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  • विकसित भारत 2047 के सपने को साकार करने में अदाणी ग्रुप की बड़ी भूमिका, डॉ. प्रीति अदाणी ने इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को बताया अहम

    विकसित भारत 2047 के सपने को साकार करने में अदाणी ग्रुप की बड़ी भूमिका, डॉ. प्रीति अदाणी ने इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को बताया अहम


    नई दिल्ली । भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को हासिल करने में बुनियादी ढांचे और ऊर्जा क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। अदाणी फाउंडेशन की चेयरपर्सन डॉ. प्रीति अदाणी ने सोमवार को वाराणसी में आयोजित विश्व संगोष्ठी में यह बात कही। उन्होंने कहा कि भारत के सामने गरीबी कुपोषण अशिक्षा और देश के अंतिम छोर तक बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने की चुनौतियां अब भी मौजूद हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए सरकार के साथ उद्योग जगत को भी आगे आकर काम करना होगा। उनके मुताबिक अदाणी समूह बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के जरिए देश की विकास यात्रा में योगदान देने की दिशा में काम कर रहा है।

    डॉ. प्रीति अदाणी वाराणसी में आयोजित आधुनिक चुनौतियों के लिए प्राचीन ज्ञान विषय पर विश्व संगोष्ठी को संबोधित कर रही थीं। इस दौरान उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विकास के बीच संबंध पर भी विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन परंपराओं में समाज के कल्याण और प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीने पर जोर दिया गया है। आज के दौर में भी कारोबार और उद्योगों को इसी सोच के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है। उनके अनुसार व्यवसायों को केवल मुनाफे तक सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि समाज और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए।

    उन्होंने कहा कि व्यवसायों के संचालन में स्थिरता को केंद्र में रखना जरूरी है। स्वार्थ से पहले कर्तव्य को महत्व देने की भारतीय परंपरा आज भी प्रासंगिक है। डॉ. अदाणी ने योग का उदाहरण देते हुए कहा कि यह भारतीय ज्ञान परंपरा की वैश्विक स्वीकार्यता का बड़ा प्रतीक बन चुका है। योग शरीर और मन के बीच संतुलन स्थापित करने का संदेश देता है। इसी तरह मोटा अनाज यानी मिलेट्स भी भारतीय खानपान की पुरानी परंपरा का हिस्सा रहा है। आज दुनिया में इसे पोषण जलवायु अनुकूलता और खाद्य सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    डॉ. प्रीति अदाणी ने सतत विकास के लिए अदाणी समूह की निवेश प्रतिबद्धता का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि समूह ने ऊर्जा परिवर्तन से जुड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में 100 अरब डॉलर से अधिक निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है। इसका उद्देश्य स्वच्छ ऊर्जा के उत्पादन और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप ऊर्जा व्यवस्था को मजबूत करना है। उन्होंने गुजरात के खावड़ा में विकसित किए जा रहे नवीकरणीय ऊर्जा प्रोजेक्ट का विशेष रूप से जिक्र किया। यह परियोजना दुनिया का सबसे बड़ा रिन्यूएबल एनर्जी पार्क बनने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसकी प्रस्तावित क्षमता सौर और पवन ऊर्जा के माध्यम से 30 गीगावाट बिजली उत्पादन की है।

    उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और स्थिरता को केवल कंपनियों की वार्षिक रिपोर्ट तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। इसे वास्तविक कामकाज और परियोजनाओं के क्रियान्वयन में शामिल करना होगा। उनके मुताबिक किसी भी विकास परियोजना की सफलता केवल उसकी आर्थिक लागत या उत्पादन क्षमता से तय नहीं होती बल्कि यह भी देखना जरूरी है कि उससे समाज और पर्यावरण को कितना लाभ मिलता है।

    डॉ. अदाणी ने उद्योग जगत से दीर्घकालिक सोच अपनाने की अपील करते हुए कहा कि भारत के विकास के साथ सामाजिक उत्थान और पर्यावरणीय संतुलन भी जरूरी है। वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य तभी सार्थक होगा जब आर्थिक प्रगति का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि उद्योगों को ऐसी परियोजनाओं पर ध्यान देना होगा जो वर्तमान जरूरतों को पूरा करने के साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए भी स्थायी लाभ सुनिश्चित करें।

  • 17 सितंबर से BJP की 20 यात्राओं का आगाज: वड़नगर से काशी तक बनेगा सियासी सफर MP के 55 जिलों में पहुंचेगा अभियान

    17 सितंबर से BJP की 20 यात्राओं का आगाज: वड़नगर से काशी तक बनेगा सियासी सफर MP के 55 जिलों में पहुंचेगा अभियान


    भोपाल । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के मौके पर भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर भारत में बड़े जनसंपर्क अभियान की तैयारी शुरू कर दी है। 17 सितंबर से प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन के अवसर पर वड़नगर से वाराणसी और वाराणसी से वड़नगर के बीच कुल 20 यात्राएं निकाली जाएंगी। दोनों दिशाओं में 10-10 यात्राओं के लिए अलग अलग रूट तैयार किए जा रहे हैं ताकि इनके मार्ग आपस में न टकराएं। इस पूरे अभियान में मध्यप्रदेश को भी अहम केंद्र बनाया गया है। पार्टी ने प्रदेश के सभी 55 जिलों को इन यात्राओं से जोड़ने का लक्ष्य रखा है।

    बीजेपी की योजना के मुताबिक यह अभियान केवल यात्राओं और राजनीतिक संपर्क तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि जनभागीदारी सेवा गतिविधियों सरकारी योजनाओं के प्रचार और विकसित भारत 2047 के संकल्प को भी इससे जोड़ा जाएगा। गुजरात राजस्थान मध्यप्रदेश उत्तर प्रदेश छत्तीसगढ़ हरियाणा और दिल्ली से होकर गुजरने वाली इन यात्राओं में स्थानीय नागरिकों युवाओं महिलाओं विद्यार्थियों किसानों व्यापारियों और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को अलग अलग गतिविधियों में शामिल करने की तैयारी है। अब तक 13 रूट तय किए जा चुके हैं जबकि अन्य मार्गों को अंतिम रूप देने पर मंथन जारी है।

    मध्यप्रदेश में यात्राओं के संचालन और व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी अलग अलग नेताओं को सौंपी जा रही है। पार्टी की कोशिश है कि यात्रा के हर प्रमुख पड़ाव को स्थानीय स्तर पर जनभागीदारी का केंद्र बनाया जाए। यहां लोगों से उनके क्षेत्र के विकास को लेकर सुझाव लिए जाएंगे और सरकारी योजनाओं से जुड़े लोगों की वास्तविक कहानियों को सामने लाया जाएगा। 25 आइकॉन अभियान के तहत प्रत्येक पड़ाव से किसान शिक्षक महिला उद्यमी खिलाड़ी या किसी अन्य क्षेत्र में प्रेरणादायक काम करने वाले व्यक्ति का चयन किया जाएगा। इनमें से 25 श्रेष्ठ लोगों की वीडियो कहानियां तैयार कर नमो ऐप के जरिए लोगों तक पहुंचाने की योजना है।

    अभियान में चिट्ठी 2047 के नाम के जरिए नागरिकों से यह पूछा जाएगा कि वे वर्ष 2047 तक अपने क्षेत्र और देश को किस रूप में देखना चाहते हैं। इसी तरह मेरे लिए भारत की प्रगति नाम से लोगों की राय रिकॉर्ड की जाएगी। अलग अलग स्थानों से जुटाई गई इन आवाजों को वाराणसी में जोड़कर एक विशेष फिल्म तैयार करने का प्रस्ताव है। यात्रा से स्थानीय प्रभावशाली लोगों और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स को भी जोड़ा जाएगा।

    यात्रा के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों और देश के लिए बलिदान देने वाले स्थानीय वीरों से जुड़े गांवों और स्मारकों से मिट्टी एकत्र करने की भी योजना है। यह मिट्टी वाराणसी के मुख्य कार्यक्रम में अर्पित की जाएगी। कई प्रमुख पड़ावों पर स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे जहां सामान्य जांच ब्लड प्रेशर और शुगर जांच के साथ चिकित्सा परामर्श उपलब्ध कराने की तैयारी है। सरकारी योजनाओं की जानकारी और आवेदन में मदद के लिए योजना पंजीकरण सहायता डेस्क भी लगाए जाएंगे।

    बीजेपी इस अभियान के जरिए वर्ष 2001 से 2026 तक हुए बदलावों को भी लोगों के सामने रखने की तैयारी कर रही है। पहले और अब प्रदर्शनी के जरिए सड़क स्कूल घर बिजली और दूसरी सुविधाओं में आए बदलावों को तस्वीरों और दस्तावेजों के माध्यम से दिखाया जाएगा। विकास की यात्रा नाम से नुक्कड़ नाटक भी आयोजित होंगे जिनमें एक परिवार की कहानी के जरिए विकास और सरकारी योजनाओं के असर को स्थानीय भाषा में समझाने की कोशिश की जाएगी।

    मोदी के जन्मदिन से डिजिटल अभियान पर भी खास जोर रहेगा। भाजपा इन्फ्लुएंसर्स और रील्स के जरिए खासकर युवा पीढ़ी तक पहुंचने की रणनीति बना रही है। प्रत्येक शक्ति केंद्र को कम से कम 10 रील तैयार करने का लक्ष्य दिया गया है। इन वीडियो में सरकारी योजनाओं से लाभ पाने वाले वास्तविक लोगों की कहानियां दिखाई जाएंगी। वीडियो में लाभार्थी का नाम स्थान जिला और संबंधित योजना के साथ उसके जीवन में आए बदलाव को सामने लाने की योजना है।

    कहानी बदलाव की अभियान के तहत करीब 25 लाख नागरिकों की वास्तविक कहानियां जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें से लगभग 25 हजार कहानियों को शॉर्टलिस्ट कर करीब 250 प्रभावशाली कहानियों को प्रोफेशनल तरीके से तैयार किया जाएगा। इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर इनका व्यापक प्रचार किया जाएगा।

    17 सितंबर की शाम आशीर्वाद का दीया अभियान के तहत बूथ स्तर पर लोगों के घरों में दीप जलाने की अपील की जाएगी। वहीं सेवा मेरा योगदान अभियान के तहत प्रत्येक नागरिक को कम से कम 25 मिनट समाज सेवा के लिए देने के लिए प्रेरित किया जाएगा। सेवा कार्य का फोटो या वीडियो बनाकर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर साझा करने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।

    गांवों में नमो सेवा गाथा के जरिए नुक्कड़ नाटक होंगे। आंगनवाड़ी केंद्रों पर आंगन का उत्सव आयोजित कर माताओं और कार्यकर्ताओं का सम्मान किया जाएगा। सेवा ज्योति यात्रा भी अलग अलग जिलों और गांवों से निकलेगी। इसके अलावा वड़नगर से काशी तक जल जन और सेवा संकल्प यात्रा में पवित्र नदियों का जल लेकर यात्रियों के पहुंचने की योजना है।

    अभियान में सेवा सेतु के जरिए विधानसभा स्तर पर कैंप लगाने की भी तैयारी है जहां केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ एक ही स्थान पर दिलाने की कोशिश होगी। नदी घाटों की सफाई और सौंदर्यीकरण से लेकर ह्यूमन रंगोली और भारत मंडला जैसे कार्यक्रम भी प्रस्तावित हैं। युवाओं के लिए राष्ट्रीय इनोवेशन चैलेंज आयोजित किया जाएगा जिसमें विद्यार्थी स्टार्टअप और इनोवेटर्स अपने विचार और तकनीकी समाधान प्रस्तुत करेंगे।

    इस पूरे अभियान का बड़ा समापन 17 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित जनसेवक महाकुंभ पंचायत से पार्लियामेंट के रूप में होगा। इसमें करीब 1.25 लाख जनप्रतिनिधियों के शामिल होने का अनुमान है। इस तरह बीजेपी का यह अभियान एक साथ जनसंपर्क सेवा सरकारी योजनाओं की पहुंच सांस्कृतिक जुड़ाव और डिजिटल प्रचार को जोड़ने की कोशिश करता दिखाई दे रहा है। पार्टी की रणनीति साफ है कि मोदी के जन्मदिन से शुरू होने वाला यह अभियान केवल जमीन पर होने वाले कार्यक्रमों तक सीमित न रहे बल्कि मोबाइल स्क्रीन और सोशल मीडिया के जरिए भी व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचे।

  • बंदरगाहों पर घटेगी देरी, कारोबार को मिलेगी तेजी: नए कस्टम और बैंकिंग सुधारों से विकसित भारत के लक्ष्य को मजबूती

    बंदरगाहों पर घटेगी देरी, कारोबार को मिलेगी तेजी: नए कस्टम और बैंकिंग सुधारों से विकसित भारत के लक्ष्य को मजबूती


    नई दिल्ली । भारत को विकसित भारत 2047 के लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार अब आर्थिक सुधारों के अगले चरण की तैयारी में जुट गई है। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था में बदलाव के बाद सरकार की नजर अब सीमा शुल्क प्रणाली को आधुनिक बनाने और बैंकिंग क्षेत्र को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप मजबूत करने पर है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में आयात प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए नई तकनीक और रिस्क आधारित जांच प्रणाली लागू की जा सकती है। साथ ही विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में बैंकिंग सेक्टर की भूमिका तय करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति भी बनाई गई है। सरकार का मानना है कि कारोबार की राह आसान करने और वित्तीय व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाने से भारत की आर्थिक रफ्तार को नई मजबूती मिलेगी।

    जी20 वित्त मंत्रियों की बैठक के दौरान एक विशेष बातचीत में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों के क्षेत्र में पहले ही कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं लेकिन सीमा शुल्क व्यवस्था में अभी और बदलाव की जरूरत है। सरकार का फोकस भारतीय बंदरगाहों से आयात होने वाले सामान की आवाजाही को तेज और आसान बनाने पर है ताकि कारोबारियों को अनावश्यक देरी का सामना न करना पड़े और देश के प्रमुख बंदरगाहों पर भीड़ कम हो सके।

    सरकार जिस नई व्यवस्था पर विचार कर रही है उसमें आधुनिक स्कैनर और रिस्क आधारित आयात स्क्रीनिंग को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके तहत ज्यादा जोखिम वाले आयात की गहन जांच की जाएगी जबकि कम जोखिम वाले कंसाइनमेंट को तेजी से मंजूरी मिल सकेगी। इस व्यवस्था से सीमा शुल्क अधिकारियों को संदिग्ध और संवेदनशील मामलों पर अधिक ध्यान देने में मदद मिलेगी जबकि सामान्य व्यापारिक गतिविधियां बिना अनावश्यक रुकावट के आगे बढ़ सकेंगी। इसका सीधा फायदा आयातकों के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन से जुड़े क्षेत्रों को भी मिल सकता है।

    सरकार का यह कदम कारोबार करने की प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तेज कस्टम क्लियरेंस से बंदरगाहों पर माल के लंबे समय तक रुके रहने की समस्या कम हो सकती है। इससे व्यापार की लागत घटने और कंपनियों की कार्यक्षमता बढ़ने की संभावना है। हालांकि वित्त मंत्री ने स्कैनर आधारित प्रणाली और ऑटोमैटिक मंजूरी व्यवस्था को लागू करने के लिए कोई निश्चित समय-सीमा नहीं बताई है लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया है कि सीमा शुल्क क्षेत्र में व्यापक सुधारों पर काम जारी है।

    दूसरी ओर सरकार बैंकिंग सेक्टर को भी विकसित भारत 2047 की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रही है। इसके लिए एक उच्चस्तरीय समिति बनाई गई है जो भविष्य की भारतीय अर्थव्यवस्था की जरूरतों के हिसाब से बैंकिंग व्यवस्था की भूमिका और दिशा पर विचार करेगी। यह समिति अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी जिसके आधार पर बैंकिंग क्षेत्र में आगे की रणनीति तय की जा सकती है। मजबूत बैंकिंग व्यवस्था को निवेश बढ़ाने, उद्योगों को वित्त उपलब्ध कराने और देश की विकास यात्रा को गति देने के लिए बेहद जरूरी माना जा रहा है।

    वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि केंद्र सरकार राज्य सरकारों के साथ मिलकर नियमों के अनुपालन का बोझ कम करने पर लगातार काम कर रही है। अब तक एक हजार से अधिक पुराने कानून हटाए जा चुके हैं और लगभग 40 हजार नियमों को सरल बनाया गया है। सरकार का उद्देश्य नागरिकों और कंपनियों को जटिल प्रक्रियाओं से राहत देना और निवेश के लिए अधिक अनुकूल माहौल तैयार करना है।

    ये प्रस्तावित सुधार ऐसे समय में सामने आए हैं जब भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। मैन्युफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्रों में मजबूत प्रदर्शन ने आर्थिक गतिविधियों को सहारा दिया है। ऐसे में सरकार का नया सुधार एजेंडा स्पष्ट संकेत देता है कि तेज कारोबार आधुनिक सीमा शुल्क प्रणाली मजबूत बैंकिंग व्यवस्था और सरल नियमों के जरिए भारत को विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।

  • 2047 का विकसित भारत अब दूर नहीं! सिर्फ 20 साल बाकी, वित्त मंत्री सीतारमण बोलीं- सुधारों को चाहिए और ज्यादा समर्थन

    2047 का विकसित भारत अब दूर नहीं! सिर्फ 20 साल बाकी, वित्त मंत्री सीतारमण बोलीं- सुधारों को चाहिए और ज्यादा समर्थन


    नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को लेकर बड़ा संदेश देते हुए कहा है कि यह लक्ष्य अब मुश्किल से 20 वर्ष दूर रह गया है। ऐसे में भारत को आर्थिक और संरचनात्मक सुधारों की रफ्तार को और तेज करने के लिए व्यापक समर्थन की जरूरत होगी। अमेरिका के शिकागो में भारतीय प्रवासियों को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि देश को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिभाशाली और व्यापक अनुभव रखने वाले लोगों के साथ ऐसे लोगों का सहयोग भी जरूरी है जो नई सोच और नए विचारों के साथ भारत की विकास यात्रा को मजबूती दे सकें। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया में पूंजी को बेहद महत्वपूर्ण बताया और कहा कि किसी देश की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त पूंजी आवश्यक होती है।

    सीतारमण ने भारत की आर्थिक नीतियों और राजकोषीय अनुशासन का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने वर्ष 2030 तक कर्ज को सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के 50 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य तय किया है। सरकार इसी दिशा में लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि कई विकसित अर्थव्यवस्थाओं में कर्ज का स्तर उनकी जीडीपी के 200 प्रतिशत से भी अधिक है लेकिन भारत ने अपने लिए राजकोषीय अनुशासन का स्पष्ट रास्ता चुना है। वित्त मंत्री के अनुसार राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने के लिए तय किए गए लक्ष्यों की दिशा में भी सरकार ने निर्धारित प्रगति हासिल की है।

    वित्त मंत्री ने भारत की आर्थिक स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि देश की क्रेडिट रेटिंग में सुधार हो रहा है और यह सुधार किसी नियम को दरकिनार करके हासिल नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सामाजिक कल्याण के लिए जरूरी संसाधनों को रोककर भी आर्थिक मजबूती हासिल नहीं की जा रही है बल्कि अर्थव्यवस्था का उचित और संतुलित प्रबंधन इसकी मुख्य वजह है। उनके मुताबिक भारत ने आर्थिक विकास के साथ सामाजिक जरूरतों के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश की है।

    सीतारमण ने वैश्विक आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हाल के दौर में कच्चे तेल एलपीजी और उर्वरक जैसी महत्वपूर्ण वस्तुओं की वैश्विक आपूर्ति में मुश्किलें सामने आईं। इन वस्तुओं को भारत तक पहुंचाने वाले जहाजों को पर्याप्त बीमा कवर मिलने में भी दिक्कतें आईं और जोखिम प्रीमियम काफी बढ़ गया। ऐसी परिस्थितियों में आयात और आपूर्ति व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता था।

    उन्होंने बताया कि सरकार ने बजट में एक घोषणा के जरिए ऐसा फंड उपलब्ध कराया जिससे जोखिम के कारण शिपिंग कंपनियों को चुकाने पड़ने वाले अतिरिक्त प्रीमियम में सहायता दी जा सके। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि वैश्विक संकट का सीधा असर भारतीय किसानों परिवारों और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र पर न पड़े। वित्त मंत्री के अनुसार इस कदम से आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिली और भारतीय अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से बचाने की कोशिश की गई।

    उर्वरक की उपलब्धता का उदाहरण देते हुए सीतारमण ने कहा कि वैश्विक स्तर पर आपूर्ति में कमी के बावजूद भारत में उर्वरक की कमी महसूस नहीं होने दी गई। सरकार ने बाजारों को लगातार यह जानकारी उपलब्ध कराई कि देश को कितनी मात्रा में उर्वरक की आवश्यकता होगी। इससे आपूर्ति की योजना बनाने और जरूरत के मुताबिक संसाधन जुटाने में मदद मिली।

    वित्त मंत्री ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच कई देशों की आर्थिक गणनाएं प्रभावित हुईं लेकिन भारत ने अपनी सीमाओं के बावजूद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपने नागरिकों को सुरक्षित रखने की कोशिश की। उनके बयान का व्यापक संदेश यही रहा कि विकसित भारत 2047 का लक्ष्य हासिल करने के लिए आने वाले वर्षों में आर्थिक अनुशासन निवेश सुधार नवाचार और वैश्विक भारतीय समुदाय के सहयोग को एक साथ आगे बढ़ाना होगा। अब जब लक्ष्य लगभग दो दशक की दूरी पर है तब सुधारों की गति और उनके प्रभाव को बढ़ाना सरकार की बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।

  • विकसित भारत 2047 की ओर बड़ा कदम, भारत-नीदरलैंड ने रणनीतिक साझेदारी को दी मंजूरी

    विकसित भारत 2047 की ओर बड़ा कदम, भारत-नीदरलैंड ने रणनीतिक साझेदारी को दी मंजूरी

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नीदरलैंड दौरे के दौरान भारत और नीदरलैंड के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई मजबूती मिली है। दोनों देशों ने आपसी सहयोग को आगे बढ़ाते हुए संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने पर सहमति जताई है। इस फैसले के बाद दोनों देशों के बीच आर्थिक, तकनीकी और विकास से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।

    विदेश मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन के बीच हुई उच्चस्तरीय बातचीत में कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान भारत के ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को भी साझा किया गया, जिसमें देश को दीर्घकालिक विकास, तकनीकी आत्मनिर्भरता और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाने की रूपरेखा शामिल है।

    बैठक में दोनों नेताओं ने माना कि भारत और नीदरलैंड साझा मूल्यों, विश्वास और पारस्परिक हितों के आधार पर पहले से ही मजबूत संबंध साझा करते हैं। अब इस साझेदारी को और व्यापक बनाने के लिए एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया गया है, जिसमें जल प्रबंधन, रक्षा सहयोग, व्यापार, निवेश और नई तकनीकों जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है।

    जल प्रबंधन के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच पहले से ही मजबूत सहयोग मौजूद है, जिसे अब और आगे बढ़ाने पर सहमति बनी है। नीदरलैंड की विशेषज्ञता और भारत की विशाल आवश्यकताओं को देखते हुए इस क्षेत्र में नई परियोजनाओं और तकनीकी साझेदारी की संभावनाएं बढ़ गई हैं। इसी तरह रक्षा सहयोग और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में संयुक्त प्रयासों पर भी चर्चा की गई।

    आर्थिक सहयोग को दोनों देशों के रिश्तों का महत्वपूर्ण आधार बताया गया है। व्यापार और निवेश के क्षेत्र में नए अवसरों को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजनाओं पर विचार किया गया। सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रीन हाइड्रोजन, रोबोटिक्स और स्टार्टअप इकोसिस्टम जैसे क्षेत्रों में सहयोग को भविष्य की दिशा के रूप में देखा जा रहा है।

    इस दौरान एक महत्वपूर्ण समझौते का भी उल्लेख किया गया, जिसमें टाटा समूह और एएसएमएल के बीच सेमीकंडक्टर क्षेत्र में साझेदारी शामिल है। इस समझौते को भारत में हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग और रोजगार सृजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे भारत में उन्नत तकनीकी इकोसिस्टम को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

    इसके साथ ही दोनों देशों ने पोर्ट कनेक्टिविटी, सप्लाई चेन सुधार, कृषि क्षेत्र और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई है। भारत के बंदरगाहों को नीदरलैंड के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क से जोड़ने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई, जिससे वैश्विक व्यापार को नई गति मिल सकती है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर सांस्कृतिक सहयोग और शिक्षा के क्षेत्र में भी साझेदारी बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत और नीदरलैंड के संबंध केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और ज्ञान आधारित भी हैं, जिन्हें और गहराई देने की आवश्यकता है।

    इस दौरे के दौरान एक और महत्वपूर्ण पहल के तहत भारत को ऐतिहासिक कलाकृतियों की वापसी भी हुई, जिसे दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों की मजबूती का प्रतीक माना जा रहा है।