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  • एनएचएम और आयुष्मान भारत को बड़ी राशि, भोपाल-विदिशा मार्ग निर्माण सहित वन समितियों के लिए कैबिनेट ने लिए अहम फैसले

    एनएचएम और आयुष्मान भारत को बड़ी राशि, भोपाल-विदिशा मार्ग निर्माण सहित वन समितियों के लिए कैबिनेट ने लिए अहम फैसले

    मध्य प्रदेश: में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में जन-स्वास्थ्य, सड़क अधोसंरचना, वन प्रबंधन और महिला सशक्तिकरण से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में कुल 47 हजार 990 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई।

    कैबिनेट के फैसलों में स्वास्थ्य क्षेत्र को सबसे बड़ी प्राथमिकता मिली। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग के अंतर्गत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, आयुष्मान भारत और अन्य स्वास्थ्य योजनाओं के निरंतर संचालन के लिए 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक कुल 44 हजार 515.13 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।

    राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए 28 हजार 83.47 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। यह केंद्र और राज्य के बीच 60:40 के अनुपात में संचालित केंद्र प्रवर्तित योजना है। इसके तहत मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, टीकाकरण, टीबी उन्मूलन, सिकल सेल, किशोर स्वास्थ्य और गैर-संचारी रोगों से जुड़े कार्यक्रम संचालित किए जाते हैं।

    इसके अलावा आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और गैर-एसईसीसी हितग्राहियों से संबंधित योजना के संचालन के लिए 12 हजार 123 करोड़ 81 लाख रुपये मंजूर हुए हैं। इसका उद्देश्य पात्र लोगों को सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में कैशलेस उपचार उपलब्ध कराना तथा बीमारी के कारण होने वाले आर्थिक बोझ को कम करना है।

    स्वास्थ्य संस्थाओं की सुरक्षा और सफाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 1,159 करोड़ 58 लाख रुपये तथा जिला स्तरीय अमले से संबंधित योजना के लिए 654 करोड़ 84 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। जिला स्तरीय अमला योजना लंबे समय से स्वास्थ्य प्रशासन की व्यवस्था का हिस्सा रही है।

    सड़क अधोसंरचना के क्षेत्र में कैबिनेट ने भोपाल-विदिशा मार्ग के चार लेन निर्माण को मंजूरी दी है। 44.830 किलोमीटर लंबे मार्ग के निर्माण के लिए 1,757 करोड़ 55 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। परियोजना को हाईब्रिड एन्यूटी मॉडल के आधार पर विकसित किया जाएगा।

    यह मार्ग भोपाल के भानपुर टी-जंक्शन से शुरू होकर सांची-सलामतपुर जंक्शन तक जाएगा। इसके निर्माण से भोपाल और विदिशा के बीच संपर्क बेहतर होने के साथ औद्योगिक गतिविधियों और क्षेत्रीय अधोसंरचना को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। मार्ग सांची जैसे महत्वपूर्ण पर्यटन और सांस्कृतिक क्षेत्र से भी जुड़ा है।

    कैबिनेट ने भोपाल बायपास चार लेन मार्ग पर उपयोगकर्ता शुल्क संग्रह की अनुमति भी दी है। 51.963 किलोमीटर लंबे मार्ग पर 19 जुलाई 2026 से 31 दिसंबर 2031 तक शुल्क संग्रह की स्वीकृति दी गई है। आवश्यकता होने पर इसकी अवधि पांच वर्ष तक बढ़ाने के लिए लोक निर्माण विभाग को अधिकृत किया गया है।

    भोपाल बायपास भोपाल को इंदौर, रायसेन, विदिशा और नर्मदापुरम जिलों से जोड़ता है। इसके संचालन और रखरखाव से शहर के भीतर यातायात दबाव कम करने में मदद मिलती है। टोल से प्राप्त राशि राज्य राजमार्ग निधि में जमा की जाएगी और सड़क विकास व रखरखाव पर खर्च होगी।

    वन क्षेत्र में संयुक्त वन प्रबंधन समितियों से जुड़ी योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने के लिए 918 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इसका उद्देश्य वन संरक्षण और संवर्धन में स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाना है। प्रावधानों के तहत काष्ठ बिक्री से प्राप्त राजस्व की 20 प्रतिशत राशि समितियों को दी जाती है, जबकि बांस विदोहन से प्राप्त शुद्ध लाभ का प्रावधानित हिस्सा श्रमिकों को दिया जाता है।

  • डंपिंग यार्ड नहीं तो कचरा कहां जाए? विदिशा में नगर पालिका और रहवासियों के बीच बढ़ा विवाद

    डंपिंग यार्ड नहीं तो कचरा कहां जाए? विदिशा में नगर पालिका और रहवासियों के बीच बढ़ा विवाद


    विदिशा । विदिशा शहर में कचरा निस्तारण की समस्या अब गंभीर संकट का रूप ले चुकी है। स्थायी डंपिंग यार्ड नहीं होने के कारण नगर पालिका के सामने रोजाना शहर से निकलने वाले कचरे के निपटान की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। हालात ऐसे हैं कि जहां भी कचरा डंप करने की कोशिश की जाती है, वहां स्थानीय लोगों का विरोध शुरू हो जाता है। रविवार को भी हर्ष विहार कॉलोनी में ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जब रहवासियों ने कचरा लेकर पहुंचे नगर पालिका के वाहनों को रोक दिया और इलाके में कचरा डालने का विरोध किया।

    रहवासियों का कहना है कि कॉलोनी के पास कचरा डंप होने से पूरे क्षेत्र में तेज दुर्गंध फैल रही है। मक्खियों और मच्छरों की संख्या बढ़ने से संक्रमण और बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। लोगों का आरोप है कि बदबू के कारण घरों में रहना मुश्किल हो गया है और बच्चे, बुजुर्ग तथा मवेशी सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। उनका कहना है कि घरों में भोजन करना भी मुश्किल हो गया है। स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि विरोध करने पर नगर पालिका कर्मचारियों द्वारा एफआईआर कराने की धमकी दी जा रही है।

    दरअसल, जिला प्रशासन ने पहले सोठिया गांव के पास डंपिंग यार्ड के लिए जमीन उपलब्ध कराई थी, लेकिन ग्रामीणों के विरोध के चलते वहां कचरा डालने की व्यवस्था बंद करनी पड़ी। इसके बाद नगर पालिका ने जतरापुरा और मिर्जापुर की खंतियों का विकल्प चुना, लेकिन लगातार बारिश के कारण वहां तक पहुंचने का रास्ता बंद हो गया। नतीजतन शहर से कचरा उठाने की व्यवस्था भी प्रभावित होने लगी और कचरे से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली तथा डंपर नगर पालिका परिसर में ही खड़े रहने लगे।

    इसके बाद नगर पालिका ने सुआखेड़ी, गेहूंखेड़ी और फिर डाबर रोड स्थित एक खंती में कचरा डालने का प्रयास किया, लेकिन हर स्थान पर ग्रामीणों और स्थानीय रहवासियों ने विरोध दर्ज कराया। इससे स्पष्ट हो गया कि शहर में कचरा निस्तारण की समस्या अब केवल सफाई व्यवस्था तक सीमित नहीं रही, बल्कि सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी चिंता का विषय भी बन गई है।

    नगर पालिका का कहना है कि डाबर रोड स्थित खंती के मालिक बंटी रघुवंशी की सहमति से वहां कचरा डाला जा रहा है। कर्मचारियों के अनुसार खंती में कचरा डालने के बाद उसे हाइड्रा मशीन से दबाकर ऊपर मिट्टी की परत डाली जा रही है, ताकि दुर्गंध और प्रदूषण न फैले। उनका दावा है कि कचरा खुले मैदान में नहीं फेंका जा रहा, बल्कि केवल खंती को भरने का काम किया जा रहा है। इसके बावजूद स्थानीय लोगों ने कचरा वाहनों को वहां तक पहुंचने नहीं दिया।

    खंती के मालिक बंटी रघुवंशी का कहना है कि बरसात के दौरान उनकी करीब एक बीघा की खंती पानी से भर जाती है, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। इसी कारण उन्होंने खंती भरवाने की अनुमति दी है। वहीं नगर पालिका का सवाल है कि जब हर स्थान पर विरोध हो रहा है, तो शहर से रोज निकलने वाले कचरे का निस्तारण आखिर कहां किया जाए। अब यह मामला केवल सफाई व्यवस्था का नहीं, बल्कि शहर के लिए स्थायी डंपिंग यार्ड विकसित करने की तत्काल आवश्यकता का संकेत बन गया है।

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  • बेतवा को प्रदूषण मुक्त बनाने की बड़ी तैयारी, 2053 तक साफ रखने के लिए बनेगी दीर्घकालिक योजना

    बेतवा को प्रदूषण मुक्त बनाने की बड़ी तैयारी, 2053 तक साफ रखने के लिए बनेगी दीर्घकालिक योजना


    मध्य प्रदेशमध्य प्रदेश सरकार ने बेतवा नदी को आने वाले तीन दशकों तक स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाए रखने के लिए व्यापक योजना तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) केवल वर्तमान जरूरतों को नहीं, बल्कि वर्ष 2053 तक की संभावित आबादी, शहरी विस्तार और बढ़ने वाले सीवेज भार को ध्यान में रखकर तैयार की जाएगी। सरकार का उद्देश्य ऐसा स्थायी सिस्टम विकसित करना है, जिससे भविष्य में बार-बार नई परियोजनाओं की आवश्यकता न पड़े और नदी की जल गुणवत्ता लगातार बेहतर बनी रहे।

    भविष्य की जरूरतों के हिसाब से बनेगा पूरा नेटवर्क

    योजना के तहत सीवर लाइन, पंपिंग स्टेशन, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और इंटरसेप्शन नेटवर्क की क्षमता भविष्य की आबादी के अनुसार तय की जाएगी। साथ ही अतिरिक्त क्षमता भी रखी जाएगी ताकि आने वाले वर्षों में आबादी बढ़ने के बावजूद व्यवस्था प्रभावित न हो।

    नदी में गिरने से पहले रोका जाएगा गंदा पानी

    परियोजना का सबसे अहम हिस्सा यह है कि बेतवा नदी में मिलने वाले सभी नालों की पहचान कर उनका गंदा पानी नदी तक पहुंचने से पहले रोक लिया जाएगा। पाइपलाइन के माध्यम से इस पानी को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तक भेजा जाएगा, जहां वैज्ञानिक तरीके से उसका शोधन होगा। जिन क्षेत्रों में पाइपलाइन संभव नहीं होगी, वहां पंपिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। बारिश के दौरान अतिरिक्त पानी के लिए अलग निकासी व्यवस्था भी बनाई जाएगी ताकि एसटीपी पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।

    मंडीदीप और विदिशा सबसे बड़े प्रदूषण स्रोत

    प्रस्तुतीकरण में सामने आया कि बेतवा नदी में सबसे अधिक प्रदूषण मंडीदीप और विदिशा क्षेत्र से पहुंच रहा है। मंडीदीप में घरेलू सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट और खुले नालों का गंदा पानी सीधे नदी में गिर रहा है। यहां अब तक कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) उपलब्ध नहीं है। वहीं विदिशा के तीन प्रमुख नालों का बिना शोधन वाला पानी भी सीधे बेतवा में छोड़ा जा रहा है। इसके अलावा कोलार जलशोधन संयंत्र का बैकवॉश पानी और जलकुंभी भी नदी की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहे हैं।

    15 वर्षों तक होगी डिजिटल निगरानी

    परियोजना केवल निर्माण कार्य तक सीमित नहीं रहेगी। इसके तहत 15 वर्षों तक संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी। आधुनिक SCADA और ऑनलाइन कंटीन्यूअस एफ्लुएंट मॉनिटरिंग सिस्टम (OCEMS) की मदद से पानी की गुणवत्ता और एसटीपी के संचालन पर चौबीसों घंटे नजर रखी जाएगी। किसी भी तकनीकी खराबी या प्रदूषण की स्थिति का तुरंत पता लगाया जा सकेगा।

    वैज्ञानिक सर्वे के बाद बनेगी डीपीआर

    डीपीआर तैयार करने से पहले नदी, नालों और पूरे जलग्रहण क्षेत्र का विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा। इसमें नदी और नालों का सर्वे, मिट्टी और भू-आकृति का परीक्षण, सीवेज की मात्रा का आकलन, उपयुक्त ट्रीटमेंट तकनीक का चयन, इंजीनियरिंग डिजाइन, परियोजना लागत और पर्यावरणीय स्वीकृतियों जैसे सभी पहलुओं को शामिल किया जाएगा।

    लंबी अवधि के संरक्षण पर रहेगा फोकस

    सरकार का लक्ष्य केवल प्रदूषण नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि बेतवा नदी के संरक्षण के लिए स्थायी और आर्थिक रूप से टिकाऊ व्यवस्था विकसित करना है। योजना में स्थानीय निकायों की जवाबदेही तय करने, संचालन व्यवस्था को मजबूत बनाने और आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा।

    यदि यह योजना निर्धारित रूप में लागू होती है, तो आने वाले वर्षों में बेतवा नदी की जल गुणवत्ता बेहतर बनी रहेगी और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को स्वच्छ जल उपलब्ध कराने में भी मदद मिलेगी।

  • विदिशा में कच्चे मकान की दीवार गिरने से 12 वर्षीय बच्चे की मौत, आंधी-बारिश से हादसा

    विदिशा में कच्चे मकान की दीवार गिरने से 12 वर्षीय बच्चे की मौत, आंधी-बारिश से हादसा


    मध्यप्रदेश । विदिशा जिले के ग्राम पांझ में रविवार को मौसम के अचानक बिगड़ने से एक दर्दनाक हादसा हो गया। तेज हवा और बारिश के बीच एक कच्चे मकान की दीवार अचानक भरभराकर गिर गई, जिसके मलबे में दबकर 12 वर्षीय बालक सुमित अहिरवार की मौत हो गई। इस घटना से पूरे गांव में मातम पसर गया है।

    जानकारी के अनुसार, घटना के समय इलाके में तेज आंधी के साथ लगातार बारिश हो रही थी। इसी दौरान मकान की कमजोर दीवार अचानक ढह गई और वहां मौजूद सुमित अहिरवार मलबे की चपेट में आ गया। घटना इतनी तेजी से हुई कि उसे बचने का मौका भी नहीं मिला।

    परिजनों और ग्रामीणों ने तत्काल राहत कार्य शुरू किया और बच्चे को मलबे से बाहर निकालकर इलाज के लिए विदिशा मेडिकल कॉलेज पहुंचाया। लेकिन डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद बच्चे की जान नहीं बचाई जा सकी और उसने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।

    मृतक सुमित अपने परिवार में सबसे छोटा था और दो भाइयों व तीन बहनों में शामिल था। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर बताई जा रही है, जहां उसके पिता मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। हादसे के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

    परिजनों के अनुसार, तेज हवा और बारिश के चलते कच्चा मकान पहले से ही कमजोर था। अचानक दीवार गिरने से पूरा घर क्षतिग्रस्त हो गया और बच्चा उसी की चपेट में आ गया। बहन मुस्कान ने बताया कि घटना के बाद परिवार ने तुरंत उसे अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी।

    घटना की जानकारी मिलते ही सिविल लाइन थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। थाना प्रभारी राजपाल सिंह जादौन ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने मर्ग कायम कर शव का पोस्टमार्टम कराया और बाद में परिजनों को सौंप दिया। इस दर्दनाक हादसे के बाद गांव में शोक का माहौल है और लोग पीड़ित परिवार को सांत्वना देने पहुंच रहे हैं।

  • विदिशा में बनेगा देश का मॉडल कृषि विज्ञान केंद्र, 14 जून को शिवराज सिंह चौहान करेंगे शिलान्यास, किसानों के लिए शुरू होगा वैज्ञानिक कृषि अभियान

    विदिशा में बनेगा देश का मॉडल कृषि विज्ञान केंद्र, 14 जून को शिवराज सिंह चौहान करेंगे शिलान्यास, किसानों के लिए शुरू होगा वैज्ञानिक कृषि अभियान

     मध्य प्रदेश में कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। विदिशा संसदीय क्षेत्र के किसानों को समर्पित एक बड़े कार्यक्रम के तहत 14 जून को विदिशा जिले के बेरखेड़ी जट्टू में कृषि विज्ञान केंद्र की आधारशिला रखी जाएगी। इस अवसर को क्षेत्र के कृषि विकास के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है, क्योंकि इसके माध्यम से किसानों को वैज्ञानिक खेती से जोड़ने और आधुनिक कृषि तकनीकों तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।

    इस कार्यक्रम की घोषणा विदिशा से सांसद और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की है। उन्होंने किसानों से बड़ी संख्या में कार्यक्रम में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि यह दिन क्षेत्र की कृषि व्यवस्था को नई दिशा देने वाला साबित होगा। उनके अनुसार प्रस्तावित कृषि विज्ञान केंद्र केवल एक संस्थान नहीं होगा, बल्कि किसानों के लिए प्रशिक्षण, अनुसंधान और तकनीकी मार्गदर्शन का प्रमुख केंद्र बनेगा।

    कार्यक्रम के दौरान विदिशा, रायसेन, सीहोर और देवास जिलों के लिए तैयार किए गए वैज्ञानिक कृषि रोडमैप को लागू करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। यह रोडमैप कृषि उत्पादन बढ़ाने, खेती की लागत कम करने और किसानों को मौसम तथा बाजार की परिस्थितियों के अनुरूप खेती करने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि वैज्ञानिक योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से कृषि क्षेत्र में उत्पादकता और लाभप्रदता दोनों में सुधार संभव है।

    इस अवसर पर ‘खेत बचाओ अभियान’ की भी शुरुआत की जाएगी। अभियान का उद्देश्य किसानों को नकली खाद, बीज और अन्य कृषि उत्पादों से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक बनाना है। किसानों को यह बताया जाएगा कि असली और नकली उत्पादों की पहचान कैसे की जाए तथा गुणवत्ता वाले कृषि संसाधनों का चयन किस प्रकार किया जाए। इससे खेती में होने वाले आर्थिक नुकसान को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    कार्यक्रम में आधुनिक कृषि यंत्रों का प्रदर्शन, उन्नत खेती की तकनीकों की जानकारी और विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों के मार्गदर्शन सत्र भी आयोजित किए जाएंगे। किसानों को नई फसल बुआई पद्धतियों, जैविक खेती, फसल प्रबंधन, जल संरक्षण और मौसम आधारित कृषि सलाह से अवगत कराया जाएगा। इसके साथ ही कृषि क्षेत्र में उपयोग हो रही नई मशीनों और उपकरणों का प्रत्यक्ष प्रदर्शन भी किया जाएगा, ताकि किसान उन्हें समझ सकें और अपने खेतों में उपयोग कर सकें।

    विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि विज्ञान केंद्र किसानों और वैज्ञानिकों के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करते हैं। ऐसे केंद्रों के माध्यम से किसानों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप समाधान, उन्नत बीजों की जानकारी, फसल रोग नियंत्रण की तकनीक तथा नवीन कृषि अनुसंधान का लाभ मिलता है। विदिशा में प्रस्तावित यह केंद्र आसपास के जिलों के किसानों के लिए भी उपयोगी संसाधन केंद्र साबित हो सकता है।

    कृषि क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियों और बदलते मौसमीय परिस्थितियों के बीच वैज्ञानिक खेती की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। ऐसे में विदिशा में स्थापित होने वाला कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को नई तकनीकों से जोड़ने, उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। क्षेत्र के किसानों को उम्मीद है कि इस पहल से कृषि विकास को नई गति मिलेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्राप्त होगी।

  • विदिशा में हादसे का खतरा: न गोताखोर, न होमगार्ड, फिर भी नदी में उतर रहे लोग

    विदिशा में हादसे का खतरा: न गोताखोर, न होमगार्ड, फिर भी नदी में उतर रहे लोग


    मध्यप्रदेश । विदिशा में भीषण गर्मी और अधिक मास के चलते नदी घाटों पर लोगों की भीड़ लगातार बढ़ रही है। तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंचने से लोग गर्मी से राहत पाने के लिए नदी का रुख कर रहे हैं। चिंताजनक बात यह है कि प्रशासन द्वारा खतरनाक घोषित और प्रतिबंधित किए गए बगला घाट पर भी बड़ी संख्या में लोग स्नान करने पहुंच रहे हैं। घाट पर लगे चेतावनी बोर्डों को नजरअंदाज करते हुए बच्चे, युवा और बुजुर्ग नदी में उतर रहे हैं, जबकि मौके पर सुरक्षा के नाम पर कोई व्यवस्था दिखाई नहीं दे रही।

    बगला घाट को पहले ही प्रशासन ने जोखिमपूर्ण क्षेत्र घोषित कर यहां स्नान पर रोक लगा दी थी। इसके पीछे मुख्य कारण नदी की अधिक गहराई और तेज जल प्रवाह है। पूर्व में यहां कई दर्दनाक हादसे हो चुके हैं, जिनमें लोगों की डूबने से मौत तक हो चुकी है। बावजूद इसके, लोग अपनी जान जोखिम में डालकर घाट पर पहुंच रहे हैं।

    स्थानीय लोगों के अनुसार सुबह के समय घाट पर सबसे अधिक भीड़ रहती है। लोग धार्मिक आस्था और गर्मी से राहत दोनों कारणों से यहां स्नान करने आते हैं। अधिक मास का धार्मिक महत्व होने के कारण श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ गई है। घाट स्थित मंदिर के पुजारी ने बताया कि नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे खतरा पहले से ज्यादा बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं।

    शहर में स्विमिंग पूल जैसी सुविधाओं की कमी भी लोगों को नदी की ओर खींच रही है। कई परिवार अपने बच्चों को तैरना सिखाने के लिए भी इसी घाट पर ला रहे हैं। यह स्थिति और अधिक खतरनाक बन जाती है क्योंकि घाट पर न तो प्रशिक्षित गोताखोर मौजूद हैं और न ही किसी प्रकार की रेस्क्यू टीम तैनात है।

    स्थानीय निवासी अश्वनी राजपूत ने बताया कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग यहां स्नान करते हैं, लेकिन उन्हें रोकने वाला कोई नहीं है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल होमगार्ड जवानों और गोताखोरों की तैनाती की मांग की है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद मिल सके।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल चेतावनी बोर्ड लगाकर प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकता। जब तक घाट पर सख्त निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था नहीं होगी, तब तक लोग नियमों का पालन नहीं करेंगे। लोगों ने मांग की है कि प्रतिबंध का सख्ती से पालन कराया जाए और घाट पर नियमित गश्त बढ़ाई जाए।

    भीषण गर्मी के बीच बगला घाट पर बढ़ती भीड़ और सुरक्षा इंतजामों की कमी किसी बड़े हादसे की आशंका को जन्म दे रही है। ऐसे में प्रशासन के लिए यह जरूरी हो गया है कि वह केवल चेतावनी जारी करने तक सीमित न रहे, बल्कि जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई भी सुनिश्चित करे।

  • विदिशा में सनसनी: मंदिर जा रही महिला से बाइक सवार बदमाशों ने की चेन स्नैचिंग, फरार

    विदिशा में सनसनी: मंदिर जा रही महिला से बाइक सवार बदमाशों ने की चेन स्नैचिंग, फरार


    नई दिल्ली। विदिशा शहर में रविवार रात उस समय सनसनी फैल गई जब एक महिला मंदिर दर्शन के लिए जाते समय चेन स्नैचिंग का शिकार हो गई। जानकारी के अनुसार महिला अपने भतीजे के साथ स्कूटी से बाढ़ वाले गणेश मंदिर जा रही थीं। जैसे ही वे निर्धारित मार्ग पर पहुंचीं, पीछे से एक सफेद बाइक पर सवार दो युवक तेजी से उनके पास आए। कुछ ही सेकंड में बदमाशों ने चलते वाहन पर महिला के गले पर झपट्टा मारकर सोने की चेन छीन ली और मौके से फरार हो गए। पूरी घटना इतनी तेजी से हुई कि पीड़ित परिवार कुछ समझ पाता उससे पहले आरोपी आंखों से ओझल हो चुके थे।

    दूसरा भाग इलाके में दहशत और पुलिस की कार्रवाई
    घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल बन गया है। पीड़ित महिला की पहचान प्रमोद गुप्ता की बहन के रूप में हुई है, जो उस समय अपने भतीजे के साथ मौजूद थीं। बताया जा रहा है कि महिला भोपाल से विदिशा आई थीं और मंदिर दर्शन के लिए निकली थीं। वारदात की सूचना मिलते ही सिविल लाइन थाना पुलिस मौके पर पहुंची और तत्काल जांच शुरू कर दी गई। पुलिस ने आसपास के इलाकों में नाकेबंदी कर आरोपियों की तलाश तेज कर दी है। साथ ही घटना स्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि बदमाशों की पहचान की जा सके।

    तीसरा भाग लगातार बढ़ रही आपराधिक घटनाएं
    शहर में हाल के दिनों में इस तरह की घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। चलते वाहन से चेन स्नैचिंग की यह वारदात पुलिस गश्त और निगरानी व्यवस्था को लेकर भी चिंता बढ़ा रही है। पीड़ित परिवार ने घटना के बाद गहरी चिंता जताई है और आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की है। पुलिस का कहना है कि तकनीकी जांच और फुटेज के आधार पर जल्द ही आरोपियों को पकड़ लिया जाएगा। फिलहाल इस घटना ने स्थानीय लोगों में भय का माहौल पैदा कर दिया है और लोग शाम के समय यात्रा करने से भी सतर्क हो गए हैं।

  • शिवराज सिंह चौहान ने अपने जन्मदिन पर विदिशा में शुरू की मामा कोचिंग

    शिवराज सिंह चौहान ने अपने जन्मदिन पर विदिशा में शुरू की मामा कोचिंग


    विदिशा।
    केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शिक्षा ही वह माध्यम है जो युवाओं के भविष्य को संवार सकती है और समाज को आगे ले जा सकती है।

    केन्द्रीय कृषि मंत्री चौहान गुरुवार को अपने जन्मदिन के अवसर पर विदिशा के रविंद्रनाथ टैगोर सांस्कृतिक ऑडिटोरियम भवन में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कार्यक्रम में अपने माता-पिता की स्मृति को सहेजते हुए शिक्षा के क्षेत्र में एक नई पहल करते हुए मामा कोचिंग का शुभांरभ किया। इस अवसर पर उनकी धर्मपत्नी साधना सिंह चौहान भी उनके साथ मौजूद रहीं।

    केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस अवसर पर ‘प्रेम-सुंदर प्रतिभा सम्मान’ की भी शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र के मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करना है। उन्होंने कहा कि विदिशा लोकसभा क्षेत्र की आठों विधानसभाओं में 10वीं और 12वीं कक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया जाएगा। इसके तहत टॉपर्स को क्रमशः 51 हजार, 31 हजार और 21 हजार रुपये की सम्मान राशि दी जाएगी, ताकि प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिल सके।

    उन्होंने कहा कि केवल विधानसभा स्तर पर ही नहीं, बल्कि पूरे विदिशा लोकसभा क्षेत्र में प्रथम तीन स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को विशेष बड़े पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मेरा प्रयास रहेगा कि क्षेत्र का कोई भी प्रतिभाशाली विद्यार्थी संसाधनों के अभाव में पीछे न रह जाए और मेधावी छात्रों को सम्मान व प्रोत्साहन देकर उन्हें अपने सपनों को पूरा करने का अवसर मिले।

    मामा कोचिंग क्लासेस से युवाओं को मिलेंगे नए अवसर
    केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि युवाओं का भविष्य संवारना मेरी प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी उद्देश्य से मामा कोचिंग क्लासेस शुरू की जा रही है, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी का अवसर मिल सके। उन्होंने कहा कि इस पहल की शुरुआत विदिशा, रायसेन और भैरूंदा से की जा रही है। यहां विद्यार्थियों को बैंकिंग, एसएससी, एमपीपीएससी, डीआरडीओ और फॉरेस्ट सर्विस जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की निशुल्क और उच्च गुणवत्ता वाली कोचिंग उपलब्ध कराई जाएगी।

    उन्होंने कहा कि इन कोचिंग क्लासेस में विद्यार्थियों को अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन मिलेगा और विद्यार्थियों को आधुनिक अध्ययन सामग्री और परीक्षा से जुड़ी आवश्यक जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएगी। सही दिशा और संसाधन मिलने पर ग्रामीण और छोटे शहरों के विद्यार्थी भी बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल कर सकते हैं।

    शिवराज सिंह ने कहा कि मेरा उद्देश्य यह है कि विदिशा क्षेत्र का कोई भी युवा केवल संसाधनों की कमी के कारण अपने सपनों से वंचित न रह जाए। मामा कोचिंग क्लासेस के माध्यम से युवाओं को बेहतर अवसर मिलेंगे और वो देश की विभिन्न सेवाओं में जाकर समाज और राष्ट्र की सेवा कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि करियर और रोजगार के हर चरण में सही मार्गदर्शन मिलना चाहिए। अगर कोई युवा व्यवसाय या व्यापार शुरू करना चाहता है और उसे बैंक से ऋण की जरूरत है, तो उसे यह भी समझना चाहिए कि बैंक लोन की प्रक्रिया क्या है और सरकारी योजनाओं में मिलने वाली सब्सिडी का लाभ कैसे लिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कोशिश रहेगी कि युवाओं को इन सभी विषयों की जानकारी विस्तार से दी जाए, ताकि वो आत्मविश्वास के साथ अपने भविष्य की दिशा तय कर सकें।

    इस अवसर पर विधायकगण सूर्यप्रकाश मीणा व हरिसिंह सप्रे, विदिशा जनपद अध्यक्ष वीर सिंह रघुवंशी, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष तोरण सिंह दांगी, महाराज सिंह दांगी, राकेश शर्मा, राकेश जादौन समेत अन्य जनप्रतिनिधिगण मौजूद रहे।

  • विदिशा में बैलगाड़ी बारात का जादू, भोपाल में काम वाली की संतान से लूट की सनसनी

    विदिशा में बैलगाड़ी बारात का जादू, भोपाल में काम वाली की संतान से लूट की सनसनी

    विदिशा में आज एक अनोखी बारात निकली जिसने सबका दिल जीत लिया। आधुनिक जमाने में जहां बारातें कार और बाइक्स से निकलती हैं, वहीं सिरोंज के मंडी रोड पर निकली इस बारात में पूरी तरह पुराने रीति-रिवाजों की झलक थी। आगे घोड़े पर सवार दूल्हा राजा की शानदार सवारी और पीछे फूलों से सजाई गई 10 से 12 बैलगाड़ियां, जिनमें बाराती बैठकर पुराने जमाने की यादें ताजा कर रहे थे। बैलगाड़ियां धीरे-धीरे चल रही थीं और ढोल-नगाड़ों की थाप के साथ माहौल मनमोहक बन रहा था।

    दूल्हा डॉ. प्रशांत ने बताया कि उनके पापा ने इस बारात की प्लानिंग दो महीने पहले से की थी। उन्होंने कहा कि यह बारात अनोखी और सबके लिए यादगार रही। इस बारात का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और यूजर्स इसे सादगी और संस्कृति की जीत बता रहे हैं। लोग कह रहे हैं कि आधुनिकता के बीच भी अपनी जड़ों से जुड़े रहना कितना खूबसूरत अनुभव है।

    वहीं, भोपाल में टीटी नगर थाना इलाके के पॉश कॉलोनी 98 क्वार्टर में दिनदहाड़े एक सनसनीखेज लूट की घटना सामने आई। चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी काम वाली बाई का बेटा निकला। जानकारी के अनुसार, आरोपी गोलू रैकवार अपने दोस्त के साथ पीड़िता के घर में घुसा और हाथ-पैर बांधकर चाकू की नोक पर अलमारी खोलने को कहा। चाबी देने से इंकार करने पर उन्होंने रॉड की मदद से अलमारी तोड़ी और डेढ़ लाख रुपए नकद, मोबाइल और लैपटॉप लेकर भाग गए।

    पीड़िता बीमार होने के कारण घर पर थी और माइनिंग विभाग में कार्यरत हैं। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए कुछ ही घंटे में आरोपी को पकड़ लिया। यह आरोपी कुछ दिन पहले 307 के केस में जमानत पर आया था। पुलिस अब आरोपी से नकदी और अन्य सामान की रिकवरी के बाद पूछताछ कर रही है। इस घटना ने शहर में सनसनी फैला दी है और लोगों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

    मध्यप्रदेश में आज दो बिल्कुल अलग रंग देखने को मिले, विदिशा की बैलगाड़ी बारात ने संस्कृति और परंपरा का जश्न मनाया, वहीं भोपाल की लूट ने सुरक्षा और अपराध की गंभीरता को उजागर किया।

  • मध्यप्रदेश में सड़कों का मजबूत नेटवर्क तैयार होगा: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी

    मध्यप्रदेश में सड़कों का मजबूत नेटवर्क तैयार होगा: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी

    विदिशा।केंद्रीय सड़क परिवहन एवं महामार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने विदिशा जिला मुख्यालय में शनिवार को सड़कों के विकास को लेकर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने यहां 4,400 करोड़ रुपए की सड़कों का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इस मौके पर गडकरी ने 13,000 करोड़ रुपए की लागत से कोटा से दिल्ली-मुंबई तक राष्ट्रीय राजमार्ग बनाने की भी घोषणा की।

    मध्यप्रदेश की सड़कों के विकास के लिए विशेष प्रावधान
    केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मांग पर मध्यप्रदेश की सड़क परियोजनाओं के लिए 1,600 करोड़ रुपए देने की घोषणा की। इसमें से 400 करोड़ रुपए विशेष रूप से विदिशा संसदीय क्षेत्र की शहरी और आंतरिक सड़कों के निर्माण के लिए आवंटित किए जाएंगे।गडकरी ने बताया कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में लगभग 50 करोड़ रुपए की लागत से नई सड़कें बनाई जाएंगी जिससे प्रदेश के सभी हिस्सों में यातायात सुगम और तेज़ होगा।

    अत्याधुनिक मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर का शिलान्यास
    इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने विदिशा में अत्याधुनिक मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर का भी शिलान्यास किया। यह केंद्र सड़क सुरक्षा और प्रशिक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।नितिन गडकरी ने कहा कि प्रदेश में चारों ओर मजबूत सड़क नेटवर्क तैयार किया जाएगा, जिससे न केवल यातायात सुगमता बढ़ेगी, बल्कि उद्योग और व्यापार को भी नई गति मिलेगी। उन्होंने स्थानीय अधिकारियों और जनता से कहा कि सड़क सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रति जागरूकता बनाए रखना जरूरी है