एक बातचीत के दौरान नितेश तिवारी ने बताया कि फिल्म की कहानी तैयार करना भी टीम के लिए बड़ी चुनौती थी। उनकी कोशिश थी कि फिल्म महर्षि वाल्मीकि की रामायण पर आधारित रहे, लेकिन इसके साथ ही रामायण के अन्य संस्करणों में मौजूद खूबसूरत प्रसंगों और कहानियों को भी जगह दी जाए।
रामायण के अलग-अलग संस्करणों को समझने में लगी मेहनत
नितेश तिवारी के मुताबिक, देश में रामायण के 300 से ज्यादा अलग-अलग संस्करण मौजूद हैं। इनमें कई छोटी और महत्वपूर्ण कहानियां भी शामिल हैं। अलग-अलग संस्करणों में कुछ पात्रों और घटनाओं को अलग-अलग तरीके से प्रस्तुत किया गया है। हालांकि, लोगों ने रामायण के इन सभी रूपों को अपनाया है। ऐसे में फिल्म की टीम के सामने चुनौती थी कि विभिन्न संस्करणों की विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए ऐसी कहानी तैयार की जाए, जो मूल महाकाव्य के साथ न्याय कर सके।
निर्देशक ने बताया कि कहानी को कागज पर तैयार करना ही काफी मुश्किल काम था। इसके बाद अगली चुनौती यह थी कि लेखन के दौरान जिस तरह के दृश्यों और किरदारों की कल्पना की गई है, उन्हें पर्दे पर उसी प्रभाव के साथ कैसे दिखाया जाए। इसके लिए लंबे समय तक तैयारी की गई और किरदारों से लेकर फिल्म से जुड़ी दूसरी चीजों को विकसित करने में भी काफी समय लगा।
रावण-जटायु की लड़ाई तैयार करने में लगे साढ़े छह साल
नितेश तिवारी ने फिल्म के विजुअल इफेक्ट्स यानी वीएफएक्स पर हुई मेहनत का उदाहरण देते हुए रावण और जटायु की लड़ाई का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जब पहली बार कलाकारों और तकनीकी टीम को इस दृश्य के बारे में बताया गया था, तब से लेकर इसे अंतिम रूप देने तक करीब साढ़े छह साल का समय लग गया।
निर्देशक के अनुसार, यह केवल एक एक्शन सीक्वेंस है, लेकिन इसे शुरू से तैयार करने में हजारों लोगों ने काम किया। उन्होंने कहा कि यदि इस दृश्य को बनाने की पूरी प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया जाए, तो इस पर एक घंटे तक बात की जा सकती है। रणबीर कपूर ने भी इस दौरान कहा कि केवल एक एक्शन सीन को तैयार करने में इतना लंबा समय लगना अपने आप में टीम की मेहनत को दर्शाता है।
पुष्पक विमान के 40-50 डिजाइन तैयार किए गए
निर्देशक ने बताया कि पुष्पक विमान का अंतिम डिजाइन तैयार करने में ही टीम को करीब दो साल लग गए। इस दौरान विमान के लगभग 40 से 50 अलग-अलग डिजाइन बनाए गए। टीम ऐसा विमान नहीं बनाना चाहती थी, जिसे देखकर दर्शकों को उसके उड़ने की क्षमता पर संदेह हो। उनकी कोशिश थी कि विमान की बनावट ऐसी हो, जिसे देखकर लगे कि वह वास्तव में उड़ सकता है और उसकी संरचना के पीछे कोई वैज्ञानिक आधार है।
नितेश के मुताबिक, टीम का मानना था कि प्राचीन समय में इस्तेमाल होने वाली चीजों के पीछे भी कोई न कोई विज्ञान रहा होगा। इसलिए पुष्पक विमान को तैयार करते समय उसकी बनावट, उड़ने के तरीके और अंदरूनी संरचना पर विशेष ध्यान दिया गया।
उन्होंने बताया कि विमान का डिजाइन बदलने के कारण रावण और जटायु की लड़ाई के दृश्य में भी कई बदलाव करने पड़े। शुरुआत में पुराने डिजाइन के आधार पर इस लड़ाई की कोरियोग्राफी तैयार की गई थी। लेकिन जब विमान का अंतिम डिजाइन पहले से काफी अलग निकला, तो पूरे सीक्वेंस को उसके अनुसार दोबारा व्यवस्थित करना पड़ा। उदाहरण के तौर पर, विमान में गुंबद जैसी संरचना बनने के बाद जटायु के आने-जाने के रास्ते में बदलाव करना जरूरी हो गया।
नितेश तिवारी की आखिरी फिल्म ‘बवाल’ थी, जिसमें वरुण धवन और जाह्नवी कपूर नजर आए थे। यह फिल्म सीधे ओटीटी पर रिलीज हुई थी। अब निर्देशक ‘रामायण’ के साथ बड़े पर्दे पर लौट रहे हैं। फिल्म की रिलीज 5 नवंबर के लिए निर्धारित बताई गई है। दर्शकों की नजर इस बात पर है कि वर्षों की तैयारी और हजारों लोगों की मेहनत से तैयार की गई यह फिल्म उन्हें कितनी पसंद आती है।



