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विजय माल्या के कर्ज विवाद में नया मोड़, हाईकोर्ट ने 6203 करोड़ की वसूली और शेयरों को लेकर क्या कहा, जानिए पूरा मामला
नई दिल्ली। भगोड़े कारोबारी विजय माल्या की आलीशान जीवनशैली और वित्तीय अनुशासन को लेकर कर्नाटक हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि जब किसी व्यक्ति का ध्यान मेहनत और वित्तीय अनुशासन से हटकर अहंकार और अत्यधिक भोग-विलास पर केंद्रित हो जाता है तो दशकों की मेहनत भी बर्बाद हो सकती है। अदालत की यह टिप्पणी किंगफिशर एयरलाइंस के पूर्व प्रमोटर विजय माल्या से जुड़े शेयर विवाद की सुनवाई के दौरान सामने आई। मामले में डियाजियो होल्डिंग्स नीदरलैंड्स बीवी और भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व वाले बैंकों के समूह के बीच यूनाइटेड ब्रुअरीज लिमिटेड के उन शेयरों को लेकर विवाद था जिन्हें एक ऋण के सिलसिले में गिरवी रखा गया था।जस्टिस डीके सिंह और जस्टिस टीएम नदाफ की पीठ ने मामले में राहत देते हुए शेयरों पर दावों की प्राथमिकता को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि संबंधित शेयरों पर डियाजियो का दावा बैंकों के कंसोर्टियम के दावे की तुलना में पहले और अधिक मजबूत है। इस फैसले का संबंध शेयरों पर अधिकार और ऋण से जुड़े दावों की कानूनी स्थिति से है। अदालत की टिप्पणी ने एक बार फिर विजय माल्या के कारोबारी मामलों और किंगफिशर एयरलाइंस पर बकाया कर्ज के मुद्दे को चर्चा में ला दिया है।सुनवाई के दौरान अदालत ने वित्तीय अनुशासन और व्यक्तिगत जीवनशैली के बीच संतुलन के महत्व पर जोर दिया। अदालत के अनुसार जब कोई व्यक्ति अपने काम और आर्थिक जिम्मेदारियों के बजाय व्यक्तिगत अहंकार और अत्यधिक भोग-विलास को प्राथमिकता देने लगता है तो उसके लंबे समय के प्रयास भी निष्फल हो सकते हैं। अनुशासन की जगह दिखावे और खुद को बड़ा साबित करने की प्रवृत्ति हावी हो जाए तो आर्थिक संकट गहरा सकता है। अदालत की इस टिप्पणी को विजय माल्या के कारोबारी सफर और किंगफिशर एयरलाइंस से जुड़े विवादों के संदर्भ में देखा जा रहा है।विजय माल्या कभी देश के चर्चित उद्योगपतियों में शामिल रहे हैं। किंगफिशर एयरलाइंस को एक प्रीमियम विमानन ब्रांड के रूप में पेश किया गया था और कंपनी की पहचान उसकी भव्य छवि तथा खर्चीली शैली से जुड़ी रही। हालांकि बाद में एयरलाइन गंभीर वित्तीय संकट में फंस गई और बैंकों के कर्ज की वसूली एक बड़ा मुद्दा बन गई। माल्या के खिलाफ बैंकों का बकाया चुकाने और कानूनी कार्रवाई से जुड़े मामले लंबे समय से चर्चा में हैं। इसी पृष्ठभूमि में अदालत की टिप्पणी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।अदालत ने अपने आदेश में यह भी दर्ज किया कि बैंकों ने किंगफिशर एयरलाइंस को दिए गए 6203 करोड़ रुपये के मूल ऋण के मुकाबले अब तक 14131.6 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति बरामद कर ली है। यह आंकड़ा वसूली की प्रक्रिया और बैंकों की ओर से प्राप्त संपत्तियों के मूल्य को दर्शाता है। शेयर विवाद में अदालत के फैसले का मुख्य प्रश्न यह था कि संबंधित गिरवी रखे गए शेयरों पर किस पक्ष का दावा प्राथमिकता रखता है।इस मामले में अदालत की टिप्पणी केवल एक कारोबारी विवाद तक सीमित नहीं रही बल्कि इसने वित्तीय जिम्मेदारी और अनुशासित आर्थिक व्यवहार के महत्व को भी रेखांकित किया। हालांकि शेयरों पर दावों की प्राथमिकता से जुड़ा फैसला और विजय माल्या की जीवनशैली पर अदालत की टिप्पणी अलग-अलग पहलू हैं। मामले का कानूनी महत्व इस बात में है कि संबंधित संपत्तियों पर अधिकार किस पक्ष का पहले माना जाएगा और ऋण वसूली से जुड़े दावों का निपटारा किस आधार पर होगा। -

भगोड़े विजय माल्या को बॉम्बे हाईकोर्ट से झटका, कहा- पहले भारत आकर कोर्ट में हाजिर हो
नई दिल्ली । भारत से करोड़ों रुपए का गबन करके भागने वाले शराब कारोबारी विजय माल्या को बॉम्बे हाई कोर्ट ने झटका दिया है। कोर्ट ने माल्या की तरफ से फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स एक्ट को दी गई चुनौती वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए कोर्ट ने कहा कि इस पर तभी कार्यवाही होगी, जब माल्या खुद भारत आकर कोर्ट में पेश होगा।मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अंकढ़ की खंडपीठ ने मामले को आगे बढ़ाते हुए 23 दिसंबर को फिर से सुनवाई की बात कही। पीठ ने माल्या के वकील से कहा,”पहले अपने मुवक्किल को कोर्ट में पेश कराइए, फिर इस मामले पर सुनवाई की जाएगी। यह बताइए की वह कब तक भारत आएगा।”
गौरतलब है कि नामी शराब कारोबारी और भारत के अरबपतियों में से एक विजय माल्या साल 2016 में देश छोड़कर भाग गया था। 2015 में ही सीबीआई ने माल्या के खिलाफ सिक्योरिटीज एवं फ्राड सेल के मामले में एफआईआर दर्ज की थी। इसमें माल्या के ऊपर आपराधिक साजिश, आपराधिक विश्वासघात और दुराचार का आरोप लगाया गया था। यह पूरा मामला 900 करोड़ रुपए के कर्ज से जुड़ा हुआ था, जिसे आईडीबीआई बैंक ने विजय माल्या की कंपनी किंगफिशर एयरलाइंस को दिया था। बाद में, एसबीआई के नेतृत्व में बैंकों के एक समूह ने माल्या के खिलाफ एक और धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज करवाई।
इसके बाद शुरू हुई जांच में सामने आया कि माल्या ने किंगफिशर एयरलाइंस का चेयरमैन रहते हुए, लोन लेने के लिए कई फ्रॉड किए हैं। इसमें मनी लॉन्ड्रिंग जैसे आरोप भी शामिल हैं।
2018 में एफईओ एक्ट के लागू होने के बाद माल्या के खिलाफ इसी कानून के तहत कार्यवाही होनी शुरू हो गई। इसके विरोध में माल्या ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। इसकी सुनवाई जारी है। ईडी ने माल्या की इस याचिका के खिलाफ जवाब दाखिल करते हुए कहा था कि माल्या के भारत लौटे बिना उसे किसी भी तरह की सुरक्षा देना सही नहीं है। ईडी ने कहा कि विजय माल्या 2016 में जांच से बचने के लिए देश छोड़कर भाग गए थे। इसके बाद उनका पासपोर्ट रद्द कर दिया गया, और उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी हुआ। नवंबर 2016 में उन्हें “घोषित अपराधी” घोषित किया गया। 2017 और 2018 में विशेष अदालत ने उनके खिलाफ नए वारंट जारी किए, और उन्हें अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया, लेकिन माल्या भारत नहीं लौटे।
2016 में इन केसों से बचने के लिए ब्रिटेन गए माल्या तब से वहीं भगोड़े के रूप में रह रहे हैं। हालांकि, जब भी उन्हें भारत वापस आने के लिए कहा गया, तब सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए उन्होंने इससे इनकार कर दिया। एक बार उन्होंने भारत आने की इच्छा भी जताई थी, लेकिन उन्होंने गिरफ्तारी से सुरक्षा देने की मांग रखी थी, जिसे ईडी ने खारिज कर दिया था।
