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  • नागपुर MLC चुनाव में कांग्रेस के अभिजीत वंजारी की जीत, BJP प्रत्याशी को 3271 वोटों से हराया

    नागपुर MLC चुनाव में कांग्रेस के अभिजीत वंजारी की जीत, BJP प्रत्याशी को 3271 वोटों से हराया


    नागपुर। महाराष्ट्र के नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस के अभिजीत गोविंदराव वंजारी ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की है। उन्होंने भाजपा प्रत्याशी सुधाकर कोहले को 3,271 मतों से हराकर विधान परिषद की सीट बरकरार रखी। वंजारी को कुल 67,231 वोट मिले, जबकि कोहले के खाते में 63,960 मत आए। करीब 41 घंटे तक चली मतगणना के बाद गुरुवार को परिणाम घोषित हुआ।

    2020 में पहली बार जीता था चुनाव
    अभिजीत वंजारी ने दिसंबर 2020 में पहली बार नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की थी। उस समय उन्होंने महा विकास अघाड़ी (MVA) के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा और भाजपा के संदीप जोशी को 18 हजार से अधिक मतों के अंतर से हराया था।

    नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र लंबे समय तक भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। ऐसे में वंजारी की लगातार दूसरी जीत कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस बार उनका मुकाबला भाजपा के सुधाकर कोहले से था। मतगणना के शुरुआती दौर में कोहले ने बढ़त बनाई, लेकिन दूसरी वरीयता के मतों की गिनती के बाद वंजारी ने जीत दर्ज की।

    कौन हैं अभिजीत वंजारी?
    अभिजीत वंजारी नागपुर के राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता स्वर्गीय गोविंदराव मारोतराव वंजारी दक्षिण नागपुर विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक रह चुके थे। अभिजीत ने राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय से कला स्नातक (BA) और विधि स्नातक (LLB) की पढ़ाई की है। वह नागपुर विश्वविद्यालय की सीनेट और प्रबंधन परिषद के सदस्य भी रह चुके हैं। राजनीति के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी उनकी सक्रियता रही है। वह अधिवक्ता और शिक्षाविद् के रूप में पहचाने जाते हैं तथा लंबे समय से कांग्रेस से जुड़े हुए हैं।

    छात्र राजनीति से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
    अभिजीत वंजारी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत छात्र राजनीति से की थी। वह 1998 से 2002 तक महाराष्ट्र प्रदेश एनएसयूआई के महासचिव रहे। इसके बाद उन्हें महाराष्ट्र प्रदेश युवा कांग्रेस में सचिव की जिम्मेदारी मिली।

    वह कई वर्षों तक नागपुर जिला कांग्रेस कमेटी के महासचिव और मुख्य प्रवक्ता भी रहे। इसके अलावा उत्तर प्रदेश और बिहार सहित दूसरे राज्यों में कांग्रेस के चुनाव पर्यवेक्षक के रूप में भी काम कर चुके हैं।

    वंजारी ने विधानसभा चुनावों में भी अपनी किस्मत आजमाई थी। उन्होंने 2005 में दक्षिण नागपुर विधानसभा उपचुनाव और 2014 में पूर्व नागपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन दोनों ही मुकाबलों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

    शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में भी सक्रिय
    राजनीतिक गतिविधियों के अलावा अभिजीत वंजारी शिक्षा और सामाजिक कार्यों से भी जुड़े हैं। वह नागपुर के अमर सेवा मंडल शिक्षण संस्था के सचिव हैं। यह संस्था विदर्भ क्षेत्र में इंजीनियरिंग, फार्मेसी, कानून, मैनेजमेंट और कला-विज्ञान सहित विभिन्न विषयों के कॉलेज संचालित करती है।

    इसके साथ ही वह गोविंद अर्बन क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी के अध्यक्ष भी हैं। गोविंदराव वंजारी फाउंडेशन के माध्यम से स्वास्थ्य शिविर, रक्तदान अभियान, पौधरोपण और युवा विकास से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

    41 घंटे चली मतगणना, दूसरी वरीयता के मतों से पलटा परिणाम
    नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव की मतगणना 27 अक्टूबर को शुरू हुई थी और 41 घंटे से अधिक समय तक चली। पहली वरीयता के मतों में भाजपा के सुधाकर कोहले को 60,924 और अभिजीत वंजारी को 56,630 वोट मिले थे। इस चरण में कोहले 4,294 मतों से आगे थे।

    हालांकि, कोई भी उम्मीदवार जीत के लिए जरूरी मतों का निर्धारित कोटा हासिल नहीं कर सका। इसके बाद दूसरी वरीयता के मतों की गिनती की गई। अंतिम परिणाम में वंजारी को 67,231 और कोहले को 63,960 मत मिले। इस तरह वंजारी ने 3,271 वोटों से जीत हासिल की और नागपुर स्नातक सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा।

  • चुनाव में जीत के लिए भी ट्रंप के भरोसे नेतन्याहू, समर्थन बढ़ाने के लिए तीन दिन में दो बार किया फोन

    चुनाव में जीत के लिए भी ट्रंप के भरोसे नेतन्याहू, समर्थन बढ़ाने के लिए तीन दिन में दो बार किया फोन


    तेल अवीव।
    इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू एक बार फिर चुनावी जीत के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थन की उम्मीद कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों में पिछड़ने के अनुमानों के बीच नेतन्याहू ने पिछले तीन दिनों में ट्रंप से दो बार फोन पर बात कर समर्थन बढ़ाने की मांग की। हालांकि, नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने इन दावों से इनकार किया है। व्हाइट हाउस ने भी इस संबंध में पूछे गए सवालों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

    एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, मामले की जानकारी रखने वाले एक अमेरिकी और एक इजरायली सूत्र ने नेतन्याहू की ओर से अतिरिक्त समर्थन मांगे जाने की जानकारी दी है। अमेरिकी सूत्र के मुताबिक, व्हाइट हाउस ने इस कोशिश को नेतन्याहू की ‘हताशा की निशानी’ के रूप में देखा। रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि इजरायली प्रधानमंत्री को चुनावी मुकाबले में अपनी स्थिति कमजोर होने की चिंता है।

    हालांकि, लिकुड पार्टी की प्रवक्ता नेटा मोल्चो ने इन दावों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने हाल के दिनों में या ट्रंप के समर्थन वाले बयान से पहले उनसे मदद नहीं मांगी थी।

    ट्रंप पहले ही कर चुके हैं नेतन्याहू का समर्थन

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर नेतन्याहू के समर्थन में बयान दे चुके हैं। उन्होंने इजरायली मतदाताओं को आगाह करते हुए कहा था कि नेतन्याहू की चुनावी हार का असर अमेरिका और इजरायल के संबंधों पर पड़ सकता है।

    एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, इसके बावजूद नेतन्याहू की ओर से ट्रंप से और समर्थन देने का अनुरोध किया गया। इजरायली सूत्र ने बताया कि नेतन्याहू की ओर से सुझाव दिया गया था कि ट्रंप इजरायली पत्रकारों से फोन पर बातचीत करें और चुनाव अभियान के प्रति अपना समर्थन जाहिर करें।

    इसी दौरान नेतन्याहू ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी फोन पर बातचीत की थी। हालांकि, इस बातचीत के बाद प्रधानमंत्री मोदी की ओर से इजरायल के चुनाव को लेकर कोई समर्थन संदेश जारी नहीं किया गया।

    पहले भी विदेशी नेताओं के साथ दिखा चुके हैं नजदीकी

    नेतन्याहू इससे पहले भी चुनाव प्रचार के दौरान विदेशी नेताओं के साथ अपने संबंधों को प्रमुखता देते रहे हैं। पिछले चुनावों में इजरायल की इमारतों पर प्रधानमंत्री मोदी, डोनाल्ड ट्रंप और अन्य विदेशी नेताओं के साथ उनकी तस्वीरों वाले पोस्टर लगाए गए थे। इन तस्वीरों के जरिए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय नेताओं के साथ अपने संबंधों को चुनाव प्रचार में जगह दी थी।

    सर्वेक्षणों में बहुमत से दूर दिख रहा नेतन्याहू का गठबंधन

    नेतन्याहू की चिंता की एक प्रमुख वजह चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों के अनुमान हैं। रिपोर्ट के अनुसार, तीन सर्वेक्षणों में 120 सदस्यीय इजरायली संसद नेसेट में उनके गठबंधन को बहुमत के आंकड़े से पीछे रहने का अनुमान जताया गया है।

    इन सर्वेक्षणों में नेतन्याहू के गठबंधन को करीब 50 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। यह उनके मौजूदा गठबंधन की सीटों की संख्या से 17 कम है। उनकी प्रमुख पार्टी लिकुड, जिसके पास वर्तमान में 32 सीटें हैं, के घटकर करीब 20 सीटों पर सिमटने का अनुमान लगाया गया है।

    हालांकि, नेतन्याहू समर्थक चैनल 14 के सर्वेक्षण में तस्वीर अलग दिखाई गई है। सप्ताह की शुरुआत में जारी इस सर्वेक्षण में नेतन्याहू के गठबंधन को 60 सीटें और लिकुड पार्टी को 30 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया था।

    इस तरह अलग-अलग सर्वेक्षणों में नेतन्याहू के गठबंधन की संभावनाओं को लेकर अंतर दिखाई दे रहा है। चुनाव में उनकी पार्टी और सहयोगी दलों का प्रदर्शन ही तय करेगा कि वे सत्ता में बने रह पाते हैं या नहीं।

  • पेरू में ‘हिटलर मुसोलिनी’ बना मेयर, सिर्फ 25 वोटों से जीता चुनाव, नाम के कारण दुनिया भर में चर्चा

    पेरू में ‘हिटलर मुसोलिनी’ बना मेयर, सिर्फ 25 वोटों से जीता चुनाव, नाम के कारण दुनिया भर में चर्चा


    नई दिल्ली। चुनाव में जीत दर्ज करने वाले नेताओं की चर्चा आमतौर पर उनके राजनीतिक विचारों, वादों और कामकाज को लेकर होती है, लेकिन पेरू में एक नवनिर्वाचित मेयर अपने नाम की वजह से सुर्खियों में हैं। यहां हिटलर मुसोलिनी सिमेओन फ्लोरेस ने स्थानीय निकाय चुनाव में जीत हासिल की है। उनके नाम में शामिल ‘हिटलर’ और ‘मुसोलिनी’ शब्दों ने इस चुनाव को दुनिया भर में चर्चा का विषय बना दिया है।

    45 वर्षीय फ्लोरेस ने पेरू के हुआनुको विभाग के पहाड़ी इलाके में स्थित क्वेरोपाल्का जिले में मेयर पद का चुनाव लड़ा था। उन्होंने केंद्रीय-वामपंथी पार्टी ‘आहोरा नासियोन’ के टिकट पर मैदान में उतरकर जीत दर्ज की। चुनाव में उन्हें 229 वोट मिले, जो कुल 663 वैध मतों का 34.5 प्रतिशत है।

    फ्लोरेस ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी गैस्पर बेनिल्डे ओसोरियो ज़ाम्ब्रानो को केवल 25 वोटों के अंतर से हराया। दक्षिणपंथी पार्टी ‘पॉपुलर रिन्यूअल पेरू’ के उम्मीदवार ओसोरियो को 204 वोट मिले।

    730 से कुछ अधिक आबादी वाला जिला, लेकिन चर्चा पूरी दुनिया में

    क्वेरोपाल्का पेरू के लौरिकोचा प्रांत में स्थित एक छोटा-सा जिला है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024 में यहां की आबादी 730 से कुछ अधिक थी। यह इलाका राजधानी लीमा से करीब 360 किलोमीटर दूर है।

    इतनी कम आबादी वाले जिले में हुए स्थानीय चुनाव की चर्चा सामान्य तौर पर क्षेत्र तक सीमित रह सकती थी, लेकिन फ्लोरेस के नाम ने इसे अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया। उनके नाम के दो हिस्से जर्मनी के एडोल्फ हिटलर और इटली के बेनिटो मुसोलिनी की याद दिलाते हैं। दोनों 20वीं सदी के कुख्यात तानाशाहों में गिने जाते हैं और फासीवादी विचारधारा तथा दमनकारी शासन से जुड़े रहे थे।

    हालांकि, किसी व्यक्ति का नाम अपने आप में उसके राजनीतिक विचारों या विचारधारा का प्रमाण नहीं होता। फ्लोरेस की चुनावी जीत को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिलचस्पी की प्रमुख वजह भी उनके नाम और ऐतिहासिक तानाशाहों के नामों से उसकी समानता है।

    पेरू में पहले भी ‘हिटलर’ नाम वाले नेता बटोर चुके हैं सुर्खियां

    पेरू में यह पहला मामला नहीं है, जब किसी नेता के नाम में ‘हिटलर’ शब्द होने के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हुई हो। इससे पहले हिटलर ग्यूस्कलिन अल्बा सांचेज भी अपने नाम को लेकर सुर्खियों में रह चुके हैं। वह केंद्र-दक्षिणपंथी पार्टी ‘वी आर पेरू’ से जुड़े थे और वर्ष 2011 से 2014 तक युंगार शहर के मेयर रहे थे।

    अल्बा ने वर्ष 2018 में भी मेयर का चुनाव जीता था। उस समय उनके प्रतिद्वंद्वी लेनिन व्लादिमीर रोड्रिगेज वाल्वरडे ने उनकी उम्मीदवारी की वैधता को चुनौती दी थी।

    रिपोर्टों के मुताबिक, अल्बा ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान ‘हिटलर रिटर्न्स’ और ‘हिटलर विद द पीपल’ जैसे नारे इस्तेमाल किए थे। उन्होंने खुद को ‘अच्छा हिटलर’ भी बताया था। अल्बा का कहना था कि उनके पिता ने उनका नाम रखते समय नाजी नेता एडोल्फ हिटलर के इतिहास और उसकी विरासत के बारे में जानकारी नहीं रखी थी।

    सांसद भी रहे हैं हिटलर नाम वाले नेता

    पेरू में हिटलर नाम के एक अन्य नेता भी चर्चा में रहे हैं। हिटलर सावेद्रा पेशे से सर्जन थे और ‘वी आर पेरू’ पार्टी से सांसद बने थे। उन्होंने वर्ष 2021 से 2024 में अपनी मृत्यु तक संसद में काम किया। उनका निधन 46 वर्ष की उम्र में हुआ था।

    इन मामलों ने पेरू के कुछ नेताओं के नामों को अंतरराष्ट्रीय मीडिया में बार-बार चर्चा का विषय बनाया है। अब हिटलर मुसोलिनी सिमेओन फ्लोरेस की जीत के बाद एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि ऐसे ऐतिहासिक रूप से विवादास्पद नाम किसी स्थानीय चुनाव को किस तरह वैश्विक सुर्खियों तक पहुंचा सकते हैं।

  • मिशिगन में अब्दुल अल-सईद बने डेमोक्रेटिक उम्मीदवार, ट्रंप ने इजरायल और यहूदियों पर रुख को लेकर साधा निशाना

    मिशिगन में अब्दुल अल-सईद बने डेमोक्रेटिक उम्मीदवार, ट्रंप ने इजरायल और यहूदियों पर रुख को लेकर साधा निशाना


    नई दिल्ली। अमेरिका में 2026 के मिडटर्म चुनाव से पहले मिशिगन सीनेट सीट की डेमोक्रेटिक प्राइमरी में अब्दुल अल-सईद की जीत के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। रिपब्लिकन नेता और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अल-सईद पर तीखा हमला करते हुए उनके इजरायल संबंधी रुख की आलोचना की, जबकि अल-सईद ने अपने ऊपर लगाए गए यहूदी-विरोधी आरोपों को सिरे से खारिज किया।

    लास वेगास में एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने कहा कि अल-सईद इजरायल और यहूदियों के प्रति नकारात्मक सोच रखते हैं। उन्होंने उन पर तीखी टिप्पणी करते हुए उन्हें “नफरत से भरा व्यक्ति” बताया और दावा किया कि नवंबर में होने वाले चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स उन्हें पराजित करेंगे।

    डेमोक्रेटिक उम्मीदवार बने अब्दुल अल-सईद
    अब्दुल अल-सईद ने मिशिगन की डेमोक्रेटिक प्राइमरी में हेली स्टीवंस को करीबी मुकाबले में हराकर सीनेट उम्मीदवार बनने का अधिकार हासिल किया। अब नवंबर में उनका मुकाबला रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स से होगा।

    क्या हैं अल-सईद के प्रमुख मुद्दे?
    अब्दुल अल-सईद स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, ‘मेडिकेयर फॉर ऑल’, महंगाई पर नियंत्रण और राजनीति में कॉरपोरेट प्रभाव कम करने जैसे मुद्दों के समर्थक रहे हैं। विदेश नीति के मोर्चे पर वह अमेरिका द्वारा इजरायल को बिना शर्त दी जाने वाली सैन्य सहायता की आलोचना करते रहे हैं और इसमें बदलाव की मांग कर चुके हैं। अल-सईद मिस्र से अमेरिका आए प्रवासी परिवार से हैं। उनके पिता मोहम्मद मिस्र से अमेरिका आकर बसे थे।

    यहूदी-विरोध के आरोपों का दिया जवाब
    प्राइमरी जीत के बाद अल-सईद ने कहा कि वह यहूदी समुदाय की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे हर प्रकार के यहूदी-विरोध (Anti-Semitism) और इस्लामोफोबिया का विरोध करते हैं तथा सभी समुदायों की सुरक्षा और समानता के पक्षधर हैं।

    जोहरान ममदानी ने दी बधाई
    न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने अल-सईद की जीत का स्वागत करते हुए कहा कि उन्होंने स्वास्थ्य सेवा, महंगाई और आम कामकाजी लोगों के मुद्दों पर चुनाव लड़ा। ममदानी ने उन्हें “मिनी ममदानी” कहे जाने से असहमति जताई और कहा कि अल-सईद ने अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाई है।

    मिशिगन का आगामी सीनेट चुनाव डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों दलों के लिए अहम माना जा रहा है। अल-सईद की जीत को डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रोग्रेसिव धड़े के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है, जबकि रिपब्लिकन खेमा उनके इजरायल संबंधी विचारों को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहा है।

  • पूर्व CSK खिलाड़ी वंश बेदी ने चौके-छक्कों से पलटा मुकाबला, सेंट्रल दिल्ली किंग्स ने दर्ज की शानदार जीत

    पूर्व CSK खिलाड़ी वंश बेदी ने चौके-छक्कों से पलटा मुकाबला, सेंट्रल दिल्ली किंग्स ने दर्ज की शानदार जीत

    नई दिल्ली । दिल्ली प्रीमियर लीग (डीपीएल) 2026 में सेंट्रल दिल्ली किंग्स ने एक रोमांचक मुकाबले में आउटर दिल्ली वॉरियर्स को चार विकेट से हराकर शानदार जीत दर्ज की। बारिश के कारण 10-10 ओवर का किया गया यह मुकाबला आखिरी गेंदों तक रोमांच से भरपूर रहा। जीत के सबसे बड़े नायक रहे चेन्नई सुपर किंग्स के पूर्व खिलाड़ी वंश बेदी, जिन्होंने दबाव की स्थिति में विस्फोटक बल्लेबाजी करते हुए टीम को यादगार जीत दिलाई।

    अरुण जेटली स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में टॉस हारने के बाद पहले बल्लेबाजी करते हुए आउटर दिल्ली वॉरियर्स ने निर्धारित 10 ओवर में पांच विकेट के नुकसान पर 130 रन का मजबूत स्कोर बनाया। छोटे प्रारूप में यह लक्ष्य चुनौतीपूर्ण माना जा रहा था और सेंट्रल दिल्ली किंग्स के सामने 131 रन बनाने की कठिन चुनौती थी।

    आउटर दिल्ली वॉरियर्स की ओर से यजस शर्मा ने 16 गेंदों में 39 रन की तेज पारी खेली। वहीं मोहित पंवार ने 18 गेंदों पर 37 रन बनाकर टीम की पारी को मजबूती दी। अक्षय सैनी ने भी 15 गेंदों में 31 रन जोड़ते हुए स्कोर को 130 तक पहुंचाने में अहम योगदान दिया।

    लक्ष्य का पीछा करने उतरी सेंट्रल दिल्ली किंग्स को कप्तान यश ढुल ने तेज शुरुआत दिलाई। उन्होंने सिर्फ 16 गेंदों में 35 रन बनाए, जिसमें दो चौके और तीन छक्के शामिल रहे। इसके बाद जोंटी सिद्धू ने 12 गेंदों में 25 रन बनाकर रन गति बनाए रखी। हालांकि बीच के ओवरों में लगातार विकेट गिरने से मुकाबला एक बार फिर संतुलन की स्थिति में पहुंच गया।

    ऐसे समय में वंश बेदी ने जिम्मेदारी संभाली और आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए मैच का रुख बदल दिया। उन्होंने केवल 16 गेंदों में नाबाद 47 रन बनाए। इस पारी के दौरान उनके बल्ले से तीन चौके और पांच शानदार छक्के निकले। लगभग 294 के स्ट्राइक रेट से खेली गई उनकी पारी ने विपक्षी टीम की जीत की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

    मुकाबले का सबसे रोमांचक क्षण अंतिम दो ओवरों में देखने को मिला। नौवें ओवर की आखिरी चार गेंदों पर वंश बेदी ने एक चौका और लगातार तीन छक्के लगाकर मैच पूरी तरह अपनी टीम के पक्ष में कर दिया। इसके बाद अंतिम ओवर में भी उन्होंने लगातार दो चौके और एक छक्का जड़ते हुए टीम को एक गेंद शेष रहते 133 रन तक पहुंचा दिया। सेंट्रल दिल्ली किंग्स ने 9.5 ओवर में छह विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया।

    इस जीत के बाद वंश बेदी का एक वीडियो भी चर्चा का विषय बना, जिसमें वह लोकप्रिय फिल्मी संवाद ‘फ्लावर नहीं, फायर हूं मैं’ कहते नजर आए। उनकी यह प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई और क्रिकेट प्रशंसकों ने उनकी मैच जिताऊ पारी की जमकर सराहना की।

    वंश बेदी की इस विस्फोटक बल्लेबाजी ने एक बार फिर साबित किया कि सीमित ओवरों के क्रिकेट में दबाव के क्षणों में संयम और आक्रामकता का सही संतुलन किसी भी मैच का परिणाम बदल सकता है। उनकी शानदार पारी ने सेंट्रल दिल्ली किंग्स को टूर्नामेंट में एक और महत्वपूर्ण जीत दिलाई और टीम का आत्मविश्वास भी बढ़ाया।

  • एजबेस्टन में गिल और अक्षर का शानदार प्रदर्शन, इंग्लैंड को 6 विकेट से हराया, भारत की जीत की ये हैं 5 बड़ी वजहें

    एजबेस्टन में गिल और अक्षर का शानदार प्रदर्शन, इंग्लैंड को 6 विकेट से हराया, भारत की जीत की ये हैं 5 बड़ी वजहें


    बर्मिंघम। भारतीय टीम ने एजबेस्टन में खेले गए पहले वनडे मुकाबले में इंग्लैंड को छह विकेट से हराकर न सिर्फ तीन मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त हासिल की, बल्कि कई रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिए। कप्तान शुभमन गिल की शानदार बल्लेबाजी और अक्षर पटेल के बेहतरीन ऑलराउंड प्रदर्शन ने भारत को यादगार जीत दिलाई।

    259 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत ने 45.2 ओवर में चार विकेट गंवाकर मुकाबला अपने नाम कर लिया। कप्तान शुभमन गिल ने 75 गेंदों में 80 रन की शानदार पारी खेली। उनकी पारी में 11 चौके और एक छक्का शामिल रहा। हालांकि, क्रैम्प और हैमस्ट्रिंग की परेशानी के कारण उन्हें रिटायर्ड हर्ट होकर मैदान छोड़ना पड़ा।

    इसके बाद अक्षर पटेल और वॉशिंगटन सुंदर ने जिम्मेदारी संभाली। दोनों ने पांचवें विकेट के लिए नाबाद 102 रनों की साझेदारी कर भारत की जीत पक्की कर दी। अक्षर ने नाबाद 57 रन बनाए, जबकि सुंदर ने नाबाद 52 रनों का योगदान दिया।

    गेंदबाजों ने पलटी इंग्लैंड की पारी
    इससे पहले इंग्लैंड ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। शुरुआत में मेजबान टीम मजबूत स्थिति में थी और एक समय उसका स्कोर 61 रन पर बिना विकेट के था।

    लेकिन भारतीय गेंदबाजों ने शानदार वापसी करते हुए इंग्लैंड को 107 रन तक पहुंचते-पहुंचते छह विकेट गंवाने पर मजबूर कर दिया। हालांकि जो रूट (76*) और लियाम डॉसन (68) ने सातवें विकेट के लिए 121 रनों की साझेदारी कर इंग्लैंड को 258 रन तक पहुंचाया।

    भारत की ओर से अक्षर पटेल ने शानदार गेंदबाजी करते हुए चार विकेट हासिल किए। प्रसिद्ध कृष्णा और गुरनूर बराड़ ने दो-दो विकेट लेकर इंग्लैंड की पारी को नियंत्रित रखा।

    भारत की जीत के 5 बड़े कारण

    1. 11 साल बाद एजबेस्टन में इंग्लैंड को मिली हार
    एजबेस्टन मैदान पर इंग्लैंड का वनडे रिकॉर्ड बेहद मजबूत रहा था। 2015 के बाद उसने इस मैदान पर लगातार आठ वनडे मुकाबले जीते थे। भारत ने 2014 के बाद पहली बार इसी मैदान पर इंग्लैंड को हराकर उसका विजयी सिलसिला तोड़ दिया।

    2. इंग्लैंड के खिलाफ लगातार छठी वनडे जीत
    भारत की यह इंग्लैंड के खिलाफ वनडे क्रिकेट में लगातार छठी जीत है। यह किसी भी दौर में इंग्लैंड के खिलाफ भारत की सबसे लंबी जीत की श्रृंखला बन गई है।

    3. गिल का एजबेस्टन में लगातार शानदार प्रदर्शन
    शुभमन गिल का एजबेस्टन से खास रिश्ता बनता जा रहा है। पिछले साल इसी मैदान पर टेस्ट मैच में 269 और 161 रन की यादगार पारियां खेलने वाले गिल ने अब वनडे में भी कप्तानी पारी खेलकर अपनी छाप छोड़ी।

    4. अक्षर पटेल का ऑलराउंड जवाब
    टी20 सीरीज में आलोचनाओं का सामना करने वाले अक्षर पटेल ने वनडे में शानदार वापसी की। उन्होंने पहले गेंद से चार विकेट लिए और फिर नाबाद 57 रन बनाकर टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई।

    5. यूके दौरे पर भारत की पहली जीत
    इंग्लैंड और आयरलैंड के खिलाफ टी20 मुकाबलों में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद भारत को मौजूदा यूनाइटेड किंगडम दौरे पर पहली जीत मिली। इस जीत ने टीम के आत्मविश्वास को नई मजबूती दी है।

    एजबेस्टन की इस जीत में कप्तान गिल का नेतृत्व, गेंदबाजों की वापसी और अक्षर पटेल का ऑलराउंड प्रदर्शन भारत के लिए सबसे बड़ी सकारात्मक बातें रहीं।

  • इंग्लैंड को लॉर्ड्स में हराकर इतिहास रचने वाली भारतीय महिला टीम को सीएम मोहन यादव की बधाई, क्रांति गौड़ के शानदार प्रदर्शन को बताया जीत की सबसे बड़ी ताकत

    इंग्लैंड को लॉर्ड्स में हराकर इतिहास रचने वाली भारतीय महिला टीम को सीएम मोहन यादव की बधाई, क्रांति गौड़ के शानदार प्रदर्शन को बताया जीत की सबसे बड़ी ताकत


    मध्य प्रदेश।
    इंग्लैंड के प्रतिष्ठित लॉर्ड्स क्रिकेट मैदान पर भारतीय महिला क्रिकेट टीम की ऐतिहासिक टेस्ट जीत ने पूरे देश को गौरवान्वित कर दिया है। इस यादगार उपलब्धि पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने टीम की सभी खिलाड़ियों को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि भारत की बेटियों ने अपने शानदार प्रदर्शन से देश का मान पूरी दुनिया में बढ़ाया है। उन्होंने इस जीत को भारतीय महिला क्रिकेट के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया और कहा कि यह सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संदेश में कहा कि भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने जिस आत्मविश्वास, अनुशासन और जुझारूपन के साथ इंग्लैंड जैसी मजबूत टीम को उसके घरेलू मैदान पर हराया है, वह देश के खेल इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में याद रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा, समर्पण और कड़ी मेहनत के दम पर किसी भी चुनौती को सफलता में बदला जा सकता है। इस जीत ने भारतीय महिला क्रिकेट की बढ़ती ताकत को भी दुनिया के सामने मजबूती से स्थापित किया है।

    मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से मध्यप्रदेश की बेटी क्रांति गौड़ के प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने कहा कि क्रांति गौड़ ने पहली पारी में पांच विकेट लेकर मैच की दिशा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पूरे मुकाबले में सात विकेट हासिल कर उन्होंने भारतीय टीम की जीत को मजबूत आधार दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की इस प्रतिभाशाली खिलाड़ी ने अपने प्रदर्शन से न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। उनका यह प्रदर्शन प्रदेश के युवाओं, विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणा का विषय है।

    डॉ. मोहन यादव ने कहा कि खेल के क्षेत्र में महिलाओं की लगातार बढ़ती उपलब्धियां इस बात का प्रमाण हैं कि यदि उन्हें अवसर और उचित मंच मिले तो वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर सकती हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि भारतीय महिला क्रिकेट टीम भविष्य में भी इसी तरह उत्कृष्ट प्रदर्शन करती रहेगी और विश्व क्रिकेट में नए कीर्तिमान स्थापित करेगी। उन्होंने खिलाड़ियों के समर्पण, टीम भावना और संघर्षशीलता की प्रशंसा करते हुए कहा कि यही गुण किसी भी टीम को बड़ी सफलता तक पहुंचाते हैं।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि मध्यप्रदेश लगातार खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत है और राज्य सरकार खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, सुविधाएं और अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने उम्मीद जताई कि क्रांति गौड़ जैसी खिलाड़ियों की उपलब्धियां प्रदेश के युवाओं को खेलों में करियर बनाने के लिए प्रेरित करेंगी। राज्य की बेटियां आज हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परिचय दे रही हैं और खेल जगत में भी उनका प्रदर्शन लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

    भारतीय महिला क्रिकेट टीम की यह जीत केवल एक मैच की सफलता नहीं, बल्कि महिला खेलों के बढ़ते आत्मविश्वास और भारत की मजबूत खेल संस्कृति का प्रतीक भी मानी जा रही है। लॉर्ड्स जैसे ऐतिहासिक मैदान पर मिली इस उपलब्धि ने देशभर के खेल प्रेमियों में उत्साह का नया संचार किया है। मुख्यमंत्री ने टीम के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि देश को अपनी बेटियों की इस उपलब्धि पर गर्व है और उनकी यह ऐतिहासिक जीत लंबे समय तक प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

  • फीफा वर्ल्ड कप में केप वर्डे के ऐतिहासिक संघर्ष के आगे पस्त होने से बची अर्जेंटीना, एक्स्ट्रा टाइम के रोमांचक मुकाबले में लियोनेल मेसी के रिकॉर्ड गोल से नॉकआउट में बनाई जगह

    फीफा वर्ल्ड कप में केप वर्डे के ऐतिहासिक संघर्ष के आगे पस्त होने से बची अर्जेंटीना, एक्स्ट्रा टाइम के रोमांचक मुकाबले में लियोनेल मेसी के रिकॉर्ड गोल से नॉकआउट में बनाई जगह

    नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप में मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना और पहली बार इस वैश्विक मंच पर खेल रही केप वर्डे की टीम के बीच मियामी गार्डन्स में खेला गया मुकाबला फुटबॉल इतिहास के सबसे रोमांचक मैचों में शुमार हो गया है। इस बेहद चुनौतीपूर्ण मुकाबले में अर्जेंटीना ने अंततः केप वर्डे को 3-2 से पराजित कर राउंड ऑफ-16 में अपनी जगह पक्की कर ली है। पश्चिमी अफ्रीका के तट पर स्थित एक बेहद छोटे से द्वीपीय देश केप वर्डे ने विश्व विजेता टीम को आखिरी पलों तक कड़ी टक्कर दी, जिससे चैंपियन टीम टूर्नामेंट से बाहर होते-होते बची।

    मैच का फैसला निर्धारित 90 मिनटों में नहीं हो सका और मुकाबला एक्स्ट्रा टाइम में खींचा गया। अर्जेंटीना की जीत का निर्णायक मोड़ एक्स्ट्रा टाइम के 111वें मिनट में आया, जब क्रिस्टियन रोमेरो के एक दमदार हेडर को रोकने के प्रयास में गेंद केप वर्डे के डिफेंडर डाइनी बोर्जेस से टकराकर सीधे नेट में चली गई। बोर्जेस का यह ओन गोल अर्जेंटीना के लिए जीवनदान साबित हुआ, जिसने टीम को 3-2 की निर्णायक बढ़त दिला दी, जो मैच के अंतिम समय तक बरकरार रही।

    इससे पहले, मुकाबले की शुरुआत में अर्जेंटीना के स्टार खिलाड़ी और कप्तान लियोनेल मेसी ने मैच के 29वें मिनट में लिसांद्रो मार्टिनेज के एक बेहतरीन लॉन्ग पास को नियंत्रित करते हुए गोलकीपर वोजिन्हा के ऊपर से शानदार शॉट लगाकर टीम को 1-0 की शुरुआती बढ़त दिलाई थी। इसके बाद एक्स्ट्रा टाइम के 103वें मिनट में लिसांद्रो मार्टिनेज ने खुद गोल दागकर टीम का स्कोर 2-1 कर दिया था। हालांकि, केप वर्डे की जुझारू टीम ने मैच में दो बार शानदार वापसी की। सिडनी लोपेस कैब्राल और डेरॉय डुआर्टे ने अर्जेंटीना की रक्षापंक्ति को भेदते हुए दो बार बराबरी के गोल दागे, जिसने स्टेडियम में मौजूद अर्जेंटीना के प्रशंसकों को हैरान कर दिया था।

    हार का सामना करने के बावजूद केप वर्डे की टीम ने अपने पहले ही वर्ल्ड कप अभियान से दुनिया भर के फुटबॉल प्रेमियों का दिल जीत लिया है। इस छोटे से देश ने ग्रुप चरण में स्पेन, उरुग्वे और सऊदी अरब जैसी दिग्गज टीमों के खिलाफ ड्रॉ खेलकर नॉकआउट चरण का टिकट कटाया था। अर्जेंटीना के खिलाफ मुकाबले में भी केप वर्डे के 40 वर्षीय अनुभवी गोलकीपर वोजिन्हा ने अद्भुत खेल का प्रदर्शन किया। उन्होंने मैच के दौरान मेसी के पांच तीखे प्रहारों सहित कुल 10 शानदार गोल होने से रोके, जिसने अर्जेंटीना को लंबे समय तक बैकफुट पर रखा।

    इस मैच में किए गए गोल के साथ ही कप्तान लियोनेल मेसी ने अपने नाम कई बड़े कीर्तिमान भी दर्ज कर लिए हैं। यह मेसी के अंतरराष्ट्रीय करियर का 20वां वर्ल्ड कप गोल था, जिसके साथ ही वह मौजूदा टूर्नामेंट में सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ियों की सूची में फ्रांस के किलियन एम्बाप्पे से आगे निकल गए हैं। मेसी का वर्ल्ड कप के लगातार आठ मैचों में स्कोर करने का रिकॉर्ड भी अब और मजबूत हो गया है, जिसमें वे अब तक कुल 12 गोल कर चुके हैं। इस ऐतिहासिक जीत के बाद अब राउंड ऑफ-16 में अर्जेंटीना का सामना मिस्र की टीम से आगामी मंगलवार को अटलांटा में होगा।

  • चार घंटे से अधिक चले रोमांचक संघर्ष में ज्वेरेव ने कोबोली को दी शिकस्त, रचा ऐतिहासिक कीर्तिमान

    चार घंटे से अधिक चले रोमांचक संघर्ष में ज्वेरेव ने कोबोली को दी शिकस्त, रचा ऐतिहासिक कीर्तिमान

    नई दिल्ली । विश्व टेनिस परिदृश्य पर जर्मनी के स्टार खिलाड़ी अलेक्जेंडर ज्वेरेव ने आखिरकार अपने करियर का सबसे बड़ा मील का पत्थर हासिल करते हुए इतिहास के पन्नों में अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज करा लिया है। पेरिस के प्रतिष्ठित क्ले कोर्ट पर खेले गए फ्रेंच ओपन 2026 के पुरुष एकल वर्ग के खिताबी मुकाबले में विश्व नंबर-3 ज्वेरेव ने अपनी खेल क्षमता और मानसिक दृढ़ता का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। उन्होंने पांच सेट तक खिंचे बेहद कड़े और सांस रोक देने वाले फाइनल मैच में इटली के उभरते हुए खिलाड़ी फ्लेवियो कोबोली की चुनौती को ध्वस्त करते हुए अपने जीवन का पहला ग्रैंड स्लैम खिताब जीत लिया।

    अंतरराष्ट्रीय टेनिस कैलेंडर के इस बेहद महत्वपूर्ण खिताबी मुकाबले में दोनों खिलाड़ियों के बीच करीब चार घंटे और 20 मिनट तक मैराथन संघर्ष देखा गया। अलेक्जेंडर ज्वेरेव ने अंततः कोबोली को 6-1, 4-6, 6-4, 6-7(5), 6-1 से मात देकर रोलां गैरो की चमचमाती ट्रॉफी पर कब्जा जमाया। मैच का अंतिम और निर्णायक अंक जीतते ही जर्मन खिलाड़ी कोर्ट पर ही बेहद भावुक नजर आए। उनके लिए यह जीत इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि इससे पहले वे तीन बड़े ग्रैंड स्लैम फाइनल मुकाबलों में पहुंचकर भी उपविजेता बनकर रह गए थे, जिसमें 2020 का यूएस ओपन, 2024 का फ्रेंच ओपन और 2025 का ऑस्ट्रेलियन ओपन शामिल है।

    मैच की तकनीकी समीक्षा की जाए तो ज्वेरेव ने मुकाबले की आक्रामक शुरुआत करते हुए पहले सेट में पूरी तरह अपना दबदबा कायम किया और महज 34 मिनट के भीतर इसे 6-1 से अपने पक्ष में कर लिया। इसके बाद अपना पहला ग्रैंड स्लैम फाइनल खेल रहे इटली के फ्लेवियो कोबोली ने दूसरे सेट में शानदार वापसी की। कोबोली ने अपने बेहतरीन ड्रॉप शॉट्स और आक्रामक ग्राउंडस्ट्रोक्स के दम पर ज्वेरेव की सर्विस ब्रेक की और दूसरा सेट 6-4 से जीतकर मैच में रोमांच वापस ला दिया। तीसरे सेट में भी दोनों के बीच कांटे की टक्कर रही, लेकिन कोबोली की कुछ अप्रत्याशित गलतियों का लाभ उठाकर ज्वेरेव ने इसे 6-4 से जीत लिया।

    चौथे सेट में दोनों खिलाड़ियों का जज्बा चरम पर था जहां इतालवी खिलाड़ी कोबोली ने टाई-ब्रेकर में शानदार फोरहैंड विनर लगाते हुए खेल को निर्णायक पांचवें सेट में धकेल दिया। हालांकि, अंतिम सेट में ज्वेरेव ने एक सच्चे चैंपियन की तरह वापसी की और अपनी सर्विस पर 83 प्रतिशत अंक हासिल करते हुए कोबोली पर मानसिक दबाव बना दिया। ज्वेरेव ने शुरुआती गेम में ही विरोधी की सर्विस ब्रेक की और पीछे मुड़कर नहीं देखा तथा अंतिम सेट 6-1 से जीतकर खिताब अपने नाम कर लिया।

    इस ऐतिहासिक विजय के साथ ही अलेक्जेंडर ज्वेरेव ने जर्मन टेनिस के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। वह साल 1937 में हेनर हेन्केल के बाद फ्रेंच ओपन का पुरुष एकल खिताब जीतने वाले पहले जर्मन खिलाड़ी बन गए हैं। इसके अतिरिक्त, वर्ष 1996 के ऑस्ट्रेलियन ओपन में बोरिस बेकर की ऐतिहासिक जीत के बाद वे किसी भी ग्रैंड स्लैम इवेंट में पुरुष एकल का खिताब जीतने वाले पहले जर्मन पुरुष खिलाड़ी बने हैं। दूसरी ओर, उपविजेता रहे कोबोली भले ही खिताब से चूक गए हों, लेकिन इस टूर्नामेंट में उनके शानदार प्रदर्शन के दम पर वे विश्व रैंकिंग में शीर्ष-10 के बेहद करीब पहुंच गए हैं।

  • अंडर-18 एशिया कप हॉकी के फाइनल में पहुंचा भारत, रोमांचक सेमीफाइनल में पाकिस्तान को 5-3 से रौंदा

    अंडर-18 एशिया कप हॉकी के फाइनल में पहुंचा भारत, रोमांचक सेमीफाइनल में पाकिस्तान को 5-3 से रौंदा

    नई दिल्ली । भारतीय युवा हॉकी टीम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी श्रेष्ठता साबित करते हुए मेन्स अंडर-18 हॉकी एशिया कप 2026 के खिताबी मुकाबले में प्रवेश कर लिया है। कावासाकी हेवी इंडस्ट्रीज हॉकी स्टेडियम में खेले गए एक बेहद रोमांचक और हाई-वोल्टेज सेमीफाइनल मुकाबले में भारत ने चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को 5-3 से करारी शिकस्त दी। इस महामुकाबले में भारतीय टीम की जीत के सबसे बड़े नायक स्टार खिलाड़ी पूर्ति आशीष तानी रहे, जिन्होंने विरोधी टीम के डिफेंस को पूरी तरह से ध्वस्त करते हुए अकेले ही चार शानदार गोल दागे और पाकिस्तान की फाइनल में पहुंचने की उम्मीदों को तोड़ दिया।

    मैच की शुरुआत से ही दोनों पारंपरिक प्रतिद्वंद्वियों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। पहले क्वार्टर में दोनों ही टीमों ने आक्रामक रणनीति अपनाई और एक-दूसरे के गोल पोस्ट पर लगातार हमले किए। मुकाबले के 12वें मिनट में भारतीय टीम को एक पेनल्टी स्ट्रोक हासिल हुआ, जिस पर पाकिस्तान ने अंपायर के फैसले के खिलाफ रिव्यू भी लिया। हालांकि, वीडियो अंपायर ने मैदानी अंपायर के फैसले को बरकरार रखा, जिसके बाद पूर्ति आशीष तानी ने बिना कोई गलती किए गेंद को गोल पोस्ट में डाल दिया और भारत को 1-0 की शुरुआती बढ़त दिला दी।

    दूसरे क्वार्टर में पाकिस्तानी टीम ने खेल की रफ्तार बढ़ाई और मैच में जोरदार वापसी की। इस दौरान पाकिस्तान को लगातार कई पेनल्टी कॉर्नर मिले, लेकिन भारतीय रक्षापंक्ति और गोलकीपर ने मुस्तैदी दिखाते हुए उनके हमलों को नाकाम कर दिया। हालांकि, खेल के 27वें मिनट में पाकिस्तान के अदील ने भारतीय डिफेंस में सेंध लगाते हुए एक बेहतरीन मैदानी गोल दागा और स्कोर को 1-1 की बराबरी पर ला दिया। हाफ टाइम तक दोनों ही टीमें बराबरी पर थीं और मैच का रुख किसी भी ओर पलट सकता था।

    तीसरे क्वार्टर में भारत ने एक बार फिर अपने आक्रमण को तेज किया, जिसके परिणामस्वरूप 35वें मिनट में अली शाहरुख ने गोल कर भारत को 2-1 से आगे कर दिया। भारत की यह खुशी ज्यादा देर नहीं टिकी और महज दो मिनट बाद ही पाकिस्तान के मुहम्मद फरहान असलम ने गोल कर स्कोर फिर से 2-2 कर दिया। इसके बाद पाकिस्तान ने मैच में पहली बार मानसिक बढ़त हासिल की, जब 42वें मिनट में उजैर अहमद ने एक पेनल्टी कॉर्नर को गोल में तब्दील कर पाकिस्तान को 3-2 से आगे कर दिया। इस समय भारतीय टीम गहरे दबाव में नजर आ रही थी।

    मुकाबले के आखिरी और चौथे क्वार्टर में भारतीय युवाओं ने अपनी असली क्षमता और जुझारूपन का परिचय दिया। पूर्ति आशीष तानी ने पहले भारत को 3-3 की बराबरी दिलाई और फिर खेल के 53वें मिनट में अपना तीसरा गोल दागकर न केवल अपनी हैट्रिक पूरी की, बल्कि भारत को 4-3 की बेहद महत्वपूर्ण बढ़त भी दिला दी। इस अचानक हुए हमले से पाकिस्तानी टीम पूरी तरह बिखर गई और दबाव में आ गई। मैच के अंतिम पलों में तानी ने अपनी खेल प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए मैच का चौथा और टीम का पांचवां गोल दागकर भारत की 5-3 से जीत पूरी तरह सुनिश्चित कर दी।

    इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही भारतीय टीम ने यह साबित कर दिया है कि यह युवा ब्रिगेड बड़े और दबाव वाले मुकाबलों में किसी भी विपरीत परिस्थिति से वापसी करने का माद्दा रखती है। अब भारतीय टीम का पूरा ध्यान खिताबी मुकाबले पर केंद्रित है, जहां शनिवार को इसी मैदान पर उसका सामना मेजबान जापान की मजबूत टीम से होना है। खेल प्रेमियों को उम्मीद है कि सेमीफाइनल के स्टार रहे पूर्ति आशीष तानी फाइनल मैच में भी अपनी इसी जादुई फॉर्म को जारी रखेंगे और देश के लिए एशिया कप का खिताब जीतकर लाएंगे।