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  • तेलंगाना में घर के आंगन में पहुंचा 12 फीट लंबा अजगर, सुबह-सुबह विशालकाय जीव को देख फैली भारी दहशत।

    तेलंगाना में घर के आंगन में पहुंचा 12 फीट लंबा अजगर, सुबह-सुबह विशालकाय जीव को देख फैली भारी दहशत।

    नई दिल्ली। मानसून के मौसम में वन्यजीवों का प्राकृतिक आवासों से निकलकर आबादी वाले इलाकों की ओर रुख करने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इसी क्रम में तेलंगाना के मंचेरियल जिले से एक बेहद चौंकाने वाला और भयावह मामला प्रकाश में आया है। मंचेरियल के मंदामर्री सेकेंड जोन इलाके में एक आवासीय मकान के आंगन में अचानक लगभग 12 फीट लंबा विशालकाय अजगर दिखाई देने से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। सुबह-सुबह घटी इस घटना के बाद स्थानीय निवासियों और पीड़ित परिवार के सदस्यों के बीच भारी दहशत का माहौल बन गया।

    घटना की शुरुआत सुबह के समय हुई जब घर के सदस्य अपने दैनिक कार्यों में व्यस्त थे। इसी दौरान आंगन में एक कोने में कुंडली मारकर बैठे विशालकाय अजगर पर गृहस्वामी रमेश और उनके परिजनों की नजर पड़ी। इतने बड़े जीव को अचानक अपने घर के परिसर में देखकर परिवार के सदस्य घबरा गए और तुरंत शोर मचाना शुरू कर दिया। चीख-पुकार सुनकर आसपास के पड़ोसी भी अपने-अपने घरों से बाहर निकल आए और देखते ही देखते मौके पर भारी भीड़ एकत्रित हो गई।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अजगर की लंबाई करीब 12 फीट थी और वह काफी विशाल था। रिहायशी बस्ती के बीचों-बीच इतने बड़े अजगर को देखकर लोग भयभीत हो गए। अनहोनी की आशंका को देखते हुए परिजनों ने तुरंत बच्चों को सुरक्षित कमरों के भीतर बंद कर दिया। हालांकि, इस दौरान कुछ स्थानीय निवासियों ने सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए इस दुर्लभ दृश्य को अपने मोबाइल कैमरों में कैद कर लिया। देखते ही देखते यह वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से प्रसारित होने लगा, जिससे आसपास के अन्य इलाकों में भी चर्चा का बाजार गर्म हो गया।

    स्थानीय निवासियों का कहना है कि क्षेत्र में छोटी-मोटी प्रजातियों के सांप अक्सर देखे जाते हैं, लेकिन इतने बड़े आकार का अजगर पहली बार किसी के घर के भीतर पहुंचा है। विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि बारिश के कारण प्राकृतिक आवासों और जंगलों में पानी भर जाने की वजह से यह जीव सूखे और सुरक्षित स्थान की तलाश में भटकते हुए आबादी वाले क्षेत्र में प्रवेश कर गया। इस घटना के बाद से पूरे मोहल्ले में सतर्कता बढ़ा दी गई है और लोग आसपास की झाड़ियों और खाली पड़े भूखंडों पर विशेष निगरानी रख रहे हैं।

    पर्यावरण और वन्यजीव विशेषज्ञों ने मानसून के दौरान लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। जानकारों का कहना है कि बारिश के दिनों में झाड़ियों, पुरानी लकड़ियों के ढेर और पानी जमा होने वाले स्थानों पर विषैले व विशालकाय जीवों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में किसी भी वन्यजीव को नुकसान पहुंचाने या उकसाने के बजाय उनसे सुरक्षित दूरी बनाए रखनी चाहिए और तुरंत संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों या वन विभाग की टीम को सूचित करना चाहिए ताकि समय रहते सुरक्षित रेस्क्यू किया जा सके।

  • मुजफ्फरपुर अस्पताल अग्निकांड में 95 वर्षीय दादी बनीं जीवनरक्षक, सूझबूझ से बचीं कई मरीजों की जान

    मुजफ्फरपुर अस्पताल अग्निकांड में 95 वर्षीय दादी बनीं जीवनरक्षक, सूझबूझ से बचीं कई मरीजों की जान

    नई दिल्ली । बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित प्रसाद हॉस्पिटल में हुए दर्दनाक अग्निकांड के बीच एक 95 वर्षीय महिला की सूझबूझ और साहस की कहानी सामने आई है, जिसने इस त्रासदी के बीच उम्मीद की एक किरण जगा दी। अस्पताल के आईसीयू में भर्ती राधा देवी ने समय रहते आग और धुएं की जानकारी नर्सिंग स्टाफ को देकर कई मरीजों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई। यही कारण है कि उन्हें अब इस हादसे की ‘मसीहा’ के रूप में देखा जा रहा है।

    बताया जा रहा है कि अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर स्थित आईसीयू में देर रात आग लग गई थी। आग लगने के बाद कुछ ही मिनटों में पूरे क्षेत्र में धुआं फैलने लगा, जिससे वहां भर्ती गंभीर मरीजों की स्थिति और अधिक जोखिमपूर्ण हो गई। कई मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट पर थे और धुएं के कारण उनका दम घुटने लगा। इस हादसे में पांच मरीजों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अन्य मरीजों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में जारी है।

    इसी आईसीयू में छपरा मेघ क्षेत्र की निवासी 95 वर्षीय राधा देवी भी भर्ती थीं। उम्र और बीमारी के बावजूद उन्होंने सबसे पहले स्थिति की गंभीरता को समझा। परिजनों के अनुसार, धुआं फैलते ही उन्होंने अपने चेहरे से ऑक्सीजन मास्क हटाया और स्वयं बाहर निकलकर नर्स को आग लगने की जानकारी दी। उनके इस कदम के बाद अस्पताल प्रशासन सक्रिय हुआ और मरीजों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू की गई।

    राधा देवी ने स्थानीय बज्जिका बोली में घटना का वर्णन करते हुए बताया कि अचानक धुआं फैलने लगा और आसपास अंधेरा सा महसूस होने लगा। उन्होंने कहा कि आग कैसे लगी, यह उन्हें नहीं पता, लेकिन धुआं देखते ही वह बाहर निकलीं और तुरंत नर्स को इसकी सूचना दी। इसके बाद अस्पताल कर्मियों ने स्थिति की जांच की और राहत कार्य शुरू किए।

    परिजनों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यदि राधा देवी समय रहते सतर्कता नहीं दिखातीं, तो मृतकों की संख्या कहीं अधिक हो सकती थी। रात करीब साढ़े तीन बजे आग लगने की बात सामने आई, जबकि कुछ ही देर बाद अस्पताल प्रशासन और अग्निशमन विभाग को इसकी सूचना दी गई। इसके बाद राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया।

    अग्निशमन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाने के साथ-साथ अस्पताल में फंसे लोगों को बाहर निकालने का काम शुरू किया। बचाव दल ने करीब 15 से 20 मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाला। हालांकि धुएं और आग की चपेट में आने से कई मरीज गंभीर रूप से प्रभावित हुए, जिनमें से पांच की मौत हो चुकी है।

    घटना के बाद अस्पताल के आईसीयू की तस्वीरों ने हादसे की भयावहता को उजागर कर दिया है। आग में बेड, चिकित्सा उपकरण और अन्य जरूरी संसाधन बुरी तरह जल गए। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आग लगने के कारणों का पता लगाया जा रहा है।

    इस दर्दनाक हादसे के बीच राधा देवी की सतर्कता और साहस ने यह साबित कर दिया कि संकट की घड़ी में जागरूकता और त्वरित निर्णय कई जिंदगियों को बचा सकते हैं। उनकी भूमिका को स्थानीय लोग और प्रभावित परिवार एक असाधारण मानवीय उदाहरण के रूप में देख रहे हैं, जिसने एक बड़े हादसे को और भयावह होने से रोकने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।