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  • अन्न के अनादर से नाराज हो सकती हैं मां अन्नपूर्णा, जानिए भोजन परोसते समय किन वास्तु नियमों का पालन है अनिवार्य।

    अन्न के अनादर से नाराज हो सकती हैं मां अन्नपूर्णा, जानिए भोजन परोसते समय किन वास्तु नियमों का पालन है अनिवार्य।

    नई दिल्ली। हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र में भोजन को केवल शरीर के पोषण का साधन नहीं माना गया है, बल्कि इसे साक्षात अन्नपूर्णा का स्वरूप और अत्यंत पवित्र माना गया है। घर में सुख, शांति और समृद्धि बनाए रखने के लिए रसोईघर से लेकर भोजन परोसने तक कई महत्वपूर्ण वास्तु नियम बताए गए हैं। इन्हीं नियमों में से एक बेहद महत्वपूर्ण नियम थाली में रोटी परोसने के सही तरीके से जुड़ा हुआ है। अक्सर लोग जल्दबाजी या अनजाने में किसी व्यक्ति के हाथ में सीधे रोटी थमा देते हैं, जिसे वास्तु के दृष्टिकोण से अत्यंत अशुभ और दोषपूर्ण माना गया है।

    वास्तु शास्त्र के अनुसार किसी भी व्यक्ति चाहे वह परिवार का सदस्य हो, अतिथि हो या कोई याचक, उसके हाथ में सीधे रोटी देना अन्न का अनादर करने के समान है। मान्यता है कि इस प्रकार से भोजन देने से देवी अन्नपूर्णा और माता लक्ष्मी रुष्ट हो जाती हैं। हाथ में रोटी देने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और धीरे-धीरे परिवार को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है। इतना ही नहीं, ऐसा करने से देने वाले और लेने वाले दोनों के संबंधों पर विपरीत प्रभाव पड़ता है तथा घर की बरकत समाप्त होने लगती है।

    शास्त्रों में भोजन परोसने की एक निश्चित और मर्यादित प्रक्रिया निर्धारित की गई है। भोजन हमेशा सम्मानपूर्वक साफ-सुथरी थाली या प्लेट में रखकर ही दिया जाना चाहिए। जब भी किसी को रोटी परोसनी हो, तो उसे सीधे हाथ में देने के बजाय प्लेट में ही रखना चाहिए। इसके अलावा, थाली में एक साथ तीन रोटियां परोसना भी वास्तु शास्त्र और हिंदू परंपराओं में वर्जित माना गया है। मान्यता है कि तीन संख्या को शुभ कार्यों में अनुकूल नहीं माना जाता, इसलिए थाली में हमेशा एक, दो या विषम-सम के सही संयोजन में ही रोटियां रखनी चाहिए।

    वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि अन्न का सम्मान सीधे तौर पर व्यक्ति के मानसिक तनाव और घर की सुख-शांति से जुड़ा होता है। जब हम किसी को आदरपूर्वक भोजन कराते हैं, तो उससे सकारात्मक ऊर्जा का निर्माण होता है। इसके विपरीत, अनुचित तरीके से भोजन परोसने पर घर में क्लेश और बीमारियां पनपने लगती हैं। रसोईघर में पहली रोटी गाय के लिए और अंतिम रोटी कुत्ते के लिए निकालने की परंपरा भी इसी सम्मान और वास्तु संतुलन का हिस्सा है, जिससे ग्रह दोष शांत होते हैं।

    भोजन बनाते समय और परोसते समय मन की पवित्रता भी उतनी ही आवश्यक मानी गई है। वास्तु के अनुसार यदि भोजन बनाते या परोसते समय मन में क्रोध, ईर्ष्या या चिड़चिड़ापन हो, तो उस अन्न का प्रभाव खाने वाले के विचारों पर भी पड़ता है। इसलिए, हाथ में रोटी न देने का नियम केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि इसके पीछे गहरा वास्तु और व्यावहारिक तर्क छिपा हुआ है। इस छोटे से नियम का पालन करके घर में सुख-समृद्धि, सकारात्मकता और आर्थिक स्थिरता को बनाए रखा जा सकता है।

  • खेलों में सफलता की राह आसान बना सकती हैं घर की ये 3 दिशाएं, वास्तु संतुलन से बढ़ सकता है आत्मविश्वास और प्रदर्शन

    खेलों में सफलता की राह आसान बना सकती हैं घर की ये 3 दिशाएं, वास्तु संतुलन से बढ़ सकता है आत्मविश्वास और प्रदर्शन

    नई दिल्ली । खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन केवल प्रतिभा, कड़ी मेहनत और नियमित अभ्यास पर ही निर्भर नहीं करता, बल्कि कई लोग मानते हैं कि सकारात्मक वातावरण और ऊर्जा भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर या प्रशिक्षण स्थल की दिशाओं का संतुलन व्यक्ति के आत्मविश्वास, मानसिक शक्ति और कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है। विशेष रूप से खेल जगत से जुड़े लोगों के लिए दक्षिण-पूर्व, दक्षिण-दक्षिण-पूर्व और दक्षिण दिशा को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।

    वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार ये तीनों दिशाएं मिलकर अग्नि तत्व का क्षेत्र बनाती हैं। अग्नि तत्व को ऊर्जा, उत्साह, साहस और सक्रियता का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि यदि यह क्षेत्र संतुलित और दोषमुक्त हो तो खिलाड़ी के भीतर प्रतिस्पर्धा की भावना मजबूत होती है और वह अपने लक्ष्य पर अधिक एकाग्रता के साथ काम कर पाता है। इससे मानसिक दृढ़ता और आत्मविश्वास में भी सकारात्मक वृद्धि हो सकती है।

    दक्षिण-दक्षिण-पूर्व दिशा को विशेष रूप से साहस और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता से जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि इस दिशा का संतुलित होना खिलाड़ी को कठिन परिस्थितियों में भी संयम बनाए रखने और बेहतर निर्णय लेने में मदद कर सकता है। कुछ वास्तु मान्यताओं के अनुसार इस दिशा में बैठकर भोजन करना भी लाभकारी माना जाता है, क्योंकि इससे शरीर और मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने की बात कही जाती है।

    दक्षिण दिशा को यश, सम्मान और पहचान की दिशा माना जाता है। वास्तु मान्यता के अनुसार यदि इस दिशा में किसी प्रकार का दोष हो तो व्यक्ति को अपनी मेहनत के अनुरूप सफलता या पहचान मिलने में कठिनाई आ सकती है। वहीं यदि यह दिशा संतुलित रहे तो खेल के क्षेत्र में उपलब्धियों के साथ सामाजिक सम्मान और पहचान मिलने की संभावनाएं बढ़ने की बात कही जाती है। हालांकि सफलता के लिए निरंतर अभ्यास और प्रदर्शन सबसे महत्वपूर्ण आधार बने रहते हैं।

    दक्षिण-पूर्व दिशा को संसाधनों और आर्थिक स्थिरता से जोड़कर देखा जाता है। खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रशिक्षण, उपकरण, प्रतियोगिताओं में भागीदारी और अन्य आवश्यक सुविधाओं की जरूरत होती है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार इस दिशा का संतुलन व्यक्ति को संसाधनों के बेहतर उपयोग और आर्थिक सहयोग प्राप्त करने में सहायक माना जाता है। यही कारण है कि इस क्षेत्र को व्यवस्थित और सकारात्मक बनाए रखने की सलाह दी जाती है।

    अग्नि कोण में रसोई का होना शुभ माना जाता है, क्योंकि यह अग्नि तत्व के स्वाभाविक स्वरूप के अनुरूप माना जाता है। वहीं इस क्षेत्र में जल तत्व से जुड़ी वस्तुएं, अत्यधिक नीले या काले रंग का उपयोग तथा अनावश्यक पानी की व्यवस्था करने से बचने की सलाह दी जाती है। ऐसी मान्यताओं के अनुसार इससे ऊर्जा का संतुलन प्रभावित हो सकता है।

    वास्तु शास्त्र को मानने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि जो युवा या पेशेवर खिलाड़ी खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं, उन्हें अपने घर या अभ्यास स्थल की इन दिशाओं को स्वच्छ, व्यवस्थित और वास्तुदोष से मुक्त रखने का प्रयास करना चाहिए। हालांकि यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि खेलों में सफलता का सबसे बड़ा आधार नियमित अभ्यास, अनुशासन, उचित प्रशिक्षण और दृढ़ संकल्प ही है, जबकि वास्तु संबंधी उपाय व्यक्तिगत आस्था और मान्यता का विषय हैं।

  • कड़े परिश्रम के बाद भी घर में नहीं टिक रहा है पैसा? उत्तर दिशा की स्वच्छता और तिजोरी का सही मुख बदल सकता है वित्तीय स्थिति

    कड़े परिश्रम के बाद भी घर में नहीं टिक रहा है पैसा? उत्तर दिशा की स्वच्छता और तिजोरी का सही मुख बदल सकता है वित्तीय स्थिति

    नई दिल्ली । मानव जीवन में कठिन परिश्रम और निरंतर प्रयासों के बाद भी कई बार अपेक्षित आर्थिक प्रगति प्राप्त नहीं हो पाती है। ज्योतिष एवं प्राचीन भारतीय वास्तुकला विज्ञान के विशेषज्ञों के अनुसार, इसका एक मुख्य कारण आवासीय परिसर के भीतर मौजूद विभिन्न प्रकार के वास्तु दोष हो सकते हैं। वास्तु शास्त्र मूल रूप से मानव के रहने के स्थान और ब्रह्मांडीय ऊर्जा के मध्य एक गहरा एवं संतुलित संबंध स्थापित करने का कार्य करता है। यदि किसी भवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बाधित हो जाता है, तो वहां संचित धन की आवक रुक जाती है और अवांछित व्यय में अचानक अप्रत्याशित वृद्धि होने लगती है। मध्य प्रदेश सहित देश भर के वास्तुविदों का मानना है कि घर की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए प्राचीन ग्रंथों में कुछ अत्यंत प्रभावशाली सिद्धांत बताए गए हैं, जिनका अनुसरण कर वित्तीय बाधाओं को दूर किया जा सकता है।

    वास्तु सिद्धांतों के अंतर्गत घर की उत्तर दिशा को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है, क्योंकि यह दिशा धन के अधिपति भगवान कुबेर से संबद्ध होती है। आर्थिक विकास की निरंतरता को सुनिश्चित करने के लिए इस दिशा को सदैव भार रहित, खुला और पूरी तरह स्वच्छ रखना अनिवार्य माना गया है। उत्तर दिशा में किसी भी प्रकार का भारी निर्माण कार्य, सीढ़ियां, भारी फर्नीचर अथवा कबाड़ रखने का स्टोर रूम नहीं होना चाहिए। इसके अतिरिक्त, संचित धन को सुरक्षित रखने वाली अलमारी या तिजोरी को सदैव भवन के दक्षिणी हिस्से की दीवार से सटाकर इस प्रकार स्थापित करना चाहिए कि उसका मुख खुलते समय हमेशा उत्तर दिशा की ओर रहे। इस विशिष्ट व्यवस्था को धन को आकर्षित करने और उसे स्थायी बनाए रखने में सबसे अधिक फलदायी माना गया है।

    भवन का मुख्य प्रवेश द्वार केवल निवासियों के आने-जाने का मार्ग नहीं होता, बल्कि यह सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि के प्रवेश का भी प्राथमिक माध्यम माना जाता है। मुख्य द्वार के सामने किसी भी प्रकार का अवरोध, गंदगी, सीलन या अंधकार नहीं होना चाहिए। प्रवेश द्वार पर स्पष्ट और सुंदर नामपट्टिका के साथ पर्याप्त प्रकाश की व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे शुभ शक्तियों का घर में आगमन सुगम हो सके। इसके साथ ही, घर के भीतर जल के निकास की दिशा भी वित्तीय स्थिति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जल प्रवाह को सीधे तौर पर धन के प्रवाह का प्रतीक माना जाता है, इसलिए पानी की निकासी हमेशा उत्तर या पूर्व दिशा की ओर ही होनी चाहिए। घर के किसी भी हिस्से में नल का लगातार टपकना भारी आर्थिक क्षति और अपव्यय का कारण बनता है।

    घर का उत्तर-पूर्व कोना जिसे सामान्य भाषा में ईशान कोण कहा जाता है, उसे सबसे पवित्र और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र माना जाता है। इस संवेदनशील स्थान पर किसी भी प्रकार का कचरा, झाड़ू, भारी लोहा या खराब पड़े इलेक्ट्रॉनिक उपकरण रखने से गंभीर वास्तु दोष उत्पन्न होता है, जो धन के मार्ग में स्थायी रुकावटें पैदा करता है। इस क्षेत्र को जितना पवित्र और खाली रखा जाएगा, मानसिक शांति और समृद्धि उतनी ही तीव्र गति से बढ़ेगी। इसके साथ ही, एक अत्यंत प्रभावी पारंपरिक उपाय के रूप में तिजोरी या धन रखने के स्थान के ठीक सामने एक स्वच्छ दर्पण स्थापित किया जा सकता है। दर्पण में धन का प्रतिबिंब दिखना प्रतीकात्मक रूप से समृद्धि को दोगुना करने और सकारात्मक तरंगों को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होता है।

  • क्या बाथरूम की छोटी-छोटी गलतियां रोक रही हैं आपकी तरक्की? वास्तु के इन नियमों को अपनाकर घर में बढ़ा सकते हैं सकारात्मक ऊर्जा और संतुलन

    क्या बाथरूम की छोटी-छोटी गलतियां रोक रही हैं आपकी तरक्की? वास्तु के इन नियमों को अपनाकर घर में बढ़ा सकते हैं सकारात्मक ऊर्जा और संतुलन

    नई दिल्ली । गृह निर्माण और आंतरिक साज-सज्जा में वास्तु शास्त्र के नियमों का विशेष महत्व होता है। सामान्यतः लोग अपने शयनकक्ष या बैठक की व्यवस्था पर तो पर्याप्त ध्यान देते हैं, लेकिन स्नानघर अथवा बाथरूम की स्थिति को पूरी तरह नजरअंदाज कर देते हैं। ज्योतिष एवं प्राचीन भारतीय वास्तुकला विशेषज्ञों के अनुसार, घर के प्रत्येक हिस्से की अपनी एक विशिष्ट ऊर्जा होती है। बाथरूम की गलत दिशा, वहां फैली गंदगी या अनुपयोगी वस्तुओं का जमावड़ा पूरे परिवार की आर्थिक उन्नति, मानसिक शांति और स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। पारिवारिक समृद्धि और जीवन में सकारात्मक बदलाव सुनिश्चित करने के लिए दैनिक जीवन की इन छोटी किंतु महत्वपूर्ण आदतों में सुधार करना अत्यंत आवश्यक माना गया है।

    वास्तु सिद्धांतों के अनुसार, भवन में बाथरूम के निर्माण के लिए सबसे उपयुक्त और शुभ दिशा उत्तर या उत्तर-पश्चिम यानी वायव्य कोण मानी गई है। इसके विपरीत, दक्षिण-पूर्व अर्थात आग्नेय कोण या फिर घर के बिल्कुल मध्य भाग जिसे ब्रह्मस्थान कहा जाता है, वहां भूलकर भी बाथरूम का निर्माण नहीं करना चाहिए। दक्षिण दिशा में स्थित बाथरूम न केवल परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि निरंतर रहने वाले मानसिक तनाव का कारण भी बनता है। इसके साथ ही, खिड़कियों और वेंटिलेशन की सही व्यवस्था न होने से उत्पन्न होने वाला अंधकार भी नकारात्मकता को बढ़ावा देता है, इसलिए वहां हमेशा पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था होनी चाहिए।

    प्राचीन मान्यताओं के अनुसार जल के अनियंत्रित प्रवाह को सीधे तौर पर धन की हानि से जोड़कर देखा जाता है। यदि बाथरूम का कोई नल अथवा पाइपलाइन लगातार टपक रही है, तो इसे केवल पानी की बर्बादी नहीं बल्कि संचित धन के धीरे-धीरे नष्ट होने का स्पष्ट सूचक माना जाता है। ऐसे तकनीकी दोषों को बिना किसी विलंब के तुरंत ठीक कराया जाना चाहिए ताकि वित्तीय स्थिरता प्रभावित न हो। इसके अतिरिक्त, स्नान के पश्चात पूरे फर्श को अच्छी तरह सुखा लेना चाहिए क्योंकि सीलन, अत्यधिक नमी और जलभराव के कारण उत्पन्न होने वाले दोष घर के भीतर नकारात्मक ऊर्जा के संचरण को तीव्र कर देते हैं।

    बाथरूम के भीतर साफ-सफाई और अनुशासन का अभाव भी दरिद्रता को आमंत्रित करता है। अक्सर लोग टूटी हुई बाल्टी, खाली प्लास्टिक की बोतलें, या अनुपयोगी सौंदर्य प्रसाधनों की सामग्रियां वहीं छोड़ देते हैं, जो वास्तु सम्मत नहीं है। उपयोग के उपरांत बाथरूम के मुख्य द्वार को हमेशा बंद रखना अनिवार्य है, क्योंकि खुला हुआ द्वार वहां की दूषित ऊर्जा को घर के अन्य कमरों में फैलने का अवसर देता है। दर्पण की स्थिति भी इसमें अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। बाथरूम का शीशा कभी भी प्रवेश द्वार के ठीक सामने नहीं लगाना चाहिए, अन्यथा वहां से निकलने वाली नकारात्मक तरंगें परावर्तित होकर संपूर्ण गृह क्षेत्र को प्रभावित करती हैं।

    घर की सुख-शांति को बनाए रखने और दूषित प्रभावों को बेअसर करने के लिए वास्तुकला में कुछ बेहद सरल उपाय भी सुझाए गए हैं। इसके अंतर्गत, एक छोटी कांच की कटोरी में समुद्री अथवा सेंधा नमक भरकर बाथरूम के किसी सुरक्षित कोने में स्थापित किया जा सकता है। माना जाता है कि नमक में वातावरण की अशुद्धियों और नकारात्मकता को अवशोषित करने की अद्भुत क्षमता होती है। इस नमक को प्रत्येक सात से दस दिनों के भीतर बदलते रहना चाहिए। इन मूलभूत नियमों का निष्ठापूर्वक पालन करने से न केवल गृह जनित दोषों का शमन होता है, बल्कि पारिवारिक आय में वृद्धि और मानसिक संतोष की प्राप्ति भी संभव होती है।

  • Vastu Tips: तरक्की पाने के लिए रखें इन वास्तु उपायों का ध्यान, तरक्की हो जाएगी डबल

    Vastu Tips: तरक्की पाने के लिए रखें इन वास्तु उपायों का ध्यान, तरक्की हो जाएगी डबल


    नई दिल्ली वास्तु शास्त्र (Vastu Shastra) घर परिवार के लिए काफी जरूरी होता है। इसमें बताए गए नियम का पालन करने से आपके भाग्य में परिवर्तन भी होते हैं। घर परिवार में सुख समृद्धि पाने के लिए छोटे-मोटे उपायों को जरूर करना चाहिए। हर कोई चाहता है कि उसके घर में सुख समृद्धि बनी रहे और चारों तरफ से उसे तरक्की हो इसके लिए आपको सबसे पहले अपने घर में लगे हुए वास्तु दोष को दूर करना चाहिए। अगर आपके घर में नकारात्मकता और वास्तु दोष का संचार है तब तरक्की दूर-दूर तक आपके घर में नहीं आएगी। इस दूर करने के लिए नीचे वास्तु शास्त्र के कुछ उपाय दिए गए हैं जिन्हें आपको अपनाना चाहिए।

    जरूर करें वास्तु उपाय
    घर से वास्तु दोष दूर करने के लिए आपको घर की साफ सफाई का बिल्कुल भी ध्यान रखना चाहिए। कभी भी मुख्य द्वार पर अंधेरा नहीं रहना चाहिए अगर ऐसा होता है तो देवी देवता आपके घर में प्रवेश नहीं करते हैं जिसके कारण आपका कोई भी कार्य सफल नहीं होता है और घर में बरकत रुक जाती है। इसके साथ ही मुख्य द्वार की अगल-बगल आपको कूड़ा या फिर टूट- फूटा सामान नहीं रखना चाहिए।

    घर में सुख समृद्धि बनी रहे और नकारात्मकता दूर हो इसके कारण आपके घर में गंगाजल का छिड़काव करना चाहिए। कपूर जलाकर पूरे घर में दिखना चाहिए ताकि आपके घर में शुद्धता बनी रहे इसके साथ ही अगर आपके घर में मंदिर है तो रोजाना पूजा पाठ करें। जिस घर में मंदिर रहने के बाद भी लोग पूजा अर्चना नहीं करते हैं वहां पर देवी देवता का भी आगमन नहीं होता है और कई समस्या खड़ी हो जाती है।

    वास्तु शास्त्र में बताया गया है कि अगर आपके घर के साथ-साथ किचन और बाथरूम में भी साफ सफाई नहीं होती है तब भी वास्तु दोष आपको घेरे रहता है। इसके साथ ही कई लोग अपने बालकनी में भी फूल पौधे लगा देते हैं लेकिन उन पर ध्यान नहीं रखते हैं उनकी पट्टियां टूट कर ऐसे ही टूटी हुई रहती हैं फूल पौधे सूखे पड़े रहते हैं सबसे घर की आर्थिक स्थिति में प्रभाव पड़ता है।

  • Vastu Tips: आर्थिक तंगी से हैं परेशान, तो करें ये वास्तु उपाय

    Vastu Tips: आर्थिक तंगी से हैं परेशान, तो करें ये वास्तु उपाय


    नई दिल्ली। वास्तु शास्त्र हमारे जीवन के लिए बहुत ही उपयोगी साबित होता है। इसमें बताए गए उपायों को करके आप अपना भाग्य परिवर्तन कर सकते हैं। आज के समय में हर व्यक्ति चाहता है कि उसके घर में सुख समृद्धि बनी रहे देवी देवताओं की कृपा उसके घर में हो लेकिन कई बार ऐसा नहीं हो पता है। क्योंकि वास्तु दोष आपके घर में इतना बढ़ जाता है कि वह आने वाली हर तरक्की को रोक देता है। इसलिए आपको ही उपाय पर विशेष रूप से ध्यान देना चाहिए ताकि आपके घर में लगा हुआ तो उसे खत्म हो और जीवन में सफलता मिले।

    जरूर अपनाएं ये वास्तु शास्त्र के नियम
    अगर आपके घर में आर्थिक तंगी जैसी समस्या लगातार आ रही है तब आपके घर में वास्तु दोष लगा हुआ है। इसे दूर करने के लिए आपको अपने घर को शुद्ध करना चाहिए। घर की पूरी साफ सफाई पर ध्यान देना चाहिए इसके साथ ही जहां पर आप अपनी तिजोरी रख रहे हैं उसकी अगल-बगल भी साफ सफाई करें चोरी के आसपास गंगाजल छिड़क और शुद्धता बनाए रखें। ऐसा कहां जाता है की तिजोरी अगर साफ नहीं रहती है तो धन आकर्षित नहीं होता है माता लक्ष्मी भी नाराज रहती हैं।

    घर की सुख शांति को बढ़ाने के लिए आपके घर के मुख्य द्वार पर आम के बने तोरण लगाने चाहिए मुख्य द्वार पर रंगोली बनानी चाहिए आप स्वास्तिक भी बना सकते हैं। ऐसा माना जाता है कि घर के मुख्य द्वार के आसपास अंधेरा नहीं रखते हैं अंधेरा रखने से घर में कई प्रकार की समस्या उत्पन्न हो जाती है जिसके बाद आपकी तरक्की में बाधा पहुंचती है। इसके साथ ही देवी देवता भी अंधेरा होने के कारण घर में दस्तक नहीं देते हैं। जिससे कई प्रकार की समस्या उत्पन्न होती है।

    घर में सुख समृद्धि पाने के लिए आपके घर की बनी मंदिर में हमेशा पूजा पाठ करते रहना चाहिए क्योंकि पूजा पाठ करने से जीवन में खुशहाली आती है देवी देवताओं की कृपा आपको मिलती है। आपको अपने घर में हमेशा कपूर जलाना चाहिए और पूरे घर को दिखाना चाहिए इससे घर की उन्नति और विकास में बढ़ोतरी होती है घर की नकारात्मकता दूर हो जाती है और सकारात्मक का संचार होता है।

  • गुरुवार की शाम में करें ये खास उपाय, मां लक्ष्मी की बरसात होगी आपके घर पर

    गुरुवार की शाम में करें ये खास उपाय, मां लक्ष्मी की बरसात होगी आपके घर पर


    नई दिल्ली । गुरुवार का दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जाता है और इस दिन किए गए उपायों का प्रभाव भी जल्दी दिखता है। अगर आप चाहते हैं कि घर में सुख-समृद्धि बनी रहे और धन की कमी दूर हो, तो गुरुवार की शाम को प्रदोष काल में कुछ खास उपाय जरूर करें। मान्यता है कि शाम के समय घर में मां लक्ष्मी के आगमन का समय होता है और इस समय दीपक जलाने से वे प्रसन्न होती हैं। इसलिए घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाना शुभ माना जाता है। इस उपाय से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।

    वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के ईशान कोण उत्तर-पूर्व दिशा को सबसे शुभ माना जाता है। इसलिए गुरुवार की शाम को ईशान कोण में दीपक जलाने से घर-परिवार में सुख-समृद्धि आती है और धन लाभ के योग बनते हैं। खासकर जब यह दीपक प्रदोष काल में जलाया जाए तो इसके प्रभाव और भी बढ़ जाते हैं।

    इसके अलावा, शाम के समय घर के आंगन में दीपक जलाना भी शुभ होता है। पुराने समय में लोग आंगन में दीपक जलाकर अंधेरे को दूर करते थे। आज भी अगर आप अपने आंगन में दीपक जलाते हैं, तो इससे घर में सकारात्मकता बनी रहती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी के पौधे में मां लक्ष्मी का वास माना जाता है। इसलिए प्रदोष काल में तुलसी के पास दीपक जलाने से धन संबंधी परेशानियां कम होती हैं और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। इसके साथ ही, घर के मंदिर में मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु के समक्ष दीपक जलाना भी अत्यंत लाभकारी माना जाता है। ऐसा करने से विष्णु-लक्ष्मी की कृपा से घर में धन लाभ होता है और परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर होती है।

    गुरुवार की शाम को इन उपायों को नियमित रूप से करने से न केवल घर में शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है, बल्कि धन-लाभ के अवसर भी बढ़ते हैं। अगर आप सच्‍चे मन से और श्रद्धा के साथ दीपक जलाएंगे तो माना जाता है कि मां लक्ष्मी आपके घर पर अपनी कृपा बरसाएंगी और घर-परिवार में खुशहाली बनी रहेगी।