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  • वियतनाम नाव हादसा: 15 भारतीयों के पार्थिव शरीर हो ची मिन्ह पहुंचेंगे, औपचारिकताएं पूरी होते ही स्वदेश लाने की तैयारी तेज

    वियतनाम नाव हादसा: 15 भारतीयों के पार्थिव शरीर हो ची मिन्ह पहुंचेंगे, औपचारिकताएं पूरी होते ही स्वदेश लाने की तैयारी तेज

    नई दिल्ली । वियतनाम के फु क्वोक द्वीप के निकट हुए दर्दनाक पर्यटक नौका हादसे में जान गंवाने वाले 15 भारतीय नागरिकों के पार्थिव शरीर को भारत लाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। वियतनाम स्थित भारतीय दूतावास ने बताया है कि सभी शव रविवार शाम तक हो ची मिन्ह सिटी पहुंच जाएंगे। वहां आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उन्हें जल्द से जल्द भारत भेजा जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में भारतीय दूतावास और वियतनामी प्रशासन लगातार समन्वय के साथ काम कर रहे हैं।

    भारतीय दूतावास के अनुसार, स्थानीय अधिकारियों ने पार्थिव शरीरों को शीघ्र भारत भेजने के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया है। दूतावास और भारतीय वाणिज्य दूतावास की टीमें संबंधित एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क में हैं ताकि किसी भी प्रकार की प्रशासनिक देरी न हो और मृतकों के परिजनों तक उनके प्रियजनों के पार्थिव शरीर जल्द पहुंचाए जा सकें।

    शवों की स्वदेश वापसी की प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए एक अधिकृत एजेंसी को नियुक्त किया गया है। यह एजेंसी मृतकों के परिजनों से संपर्क कर आवश्यक अनुमति, दस्तावेज और अन्य औपचारिकताओं को पूरा कराएगी। अधिकारियों का कहना है कि सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होते ही पार्थिव शरीर विशेष व्यवस्था के तहत भारत भेज दिए जाएंगे।

    हादसे में घायल हुए एक भारतीय नागरिक की हालत में लगातार सुधार बताया गया है। उनका इलाज वियतनाम के एक सरकारी अस्पताल में चल रहा है और चिकित्सकों की निगरानी में स्वास्थ्य पहले से बेहतर हो रहा है। वहीं, दुर्घटना में सुरक्षित बचाए गए अन्य भारतीय पर्यटकों की स्वदेश वापसी की भी व्यवस्था की गई है। सभी यात्रियों को रविवार को उनके-अपने गृह राज्यों के लिए रवाना किए जाने की तैयारी पूरी कर ली गई है।

    अधिकारियों के अनुसार, प्रभावित पर्यटकों की यात्रा संबंधी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं ताकि वे सुरक्षित अपने घर पहुंच सकें। भारतीय दूतावास लगातार सभी यात्रियों और उनके परिवारों के संपर्क में है तथा जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है। संबंधित एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और राहत एवं सहायता कार्य पूरी तरह सक्रिय हैं।

    यह हादसा शनिवार को उस समय हुआ था जब भारतीय पर्यटकों को लेकर जा रही एक पर्यटन नौका फु क्वोक द्वीप के दक्षिणी समुद्री क्षेत्र में भ्रमण के दौरान पलट गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार नौका में लगभग 32 भारतीय सवार थे। इनमें तमिलनाडु के पर्यटकों की संख्या सबसे अधिक थी, जबकि अन्य यात्री आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और केरल से थे।

    स्थानीय प्रशासन ने पुष्टि की है कि इस दुर्घटना में 15 भारतीयों की मृत्यु हुई, जबकि अन्य यात्रियों को समय रहते सुरक्षित निकाल लिया गया। बचाए गए लोगों को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई और आवश्यक देखभाल की गई। हादसे के बाद भारतीय दूतावास ने राहत एवं समन्वय कार्यों को प्राथमिकता देते हुए स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर लगातार कार्रवाई जारी रखी है।

    इस घटना ने विदेश यात्रा पर गए भारतीय पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर भी कई महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े किए हैं। फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान मृतकों के पार्थिव शरीर सम्मानपूर्वक भारत पहुंचाने, घायलों के उपचार और सभी प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने पर केंद्रित है।

  • वियतनाम और जापान के लिए सीधी नई उड़ानें शुरू करेगी एयर इंडिया

    वियतनाम और जापान के लिए सीधी नई उड़ानें शुरू करेगी एयर इंडिया


    नई दिल्ली।
    टाटा समूह की अगुवाई वाली विमानन कंपनी एयर इंडिया ने वियतनाम और जापान के लिए अपनी नई उड़ानें शुरू करने का ऐलान किया है। इसके तहत कंपनी अपने नेटवर्क विस्तार के तहत वियतनाम के हनोई और टोक्यो के हनेडा के लिए नॉन स्टॉप सर्विस को जोड़ेगी।

    कंपनी ने बताया कि एयर इंडिया 01 मई से दिल्ली से वियतनाम के हनोई के लिए और 15 जून से मुंबई से टोक्यो के हानेडा के लिए अपनी सीधी उड़ानें शुरू करने वाली है। एयर इंडिया ने ‘एक्स’ पोस्ट पर लिखा, मरीन ड्राइव के सनसेट से लेकर शिबुया की रौनक भरी रातों तक जापान अब पहले से कहीं ज्यादा करीब है। हम 15 जून से मुंबई और टोक्यो हानेडा के बीच हफ़्ते में 4x नॉन-स्टॉप फ्लाइट की शुरुआत कर रहे हैं, जिससे यात्रियों के लिए जापान के कल्चर, एनर्जी और हमेशा रहने वाले आकर्षण का अनुभव करना आसान हो जाएगा। एयरलाइन ने कहा कि बुकिंग अभी शुरू है।

  • भारत-वियतनाम के बीच रेशम और वस्त्र क्षेत्र में मजबूत होगा द्विपक्षीय सहयोग

    भारत-वियतनाम के बीच रेशम और वस्त्र क्षेत्र में मजबूत होगा द्विपक्षीय सहयोग


    नई दिल्ली।
    भारतीय रेशम और वस्त्र उद्योग (Indian Silk and Textile Industry) के वैश्विक विस्तार की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, वस्त्र मंत्रालय (Ministry of Textiles) के केंद्रीय रेशम बोर्ड और प्रमुख भारतीय उद्यमियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने वियतनाम का पांच दिवसीय आधिकारिक दौरा किया।

    वस्त्र मंत्रालय के अनुसार हनोई स्थित भारतीय दूतावास के सहयोग से आयोजित इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य रेशम उत्पादन, हथकरघा और तकनीकी वस्त्रों के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच व्यापारिक और तकनीकी संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है।

    यात्रा के दौरान, केंद्रीय रेशम बोर्ड के संयुक्त सचिव (तकनीकी) डॉ. नरेश बाबू एन. ने वियतनाम के अग्रणी वस्त्र निर्माता और निर्यातकों में शामिल बिटेक्सको नाम लॉन्ग जॉइंट स्टॉक कंपनी के अध्यक्ष को फाइव-इन-वन सिल्क स्टोल (छोटे शॉल) भेंट कर सम्मानित किया और कंपनी को भारत टेक्स 2026 में भाग लेने का न्यौता दिया। उन्होंने वियतनाम टेक्सटाइल एंड अपैरल एसोसिएशन (वीआईटीएएस) को भी भारत टेक्स 2026 के लिए आमंत्रित किया और वियतनाम एसोसिएशन ऑफ क्राफ्ट विलेजेज के साथ हथकरघा और हस्तशिल्प को बढ़ावा देने, उत्पादों के विकास, ग्राम स्तरीय रेशमी वस्त्र उत्पादन, निर्यात और नीतिगत समर्थन पर चर्चा की। वियतनामी एसोसिएशन ने इस पर सहयोग में गहरी रुचि दिखाई।

    प्रतिनिधिमंडल ने हनोई में भारत के राजदूत शेरिंग वांगचुक शेरपा से मुलाकात कर रेशम और वस्त्र क्षेत्र में संयुक्त अनुसंधान और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर गहन चर्चा की। इस दौरान भारत और वियतनाम के बीच व्यापार-से-व्यापार संबंधों को मजबूत करने पर सहमति बनी।

    ​भारतीय दल ने हनोई के ऐतिहासिक वान फुक सिल्क क्राफ्ट विलेज का दौरा किया। यहां के बुनाई, डिजाइन और फैशन के एकीकृत मॉडल का अध्ययन किया गया, जिससे भारत में ‘रेशम उत्पादन-पर्यटन’ मॉडल विकसित करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, दल ने स्वचालित रीलिंग इकाइयों और शहतूत के खेतों का भी निरीक्षण किया।

    ​वियतनाम में आयोजित दो प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों—वियतनाम इंटरनेशनल वैल्यू चेन एग्जिबिशन 2026 और वियतनाम ग्लोरियस स्प्रिंग फेयर 2026 में केंद्रीय रेशम बोर्ड के स्टॉल भी लगाया गया। भारतीय रेशम उत्पादों के प्रति बढ़ती रुचि ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की मजबूत स्थिति को दर्शाया।

    इस यात्रा के समापन पर विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और वियतनाम के बीच इस सहयोग से प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और आधुनिक सिलाई तकनीकों का आदान-प्रदान होगा, उत्पाद विविधीकरण के नए अवसर मिलेंगे, ​दोनों देशों के बीच संवहनीय विकास और वैश्विक बाजार संबंधों को मजबूती मिलेगी।

  • विदेशियों को आकर्षित नहीं कर पा रहा भारत…. राजस्थान से भी छोटे देश वियतनाम पहुंचे 3 गुना से भी ज्यादा टूरिस्ट

    विदेशियों को आकर्षित नहीं कर पा रहा भारत…. राजस्थान से भी छोटे देश वियतनाम पहुंचे 3 गुना से भी ज्यादा टूरिस्ट


    नई दिल्ली।
    साल 2025 के पहले नौ महीनों में भारत (India) सिर्फ 6.18 मिलियन विदेशी पर्यटकों (6.18 Million Foreign Tourists) को ही आकर्षित कर पाया. यह आंकड़ा चौंकाने वाला है, क्योंकि अकेला पेरिस शहर (Paris city) एक साल में करीब 18 मिलियन अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों का स्वागत कर चुका है. भारत के बेहद करीब वियतनाम (Vietnam), जो क्षेत्रफल में राजस्थान से भी छोटा है, उसने 2025 में 20 मिलियन विदेशी पर्यटकों का रिकॉर्ड बनाया.


    क्या भारत अब बजट डेस्टिनेशन नहीं रहा?

    आज भारत न तो विदेशी टूरिस्ट के लिए सस्ता है और न ही अपने ही नागरिकों के लिए. घरेलू छुट्टी का खर्च कई बार श्रीलंका या थाईलैंड जैसे देशों की इंटरनेशनल ट्रिप से ज्यादा हो जाता है. घरेलू फ्लाइट्स महंगी हैं, होटल ओवरप्राइस्ड हैं और सर्विस क्वालिटी में लगातार गिरावट देखी जा रही है. वियतनाम में एक हफ्ते की अच्छी ट्रिप 50 से 60 हजार रुपये प्रति व्यक्ति में हो जाती है. वहीं गोवा की इसी तरह की यात्रा का खर्च इतना ही या उससे ज्यादा हो सकता है. यही वजह है कि कई भारतीयों को विदेशी यात्रा ज्यादा सस्ती और ज्यादा आकर्षक लगने लगी है।


    इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाओं में क्या कमी है?

    भारत में पब्लिक ट्रांसपोर्ट भरोसेमंद नहीं है. कई टूरिस्ट प्लेस पर कैब ड्राइवर मीटर से चलने से इनकार करते हैं और गैंग बनाकर मनमाना किराया वसूलते हैं. मेट्रो शहरों से आखिरी मील कनेक्टिविटी कमजोर है. इसके अलावा प्रदूषण भी एक बड़ा कारण है, राजधानी दिल्ली में AQI महीनों तक तीन अंकों में बना रहता है. सार्वजनिक स्थानों पर थूकना आम है. ऐतिहासिक स्मारकों पर लिखावट और नुकसान दिखाई देता है. शौचालय गंदे हैं और कई हेरिटेज साइट्स पर बदबू पर्यटकों का स्वागत करती है. ऐसी हालत में लोग ऊंची कीमत चुकाने से पहले सौ बार सोचते हैं।


    टूरिज्म में सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता क्यों?

    सुरक्षा भारत की सबसे कमजोर कड़ी बन चुकी है. महिला वर्ल्ड कप के दौरान ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के साथ छेड़छाड़, राजस्थान में फ्रेंच टूरिस्ट के साथ रेप और कर्नाटक में इजरायली महिला के साथ गैंगरेप जैसी घटनाएं अंतरराष्ट्रीय मीडिया तक पहुंचती हैं. ये घटनाएं भारत की वैश्विक छवि को गहराई से प्रभावित करती हैं. गोवा या केरल के बजट में लोग बाली, कुआलालंपुर या दुबई घूम लेते हैं. थाईलैंड में अलग से टूरिस्ट पुलिस है. वहां इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर, शहर साफ और सुरक्षा सिस्टम मजबूत है. ऐसे में सवाल उठता है कि कोई भारत क्यों चुने, जब खर्च ज्यादा और अनुभव कमजोर हो।


    भारत पर्यटन को मजबूत कैसे बना सकता है?

    भारत के पास प्राचीन मंदिर, जीवंत संस्कृति, रेगिस्तान, पहाड़, समुद्र तट और जंगल हैं. सबसे पहले सुरक्षा पर जीरो टॉलरेंस जरूरी है. साफ-सफाई को सख्ती से लागू करना होगा और नागरिकों को भी जिम्मेदारी निभानी होगी. कीमत और सुविधाओं में संतुलन, बेहतर सर्विस स्टैंडर्ड और प्रोफेशनल प्रमोशन जरूरी है. पर्यटन सिर्फ स्मारक नहीं, अनुभव है और वही तय करता है कि पर्यटक दोबारा लौटेगा या नहीं.