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  • वाराणसी में जुटेंगे दुनिया के दार्शनिक विचारक, अरस्तू-कन्फ्यूशियस संगोष्ठी में डॉ. प्रीति अदाणी देंगी अहम संबोधन

    वाराणसी में जुटेंगे दुनिया के दार्शनिक विचारक, अरस्तू-कन्फ्यूशियस संगोष्ठी में डॉ. प्रीति अदाणी देंगी अहम संबोधन

    नई दिल्ली । दुनिया की प्राचीन दार्शनिक और सभ्यतागत परंपराओं के बीच संवाद को मजबूत बनाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश के वाराणसी में 2 से 4 नवंबर 2026 तक अंतरराष्ट्रीय ‘अरस्तू-कन्फ्यूशियस संगोष्ठी 2026’ का आयोजन किया जाएगा। इस तीन दिवसीय सम्मेलन में विभिन्न देशों के विचारक, शिक्षाविद, विशेषज्ञ और ज्ञान परंपराओं से जुड़े प्रतिनिधि एक मंच पर जुटेंगे। कार्यक्रम में अदाणी फाउंडेशन की संस्थापक एवं चेयरपर्सन डॉ. प्रीति अदाणी भी शामिल होंगी और अपने विचार रखेंगी। संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य अलग-अलग सभ्यताओं के दार्शनिक दृष्टिकोण को एक साथ लाकर वैश्विक चुनौतियों पर विचार-विमर्श करना है।

    इस सम्मेलन में प्राचीन दर्शन और आधुनिक तकनीक के बीच संबंधों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के बढ़ते उपयोग को देखते हुए यह समझने का प्रयास किया जाएगा कि नई तकनीक विभिन्न भाषाओं, संस्कृतियों और विचारधाराओं के बीच संवाद को किस तरह आसान बना सकती है। इसके साथ ही ज्ञान की अलग-अलग परंपराओं के बीच आपसी समझ और सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा होगी।

    इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन के लिए वाराणसी को चुना जाना भी विशेष महत्व रखता है। गंगा नदी के किनारे बसा यह शहर दुनिया के सबसे प्राचीन और लगातार आबाद रहने वाले नगरों में शामिल है। सदियों से वाराणसी शिक्षा, दर्शन, आध्यात्मिक चिंतन और धार्मिक परंपराओं का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां हिंदू, बौद्ध और जैन ज्ञान परंपराओं का ऐतिहासिक जुड़ाव भी देखने को मिलता है। ऐसे में विभिन्न सभ्यताओं के विचारों पर चर्चा के लिए इस शहर को उपयुक्त स्थान माना गया है।

    संगोष्ठी का आधार यह विचार है कि वर्तमान समय में दुनिया जिन जटिल समस्याओं से गुजर रही है, उनका समाधान केवल वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति से संभव नहीं है। भू-राजनीतिक तनाव, पर्यावरणीय संकट और तेजी से बदलती तकनीक जैसी चुनौतियों के बीच नैतिक मूल्यों, जिम्मेदार नेतृत्व और सांस्कृतिक समझ की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। सम्मेलन में इन विषयों को दार्शनिक दृष्टिकोण से समझने का प्रयास किया जाएगा।

    कार्यक्रम के दौरान यूनानी दार्शनिक अरस्तू और चीनी दार्शनिक कन्फ्यूशियस के विचारों के साथ हिंदू, बौद्ध, जैन, कैथोलिक और इस्लामी परंपराओं का तुलनात्मक अध्ययन किया जाएगा। विभिन्न विचारधाराओं में मौजूद समानताओं और उनके बीच के अंतर पर विशेषज्ञ अपनी बात रखेंगे। विशेष रूप से सद्गुण आधारित नैतिकता, सुशासन और सत्ता तथा शक्ति के उचित एवं नैतिक इस्तेमाल जैसे विषय चर्चा के केंद्र में रहेंगे।

    आयोजन के मुख्य सत्र 2 और 3 नवंबर को होंगे। इन सत्रों में विशेषज्ञों के व्याख्यान, विषय आधारित चर्चाएं और तुलनात्मक दर्शन से जुड़े संवाद आयोजित किए जाएंगे। वैश्विक शासन व्यवस्था और शांति जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी विचार रखे जाएंगे। इसके अलावा आधुनिक तकनीक, खासकर एआई आधारित भाषा और संवाद उपकरणों के इस्तेमाल पर चर्चा होगी। इन तकनीकों के माध्यम से अलग-अलग भाषाओं में उपलब्ध ज्ञान और विचारों तक पहुंच आसान बनाने की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा।

    सम्मेलन का अंतिम दिन यानी 4 नवंबर सांस्कृतिक भ्रमण और ऐतिहासिक विरासत को समझने के लिए निर्धारित किया गया है। इस दौरान प्रतिभागी गंगा घाटों का भ्रमण करेंगे और गंगा आरती में शामिल होंगे। इसके अलावा प्रमुख मंदिरों के दर्शन तथा बौद्ध धर्म के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल सारनाथ की यात्रा भी कार्यक्रम का हिस्सा होगी।

    इस तरह तीन दिवसीय संगोष्ठी में एक ओर प्राचीन दार्शनिक विचारों और नैतिक मूल्यों पर चर्चा होगी, तो दूसरी ओर आधुनिक दुनिया की चुनौतियों के समाधान में उनकी प्रासंगिकता समझने का प्रयास किया जाएगा। सम्मेलन में शामिल होने वाले प्रतिनिधियों को वाराणसी की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को करीब से देखने का अवसर भी मिलेगा।

  • वाराणसी के नमो घाट पर पीएम मोदी ने देखा वायुसेना का शौर्य, राफेल-सुखोई समेत 100 विमानों के प्रदर्शन ने खींचा ध्यान

    वाराणसी के नमो घाट पर पीएम मोदी ने देखा वायुसेना का शौर्य, राफेल-सुखोई समेत 100 विमानों के प्रदर्शन ने खींचा ध्यान

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित नमो घाट पर रविवार को भारतीय वायुसेना के ‘विंग्स ओवर गंगा’ एयर शो का आयोजन किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्यक्रम में शामिल होकर आसमान में लड़ाकू विमानों की कलाबाजी और वायुसेना की हवाई क्षमताओं का प्रदर्शन देखा। इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे। भारतीय वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम को देखने के लिए गंगा घाटों पर बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।

    एयर शो के दौरान विमानों की उड़ान, उनके बीच समन्वय और हवाई करतब दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहे। कार्यक्रम में राफेल और सुखोई जैसे लड़ाकू विमानों सहित कुल 100 विमानों के शामिल होने की जानकारी दी गई। इनमें 52 लड़ाकू विमान बताए गए। गंगा के ऊपर विमानों की गतिविधियों को देखने के लिए सुबह से ही नमो घाट और आसपास के घाटों पर लोगों की भीड़ जुटने लगी थी।

    प्रधानमंत्री मोदी कार्यक्रम के दौरान सफेद टोपी और चश्मा पहने नजर आए। उनके साथ मंच पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उपस्थित थे। वायुसेना प्रमुख ने प्रधानमंत्री का स्वागत करते हुए उन्हें एक पेंटिंग भेंट की। आयोजन के जरिए भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता और हवाई प्रदर्शन से जुड़ी दक्षता को प्रदर्शित किया गया।

    एयर शो से पहले प्रधानमंत्री ने वाराणसी के रूपापुर में अरविंद टेक्सटाइल मिल की नई इकाई का उद्घाटन किया। इस परियोजना की लागत करीब 100 करोड़ रुपये बताई गई है। उद्घाटन के दौरान उन्होंने वहां काम करने वाली महिला कर्मचारियों से भी बातचीत की। इस इकाई को क्षेत्र में विनिर्माण गतिविधियों और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने से जोड़कर देखा जा रहा है।

    टेक्सटाइल इकाई के उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री पुलिस लाइन से नमो घाट तक रोड शो करते हुए पहुंचे। इस मार्ग की दूरी करीब सात किलोमीटर बताई गई। रास्ते में प्रधानमंत्री की एक झलक पाने के लिए बड़ी संख्या में लोग जमा हुए। उनके स्वागत में ढोल-नगाड़े बजाए गए और भजन गाए गए। इस दौरान समर्थकों ने प्रधानमंत्री के काफिले पर फूल भी बरसाए।

    ‘विंग्स ओवर गंगा’ का आयोजन भारतीय वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ के अवसर पर किया गया। कार्यक्रम में लड़ाकू विमानों के प्रदर्शन के साथ वायुसेना की हवाई संचालन क्षमता को आम लोगों के सामने प्रस्तुत किया गया। राफेल और सुखोई जैसे विमानों की भागीदारी ने आयोजन को विशेष आकर्षण दिया। गंगा के किनारे से आसमान में विमानों की गतिविधियां देखने के लिए स्थानीय निवासियों के अलावा अन्य दर्शक भी पहुंचे।

    वाराणसी में आयोजित इस एयर शो में प्रधानमंत्री की मौजूदगी के साथ औद्योगिक परियोजना का उद्घाटन भी दौरे का हिस्सा रहा। एक ओर टेक्सटाइल इकाई के माध्यम से विनिर्माण और रोजगार से जुड़ी पहल सामने आई, वहीं दूसरी ओर एयर शो ने भारतीय वायुसेना की क्षमताओं को प्रदर्शित किया। नमो घाट पर आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति ने इसे वाराणसी के प्रमुख आयोजनों में शामिल कर दिया।

  • वाराणसी में विंग्स ओवर गंगा एयर शो, राफेल-सुखोई समेत 100 विमानों ने दिखाई ताकत..

    वाराणसी में विंग्स ओवर गंगा एयर शो, राफेल-सुखोई समेत 100 विमानों ने दिखाई ताकत..

    नई दिल्ली । वाराणसी में भारतीय वायुसेना के 94वें स्थापना वर्ष के अवसर पर आयोजित विंग्स ओवर गंगा एयर शो में लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों और परिवहन विमानों ने अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया। 22 अक्टूबर 2026 से शुरू हुए इस कार्यक्रम में देश के 12 एयरबेस से आए कुल 100 विमान शामिल हुए। रविवार, 25 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी वाराणसी पहुंचे और रोड शो किया। इस दौरान शहर में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए।

    काशी में आयोजित इस एयर शो को बड़े स्तर पर आयोजित किया गया। इसमें भारतीय वायुसेना के कई प्रमुख लड़ाकू विमानों ने उड़ान भरकर अपनी क्षमता दिखाई। राफेल, सुखोई, मिराज-2000, मिग-29 और जगुआर जैसे विमानों ने हवाई प्रदर्शन में हिस्सा लिया। इनके अलावा अपाचे और चिनूक हेलीकॉप्टरों ने भी अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया। सी-295, सी-17 और सी-130 जैसे परिवहन विमानों की मौजूदगी भी कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रही।

    इस आयोजन में देश के 12 एयरबेस से विमान वाराणसी पहुंचे। इनमें चेन्नई और ग्वालियर के एयरबेस भी शामिल थे। काशी में पहली बार इतने बड़े स्तर पर एयर शो आयोजित किया गया। विभिन्न विमानों की उड़ानों और सामूहिक फॉर्मेशन के जरिए वायुसेना की परिचालन क्षमता और हवाई प्रदर्शन का परिचय दिया गया।

    एयर शो में विमानों की उड़ान के साथ वाराणसी की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को भी प्रदर्शित किया गया। आसमान में विमानों ने अलग-अलग समूह बनाकर कई आकृतियां तैयार कीं। इन फॉर्मेशन को महादेव, नटराज, कैलाश, विश्वनाथ, त्रिदेव, वरुणा, हनुमान, ओंकार, भागीरथी, काशी और रुद्र जैसे नाम दिए गए। इन नामों के माध्यम से काशी की परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को हवाई प्रदर्शन से जोड़ने का प्रयास किया गया।

    कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की। पूरे जिले को 30 जोन और 50 से अधिक सेक्टर में बांटा गया। सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए 11,500 से ज्यादा जवान तैनात किए गए। इसके साथ ही निगरानी के लिए 200 सीसीटीवी कैमरों का इस्तेमाल किया गया।

    प्रशासन ने करीब 50 लाख लोगों की भीड़ को संभालने के मद्देनजर इंतजाम किए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वाराणसी पहुंचने और रोड शो के कार्यक्रम को देखते हुए भी सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया। शहर में विभिन्न स्थानों पर पुलिस बल की तैनाती और निगरानी के जरिए आयोजन के दौरान व्यवस्था बनाए रखने की तैयारी की गई।

    विंग्स ओवर गंगा एयर शो में लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों और परिवहन विमानों की भागीदारी के साथ काशी की सांस्कृतिक पहचान को भी प्रमुखता दी गई। 12 एयरबेस से आए 100 विमानों की मौजूदगी ने इस आयोजन को बड़े स्तर का हवाई प्रदर्शन बनाया।

  • पीएम मोदी का यूपी और ओडिशा दौरा कल, वाराणसी में एयर डिस्प्ले और भुवनेश्वर में RBI की नई सुविधाओं का उद्घाटन

    पीएम मोदी का यूपी और ओडिशा दौरा कल, वाराणसी में एयर डिस्प्ले और भुवनेश्वर में RBI की नई सुविधाओं का उद्घाटन


    नई दिल्ली ।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश और ओडिशा के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वाराणसी में औद्योगिक विकास से जुड़ी नई गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का उद्घाटन किया जाएगा। इसके बाद प्रधानमंत्री भारतीय वायुसेना के ‘विंग्स ओवर गंगा’ एयर डिस्प्ले में शामिल होंगे। दौरे के अगले चरण में वह ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर पहुंचेंगे, जहां भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान का उद्घाटन करेंगे।

    प्रधानमंत्री का कार्यक्रम उद्योग, रोजगार, महिला भागीदारी, रक्षा क्षमताओं और डिजिटल वित्तीय बुनियादी ढांचे से जुड़ी पहलों पर केंद्रित रहेगा। दोनों राज्यों में प्रस्तावित कार्यक्रमों के जरिए विनिर्माण क्षेत्र और वित्तीय तकनीक से संबंधित सुविधाओं को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।

    वाराणसी में प्रधानमंत्री सुबह करीब 11 बजे अरविंद लिमिटेड की नई गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का उद्घाटन करेंगे। आधुनिक विनिर्माण प्रक्रियाओं पर आधारित इस इकाई से क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। परियोजना में महिलाओं की भागीदारी पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिससे महिला-नेतृत्व वाले विकास को प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।

    इस इकाई में तैयार होने वाले परिधानों को कंपनी के वैश्विक ग्राहक नेटवर्क के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाया जाएगा। इससे वाराणसी और आसपास के क्षेत्रों में विनिर्माण गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं बन सकती हैं। परियोजना को उत्तर प्रदेश में औद्योगिक निवेश बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर विकसित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    वाराणसी में प्रधानमंत्री दोपहर करीब एक बजे नमो घाट पर भारतीय वायुसेना के एयर डिस्प्ले-2026 में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। ‘विंग्स ओवर गंगा’ थीम पर आयोजित इस कार्यक्रम में वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ के अवसर पर उसकी परिचालन क्षमता और हवाई कौशल प्रदर्शित किया जाएगा।

    एयर डिस्प्ले में तेजस, एलसीएच प्रचंड, सुखोई-30 एमकेआई और राफेल जैसे लड़ाकू विमान हिस्सा लेंगे। इनके साथ परिवहन विमानों की भी भागीदारी होगी। भारतीय थलसेना और नौसेना की मौजूदगी के माध्यम से तीनों सेनाओं के बीच समन्वय और संयुक्त संचालन क्षमता को भी प्रदर्शित किया जाएगा।

    कार्यक्रम में वायुसेना की सूर्य किरण एरोबैटिक टीम और सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम हवाई करतब दिखाएंगी। इन प्रदर्शनों में विमानों और हेलीकॉप्टरों के बीच सटीक तालमेल, नियंत्रित उड़ान और संचालन संबंधी दक्षता देखने को मिलेगी।

    वाराणसी के कार्यक्रमों के बाद प्रधानमंत्री ओडिशा रवाना होंगे। शाम करीब 4:45 बजे भुवनेश्वर में वह RBI के नए डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर वह जनसभा को भी संबोधित करेंगे।

    RBI का नया डेटा सेंटर देश की वित्तीय प्रणाली के डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें चार अत्याधुनिक डेटा सेंटर होंगे, जहां महत्वपूर्ण भुगतान और निपटान प्रणालियों सहित RBI की प्रमुख डिजिटल सेवाओं से जुड़े सिस्टम संचालित किए जाएंगे। इस सुविधा को अपटाइम इंस्टीट्यूट के टियर-IV मानक का प्रमाणन मिला है, जो डेटा सेंटर की परिचालन मजबूती और विश्वसनीयता से संबंधित उच्च स्तर का मानक है।

    भुवनेश्वर में स्थापित होने वाला साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान वित्तीय क्षेत्र में तकनीकी विशेषज्ञता, शोध और प्रशिक्षण को बढ़ावा देगा। यहां क्वांटम कंप्यूटिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और अन्य उन्नत तकनीकों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसका उद्देश्य वित्तीय संस्थानों की साइबर सुरक्षा क्षमता मजबूत करना और नई तकनीकी चुनौतियों से निपटने के लिए विशेषज्ञ तैयार करना है।

  • मोदी-आबे की दोस्ती से भारत-जापान संबंधों तक, काशी में स्मारक उद्घाटन के दौरान योगी ने बताई इस रिश्ते की खास कहानी

    मोदी-आबे की दोस्ती से भारत-जापान संबंधों तक, काशी में स्मारक उद्घाटन के दौरान योगी ने बताई इस रिश्ते की खास कहानी

    नई दिल्ली । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत शिंजो आबे की दोस्ती को पद से नहीं बल्कि विश्वास से बना रिश्ता बताया। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के पद बदलते रहे, लेकिन उनकी मित्रता कायम रही। वाराणसी के रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में शिंजो आबे मेमोरियल कॉरिडोर के उद्घाटन समारोह में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की जनसेवा यात्रा के 25 वर्ष पूरे होने के दिन आबे की स्मृति को समर्पित गलियारे का उद्घाटन विशेष संयोग है।

    मुख्यमंत्री योगी ने जापान की पूर्व प्रथम महिला और शिंजो आबे की पत्नी अकी आबे के साथ कॉरिडोर का अनावरण किया। उन्होंने इसे उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ जनता, प्रधानमंत्री मोदी और 140 करोड़ भारतीयों की ओर से शिंजो आबे को श्रद्धांजलि बताया। योगी ने कहा कि जापान ने काशी को रुद्राक्ष दिया और अब काशी उसी रुद्राक्ष में जापान के पूर्व प्रधानमंत्री की स्मृति को स्थायी रूप से संजो रही है।

    योगी ने दोनों नेताओं की पहली मुलाकात का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2007 में गुजरात के मुख्यमंत्री रहते प्रधानमंत्री मोदी जापान गए थे, जहां उनकी शिंजो आबे से पहली मुलाकात हुई। उसी साल आबे ने भारत की संसद में भारत और जापान की मजबूती को एक-दूसरे के हित से जोड़ा था। वर्ष 2014 में काशी-क्योटो पार्टनर सिटी समझौता हुआ और 2015 में शिंजो आबे ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ काशी में गंगा आरती में हिस्सा लिया। 2017 में दोनों नेताओं ने अहमदाबाद में बुलेट ट्रेन परियोजना का शिलान्यास किया, जबकि 2018 में आबे ने प्रधानमंत्री मोदी को यामानाशी स्थित अपने निजी आवास पर आमंत्रित किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जब दो नेताओं की मित्रता दो देशों के विश्वास में बदलती है तो उसके व्यापक प्रभाव होते हैं। उन्होंने बताया कि 2021 में शिंजो आबे को भारत के प्रमुख नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। सितंबर 2022 में प्रधानमंत्री मोदी अपने मित्र को अंतिम विदाई देने टोक्यो पहुंचे और भारत में राष्ट्रीय शोक रखा गया। योगी ने इसे प्रोटोकॉल के बजाय व्यक्तिगत रिश्ते से जुड़ा कदम बताया।

    उन्होंने भारत-जापान संबंधों को विश्वास पर आधारित बताते हुए कहा कि करीब 1400 जापानी कंपनियां भारत में काम कर रही हैं। दोनों देशों का सहयोग अब सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रीन हाइड्रोजन और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे क्षेत्रों तक पहुंच चुका है। उनके अनुसार जापान के पास तकनीक और अनुभव है, जबकि भारत के पास प्रतिभा और युवा ऊर्जा है।

    योगी ने इसी वर्ष फरवरी में अपनी जापान यात्रा का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि टोक्यो और यामानाशी में जापानी कंपनियों के साथ हजारों करोड़ रुपये के निवेश समझौते हुए। उन्होंने जापान में मैग्लेव ट्रेन की प्रिसिजन इंजीनियरिंग को करीब से देखने की बात कही। यामानाशी को उत्तर प्रदेश का ग्रीन हाइड्रोजन एनर्जी पार्टनर बताया गया। उन्होंने कहा कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के ईडा क्षेत्र में 500 एकड़ में जापानी सिटी विकसित की जा रही है और इन्वेस्ट यूपी में यामानाशी डेस्क भी बनाई गई है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जापान के पास प्रिसिजन है तो उत्तर प्रदेश के पास बड़े स्तर पर काम करने की क्षमता, 25 करोड़ लोगों का बाजार, देश का सबसे युवा वर्कफोर्स और एक्सप्रेसवे तथा एयरपोर्ट का बड़ा नेटवर्क है। उन्होंने बताया कि 2027 में भारत-जापान राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होंगे और आबे मेमोरियल कॉरिडोर इस अवसर की शुरुआती भेंट है। उन्होंने काशी और क्योटो को अपनी-अपनी सभ्यताओं की आत्मा बताते हुए कहा कि दोनों शहर विरासत के संरक्षण के साथ विकास का संदेश देते हैं।

    योगी ने कॉरिडोर को नई पीढ़ी के लिए जीवंत क्लासरूम बताया। अकी आबे ने शिंजो आबे और प्रधानमंत्री मोदी के आत्मीय संबंधों को याद किया और कहा कि 2015 में काशी आने के बाद उनके पति उनसे गंगा आरती और वाराणसी की यादें साझा करते थे। उन्होंने कहा कि आबे जीवित होते तो अपने नाम पर बने स्मारक को देखकर खुश होते। अकी आबे ने रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर की बाहरी दीवारों पर लगे 108 रुद्राक्षों की भी प्रशंसा की और बताया कि जापान में भी 108 संख्या का विशेष महत्व है।

  • काशी के पिशाचमोचन में अकाल मौत का तर्पण, घोड़े का कान और गाय की पूंछ छूने की अनोखी परंपरा

    काशी के पिशाचमोचन में अकाल मौत का तर्पण, घोड़े का कान और गाय की पूंछ छूने की अनोखी परंपरा


    नई दिल्ली: पितृपक्ष के दौरान वाराणसी के पिशाचमोचन में हर दिन 20 हजार से ज्यादा लोग पूर्वजों और अकाल मौत से जुड़े श्राद्ध कर्म कराने पहुंच रहे हैं। आदि गंगा विमलोदत्त कुंड के किनारे इन दिनों 10 से 12 तरह के श्राद्ध कर्म कराए जा रहे हैं। नारायण बलि, त्रिपिंडी श्राद्ध और तर्पण के बाद यहां दो विशेष प्रक्रियाएं पूरी की जाती हैं। इनमें संजाब नस्ल के शक्ति घोड़े का कान छूना और अकाल मौत वाले व्यक्ति की फोटो पीपल के सूखे पेड़ पर लगाना शामिल है। मान्यता के अनुसार, इन्हें पितरों और आत्माओं की शांति की कामना से जुड़ी अंतिम प्रक्रिया माना जाता है। पिशाचमोचन पर पितृपक्ष शुरू होने से एक दिन पहले से संजाब नस्ल के दो घोड़े खड़े हैं। इनका इस्तेमाल साल में केवल श्राद्ध के 15 दिनों के दौरान होता है। बाकी समय इनकी बुकिंग विवाह समारोहों के लिए की जाती है।

    पिशाचमोचन क्षेत्र में 10 से 15 पीपल के पेड़ हैं, जिन पर करीब 500 फोटो फ्रेम लगे हुए हैं। वहां मौजूद पंडित अमित मिश्रा के अनुसार, इन पेड़ों पर उन आत्माओं की तस्वीरें लगाई जाती हैं, जिनकी अचानक मौत हुई और जिन्हें शांतिपूर्वक विदा नहीं माना गया। उन्होंने बताया कि लोग ऐसी आत्माओं की शांति के लिए यहां श्राद्ध कराने आते हैं। इसी तरह गाजीपुर के मुख्तार की पत्नी और बेटी भी करीब 30 साल पहले हुई उनकी मौत के बाद श्राद्ध कराने यहां पहुंची थीं। परिवार का कहना था कि उनके पति सपने में आते थे और इससे उन्हें डर लगता था। पिशाचमोचन में अकाल मौत से मुक्ति के लिए पीपल के पेड़ पर फोटो फ्रेम लगाने के साथ कील ठोकने की प्रक्रिया भी श्राद्ध पूजा के पैकेज में शामिल है।

    यहां घोड़े का कान, भैंस का सींग और गाय की पूंछ छूकर पितरों के नाम पर दान करने की भी परंपरा है। जिस संजाब नस्ल के घोड़े का कान लोग छूते हैं, उसका नाम शक्ति है। एक व्यक्ति को घोड़े का कान छूने के लिए कम से कम 10 रुपये देने होते हैं। बताया गया है कि यह घोड़ा रोजाना कम से कम 50 हजार रुपये तक कमा लेता है। पिशाचमोचन में श्राद्ध कर्म कराने वालों में गरीब और संपन्न परिवार दोनों शामिल होते हैं। यहां नेता, जज, फिल्म स्टार और अन्य सम्पन्न परिवार भी तर्पण और पिंडदान के लिए पहुंचते हैं। एक मृतक के तर्पण की सामान्य लागत 15 से 20 हजार रुपये बताई गई है, जबकि कई बार यह खर्च 30 हजार रुपये तक पहुंच जाता है। भीड़ अधिक होने के कारण कुंड के किनारों के अलावा आसपास के पांच-छह भवनों में भी श्राद्ध कर्म कराए जाते हैं।

    अकाल मौत के लिए यहां सबसे महंगा श्राद्ध नारायण बलि बताया गया है। पांच ब्राह्मणों से नारायण बलि कराने की लागत 15 हजार रुपये है, जबकि त्रिपिंडी श्राद्ध के लिए आठ हजार रुपये और पार्वण श्राद्ध के लिए 2500 रुपये लिए जाते हैं। गयातीर्थ और गया श्राद्ध की कीमत निश्चित नहीं है और यह 1100 से 2500 रुपये या उससे अधिक हो सकती है। यदि एक ही परिवार में कई लोगों की अकाल मौत हुई हो तो प्रत्येक व्यक्ति के लिए अलग श्राद्ध कराया जाता है। पांच लोगों की अकाल मौत होने पर सभी के लिए अलग-अलग नारायण बलि करानी होती है और प्रत्येक के लिए कम से कम 15 हजार रुपये का खर्च बताया गया है।

    पिशाचमोचन में श्राद्ध कर्म की व्यवस्था बड़े स्तर पर होती है। मुन्ना पंडा के परिवार के लोग यहां प्रमुख महंत होते हैं, जबकि पितृपक्ष के 15 दिनों के लिए करीब 400 पंडे श्राद्ध कराने में जुटते हैं। तर्पण के लिए बैठने की जगह का किराया 500 रुपये लिया जाता है। एक तर्पण में करीब डेढ़ से दो घंटे लगते हैं। काम सूर्योदय के साथ शुरू होकर आधी रात तक चलता है। यहां व्यवस्था के लिए पंडे वॉकी-टॉकी का इस्तेमाल करते हैं। पानी, गोबर, दूध और सफाई जैसी जरूरतों के लिए इसी माध्यम से कर्मचारियों को बुलाया जाता है। यहां आने वाले यजमानों को केवल दक्षिणा लेकर आने की जरूरत होती है, जबकि श्राद्ध और तर्पण में इस्तेमाल होने वाली अन्य सामग्री पैकेज के साथ यहीं उपलब्ध कराई जाती है।

  • पीएम मोदी के 76वें जन्मदिन पर काशी में विशेष पूजा, राजनाथ सिंह और योगी ने शुरू की सेवा संकल्प बाइक यात्रा

    पीएम मोदी के 76वें जन्मदिन पर काशी में विशेष पूजा, राजनाथ सिंह और योगी ने शुरू की सेवा संकल्प बाइक यात्रा

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन के अवसर पर वाराणसी में विशेष धार्मिक और सेवा कार्यक्रम आयोजित किए गए। काशी विश्वनाथ धाम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान समेत कई प्रमुख नेताओं ने पूजा-अर्चना की। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दीर्घायु और मंगलकामना के लिए विशेष अनुष्ठान किए गए।

    काशी विश्वनाथ मंदिर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा की गई। 11 हवन कुंडों पर आहुतियां दी गईं और बाबा विश्वनाथ का महारुद्राभिषेक किया गया। नेताओं ने मंदिर में विधि-विधान से पूजन कर प्रधानमंत्री के लिए मंगलकामना की। वाराणसी में प्रधानमंत्री के जन्मदिन से जुड़े कार्यक्रमों में धार्मिक आयोजन के साथ सेवा और जनसंपर्क से जुड़े कार्यक्रम भी शामिल किए गए हैं।

    जन्मदिन के अवसर पर वाराणसी से वडनगर तक सेवा संकल्प बाइक यात्रा भी शुरू की गई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यात्रा को हरी झंडी दिखाई। इस यात्रा का उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्ष के सार्वजनिक जीवन से जुड़े कार्यक्रमों के तहत सेवा और जनसंपर्क गतिविधियों को आगे बढ़ाना है। यात्रा में बड़ी संख्या में युवा और बाइक सवार शामिल हुए हैं।

    वाराणसी और वडनगर को इस आयोजन में विशेष रूप से जोड़ा गया है। वडनगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मस्थान है, जबकि वाराणसी उनका संसदीय क्षेत्र है। इसी वजह से दोनों स्थानों पर जन्मदिन से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। वडनगर से भी वाराणसी की दिशा में बाइक यात्रा रवाना की गई है। इस आयोजन के जरिए दोनों शहरों को सेवा संकल्प अभियान से जोड़ा गया है।

    प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन के मौके पर देश के अलग-अलग हिस्सों में भी विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। वाराणसी में धार्मिक अनुष्ठान और बाइक यात्रा के अलावा सेवा गतिविधियों पर जोर दिया गया। वहीं गुजरात के वडनगर में भी पूजा-अर्चना और अन्य कार्यक्रम हुए। इस दौरान प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने से जुड़े आयोजनों को भी अभियान का हिस्सा बनाया गया है।

    वाराणसी में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से जुड़े कई प्रमुख नेता भी मौजूद रहे। राजनाथ सिंह, योगी आदित्यनाथ, चंद्रबाबू नायडू और चिराग पासवान की मौजूदगी में काशी विश्वनाथ धाम में पूजा हुई। कार्यक्रम में धार्मिक अनुष्ठान के साथ सेवा संकल्प यात्रा को भी जोड़ा गया। प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर आयोजित इन कार्यक्रमों के जरिए वाराणसी और वडनगर को एक साथ जोड़ा गया है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में हुआ था। इस वर्ष उनके 76वें जन्मदिन के साथ उनके सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। जन्मदिन के मौके पर देशभर में सेवा, रक्तदान, धार्मिक अनुष्ठान और अन्य सामाजिक गतिविधियां आयोजित की गईं। वाराणसी का कार्यक्रम इन्हीं आयोजनों की कड़ी में प्रमुख रहा, जहां पूजा-अर्चना के बाद सेवा संकल्प बाइक यात्रा को आगे बढ़ाया गया।

  • वाराणसी की सड़कों पर सीवर का पानी, विदेशी पर्यटक भी परेशान, अखिलेश यादव ने योगी सरकार की व्यवस्था पर उठाए सवाल

    वाराणसी की सड़कों पर सीवर का पानी, विदेशी पर्यटक भी परेशान, अखिलेश यादव ने योगी सरकार की व्यवस्था पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली । वाराणसी के भेलूपुर स्थित शिवाला इलाके में सीवर का पानी सड़कों और आसपास के घरों तक पहुंचने से लोगों की परेशानी बढ़ गई। सड़कों और गलियों में गंदा पानी जमा होने के कारण स्थानीय लोगों को आने-जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। काशी घूमने पहुंचे विदेशी पर्यटक भी जलभराव वाले रास्तों से गुजरते नजर आए।

    शिवाला क्षेत्र में सीवर का पानी सड़क पर जमा होने के साथ आसपास की गलियों में भी फैल गया। कई स्थानों पर पानी घरों के आसपास तक पहुंच गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, जलभराव के कारण रोजमर्रा के काम प्रभावित हुए और आवागमन में भी परेशानी हुई। अस्सी क्षेत्र के कुछ रास्तों पर भी जलभराव की स्थिति सामने आई।

    वाराणसी में सामने आई इस स्थिति को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने योगी आदित्यनाथ सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए शहर की व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। वीडियो में शिवाला इलाके की स्थिति और गंदे पानी से होकर गुजरते लोगों को दिखाया गया था।

    मामला सामने आने के बाद जलकल विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल के निर्देश पर अधिकारियों ने प्रभावित इलाके का निरीक्षण किया। टीम ने पुरानी ट्रंक सीवर लाइन और कोनिया सीवेज पंपिंग स्टेशन का भी निरीक्षण किया।

    जांच के दौरान कुछ पंप बंद मिले। इसके बाद संबंधित विभाग के साथ समन्वय कर खराब पड़े पंपों को ठीक कराने का काम शुरू किया गया। अधिकारियों की कार्रवाई के बाद बंद पंपों को दोबारा चालू कराया गया।

    नगर निगम के अनुसार, करीब डेढ़ घंटे में पंप फिर से चलने लगे। इसके बाद सड़कों और गलियों में जमा सीवर के पानी को निकालने की प्रक्रिया शुरू की गई। इससे प्रभावित इलाकों में जमा पानी को हटाया गया और आवागमन की परेशानी को दूर करने का प्रयास किया गया।

    वाराणसी के अलग-अलग हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से जलभराव और सीवर से जुड़ी शिकायतें सामने आने की बात कही गई है। शिवाला और अस्सी क्षेत्र की स्थिति के बाद नगर निगम की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे। खास तौर पर उन इलाकों में समस्या सामने आई जहां स्थानीय लोगों के साथ काशी घूमने आने वाले पर्यटक भी पहुंचते हैं।

    शिवाला में सीवर का पानी सड़क पर जमा होने के दौरान विदेशी पर्यटकों को भी उसी रास्ते से गुजरना पड़ा। इससे इलाके में मौजूद लोगों के साथ बाहर से आए पर्यटकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    नगर निगम ने तत्काल समस्या से निपटने के बाद भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए स्थायी ड्रेनेज प्लान तैयार करने की बात कही है। विभाग की ओर से पंपों की स्थिति की जांच और सीवर व्यवस्था को लेकर की गई कार्रवाई के बाद तत्काल जमा पानी निकालने का काम पूरा किया गया।

    इस पूरे घटनाक्रम में एक ओर जलभराव और सीवर के पानी को लेकर स्थानीय लोगों की परेशानी सामने आई, वहीं दूसरी ओर मामले को लेकर अखिलेश यादव ने सरकार पर राजनीतिक तंज कसा। उनके वीडियो साझा करने के बाद संबंधित विभाग ने मौके पर कार्रवाई करते हुए बंद पंपों को चालू कराया और जमा पानी निकालने का काम शुरू किया।

  • UP: वाराणसी को मिलेगी बड़ी सौगात…200 करोड़ से बनेगा प्रदेश का पहला अंतरराष्ट्रीय क्रूज टर्मिनल

    UP: वाराणसी को मिलेगी बड़ी सौगात…200 करोड़ से बनेगा प्रदेश का पहला अंतरराष्ट्रीय क्रूज टर्मिनल


    वाराणसी।
    वाराणसी (Varanasi) में प्रदेश का पहला अंतरराष्ट्रीय क्रूज टर्मिनल (International Cruise Terminal) बनाया जाएगा। आईडब्ल्यूएआई की ओर से निर्माण कराया जाएगा। नगर निगम सामनेघाट में 2 एकड़ जमीन उपलब्ध कराएगा। इस क्रूज टर्मिनल (Cruise Terminal) पर दुनिया भर से बड़े जहाजों और मालवाहकों का ठहराव होगा। पर्यटन के साथ जल परिवहन के जरिये हल्दिया तक की यात्रा होगी। रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा। निर्माण में 200 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

    आईडब्ल्यूएआई के निदेशक संजीव कुमार ने बताया कि जल्द ही जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। सामनेघाट में बनने वाले अंतरराष्ट्रीय क्रूज टर्मिनल में एक समय में 10,000 यात्रियों की क्षमता होगी। इमिग्रेशन काउंटर, कस्टम्स काउंटर, डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर, बैगेज स्कैनर, सुरक्षा जांच काउंटर, सीसीटीवी निगरानी, पब्लिक एड्रेस सिस्टम होगा।

    यात्रियों के लिए पैसेंजर लाउंज, बैगेज ट्रॉली, इलेक्ट्रिक बग्गी, शौचालय, मोबाइल चार्जिंग पॉइंट होंगे। इसके अलावा कैफेटेरिया और ड्यूटी-फ्री शॉपिंग के लिए व्यावसायिक जगह भी होगी। वाहन पार्किंग और प्रीपेड टैक्सी की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। टर्मिनल को दिव्यांग-अनुकूल बनाया जाएगा। अभी मुख्यालय में डीपीआर तैयार की जा रही है।


    कोच्चि से 3.6 गुना बड़ा होगा क्रूज टर्मिनल

    कोच्चि के सागरिका में 2,253 वर्गमीटर क्रूज टर्मिनल बनाया गया है। कोच्चि टर्मिनल में 48 इमिग्रेशन काउंटर, 10-12 कस्टम काउंटर, बैगेज स्कैनर, लाउंज, ड्यूटी-फ्री शॉप और पार्किंग जैसी सुविधाएं हैं। इसके मुकाबले वाराणसी में सामनेघाट पर दो एकड़ यानी 8,094 वर्गमीटर में टर्मिनल का निर्माण होगा। ऐसे में वाराणसी का प्रस्तावित टर्मिनल क्षेत्रफल के लिहाज से कोच्चि से करीब 3.6 गुना बड़ा होगा।


    रोजगार और व्यापार के बढ़ेंगे अवसर

    टर्मिनल के निर्माण के बाद वाराणसी में अंतरराष्ट्रीय स्तर की योजनाओं के एक बेड़े में एक और उपलब्धि जुड़ जाएगी। टर्मिनल बन जाने से देश विदेश से व्यापार बढ़ जाएगा। अभी तक जो व्यापार पानी के रास्ते नहीं हो पा रहा था वो आने वाले समय में संभव होगा। इसके साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा।

  • वाराणसी एयरपोर्ट पर हथियार जांच के दौरान यात्री की बंदूक से चली गोली, दो AAICLAS कर्मचारी घायल हुए

    वाराणसी एयरपोर्ट पर हथियार जांच के दौरान यात्री की बंदूक से चली गोली, दो AAICLAS कर्मचारी घायल हुए

    नई दिल्ली । वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर रविवार सुबह हथियार की जांच के दौरान अचानक गोली चलने से अफरा तफरी मच गई। घटना में एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच से जुड़े दो AAICLAS स्क्रीनर्स घायल हो गए। दोनों को तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। घटना सुबह करीब 9:30 बजे की बताई जा रही है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और गोली चलने की परिस्थितियों का पता लगाया जा रहा है।

    जानकारी के अनुसार, एक यात्री अपनी पत्नी के साथ मुंबई जाने वाली फ्लाइट पकड़ने के लिए एयरपोर्ट पहुंचा था। यात्री के पास बंदूक थी और उसने विमान यात्रा के दौरान हथियार ले जाने की जानकारी संबंधित अधिकारियों को पहले ही दे दी थी। इसके बाद निर्धारित सुरक्षा प्रक्रिया के तहत हथियार की जांच की जा रही थी।

    बताया गया है कि हथियार की जांच के दौरान अचानक बंदूक से एक राउंड फायर हो गया। गोली चलने के बाद एयरपोर्ट परिसर में मौजूद लोगों के बीच कुछ समय के लिए अफरा तफरी का माहौल बन गया। घटना में सुरक्षा जांच का काम कर रहे दो AAICLAS स्क्रीनर्स घायल हो गए।

    घटना के तुरंत बाद दोनों घायल कर्मचारियों को न्यू लक्ष्मी ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहां उनका इलाज शुरू किया गया। घायलों की स्थिति को लेकर फिलहाल विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। अधिकारियों की ओर से उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर आगे जानकारी दी जा सकती है।

    जिस यात्री के हथियार से गोली चली, वह मुंबई जाने वाली IX-1810 फ्लाइट से यात्रा करने वाला था। वह अपनी पत्नी के साथ एयरपोर्ट पहुंचा था। हथियार साथ होने की जानकारी पहले से दिए जाने के बावजूद जांच के दौरान अचानक फायरिंग हो गई। इस कारण अब सुरक्षा प्रक्रिया और घटना की परिस्थितियों की जांच महत्वपूर्ण हो गई है।

    घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस को जानकारी दी गई। पुलिस ने मौके से जुड़े घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि बंदूक से गोली किस परिस्थिति में चली और हथियार की जांच के समय सुरक्षा संबंधी निर्धारित प्रक्रियाओं का किस तरह पालन किया जा रहा था।

    पुलिस और संबंधित अधिकारी यह भी समझने की कोशिश कर रहे हैं कि फायरिंग के समय हथियार की स्थिति क्या थी और जांच के दौरान किन परिस्थितियों में अचानक एक राउंड फायर हुआ। मामले में उपलब्ध जानकारी और घटनास्थल से जुड़े तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    एयरपोर्ट जैसे संवेदनशील परिसर में हथियार की जांच के दौरान गोली चलने की घटना सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, घटना के कारणों को लेकर किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच पूरी होना जरूरी है। फिलहाल अधिकारियों का ध्यान घायलों के उपचार और घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने पर है।

    पुलिस की जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि फायरिंग किस वजह से हुई और इस दौरान सुरक्षा प्रक्रिया में किसी स्तर पर चूक हुई थी या नहीं। फिलहाल मामले से जुड़े तथ्यों को जुटाया जा रहा है और आगे की जानकारी जांच के आधार पर सामने आने की संभावना है।