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  • बंदरगाहों पर घटेगी देरी, कारोबार को मिलेगी तेजी: नए कस्टम और बैंकिंग सुधारों से विकसित भारत के लक्ष्य को मजबूती

    बंदरगाहों पर घटेगी देरी, कारोबार को मिलेगी तेजी: नए कस्टम और बैंकिंग सुधारों से विकसित भारत के लक्ष्य को मजबूती


    नई दिल्ली । भारत को विकसित भारत 2047 के लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार अब आर्थिक सुधारों के अगले चरण की तैयारी में जुट गई है। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था में बदलाव के बाद सरकार की नजर अब सीमा शुल्क प्रणाली को आधुनिक बनाने और बैंकिंग क्षेत्र को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप मजबूत करने पर है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में आयात प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए नई तकनीक और रिस्क आधारित जांच प्रणाली लागू की जा सकती है। साथ ही विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में बैंकिंग सेक्टर की भूमिका तय करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति भी बनाई गई है। सरकार का मानना है कि कारोबार की राह आसान करने और वित्तीय व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाने से भारत की आर्थिक रफ्तार को नई मजबूती मिलेगी।

    जी20 वित्त मंत्रियों की बैठक के दौरान एक विशेष बातचीत में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार ने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों के क्षेत्र में पहले ही कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं लेकिन सीमा शुल्क व्यवस्था में अभी और बदलाव की जरूरत है। सरकार का फोकस भारतीय बंदरगाहों से आयात होने वाले सामान की आवाजाही को तेज और आसान बनाने पर है ताकि कारोबारियों को अनावश्यक देरी का सामना न करना पड़े और देश के प्रमुख बंदरगाहों पर भीड़ कम हो सके।

    सरकार जिस नई व्यवस्था पर विचार कर रही है उसमें आधुनिक स्कैनर और रिस्क आधारित आयात स्क्रीनिंग को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके तहत ज्यादा जोखिम वाले आयात की गहन जांच की जाएगी जबकि कम जोखिम वाले कंसाइनमेंट को तेजी से मंजूरी मिल सकेगी। इस व्यवस्था से सीमा शुल्क अधिकारियों को संदिग्ध और संवेदनशील मामलों पर अधिक ध्यान देने में मदद मिलेगी जबकि सामान्य व्यापारिक गतिविधियां बिना अनावश्यक रुकावट के आगे बढ़ सकेंगी। इसका सीधा फायदा आयातकों के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन से जुड़े क्षेत्रों को भी मिल सकता है।

    सरकार का यह कदम कारोबार करने की प्रक्रिया को आसान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तेज कस्टम क्लियरेंस से बंदरगाहों पर माल के लंबे समय तक रुके रहने की समस्या कम हो सकती है। इससे व्यापार की लागत घटने और कंपनियों की कार्यक्षमता बढ़ने की संभावना है। हालांकि वित्त मंत्री ने स्कैनर आधारित प्रणाली और ऑटोमैटिक मंजूरी व्यवस्था को लागू करने के लिए कोई निश्चित समय-सीमा नहीं बताई है लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया है कि सीमा शुल्क क्षेत्र में व्यापक सुधारों पर काम जारी है।

    दूसरी ओर सरकार बैंकिंग सेक्टर को भी विकसित भारत 2047 की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रही है। इसके लिए एक उच्चस्तरीय समिति बनाई गई है जो भविष्य की भारतीय अर्थव्यवस्था की जरूरतों के हिसाब से बैंकिंग व्यवस्था की भूमिका और दिशा पर विचार करेगी। यह समिति अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी जिसके आधार पर बैंकिंग क्षेत्र में आगे की रणनीति तय की जा सकती है। मजबूत बैंकिंग व्यवस्था को निवेश बढ़ाने, उद्योगों को वित्त उपलब्ध कराने और देश की विकास यात्रा को गति देने के लिए बेहद जरूरी माना जा रहा है।

    वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि केंद्र सरकार राज्य सरकारों के साथ मिलकर नियमों के अनुपालन का बोझ कम करने पर लगातार काम कर रही है। अब तक एक हजार से अधिक पुराने कानून हटाए जा चुके हैं और लगभग 40 हजार नियमों को सरल बनाया गया है। सरकार का उद्देश्य नागरिकों और कंपनियों को जटिल प्रक्रियाओं से राहत देना और निवेश के लिए अधिक अनुकूल माहौल तैयार करना है।

    ये प्रस्तावित सुधार ऐसे समय में सामने आए हैं जब भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। मैन्युफैक्चरिंग और सेवा क्षेत्रों में मजबूत प्रदर्शन ने आर्थिक गतिविधियों को सहारा दिया है। ऐसे में सरकार का नया सुधार एजेंडा स्पष्ट संकेत देता है कि तेज कारोबार आधुनिक सीमा शुल्क प्रणाली मजबूत बैंकिंग व्यवस्था और सरल नियमों के जरिए भारत को विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।

  • 2047 का विकसित भारत अब दूर नहीं! सिर्फ 20 साल बाकी, वित्त मंत्री सीतारमण बोलीं- सुधारों को चाहिए और ज्यादा समर्थन

    2047 का विकसित भारत अब दूर नहीं! सिर्फ 20 साल बाकी, वित्त मंत्री सीतारमण बोलीं- सुधारों को चाहिए और ज्यादा समर्थन


    नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को लेकर बड़ा संदेश देते हुए कहा है कि यह लक्ष्य अब मुश्किल से 20 वर्ष दूर रह गया है। ऐसे में भारत को आर्थिक और संरचनात्मक सुधारों की रफ्तार को और तेज करने के लिए व्यापक समर्थन की जरूरत होगी। अमेरिका के शिकागो में भारतीय प्रवासियों को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि देश को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिभाशाली और व्यापक अनुभव रखने वाले लोगों के साथ ऐसे लोगों का सहयोग भी जरूरी है जो नई सोच और नए विचारों के साथ भारत की विकास यात्रा को मजबूती दे सकें। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया में पूंजी को बेहद महत्वपूर्ण बताया और कहा कि किसी देश की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त पूंजी आवश्यक होती है।

    सीतारमण ने भारत की आर्थिक नीतियों और राजकोषीय अनुशासन का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने वर्ष 2030 तक कर्ज को सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के 50 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य तय किया है। सरकार इसी दिशा में लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि कई विकसित अर्थव्यवस्थाओं में कर्ज का स्तर उनकी जीडीपी के 200 प्रतिशत से भी अधिक है लेकिन भारत ने अपने लिए राजकोषीय अनुशासन का स्पष्ट रास्ता चुना है। वित्त मंत्री के अनुसार राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने के लिए तय किए गए लक्ष्यों की दिशा में भी सरकार ने निर्धारित प्रगति हासिल की है।

    वित्त मंत्री ने भारत की आर्थिक स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि देश की क्रेडिट रेटिंग में सुधार हो रहा है और यह सुधार किसी नियम को दरकिनार करके हासिल नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सामाजिक कल्याण के लिए जरूरी संसाधनों को रोककर भी आर्थिक मजबूती हासिल नहीं की जा रही है बल्कि अर्थव्यवस्था का उचित और संतुलित प्रबंधन इसकी मुख्य वजह है। उनके मुताबिक भारत ने आर्थिक विकास के साथ सामाजिक जरूरतों के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश की है।

    सीतारमण ने वैश्विक आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हाल के दौर में कच्चे तेल एलपीजी और उर्वरक जैसी महत्वपूर्ण वस्तुओं की वैश्विक आपूर्ति में मुश्किलें सामने आईं। इन वस्तुओं को भारत तक पहुंचाने वाले जहाजों को पर्याप्त बीमा कवर मिलने में भी दिक्कतें आईं और जोखिम प्रीमियम काफी बढ़ गया। ऐसी परिस्थितियों में आयात और आपूर्ति व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता था।

    उन्होंने बताया कि सरकार ने बजट में एक घोषणा के जरिए ऐसा फंड उपलब्ध कराया जिससे जोखिम के कारण शिपिंग कंपनियों को चुकाने पड़ने वाले अतिरिक्त प्रीमियम में सहायता दी जा सके। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि वैश्विक संकट का सीधा असर भारतीय किसानों परिवारों और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र पर न पड़े। वित्त मंत्री के अनुसार इस कदम से आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिली और भारतीय अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से बचाने की कोशिश की गई।

    उर्वरक की उपलब्धता का उदाहरण देते हुए सीतारमण ने कहा कि वैश्विक स्तर पर आपूर्ति में कमी के बावजूद भारत में उर्वरक की कमी महसूस नहीं होने दी गई। सरकार ने बाजारों को लगातार यह जानकारी उपलब्ध कराई कि देश को कितनी मात्रा में उर्वरक की आवश्यकता होगी। इससे आपूर्ति की योजना बनाने और जरूरत के मुताबिक संसाधन जुटाने में मदद मिली।

    वित्त मंत्री ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच कई देशों की आर्थिक गणनाएं प्रभावित हुईं लेकिन भारत ने अपनी सीमाओं के बावजूद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपने नागरिकों को सुरक्षित रखने की कोशिश की। उनके बयान का व्यापक संदेश यही रहा कि विकसित भारत 2047 का लक्ष्य हासिल करने के लिए आने वाले वर्षों में आर्थिक अनुशासन निवेश सुधार नवाचार और वैश्विक भारतीय समुदाय के सहयोग को एक साथ आगे बढ़ाना होगा। अब जब लक्ष्य लगभग दो दशक की दूरी पर है तब सुधारों की गति और उनके प्रभाव को बढ़ाना सरकार की बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।

  • विकसित भारत 2047 की ओर बड़ा कदम, भारत-नीदरलैंड ने रणनीतिक साझेदारी को दी मंजूरी

    विकसित भारत 2047 की ओर बड़ा कदम, भारत-नीदरलैंड ने रणनीतिक साझेदारी को दी मंजूरी

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नीदरलैंड दौरे के दौरान भारत और नीदरलैंड के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई मजबूती मिली है। दोनों देशों ने आपसी सहयोग को आगे बढ़ाते हुए संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाने पर सहमति जताई है। इस फैसले के बाद दोनों देशों के बीच आर्थिक, तकनीकी और विकास से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसर खुलने की उम्मीद है।

    विदेश मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन के बीच हुई उच्चस्तरीय बातचीत में कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान भारत के ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को भी साझा किया गया, जिसमें देश को दीर्घकालिक विकास, तकनीकी आत्मनिर्भरता और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ाने की रूपरेखा शामिल है।

    बैठक में दोनों नेताओं ने माना कि भारत और नीदरलैंड साझा मूल्यों, विश्वास और पारस्परिक हितों के आधार पर पहले से ही मजबूत संबंध साझा करते हैं। अब इस साझेदारी को और व्यापक बनाने के लिए एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया गया है, जिसमें जल प्रबंधन, रक्षा सहयोग, व्यापार, निवेश और नई तकनीकों जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है।

    जल प्रबंधन के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच पहले से ही मजबूत सहयोग मौजूद है, जिसे अब और आगे बढ़ाने पर सहमति बनी है। नीदरलैंड की विशेषज्ञता और भारत की विशाल आवश्यकताओं को देखते हुए इस क्षेत्र में नई परियोजनाओं और तकनीकी साझेदारी की संभावनाएं बढ़ गई हैं। इसी तरह रक्षा सहयोग और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में संयुक्त प्रयासों पर भी चर्चा की गई।

    आर्थिक सहयोग को दोनों देशों के रिश्तों का महत्वपूर्ण आधार बताया गया है। व्यापार और निवेश के क्षेत्र में नए अवसरों को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजनाओं पर विचार किया गया। सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रीन हाइड्रोजन, रोबोटिक्स और स्टार्टअप इकोसिस्टम जैसे क्षेत्रों में सहयोग को भविष्य की दिशा के रूप में देखा जा रहा है।

    इस दौरान एक महत्वपूर्ण समझौते का भी उल्लेख किया गया, जिसमें टाटा समूह और एएसएमएल के बीच सेमीकंडक्टर क्षेत्र में साझेदारी शामिल है। इस समझौते को भारत में हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग और रोजगार सृजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे भारत में उन्नत तकनीकी इकोसिस्टम को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

    इसके साथ ही दोनों देशों ने पोर्ट कनेक्टिविटी, सप्लाई चेन सुधार, कृषि क्षेत्र और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई है। भारत के बंदरगाहों को नीदरलैंड के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क से जोड़ने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई, जिससे वैश्विक व्यापार को नई गति मिल सकती है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर सांस्कृतिक सहयोग और शिक्षा के क्षेत्र में भी साझेदारी बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत और नीदरलैंड के संबंध केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और ज्ञान आधारित भी हैं, जिन्हें और गहराई देने की आवश्यकता है।

    इस दौरे के दौरान एक और महत्वपूर्ण पहल के तहत भारत को ऐतिहासिक कलाकृतियों की वापसी भी हुई, जिसे दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों की मजबूती का प्रतीक माना जा रहा है।