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  • धार में सड़क हादसे के बाद बवाल: बोलेरो की टक्कर से युवक की मौत, ग्रामीणों ने किया थाने का घेराव

    धार में सड़क हादसे के बाद बवाल: बोलेरो की टक्कर से युवक की मौत, ग्रामीणों ने किया थाने का घेराव


    धार। धार जिले के राजगढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम छड़ावद में सोमवार देर रात हुए सड़क हादसे के बाद तनावपूर्ण स्थिति बन गई। यहां 28 वर्षीय बाइक सवार सुनील पिता मोहन की बोलेरो वाहन की टक्कर से मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद आक्रोशित परिजन और ग्रामीण शव लेकर राजगढ़ थाने पहुंचे और जमकर विरोध प्रदर्शन किया।

    ग्रामीणों ने थाने के बाहर शव रखकर लंबे समय तक हंगामा किया और पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। बाद में पुलिस अधिकारियों की समझाइश के बाद स्थिति को नियंत्रित किया जा सका।

    काम से लौटते समय हुआ हादसा, मुरम के ढेर से बचने की कोशिश में टक्कर
    राजगढ़ थाना प्रभारी समीर पाटीदार के अनुसार, मृतक सुनील राजगढ़ में वेल्डिंग का काम करता था और सोमवार रात काम खत्म कर बाइक से अपने गांव लौट रहा था। छड़ावद मार्ग पर सड़क किनारे केबल बिछाने का कार्य चल रहा था, जहां मुरम का ढेर पड़ा था। बताया गया कि बाइक सवार सुनील मुरम के ढेर से बचने की कोशिश कर रहा था, तभी सामने से आ रही तेज रफ्तार बोलेरो वाहन ने उसे जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि युवक की मौके पर ही मौत हो गई।

    पुलिस कार्रवाई पर सवाल, ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप
    घटना के बाद ग्रामीणों ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि हादसे के दौरान पुलिस मौके पर मौजूद थी, लेकिन गंभीर घटना को नजरअंदाज कर वहां से चली गई। इस बात को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी गई। वहीं पुलिस का कहना है कि वे इनामी बदमाश की सूचना पर मौके पर पहुंचे थे, और प्रारंभिक जांच में यह पाया गया कि हादसा उससे पहले ही हो चुका था।

    इनामी बदमाश की सूचना पर पहुंची पुलिस, गलत पहचान का मामला
    घटना स्थल पर उस समय देवकृष्ण पुरोहित हत्याकांड के इनामी आरोपी सुरेंद्र भाटी की सूचना पर पुलिस कार्रवाई कर रही थी। इसी दौरान एक युवक को पकड़ लिया गया, लेकिन ग्रामीणों ने उसे सुरेंद्र भाटी नहीं बल्कि रुस्तम बताया। बाद में उसने भी अपना नाम रुस्तम बताया। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने इस भ्रम के चलते सड़क हादसे की ओर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया।

    बोलेरो चालक के खिलाफ मामला दर्ज, सीसीटीवी से जांच जारी
    थाना प्रभारी समीर पाटीदार ने बताया कि बोलेरो वाहन चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर उसकी तलाश की जा रही है। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और दोषी पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • शाजापुर कलेक्ट्रेट में ग्रामीणों का प्रदर्शन: शासकीय भूमि पर कब्जे के आरोप, कलेक्टर के आश्वासन के बाद मामला शांत

    शाजापुर कलेक्ट्रेट में ग्रामीणों का प्रदर्शन: शासकीय भूमि पर कब्जे के आरोप, कलेक्टर के आश्वासन के बाद मामला शांत


    शाजापुर। शाजापुर कलेक्टर कार्यालय में मंगलवार को जनसुनवाई के दौरान पोलायखुर्द गांव के ग्रामीणों ने शासकीय भूमि पर कथित कब्जे के मामले को लेकर जमकर प्रदर्शन किया। करीब दो घंटे तक उनकी शिकायत पर सुनवाई नहीं होने से नाराज ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट परिसर में हंगामा शुरू कर दिया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।

    स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई जब प्रदर्शनकारी कलेक्टर की वाहन पार्किंग के पास पहुंच गए और वहीं धरने पर बैठकर विरोध जताने लगे। ग्रामीणों ने कलेक्टर के खिलाफ भी नारे लगाए, जिससे परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    पुलिस और प्रशासन ने संभाली स्थिति
    घटना की सूचना मिलते ही भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। कलेक्टर उस समय जनसुनवाई कक्ष में मौजूद थीं। सुंदरसी थाना प्रभारी मनीष शर्मा ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को समझाइश दी और स्थिति को नियंत्रित किया। लंबी समझाइश के बाद ग्रामीणों ने शांत रुख अपनाया और अपने पांच प्रतिनिधियों को कलेक्टर से बातचीत के लिए भेजा गया।

    कलेक्टर के आश्वासन के बाद समाप्त हुआ प्रदर्शन
    प्रतिनिधिमंडल की कलेक्टर से मुलाकात के दौरान उन्हें मामले की जांच और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया गया। आश्वासन मिलने के बाद ग्रामीणों ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया और स्थिति सामान्य हो गई।

    शासकीय भूमि पर कब्जे और फर्जी नामांतरण का आरोप
    ग्रामीणों ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि ग्राम पोलायखुर्द स्थित शासकीय भूमि सर्वे क्रमांक 1396 (रकबा 2.045 हेक्टेयर) पर कुछ लोगों ने राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी नामांतरण कर लिया है।

    ग्रामीणों का कहना है कि उक्त भूमि पर गांव का प्राचीन मंदिर और बच्चों का श्मशान स्थल स्थित है, जिससे यह जमीन सामाजिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, ग्राम पंचायत द्वारा अनुसूचित जाति समाज के लिए मांगलिक भवन निर्माण का प्रस्ताव भी पारित किया जा चुका है।

    जातिसूचक गाली और धमकी देने का भी आरोप
    प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि विरोध करने पर संबंधित लोगों द्वारा उन्हें जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया गया और जान से मारने की धमकी भी दी गई। ग्रामीणों ने मांग की है कि फर्जी नामांतरण को तत्काल निरस्त किया जाए और दोषियों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना और अवैध कब्जे का मामला दर्ज किया जाए।

  • अवैध खनन बना मौत का कारण पत्थर लदे ट्रैक्टर ने ली युवक की जान गांव में दहशत

    अवैध खनन बना मौत का कारण पत्थर लदे ट्रैक्टर ने ली युवक की जान गांव में दहशत


    मऊगंज । मध्यप्रदेश के मऊगंज जिले के हनुमना क्षेत्र के अंतर्गत हाटा चौकी के ग्राम लोढ़ी में अवैध उत्खनन का काला कारोबार एक बार फिर जानलेवा साबित हुआ है। लगातार जारी अवैध खनन गतिविधियों के बीच हुए इस दर्दनाक हादसे ने पूरे गांव को दहशत और आक्रोश में डाल दिया है। पत्थर से लदे तेज रफ्तार ट्रैक्टर की चपेट में आने से एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई जिससे क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया है।

    मृतक की पहचान राजभान साकेत के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि हादसे के समय ट्रैक्टर में भारी मात्रा में पत्थर लोड था और वह तेज गति से गुजर रहा था। इसी दौरान युवक ट्रैक्टर के पहिए की चपेट में आ गया और गंभीर चोट लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद मौके पर चीख पुकार मच गई और ग्रामीण बड़ी संख्या में एकत्रित हो गए।

    हादसे की सूचना मिलते ही हाटा चौकी पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रण में लिया। बाद में थाना प्रभारी अनिल काकड़े भी पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। यह घटना लोढ़ी गांव में ट्रांसफार्मर प्लांट के पास पप्पू सिंह की मड़ई के सामने हुई बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार यह ट्रैक्टर राजेंद्र बहादुर सिंह उर्फ पप्पू से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है।

    ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से अवैध पत्थर खनन का बड़ा नेटवर्क सक्रिय है। लगातार शिकायतों और रिपोर्ट के बावजूद इस पर सख्त कार्रवाई नहीं होने से खनन माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। लोगों का कहना है कि भारी वाहनों की तेज आवाजाही और बिना नियमों के खनन कार्य से आए दिन दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।

    घटना के बाद मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने पुलिस पर भी दबाव बनाए जाने की बात कही है जिससे स्थिति और संवेदनशील हो गई है। हालांकि पुलिस प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। यह घटना एक बार फिर इस बात को उजागर करती है कि अवैध खनन न केवल पर्यावरण के लिए खतरा है बल्कि स्थानीय लोगों की जान के लिए भी गंभीर जोखिम बन चुका है। यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो ऐसे हादसे भविष्य में और बढ़ सकते हैं।