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  • चेन्नई के दूसरे एयरपोर्ट पर विजय सरकार का बड़ा फैसला, DMK ने विधानसभा में जानकारी को लेकर उठाए गंभीर सवाल

    चेन्नई के दूसरे एयरपोर्ट पर विजय सरकार का बड़ा फैसला, DMK ने विधानसभा में जानकारी को लेकर उठाए गंभीर सवाल

    नई दिल्ली ।तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने सोमवार को विधानसभा में चेन्नई के पास परंदूर में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजना को रद्द करने की घोषणा की। इस फैसले के साथ चेन्नई में दूसरे हवाई अड्डे के निर्माण की योजना फिलहाल रोक दी गई है। सरकार के निर्णय के बाद राज्य की राजनीति में इस परियोजना को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी दल डीएमके ने विजय सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए परियोजना से जुड़ी फाइलें सार्वजनिक करने की मांग की है।

    मुख्यमंत्री विजय ने विधानसभा में कहा कि चेन्नई का मौजूदा मीनमबक्कम हवाई अड्डा वर्तमान में यात्रियों की जरूरतों को संभालने की क्षमता रखता है। उनके मुताबिक शहर की मौजूदा जरूरतों को देखते हुए अभी नए हवाई अड्डे की तत्काल आवश्यकता नहीं है। उन्होंने औद्योगिक विकास और कार्गो परिवहन से जुड़ी भविष्य की जरूरतों का भी उल्लेख किया।

    विजय ने कहा कि यदि आने वाले समय में चेन्नई के लिए नए हवाई अड्डे की जरूरत महसूस होती है तो उसके लिए ऐसी जगह का चयन किया जाना चाहिए, जहां कृषि भूमि और रिहायशी इलाकों पर न्यूनतम प्रभाव पड़े। सरकार के इस रुख को परंदूर परियोजना से जुड़े पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों से जोड़कर देखा जा रहा है।

    चेन्नई से करीब 70 किलोमीटर दूर परंदूर में प्रस्तावित एयरपोर्ट परियोजना का स्थानीय स्तर पर लंबे समय से विरोध होता रहा था। स्थानीय लोगों और किसानों की ओर से बहुफसली उपजाऊ कृषि भूमि के संभावित नुकसान को लेकर चिंता जताई गई थी। इसके अलावा पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव और परियोजना के कारण प्रभावित होने वाले इलाकों को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं।

    मुख्यमंत्री विजय विधानसभा चुनाव से पहले भी परंदूर एयरपोर्ट परियोजना के विरोध में स्थानीय लोगों और किसानों के साथ खड़े दिखाई दिए थे। उन्होंने इस मुद्दे को लेकर अभियान चलाया था। अब सत्ता में आने के बाद परियोजना को रद्द करने की घोषणा को उनके पहले के राजनीतिक रुख से जोड़कर देखा जा रहा है।

    हालांकि, परियोजना रद्द किए जाने के बाद विवाद खत्म होने के बजाय राजनीतिक रूप से और तेज हो गया है। डीएमके ने विजय सरकार से मांग की है कि पिछली सरकार के कार्यकाल में शुरू की गई परंदूर एयरपोर्ट परियोजना से संबंधित सभी फाइलें सार्वजनिक की जाएं। विपक्ष का कहना है कि दस्तावेज सामने आने से परियोजना की पूरी प्रक्रिया और उससे जुड़े निर्णयों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    डीएमके ने सरकार को इसके लिए एक सप्ताह का समय देने की बात कही है। विपक्ष के अनुसार यदि निर्धारित अवधि में फाइलें सार्वजनिक नहीं की गईं तो विधानसभा में विशेषाधिकार प्रस्ताव लाने पर विचार किया जाएगा। डीएमके ने यह भी आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री ने विधानसभा में परियोजना से संबंधित जानकारी सही तरीके से प्रस्तुत नहीं की।

    इस बीच, चेन्नई की भविष्य की हवाई परिवहन जरूरतों को लेकर भी बहस शुरू हो गई है। सरकार का कहना है कि मौजूदा हवाई अड्डे की क्षमता फिलहाल पर्याप्त है, जबकि भविष्य में आवश्यकता बढ़ने पर कम प्रभावित क्षेत्र में नई परियोजना पर विचार किया जा सकता है।

    परंदूर परियोजना को रद्द करने का फैसला विकास, पर्यावरण और कृषि भूमि के संरक्षण के बीच संतुलन से जुड़े सवालों को भी सामने लाता है। अब इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच आगे की राजनीतिक बहस विधानसभा में देखने को मिल सकती है। डीएमके की ओर से दिए गए एक सप्ताह के अल्टीमेटम के बाद परियोजना की फाइलें सार्वजनिक करने और सरकार के फैसले पर स्पष्टीकरण देने को लेकर विजय सरकार पर राजनीतिक दबाव बढ़ गया है।

  • मुख्यमंत्री विजय के बड़े ऐलान से राहत की उम्मीद, मुफ्त सिलेंडर योजना के साथ महिलाओं के लिए विस्तृत बस यात्रा सुविधा

    मुख्यमंत्री विजय के बड़े ऐलान से राहत की उम्मीद, मुफ्त सिलेंडर योजना के साथ महिलाओं के लिए विस्तृत बस यात्रा सुविधा

    नई दिल्ली ।तमिलनाडु में मुख्यमंत्री विजय ने राज्य के गरीब परिवारों, महिलाओं और ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। सरकार के मुताबिक इन फैसलों का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत देने के साथ महिलाओं की सार्वजनिक परिवहन तक पहुंच आसान बनाना है। इसके तहत गरीब परिवारों को हर साल तीन मुफ्त LPG सिलेंडर देने की योजना शुरू करने का ऐलान किया गया है। साथ ही महिलाओं और ट्रांसजेंडर यात्रियों के लिए बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा का दायरा बढ़ाने की बात कही गई है।

    सरकार की ओर से घोषित ‘अन्नपूर्णानी सुपर सिक्स’ योजना पोंगल 2027 से शुरू होने की बात कही गई है। इस योजना के तहत ऐसे परिवारों को लाभ देने का प्रस्ताव है, जिनकी वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से कम है। पात्र परिवारों को एक साल में तीन LPG सिलेंडर मुफ्त उपलब्ध कराए जाएंगे। सरकार के अनुमान के अनुसार इस योजना से करीब 1.30 करोड़ परिवार लाभान्वित हो सकते हैं।

    इस योजना पर राज्य सरकार के खजाने से हर साल करीब 4 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। लाभार्थियों को पहले LPG सिलेंडर खरीदना होगा और इसके बाद सिलेंडर की कीमत सीधे उनके बैंक खाते में जमा किए जाने की व्यवस्था बताई गई है। इस तरह सरकार ने योजना को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता से जोड़ने की तैयारी की है।

    मुख्यमंत्री विजय ने महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा को लेकर भी बड़ा ऐलान किया है। प्रस्तावित सुविधा केवल सामान्य बसों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि एक्सप्रेस, एलएसएस और डीलक्स बसों में भी महिलाओं को मुफ्त यात्रा की सुविधा देने की बात कही गई है। इसके अलावा अंतर-जिला बस सेवाओं में भी महिलाओं को इस सुविधा का लाभ दिए जाने की जानकारी सामने आई है।

    महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा की यह सुविधा ‘वेट्री पयाना थिट्टम’ के तहत 2 अक्टूबर से शुरू करने की घोषणा की गई है। इसके दायरे में ट्रांसजेंडर यात्रियों को भी शामिल किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल अधिक सुगम हो सकता है।

    इन कल्याणकारी घोषणाओं के साथ चेन्नई के प्रस्तावित नए एयरपोर्ट को लेकर भी सरकार ने अपना रुख स्पष्ट किया है। परंदूर में प्रस्तावित एयरपोर्ट परियोजना का स्थानीय लोगों की ओर से विरोध किए जाने के बाद मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि सरकार ऐसे वैकल्पिक स्थानों की तलाश कर रही है, जहां एयरपोर्ट निर्माण से परिवार प्रभावित न हों।

    सरकार ने नए एयरपोर्ट के लिए कुछ वैकल्पिक स्थानों की पहचान किए जाने की बात कही है। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि मौजूदा परिस्थितियों में सरकार परंदूर में एयरपोर्ट बनाने के पक्ष में नहीं है। इसके साथ ही चेन्नई के मौजूदा मीनांबक्कम एयरपोर्ट पर नया टर्मिनल-5 बनाने की योजना का भी ऐलान किया गया है।

    मुख्यमंत्री विजय ने किसानों के हितों को भी प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने किसानों को देश की रीढ़ बताते हुए कहा कि विकास परियोजनाओं के नाम पर उनके हितों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। ऐसे में सरकार के हालिया फैसलों में एक ओर गरीब परिवारों को घरेलू ईंधन पर राहत देने का प्रयास दिखाई देता है, वहीं दूसरी ओर महिलाओं और ट्रांसजेंडर यात्रियों के लिए सार्वजनिक परिवहन को अधिक सुलभ बनाने पर जोर दिया गया है। इन घोषणाओं के लागू होने के बाद इनके वास्तविक लाभ और वित्तीय प्रभाव का आकलन किया जा सकेगा।

  • जुलाई 2026 की ऑरमैक्स लिस्ट में प्रभास सबसे लोकप्रिय अभिनेता, शाहरुख खान और सलमान खान की रैंकिंग भी जानिए

    जुलाई 2026 की ऑरमैक्स लिस्ट में प्रभास सबसे लोकप्रिय अभिनेता, शाहरुख खान और सलमान खान की रैंकिंग भी जानिए

    नई दिल्ली ।जुलाई 2026 के लिए जारी लोकप्रिय भारतीय अभिनेताओं की सूची में दक्षिण भारतीय सिनेमा के सितारों का दबदबा एक बार फिर देखने को मिला है। लोकप्रियता के आधार पर तैयार की गई इस सूची में बाहुबली स्टार प्रभास ने लगातार अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखते हुए पहला स्थान हासिल किया है। वहीं थलापति विजय दूसरे और अल्लू अर्जुन तीसरे नंबर पर रहे हैं।

    प्रभास की लोकप्रियता पिछले कई महीनों से लगातार चर्चा में रही है और इस सूची में भी उन्होंने अपना शीर्ष स्थान बरकरार रखा है। उनकी फिल्मों को लेकर दर्शकों के बीच बनी उत्सुकता और बड़े स्तर पर उनकी फैन फॉलोइंग उनकी लोकप्रियता को मजबूत बनाए हुए है। इस बार भी कोई अन्य अभिनेता उन्हें पहले स्थान से पीछे नहीं कर सका।

    दूसरे स्थान पर थलापति विजय हैं। तमिल सिनेमा के प्रमुख सितारों में शामिल विजय की आगामी फिल्म जन नायकन को लेकर भी दर्शकों के बीच काफी चर्चा है। फिल्म से जुड़ी खबरों और अभिनेता की लोकप्रियता का असर उनकी रैंकिंग में भी दिखाई देता है। वह सूची में प्रभास के बाद दूसरे स्थान पर बने हुए हैं।

    अल्लू अर्जुन ने इस सूची में तीसरा स्थान हासिल किया है। पुष्पा फ्रेंचाइजी की सफलता के बाद उनकी लोकप्रियता देशभर में और मजबूत हुई है। जुलाई की रैंकिंग में उन्होंने तीसरे स्थान पर जगह बनाई, जिससे शीर्ष तीन में दक्षिण भारतीय सिनेमा के तीन बड़े सितारों का कब्जा रहा।

    बॉलीवुड के सबसे बड़े सितारों में शामिल शाहरुख खान चौथे स्थान पर हैं। किंग खान की लोकप्रियता लंबे समय से देश और विदेश में कायम है, लेकिन इस बार वह शीर्ष तीन में जगह नहीं बना सके। इसके बावजूद उनका चौथा स्थान उनकी व्यापक लोकप्रियता को दर्शाता है।

    पांचवें नंबर पर तेलुगु सिनेमा के सुपरस्टार महेश बाबू हैं। उनके बाद छठे स्थान पर राम चरण को जगह मिली है। आरआरआर जैसी चर्चित फिल्म से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाले राम चरण की लोकप्रियता भी लगातार बनी हुई है।

    सातवें स्थान पर अभिनेता सूर्या हैं। तमिल सिनेमा में अपनी अलग पहचान रखने वाले सूर्या ने भी शीर्ष दस में अपनी जगह बनाए रखी। उनके बाद बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान आठवें स्थान पर रहे। हिंदी सिनेमा के सबसे लोकप्रिय सितारों में गिने जाने वाले सलमान की रैंकिंग इस बार शाहरुख खान से चार स्थान नीचे रही।

    नौवें नंबर पर अक्षय कुमार को जगह मिली है। अभिनेता इन दिनों वेलकम टू द जंगल जैसी फिल्म को लेकर चर्चा में हैं। उनकी फिल्मों और लंबे करियर के कारण दर्शकों के बीच उनकी पहचान लगातार मजबूत बनी हुई है।

    सूची में दसवां स्थान जूनियर एनटीआर ने हासिल किया है। आरआरआर के बाद उनकी लोकप्रियता को देशभर में नई पहचान मिली है। शीर्ष दस में उनकी मौजूदगी बताती है कि दक्षिण भारतीय कलाकारों की लोकप्रियता हिंदी भाषी दर्शकों के बीच भी व्यापक रूप से बढ़ी है।

    जुलाई 2026 की इस सूची में शीर्ष दस में प्रभास, विजय, अल्लू अर्जुन, महेश बाबू, राम चरण, सूर्या और जूनियर एनटीआर जैसे सात दक्षिण भारतीय सितारे शामिल हैं। वहीं शाहरुख खान, सलमान खान और अक्षय कुमार तीन बॉलीवुड अभिनेताओं के रूप में जगह बनाने में सफल रहे। इससे मौजूदा दौर में भारतीय सिनेमा के लोकप्रिय सितारों की बदलती तस्वीर साफ दिखाई देती है।

  • तमिलनाडु में विजय सरकार ने छात्रों को CJP और वामपंथी प्रदर्शनों से दूर रखने वाला विवादित आदेश वापस लिया

    तमिलनाडु में विजय सरकार ने छात्रों को CJP और वामपंथी प्रदर्शनों से दूर रखने वाला विवादित आदेश वापस लिया

    नई दिल्ली । तमिलनाडु में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार ने छात्रों को कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP और वामपंथी संगठनों के प्रदर्शनों में शामिल होने से रोकने वाला अपना निर्देश वापस ले लिया है। सरकार की ओर से यह फैसला 19 अगस्त को लिया गया। इससे पहले 14 अगस्त को कॉलेजिएट शिक्षा निदेशालय की ओर से संबंधित विभागों और संस्थानों को निर्देश जारी किया गया था।

    इस निर्देश में स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों तथा युवाओं को राजनीतिक प्रदर्शनों और आंदोलनों में शामिल होने से रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने को कहा गया था। संबंधित प्रशासनिक और शैक्षणिक अधिकारियों से इस दिशा में कार्रवाई करने की अपेक्षा की गई थी। आदेश सामने आने के बाद तमिलनाडु की राजनीति में इसको लेकर बहस तेज हो गई।

    निर्देश में विशेष रूप से CJP और वामपंथी दलों की ओर से आयोजित आंदोलनों का उल्लेख किया गया था। सरकार का रुख छात्रों को राजनीतिक गतिविधियों से दूर रखने पर केंद्रित था, लेकिन इस व्यवस्था को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर सवाल उठने लगे। आलोचकों ने इसे छात्रों की राजनीतिक अभिव्यक्ति और लोकतांत्रिक गतिविधियों में भागीदारी से जोड़कर देखा।

    CJP ने सरकार के इस कदम का विरोध करते हुए निर्देश को असंवैधानिक बताया था। संगठन का कहना था कि छात्रों को किसी खास राजनीतिक आंदोलन में शामिल होने से रोकने के लिए प्रशासनिक निर्देश जारी करना उनके अधिकारों के दायरे से जुड़ा गंभीर विषय है। आदेश वापस लिए जाने के बाद इस विवाद को लेकर सरकार का रुख पहले की तुलना में बदला हुआ दिखाई दिया।

    इस पूरे घटनाक्रम में भारतीय जनता पार्टी की प्रतिक्रिया भी सामने आई थी। भाजपा नेता विनोज पी. सेल्वम ने सरकार के शुरुआती निर्देश का समर्थन करते हुए CJP और वामपंथी संगठनों पर छात्रों को प्रभावित करने का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि ऐसे संगठन युवाओं को आंदोलनों में शामिल करते हैं और बाद में उन्हें परिस्थितियों का सामना करने के लिए छोड़ देते हैं।

    तमिलनाडु की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम ने राज्य की राजनीति में नई भूमिका बनाई है। सरकार के गठन में कांग्रेस और वामपंथी दलों के समर्थन का भी राजनीतिक संदर्भ मौजूद है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वामपंथी दलों ने सरकार को समर्थन दिया है, जबकि उनके किसी नेता को मंत्रिमंडल में स्थान नहीं मिला है।

    ऐसे में छात्रों को वामपंथी संगठनों और CJP के प्रदर्शनों से दूर रखने वाला निर्देश राजनीतिक रूप से भी चर्चा का विषय बन गया था। सरकार द्वारा इसे वापस लेने के बाद अब संबंधित संस्थानों के लिए पहले जारी प्रतिबंधात्मक निर्देश प्रभावी नहीं रहेगा।

    यह घटनाक्रम तमिलनाडु में छात्र राजनीति, राजनीतिक भागीदारी और प्रशासनिक निर्देशों को लेकर चल रही व्यापक बहस के बीच सामने आया है। सरकार का आदेश वापस लेना इस बात का संकेत है कि फिलहाल छात्रों को इन प्रदर्शनों से दूर रखने संबंधी पहले जारी निर्देश को आगे लागू नहीं किया जाएगा।

    हालांकि, राजनीतिक दलों और संगठनों की प्रतिक्रियाओं के बीच यह मुद्दा राज्य की राजनीति में आगे भी चर्चा का विषय बना रह सकता है। सरकार के फैसले ने एक ओर प्रशासनिक स्तर पर जारी निर्देश को समाप्त किया है, वहीं दूसरी ओर छात्रों की राजनीतिक गतिविधियों में भागीदारी और संस्थानों की भूमिका को लेकर नए सवाल भी सामने रखे हैं।

  • तमिलनाडु विधानसभा में सीएम विजय ने परिसीमन के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया, 543 लोकसभा सीटें बनाए रखने और महिला आरक्षण की मांग

    तमिलनाडु विधानसभा में सीएम विजय ने परिसीमन के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया, 543 लोकसभा सीटें बनाए रखने और महिला आरक्षण की मांग

    नई दिल्ली ।तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने बुधवार को विधानसभा में परिसीमन के मुद्दे पर प्रस्ताव पेश करते हुए लोकसभा सीटों की मौजूदा संख्या और राज्यों के बीच सीटों के वर्तमान अनुपात को बनाए रखने की मांग की। प्रस्ताव में केंद्र से लोकसभा की कुल 543 सीटों को बरकरार रखने और इनके आधार पर महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की अपील की गई है।

    मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया के कारण राज्यों के प्रतिनिधित्व में बदलाव की आशंका को देखते हुए मौजूदा सीट व्यवस्था को बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने प्रस्ताव के माध्यम से केंद्र से मांग की कि लोकसभा की 543 सीटों की वर्तमान संख्या को स्थायी रूप से बरकरार रखा जाए और राज्यों के बीच सीटों का मौजूदा अनुपात भी सुरक्षित रखा जाए।

    विजय ने महिला आरक्षण को लेकर भी अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने में अब और देरी नहीं होनी चाहिए। उनके अनुसार महिला आरक्षण को परिसीमन की प्रक्रिया से जोड़ने पर इसके लागू होने में अतिरिक्त समय लग सकता है। इसलिए मौजूदा 543 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों के आधार पर ही 2029 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जाना चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने महिला आरक्षण को किसी प्रकार की रियायत मानने के बजाय संवैधानिक अधिकार बताया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक प्रतिनिधित्व में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए आरक्षण को जल्द लागू किया जाना आवश्यक है। विजय ने तमिलनाडु में महिलाओं की चुनावी भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में पुरुषों की तुलना में अधिक महिलाओं ने मतदान किया है।

    विधानसभा में पेश प्रस्ताव का एक प्रमुख हिस्सा परिसीमन के संभावित प्रभावों से जुड़ा है। तमिलनाडु की ओर से यह मांग रखी गई है कि राज्यों के बीच लोकसभा सीटों का वर्तमान अनुपात प्रभावित नहीं होना चाहिए। प्रस्ताव में कहा गया है कि 543 सीटों की मौजूदा व्यवस्था को बरकरार रखते हुए ही भविष्य में प्रतिनिधित्व से जुड़े बदलावों पर विचार किया जाना चाहिए।

    विजय की इस मांग के बीच विपक्षी दल ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के नेता ईपीएस ने परिसीमन के मुद्दे पर अलग रुख रखा। उन्होंने कहा कि परिसीमन में अपने आप में कुछ गलत नहीं है, लेकिन तमिलनाडु का लोकसभा में मौजूदा 7.18 प्रतिशत हिस्सा किसी भी स्थिति में कम नहीं होना चाहिए।

    इस तरह विधानसभा में परिसीमन को लेकर राज्य के प्रतिनिधित्व और महिला आरक्षण दोनों मुद्दे एक साथ सामने आए। मुख्यमंत्री विजय के प्रस्ताव में मौजूदा 543 लोकसभा सीटों को बनाए रखने, राज्यों के बीच वर्तमान सीट अनुपात को सुरक्षित रखने और महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को जल्द लागू करने की मांग शामिल है।

    विजय ने विशेष रूप से 2029 के लोकसभा चुनाव को महिला आरक्षण लागू करने की समयसीमा के रूप में सामने रखा। उनका तर्क है कि यदि महिला आरक्षण को परिसीमन के साथ जोड़कर आगे बढ़ाया गया तो इसके प्रभावी होने में देरी हो सकती है। इसलिए मौजूदा निर्वाचन क्षेत्रों के आधार पर ही इसे लागू किया जाना चाहिए।

    प्रस्ताव के जरिए तमिलनाडु सरकार ने केंद्र के सामने परिसीमन को लेकर अपनी राजनीतिक और संवैधानिक चिंताएं रखी हैं। अब इस मुद्दे पर केंद्र और अन्य राज्यों के रुख के साथ आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। साथ ही महिला आरक्षण को 2029 के चुनाव से लागू करने की मांग राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व और चुनावी व्यवस्था से जुड़े विमर्श को भी प्रभावित कर सकती है।

  • तमिलनाडु में उदयनिधि स्टालिन की रिहाई के बाद गरमाई राजनीति, जानिए अभिनेता विशाल ने क्या उठाए बड़े सवाल

    तमिलनाडु में उदयनिधि स्टालिन की रिहाई के बाद गरमाई राजनीति, जानिए अभिनेता विशाल ने क्या उठाए बड़े सवाल

    नई दिल्ली । तमिल फिल्म उद्योग के प्रसिद्ध अभिनेता विशाल ने हालिया राजनीतिक और सामाजिक घटनाक्रमों पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए महिला सुरक्षा, फिल्म उद्योग की समस्याओं और राज्य के नए राजनीतिक परिदृश्य पर विस्तृत विचार साझा किए हैं। पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन की पुलिस हिरासत के मुद्दे पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि राजनीति के क्षेत्र में इस प्रकार के घटनाक्रम घटित होते रहते हैं। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि जो लोग फिल्म जगत से जुड़ी महिला कलाकारों के प्रति अनुचित और अमर्यादित भाषा का प्रयोग करते हैं, उनके विरुद्ध भी इसी प्रकार की कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

    अभिनेता ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि डिजिटल प्लेटफार्मों विशेषकर यूट्यूब पर कई लोग महिला अभिनेत्रियों के खिलाफ खुलेआम अपमानजनक और भद्दी टिप्पणियां करते हैं। उनका मानना है कि ऐसे तत्वों पर नकेल कसना अत्यंत आवश्यक है ताकि फिल्म उद्योग में कार्यरत महिलाओं को सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल मिल सके। उन्होंने पुलिस और प्रशासन से मांग की कि सार्वजनिक रूप से अभद्र टिप्पणी करने वालों के खिलाफ सख्ती से निपटा जाए।

    तमिलनाडु में राजनीतिक बदलाव और अभिनेता थलपति विजय के मुख्यमंत्री बनने पर खुशी जताते हुए विशाल ने कहा कि जनता के इस निर्णय से वे काफी उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि विजय ने अपने सफल अभिनय करियर को विराम देकर पूर्ण रूप से जनसेवा और राजनीति का रास्ता चुना है। अब पूरे राज्य को उनके चुनावी घोषणापत्र में किए गए वादों और नई नीतियों के धरातल पर लागू होने का इंतजार है।

    फिल्म उद्योग की अपेक्षाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने उम्मीद जताई कि नई सरकार सिनेमा क्षेत्र को राहत प्रदान करेगी। विशाल ने विशेष रूप से राज्य में लागू दोहरे कराधान के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि देश के किसी अन्य राज्य में इस प्रकार की कर व्यवस्था नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री विजय से अपील की कि तमिलनाडु में फिल्म उद्योग पर मंडरा रहे दोहरे कर के बोझ को जल्द से जल्द समाप्त किया जाए ताकि इस क्षेत्र से जुड़े लोगों को राहत मिल सके।

    राज्य की बुनियादी ढांचागत समस्याओं पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने शहरों में जलभराव और सीवेज प्रबंधन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि आम जनता और नागरिकों को जलजमाव की समस्याओं से मुक्ति मिलनी चाहिए। उन्हें पूरी उम्मीद है कि नई सरकार निचले और मध्यम वर्ग के कल्याण के लिए प्रभावी नीतियां बनाएगी और राज्य के विकास को नई दिशा प्रदान करेगी।

    दूसरी ओर, रिहा होने के बाद पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके साथ अत्यंत अनुचित व्यवहार किया गया और लगभग तीन हजार पुलिसकर्मियों की उपस्थिति में उन्हें चेन्नई से तंजावुर तक 400 किलोमीटर सड़क मार्ग से ले जाया गया। उल्लेखनीय है कि अभिनेत्री तृषा के विरुद्ध द्विअर्थी टिप्पणी करने के मामले में उन्हें चेन्नई स्थित आवास से हिरासत में लिया गया था, जिसके बाद तंजावुर में मामला दर्ज कर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई।

  • थलापति विजय और संगीता के तलाक मामले में नया मोड़, पत्नी ने वापस ली अलगाव की अर्जी

    थलापति विजय और संगीता के तलाक मामले में नया मोड़, पत्नी ने वापस ली अलगाव की अर्जी

    नई दिल्ली । तमिल फिल्म जगत और तमिलनाडु की राजनीति से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। अभिनेता और नेता थलापति विजय के वैवाहिक जीवन को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच अब नया अपडेट सामने आया है। उनकी पत्नी संगीता ने तलाक के लिए दायर की गई अर्जी वापस ले ली है। इसके बाद अदालत ने इस मामले को बंद कर दिया है। इस फैसले के साथ ही विजय और संगीता के अलग होने की अटकलों पर फिलहाल विराम लग गया है।

    विजय और संगीता के रिश्ते को लेकर पिछले कुछ समय से कई तरह की खबरें सामने आ रही थीं। दोनों के बीच कथित मतभेद और अलगाव की चर्चाओं ने उनके प्रशंसकों का ध्यान खींचा था। अब तलाक की अर्जी वापस लिए जाने के बाद दोनों के रिश्ते को लेकर स्थिति बदलती नजर आ रही है।

    जानकारी के अनुसार, संगीता ने विजय से अलग होने के लिए अदालत में याचिका दायर की थी, जिसे बाद में उन्होंने वापस ले लिया। इसके बाद संबंधित अदालत ने तलाक की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के बजाय मामले को समाप्त कर दिया। इस घटनाक्रम के बाद विजय के समर्थकों ने भी राहत महसूस की।

    इससे पहले दोनों के रिश्ते को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि वैवाहिक विवाद की वजह से दोनों के बीच दूरी बढ़ी थी। विजय का नाम अभिनेत्री तृषा कृष्णन के साथ भी जोड़ा गया था, हालांकि इन चर्चाओं को लेकर किसी भी पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई थी।

    विजय और संगीता की शादी वर्ष 1999 में हुई थी। दोनों करीब 27 वर्षों से साथ हैं। इस दौरान उनके दो बच्चे भी हुए। उनके बेटे का नाम जेसन संजय और बेटी का नाम दिव्या साशा है। परिवार और निजी जीवन को लेकर विजय हमेशा काफी निजी रवैया रखते रहे हैं।

    थलापति विजय ने अभिनय के क्षेत्र में लंबा सफर तय करने के बाद राजनीति में भी कदम रखा है। तमिलनाडु की राजनीति में उनकी सक्रियता बढ़ने के बाद उनके निजी जीवन से जुड़ी खबरों पर भी लोगों की नजर बनी हुई थी।

    तलाक की अर्जी वापस लिए जाने के बाद अब विजय और संगीता के रिश्ते को लेकर चल रही चर्चाएं एक नए मोड़ पर पहुंच गई हैं। हालांकि दोनों की ओर से इस पूरे मामले पर कोई विस्तृत सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है।

    विजय और संगीता की जोड़ी दक्षिण भारतीय सिनेमा जगत की चर्चित जोड़ियों में रही है। लंबे समय तक साथ रहने के बाद उनके अलग होने की खबरों ने प्रशंसकों को चिंता में डाल दिया था। अब अदालत में मामला खत्म होने के बाद उनके समर्थकों के बीच सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

    फिलहाल यह मामला कानूनी रूप से समाप्त हो चुका है और विजय-संगीता के वैवाहिक संबंधों को लेकर आगे की स्थिति उनके व्यक्तिगत फैसलों पर निर्भर करेगी। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर दिखाया है कि फिल्मी सितारों के निजी जीवन से जुड़ी खबरें किस तरह लोगों की दिलचस्पी का केंद्र बन जाती हैं।

  • विजय थलापति की विदाई फिल्म 'जन नायकन' का दमदार आगाज, पहले दिन 41 करोड़ की कमाई के साथ कई रिकॉर्ड किए अपने नाम

    विजय थलापति की विदाई फिल्म 'जन नायकन' का दमदार आगाज, पहले दिन 41 करोड़ की कमाई के साथ कई रिकॉर्ड किए अपने नाम

    नई दिल्ली । विजय थलापति की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘जन नायकन’ ने सिनेमाघरों में रिलीज के साथ ही बॉक्स ऑफिस पर मजबूत शुरुआत दर्ज की है। यह फिल्म अभिनेता के अभिनय करियर की अंतिम फिल्म मानी जा रही है, क्योंकि उन्होंने सक्रिय राजनीति में प्रवेश करने के बाद फिल्मों से दूरी बनाने का फैसला किया है। इसी वजह से दर्शकों के बीच इस फिल्म को लेकर लंबे समय से उत्सुकता बनी हुई थी। पहले दिन मिले दर्शकों के अच्छे समर्थन ने फिल्म को शुरुआती बढ़त दिलाई, हालांकि ट्रेड विशेषज्ञों की अपेक्षा के अनुरूप यह 50 करोड़ या उससे अधिक की घरेलू ओपनिंग हासिल नहीं कर सकी।

    देशभर में फिल्म के लिए पहले दिन 13 हजार से अधिक शो आयोजित किए गए। व्यापक रिलीज का लाभ उठाते हुए ‘जन नायकन’ ने पहले दिन 41 करोड़ रुपये का नेट बॉक्स ऑफिस कलेक्शन दर्ज किया। फिल्म गुरुवार को रिलीज हुई, जिसे आमतौर पर वीकेंड से पहले का दिन माना जाता है। ऐसे में कारोबार पर कार्यदिवस का असर देखने को मिला। अब उद्योग को उम्मीद है कि शुक्रवार, शनिवार और रविवार को दर्शकों की संख्या बढ़ने के साथ फिल्म की कमाई में उल्लेखनीय उछाल आ सकता है।

    ओपनिंग डे कलेक्शन के लिहाज से ‘जन नायकन’ ने हालिया चर्चित फिल्मों को पीछे छोड़ दिया है। रणवीर सिंह की ‘धुरंधर’ ने पहले दिन 28.60 करोड़ रुपये का कारोबार किया था, जबकि विक्की कौशल की ‘छावा’ ने 33.10 करोड़ रुपये की कमाई की थी। इस तुलना में विजय थलापति की फिल्म का 41 करोड़ रुपये का शुरुआती संग्रह बेहतर माना जा रहा है। इससे यह स्पष्ट होता है कि अभिनेता की लोकप्रियता और फिल्म को लेकर दर्शकों की उत्सुकता का सीधा असर बॉक्स ऑफिस पर देखने को मिला।

    फिल्म का प्रदर्शन केवल भारतीय बाजार तक सीमित नहीं रहा। विदेशी बाजारों में भी ‘जन नायकन’ को अच्छी प्रतिक्रिया मिली और पहले दिन करीब 30 करोड़ रुपये का कारोबार दर्ज किया गया। इसके साथ फिल्म का कुल वैश्विक कलेक्शन 78.27 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। हालांकि रिलीज से पहले कई ट्रेड विश्लेषकों ने अनुमान लगाया था कि फिल्म पहले ही दिन 100 करोड़ रुपये का वैश्विक आंकड़ा पार कर सकती है। वास्तविक कमाई इस अनुमान से कम रही, लेकिन शुरुआती प्रदर्शन को उद्योग अब भी सकारात्मक मान रहा है।

    ‘जन नायकन’ में विजय थलापति के साथ पूजा हेगड़े, बॉबी देओल और प्रकाश राज जैसे कलाकार प्रमुख भूमिकाओं में नजर आए हैं। फिल्म को दर्शकों से मिश्रित लेकिन सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। कई प्रशंसकों के लिए यह केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि अभिनेता के लंबे फिल्मी सफर को विदाई देने वाला भावनात्मक अवसर भी बन गई है। रिलीज के दिन कई सिनेमाघरों में प्रशंसकों ने जश्न मनाया, जबकि कुछ जगहों पर भावुक प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिलीं।

    विजय थलापति का अभिनय से संन्यास लेना इस फिल्म को और अधिक खास बनाता है। राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने के उनके निर्णय के बाद ‘जन नायकन’ को उनके फिल्मी करियर की अंतिम प्रस्तुति माना जा रहा है। यही कारण है कि फिल्म को लेकर दर्शकों की भावनात्मक जुड़ाव भी काफी मजबूत दिखाई दे रहा है। अब सभी की नजरें पहले वीकेंड के कारोबार पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि फिल्म शुरुआती रफ्तार को कितनी मजबूती के साथ आगे बढ़ा पाती है।

  • 'जन नायगन' से थलपति विजय की दमदार वापसी, बॉबी देओल संग टक्कर पर सिनेमाघरों में गूंजी सीटियां

    'जन नायगन' से थलपति विजय की दमदार वापसी, बॉबी देओल संग टक्कर पर सिनेमाघरों में गूंजी सीटियां

    नई दिल्ली । करीबन 6 महीने के लंबे स्ट्रगल और सेंसर सर्टिफिकेट के विवादों से गुजरने के बाद आखिरकार थलपति विजय की फिल्म ‘जन नायगन’ सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। यह विजय की बतौर अभिनेता आखिरी फिल्म मानी जा रही है, जिसे लेकर तमिलनाडु समेत पूरे साउथ में जश्न का माहौल है। फैंस में ‘फर्स्ट डे फर्स्ट शो’ (FDFS) देखने की होड़ मची हुई है।

    फैंस को पसंद आई ‘जन नायगन’

    फिल्म को पब्लिक की ओर से धमाकेदार रिस्पॉन्स मिल रहा है। सोशल मीडिया पर फैंस इसे ‘ब्लॉकबस्टर’, ‘हिट’ और ‘एंटरटेनिंग’ बता रहे हैं। थियेटर्स के अंदर फैंस सीटियां बजा रहे हैं और नोट उड़ा रहे हैं।

    थलपति विजय की एंट्री और स्वैग
    एंट्री सीन: फिल्म में विजय का एंट्री सीन तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे गुंडों की धुलाई करते नजर आ रहे हैं।

    स्क्रीन पर टाइटल: मूवी शुरू होने पर विजय को ‘सीएम विजय’ का टाइटल दिया गया है, जिसे देखकर फैंस सिनेमाहॉल में जमकर नारेबाज़ी और हूटिंग कर रहे हैं।

    विजय और बॉबी देओल का आमना-सामना

    फिल्म में इंटरवल से पहले थलपति विजय और बॉबी देओल के बीच का क्लैश (सामना) दिखाया गया है। साउथ की फिल्म में बॉबी देओल की दमदार मौजूदगी देखकर फैंस काफी उत्साहित हैं और इस सीन की क्लिप्स सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।

    सिनेमाघरों के बाहर और अंदर जश्न का माहौल
    थियेटर्स का नजारा: हॉल के अंदर लोग सीटों पर खड़े होकर डांस कर रहे हैं और तालियां बजा रहे हैं।

    कटआउट और आतिशबाजी: सिनेमाघरों के बाहर विजय के बड़े-बड़े पोस्टर्स और कटआउट्स लगाए गए हैं। मदुरई में फैंस पोस्टर्स पर दूध चढ़ाते दिखे, वहीं बेंगलुरु और अन्य शहरों में आतिशबाजी और ढोल-नगाड़ों के साथ डांस किया जा रहा है।

    फिल्म से जुड़ी मुख्य बातें
    रिलीज और स्क्रीन्स: भारत में यह फिल्म 2,500 स्क्रीन्स पर रिलीज हुई है।

    शो टाइमिंग्स: आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना और केरल में सुबह 6 बजे से शो शुरू हो गए, जबकि तमिलनाडु में सुबह 9 बजे से स्क्रीनिंग रखी गई।

    स्टार कास्ट: फिल्म का निर्देशन एच. विनोथ ने किया है। विजय के साथ पूजा हेगड़े, बॉबी देओल, ममिता बैजू, प्रकाश राज, गौतम वासुदेव मेनन और नारायण मुख्य भूमिकाओं में हैं।

    बॉक्स ऑफिस कलेक्शन का अनुमान (रमेश बाला के अनुसार)
    पहला दिन (घरेलू कलेक्शन): ₹60 करोड़ (अनुमानित)

    पहला दिन (वर्ल्डवाइड कलेक्शन): ₹90 – ₹100 करोड़ (अनुमानित)

    ओपनिंग वीकेंड (भारत): ₹150 – ₹180 करोड़ (अनुमानित)

  • जन नायगन विजय की आखिरी नहीं बल्कि मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली फिल्म एच विनोद के बयान से बढ़ी हलचल

    जन नायगन विजय की आखिरी नहीं बल्कि मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली फिल्म एच विनोद के बयान से बढ़ी हलचल


    नई दिल्ली । साउथ सुपरस्टार और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय की बहुप्रतीक्षित फिल्म जन नायगन रिलीज से पहले ही सुर्खियों में बनी हुई है। लंबे समय से इस फिल्म को विजय के अभिनय करियर की आखिरी फिल्म माना जा रहा था लेकिन अब निर्देशक एच विनोद के एक बयान ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है। उनका कहना है कि जन नायगन को विजय की अंतिम फिल्म के रूप में नहीं बल्कि मुख्यमंत्री बनने के बाद उनकी पहली फिल्म के रूप में देखा जाना चाहिए। इस बयान के बाद फिल्म को लेकर दर्शकों की उत्सुकता और भी बढ़ गई है।

    एक इंटरव्यू में एच विनोद ने कहा कि जन नायगन केवल एक मसाला एंटरटेनर नहीं है बल्कि लोकतंत्र और राजनीति से जुड़े गंभीर विषयों पर आधारित फिल्म है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिल्म का उद्देश्य केवल विजय को बड़े पर्दे पर नायक के रूप में पेश करना नहीं बल्कि उन चुनौतियों को सामने लाना है जिनका सामना लोकतंत्र करता है। उनके अनुसार फिल्म में लोकतंत्र को कमजोर करने वाली ताकतों और उसकी रक्षा करने वालों के बीच संघर्ष को बेहद प्रभावशाली तरीके से दिखाया गया है।

    निर्देशक ने दावा किया कि फिल्म का लगभग आधे घंटे का हिस्सा इतना मजबूत और विचारोत्तेजक है कि दर्शक उसे बार बार देखकर नए अर्थ निकाल सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस हिस्से में कई परतें हैं जिन्हें समझने में समय लगेगा और आने वाले वर्षों तक इस पर चर्चा होती रहेगी। उनका मानना है कि जन नायगन उन फिल्मों में शामिल होगी जिन्हें दस बीस या तीस साल बाद भी याद किया जाएगा।

    एच विनोद ने फिल्म से जुड़ा एक और दिलचस्प खुलासा किया। उन्होंने बताया कि जन नायगन की कहानी सबसे पहले विजय को नहीं बल्कि एक अन्य बड़े अभिनेता को सुनाई गई थी। हालांकि उन्होंने उस अभिनेता का नाम नहीं बताया। निर्देशक के अनुसार जब उन्होंने बताया कि यह एक राजनीतिक विषय पर आधारित फिल्म है तो उस अभिनेता ने इसे करने में रुचि नहीं दिखाई। इसके बाद यह कहानी विजय तक पहुंची और उन्होंने इसे करने का फैसला लिया।

    फिल्म में आधुनिक युद्ध और बदलती वैश्विक परिस्थितियों को भी अहम स्थान दिया गया है। एच विनोद ने कहा कि आज की दुनिया में युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं लड़े जाते बल्कि ड्रोन तकनीक और आधुनिक हथियारों के जरिए भी संघर्ष होता है। फिल्म में इसी नए दौर की चुनौतियों को भी कहानी का हिस्सा बनाया गया है जिससे यह सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि समकालीन मुद्दों पर आधारित फिल्म भी बन जाती है।

    निर्देशक ने यह भी स्वीकार किया कि फिल्म की रिलीज को लेकर वह काफी उत्साहित होने के साथ साथ चिंतित भी हैं। उनका कहना है कि यह सामान्य व्यावसायिक फिल्म नहीं है इसलिए इसकी तुलना किसी दूसरी फिल्म के बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन से नहीं की जा सकती। फिल्म की रिलीज कई बार टल चुकी है और इसे संवेदनशील माहौल में रिलीज किया जा रहा है। इसके अलावा फिल्म को मिला ए सर्टिफिकेट भी उनके लिए चिंता का विषय है क्योंकि विजय की फिल्मों को बड़ी संख्या में बच्चे भी पसंद करते हैं।

    जन नायगन में विजय के साथ पूजा हेगड़े बॉबी देओल प्रकाश राज प्रियामणि ममिता बैजू गौतम वासुदेव मेनन और नारायण जैसे कई कलाकार अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म 23 जुलाई 2026 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी। दर्शकों को उम्मीद है कि यह फिल्म मनोरंजन के साथ साथ राजनीति और समाज पर नई बहस भी छेड़ेगी।