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  • घर में सुख शांति और समृद्धि के लिए अपनाएं ये वास्तु टिप्स, मुख्य द्वार से बेडरूम तक जानें किन बातों का रखें ध्यान

    घर में सुख शांति और समृद्धि के लिए अपनाएं ये वास्तु टिप्स, मुख्य द्वार से बेडरूम तक जानें किन बातों का रखें ध्यान


    नई दिल्ली। घर केवल ईंट और दीवारों से बनी जगह नहीं होता बल्कि यह परिवार के सुख शांति और सकारात्मक माहौल से जुड़ा स्थान माना जाता है। वास्तु शास्त्र में घर की दिशा कमरे की व्यवस्था और वस्तुओं को रखने के स्थान का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता के अनुसार घर में चीजों को सही दिशा और व्यवस्थित तरीके से रखने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बेहतर हो सकता है। यही वजह है कि लोग नया घर बनाते समय या पुराने घर में बदलाव करते समय वास्तु से जुड़े नियमों का ध्यान रखते हैं।

    घर के मुख्य द्वार को वास्तु में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता के अनुसार मुख्य प्रवेश द्वार साफ सुथरा और रोशनी वाला होना चाहिए। दरवाजे के आसपास बेकार सामान या कूड़ा जमा नहीं करना चाहिए। प्रवेश द्वार पर पर्याप्त प्रकाश रखने और नियमित सफाई करने से घर का वातावरण भी बेहतर बना रहता है। घर के दरवाजे की आवाज यदि बहुत अधिक आती है तो उसकी मरम्मत कराना भी उचित माना जाता है क्योंकि वास्तु में इसे सकारात्मक वातावरण के लिए अच्छा नहीं माना जाता।

    वास्तु के अनुसार घर का उत्तर और पूर्व दिशा विशेष महत्व रखती है। इन दिशाओं में पर्याप्त रोशनी और खुली जगह रखना शुभ माना जाता है। घर में खिड़कियां और प्राकृतिक रोशनी आने की व्यवस्था होने से वातावरण हवादार और आरामदायक रहता है। भारी सामान रखने के लिए दक्षिण और पश्चिम दिशा को अपेक्षाकृत उपयुक्त माना जाता है। हालांकि घर की बनावट और उपलब्ध जगह के अनुसार फर्नीचर की व्यवस्था अलग हो सकती है।

    रसोई को लेकर भी वास्तु में कई मान्यताएं हैं। सामान्य तौर पर दक्षिण पूर्व दिशा को अग्नि तत्व से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए इस दिशा को रसोई के लिए उपयुक्त माना जाता है। रसोई में गैस चूल्हा और पानी के स्थान को व्यवस्थित रखने की सलाह दी जाती है। सिंक और चूल्हे के बीच पर्याप्त दूरी रखना व्यावहारिक रूप से भी सुविधाजनक हो सकता है। रसोई को साफ रखना घर के स्वास्थ्य और स्वच्छता के लिए सबसे जरूरी है।

    शयनकक्ष में भी अनावश्यक सामान जमा करने से बचना चाहिए। बिस्तर के नीचे कबाड़ या लंबे समय से इस्तेमाल न होने वाली वस्तुएं रखने के बजाय जगह को खाली रखना बेहतर होता है। कमरे में हल्की और आरामदायक रोशनी तथा पर्याप्त हवा आने की व्यवस्था नींद और आराम के लिए उपयोगी हो सकती है। दर्पण को बिस्तर के ठीक सामने लगाने से बचने की सलाह कई वास्तु परंपराओं में दी जाती है।

    घर के पूजा स्थल को साफ और शांत स्थान पर रखना चाहिए। पूजा के स्थान पर नियमित सफाई करें और वहां अनावश्यक सामान जमा न होने दें। पौधे लगाने की बात करें तो घर में हरियाली वातावरण को सुंदर और ताजा बनाने में मदद करती है। सूखे और मुरझाए पौधों को घर में लंबे समय तक रखना उचित नहीं माना जाता क्योंकि इससे घर की सुंदरता भी प्रभावित होती है।

    सबसे जरूरी बात यह है कि वास्तु से जुड़े उपायों को आस्था और परंपरा के रूप में देखा जाना चाहिए। घर में सुख शांति बनाए रखने के लिए साफ सफाई पर्याप्त रोशनी अच्छा वेंटिलेशन और व्यवस्थित जीवनशैली का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है। बिना सोचे समझे किसी बड़े निर्माण परिवर्तन या तोड़फोड़ के बजाय विशेषज्ञ की सलाह और घर की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखना बेहतर है। सकारात्मक माहौल के लिए घर को साफ व्यवस्थित और शांत रखना सबसे आसान और उपयोगी उपायों में से एक है।

  • Vastu Tips For Home, घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने के आसान उपाय, जानें किस दिशा में क्या रखना माना जाता है शुभ

    Vastu Tips For Home, घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने के आसान उपाय, जानें किस दिशा में क्या रखना माना जाता है शुभ


    नई दिल्ली। घर केवल ईंट और दीवारों से बनी जगह नहीं होता बल्कि यह परिवार के सुख शांति और सकारात्मक माहौल से जुड़ा स्थान माना जाता है। वास्तु शास्त्र में घर की दिशा कमरे की व्यवस्था और वस्तुओं को रखने के स्थान का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता के अनुसार घर में चीजों को सही दिशा और व्यवस्थित तरीके से रखने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बेहतर हो सकता है। यही वजह है कि लोग नया घर बनाते समय या पुराने घर में बदलाव करते समय वास्तु से जुड़े नियमों का ध्यान रखते हैं।

    घर के मुख्य द्वार को वास्तु में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता के अनुसार मुख्य प्रवेश द्वार साफ सुथरा और रोशनी वाला होना चाहिए। दरवाजे के आसपास बेकार सामान या कूड़ा जमा नहीं करना चाहिए। प्रवेश द्वार पर पर्याप्त प्रकाश रखने और नियमित सफाई करने से घर का वातावरण भी बेहतर बना रहता है। घर के दरवाजे की आवाज यदि बहुत अधिक आती है तो उसकी मरम्मत कराना भी उचित माना जाता है क्योंकि वास्तु में इसे सकारात्मक वातावरण के लिए अच्छा नहीं माना जाता।

    वास्तु के अनुसार घर का उत्तर और पूर्व दिशा विशेष महत्व रखती है। इन दिशाओं में पर्याप्त रोशनी और खुली जगह रखना शुभ माना जाता है। घर में खिड़कियां और प्राकृतिक रोशनी आने की व्यवस्था होने से वातावरण हवादार और आरामदायक रहता है। भारी सामान रखने के लिए दक्षिण और पश्चिम दिशा को अपेक्षाकृत उपयुक्त माना जाता है। हालांकि घर की बनावट और उपलब्ध जगह के अनुसार फर्नीचर की व्यवस्था अलग हो सकती है।

    रसोई को लेकर भी वास्तु में कई मान्यताएं हैं। सामान्य तौर पर दक्षिण पूर्व दिशा को अग्नि तत्व से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए इस दिशा को रसोई के लिए उपयुक्त माना जाता है। रसोई में गैस चूल्हा और पानी के स्थान को व्यवस्थित रखने की सलाह दी जाती है। सिंक और चूल्हे के बीच पर्याप्त दूरी रखना व्यावहारिक रूप से भी सुविधाजनक हो सकता है। रसोई को साफ रखना घर के स्वास्थ्य और स्वच्छता के लिए सबसे जरूरी है।

    शयनकक्ष में भी अनावश्यक सामान जमा करने से बचना चाहिए। बिस्तर के नीचे कबाड़ या लंबे समय से इस्तेमाल न होने वाली वस्तुएं रखने के बजाय जगह को खाली रखना बेहतर होता है। कमरे में हल्की और आरामदायक रोशनी तथा पर्याप्त हवा आने की व्यवस्था नींद और आराम के लिए उपयोगी हो सकती है। दर्पण को बिस्तर के ठीक सामने लगाने से बचने की सलाह कई वास्तु परंपराओं में दी जाती है।

    घर के पूजा स्थल को साफ और शांत स्थान पर रखना चाहिए। पूजा के स्थान पर नियमित सफाई करें और वहां अनावश्यक सामान जमा न होने दें। पौधे लगाने की बात करें तो घर में हरियाली वातावरण को सुंदर और ताजा बनाने में मदद करती है। सूखे और मुरझाए पौधों को घर में लंबे समय तक रखना उचित नहीं माना जाता क्योंकि इससे घर की सुंदरता भी प्रभावित होती है।
    घर के पूजा स्थल को साफ और शांत स्थान पर रखना चाहिए। पूजा के स्थान पर नियमित सफाई करें और वहां अनावश्यक सामान जमा न होने दें। पौधे लगाने की बात करें तो घर में हरियाली वातावरण को सुंदर और ताजा बनाने में मदद करती है। सूखे और मुरझाए पौधों को घर में लंबे समय तक रखना उचित नहीं माना जाता क्योंकि इससे घर की सुंदरता भी प्रभावित होती है।

    सबसे जरूरी बात यह है कि वास्तु से जुड़े उपायों को आस्था और परंपरा के रूप में देखा जाना चाहिए। घर में सुख शांति बनाए रखने के लिए साफ सफाई पर्याप्त रोशनी अच्छा वेंटिलेशन और व्यवस्थित जीवनशैली का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है। बिना सोचे समझे किसी बड़े निर्माण परिवर्तन या तोड़फोड़ के बजाय विशेषज्ञ की सलाह और घर की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखना बेहतर है। सकारात्मक माहौल के लिए घर को साफ व्यवस्थित और शांत रखना सबसे आसान और उपयोगी उपायों में से एक है।

  • मुख्य द्वार की दिशा बदल सकती है घर का माहौल! वास्तु में इन दिशाओं को माना गया है नकारात्मक

    मुख्य द्वार की दिशा बदल सकती है घर का माहौल! वास्तु में इन दिशाओं को माना गया है नकारात्मक


    नई दिल्ली। घर का मुख्य द्वार सिर्फ घर में आने जाने का रास्ता नहीं माना जाता बल्कि वास्तु शास्त्र में इसे घर की ऊर्जा के प्रवेश का प्रमुख स्थान बताया गया है। वास्तु से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार मुख्य द्वार की दिशा का असर घर के वातावरण और वहां रहने वाले लोगों के जीवन पर पड़ सकता है। इसी वजह से घर बनाते समय मुख्य द्वार की दिशा को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। हाल ही में सामने आई वास्तु संबंधी जानकारी में कुछ दिशाओं को मुख्य द्वार के लिए नकारात्मक बताया गया है। हालांकि ये बातें वास्तु शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित हैं और इन्हें वैज्ञानिक तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।

    वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार साउथ वेस्ट यानी दक्षिण पश्चिम दिशा में बना मुख्य द्वार सबसे अधिक नकारात्मक माना जाता है। इस दिशा को लेकर ऐसी मान्यता है कि यहां मुख्य द्वार होने से घर में रहने वाले लोगों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। रिपोर्ट में इसे आर्थिक समस्याओं और दुर्घटनाओं से भी जोड़ा गया है। वास्तु के अनुसार दक्षिण पश्चिम दिशा में बने मुख्य द्वार को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

    दक्षिण पूर्व यानी साउथ ईस्ट दिशा को भी मुख्य द्वार के लिए नकारात्मक दिशाओं में शामिल किया गया है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार इस दिशा में मुख्य द्वार होने पर घर में आर्थिक परेशानियां और अचानक आने वाली समस्याएं बढ़ सकती हैं। इससे पहले भी वास्तु से जुड़ी रिपोर्टों में दक्षिण पूर्व दिशा के मुख्य द्वार को घर में सामान के खोने या चोरी जैसी घटनाओं से जोड़ा गया है। साथ ही पैसों की आवक प्रभावित होने की बात भी कही गई है।

    उत्तर पूर्व यानी नॉर्थ ईस्ट दिशा को लेकर भी कुछ विशेष मान्यताएं बताई गई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इस दिशा में मुख्य द्वार होने पर आर्थिक परेशानी के साथ अग्नि से जुड़ी समस्याओं की आशंका बताई जाती है। वास्तु के अनुसार व्यक्ति के गलत फैसलों के कारण धन का नुकसान होने की बात भी कही गई है। वहीं उत्तर पश्चिम यानी नॉर्थ वेस्ट दिशा के मुख्य द्वार को लेकर मान्यता है कि इससे व्यक्ति के विरोधियों की संख्या बढ़ सकती है और सहयोग करने वाले लोगों की संख्या कम हो सकती है।

    वास्तु शास्त्र में मुख्य द्वार को लेकर दिशा के साथ उसकी स्थिति और आसपास के वातावरण को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए घर बनवाते समय केवल दरवाजे की खूबसूरती या सुविधा पर ध्यान देने के बजाय वास्तु मान्यताओं के अनुसार उसकी दिशा पर भी विचार करने की सलाह दी जाती है। हालांकि किसी भी घर में आर्थिक नुकसान या दुर्घटना जैसी वास्तविक समस्याओं का कारण केवल मुख्य द्वार की दिशा को मानना उचित नहीं है। ऐसी घटनाओं के पीछे कई व्यावहारिक और वास्तविक कारण हो सकते हैं।

    कुल मिलाकर मुख्य द्वार को लेकर वास्तु में अलग अलग दिशाओं के अलग प्रभाव बताए गए हैं। इनमें दक्षिण पश्चिम और दक्षिण पूर्व दिशा को विशेष रूप से नकारात्मक माना गया है। वहीं इन दावों को वास्तु संबंधी मान्यता के रूप में ही देखना चाहिए न कि वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य के तौर पर।

  • रविवार को भूलकर भी न करें ये गलतियां घर की खुशहाली के लिए अपनाएं ये आसान वास्तु उपाय

    रविवार को भूलकर भी न करें ये गलतियां घर की खुशहाली के लिए अपनाएं ये आसान वास्तु उपाय


    नई दिल्ली। रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित माना जाता है और धार्मिक मान्यताओं में सूर्य को ऊर्जा आत्मविश्वास मान सम्मान और सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। इसी वजह से रविवार के दिन पूजा पाठ के साथ घर की साफ सफाई और वास्तु से जुड़े कुछ आसान उपाय करने की परंपरा भी रही है। वास्तु शास्त्र में माना जाता है कि घर का वातावरण व्यवस्थित और स्वच्छ रहने से सकारात्मक माहौल बना रहता है। रविवार को किए जाने वाले कुछ छोटे उपाय इसी सोच से जुड़े हुए हैं। हालांकि इन उपायों को धार्मिक और पारंपरिक मान्यता के रूप में ही देखना चाहिए।

    रविवार की सुबह सबसे पहले घर की साफ सफाई पर ध्यान देना अच्छा माना जाता है। घर में लंबे समय से पड़े अनुपयोगी सामान को हटाने से जगह व्यवस्थित रहती है। वास्तु मान्यताओं में भी टूटे फूटे और बेकार सामान को घर में जमा करके रखने से बचने की सलाह दी जाती है। हालिया वास्तु सलाहों में भी घर को साफ रखने और अनुपयोगी वस्तुओं को हटाने पर जोर दिया गया है।

    रविवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करने की परंपरा है। मान्यता है कि तांबे के पात्र में जल लेकर सूर्य को अर्घ्य देने और मन में सकारात्मक विचार रखने से आत्मविश्वास बढ़ता है। कई धार्मिक परंपराओं में रविवार को सूर्य उपासना के लिए विशेष दिन माना गया है। ऐसे में सुबह का समय पूजा और ध्यान के लिए उपयोग किया जा सकता है।

    घर के मुख्य द्वार की सफाई पर भी रविवार को विशेष ध्यान दिया जा सकता है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार मुख्य द्वार को घर में ऊर्जा के प्रवेश का महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। इसलिए दरवाजे के आसपास गंदगी कबाड़ या अनावश्यक सामान नहीं रखना चाहिए। मुख्य द्वार साफ और व्यवस्थित रखने से घर का वातावरण भी बेहतर नजर आता है। रविवार की सुबह यहां दीपक जलाने की परंपरा भी कई घरों में देखने को मिलती है।

    पूजा स्थान को साफ रखना भी रविवार के आसान उपायों में शामिल किया जा सकता है। मंदिर में जमा धूल और पुराने फूल हटाकर भगवान की प्रतिमा के सामने दीपक जलाएं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार घी का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। इससे घर में पूजा का सकारात्मक वातावरण बनता है और परिवार के लोगों को भी कुछ समय ध्यान और प्रार्थना के लिए मिल सकता है।

    रविवार के दिन घर में टूटे हुए शीशे और खराब सजावटी सामान को हटाना भी बेहतर माना जाता है। वास्तु संबंधी मान्यताओं में टूटे शीशे को शुभ नहीं माना जाता और शीशे को साफ तथा सही स्थिति में रखने की सलाह दी जाती है। उत्तर और पूर्व दिशा में शीशे को शुभ मानने की परंपरा है जबकि मुख्य दरवाजे के ठीक सामने शीशा लगाने से बचने की सलाह दी जाती है।

    इसके अलावा घर में पौधे रखना भी सकारात्मक वातावरण बनाने का एक सरल तरीका माना जाता है। तुलसी जैसे पौधों को धार्मिक रूप से विशेष महत्व दिया जाता है जबकि मनी प्लांट और अन्य इनडोर पौधों को वास्तु में समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा से जोड़ा जाता है। पौधों की नियमित देखभाल और घर में हरियाली बनाए रखने से वातावरण भी बेहतर महसूस हो सकता है।

    रविवार का दिन केवल उपाय करने के लिए ही नहीं बल्कि पूरे सप्ताह की शुरुआत को व्यवस्थित करने का अवसर भी है। घर की सफाई पूजा स्थान की व्यवस्था मुख्य द्वार की स्वच्छता और सकारात्मक सोच जैसे छोटे कदम परिवार के वातावरण को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं। धार्मिक आस्था रखने वाले लोग सूर्य देव की उपासना और जरूरतमंद व्यक्ति की मदद को भी रविवार की दिनचर्या का हिस्सा बना सकते हैं। इस तरह रविवार को की गई छोटी शुरुआत पूरे सप्ताह के लिए सकारात्मक सोच और अनुशासन का आधार बन सकती है।

  • घर का वास्तु सही रखना है तो जरूर करें ये काम, मुख्य द्वार से बेडरूम तक जानें जरूरी वास्तु टिप्स

    घर का वास्तु सही रखना है तो जरूर करें ये काम, मुख्य द्वार से बेडरूम तक जानें जरूरी वास्तु टिप्स


    नई दिल्ली। वास्तु शास्त्र में घर की दिशा और वहां रखी वस्तुओं की स्थिति को विशेष महत्व दिया जाता है। धार्मिक और वास्तु मान्यताओं के अनुसार घर का वातावरण व्यवस्थित और सकारात्मक रखने से परिवार में सुख शांति और समृद्धि का माहौल बना रह सकता है। यही वजह है कि लोग घर बनाते समय दिशा का ध्यान रखने के साथ फर्नीचर पूजा स्थान रसोई और मुख्य द्वार से जुड़े वास्तु नियमों को भी महत्व देते हैं। अगर आप भी अपने घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखना चाहते हैं तो कुछ आसान वास्तु उपायों को अपनाया जा सकता है।

    घर का मुख्य द्वार वास्तु की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता के अनुसार मुख्य द्वार साफ सुथरा और अच्छी तरह रोशन होना चाहिए। दरवाजे के आसपास कूड़ा कबाड़ या बेकार सामान जमा नहीं करना चाहिए। घर में प्रवेश करने वाला स्थान जितना साफ और व्यवस्थित रहेगा उतना ही अच्छा वातावरण बनाने में मदद मिल सकती है। मुख्य द्वार पर सुंदर शुभ चिन्ह या धार्मिक प्रतीक लगाने की परंपरा भी कई घरों में देखने को मिलती है।

    घर के पूजा स्थान को भी वास्तु में विशेष महत्व दिया जाता है। पूजा घर को साफ और शांत जगह पर रखना बेहतर माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार पूजा करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करना शुभ माना जाता है। पूजा स्थान के आसपास अनावश्यक सामान जमा करने से बचना चाहिए। नियमित रूप से दीपक जलाने और पूजा स्थान की सफाई रखने से घर का वातावरण सकारात्मक बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

    रसोई के लिए भी वास्तु में कुछ नियम बताए गए हैं। अग्नि तत्व से जुड़ी रसोई को घर की दक्षिण पूर्व दिशा से जोड़कर देखा जाता है। गैस चूल्हे और अन्य अग्नि से संबंधित उपकरणों को व्यवस्थित रखना चाहिए। रसोई में गंदगी या लंबे समय तक बर्तन जमा रखने से बचना बेहतर माना जाता है। भोजन बनाने और खाने की जगह साफ रखने से घर में स्वच्छता और सकारात्मकता बनी रहती है।

    बेडरूम में भी वास्तु के अनुसार संतुलित वातावरण रखना जरूरी माना जाता है। कमरे में जरूरत से ज्यादा सामान नहीं रखना चाहिए। बिस्तर के आसपास इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और बेकार वस्तुओं का ढेर लगाने से बचें। कमरे में पर्याप्त रोशनी और हवा का आना जरूरी है। मान्यता के अनुसार सोते समय सिर दक्षिण या पूर्व दिशा की ओर रखना शुभ माना जाता है। इससे मानसिक शांति और अच्छी नींद मिलने की धार्मिक मान्यता है।

    घर में टूटे हुए सामान को लंबे समय तक संभालकर रखना भी वास्तु की दृष्टि से उचित नहीं माना जाता। टूटे शीशे बंद घड़ी खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान और बेकार वस्तुओं को घर से हटाते रहना चाहिए। इससे घर व्यवस्थित रहता है और अनावश्यक सामान जमा नहीं होता। विशेष रूप से प्रवेश द्वार के आसपास ऐसी वस्तुएं रखने से बचना चाहिए।

    घर में पौधे लगाने से भी वातावरण बेहतर बनाया जा सकता है। तुलसी के पौधे को धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व दिया जाता है। इसे साफ जगह पर रखना और नियमित देखभाल करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा घर में ऐसे पौधे लगाए जा सकते हैं जिनसे कमरे में हरियाली और ताजगी बनी रहे। सूखे और मुरझाए पौधों को लंबे समय तक घर में नहीं रखना चाहिए।

    वास्तु मान्यताओं के अनुसार घर में पानी के रिसाव को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। नल से लगातार पानी टपकना या पाइपलाइन में लीकेज होना ठीक नहीं माना जाता। व्यावहारिक रूप से भी पानी की बर्बादी रोकने और घर की दीवारों को नुकसान से बचाने के लिए ऐसे रिसाव की जल्द मरम्मत करानी चाहिए।

    सबसे जरूरी बात यह है कि घर को साफ सुथरा और व्यवस्थित रखना किसी भी वास्तु उपाय का आधार माना जा सकता है। पर्याप्त रोशनी हवा स्वच्छता और सामान की सही व्यवस्था घर के वातावरण को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम सम्मान और सकारात्मक व्यवहार भी सुखी घर के लिए उतना ही जरूरी है।

    कुल मिलाकर मुख्य द्वार की सफाई पूजा स्थान की उचित व्यवस्था रसोई और बेडरूम को व्यवस्थित रखना टूटे सामान को हटाना और घर में हरियाली बनाए रखना जैसे उपाय वास्तु परंपराओं में शुभ माने जाते हैं। हालांकि वास्तु से जुड़े लाभ धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं और इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित उपाय नहीं माना जाता। घर की सुरक्षा स्वच्छता और सुविधा से जुड़े फैसले हमेशा व्यावहारिक जरूरतों को ध्यान में रखकर ही लेने चाहिए।