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  • LPG e-KYC की समयसीमा आज खत्म, सरकार ने अभी नहीं बढ़ाई डेडलाइन, उपभोक्ताओं के लिए वेरिफिकेशन जरूरी

    LPG e-KYC की समयसीमा आज खत्म, सरकार ने अभी नहीं बढ़ाई डेडलाइन, उपभोक्ताओं के लिए वेरिफिकेशन जरूरी

    नई दिल्ली ।देशभर के एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए 23 अगस्त 2026 की तारीख महत्वपूर्ण है, क्योंकि घरेलू गैस कनेक्शन से जुड़े ई-केवाईसी की बढ़ाई गई समयसीमा आज समाप्त हो रही है। इंडेन गैस, एचपी गैस और भारत गैस के उपभोक्ताओं को आधार आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की प्रक्रिया पूरी करने के लिए पहले 16 अगस्त तक का समय दिया गया था, जिसे बाद में बढ़ाकर 23 अगस्त किया गया था। फिलहाल इस समयसीमा को आगे बढ़ाने की कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।

    ई-केवाईसी का उद्देश्य एलपीजी उपभोक्ताओं की पहचान और कनेक्शन से जुड़ी जानकारी का सत्यापन करना है। बड़ी संख्या में ग्राहक इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए अपने संबंधित गैस वितरक केंद्रों का रुख कर रहे हैं। जिन उपभोक्ताओं ने अभी तक अपना सत्यापन पूरा नहीं किया है, उनके लिए आज प्रक्रिया पूरी करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    ई-केवाईसी लंबित रहने की स्थिति में उपभोक्ताओं को भविष्य में गैस कनेक्शन से जुड़ी सेवाओं में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। सत्यापन नहीं होने पर कनेक्शन की सेवाओं, रिफिल बुकिंग या सब्सिडी से संबंधित लाभ प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि किसी भी उपभोक्ता के मामले में वास्तविक कार्रवाई संबंधित नियमों और तेल विपणन कंपनियों की प्रक्रिया के अनुसार होगी।

    ई-केवाईसी पूरा करने के लिए उपभोक्ताओं को अपने गैस कनेक्शन से जुड़े विवरण और आधार से संबंधित जानकारी तैयार रखनी चाहिए। ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध होने पर संबंधित गैस कंपनी के आधिकारिक डिजिटल माध्यम से प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। जिन लोगों को ऑनलाइन सत्यापन में परेशानी हो रही है, वे अपने गैस वितरक से संपर्क कर बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

    समयसीमा बढ़ाने की संभावना को लेकर फिलहाल उपभोक्ताओं के बीच सवाल बने हुए हैं। इससे पहले निर्धारित अंतिम तारीख को उपभोक्ताओं की सुविधा और तकनीकी समस्याओं से जुड़ी शिकायतों के बीच आगे बढ़ाया गया था। लेकिन 23 अगस्त के बाद नई समयसीमा घोषित की गई है या नहीं, इसे लेकर आधिकारिक सूचना का इंतजार करना होगा। इसलिए जिन ग्राहकों का ई-केवाईसी अभी बाकी है, उन्हें केवल डेडलाइन बढ़ने की उम्मीद पर निर्भर रहने के बजाय उपलब्ध समय में सत्यापन पूरा करने की कोशिश करनी चाहिए।

    एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए सब्सिडी और घरेलू सिलेंडर से जुड़े लाभ भी ई-केवाईसी व्यवस्था से जुड़े हुए हैं। खासकर प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए पहचान सत्यापन महत्वपूर्ण है। सत्यापन प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर संबंधित लाभों पर असर पड़ सकता है, इसलिए पात्र उपभोक्ताओं को अपनी स्थिति समय रहते जांच लेनी चाहिए।

    इस बीच 23 अगस्त को घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। 14.2 किलोग्राम के घरेलू सिलेंडर के दाम शहर के अनुसार अलग-अलग हैं। दिल्ली में इसकी कीमत 942 रुपये, मुंबई में 941.50 रुपये, जयपुर में 945.50 रुपये और कोलकाता में 968 रुपये बताई गई है। पटना में घरेलू सिलेंडर की कीमत 1,031.50 रुपये है, जबकि लखनऊ में यह 979.50 रुपये और हैदराबाद में 994 रुपये है।

    वहीं 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतें भी शहर के हिसाब से अलग हैं। दिल्ली में इसकी कीमत 2,738 रुपये, मुंबई में 2,691.50 रुपये और पटना में 3,018 रुपये बताई गई है। घरेलू और व्यावसायिक सिलेंडरों की कीमतों में अंतर के साथ उपभोक्ताओं को अपने कनेक्शन की स्थिति और लागू नियमों की जानकारी भी रखनी चाहिए।

    ई-केवाईसी को लेकर किसी भी अंतिम निर्णय के लिए उपभोक्ताओं को संबंधित गैस कंपनी और सरकारी स्तर से जारी आधिकारिक सूचना पर ही भरोसा करना चाहिए। अगर आज तक सत्यापन नहीं हुआ है, तो जल्द से जल्द प्रक्रिया पूरी करना भविष्य में संभावित असुविधा से बचने का सबसे सुरक्षित विकल्प है।

  • नागरिकता को लेकर बहस के बीच सरकार का बड़ा स्पष्टीकरण, भारतीय पासपोर्ट जारी करने के नियमों पर संसद में दी जानकारी

    नागरिकता को लेकर बहस के बीच सरकार का बड़ा स्पष्टीकरण, भारतीय पासपोर्ट जारी करने के नियमों पर संसद में दी जानकारी

    नई दिल्ली । भारतीय पासपोर्ट और नागरिकता को लेकर चल रही बहस के बीच केंद्र सरकार ने संसद में महत्वपूर्ण जानकारी दी है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारतीय पासपोर्ट केवल भारतीय नागरिकों को ही जारी किया जाता है और इसके लिए निर्धारित नियमों के अनुसार पूरी सत्यापन प्रक्रिया अपनाई जाती है। हालांकि सरकार ने यह भी साफ किया कि पासपोर्ट को नागरिकता का अंतिम और निर्णायक प्रमाण नहीं माना गया है, बल्कि यह मुख्य रूप से विदेश यात्रा के लिए जारी किया जाने वाला आधिकारिक दस्तावेज है।

    राज्यसभा में भारतीय पासपोर्ट की स्थिति और नागरिकता से जुड़े सवाल उठाए गए थे। इस दौरान सरकार से पूछा गया था कि क्या भारतीय पासपोर्ट को नागरिकता का अंतिम प्रमाण माना जा सकता है और विदेश की नागरिकता लेने के बाद भारतीय नागरिकता की स्थिति क्या होती है। इसके अलावा नागरिकता कानून से जुड़े कई अन्य विषयों पर भी जानकारी मांगी गई थी।

    सरकार ने जवाब में बताया कि भारतीय पासपोर्ट पासपोर्ट अधिनियम, 1967 के तहत जारी किया जाता है। पासपोर्ट जारी करने से पहले आवेदक की पात्रता, दस्तावेजों और अन्य जरूरी जानकारियों का सत्यापन किया जाता है। सरकार के अनुसार, यह प्रक्रिया इसलिए अपनाई जाती है ताकि केवल योग्य भारतीय नागरिकों को ही पासपोर्ट जारी किया जा सके।

    केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि भारतीय पासपोर्ट भारत के नागरिकों को विदेश यात्रा की सुविधा देने वाला आधिकारिक दस्तावेज है। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय यात्रा को नियंत्रित और व्यवस्थित करना है। हालांकि पासपोर्ट नागरिकता से जुड़ा महत्वपूर्ण दस्तावेज जरूर है, लेकिन इसे नागरिकता का एकमात्र और अंतिम प्रमाण नहीं बताया गया है।

    सरकार ने यह भी दोहराया कि भारत में दोहरी नागरिकता की व्यवस्था नहीं है। यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी दूसरे देश की नागरिकता प्राप्त करता है, तो भारतीय कानूनों के अनुसार उसकी भारतीय नागरिकता समाप्त हो जाती है। ऐसी स्थिति में उसका भारतीय पासपोर्ट भी वैध नहीं रहता और उसे संबंधित प्रक्रिया के तहत इसे वापस करना पड़ता है।

    नागरिकता कानून के प्रावधानों के अनुसार विदेशी नागरिकता लेने के बाद किसी व्यक्ति का भारतीय नागरिक दर्जा समाप्त हो सकता है। इसी वजह से पासपोर्ट जारी करने और उसकी वैधता बनाए रखने के लिए नागरिकता की स्थिति महत्वपूर्ण मानी जाती है। सरकार ने कहा कि पासपोर्ट जारी करने की पूरी प्रक्रिया कानून और निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित होती है।

    पासपोर्ट जारी करने से इनकार करने के मामलों का भी कानून में प्रावधान है। यदि जांच के दौरान यह पाया जाता है कि आवेदक भारतीय नागरिक नहीं है या वह निर्धारित शर्तों को पूरा नहीं करता, तो उसका आवेदन रोका जा सकता है। इसके अलावा सुरक्षा और कानूनी कारणों के आधार पर भी पासपोर्ट जारी करने से इनकार किया जा सकता है।

    सरकार का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में नागरिकता, पहचान और दस्तावेजों को लेकर लगातार चर्चा होती रही है। केंद्र ने अपने जवाब के माध्यम से यह स्पष्ट करने की कोशिश की है कि भारतीय पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया नियमों और सत्यापन व्यवस्था के आधार पर होती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, पासपोर्ट किसी व्यक्ति की विदेश यात्रा के अधिकार से जुड़ा महत्वपूर्ण दस्तावेज है, लेकिन नागरिकता का निर्धारण अलग कानूनी प्रक्रिया के तहत होता है। ऐसे में पासपोर्ट और नागरिकता को एक ही नजरिए से नहीं देखा जा सकता। सरकार के इस स्पष्टीकरण के बाद नागरिकता और पासपोर्ट से जुड़े नियमों को लेकर स्थिति और स्पष्ट हुई है।

  • बांग्लादेशी घुसपैठ पर संसदीय समिति सख्त, सीमाओं पर संयुक्त निगरानी तंत्र बनाने की दी सिफारिश।

    बांग्लादेशी घुसपैठ पर संसदीय समिति सख्त, सीमाओं पर संयुक्त निगरानी तंत्र बनाने की दी सिफारिश।

    नई दिल्ली। भारत और बांग्लादेश के बीच द्विपक्षीय संबंधों और सीमा प्रबंधन को लेकर संसद की विदेश मामलों की स्थायी समिति ने एक महत्वपूर्ण समीक्षा रिपोर्ट प्रस्तुत की है। वरिष्ठ सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता वाली इस समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि पड़ोसी देश बांग्लादेश से होने वाली अवैध घुसपैठ आज भी भारत की आंतरिक सुरक्षा और जनसांख्यिकी के लिए एक अत्यंत गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। समिति ने इस संवेदनशील समस्या से निपटने के लिए दोनों देशों के बीच एक समर्पित ‘संयुक्त कार्य समूह’ या स्थायी द्विपक्षीय तंत्र स्थापित करने का सुझाव दिया है, ताकि सीमा पार से होने वाली गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

    रिपोर्ट में उजागर किया गया है कि वर्तमान समय में लगभग 2,369 संदिग्ध प्रवासियों की राष्ट्रीयता की पुष्टि का मामला बांग्लादेश सरकार के पास लंबित पड़ा हुआ है। स्थायी समिति का मानना है कि दोनों देशों के बीच एक औपचारिक और जवाबदेह प्रशासनिक ढांचा बनने से पहचान सत्यापन की यह प्रक्रिया त्वरित गति से पूरी की जा सकेगी। इसके साथ ही, समिति ने यह मानवीय और कानूनी हिदायत भी दी है कि जांच और सत्यापन की पूरी प्रक्रिया के दौरान पूरी सतर्कता बरती जाए ताकि किसी भी भारतीय नागरिक को गलती से सीमा पार न भेजा जाए और हिरासत में लिए गए व्यक्तियों के साथ मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाए।

    सीमा सुरक्षा के तकनीकी पहलुओं का उल्लेख करते हुए रिपोर्ट में बताया गया है कि दोनों देशों के बीच फैली 4,096 किलोमीटर लंबी कुल सीमा में से लगभग 3,231 किलोमीटर हिस्से में ही सुरक्षा बाड़ लगाई जा सकी है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, नदी क्षेत्रों और विवादित भूखंडों के कारण अभी भी करीब 864 किलोमीटर की सीमा बिना बाड़ के खुली हुई है, जिसका फायदा अवैध गतिविधियों के लिए उठाया जाता है। रिपोर्ट के अनुसार इस घुसपैठ का सबसे अधिक प्रतिकूल प्रभाव सीमावर्ती राज्यों जैसे पश्चिम बंगाल और असम पर पड़ रहा है, जहां सुरक्षा एजेंसियों को लगातार सतर्क रहना पड़ता है।

    सुरक्षा चिंताओं के अलावा समिति ने दोनों देशों के बीच व्यापारिक नियमों के दुरुपयोग पर भी गंभीर आपत्ति जताई है। रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र (साफ्टा) के तहत मिलने वाली रियायतों का गलत फायदा उठाकर तीसरे देशों की सामग्री, विशेष रूप से चीनी कपड़ों और उत्पादों को बांग्लादेश के रास्ते भारतीय बाजारों में खपाया जा रहा है। इससे घरेलू उद्योगों और निष्पक्ष व्यापार प्रतिस्पर्धा को भारी नुकसान पहुंच रहा है। समिति ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय को व्यापारिक नियमों को और अधिक कड़ा करने और उच्च स्तर पर इस मुद्दे को उठाने का परामर्श दिया है।

    संसदीय समिति ने सुरक्षा और व्यापारिक कड़ाई के साथ-साथ कूटनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को पुनः पटरी पर लाने की आवश्यकता पर भी बल दिया है। स्थिति सामान्य होते ही वीजा सेवाओं को चरणबद्ध तरीके से सुचारू करने, वार्षिक संयुक्त साहित्य महोत्सवों के आयोजन और युवाओं के आदान-प्रदान के माध्यम से जन-सामान्य के बीच आपसी विश्वास बढ़ाने की सिफारिश की गई है। इसके अतिरिक्त, समिति ने वैश्विक पटल पर भारत की वैज्ञानिक और कूटनीतिक पहुंच बढ़ाने के लिए ‘ध्रुवीय राजदूत’ की नियुक्ति और अंटार्कटिका में अनुसंधान केंद्रों के निर्माण में तेजी लाने का सुझाव भी दिया है।

  • 31 जुलाई की समयसीमा से पहले आईटीआर फाइलिंग में तेज़ी, असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए 4.70 करोड़ रिटर्न दाखिल

    31 जुलाई की समयसीमा से पहले आईटीआर फाइलिंग में तेज़ी, असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए 4.70 करोड़ रिटर्न दाखिल

    नई दिल्ली ।31 जुलाई की अंतिम तिथि नजदीक आते ही देशभर में आयकर रिटर्न दाखिल करने की रफ्तार तेज हो गई है। असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए बुधवार सुबह 11 बजे तक लगभग 4.70 करोड़ आयकर रिटर्न दाखिल किए जा चुके हैं। बड़ी संख्या में करदाताओं द्वारा अंतिम दिनों में रिटर्न दाखिल किए जाने से स्पष्ट है कि समयसीमा समाप्त होने से पहले लोग अपनी कर संबंधी औपचारिकताओं को पूरा करने में जुटे हुए हैं। आयकर विभाग भी लगातार करदाताओं को समय रहते रिटर्न दाखिल करने के लिए जागरूक कर रहा है, ताकि अंतिम समय में तकनीकी या अन्य परेशानियों से बचा जा सके।

    उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार दाखिल किए गए कुल आयकर रिटर्न में से करीब 4.40 करोड़ रिटर्न का सत्यापन पूरा हो चुका है। इसके अलावा लगभग 2.34 करोड़ रिटर्न का प्रोसेसिंग कार्य भी पूरा किया जा चुका है। इससे संकेत मिलता है कि रिटर्न दाखिल करने के साथ-साथ विभाग उसकी जांच और निस्तारण की प्रक्रिया भी तेज गति से आगे बढ़ा रहा है, जिससे पात्र करदाताओं को समय पर आवश्यक लाभ मिल सके।

    आयकर विभाग ने करदाताओं से अपील की है कि वे अंतिम दिन का इंतजार करने के बजाय जल्द से जल्द अपना आयकर रिटर्न दाखिल करें। विभाग ने विशेष रूप से आईटीआर-1 और आईटीआर-2 फॉर्म भरने वाले करदाताओं को समय रहते प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी है। विभाग का कहना है कि अंतिम समय में पोर्टल पर अधिक ट्रैफिक या दस्तावेजों में किसी त्रुटि के कारण अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए पहले से तैयारी करना अधिक उचित रहेगा।

    रिटर्न दाखिल करने से पहले सभी आवश्यक दस्तावेजों का मिलान करना भी बेहद जरूरी माना गया है। करदाताओं को फॉर्म 16, वार्षिक सूचना विवरण, फॉर्म 26एएस, बैंक स्टेटमेंट और आय से जुड़े अन्य रिकॉर्ड की सावधानीपूर्वक जांच करने की सलाह दी गई है। यदि इन दस्तावेजों और रिटर्न में दर्ज जानकारी के बीच कोई अंतर रह जाता है, तो भविष्य में सत्यापन या प्रोसेसिंग के दौरान परेशानी उत्पन्न हो सकती है। सही और पूर्ण जानकारी देने से रिटर्न का निस्तारण भी अपेक्षाकृत तेजी से होता है।

    31 जुलाई की अंतिम तिथि उन करदाताओं पर लागू होती है जिन्हें अपने खातों का टैक्स ऑडिट कराने की आवश्यकता नहीं होती। इसमें वेतनभोगी कर्मचारी, पेंशनभोगी, छात्र तथा अन्य सामान्य व्यक्तिगत करदाता शामिल हैं। ऐसे करदाताओं के लिए निर्धारित समयसीमा के भीतर रिटर्न दाखिल करना आवश्यक है, ताकि विलंब से जुड़ी संभावित जटिलताओं और नियमों के प्रभाव से बचा जा सके।

    आईटीआर-1, जिसे सहज फॉर्म भी कहा जाता है, उन व्यक्तिगत करदाताओं के लिए निर्धारित है जिनकी आय वेतन या पेंशन, एक आवासीय मकान और अन्य साधारण स्रोतों जैसे ब्याज से प्राप्त होती है तथा जिनकी कुल वार्षिक आय निर्धारित सीमा के भीतर रहती है। दूसरी ओर आईटीआर-2 उन व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवारों के लिए है जिनकी व्यवसाय या पेशे से आय नहीं होती, लेकिन उन्हें पूंजीगत लाभ, एक से अधिक मकानों, विदेशी संपत्तियों, विदेशी आय या अन्य अपेक्षाकृत जटिल स्रोतों से आय प्राप्त होती है। ऐसे करदाताओं को अपनी आय की प्रकृति के अनुसार सही फॉर्म का चयन कर समयसीमा के भीतर रिटर्न दाखिल करने की सलाह दी गई है।

  • दिल्ली में मतदाता सूची पुनरीक्षण की अवधि बढ़ी, अब 19 अक्टूबर को जारी होगी अंतिम वोटर लिस्ट, सत्यापन को मिला अतिरिक्त समय

    दिल्ली में मतदाता सूची पुनरीक्षण की अवधि बढ़ी, अब 19 अक्टूबर को जारी होगी अंतिम वोटर लिस्ट, सत्यापन को मिला अतिरिक्त समय

    नई दिल्ली । निर्वाचन आयोग ने दिल्ली में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन-एसआईआर) कार्यक्रम की समयसीमा में संशोधन करते हुए पूरी प्रक्रिया को दस दिन आगे बढ़ा दिया है। संशोधित कार्यक्रम के अनुसार अब राजधानी की अंतिम मतदाता सूची 19 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित की जाएगी। आयोग का कहना है कि इस निर्णय का उद्देश्य अधिक से अधिक पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने, जानकारी अद्यतन कराने और सत्यापन प्रक्रिया पूरी करने का पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराना है।

    दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान 30 जून से शुरू किया गया था। इसके तहत बूथ लेवल अधिकारियों को घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करने, आवश्यक प्रपत्र उपलब्ध कराने तथा उन्हें वापस एकत्र करने की जिम्मेदारी दी गई थी। पहले यह अभियान 29 जुलाई तक पूरा होना था, लेकिन अब इसकी अंतिम तिथि बढ़ाकर 8 अगस्त कर दी गई है। इसी अवधि में मतदान केंद्रों के पुनर्गठन और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाएं भी पूरी की जाएंगी ताकि संशोधित मतदाता सूची अधिक सटीक और अद्यतन बन सके।

    निर्वाचन आयोग के संशोधित कार्यक्रम के अनुसार मतदाता सूची का प्रारंभिक मसौदा अब 17 अगस्त को प्रकाशित किया जाएगा। पहले इसे 5 अगस्त को जारी किया जाना था। मसौदा सूची जारी होने के बाद नागरिकों को अपने नाम जोड़ने, हटाने या किसी प्रकार की त्रुटि में सुधार कराने का अवसर मिलेगा। इसके लिए 17 अगस्त से 16 सितंबर तक दावे और आपत्तियां स्वीकार की जाएंगी। इसके बाद संबंधित अधिकारी सभी आवेदनों की जांच करेंगे और आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन करते हुए उनका निपटारा करेंगे।

    आयोग ने स्पष्ट किया है कि दावों और आपत्तियों की जांच की प्रक्रिया 17 अगस्त से 15 अक्टूबर तक चलेगी। इस दौरान पात्र मतदाताओं के नाम शामिल करने, गलत प्रविष्टियों में सुधार करने तथा आवश्यक संशोधन करने का कार्य पूरा किया जाएगा। सभी प्रक्रियाएं समाप्त होने के बाद 19 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी, जिसे आगामी चुनावी प्रक्रियाओं के लिए आधिकारिक आधार माना जाएगा।

    विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के दौरान अब तक सामने आए प्रारंभिक आंकड़े भी महत्वपूर्ण संकेत दे रहे हैं। सत्यापन के दौरान 30,907 ऐसे मतदाताओं की पहचान हुई है जिनका निधन हो चुका है। इसके अलावा 1,20,450 से अधिक मतदाता ऐसे मिले हैं जिन्होंने अपना निवास स्थान बदल लिया है। वहीं 12,160 मतदाता ऐसे पाए गए जो घर-घर सत्यापन के समय अपने पंजीकृत पते पर उपलब्ध नहीं थे। इन आंकड़ों के आधार पर आयोग मतदाता सूची को अधिक शुद्ध और अद्यतन बनाने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई कर रहा है।

    निर्वाचन आयोग के अनुसार दिल्ली में चल रहा यह अभियान देशव्यापी विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम के तीसरे चरण का हिस्सा है, जिसकी शुरुआत 14 मई को की गई थी। इस चरण के पूरा होने के बाद हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को छोड़कर अधिकांश राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। आयोग का मानना है कि नियमित अंतराल पर इस प्रकार का व्यापक सत्यापन लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने और मतदाता सूची की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए आवश्यक है।

    दिल्ली के अलावा पंजाब, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक सहित कई राज्यों में भी विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम की समयसीमा बढ़ाई गई है। आयोग का कहना है कि विभिन्न राज्यों से प्राप्त प्रशासनिक आवश्यकताओं और सत्यापन कार्य की प्रगति को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। इससे अधिक से अधिक पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने का अवसर मिलेगा और अंतिम सूची पहले की तुलना में अधिक सटीक तथा व्यापक रूप से अद्यतन हो सकेगी।

  • मध्य प्रदेश के शिक्षकों को बड़ी राहत: ट्रांसफर प्रक्रिया में मैरिज सर्टिफिकेट की अनिवार्यता खत्म, वैकल्पिक दस्तावेज होंगे मान्य

    मध्य प्रदेश के शिक्षकों को बड़ी राहत: ट्रांसफर प्रक्रिया में मैरिज सर्टिफिकेट की अनिवार्यता खत्म, वैकल्पिक दस्तावेज होंगे मान्य

    मध्य प्रदेश: के शिक्षकों को स्वैच्छिक तबादला प्रक्रिया के बीच बड़ी राहत मिली है। स्कूल शिक्षा विभाग ने ऑनलाइन ट्रांसफर प्रक्रिया में विवाह प्रमाण पत्र की अनिवार्यता को लेकर महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए शिक्षकों को वैकल्पिक दस्तावेज प्रस्तुत करने की अनुमति दे दी है। इस निर्णय से उन हजारों शिक्षकों को राहत मिलेगी जो मैरिज सर्टिफिकेट उपलब्ध नहीं होने के कारण आवेदन प्रक्रिया पूरी करने में कठिनाइयों का सामना कर रहे थे।

    राज्य में चल रही ऑनलाइन ट्रांसफर प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में शिक्षकों ने शिकायत की थी कि वर्षों पहले विवाह होने के बावजूद उनके पास विवाह प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं है। ऐसे में वे निर्धारित श्रेणी के अंतर्गत आवेदन करने से वंचित हो रहे थे। इस मुद्दे को लेकर शिक्षक संगठनों ने लगातार विभाग के समक्ष आपत्ति दर्ज कराते हुए नियमों में व्यावहारिक बदलाव की मांग की थी।

    शिक्षक संगठनों का तर्क था कि कई शिक्षकों का विवाह दो दशक या उससे भी पहले हुआ है, जब विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया वर्तमान की तरह व्यापक नहीं थी। ऐसे मामलों में विवाह प्रमाण पत्र की अनिवार्यता उन्हें अनावश्यक परेशानी में डाल रही थी। विभाग ने इन आपत्तियों पर विचार करते हुए अब वैकल्पिक दस्तावेजों को स्वीकार करने का निर्णय लिया है।

    नए निर्देशों के अनुसार शिक्षक विवाह प्रमाण पत्र के स्थान पर लोकसेवक समग्र कार्ड, सेवा पुस्तिका का सत्यापित पृष्ठ अथवा अन्य मान्य दस्तावेज अपलोड कर सकेंगे। इन दस्तावेजों के आधार पर वैवाहिक स्थिति का सत्यापन किया जाएगा। विभाग के इस कदम को शिक्षकों की लंबे समय से चली आ रही मांगों के समाधान के रूप में देखा जा रहा है।

    गौरतलब है कि ऑनलाइन ट्रांसफर आवेदन की समय-सीमा समाप्त होने से ठीक पहले यह राहत दी गई है। इससे उन शिक्षकों को विशेष लाभ मिलेगा जो दस्तावेजी बाधाओं के कारण आवेदन प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहे थे। शिक्षा विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्थानांतरण सूची 27 या 28 जून तक जारी की जा सकती है। ऐसे में अंतिम चरण में किया गया यह बदलाव बड़ी संख्या में आवेदकों को प्रक्रिया में शामिल रहने का अवसर देगा।

    हालांकि सभी वर्गों के शिक्षकों की समस्याओं का समाधान अभी नहीं हो पाया है। विशेष रूप से दिव्यांग शिक्षकों के बीच कुछ नियमों को लेकर असंतोष बना हुआ है। दिव्यांगता प्रमाण पत्र के संबंध में निर्धारित शर्तों को लेकर कई शिक्षकों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि शासन के नियमों के अनुसार उनके पास वैध प्रमाण पत्र मौजूद हैं, फिर भी एक वर्ष के भीतर जारी प्रमाण पत्र की मांग के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    शिक्षा विभाग का यह निर्णय प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक व्यावहारिक और शिक्षक हितैषी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल दस्तावेज संबंधी बाधाएं कम होंगी, बल्कि स्थानांतरण प्रक्रिया में पारदर्शिता और भागीदारी भी बढ़ेगी। अब शिक्षकों की निगाहें स्थानांतरण सूची के प्रकाशन और लंबित मांगों पर विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

  • ओमान तट पर भारतीय नाविकों की मौत की अफवाह निकली झूठी, विदेश मंत्रालय ने बताया सुरक्षित है पूरा क्रू

    ओमान तट पर भारतीय नाविकों की मौत की अफवाह निकली झूठी, विदेश मंत्रालय ने बताया सुरक्षित है पूरा क्रू


    नई दिल्ली ।
    ओमान के तट के निकट संचालित एक व्यापारी जहाज पर कथित हमले और भारतीय नाविकों के हताहत होने की खबरों को लेकर फैली आशंकाओं के बीच केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि जहाज पर मौजूद सभी चालक दल के सदस्य पूरी तरह सुरक्षित हैं। इस स्पष्टीकरण के बाद सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर चल रही अफवाहों पर विराम लग गया है।

    हाल के दिनों में समुद्री सुरक्षा और पश्चिम एशिया क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच एक जहाज को लेकर कई तरह के दावे सामने आए थे। कुछ रिपोर्टों में कहा गया था कि ओमान के तट के पास जहाज पर हमला हुआ है और उसमें सवार भारतीय नाविकों को नुकसान पहुंचा है। इन खबरों के प्रसारित होने के बाद नाविकों के परिवारों और समुद्री क्षेत्र से जुड़े लोगों के बीच चिंता का माहौल बन गया था।

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों ने तत्काल तथ्यों की पुष्टि की प्रक्रिया शुरू की। जांच और प्रत्यक्ष संपर्क के बाद यह स्पष्ट हुआ कि जहाज पर किसी प्रकार का हमला नहीं हुआ है और चालक दल के सभी सदस्य सुरक्षित हैं। अधिकारियों ने बताया कि जहाज के संचालन और क्रू की स्थिति सामान्य है तथा किसी भी व्यक्ति को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।

    जानकारी के अनुसार, भ्रम की स्थिति तब पैदा हुई जब जहाज से संपर्क स्थापित करने में अस्थायी तकनीकी कठिनाई सामने आई। संचार व्यवस्था में आई रुकावट के कारण कुछ समय तक जहाज से नियमित संपर्क नहीं हो सका। इसी दौरान विभिन्न माध्यमों पर कई अपुष्ट दावे सामने आने लगे, जिन्हें बाद में तथ्यों के आधार पर गलत पाया गया।

    समुद्री क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि लंबी दूरी तक संचालित होने वाले जहाजों में संचार संबंधी तकनीकी समस्याएं असामान्य नहीं हैं। कई बार रेडियो या अन्य संचार उपकरणों में अस्थायी बाधा आने से संपर्क प्रभावित हो सकता है, लेकिन इसका अर्थ किसी दुर्घटना या सुरक्षा संकट से नहीं होता। ऐसे मामलों में आधिकारिक पुष्टि का इंतजार करना आवश्यक माना जाता है।

    सरकार ने स्पष्ट किया है कि जहाज की स्थिति पर लगातार नजर रखी गई और उपलब्ध सभी माध्यमों से उसकी गतिविधियों की निगरानी की गई। संबंधित अधिकारियों ने जहाज के जिम्मेदार कर्मियों से संपर्क कर वास्तविक स्थिति की पुष्टि की, जिसके बाद यह निष्कर्ष निकाला गया कि जहाज और उस पर मौजूद सभी लोग सुरक्षित हैं।

    इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा किया है कि संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मुद्दों और सुरक्षा संबंधी मामलों में अपुष्ट सूचनाओं का प्रसार कितनी तेजी से भ्रम पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होने वाली किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करना आवश्यक है, विशेषकर तब जब मामला मानव जीवन और राष्ट्रीय हितों से जुड़ा हो।

    सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे समुद्री सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय घटनाओं और भारतीय नागरिकों से संबंधित किसी भी संवेदनशील सूचना पर भरोसा करने से पहले आधिकारिक पुष्टि का इंतजार करें। साथ ही भ्रामक और अप्रमाणित खबरों को आगे बढ़ाने से बचें ताकि अनावश्यक डर और भ्रम की स्थिति पैदा न हो।

  • बीएसएफ और बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड के बीच तनाव, भारतीय-विदेशी दस्तावेजों के अभाव में प्रवासी फंसे

    बीएसएफ और बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड के बीच तनाव, भारतीय-विदेशी दस्तावेजों के अभाव में प्रवासी फंसे

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल से सटी भारत-बांग्लादेश सीमा पर इन दिनों एक असामान्य स्थिति देखने को मिल रही है, जहां बड़ी संख्या में ऐसे लोग सामने आ रहे हैं जो लंबे समय से भारत में रह रहे थे और अब अपनी पहचान बताकर वापस बांग्लादेश लौटने की इच्छा जता रहे हैं। यह पूरा मामला उत्तर 24 परगना जिले के हकीमपुर चेकपोस्ट से सामने आया है, जहां प्रतिदिन सैकड़ों लोग वेरिफिकेशन के लिए पहुंच रहे हैं।

    सीमा सुरक्षा बल सीमा सुरक्षा बल (BSF) के अनुसार, इन लोगों की बायोमीट्रिक जांच और दस्तावेजों की पुष्टि की जा रही है, जिसके बाद उन्हें फिलहाल होल्डिंग सेंटरों में भेजा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यह पहली बार है जब स्थिति ऐसी बनी है कि अवैध प्रवासियों को खोजने की जरूरत नहीं पड़ रही, बल्कि लोग स्वयं सामने आकर अपनी पहचान दर्ज करा रहे हैं।

    स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, हकीमपुर बॉर्डर पर हर दिन लगभग 200 से 300 लोग वेरिफिकेशन के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें से कई लोगों के पास भारतीय दस्तावेज उपलब्ध हैं, लेकिन बांग्लादेश से जुड़े वैध पहचान पत्र नहीं हैं। इसी कारण उनके मामलों की जांच जटिल हो गई है और दोनों देशों के बीच प्रशासनिक स्तर पर प्रक्रिया लंबी हो रही है।

    इस बीच बांग्लादेश की सीमा सुरक्षा एजेंसी बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) ने आरोप लगाया है कि भारतीय सुरक्षा बलों की ओर से कुछ लोगों को सीमा पार धकेलने की कोशिश की गई है, हालांकि BSF ने इन आरोपों को खारिज किया है। बांग्लादेशी अधिकारियों का कहना है कि सीमा पर निगरानी बढ़ा दी गई है और किसी भी तरह की अवैध घुसपैठ या वापसी की कोशिश पर सख्ती से नजर रखी जा रही है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच कई प्रवासियों की व्यक्तिगत कहानियां भी सामने आई हैं। बांग्लादेश के सातक्षीरा जिले के मो. खालिद गाजी ने बताया कि वे अपनी पत्नी और बच्चों के साथ सीमा पर पहुंचे, लेकिन उनके पास कोई वैध दस्तावेज नहीं हैं। उनका दावा है कि उन्हें दोनों तरफ से अस्वीकार किया गया और उन्हें BSF का जासूस बताकर वापस भेज दिया गया।

    इसी तरह मुंबई में रह रहे मोहम्मद अख्तर शेख ने बताया कि वे करीब 22 साल पहले बांग्लादेश से भारत आए थे और उनके पास भारतीय आधार कार्ड तो है, लेकिन बांग्लादेश का कोई दस्तावेज नहीं है। उन्हें आशंका है कि अब वे किसी भी देश में पूरी तरह स्वीकार नहीं किए जाएंगे, जिससे उनका भविष्य अनिश्चित हो गया है।

    मुर्शिदाबाद जिले के जलंगी बॉर्डर से जुड़े एक अन्य व्यक्ति इस्लाम सरदार की कहानी भी सामने आई है, जिन्होंने कहा कि वे वर्षों से भारत में रह रहे हैं और अब अपने मूल देश लौटने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वहां भी दस्तावेजों की कमी के कारण उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने अपनी स्थिति को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा पर बदलते हालात, प्रशासनिक सख्ती और पहचान सत्यापन की नई प्रक्रिया के चलते यह स्थिति बनी है। पश्चिम बंगाल और सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ती भीड़ इस बात का संकेत है कि लंबे समय से रह रहे कई प्रवासी अब अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता महसूस कर रहे हैं।

    हालांकि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक स्तर पर बातचीत और सीमा प्रबंधन की कोशिशें जारी हैं, लेकिन फिलहाल स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। अधिकारियों के अनुसार, सभी मामलों की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी, ताकि मानवीय और कानूनी दोनों पहलुओं का संतुलन बना रहे।

  • किसानों के लिए अलर्ट: PM Kisan योजना में सख्ती, 23वीं किस्त पाने से पहले पूरे करने होंगे ये नियम

    किसानों के लिए अलर्ट: PM Kisan योजना में सख्ती, 23वीं किस्त पाने से पहले पूरे करने होंगे ये नियम

    नई दिल्ली । देश के करोड़ों किसानों के लिए राहत देने वाली प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना एक बार फिर चर्चा में है। 23वीं किस्त जारी होने से पहले किसानों के लिए एक अहम संदेश सामने आया है, जिसमें साफ किया गया है कि यदि जरूरी प्रक्रियाएं पूरी नहीं की गईं तो आर्थिक सहायता मिलने में बाधा आ सकती है।

    इस योजना के तहत पात्र किसानों को हर साल छह हजार रुपये की सहायता दी जाती है, जो तीन किस्तों में सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाती है। हाल ही में 22वीं किस्त जारी होने के बाद अब सभी लाभार्थी अगली किस्त का इंतजार कर रहे हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि 23वीं किस्त गर्मियों के बाद यानी जून के अंत या जुलाई 2026 की शुरुआत में जारी हो सकती है।

    लेकिन इस बार किस्त जारी होने से पहले प्रशासनिक स्तर पर निगरानी और सख्ती दोनों बढ़ा दी गई है। कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां अपात्र लोग भी इस योजना का लाभ ले रहे थे। इसी को देखते हुए अब पात्रता की जांच को और गहराई से किया जा रहा है। अगर किसी लाभार्थी की जानकारी गलत पाई जाती है, तो उसका नाम सूची से हटाया जा सकता है और पहले दी गई राशि की वसूली भी संभव है।

    किसानों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि तीन प्रमुख प्रक्रियाएं पूरी करना अब अनिवार्य कर दिया गया है। सबसे पहले ई-केवाईसी को अपडेट करना जरूरी है, क्योंकि इसके बिना भुगतान संभव नहीं होगा। इसके अलावा भूमि रिकॉर्ड का सत्यापन भी अनिवार्य है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि लाभार्थी वास्तव में कृषि भूमि का मालिक है। तीसरी महत्वपूर्ण शर्त यह है कि बैंक खाते को आधार से लिंक होना चाहिए और डीबीटी सुविधा सक्रिय होनी चाहिए, तभी राशि सीधे खाते में पहुंच सकेगी।

    कई किसान इन औपचारिकताओं को हल्के में ले रहे हैं, लेकिन इसका सीधा असर उनकी अगली किस्त पर पड़ सकता है। सरकार की ओर से यह स्पष्ट संकेत दिए गए हैं कि अब किसी भी तरह की लापरवाही को स्वीकार नहीं किया जाएगा। योजना का उद्देश्य केवल वास्तविक और पात्र किसानों को लाभ पहुंचाना है, इसलिए सभी रिकॉर्ड का मिलान और सत्यापन लगातार किया जा रहा है।

    ग्रामीण इलाकों में इस समय किसान अपने दस्तावेजों की जांच में जुटे हैं ताकि किसी भी तरह की गलती सुधार ली जाए। कई लोग अपने स्टेटस को भी समय-समय पर देख रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनका नाम लाभार्थी सूची में बना हुआ है या नहीं।

  • चंदेरी तहसील में बिना जांच बने जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, फर्जीवाड़े से बढ़े न्यायालयीन विवाद

    चंदेरी तहसील में बिना जांच बने जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, फर्जीवाड़े से बढ़े न्यायालयीन विवाद


    अशोकनगर।
    मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले की चंदेरी तहसील में बिना समुचित जांच के जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि कूट रचित दस्तावेजों के आधार पर नियमों की अनदेखी कर प्रमाण पत्र बनाए गए, जिससे न्यायालयों में अनावश्यक विवाद और प्रकरण बढ़ रहे हैं।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, चंदेरी निवासी रविकांत सेषा की शिकायत पर चंदेरी थाने में कमल सिंह लोधी निवासी ग्राम मोहनपुर के खिलाफ अपराध क्रमांक 0193/2026 दर्ज किया गया है। उस पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4), 338 और 336(3) के तहत प्रकरण कायम किया गया है।

    बताया गया है कि कमल सिंह लोधी ने तहसील कार्यालय में जन्म प्रमाण पत्र के लिए प्रकरण क्रमांक 0376/ड-154(1)/2024-25 तथा मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए प्रकरण क्रमांक 0067/ड-154/2024-25 प्रस्तुत किया था। वहीं, भैयालाल लोधी ने कथित रूप से वसीयत तैयार करने के उद्देश्य से मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए प्रकरण क्रमांक 0077/ड-154/2024-25 के माध्यम से आवेदन किया। आरोप है कि इन सभी प्रकरणों में कूट रचित दस्तावेजों के आधार पर एक ही दिन में प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए।

    इन प्रमाण पत्रों के जरिए कथित रूप से भूमि के नामांतरण और पूर्व विक्रय पत्रों को शून्य कराने की कोशिश की गई, जो बाद में न्यायालयीन विवाद का कारण बनी। पीड़ित पक्ष का कहना है कि इस संबंध में तहसील प्रशासन, एसडीएम और कलेक्टर को शिकायत की गई, लेकिन पांच माह से अधिक समय बीतने के बाद भी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

    बाबुओं की भूमिका संदिग्ध, जांच की मांग तेज

    सूत्रों के अनुसार, यह कोई पहला मामला नहीं है। चंदेरी तहसील में वर्षों से पदस्थ कुछ बाबुओं की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है, जो कथित रूप से अधिकारियों को गुमराह कर ऑर्डर शीट तैयार कराते हैं और उनके हस्ताक्षर करवा लेते हैं। इसी के आधार पर नियम विरुद्ध तरीके से नामांतरण प्रकरण भी स्वीकृत किए जा रहे हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पिछले दो-तीन वर्षों में जारी जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र और नामांतरण प्रकरणों की निष्पक्ष जांच की जाए, तो कई और अनियमितताएं सामने आ सकती हैं।

    आम नागरिक पर कार्रवाई, जिम्मेदार सुरक्षित

    मामले में पुलिस ने कमल सिंह लोधी के खिलाफ कार्रवाई की है, लेकिन तहसील स्तर पर प्रमाण पत्र जारी करने वाले जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि लापरवाही या मिलीभगत के बावजूद जिम्मेदारों को क्यों बचाया जा रहा है।

    जांच नहीं हुई तो बढ़ेंगे विवाद

    स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस पूरे प्रकरण की गहन जांच नहीं कराई गई, तो भविष्य में ऐसे कई मामले सामने आएंगे, जिससे न्यायालयों पर बोझ बढ़ेगा और आम नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।

    अब देखना यह होगा कि राजस्व विभाग और जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और दोषियों पर क्या कार्रवाई करते हैं।