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  • गंगा उफनीं तो डूबे 84 घाट, आगरा में चारपाई बनी सहारा… यूपी में बारिश-बाढ़ ने बढ़ाई लोगों की मुश्किलें

    गंगा उफनीं तो डूबे 84 घाट, आगरा में चारपाई बनी सहारा… यूपी में बारिश-बाढ़ ने बढ़ाई लोगों की मुश्किलें


    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश में मानसूनी बारिश का दौर लगातार लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहा है। शनिवार सुबह राजधानी लखनऊ समेत नोएडा और गोरखपुर सहित कई शहरों में रुक-रुककर बारिश होती रही। कहीं हल्की बूंदाबांदी हुई तो कहीं आसमान में बादल छाए रहे। मौसम विभाग ने प्रदेश के 71 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। लगातार बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में जनजीवन प्रभावित है। वाराणसी और प्रयागराज समेत 26 जिलों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं और करीब 3.53 लाख लोग इससे प्रभावित बताए जा रहे हैं। प्रशासन की ओर से अब तक 17 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है जबकि करीब 5 हजार लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं।
    आगरा में बारिश के बाद जलभराव ने स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को मुश्किल बना दिया। शुक्रवार देर रात पानी में एक एंबुलेंस फंस गई। इसी दौरान प्रसव पीड़ा से जूझ रही गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने की जरूरत पड़ी तो स्थानीय लोगों ने मदद के लिए चारपाई का सहारा लिया। लोगों ने महिला को चारपाई पर लादकर करीब 500 मीटर तक पानी और जलभराव के बीच पहुंचाया जिसके बाद उसे एंबुलेंस तक ले जाया जा सका। यह तस्वीर बताती है कि कई इलाकों में बारिश के बाद सड़क और आवागमन की स्थिति कितनी चुनौतीपूर्ण हो गई है।

    उधर मेरठ और बाराबंकी में भी भारी बारिश के बीच मकान गिरने की घटनाएं सामने आईं। इन हादसों में दो बच्चों समेत तीन लोगों के घायल होने की जानकारी है। महोबा में लगातार बारिश के कारण कच्चे मकानों पर खतरा बढ़ गया है। कुड़ार गांव में एक कच्चा मकान देखते ही देखते ढह गया। बताया गया कि मकान कुछ ही सेकंड में जमींदोज हो गया और पास से गुजर रहा एक युवक बाल-बाल बच गया।

    वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से हालात बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। शहर के सभी 84 घाट पानी में डूब गए हैं और घाटों के बीच संपर्क प्रभावित हुआ है। मणिकर्णिका घाट का शवदाह गृह भी जलमग्न होने के कारण अंतिम संस्कार के लिए लोगों को अलग व्यवस्था करनी पड़ रही है। कई जगह लोग कमर तक पानी के बीच से गुजरते नजर आए।

    ललितपुर में गोविंद सागर बांध से पानी छोड़े जाने के बाद शहजाद नदी का जलस्तर बढ़ गया। छोटे पुलों के ऊपर से पानी बहने लगा जिससे आवागमन प्रभावित हुआ। रामपुर में भी बाढ़ से घिरे भैया नगला गांव का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट गया है। पुल टूटने के बाद ग्रामीणों के सामने रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी जोखिम उठाने की मजबूरी बनी हुई है। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर अब घटने लगा है लेकिन पानी उतरने के बाद कीचड़ और कचरे ने नई चुनौती खड़ी कर दी है। प्रशासन सफाई अभियान में जुटा है।

    मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक अगले कुछ दिनों तक पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश का असर बना रह सकता है। 6 से 8 सितंबर के बीच कुछ इलाकों में भारी बारिश होने की संभावना है। इसके बाद बारिश कराने वाला सिस्टम कमजोर पड़ने का अनुमान है। हालांकि प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की बारिश और बौछारों का सिलसिला इसके बाद भी जारी रह सकता है। ऐसे में प्रशासन के सामने राहत और बचाव के साथ जलभराव वाले इलाकों में आवागमन और स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारु बनाए रखने की बड़ी चुनौती बनी हुई है।

  • वाराणसी में बारिश ने बिगाड़े हालात! सड़कें बनीं तालाब, घरों में घुसा पानी और पानी में फंसीं कारें

    वाराणसी में बारिश ने बिगाड़े हालात! सड़कें बनीं तालाब, घरों में घुसा पानी और पानी में फंसीं कारें

    वाराणसी  । पूर्वी उत्तर प्रदेश में मानसून की लगातार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। वाराणसी में करीब 15 घंटे तक हुई झमाझम बारिश के बाद शहर के कई इलाकों में हालात बिगड़ गए। सड़कें पानी में डूब गईं और गलियां तालाब जैसी नजर आने लगीं। कई निचले इलाकों में बारिश का पानी घरों के अंदर तक पहुंच गया। जलभराव इतना ज्यादा रहा कि जगह जगह वाहन पानी में फंस गए और लोगों को आने जाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    वाराणसी स्थित BHU अस्पताल के आसपास भी भारी जलभराव देखने को मिला। अस्पताल परिसर और मुख्य मार्ग पर घुटनों तक पानी भर गया। मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। सामने आई तस्वीरों में कुछ लोग मरीजों को कंधे पर बैठाकर पानी के बीच से अस्पताल की ओर ले जाते दिखाई दिए। वहीं एक महिला भी भारी जलभराव के बीच अपने बच्चे को लेकर अस्पताल पहुंचती नजर आई। अस्पताल जैसे जरूरी स्थान पर पानी भरने से मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी और बढ़ गई।

    बारिश का असर केवल वाराणसी तक सीमित नहीं रहा। पूर्वी यूपी के कई शहरों में मंगलवार सुबह से रुक रुककर तेज बारिश का दौर जारी रहा। लखनऊ अयोध्या झांसी जौनपुर और प्रतापगढ़ समेत करीब 25 शहरों में बारिश से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ। कई इलाकों में दिन के समय भी घने बादलों के कारण अंधेरा जैसा माहौल बना रहा। जौनपुर में भी कई घंटों से लगातार बारिश होने के कारण सड़कें जलमग्न हो गईं।

    लगातार बारिश के कारण प्रदेश में बाढ़ का खतरा भी बढ़ता नजर आ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार 19 जिले बाढ़ की चपेट में हैं। लखीमपुर में शारदा नदी पर बने तमोलिनपुरवा बांध का एक हिस्सा कटने से आसपास के दर्जनों गांवों पर खतरा मंडराने लगा है। वहीं ललितपुर में खेड़ार नदी का पानी पुल के ऊपर से बह रहा है। सिरसी पुल भी पानी में डूब गया है। बदायूं में रामगंगा नदी का पानी सड़कों के ऊपर से बहने की स्थिति सामने आई है।

    बारिश के कारण हुए अलग अलग हादसों में पांच लोगों की मौत की भी खबर है जबकि दो लोग घायल बताए गए हैं। लगातार बिगड़ते मौसम को देखते हुए कई जिलों में स्कूलों को बंद रखने का फैसला लिया गया। जौनपुर गाजीपुर प्रतापगढ़ अमेठी चंदौली और अंबेडकरनगर में कक्षा आठ तक के स्कूलों में छुट्टी घोषित की गई।

    मौसम विभाग ने प्रदेश के सभी 75 जिलों में गरज चमक के साथ बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं प्रयागराज समेत 23 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। ऐसे मौसम में लोगों को नदी नालों और जलभराव वाले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी जा रही है। तेज बहाव वाली सड़कों पर वाहन चलाने से बचना और प्रशासन की ओर से जारी स्थानीय निर्देशों का पालन करना बेहद जरूरी है। लगातार बारिश के बीच आने वाले घंटों में पूर्वी यूपी के कई इलाकों में हालात पर नजर बनी हुई है।

  • यूपी में बारिश का कहर! लखनऊ समेत 30 शहरों में झमाझम बारिश, 10 जिलों में स्कूल बंद; काशी के घाट-मंदिर डूबे

    यूपी में बारिश का कहर! लखनऊ समेत 30 शहरों में झमाझम बारिश, 10 जिलों में स्कूल बंद; काशी के घाट-मंदिर डूबे


    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश में मानसून एक बार फिर पूरी तरह सक्रिय हो गया है। मंगलवार तड़के करीब 3 बजे से लखनऊ समेत प्रदेश के 30 से ज्यादा शहरों में रुक-रुककर बारिश का सिलसिला जारी है। कई इलाकों में सुबह से ही आसमान घने काले बादलों से ढका रहा और दिन निकलने के बावजूद अंधेरा छाया रहा। लगातार बारिश के कारण शहरों और कस्बों में जलभराव की स्थिति गंभीर होती जा रही है। कहीं सड़कें तालाब बन गई हैं तो कहीं पुलिस थाने और सरकारी अस्पताल तक पानी में घिर गए हैं। हालात को देखते हुए प्रदेश के करीब 10 जिलों में स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई है।

    संभल में तेज बारिश के बाद रोडवेज बस अड्डा पूरी तरह जलमग्न हो गया। सरकारी अस्पताल में भी बारिश का पानी घुस गया। प्रतापगढ़ के लालगंज इलाके में स्थिति और ज्यादा खराब नजर आई। यहां तहसील परिसर के साथ कोतवाली पुलिस स्टेशन प्राइमरी स्कूल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में करीब दो फीट तक पानी भर गया। पुलिस की गाड़ियों के पहिए तक पानी में डूब गए। निचले इलाकों में कई घरों के भीतर भी बारिश का पानी पहुंच गया है।

    भदोही और कौशांबी में भी भारी जलभराव देखने को मिला। कई प्रमुख सड़कों पर करीब एक फीट तक पानी जमा होने से लोगों को आवागमन में परेशानी हुई। प्रतापगढ़ में रातभर हुई बारिश के कारण मंदिरों और रिहायशी इलाकों में घुटनों तक पानी भरने की तस्वीरें सामने आई हैं। जलभराव के कारण कई स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हुई और बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए छुट्टी कर दी गई।

    भारी बारिश की चेतावनी को देखते हुए प्रयागराज प्रतापगढ़ मिर्जापुर कौशांबी भदोही हरदोई अमेठी और जौनपुर समेत करीब 10 जिलों में स्कूल बंद रखने का फैसला किया गया है। मौसम विभाग ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में बारिश की संभावना जताई है। प्रशासन की ओर से लोगों को जलभराव वाले क्षेत्रों और नदियों के किनारे जाने से बचने की सलाह दी जा रही है।

    काशी में गंगा का बढ़ा जलस्तर

    बारिश के साथ गंगा और यमुना समेत उत्तर प्रदेश की कई नदियों का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है। वाराणसी में गंगा का पानी घाटों की सीढ़ियों से ऊपर पहुंच गया है। घाट किनारे बने 100 से ज्यादा छोटे मंदिर पानी से घिर गए हैं। मणिकर्णिका घाट पर स्थित रत्नेश्वर महादेव मंदिर और दशाश्वमेध घाट का ब्रह्मेश्वर महादेव मंदिर काफी हिस्से तक पानी में डूब गया है। कई जगह मंदिरों का केवल ऊपरी हिस्सा ही दिखाई दे रहा है।

    नमो घाट की सीढ़ियों तक भी गंगा का पानी पहुंच गया है। सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने बैरिकेडिंग कर दी है और लोगों से घाटों के किनारे नहीं जाने की अपील की गई है। दशाश्वमेध घाट पर होने वाली गंगा आरती अब छत के ऊपर कराई जा रही है।

    मणिकर्णिका घाट पर बदली अंतिम संस्कार की जगह

    गंगा का जलस्तर बढ़ने से मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट के शवदाह स्थलों तक भी पानी पहुंच गया है। इसके बाद अंतिम संस्कार के लिए ऊपरी सीढ़ियों वाले हिस्से का इस्तेमाल किया जा रहा है। घाटों पर मौजूद लोगों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है।

    कानपुर और उन्नाव में भी गंगा के किनारे बसे इलाकों में पानी भरने की स्थिति बनी हुई है। कई सौ घरों में पानी पहुंचने के कारण प्रभावित परिवारों को छतों पर रहने के लिए मजबूर होना पड़ा है। चित्रकूट में मंदाकिनी और बरदहा नदी का जलस्तर बढ़ने से रामघाट की कई सीढ़ियां पानी में डूब गई हैं।

    23 अगस्त तक सक्रिय रह सकता है मानसून

    लखनऊ के मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के मुताबिक हवा में कम दबाव का क्षेत्र बनने मानसून ट्रफ के उत्तर दिशा में खिसकने और बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी आने के कारण मानसून सक्रिय हुआ है। 19 से 23 अगस्त के बीच प्रदेश में मानसूनी गतिविधियां और तेज होने की संभावना है। बंगाल की खाड़ी में बन रहे कम दबाव के सिस्टम का असर भी उत्तर प्रदेश के मौसम पर दिखाई दे सकता है। खास तौर पर 20 और 21 अगस्त को कई इलाकों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

    ऐसे में आने वाले दिनों में नदियों के जलस्तर में और बढ़ोतरी हो सकती है। प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। लोगों से अपील की गई है कि वे जलभराव वाले रास्तों से गुजरने से बचें और नदी तथा घाटों के आसपास जाने में विशेष सावधानी बरतें।