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  • 8 जुलाई को काशी से शिक्षकों को बड़ी सौगात देंगे मुख्यमंत्री योगी, 'मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा' योजना का होगा शुभारंभ, लाखों परिवारों को मिलेगा स्वास्थ्य सुरक्षा कवच

    8 जुलाई को काशी से शिक्षकों को बड़ी सौगात देंगे मुख्यमंत्री योगी, 'मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा' योजना का होगा शुभारंभ, लाखों परिवारों को मिलेगा स्वास्थ्य सुरक्षा कवच

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षकों और उनके परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 8 जुलाई को वाराणसी दौरे के दौरान ‘मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा’ योजना का औपचारिक शुभारंभ करेंगे। इस योजना के माध्यम से बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के पात्र शिक्षकों तथा उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को कैशलेस उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। राज्य सरकार का उद्देश्य शिक्षकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना और गंभीर बीमारियों के उपचार में आने वाले आर्थिक बोझ को कम करना है।

    यह योजना आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना की तर्ज पर संचालित की जाएगी। इसके तहत पात्र लाभार्थी देशभर में सूचीबद्ध अस्पतालों में बिना नकद भुगतान के उपचार प्राप्त कर सकेंगे। योजना के अंतर्गत मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाएं और उपचार संबंधी लाभ आयुष्मान भारत योजना के अनुरूप होंगे, जिससे शिक्षकों और उनके परिवारों को व्यापक स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध हो सकेगी।

    योजना के प्रभावी और पारदर्शी संचालन के लिए पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाया गया है। पात्र लाभार्थियों का पंजीकरण, सत्यापन और अनुमोदन ऑनलाइन माध्यम से किया जाएगा। इसके लिए विशेष डेटा संग्रह पोर्टल विकसित किया गया है, जहां शिक्षक अपना विवरण दर्ज कर रहे हैं। डिजिटल प्रणाली अपनाने का उद्देश्य प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है, ताकि पात्र लाभार्थियों को बिना अनावश्यक विलंब के योजना का लाभ मिल सके।

    बेसिक शिक्षा विभाग के लिए तैयार किए गए पोर्टल पर अब तक लाखों लाभार्थी अपना विवरण दर्ज करा चुके हैं। आवेदन के बाद संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा जानकारी का सत्यापन किया जाएगा, जबकि अंतिम स्वीकृति जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के स्तर पर दी जाएगी। अनुमोदन के पश्चात लाभार्थियों का विवरण राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली से एकीकृत किया जाएगा, जिसके बाद आधार आधारित ई-केवाईसी पूरी कर डिजिटल कार्ड डाउनलोड किया जा सकेगा।

    माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों के लिए भी ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस श्रेणी के शिक्षकों के आवेदन का सत्यापन संबंधित विद्यालय के प्रधानाचार्य करेंगे और अंतिम अनुमोदन जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा प्रदान किया जाएगा। इसके बाद लाभार्थियों का डेटा राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण की प्रणाली से जोड़ा जाएगा। सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद शिक्षक डिजिटल कार्ड प्राप्त कर योजना के तहत कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ उठा सकेंगे।

    राज्य सरकार का मानना है कि इस पहल से शिक्षकों और उनके परिवारों को गंभीर बीमारियों के इलाज के दौरान आर्थिक राहत मिलेगी। साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं तक उनकी पहुंच अधिक आसान और प्रभावी बनेगी। डिजिटल व्यवस्था के कारण आवेदन से लेकर लाभ प्राप्त करने तक की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और सुविधाजनक होगी।

    सरकार इस योजना का दायरा आगे और बढ़ाने की तैयारी भी कर रही है। आगामी चरण में उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षकों और कर्मचारियों को भी योजना से जोड़ने की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए अलग ऑनलाइन डेटा संग्रह पोर्टल विकसित किया जाएगा, जिससे विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षक एवं कर्मचारी भी इस स्वास्थ्य सुरक्षा योजना का लाभ प्राप्त कर सकें। इस विस्तार के बाद राज्य में शिक्षा क्षेत्र से जुड़े बड़ी संख्या में कार्मिकों को कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य पूरा किया जाएगा।

  • वाराणसी में सूने मकान में बड़ी चोरी ,शादी समारोह से लौटे परिवार के उड़े होश

    वाराणसी में सूने मकान में बड़ी चोरी ,शादी समारोह से लौटे परिवार के उड़े होश


    वाराणसी । वाराणसी के रामनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत सुजाबाद बंधा रोड पर उस समय सनसनी फैल गई जब एक बंद मकान में अज्ञात चोरों ने बड़ी वारदात को अंजाम देते हुए लाखों रुपये के जेवरात और नगदी पर हाथ साफ कर दिया घटना उस वक्त हुई जब घर के मालिक अपने पूरे परिवार के साथ एक शादी समारोह में शामिल होने के लिए बाहर गए हुए थे और इसी दौरान चोरों ने सूने घर को निशाना बना लिया

    जानकारी के अनुसार सुजाबाद निवासी अभिलाष सहानी पुत्र राजेंद्र प्रसाद अपने परिवार के साथ शुक्रवार की शाम चौबेपुर थाना क्षेत्र के मल्लापुर गांव में अपनी बुआ के घर आयोजित बहन की शादी में शामिल होने गए थे परिवार के सभी सदस्य खुशी-खुशी समारोह में व्यस्त थे और घर पूरी तरह से खाली पड़ा था इसी सुनसान मौके का फायदा उठाकर चोरों ने वारदात को अंजाम दे दिया

    बताया जा रहा है कि शनिवार सुबह जब पूरा परिवार शादी समारोह से वापस अपने घर लौटा तो जैसे ही मुख्य दरवाजा खोला गया अंदर का नजारा देखकर सभी के होश उड़ गए घर का सामान बिखरा हुआ था और अलमारियों व कमरों में रखा सामान अस्त-व्यस्त पड़ा था शुरुआती जांच में सामने आया कि चोरों ने दरवाजे का ताला तोड़ने के बजाय उसके कब्जे उखाड़कर घर के अंदर प्रवेश किया जिससे उनकी सटीक योजना और सूझबूझ का अंदाजा लगाया जा रहा है

    घर के अंदर पहुंचने पर पता चला कि चोरों ने सोने और चांदी के आभूषणों के साथ-साथ हजारों रुपये की नकदी पर भी हाथ साफ कर दिया है जिससे परिवार को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया और आसपास के लोग बड़ी संख्या में मौके पर इकट्ठा हो गए

    सूचना मिलने पर पुलिस प्रशासन भी तुरंत हरकत में आया और एसीपी कोतवाली विजय प्रताप सिंह रामनगर थाना प्रभारी संजय मिश्रा सुजाबाद चौकी प्रभारी प्रशांत पांडेय सहित फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का गहन निरीक्षण किया टीम ने मौके से आवश्यक साक्ष्य जुटाए और आसपास के लोगों से पूछताछ कर जानकारी एकत्र करने का प्रयास किया

    पुलिस अधिकारियों ने प्रारंभिक जांच के आधार पर घटना को संदिग्ध मानते हुए विभिन्न पहलुओं से जांच शुरू कर दी है और दावा किया है कि जल्द ही इस चोरी की वारदात का खुलासा कर आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा फिलहाल पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों और संदिग्ध गतिविधियों की भी जांच कर रही है ताकि चोरों तक पहुंचा जा सके

  • काशी की दिव्यता से अभिभूत हुए अमित सियाल: गंगा आरती में शामिल होकर बोले- मां गंगा के सान्निध्य में मिली अद्भुत आत्मिक शांति

    काशी की दिव्यता से अभिभूत हुए अमित सियाल: गंगा आरती में शामिल होकर बोले- मां गंगा के सान्निध्य में मिली अद्भुत आत्मिक शांति


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सिनेमा और वेब सीरीज जगत के चर्चित अभिनेता अमित सियाल का हालिया वाराणसी दौरा चर्चा का विषय बना हुआ है। अभिनय की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाले अभिनेता ने इस बार आध्यात्मिक अनुभवों की तलाश में काशी का रुख किया, जहां उन्होंने विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती में भाग लेकर मां गंगा का पूजन-अर्चन किया। इस दौरान उन्होंने काशी की आध्यात्मिक परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक वातावरण को करीब से महसूस किया।

    वाराणसी के दशाश्वमेध घाट पर प्रतिदिन आयोजित होने वाली गंगा आरती देश-विदेश के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र मानी जाती है। इसी दिव्य आयोजन में अभिनेता अमित सियाल अपने सहयोगी पुनीत सिंह के साथ शामिल हुए। घाट पर पहुंचकर उन्होंने मां गंगा के समक्ष श्रद्धा भाव से नमन किया और वैदिक परंपराओं के अनुसार पूजन-अर्चन में भाग लिया।

    गंगा आरती के दौरान वातावरण पूरी तरह भक्तिमय दिखाई दिया। घाट पर गूंजते शंखनाद, वैदिक मंत्रोच्चार, दीपों की जगमगाहट और श्रद्धालुओं की आस्था ने पूरे परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। इस भव्य दृश्य को देखकर अभिनेता भी गहराई से प्रभावित नजर आए। उन्होंने आरती के प्रत्येक चरण को श्रद्धा और एकाग्रता के साथ देखा तथा इस अनुभव को अपने जीवन के विशेष क्षणों में से एक बताया।

    अभिनेता ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि काशी केवल एक शहर नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना का केंद्र है। यहां का वातावरण मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि मां गंगा के तट पर बैठकर और आरती का दर्शन करके उन्हें एक अलग तरह की आत्मिक संतुष्टि का अनुभव हुआ, जिसे शब्दों में पूरी तरह व्यक्त करना आसान नहीं है।

    अपने प्रवास के दौरान अमित सियाल ने आयोजन से जुड़े लोगों के प्रति भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने आगंतुक पुस्तिका में अपने अनुभव दर्ज करते हुए लिखा कि काशी की यात्रा उनके लिए अत्यंत यादगार रही। उन्होंने उल्लेख किया कि मां गंगा की आरती का दिव्य स्वरूप मन को भीतर तक स्पर्श करता है और व्यक्ति को आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बनाता है। साथ ही उन्होंने आयोजन से जुड़े सभी लोगों के प्रयासों की सराहना की।

    घाट पर मौजूद श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बीच भी अभिनेता की उपस्थिति को लेकर उत्साह देखा गया। हालांकि उन्होंने अपने दौरे को पूरी तरह धार्मिक और आध्यात्मिक अनुभव तक सीमित रखा तथा श्रद्धालुओं की तरह ही आरती में भाग लिया। इस दौरान उनका सम्मान भी किया गया और उन्हें पारंपरिक स्मृति चिह्न भेंट किए गए।

    अमित सियाल लंबे समय से फिल्मों और डिजिटल मंचों पर अपने प्रभावशाली अभिनय के लिए जाने जाते हैं। कई चर्चित वेब सीरीज और फिल्मों में अपने दमदार किरदारों के माध्यम से उन्होंने दर्शकों के बीच मजबूत पहचान बनाई है। अभिनय के व्यस्त कार्यक्रमों के बीच उनका यह आध्यात्मिक प्रवास दर्शाता है कि आधुनिक जीवन की भागदौड़ के बीच भी लोग मानसिक शांति और आत्मिक संतुलन की तलाश में धार्मिक स्थलों का रुख करते हैं।

    काशी की इस यात्रा ने अभिनेता को न केवल आध्यात्मिक अनुभव प्रदान किया, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं से उनके जुड़ाव को भी उजागर किया। गंगा आरती में उनकी सहभागिता और उससे जुड़ी भावनाएं अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

  • IRCTC की काशी तीर्थ यात्रा: सिर्फ 16,700 रुपये में काशी, अयोध्या और प्रयागराज के दर्शन, रहने-खाने की पूरी व्यवस्था

    IRCTC की काशी तीर्थ यात्रा: सिर्फ 16,700 रुपये में काशी, अयोध्या और प्रयागराज के दर्शन, रहने-खाने की पूरी व्यवस्था


    नई दिल्ली । देशभर के श्रद्धालुओं के लिए इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (IRCTC) ने एक विशेष आध्यात्मिक यात्रा पैकेज लॉन्च किया है। ‘काशी तीर्थ यात्रा’ नाम से शुरू की गई यह 9 दिवसीय धार्मिक यात्रा श्रद्धालुओं को भारत के प्रमुख तीर्थ स्थलों के दर्शन कराने का अवसर देगी। खास बात यह है कि इस पैकेज में यात्रा, भोजन, ठहरने और स्थानीय परिवहन जैसी सभी आवश्यक सुविधाएं शामिल हैं, जिससे यात्रियों को अलग से किसी व्यवस्था की चिंता नहीं करनी पड़ेगी।

    यह विशेष यात्रा 9 सितंबर 2026 को तिरुनेलवेली से शुरू होकर 17 सितंबर 2026 तक चलेगी। यात्रा के दौरान श्रद्धालु गया, बोधगया, वाराणसी, अयोध्या और प्रयागराज जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों के दर्शन करेंगे। IRCTC की भारत गौरव ट्रेन योजना के तहत संचालित इस टूर का उद्देश्य देश की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से लोगों को जोड़ना है।

    यात्रा के पहले दिन ट्रेन तिरुनेलवेली से रवाना होगी। रास्ते में कई प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को चढ़ने और उतरने की सुविधा दी जाएगी। तीसरे दिन श्रद्धालु गया पहुंचेंगे, जहां उनके ठहरने और भोजन की व्यवस्था की जाएगी। इसके बाद बोधगया स्थित विश्व प्रसिद्ध महाबोधि मंदिर के दर्शन कराए जाएंगे। यह वही स्थान है जहां भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी और यह बौद्ध धर्म के सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों में गिना जाता है।

    इसके बाद यात्रा वाराणसी पहुंचेगी, जहां श्रद्धालु काशी विश्वनाथ मंदिर, अन्नपूर्णा देवी मंदिर, काशी विशालाक्षी मंदिर और काल भैरव मंदिर के दर्शन करेंगे। वाराणसी की प्रसिद्ध गंगा आरती भी इस यात्रा का प्रमुख आकर्षण होगी। शाम के समय गंगा घाटों पर होने वाली यह आरती श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा और अद्भुत अनुभव प्रदान करती है।

    वाराणसी के बाद यात्रा अयोध्या पहुंचेगी। यहां श्रद्धालु राम जन्मभूमि, हनुमानगढ़ी और अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन करेंगे। भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या देशभर के श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। इसके बाद ट्रेन प्रयागराज पहुंचेगी, जहां यात्री त्रिवेणी संगम में स्नान कर सकेंगे और प्रसिद्ध बड़े हनुमान मंदिर के दर्शन भी करेंगे।

    IRCTC ने इस पैकेज को तीन श्रेणियों में उपलब्ध कराया है। स्लीपर क्लास का किराया 16,700 रुपये प्रति व्यक्ति रखा गया है। वहीं थर्ड एसी के लिए 26,100 रुपये और सेकंड एसी के लिए 34,100 रुपये निर्धारित किए गए हैं। बच्चों के लिए अलग रियायती दरें लागू होंगी। पैकेज में रेल यात्रा, होटल में ठहरने की व्यवस्था, भोजन, स्थानीय परिवहन और दर्शनीय स्थलों का भ्रमण शामिल है।

    धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और श्रद्धालुओं को सुविधाजनक यात्रा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार किया गया यह पैकेज उन लोगों के लिए बेहतरीन अवसर है, जो एक ही यात्रा में भारत की प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों के दर्शन करना चाहते हैं। काशी, अयोध्या और प्रयागराज जैसे पवित्र स्थलों की यात्रा निश्चित रूप से श्रद्धालुओं के लिए एक यादगार और आध्यात्मिक अनुभव साबित हो सकती है।

  • राजामौली की 'वाराणसी' में दिखेगा राम-कुंभकर्ण का महायुद्ध, लेखक विजयेंद्र प्रसाद ने दिए 30 मिनट के रोंगटे खड़े कर देने वाले सीक्वेंस के संकेत

    राजामौली की 'वाराणसी' में दिखेगा राम-कुंभकर्ण का महायुद्ध, लेखक विजयेंद्र प्रसाद ने दिए 30 मिनट के रोंगटे खड़े कर देने वाले सीक्वेंस के संकेत


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सिनेमा जगत में अपनी भव्य और रिकॉर्डतोड़ फिल्मों के लिए मशहूर निर्देशक एसएस राजामौली की आगामी फिल्म ‘वाराणसी’ इन दिनों लगातार चर्चा का केंद्र बनी हुई है। पिछले साल हैदराबाद में इस फिल्म का पहला टीजर रिलीज होने के बाद से ही दर्शक इसके हर एक दृश्य को बारीकी से समझने का प्रयास कर रहे हैं। अब इस फिल्म को लेकर एक बेहद बड़ा और चौंकाने वाला अपडेट सामने आया है, जिसने सिनेमा प्रेमियों के बीच उत्सुकता को कई गुना बढ़ा दिया है। फिल्म के लेखक और राजामौली के पिता के. विजयेंद्र प्रसाद ने फिल्म के एक बेहद महत्वपूर्ण और भव्य एक्शन सीक्वेंस का हिंट दिया है।

    एक विशेष कार्यक्रम के दौरान जब विजयेंद्र प्रसाद से पूछा गया कि वह इस फिल्म के किस खास दृश्य के बारे में दर्शकों को थोड़ा संकेत देना चाहेंगे, तो उन्होंने सीधे तौर पर राम और कुंभकर्ण के बीच होने वाले महायुद्ध का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि फिल्म में यह युद्ध का सीक्वेंस लगभग 30 मिनट लंबा होने वाला है। लेखक के अनुसार, यह आधा घंटा दर्शकों को पूरी तरह से मंत्रमुग्ध कर देगा और उनके रोंगटे खड़े कर देगा। इस खुलासे के बाद से ही सोशल मीडिया पर इस बात को लेकर कयासबाजी शुरू हो गई है कि आखिर फिल्म में कुंभकर्ण का ताकतवर किरदार कौन सा अभिनेता निभाने जा रहा है, जिसमें अभिनेता पृथ्वीराज के नाम की चर्चा सबसे आगे है।

    विजयेंद्र प्रसाद ने फिल्म के टीजर का संदर्भ देते हुए कहा कि दर्शकों ने पहले ही इसकी एक छोटी सी झलक देखी है, जिसमें राम और कुंभकर्ण के आमने-सामने होने के साथ-साथ हनुमान जी की पूंछ और उस पर एक रथ दिखाई दे रहा है। जब उनसे यह जानने का प्रयास किया गया कि क्या इस फिल्म की कहानी में अलग-अलग टाइम जोन्स या समय काल का कोई कॉन्सेप्ट शामिल है, तो उन्होंने इस पर अधिक जानकारी देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि फिल्म की गोपनीयता बनाए रखने के लिए फिलहाल इस विषय पर अधिक बात करना सही नहीं होगा, जिससे साफ है कि मेकर्स दर्शकों के लिए पर्दे पर बड़ा सरप्राइज प्लान कर रहे हैं।

    इस बीच निर्देशक एसएस राजामौली ने भी फिल्म के मुख्य अभिनेता महेश बाबू के लुक को लेकर अपनी भावनाएं साझा की हैं। राजामौली ने बताया कि जब पहले दिन महेश बाबू भगवान राम के लुक में फोटोशूट के लिए सेट पर आए, तो उनका वह रूप देखकर खुद निर्देशक के भी रोंगटे खड़े हो गए थे। उन्होंने कहा कि महेश बाबू के व्यक्तित्व में भगवान कृष्ण का आकर्षण और भगवान राम की असीम शांति एक साथ दिखाई देती है, जो इस किरदार के लिए पूरी तरह न्याय करती है। राजामौली ने उस लुक की तस्वीर को कुछ समय के लिए अपने फोन का वॉलपेपर भी बनाया था ताकि वे इसे बार-बार देख सकें, लेकिन बाद में गोपनीयता के कारण हटा दिया।

    ‘आरआरआर’ जैसी फिल्म से वैश्विक स्तर पर देश को ऑस्कर दिलाने वाले राजामौली इस बार ‘वाराणसी’ के जरिए तकनीकी और कहानी के स्तर पर एक नया कीर्तिमान स्थापित करने की तैयारी में हैं। फिल्म में पहली बार कुछ ऐसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है जो भारतीय सिनेमा में पहले कभी नहीं देखी गईं। प्रियंका चोपड़ा और महेश बाबू स्टारर इस फिल्म की रिलीज डेट की घोषणा के बाद से ही ट्रेड एनालिस्ट्स इसे आने वाले समय की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर मान रहे हैं। विजयेंद्र प्रसाद और राजामौली की यह जोड़ी एक बार फिर इतिहास दोहराने के लिए पूरी तरह तैयार है।

  • वाराणसी: विश्वनाथ धाम मार्ग पर हेड कांस्टेबल ने महिला से मारपीट, वीडियो वायरल; पुलिस ने किया सस्पेंड

    वाराणसी: विश्वनाथ धाम मार्ग पर हेड कांस्टेबल ने महिला से मारपीट, वीडियो वायरल; पुलिस ने किया सस्पेंड


    वाराणसी । उत्तर प्रदेश के वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम के गेट नंबर-4 से करीब 50 मीटर दूर फूलमंडी क्षेत्र में हेड कांस्टेबल और एक महिला फूल विक्रेता के बीच विवाद मारपीट में बदल गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला सामने आया।

    वीडियो में हेड कांस्टेबल राधेश्याम यादव महिला को पहले जमीन पर गिराकर पीटते हुए और बाद में बाल पकड़कर मारपीट करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस दौरान महिला भी विरोध में लाठी से वार करती नजर आती है। मौके पर मौजूद लोग और श्रद्धालु घटना को देखते रहे, लेकिन बीच-बचाव की कोशिश सीमित रही।

    जानकारी के अनुसार, विवाद उस समय शुरू हुआ जब ड्यूटी पर तैनात हेड कांस्टेबल ने फूलमंडी में दुकानों को हटाने को कहा। इसी दौरान महिला दुकानदार से बहस बढ़ गई और मामला हिंसक झड़प में बदल गया।

    स्थानीय लोगों के अनुसार महिला लंबे समय से मंदिर क्षेत्र में फूल-माला बेचकर आजीविका चला रही थी। घटना के बाद वीडियो वायरल होने पर पुलिस प्रशासन ने जांच कराई और पीएसी ने आरोपी हेड कांस्टेबल को निलंबित कर दिया।

    इसी बीच मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वायरल वीडियो को गलत तरीके से काशी विश्वनाथ धाम परिसर से जोड़ा जा रहा है, जबकि यह घटना मंदिर परिसर के अंदर की नहीं है। प्रशासन ने इसे भ्रामक बताते हुए कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।

    साथ ही गेट नंबर-4 के बाहर अधिवक्ताओं से कथित अभद्रता और छिनैती के आरोपों की भी जांच की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच जारी है और दोषियों पर कार्रवाई होगी।

  • गंगा एक्सप्रेसवे बनेगा विकास की नई लाइफलाइन, कई तीर्थ स्थलों को मिलेगा सीधा लाभ

    नई दिल्ली । गंगा एक्सप्रेसवे (करीब 594 किमी) मेरठ से प्रयागराज तक बनने वाला एक बड़ा हाईवे प्रोजेक्ट है, जो उत्तर प्रदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को नई रफ्तार देगा। पहले जहां मेरठ से प्रयागराज तक पहुंचने में 10–12 घंटे लगते थे, अब यह सफर लगभग 5–6 घंटे में पूरा हो सकेगा।

    इस एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा फायदा धार्मिक पर्यटन को होगा, क्योंकि यह कई प्रमुख तीर्थ स्थलों जैसे गढ़मुक्तेश्वर, कल्कि धाम, बेल्हा देवी धाम, चंद्रिका देवी मंदिर और त्रिवेणी संगम को बेहतर कनेक्टिविटी देगा। इससे श्रद्धालुओं के लिए एक ही यात्रा में कई धार्मिक स्थलों के दर्शन करना आसान हो जाएगा।

    इसके अलावा यह एक्सप्रेसवे प्रयागराज को वाराणसी, विंध्याचल, अयोध्या, गोरखनाथ मंदिर, नैमिषारण्य, चित्रकूट, मथुरा और वृंदावन जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों से भी बेहतर रूप से जोड़ने में मदद करेगा। इससे पूरे राज्य में तीर्थ यात्राओं और टूरिज्म में तेजी आने की संभावना है।

    हस्तिनापुर जैसे ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल भी इस विकास से लाभान्वित होंगे, जिससे जैन और महाभारत काल से जुड़े पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही संभल, बदायूं, शाहजहांपुर और रायबरेली जैसे छोटे शहरों में होटल, ट्रांसपोर्ट और स्थानीय व्यापार में भी तेजी आएगी।

    कुल मिलाकर, गंगा एक्सप्रेसवे सिर्फ एक सड़क परियोजना नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश के धार्मिक पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को जोड़ने वाली एक बड़ी विकास कड़ी साबित हो सकता है।

  • वाराणसी चोरी केस में अजब मोड़: चोरों ने मालिक से ही पूछा, 7 कमरों में ताले क्यों नहीं लगाए?

    वाराणसी चोरी केस में अजब मोड़: चोरों ने मालिक से ही पूछा, 7 कमरों में ताले क्यों नहीं लगाए?


    वाराणसी। वाराणसी के लंका थाना क्षेत्र में हुई 40 लाख रुपये के गहनों की चोरी का मामला अब एक दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर सभी गहने बरामद कर लिए हैं, लेकिन थाने में हुई एक बातचीत ने सभी को चौंका दिया।

    गिरफ्तारी और बरामदगी

    पुलिस के मुताबिक, बजरडीहा इलाके के रहने वाले मो. शारिक जमाल अंसारी और रेयाज अंसारी को सीर गोवर्धन क्षेत्र से गहनों से भरे बैग के साथ पकड़ा गया। इस पूरी कार्रवाई की जानकारी एसीपी भेलूपुर गौरव कुमार ने दी।

    फेरी लगाकर करते थे रेकी

    पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे साड़ी बेचने के बहाने कॉलोनियों में फेरी लगाते थे और इसी दौरान घरों की रेकी भी करते थे।
    गायत्री नगर कॉलोनी में उन्हें एक मकान कई दिनों से बंद मिला, जिसके गेट पर सिर्फ एक छोटा ताला लगा था। इससे उन्हें शक हुआ कि घर खाली है और उन्होंने चोरी की योजना बना ली।

    मंकी कैप पहनकर दिया वारदात को अंजाम

    आरोपियों ने मंकी कैप पहनकर घर में घुसकर सात कमरों से कीमती गहने चुरा लिए। चोरी के बाद उन्हें अंदाजा हुआ कि माल की कीमत बहुत ज्यादा है, जिससे वे घबरा गए।

    गहने बेचने में फंसे चोर

    चोरी के बाद दोनों आरोपी गहने बेचने के लिए भटकते रहे। वे अलग-अलग जिलों में रिश्तेदारों और परिचितों के यहां छिपते रहे, लेकिन गहनों की बिक्री नहीं कर पाए। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें ट्रेस कर गिरफ्तार कर लिया।

    थाने में चोरों का ‘शिकायती सवाल’

    मामले का सबसे हैरान करने वाला पहलू तब सामने आया जब थाने में चोरों का सामना मकान मालिक से हुआ।
    आरोपियों ने उल्टा मालिक से ही सवाल कर दिया—“इतने बड़े घर के गेट पर छोटा ताला क्यों लगाया था? सात कमरों में सिर्फ कुंडी बंद थी, ताले क्यों नहीं लगाए?”

    पुलिस की अपील

    पुलिस का कहना है कि यह मामला लोगों के लिए सबक भी है कि घर खाली छोड़ते समय सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम जरूर करें।

    कुल मिलाकर, यह घटना न सिर्फ पुलिस की सफलता की कहानी है, बल्कि लापरवाही और अपराधियों की चालाकी का अनोखा उदाहरण भी बन गई है।

  • वाराणसी की पावन धरा पर महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ का हुआ ऐतिहासिक मंचन

    वाराणसी की पावन धरा पर महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ का हुआ ऐतिहासिक मंचन


    भोपाल।
    उत्तर प्रदेश के वाराणसी (काशी) की पावन धरती पर शुक्रवार शाम को महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ का ऐतिहासिक मंचन हुआ। महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ के भव्य मंचन और ओजस्वी प्रस्तुति से दर्शकों को हजारों वर्ष पुराने स्वर्णिम युग की यात्रा कराई।

    मध्य प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित इस महानाट्य का आरंभ सम्राट विक्रमादित्य के उस संकल्प से हुआ, जब वे विदेशी आक्रांताओं के चंगुल से मातृ भूमि को मुक्त कराने का प्रण लेते हैं। रंगमंच पर कलाकारों के सजीव अभिनय ने उस कालखंड को जीवंत कर दिया, जब शकों के आतंक से त्रस्त प्रजा की रक्षा के लिए एक महानायक का उदय हुआ था। विशाल और भव्य सेट, ऊंचे दुर्ग और उस दौर के राजसी वैभव को दर्शाते दृश्यों ने दर्शकों को से बांधे रखा। प्रकाश संयोजन और संगीत की स्वर लहरियों ने हर दृश्य को इतना प्रभावशाली बना दिया कि युद्ध के दृश्यों में जहाँ वीरता का सजीव आभास हुआ, वहीं सम्राट की न्यायप्रियता के प्रसंगों ने दर्शकों को गौरव की भावना से भर दिया।

    महानाट्य की सबसे बड़ी विशेषता इसका यथार्थवादी चित्रण था, जिसमें मदमस्त हाथियों, सरपट दौड़ते घोड़ों और ऊंटों के काफिलों के प्रयोग ने युद्ध के दृश्यों और राजसी वैभव को अभूतपूर्व भव्यता प्रदान की। हाथियों की चिंघाड़ और घोड़ो की टापों ने मंच पर रणभूमि का साक्षात दृश्य उपस्थित कर दिया, जिससे दर्शक रोमांचित हो उठे। लगभग 400 से अधिक कलाकारों ने आधुनिक लाइट-एंड-साउंड तकनीक के साथ सम्राट की न्यायप्रियता, अदम्य शौर्य और विक्रम संवत की स्थापना के प्रसंगों को बड़े प्रभावशाली रूप प्रस्तुत किया। मंच पर निर्मित ऊंचे दुर्ग और राजप्रासाद के सेट ने इतिहास को जीवंत कर दिया।

    महानाट्य में सम्राट विक्रमादित्य के व्यक्तित्व के उन अनछुए पहलुओं को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया, जो उन्हें एक साधारण राजा से ‘चक्रवर्ती सम्राट’ बनाते हैं। वह दृश्य अत्यंत ह्रदय स्पर्शी था जब सम्राट अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए रात्रि के अंधकार में वेश बदलकर निकलते हैं। उनके द्वारा स्थापित ‘विक्रम संवत’ की प्रासंगिकता और भारतीय काल-गणना के महत्व को जिस सरल और साहित्यिक भाषा में संवादों के माध्यम से पिरोया गया, वह सराहनीय था। कलाकारों के संवादों में वह ओज और स्पष्टता थी, जिसने इतिहास को मंच पर साक्षात कर दिया। सम्राट का न्याय और ‘सिंहासन बत्तीसी’ के प्रसंगों ने यह संदेश दिया कि नेतृत्व केवल सत्ता का भोग नहीं, बल्कि त्याग और न्याय की वेदी पर खुद को समर्पित करना है।

    तीन दिवसीय महानाट्य की पहली गरिमामयी शाम में जनता और पर्यटक इस कदर उमड़े कि कार्यक्रम स्थल छोटा प्रतीत होने लगा नाटक के चरमोत्कर्ष पर पहुंचतें ही “जय महाकाल” और “सम्राट विक्रमादित्य” के जयकारों से आकाश गुंजायमान हो गया। यह महानाट्य केवल मंचन नहीं, बल्कि अपनी जड़ों की ओर लौटने का एक सशक्त माध्यम सिद्ध हुआ। अंतिम दृश्य में जब सम्राट का राज्याभिषेक हुआ और पुष्प वर्षा हुई, तो हर नागरिक का मस्तक गर्व से ऊंचा हो गया।

    इस अवसर पर मप्र के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तर प्रदेश के मंत्रीगण अनिल, राजेश सचान, रविंद्र जायसवाल, महापौर अशोक तिवारी जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्या, राज्यसभा सदस्य बाल योगी उमेश नाथ. विधायक, स्थानीय जन-प्रतिनिधि सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं संस्कृति प्रेमी उपस्थित रहे।

    कार्यक्रम की समाप्ति के बाद भी देर रात तक दर्शक उस जादुई वातावरण के प्रभाव में रहे। महानाट्य के सफल आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि इतिहास को सही परिप्रेक्ष्य में भव्यता के साथ प्रस्तुत किया जाए, तो वह आज भी जनमानस को गौरवान्वित करता है। यह महानाट्य आने वाले समय में एक सांस्कृतिक मील का पत्थर साबित होगा।


    वाराणसी में तीन दिवसीय सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य के विशेष आकर्षण

    समारोह स्थल पर म.प्र. संस्कृति और पर्यटन विभाग द्वारा भव्य चित्र प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है। प्रदर्शनी में ऋषियों वैदिक ज्ञान तथा सांस्कृतिक गौरव को आकर्षक ढंग से प्रदर्शित किया गया है। प्रदर्शनी लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

    महानाट्य में 200 से अधिक कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं। मुख्य मंच से दर्शकों के बीच जाकर सम्राट विक्रमादित्य के जीवन का सजीव मंचन अत्यंत आकर्षक बना हुआ है। महानाट्य में तीन भव्य मंच बनाए गए हैं, जिनमें से एक मंच पर उज्जैन के महाकाल मंदिर की प्रतिकृति प्रदर्शित की गई, जो विशेष आकर्षण का केन्द्र बनी।

    महानाट्य में 18 घोड़े, दो रथ, चार ऊंट एक पालकी और एक हाथी के साथ जीवंत दृश्य से विक्रमादित्य का गौरव साकार हो रहा है। महानाट्य में आधुनिक सूचना संचार तकनीक का उपयोग कर युद्ध के दृश्य आतिशबाजी और प्राचीन परंपरा को अद्भुत ढंग से संजीव किया गया है। महानाट्य में सम्राट विक्रमादित्य के जन्म से लेकर राजतिलक तक की गाथा विक्रम बेताल की कथा और सनातन धर्म के उत्थान की महाकाव्य कथा को प्रदर्शित किया जा रहा है।

  • मुख्यमंत्री डॉ. यादव वाराणसी में 31 मार्च को एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन में होंगे शामिल

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव वाराणसी में 31 मार्च को एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन में होंगे शामिल


    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव वाराणसी में आयोजित “एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन 2026” में मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश की औद्योगिक क्षमताओं, पारंपरिक शिल्प, ओडीओपी और जीआई टैग उत्पादों, कृषि एवं खाद्य उत्पादों, निवेश अवसरों और पर्यटन संभावनाओं को एक साझा मंच पर प्रस्तुत करेंगे। इस सम्मेलन में दोनों राज्यों की प्रमुख ताकतें एक साथ सामने आएंगी और उत्पादन, बाजार तथा पहचान से जुड़े विभिन्न आयामों पर केंद्रित संवाद स्थापित होगा। सम्मेलन में उद्योग, शिल्प, निवेश और पर्यटन से जुड़े हितधारक एकत्रित होंगे, जहां व्यावहारिक सहयोग, बाजार विस्तार और साझा पहल पर चर्चा का स्पष्ट स्वरूप दिखाई देगा।

    काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का भ्रमण

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव की वाराणसी यात्रा काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के अध्ययन भ्रमण से होगी, जहां तीर्थ क्षेत्र में विकसित क्राउड फ्लो मैनेजमेंट, अधोसंरचना लेआउट और तीर्थयात्री प्रबंधन की व्यवस्थाओं का अवलोकन किया जाएगा। यह अनुभव धार्मिक पर्यटन स्थलों के सुव्यवस्थित विकास और आधुनिक प्रबंधन प्रणाली को समझने का आधार बनेगा।

    इसके बाद एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन स्थल पर प्रदर्शनी का अवलोकन किया जाएगा, जिसमें मध्यप्रदेश के ओडीओपी उत्पाद, जीआई टैग हस्तशिल्प, पारंपरिक वस्त्र, औद्योगिक क्षमताएं और पर्यटन संभावनाएं प्रदर्शित होंगी। यह प्रदर्शनी राज्य की आर्थिक और सांस्कृतिक विविधता को एक ही मंच पर प्रस्तुत करते हुए निवेशकों और प्रतिभागियों को प्रत्यक्ष रूप से जोड़ने का कार्य करेगी।

    सम्मेलन के मुख्य सत्र में निवेश, औद्योगिक सहयोग और ओडीओपी आधारित अर्थव्यवस्था पर केंद्रित चर्चा होगी, जहां मध्यप्रदेश की निवेश-अनुकूल नीतियों, अधोसंरचना और प्रोत्साहन तंत्र को प्रस्तुत किया जाएगा। इसी सत्र में मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के बीच एमओयू हस्ताक्षर किए जाएंगे, जिससे औद्योगिक निवेश, कौशल विकास, हस्तशिल्प संवर्धन और पर्यटन क्षेत्रों में सहयोग को औपचारिक रूप दिया जाएगा। ओडीओपी उत्पादों का आदान-प्रदान स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आएगा। दोपहर पश्चात नेटवर्किंग सत्र में उद्योग जगत, निवेशकों और नीति-निर्माताओं के बीच संवाद स्थापित होगा, जिससे संभावित निवेश और साझेदारियों को गति मिलेगी और यह सम्मेलन वास्तविक व्यावसायिक अवसरों से जुड़ता हुआ दिखाई देगा।

    समानांतर सत्रों में सहयोग के व्यावहारिक आयामों को विस्तार दिया जाएगा। संयुक्त शिल्प कार्यशाला में मध्यप्रदेश के चंदेरी और महेश्वरी शिल्पकार उत्तरप्रदेश के बनारसी सिल्क कारीगरों के साथ साझा ब्रांडिंग, बाजार विस्तार और ‘गंगा-नर्मदा क्राफ्ट कॉरिडोर’ की अवधारणा पर कार्य करेंगे, जिससे पारंपरिक शिल्प को नए बाजारों तक पहुंचाने की दिशा में ठोस पहल होगी।

    टूरिज्म राउंड टेबल मीटिंग

    टूरिज्म राउंड टेबल में वाराणसी, उज्जैन और चित्रकूट को जोड़ते हुए एक संयुक्त धार्मिक पर्यटन सर्किट विकसित करने पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इस प्रक्रिया में इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन सहित प्रमुख हितधारकों की सहभागिता से पर्यटन को संगठित और विस्तारित स्वरूप देने की दिशा में सहमति बनेगी।

    विक्रमोत्सव महानाट्य मंचन के स्थल का अवलोकन

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव वाराणसी के बी.एल.डब्ल्यू मैदान में 3 से 5 अप्रैल तक होने वाले महानाट्य विक्रमोत्सव के कार्यक्रम स्थल का मुआयना भी करेंगे।