पर कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद का बयान, बोले दो छंद ही गाऊंगा जेल या फांसी मंजूर

    वंदे मातरम पर कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद का बयान, बोले दो छंद ही गाऊंगा जेल या फांसी मंजूर

    नई दिल्ली ।वंदे मातरम के पूरे गायन को लेकर कांग्रेस के भीतर और बाहर राजनीतिक विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष बीके हरिप्रसाद ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वह वंदे मातरम के केवल दो छंद ही गाएंगे। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि उन्हें जेल भेज दिया जाए या फांसी दे दी जाए, लेकिन वह पूरा वंदे मातरम नहीं गाएंगे। उनके इस बयान के बाद राष्ट्रगीत को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।

    हरिप्रसाद का बयान ऐसे समय आया है जब पिछले कुछ दिनों में कांग्रेस के कार्यक्रमों में वंदे मातरम के गायन को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कांग्रेस मुख्यालय में ध्वजारोहण के दौरान राष्ट्रगीत के गायन को लेकर भी विवाद सामने आया था। इस दौरान गीत के पूरे गायन और कार्यक्रम में उसके प्रस्तुतीकरण को लेकर अलग अलग दावे किए गए।

    इसके बाद गोवा में आयोजित कांग्रेस की बैठक में भी वंदे मातरम के शुरुआती दो छंद गाए जाने का मामला सामने आया। इस कार्यक्रम में पार्टी के वरिष्ठ नेता मौजूद थे। दो छंदों तक सीमित गायन को लेकर कांग्रेस पर सवाल उठे और पार्टी के रुख को लेकर राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई।

    इसी बीच बीके हरिप्रसाद के बयान ने इस विवाद को नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है। उन्होंने अपने रुख को दोहराते हुए कहा कि वह वंदे मातरम के दो छंद ही गाएंगे। उनके बयान में जेल और फांसी का उल्लेख किए जाने से राजनीतिक प्रतिक्रिया और तीखी होने की संभावना बढ़ गई है।

    वंदे मातरम भारत का राष्ट्रगीत है और स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान इस गीत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसके सम्मान और सार्वजनिक कार्यक्रमों में इसके गायन को लेकर लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक चर्चा होती रही है। राष्ट्रगीत के कुछ हिस्सों को लेकर ऐतिहासिक और धार्मिक संदर्भों पर भी अलग अलग राजनीतिक विचार सामने आते रहे हैं।

    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस विवाद के बीच भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि उन्होंने वही वंदे मातरम गाया है जिसे महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेताओं से भी जोड़ा जाता है। खरगे ने यह सवाल भी उठाया कि यदि वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस के नेताओं पर सवाल उठाए जा रहे हैं तो ऐतिहासिक रूप से इससे जुड़े अन्य नेताओं के रुख पर भी चर्चा होनी चाहिए।

    खरगे ने यह भी कहा कि कांग्रेस ने देश के राष्ट्रीय गीतों से संबंधित विषयों पर अपने ऐतिहासिक निर्णय पहले ही लिए थे। उनका तर्क है कि किसी एक राजनीतिक दल या सरकार के कहने मात्र से राष्ट्रीय मानक निर्धारित नहीं किए जा सकते।

    वहीं केंद्र सरकार की ओर से वंदे मातरम के सम्मान को लेकर हाल में कड़े प्रावधान किए जाने की चर्चा है। जानबूझकर राष्ट्रगीत का अपमान करने या उसके गायन में बाधा डालने से जुड़े मामलों में कार्रवाई की व्यवस्था को लेकर भी राजनीतिक बहस चल रही है।

    स्वतंत्रता दिवस पर लालकिले के कार्यक्रम में पूरे वंदे मातरम के गायन को भी इस विवाद के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में बीके हरिप्रसाद का बयान केवल व्यक्तिगत रुख तक सीमित नहीं रहने वाला है और इसके राजनीतिक प्रभाव को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।

    अब इस मुद्दे पर कांग्रेस के भीतर आगे क्या रुख अपनाया जाता है और अन्य राजनीतिक दल किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं, इस पर नजर रहेगी। वंदे मातरम को लेकर सामने आया ताजा विवाद राष्ट्रगीत, ऐतिहासिक परंपरा और राजनीतिक विचारधाराओं के बीच चल रही बहस को एक बार फिर केंद्र में ले आया है।

  • वंदे मातरम् विवाद पर अमित शाह का कांग्रेस पर हमला, बोले देश से माफी मांगें, सोनिया गांधी पर भी उठाए सवाल

    वंदे मातरम् विवाद पर अमित शाह का कांग्रेस पर हमला, बोले देश से माफी मांगें, सोनिया गांधी पर भी उठाए सवाल

    नई दिल्ली ।स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के बाद वंदे मातरम् को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी ने इस मामले को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि पार्टी को इस मामले में देश से माफी मांगनी चाहिए।

    अमित शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने राजनीतिक लाभ के लिए वंदे मातरम् को वह सम्मान नहीं दिया, जिसका यह गीत हकदार है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् देश की स्वतंत्रता की लड़ाई से जुड़ा रहा है और करोड़ों भारतीयों की भावनाएं इससे जुड़ी हुई हैं। ऐसे में इससे संबंधित किसी भी घटनाक्रम को गंभीरता से देखा जाना चाहिए।

    विवाद 15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम से जुड़ा है। कार्यक्रम में पार्टी की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य नेता मौजूद थे। ध्वजारोहण के बाद वंदे मातरम् का गायन हुआ। इसी दौरान सोनिया गांधी के एक इशारे को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने सवाल उठाए और इसे गीत के प्रति कथित आपत्ति से जोड़ दिया।

    अमित शाह ने दावा किया कि वंदे मातरम् के गायन के दौरान सोनिया गांधी ने मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर कुछ संकेत किया था। उन्होंने इसी घटनाक्रम को आधार बनाकर कांग्रेस पर सवाल खड़े किए। हालांकि इस मामले को लेकर कांग्रेस की ओर से अलग राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आई है और भाजपा के आरोपों को लेकर सियासी बहस जारी है।

    अमित शाह ने वंदे मातरम् के ऐतिहासिक महत्व का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस गीत की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी और स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह लोगों के लिए प्रेरणा का महत्वपूर्ण माध्यम बना। स्वतंत्रता संग्राम में वंदे मातरम् का नारा और गीत देशभक्ति की भावना से जुड़ा रहा है।

    गृह मंत्री ने कांग्रेस पर यह आरोप भी लगाया कि पार्टी ने राजनीतिक और चुनावी हितों के कारण वंदे मातरम् को पीछे किया। उन्होंने कहा कि देश की भावनाओं से जुड़े इस गीत का सम्मान किया जाना चाहिए। इसी आधार पर उन्होंने कांग्रेस से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।

    इस विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी वंदे मातरम् के महत्व को लेकर देश में जागरूकता बढ़ाने की बात कर चुके हैं। भाजपा इस मुद्दे को राष्ट्रवाद और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत से जोड़कर कांग्रेस पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रही है।

    कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के घटनाक्रम को लेकर अब सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संघर्ष की ऐतिहासिक स्मृति और राष्ट्रीय भावना से जुड़ा प्रतीक है। वहीं इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस की भूमिका और नेताओं के संकेत पर राजनीतिक चर्चा जारी है।

    वंदे मातरम् को लेकर शुरू हुआ विवाद अब स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम से आगे बढ़कर व्यापक राजनीतिक बहस का रूप ले चुका है। अमित शाह की टिप्पणी के बाद भाजपा ने कांग्रेस से माफी की मांग को और प्रमुखता दी है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

  • ‘वंदे मातरम्’ विवाद में सोनिया गांधी के खिलाफ बीजेपी ने मंगलुरु पुलिस में शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की

    ‘वंदे मातरम्’ विवाद में सोनिया गांधी के खिलाफ बीजेपी ने मंगलुरु पुलिस में शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की


    नई दिल्ली । कर्नाटक के मंगलुरु में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी को लेकर एक नया राजनीतिक विवाद सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी के नेता विकास पुत्तूर ने सोनिया गांधी के खिलाफ उर्वा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत 15 अगस्त को दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में हुए स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान ‘वंदे मातरम्’ के कथित अपमान से जुड़ी है।

    बीजेपी नेता का आरोप है कि कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान ‘वंदे मातरम्’ गाए जाने के समय सोनिया गांधी का व्यवहार राष्ट्रगीत के प्रति सम्मानजनक नहीं था। शिकायत में कार्यक्रम के दौरान कथित तौर पर व्यवधान पैदा करने और गीत के प्रति उचित सम्मान नहीं दिखाने का आरोप लगाया गया है।

    विकास पुत्तूर ने पुलिस से मामले की जांच करने और शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। उनका कहना है कि राष्ट्र से जुड़े प्रतीकों और गीतों के सम्मान से संबंधित मामलों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कानून के अनुसार जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

    यह विवाद 15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के बाद सामने आया। कार्यक्रम में ध्वजारोहण के बाद ‘वंदे मातरम्’ का गायन हुआ था। बीजेपी की ओर से आरोप लगाया गया कि गीत के दौरान कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेता बातचीत करते हुए दिखाई दिए और उनका रवैया उचित नहीं था। इसी आधार पर बीजेपी ने इसे राष्ट्रगीत का अपमान बताया है।

    मामले को लेकर बीजेपी नेता ने पुलिस से निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि शिकायत पर कार्रवाई करते समय किसी प्रकार का राजनीतिक दबाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि पुलिस और राज्य सरकार की ओर से मामले में कार्रवाई नहीं की जाती है तो वह कर्नाटक हाई कोर्ट का रुख कर सकते हैं।

    हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोप अभी जांच के दायरे में हैं। पुलिस की ओर से मामले में आगे क्या कानूनी कदम उठाया जाता है, यह स्पष्ट होना बाकी है। फिलहाल शिकायत के आधार पर लगाए गए आरोपों को अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता।

    ‘वंदे मातरम्’ भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा महत्वपूर्ण राष्ट्रीय गीत है और इसके साथ देश के स्वतंत्रता संघर्ष की ऐतिहासिक स्मृतियां जुड़ी हुई हैं। इसी कारण सार्वजनिक कार्यक्रमों में इसके सम्मान और प्रस्तुति को लेकर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया अक्सर महत्वपूर्ण बन जाती है।

    मंगलुरु में दर्ज शिकायत ने इस मुद्दे को कर्नाटक की राजनीति में भी चर्चा का विषय बना दिया है। एक तरफ बीजेपी इसे राष्ट्रगीत के सम्मान से जोड़कर कार्रवाई की मांग कर रही है, वहीं मामले में पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों के आधार पर कोई कानूनी उल्लंघन बनता है या नहीं।

    इस विवाद के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की संभावना भी है। शिकायतकर्ता ने हाई कोर्ट जाने की बात कहकर मामले को आगे कानूनी स्तर पर ले जाने का संकेत दिया है। अब निगाहें पुलिस की अगली कार्रवाई पर हैं।

    फिलहाल मामले का केंद्र 15 अगस्त के कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम्’ के दौरान हुए कथित व्यवहार पर है। पुलिस जांच और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। तब तक सोनिया गांधी के खिलाफ लगाए गए आरोप शिकायतकर्ता के दावे के रूप में ही देखे जा रहे हैं।

  • राहुल गांधी को लेकर गिरिराज सिंह की टिप्पणी से बढ़ा वंदे मातरम् विवाद पर सियासी घमासान..

    राहुल गांधी को लेकर गिरिराज सिंह की टिप्पणी से बढ़ा वंदे मातरम् विवाद पर सियासी घमासान..


    नई दिल्ली । 
    वंदे मातरम् के सम्मान को लेकर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इसी विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने राहुल गांधी के राजनीतिक रुख, उनके बयानों और विदेश दौरों को लेकर कई सवाल उठाए और कांग्रेस पर भी गंभीर आरोप लगाए।

    गिरिराज सिंह ने कहा कि कांग्रेस का सबसे प्रमुख चेहरा राहुल गांधी हैं, लेकिन उनके बयानों से युवाओं को स्पष्ट दिशा मिलने के बजाय भ्रम की स्थिति पैदा होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी देश के युवाओं को सही रास्ता दिखाने की जगह उन्हें भटकाने का काम कर रहे हैं।

    वंदे मातरम् को लेकर चल रहे विवाद के संदर्भ में गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी की राजनीति पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति लगातार देश की आलोचना करता है, उससे वंदे मातरम् और भारत माता के सम्मान की अपेक्षा कैसे की जा सकती है। इस टिप्पणी के जरिए उन्होंने कांग्रेस पर राष्ट्रवाद से जुड़े मुद्दे पर निशाना साधने की कोशिश की।

    गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी के विदेश दौरों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जब विदेश जाते हैं तो वहां दिए जाने वाले उनके बयानों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। उनके मुताबिक विदेशों में दिए गए कुछ बयानों से भारत के प्रति नकारात्मक सोच सामने आती है और इससे देश की छवि प्रभावित होने का आरोप लगाया।

    केंद्रीय मंत्री ने राहुल गांधी की मानसिक स्थिति और उनके राजनीतिक व्यवहार को लेकर भी विवादित टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का स्वभाव ऐसा है कि या तो वह बहुत फ्रस्ट्रेट हैं या मानसिक तनाव में हैं। इस बयान को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।

    गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी पर जॉर्ज सोरोस के एजेंडे के साथ काम करने का आरोप भी लगाया। यह आरोप राजनीतिक स्तर पर पहले भी विवाद का विषय रहा है। हालांकि इस तरह के आरोपों को लेकर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से अलग-अलग दावे और प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं।

    उन्होंने राहुल गांधी को पॉलिटिकल जोकर तक करार दिया और आरोप लगाया कि उनकी राजनीति से देश को नुकसान हो रहा है। गिरिराज सिंह का यह बयान ऐसे समय आया है जब वंदे मातरम् को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ा हुआ है।

    वंदे मातरम् भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में विशेष ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्व रखता है। इसी वजह से इससे जुड़े किसी भी राजनीतिक विवाद का असर व्यापक स्तर पर दिखाई देता है। भाजपा नेताओं ने इस मुद्दे को राष्ट्र सम्मान से जोड़ते हुए कांग्रेस पर सवाल उठाए हैं, जबकि इस पूरे घटनाक्रम के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।

    गिरिराज सिंह के बयान के बाद अब कांग्रेस की ओर से प्रतिक्रिया आने की संभावना है। फिलहाल दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच यह विवाद केवल वंदे मातरम् तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि राहुल गांधी की राजनीति, उनके बयानों और देश से जुड़े मुद्दों पर उनके रुख को लेकर भी बहस तेज हो गई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों पक्षों की ओर से और राजनीतिक बयान सामने आ सकते हैं।

  • राष्ट्रीय गीत के अपमान पर सियासी संग्राम तेज सीएम मोहन यादव ने कांग्रेस से मांगा जवाब

    राष्ट्रीय गीत के अपमान पर सियासी संग्राम तेज सीएम मोहन यादव ने कांग्रेस से मांगा जवाब


    इंदौर । इंदौर नगर निगम में वंदे मातरम को लेकर शुरू हुआ विवाद अब प्रदेश की सियासत में बड़ा मुद्दा बन गया है इस मामले में डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए राष्ट्रीय गीत के सम्मान को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं उन्होंने साफ तौर पर कहा कि इस तरह की घटनाएं केवल एक व्यक्ति की सोच नहीं बल्कि पार्टी के चरित्र को उजागर करती हैं

    घटना उस समय की है जब इंदौर नगर निगम के बजट सम्मेलन के दौरान कांग्रेस की पार्षद रुबीना इकबाल खान और फौजिया शेख अलीम ने धर्म का हवाला देते हुए वंदे मातरम गाने से इनकार कर दिया उनके इस रुख का सदन में मौजूद अन्य सदस्यों ने विरोध किया लेकिन कांग्रेस की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है इसी चुप्पी को लेकर मुख्यमंत्री ने कांग्रेस को घेरा और कहा कि इस मुद्दे पर पूरी प्रदेश कांग्रेस को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कड़े शब्दों में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बड़े दुर्भाग्य की बात है कि जनप्रतिनिधि होने के बावजूद पार्षद ने राष्ट्रीय गीत गाने से मना किया और यह कहते हुए पीछे हट गई कि वह इसे नहीं गाएंगी उन्होंने इसे बेशर्मी की पराकाष्ठा बताते हुए कहा कि यह कांग्रेस की विचारधारा और मानसिकता को दर्शाता है उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस के कई नेता भारत माता की जय बोलने से भी बचते हैं जो देशभक्ति की भावना के विपरीत है

    मुख्यमंत्री ने सीधे तौर पर राहुल गांधी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी से जवाब मांगा उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वह ऐसे बयानों और आचरण का समर्थन करता है या नहीं यदि पार्टी इस मामले में कार्रवाई करने में असमर्थ है तो उसे नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे देना चाहिए

    उन्होंने आगे कहा कि देशभक्ति और राष्ट्रीय सम्मान के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता हजारों स्वतंत्रता सेनानियों ने भारत माता की जय के उद्घोष के साथ अपने प्राण न्योछावर किए ऐसे में इस प्रकार की घटनाएं न केवल उन बलिदानों का अपमान हैं बल्कि समाज में गलत संदेश भी देती हैं मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर दोहरे चरित्र का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी समय समय पर धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों पर विवाद खड़ा करती रही है

    इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर वंदे मातरम जैसे राष्ट्रीय प्रतीक को लेकर बहस छेड़ दी है जहां एक ओर इसे देशभक्ति और एकता का प्रतीक माना जाता है वहीं दूसरी ओर कुछ वर्गों द्वारा इसे लेकर अलग विचार भी सामने आते रहे हैं फिलहाल यह मुद्दा राजनीतिक बयानबाजी के केंद्र में है और आने वाले दिनों में इस पर और तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं