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  • खंडवा के धरमपुरी गौशाला में भूख-प्यास से गायों की मौत, कलेक्टर ने इंजीनियर-डॉक्टर को नोटिस जारी किया

    खंडवा के धरमपुरी गौशाला में भूख-प्यास से गायों की मौत, कलेक्टर ने इंजीनियर-डॉक्टर को नोटिस जारी किया


    खंडवा । जिले से करीब 25 किलोमीटर दूर धरमपुरी की नंद मोहन समिति गौशाला में एक महीना से लगातार गायों की मौत का सिलसिला चल रहा है। बुधवार को गौशाला के पास लगभग छह गायों के शव और छह के कंकाल मिलने से मामला सार्वजनिक हुआ तो जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। सरकारी अनुदान से संचालित इस गौशाला में गायों की मौत की खबर फैलते ही कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने घटना की गंभीरता को देखते हुए मौके पर पहुंचकर औचक निरीक्षण किया।

    जांच के दौरान गौशाला की स्थिति बेहद खराब मिली। फर्श टूटा हुआ पानी की टंकी लीकेज में और चरनौई भूमि पर चारे की बजाय गेहूं की फसल उगती हुई दिखी। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि मृत गायों के शवों को दफनाने की बजाय वन विभाग की जमीन पर खुले में छोड़ दिया गया था। इससे प्रशासन की कार्रवाई तेज हो गई और कलेक्टर ने संबंधित इंजीनियरों और पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।

    कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने कहा कि धरमपुरी की गौशाला मुख्य मार्ग से लगभग 4 किलोमीटर दूर है। वहां पहले भी कुछ गायों के मृत और बचे हुए कंकाल मिलने की शिकायत आई थी। उस समय निरीक्षण के बाद गौशाला के संचालकों और ग्राम पंचायत के सरपंच-सचिव को बेहतर प्रबंधन के निर्देश दिए गए थे। साथ ही हर महीने गौशाला का दौरा करने वाले डॉक्टर को भी नोटिस जारी किया गया है।

    गौशाला के संचालक जब कलेक्टर से पूछे गए तो नंद मोहन गौशाला के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर के सदस्य आशीष बरोले ने कहा कि आसपास के गांवों के लोग मृत गायों को यहां छोड़ जाते हैं हम क्या कर सकते हैं। इस बयान के बाद ग्रामीणों ने आरोपों को गलत बताया और कहा कि गायों की मौत गौशाला के खराब प्रबंधन और खाने-पीने की कमी से हुई है।

    पशु चिकित्सा विभाग के उप-संचालक हेमंत शाह ने बताया कि गायों की मौत एक दिन में नहीं हुई बल्कि लगभग 15 दिनों के अंतराल में यह घटना सामने आई है। मौके पर सिर्फ एक गाय का शव मिला जबकि अन्य के कंकाल पाए गए जिन्हें सही तरीके से डिस्पोजल कराया गया। उन्होंने कहा कि पूरी जांच की रिपोर्ट कलेक्टर को दे दी गई है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।मामले की जांच जिला प्रशासन द्वारा जारी है और अब इस गौशाला के प्रबंधन पानी-चारे की व्यवस्था और विभागीय लापरवाही की जाँच की जा रही है।

  • अनूपपुर में मवेशियों की रहस्यमयी मौत से हड़कंप: दो दिनों में 12 पशु मरे, फूड प्वाइजनिंग की आशंका

    अनूपपुर में मवेशियों की रहस्यमयी मौत से हड़कंप: दो दिनों में 12 पशु मरे, फूड प्वाइजनिंग की आशंका


    अनूपपुर । मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में मवेशियों की अचानक हो रही मौतों से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। बीते दो दिनों में 10 से 12 मवेशियों की रहस्यमयी बीमारी से मौत हो चुकी है। यह मामला कोतमा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम पंचायत दूल्ही बांध के मुसवा झोरखी गांव का बताया जा रहा है जहां एक के बाद एक पशुओं की मौत ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है।

    ग्रामीणों के अनुसार बीमार मवेशियों में अचानक लार गिरना पेट फूलना सांस लेने में तकलीफ और कमजोरी जैसे लक्षण नजर आ रहे हैं। हालत इतनी तेजी से बिगड़ रही है कि कुछ मवेशियों की कुछ ही घंटों के भीतर मौत हो जा रही है। बीमारी के तेजी से फैलने की आशंका को देखते हुए ग्रामीणों ने एहतियातन अपने मवेशियों को बांधकर रखना शुरू कर दिया है ताकि संक्रमण अन्य पशुओं तक न पहुंचे।

    मामले की जानकारी मिलते ही पशु चिकित्सा विभाग की चलित टीम गांव पहुंची और बीमार व स्वस्थ मवेशियों के ब्लड सैंपल लेकर जांच शुरू की। साथ ही एहतियात के तौर पर टीकाकरण का कार्य भी किया जा रहा है। बिजुरी के पशु चिकित्सक डॉ. गुप्ता ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह मामला फूड प्वाइजनिंग से जुड़ा हो सकता है हालांकि बीमारी की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट और लैब जांच आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

    इस बीच ग्रामीणों ने पशु चिकित्सा विभाग पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर ही निगवानी क्षेत्र के पशु चिकित्सक डॉ. पांडे को सूचना देकर टीकाकरण की मांग की थी लेकिन ब्लॉक पशु चिकित्सा अधिकारी की ओर से समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। आरोप है कि इसी लापरवाही के कारण दो दिनों में 12 मवेशियों की जान चली गई।

    ग्रामीणों ने बताया कि जब मामले की शिकायत कलेक्टर तक पहुंचाई गई तब जाकर पशु चिकित्सा विभाग हरकत में आया और टीम को गांव भेजा गया। फिलहाल गांव में दहशत का माहौल बना हुआ है और पशुपालक अपने मवेशियों को लेकर चिंतित हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद बीमारी के कारणों पर स्थिति साफ हो सकेगी। तब तक एहतियात बरतने और मवेशियों को खुले में चरने से रोकने की सलाह दी गई है।